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  • भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का आज दिल्ली दौरा, पार्टी मुख्यालय में स्वागत होगा

    भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का आज दिल्ली दौरा, पार्टी मुख्यालय में स्वागत होगा

    नितिन नबीन की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति

    नई दिल्ली. बिहार के कैबिनेट मंत्री नितिन नबीन प्रसाद सिन्हा को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया है। इस घोषणा के बाद, पार्टी ने उनके दिल्ली दौरे की योजना भी बना ली है। नबीन, दिल्ली पहुंचने से पहले पटना के महावीर मंदिर में पूजा करेंगे और फिर अपने दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए स्व. नबीन किशोर सिन्हा पार्क जाएंगे। उनका दिल्ली पहुंचने का समय सुबह 10 बजे का है, जहां उन्हें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा के सभी सांसदों द्वारा स्वागत किया जाएगा।

    राजनीतिक यात्रा और चुनावी सफलताएं

    नितिन नबीन की इस नई भूमिका सत्ताधारी पार्टी के भीतर एक बड़े संगठनात्मक परिवर्तन का हिस्सा है। उनका राजनीतिक सफर 1980 में पटना में जन्म लेकर आरएसएस की छात्र शाखा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ। नबीन 2006 में पटना पश्चिम सीट से चुनाव जीतकर पहली बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए। वह बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार जीत चुके हैं, जो भाजपा की मजबूत शहरी सीटों में से एक मानी जाती है। हाल में बिहार विधानसभा चुनाव में, उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की रेखा कुमारी को 51,000 से अधिक वोटों से हराया।

    भाजपा की चुनावी जीत और प्रधानमंत्री की बधाई

    नबीन की नियुक्ति बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जीत के बाद की गई है, जहां भाजपा ने 89 सीटें जीतीं। जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नबीन को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी है। उन्होंने अपने एक पोस्ट में कहा है कि नितिन नबीन एक मेहनती और युवा नेता हैं, जिनका संगठन में काफी अनुभव है। उनका कार्यकाल विधायक और मंत्री के रूप में प्रभावशाली था और उन्होंने जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में अपनी मेहनत दिखाई है।

    सাংठनेिक अनुभव और पृष्ठभूमि

    नितिन नबीन वर्तमान में नीतीश कुमार की एनडीए सरकार में सड़क निर्माण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। 45 वर्ष की आयु में, वह भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने वाले सबसे युवा नेता हैं। उनके पास लगभग 20 वर्ष का संगठनात्मक अनुभव है और वह पार्टी में विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे हैं। उनके पिता नबीन किशोर सिन्हा जनसंघ के नेता रहे हैं और उन्होंने भी बिहार में विधायक के रूप में कार्य किया। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ चुनाव अभियान के दौरान नबीन का संगठनात्मक कौशल शीर्ष नेतृत्व की नजर में आया है।

  • राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर उठाए गंभीर प्रश्न

    राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और बीजेपी पर उठाए गंभीर प्रश्न

    राहुल गांधी ने रामलीला मैदान में कांग्रेस रैली को संबोधित किया

    नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस की एक विशाल रैली में राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ और एसआईआर के खिलाफ अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने इस मौके पर भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी का कहना था कि चुनाव आयोग भाजपा के समर्थन में काम कर रहा है और जब उन्होंने सवाल उठाए, तो चुनाव आयोग ने कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया।

    मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया

    रैली में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा, “मुझे बताया गया कि अंडमान निकोबार में मोहन भागवत ने एक विवादास्पद बयान दिया है। गांधीजी के अनुसार सत्य सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन भागवत का कहना है कि शक्ति से बड़ा कुछ नहीं है। उनकी यह सोच आरएसएस की विचारधारा को दर्शाती है। हमारा धर्म यह सिखाता है कि सत्य सबसे महत्वपूर्ण है, जबकि भागवत सत्ताधारियों के पक्ष में खड़े हैं।”

    भाजपा पर आरोप और चुनावी अनियमितताएं

    राहुल गांधी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वे चुनावी प्रक्रिया में धांधली कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय भाजपा लोगों को पैसे देकर वोट खरीदती है और चुनाव आयोग उनके साथ मिलकर काम करता है। वह यह भी बोले कि प्रधानमंत्री मोदी ने चुनाव आयोग के लिए कानूनों में बदलाव किए हैं, जिससे आयोग की कार्रवाई पर कोई रोक नहीं लगाई जा सकती।

