मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका
डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण झटका लगा है। शीर्ष कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ दायर की गई FIR पर रोक लगा दी है। दरअसल, ममता बनर्जी ने I-PAC कार्यालय में छापेमारी के बाद ED के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वे एजेंसी के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
ED की छापेमारी पर ममता बनर्जी का विरोध
ED द्वारा I-PAC के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद कोलकाता में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और उन्होंने दस्तावेजों को गाड़ियों में डालने की कोशिश की। कोर्ट ने इस सिलसिले में CCTV फुटेज और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की बेंच ने ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पुलिस को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी, और कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है।
ममता बनर्जी पर सबूतों की चोरी का आरोप
ED ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 8 जनवरी 2026 को हुई छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां मौजूद थीं और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। ममता के साथ बंगाल के पुलिस महानिदेशक भी मौजूद थे, जिन्होंने ED अधिकारियों के मोबाइल फोन छीन लिए। यह सब देखकर ED का मनोबल गिरा है और उनकी कार्यवाही में बाधा आई है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच का गुस्सा
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हाईकोर्ट के रवैये पर नाखुशी जताई। वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पिछले सुनवाई में यह प्रश्न उठा था कि हाईकोर्ट न्याय देने में असमर्थ है। इस पर बेंच ने सिब्बल को चेतावनी दी और कहा कि कोर्ट का निर्णय स्वतंत्र होगा।
ED की जांच में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह याचिका ED और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की जांच के संदर्भ में गंभीर मुद्दे उठाती है। कोर्ट ने कहा कि कानून का राज बनाए रखना महत्वपूर्ण है और किसी राज्य की सुरक्षा के नाम पर अपराधियों को संरक्षित नहीं किया जाना चाहिए।
बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी भी एजेंसी को चुनावी कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, लेकिन गंभीर अपराध की जांच के दौरान कार्रवाई को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। मामले में केंद्रीय एजेंसी के कार्यों को रोकने के प्रयासों को गंभीरता से लिया जाएगा।