बंगाल में SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, झारखंड-ओडिशा के न्यायिक अधिकारी शामिल होंगे

कलकत्ता हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

कलकत्ता हाई कोर्ट की एक बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं, ने एक महत्वपूर्ण पत्र पर ध्यान दिया है। इस पत्र में बताया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में तैनात 250 जिला जजों को दावों और आपत्तियों का निपटारा करने में लगभग 80 दिन का समय लगेगा।

चुनाव आयोग के खर्च का निर्देश

इस फैसले ने चुनाव आयोग (EC) को झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के लिए खर्च वहन करने का निर्देश दिया है। उच्चतम न्यायालय ने EC को 28 फरवरी को अंतिम निर्वाचन सूची प्रकाशित करने की अनुमति भी दी, और यह स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया के आगे बढ़ने पर चुनाव आयोग एक सप्लीमेंट्री सूची भी जारी कर सकता है। इस संदर्भ में, आर्टिकल 142 के तहत पूर्ण शक्तियों का उपयोग करते हुए, न्यायालय ने वोटरों को सप्लीमेंट्री निर्वाचन सूची में शामिल किया है ताकि वे 28 फरवरी को चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई अंतिम सूची का हिस्सा बन सकें।

वोटर सूची में विसंगतियां

2002 की वोटर सूची से संबंधित विभिन्न विसंगतियों में माता-पिता के नामों में भिन्नता और वोटर व उसके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर शामिल है, जो 15 साल से कम या 50 साल से अधिक हो सकता है। 20 फरवरी को, पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी खींचतान से निराश होकर, उच्चतम न्यायालय ने राज्य में विवादास्पद SIR प्रक्रिया में चुनाव आयोग की सहायता के लिए मौजूदा और पूर्व जिला जजों को तैनात करने का एक ‘असाधारण’ निर्देश दिया है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल में ‘लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई’ तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच चल रहे ‘दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप’ और “भरोसे की कमी” पर खेद जताया। इसके साथ ही, SIR प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नए निर्देश भी जारी किए गए हैं।

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