    सत्य की जीत का भरोसा

    राहुल गांधी ने आगे कहा, “हमें सत्य के रास्ते पर चलते रहना है। मुझे यकीन है कि सत्य की जीत होगी और हम मोदी और उनकी सरकार को हटा देंगे। अगर मोदी ने वोट चोरी नहीं की होती, तो उन्हें सत्ता से बेदखल करना आसान होता।”

    प्रियंका गांधी की चुनौती

    रैली में प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा, “आज संसद में केवल 1-2 बहस होती हैं। जब हमने महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने की कोशिश की, तो भाजपा घबरा जाती है। मैं उन्हें चुनौती देती हूं कि वो एक सही चुनाव लड़ें, ताकि सभी को यह स्पष्ट हो सके कि वे नहीं जीत पाएंगे।”

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का समर्थन

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राहुल गांधी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अगर हम राहुल गांधी के विचारों को आगे बढ़ाने में सहयोग नहीं करेंगें, तो यह हमारे और देश के लिए नुकसानदेह होगा। खरगे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की विचारधारा ही देश के हित में होगी।

  • बंगाल में बाबरी मस्जिद मामले पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ‘भाजपा का महत्वपूर्ण मुद्दा है’

    बंगाल में बाबरी मस्जिद मामले पर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, ‘भाजपा का महत्वपूर्ण मुद्दा है’

    शत्रुघ्न सिन्हा का भाजपा पर धर्म का उपयोग करने का आरोप

    नई दिल्ली। त्रिणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर धर्म का सहारा लेकर मतदाताओं को भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व और लोकप्रियता के लिए प्रशंसा के शब्द भी कहे। यह बयान तब आया जब भाजपा ने मुख्यमंत्री बनर्जी पर निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर को मुसलमानों के ध्रुवीकरण की अनुमति देने का आरोप लगाया। हुमायूं ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए नींव रखी। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सिन्हा ने कहा, ‘मैं सभी धर्मों के समभाव में विश्वास करता हूं। आसनसोल एक भाईचारे का शहर है, जहां हर राज्य के लोग एक साथ रहते हैं।’

    ममता बनर्जी की लोकप्रियता पर शत्रुघ्न का जोर

    शत्रुघ्न सिन्हा ने आगे कहा, ‘भाजपा के पास हितकारी मुद्दे हैं, जिन्हें वे धर्म के नाम पर उठाकर लोगों को भड़का सकते हैं। ममता बनर्जी एक बेहद लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता हैं। भाजपा को ममता बनर्जी को हराने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी है।’ उत्तर 24 परगना के TMC विधायक निर्मल घोष ने भी इसी चर्चा में कहा कि मुख्यमंत्री सभी समुदायों के लिए समान दृष्टिकोण रखती हैं और बांग्ला भूमि की हर धर्म के प्रति उनकी निष्ठा है। उन्होंने कहा, ‘लोग ममता बनर्जी के साथ हैं, आप इसे 2026 में देखेंगे।’

    बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए नींव का शुभारंभ

    निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण के लिए नींव रखी। उन्होंने सभा में कहा कि वह संवैधानिक अधिकारों का पालन कर रहे हैं और कुछ भी गैरकानूनी नहीं कर रहे हैं। कबीर ने इस मुद्दे पर स्पष्ट किया, ‘जैसे कोई मंदिर या चर्च बना सकता है, वैसे ही मैं भी मस्जिद बना सकता हूं। कहा जा रहा है कि हम बाबरी मस्जिद नहीं बना सकते; लेकिन यह कहीं भी नहीं लिखा है।’ कबीर ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला हिंदुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया था, और संविधान मस्जिद बनाने की अनुमति देता है।

  • कंगना रनौत ने राहुल गांधी को भाजपा में शामिल होकर नेतृत्व की सलाह दी

    कंगना रनौत ने राहुल गांधी को भाजपा में शामिल होकर नेतृत्व की सलाह दी

    राहुल गांधी का सरकार पर आरोप

    नई दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार विदेशी मेहमानों को विपक्ष के नेता से नहीं मिलने देती। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यह परंपरा रही थी कि विदेश से आने वाले अतिथि विपक्ष के नेता से मिलते थे।

