झामुमो ने पेट्रोलियम नीति पर उठाए सवाल
रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने केंद्र सरकार की पेट्रोलियम नीति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने हरमू स्थित प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों से संबंधित नीतियों के कारण स्थिति लगातार खराब होती जा रही है, लेकिन सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोलियम केवल वाहनों के ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उद्योगों और उर्वरक उत्पादन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा, सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाला कोलतार भी पेट्रोलियम से ही बनता है। इसके चलते कीमतों में वृद्धि का प्रभाव आम लोगों और उद्योग जगत दोनों पर पड़ रहा है।
एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता और उसकी कीमतें
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि वर्तमान में स्थिति यह है कि एलपीजी सिलेंडर न तो आसानी से मिल पा रहा है और न ही इसकी कीमतें आम जनता की पहुंच में रह गई हैं। उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि पहले लोग कोयले के चूल्हे पर खाना बनाते थे और तब कोयला आसानी से उपलब्ध था, लेकिन अब इस संसाधन पर भी दबाव बढ़ गया है।
बड़े कॉरपोरेट घरानों का नियंत्रण
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि कोयला संसाधनों का नियंत्रण बड़े कॉरपोरेट घरानों को सौंप दिया गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं की समस्याएं बढ़ गई हैं। उन्होंने वैश्विक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार और संसाधनों के उपयोग के मामले में दोहरे मानदंड अपनाए जा रहे हैं। झामुमो का कहना है कि झारखंड जैसे राज्यों के पास पेट्रोलियम या कोयले की कीमत निर्धारित करने का अधिकार नहीं है, जिससे स्थानीय स्तर पर राहत प्रदान करना संभव नहीं हो पाता।
सरकार से राहत की मांग
झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह एलपीजी सिलेंडर और अन्य ऊर्जा संसाधनों की नीतियों को स्पष्ट करे और आम जनता को राहत देने के ठोस कदम उठाए। इसके अतिरिक्त, बढ़ती तेल कीमतों के फैसले को वापस लेने की भी मांग की गई है।