📌 गांडीव लाइव डेस्क:
सिमडेगा जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। वर्ष 1915 में ब्रिटिश काल में बने पूर्व अनुमंडल कार्यालय, जिसे अब हेरिटेज सेंटर और म्यूजियम के रूप में विकसित किया गया है, का उद्घाटन हाल ही में किया गया। इस अवसर पर तीनों विधायकों, पीडीजे सिमडेगा और डीसी कंचन सिंह ने दीप जलाकर इसकी शुरुआत की।
यह इमारत केवल प्रशासनिक इतिहास का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण गवाह भी रही है। 15 अगस्त 1947 की सुबह, एसडीओ एसके चक्रवर्ती ने यहीं तिरंगा फहराया था, जिससे सिमडेगा के नागरिकों ने आजादी का असली अर्थ समझा। इसके बाद, 2001 में इस भवन में जिला उपायुक्त कार्यालय भी खोला गया था।
म्यूजियम की मुख्य विशेषताएँ
प्रशासनिक इतिहास सेक्शन 🏛️:
इस भाग में प्रथम विश्व युद्ध में सिमडेगा के जवानों के योगदान से जुड़ी दस्तावेज, 1931 की जनगणना के रिकॉर्ड, लाह उत्पादन सामग्री और शिक्षा के विकास से संबंधित अभिलेख प्रदर्शित किए जाएंगे।
सांस्कृतिक विरासत सेक्शन 🎨:
यहां पर पारंपरिक वस्त्र, कृषि और शिकार से जुड़ी सामग्री, पर्व-त्योहारों की वस्तुएं और आदिवासी जीवनशैली से संबंधित वस्तुएं प्रदर्शित होंगी।
आजीविका केंद्र 💼:
इस केंद्र में पलाश और सुदिनियर शॉप खोले जाएंगे, जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय उत्पादों को बेचकर अपनी आजीविका कमाएंगी।
इसके साथ ही, युवाओं के लिए एक लाइब्रेरी भी शुरू की गई है। डीसी कंचन सिंह ने भावुक होकर कहा कि यह केंद्र अतीत और भविष्य का एक पुल है, जो लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि महिलाओं को संचालन का जिम्मा सौंपकर उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।
उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने इस भवन के झारखंड आंदोलन और प्रथम विश्व युद्ध जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं के साक्षी होने की जानकारी दी। विधायकों भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोंनगाड़ी और सुदीप गुड़िया ने इसे जिले के लिए गर्व का दिन बताया।
उद्घाटन के साथ ही, 6 करोड़ 20 लाख से अधिक की 34 विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, अधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित थे। यह हेरिटेज सेंटर अब सिमडेगा के निवासियों और पर्यटन के लिए एक प्रेरणादायक केंद्र बनेगा, जो नई पीढ़ी को अपने अतीत से जोड़ने में मदद करेगा।