    कंगना रनौत की प्रतिक्रिया

    भाजपा सांसद कंगना रनौत ने राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए कहा कि उनके देश के प्रति भावनाएँ संदेहास्पद हैं। कंगना ने सुझाव दिया कि राहुल को भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए, यह कहते हुए कि वह भी अटल बिहारी वाजपेयी की तरह बन सकते हैं। उन्होंने राहुल की तुलना अटल जी से करते हुए यह कहा कि अगर वह भाजपा में शामिल होते हैं, तो उन्हें बेहतर पहचान मिलेगी।

    राहुल गांधी का बयान और पूर्व परंपराएं

    राहुल गांधी ने संसद भवन में संवाददाताओं से कहा कि विदेशी मेहमानों के स्वागत की परंपरा अब समाप्त हो गई है। उनका कहना है कि विपक्ष के नेता का एक अलग दृष्टिकोण होता है और उन्हें विदेशी अधिकारियों से मिलने की अनुमति मिलनी चाहिए। लेकिन वर्तमान में मोदी सरकार और विदेश मंत्रालय इस परंपरा का पालन नहीं कर रहे हैं।

    पुतिन की भारत यात्रा पर टिप्पणी

    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के संबंध में बात करते हुए राहुल ने कहा कि यह परंपरा रही है कि विदेश से आने वाला अतिथि विपक्ष के नेता से भी मिलता है। उन्होंने बताया कि विदेश यात्रा के दौरान भी सरकार उन्हें मिलने की अनुमति नहीं देती, जिससे आलोचना हो रही है।

    शशि थरूर की प्रतिक्रिया

    कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने राहुल गांधी की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विदेशी अतिथियों से मिलने की इजाजत देना महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ऐसा होना आवश्यक है।

  • क्या AAP के प्रमुख नेताओं ने MCD उपचुनावों में भाजपा को आसानी दी है

    क्या AAP के प्रमुख नेताओं ने MCD उपचुनावों में भाजपा को आसानी दी है

    दिल्ली नगर निगम के 12 वार्डों में उपचुनाव: त्रिकोणीय लड़ाई

    नई दिल्ली: दिल्ली के नगर निगम के 12 वार्ड क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहे हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच टकराव हो रहा है। 27 साल बाद सत्ता में लौटी भाजपा ने इस उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकी है, और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद प्रचार में जुटी हुई हैं।

    आप के नेतृत्व का ध्यान केंद्रित

    वहीं, आम आदमी पार्टी के बड़े नेता इस उपचुनाव से दूरी बनाए हुए हैं। पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, आतिशी, संजय सिंह और राघव चड्ढा अभी तक चुनावी प्रचार में नजर नहीं आए हैं। प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और उनकी टीम चुनाव का मोर्चा संभाल रही है, परंतु शीर्ष नेतृत्व की गैर-मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    वार्डों की स्थिति

    उपचुनाव होने वाले 12 वार्डों में से 9 सीटें भाजपा के पास थीं, जबकि 3 सीटें आम आदमी पार्टी ने 2022 के MCD चुनाव में जीती थीं। ये सीटें अब खाली हो गई हैं क्योंकि तीन पार्षद 2025 के विधानसभा चुनाव में विधायक बन चुके हैं।

    प्रचार का स्वरूप

    चांदनी महल, चांदनी चौक, और दिचाऊं कलां जैसे वार्डों में प्रचार का दायरा स्थानीय नेताओं के पास है, जबकि पार्टी के बड़े नेता मैदान में नहीं हैं। उपचुनाव को लेकर आप की रणनीति पर पत्रकार नवनीत शरण का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व के इस दूरी बनाए रखने से पार्टी को नुकसान हो सकता है।

    बड़े नेताओं की अनुपस्थिति

    अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे नेता चुनाव प्रचार में न भाग लेकर पंजाब पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जबकि संजय सिंह उत्तर प्रदेश में ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ यात्रा निकाल रहे हैं।

    सामाजिक मीडिया पर सक्रियता का अभाव

    दिल्ली में हो रहे उपचुनाव के संबंध में शीर्ष नेताओं की सोशल मीडिया पर भी कोई सक्रियता नहीं दिखाई दे रही है। पार्टी के अन्य नेता स्थानीय स्तर पर प्रचार कर रहे हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व का समर्थन न होना आश्चर्यजनक है।

    भविष्य की चुनौती

    दिल्ली की राजनीति पर नज़र रखने वाले पत्रकार आनंद राणा के अनुसार, 27 साल बाद आई भाजपा सरकार की परीक्षा है। अगर आम आदमी पार्टी उपचुनाव न जीत पाई, तो इसका सीधा असर केजरीवाल की राजनीति पर पड़ेगा।

    केजरीवाल की पंजाब पर ध्यान

    अंततः यह स्पष्ट होता है कि ऐतिहासिक महत्व के इस उपचुनाव में भाजपा और आप दोनों के लिए मौका और चुनौती है। जबकि पार्टी नेतृत्व का ध्यान पंजाब पर केंद्रित है, दिल्ली में उपचुनाव के नतीजे उनके राजनीतिक भविष्य को तय कर सकते हैं।

  • बीजेपी ने लालाू परिवार विवाद पर तंज कस्ते हुए कहा, बहुएं पीटी गईं

    बीजेपी ने लालाू परिवार विवाद पर तंज कस्ते हुए कहा, बहुएं पीटी गईं

    बिहार की राजनीति में लालू परिवार का विवाद

    नई दिल्ली: लालू प्रसाद यादव के परिवार के भीतर की मान्यताओं में उथल-पुथल ने बिहार की राजनीति में गरमी पैदा कर दी है। रोहिणी आचार्य के राजनीति से दूरी बनाने और पारिवारिक संबंधों में कटौती के फैसले से राजनीतिक विमर्श में नयी बहस जन्म ले चुकी है। जैसे-जैसे ये मुद्दा गंभीर होता जा रहा है, विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं।

    भाजपा का तीखा प्रहार

    चिराग पासवान की प्रतिक्रिया

    एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन रोहिणी भी मेरे परिवार की सदस्य हैं। जब किसी परिवार में तनाव होता है, तो उसका दुःख समझ में आता है। मैं आशा करता हूँ कि यह सब जल्द ही ठीक हो जाएगा।” यह बयान पारिवारिक संबंधों की पेचीदगियों पर रोशनी डालता है।

    जेडीयू की टिप्पणी

    जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने इस विवाद को पारिवारिक मुद्दा मानते हुए कहा, “यह उनका व्यक्तिगत मामला है। इस पर राजनीतिक टिपण्णी करना उचित नहीं है। इतने बड़े परिवार में ऐसी समस्याएँ होना दुखद है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह आरजेडी के लिए भी कठिनाई का विषय है।

    साधु यादव का पक्ष

    राबड़ी देवी के भाई और रोहिणी के चाचा साधु यादव ने स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “रोहिणी परिवार की बड़ी बेटी हैं। यदि उनके साथ गलत व्यवहार किया गया है, तो यह अस्वीकृत किया जाना चाहिए। उन्हें अपने घरेलू सदस्यों पर आपत्ति जताने का पूरा अधिकार है।” इस टिप्पणी ने विवाद का एक नया मोड़ दिया है।

    लालू परिवार के मतभेद

    रोहिणी आचार्य की नाराजगी और इसके चारों ओर उभरे बयानों ने लालू परिवार के अंदर के मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है। राजनीतिक हलकों में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि यह विवाद आरजेडी और उसके नेतृत्व की छवि पर क्या प्रभाव डालेगा।

  • अमित शाह ने कहा, बिहार में बीजेपी बनाएगी इन दो नेताओं को प्रमुख

    अमित शाह ने कहा, बिहार में बीजेपी बनाएगी इन दो नेताओं को प्रमुख

    भाजपा की चुनावी रणनीति: अमित शाह का बिहार दौरा

    पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार भाजपा के दो प्रमुख नेताओं के लिए चुनाव प्रचार किया। उन्होंने इन नेताओं के लिए जनता से प्रचंड बहुमत से समर्थन मांगते हुए वादा किया कि वे उन्हें ‘बड़ा आदमी’ बना देंगे। इनमें से एक नेता बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, और दूसरे नेता सीतामढ़ी से चुनाव लड़ रहे सुनील कुमार पिंटू हैं।

    सम्राट चौधरी के लिए मतदाता से अपील

    तारापुर क्षेत्र में अपने चुनावी प्रचार के दौरान, अमित शाह ने मुंगेर जिले में उपस्थित लोगों से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा, “आप भरोसा रखिए। सम्राट चौधरी को प्रचंड बहुमत से जिताइए। मोदी जी सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाएं।” इसके साथ ही, उन्होंने मुंगेर में विकास कार्यों का हवाला देते हुए डबल इंजन सरकार के लाभों की जानकारी भी साझा की।

    सीतामढ़ी में सुनील कुमार पिंटू का समर्थन

    सीतामढ़ी में चुनावी प्रचार करने के दौरान अमित शाह ने सुनील कुमार पिंटू को अपना मित्र बताया। उन्होंने जनता से कहा, “आप सुनील कुमार पिंटू को प्रचंड बहुमत से जिताएं। हम उसे बड़ा आदमी बनाएंगे।” इस प्रकार, उन्होंने पिंटू के पक्ष में लोगों को उत्साहित किया।

    चुनावी परिणाम का विश्लेषण

    तारापुर में, सम्राट चौधरी ने आरजेडी के अरुण कुमार को 45843 मतों से हराते हुए भाजपा को 122480 वोट दिलाए। वहीं, अरुण कुमार को 76637 वोट मिले। दूसरी ओर, सीतामढ़ी की विधानसभा में सुनील कुमार पिंटू ने 104226 वोट प्राप्त किए और आरजेडी के प्रत्याशी सुनील कुमार को 5562 मत से हराया।

  • बिहार में एनडीए की शानदार जीत पर रक्षा राज्य मंत्री का आभार

    बिहार में एनडीए की शानदार जीत पर रक्षा राज्य मंत्री का आभार

    रांची: बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बेजोड़ जीत पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सफलता विकास, सुशासन और डबल इंजन सरकार पर जनता के विश्वास की जीत है।

    संजय सेठ ने कहा, “यह चुनाव परिणाम निश्चित रूप से हमें यह संदेश देता है कि जनता ने हमारी नीतियों और योजनाओं को सराहा है। यह जीत उन लोगों की भी है जो विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत हैं।”

    विकास और सुशासन की ओर आगे बढ़ते कदम 🌟

    राज्य मंत्री ने आगे कहा कि एनडीए की सरकार प्रदेश में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा, “हमारे प्रयासों का मुख्य उद्देश्य बिहार को एक मजबूत और समृद्ध राज्य बनाना है। इस जीत ने हमारी जिम्मेदारियों को और बढ़ा दिया है।”

    सेठ ने सभी जिलों में विकास कार्यों की गति को तेज करने का आश्वासन दिया और कहा कि किसानों, बेरोजगारों और युवाओं की भलाई के लिए अनेक योजनाएँ लाई जाएँगी।

    इस अवसर पर उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि वे विकास की इस यात्रा में साथ दें और अपने सुझाव साझा करें ताकि बिहार को आगे बढ़ाया जा सके।

  • BJP ने तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी को ‘कांग्रेस का मतलब मुसलमान’ बयान पर जिन्ना का अनुयायी बताया

    BJP ने तेलंगाना CM रेवंत रेड्डी को ‘कांग्रेस का मतलब मुसलमान’ बयान पर जिन्ना का अनुयायी बताया

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के हालिया बयान पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विरोध जताया है। रेड्डी ने कहा कि “कांग्रेस का मतलब मुसलमान है,” जिससे भाजपा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी जिन्नावादी मानसिकता को स्वीकार कर चुके हैं। भाजपा का कहना है कि यह बयान शरिया को भारतीय संविधान से ऊपर रखने का संकेत है।

    उपचुनाव में विरोध का कारण

    जुबीली हिल्स विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में पार्टी द्वारा भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान अजहरुद्दीन को मंत्री पद देने के निर्णय का भाजपा ने विरोध किया। रेड्डी ने एक रैली में कहा, “कांग्रेस हमेशा अल्पसंख्यकों को महत्व देती रही है।” इसी संदर्भ में भाजपा ने उन्हें जवाब दिया कि यह कांग्रेस का असली चेहरा है।

    भाजपा का हमला

    भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने रेड्डी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “रेवंत रेड्डी खुलकर उन बातों को स्वीकार कर रहे हैं, जो हम लंबे समय से कहते आ रहे हैं। यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नहीं, बल्कि जिन्नावादी कांग्रेस है।”

    पूनावाला ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का यह रवैया दिखाता है कि वे मुसलमानों और उनके वोट बैंक को संविधान से ऊपर रखते हैं। उन्होंने कहा कि इसी मानसिकता के कारण कांग्रेस ने ओबीसी, एससी और एसटी के आरक्षण में कटौती की है, जिससे उनके पसंदीदा वोट बैंक को लाभ पहुंचाया जा सके।

    भविष्य की संभावनाएं

    यह बयान और उसके बाद का विवाद आने वाले उपचुनाव में दोनों पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। भाजपा को उम्मीद है कि इसका चुनावी फायदा मिलेगा, जबकि कांग्रेस को अपने समर्थन को बनाए रखने के लिए सशक्त रणनीतियों की आवश्यकता होगी।

  • एनडीए ने सीट बंटवारे पर सहमति बनाई, चिराग पासवान ने 25 सीटों पर सहमति जताई, भाजपा ने आश्वासन दिया।

    एनडीए ने सीट बंटवारे पर सहमति बनाई, चिराग पासवान ने 25 सीटों पर सहमति जताई, भाजपा ने आश्वासन दिया।

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    एनडीए में सीट बंटवारे पर सहमति का नया संकेत

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एनडीए (NDA) में सीट बंटवारे को लेकर गंभीर बातचीत चल रही है। हाल के दिनों में चिराग पासवान की तत्परता के साथ 40 विधानसभा सीटों पर स्थिति स्पष्ट करने के प्रयासों की चर्चा रही है। सूत्रों के अनुसार, वह अब 25 सीटों पर सहमति देने के लिए तैयार हो सकते हैं, जिसके बदले उन्हें भाजपा से केंद्र एवं बिहार सरकार में अधिक महत्वपूर्ण भूमिकाएं मिलने का आश्वासन मिला है। इसके अतिरिक्त, उनकी पार्टी को एक राज्यसभा सीट की पेशकश भी की जा सकती है।

    चिराग पासवान का बयान: सबकुछ ठीक है!

    चिराग पासवान ने हाल ही में कहा है कि एनडीए में सभी चीजें सही दिशा में जा रही हैं और जल्दी ही सीट बंटवारे की घोषणा होने की उम्मीद है। हालांकि, आधिकारिक रूप से किसी भी पक्ष की तरफ से कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन यह स्पष्ट हो रहा है कि चिराग 25 सीटों पर सहमत होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। गुरुवार को भाजपा और उनकी पार्टी के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें नित्यानंद राय और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उपस्थित थे। चिराग पासवान ने कहा कि सभी चर्चा सकारात्मक हैं और बातें अब फाइनल स्टेज में हैं।

    चुनाव की तैयारियां तेज

    बिहार में 6 और 11 नवंबर को मतदान होना है, और भाजपा चाहती है कि उसके उम्मीदवारों को कम से कम 20 दिनों का समय चुनाव प्रचार के लिए मिले। इसलिए गठबंधन में जल्दी से सीट बंटवारे के मुद्दे को सुलझाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। भाजपा जीतनराम मांझी और अन्य सहयोगी दलों के साथ तालमेल बैठाने में लगी हुई है।

    चिराग का लक्ष्य

    चिराग पासवान ने यह भी उल्लेख किया है कि उनका लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन शानदार रहा है, और वे अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, उनके मुख्यमंत्री बनने की आकांक्षा भी है, जो चुनावी रणनीति को और दिलचस्प बनाती है।

    इस प्रकार, एनडीए में सीट बंटवारे की स्थिति ने बिहार चुनाव के संदर्भ में एक नया मोड़ ले लिया है। अब देखना होगा कि आगे की रणनीतियों में क्या बदलाव होते हैं।

  • UP: योगी सरकार का ‘जातिवाद विरोधी’ महत्वपूर्ण निर्णय, BJP सहयोगियों में असमंजस

    UP: योगी सरकार का ‘जातिवाद विरोधी’ महत्वपूर्ण निर्णय, BJP सहयोगियों में असमंजस

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    उत्तर प्रदेश सरकार का जातिवाद के खिलाफ महत्वपूर्ण निर्णय

    उत्तर प्रदेश सरकार ने जाति के आधार पर राजनीतिक रैलियों, वाहनों पर जाति नाम लिखने, और पुलिस रिकॉर्ड में जाति के उल्लेख पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। इस कवायद ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी दलों को एक नई चुनौती पेश की है।

    जातिवाद पर अंकुश

    रविवार की रात को जारी किए गए आदेश ने स्पष्ट किया कि जातिवाद के खिलाफ यह कदम उठाया गया है। इस बात की जांच की जा रही है कि क्या इस निर्णय का प्रभाव आगामी चुनावों पर पड़ेगा या नहीं। भाजपाई सहयोगी दल अब इस आदेश को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि इससे उनकी राजनीतिक रणनीतियों में बदलाव आ सकते हैं।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया

    इस प्रतिबंध के बारे में विभिन्न राजनीतिक दलों ने mixed प्रतिक्रियाएँ दी हैं। कुछ नेताओं ने इसे सकारात्मक कदम बताया है, जबकि अन्य का मानना है कि यह निर्णय भाजपा और उसके सहयोगियों के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह निर्णय वास्तव में जातिवाद को खत्म करने में सफल होता है या नहीं।

    अगले कदम क्या होंगे?

    राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि यदि यह निर्णय सही तरीके से लागू होता है, तो यह उत्तर प्रदेश में जातिवाद की प्रथा के खात्मे में सहायक हो सकता है। सरकार की ओर से आगामी योजनाओं और नीतियों पर भी नज़र रखी जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जातिगत भेदभाव को समाप्त किया जा सके।

    इस नए निर्णय से यूपी की राजनीतिक समीकरणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन आ सकते हैं, जिससे आने वाले विधानसभा चुनावों के परिदृश्य में बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

  • आजम खान की रिहाई से यूपी की राजनीति पर पड़ेगा असर; सपा और भाजपा दोनों को मिलेगा लाभ

    आजम खान की रिहाई से यूपी की राजनीति पर पड़ेगा असर; सपा और भाजपा दोनों को मिलेगा लाभ

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    आज़म खां की रिहाई: उत्तर प्रदेश की सियासत पर गहरा असर 🗳️

    लखनऊ में आज़म खां की जेल से रिहाई ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है। सवाल यह है कि उनकी वापसी से समाजवादी पार्टी (सपा) को किस तरह लाभ होगा, खासकर मुस्लिम मतदाताओं के संदर्भ में। सपा इस अवसर का इस्तेमाल करके मुस्लिम समुदाय में संभावित मत विभाजन को रोकने का प्रयास करेगी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उनके बयानों का उपयोग हिन्दू मतदाताओं के ध्रुवीकरण के लिए कर सकती है।

    मुस्लिम मतों का बिखराव रोकने में सपा की भूमिका 🤝

    आज़म खां, जो अब 77 वर्ष के हो चुके हैं, ने अपने समर्थकों के बीच हमेशा एक प्रभावशाली स्थिति बनाए रखी है। उनके जेल से बाहर आने के बाद रामपुर और अन्य जिलों में मुस्लिम युवाओं के बीच उनके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 2009 में जब आज़म ने सपा छोड़ दिया था, तो पार्टी को इसका भारी नुकसान हुआ था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे सपा की राजनीति का एक अहम हिस्सा रहे हैं।

    सावधानी से उठाने होंगे कदम ⚖️

    2024 के लोकसभा चुनाव में मुस्लिम मतों का रुख कांग्रेस की ओर जाते हुए देखा गया था। ऐसे में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में, भले ही सपा सीधे तौर पर आज़म का इस्तेमाल न भी करे, लेकिन उनके अस्तित्व को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आज़म की रिहाई के बाद उनके तीखे बयानों में कोई कमी नहीं आई है, और उनकी बयानबाजी यह संकेत देती है कि सपा को उनके संदर्भ में सावधानी बरतनी पड़ेगी।

    भाजपा की रणनीति: नफरत से ध्रुवीकरण का प्रयास ⚡

    भाजपा ने आज़म खां की बयानों को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है। जैसे कि भारत माता के संदर्भ में दिया गया उनका विवादास्पद बयान। अगर भविष्य में धार्मिक ध्रुवीकरण की स्थिति बनती है, तो भाजपा इसका लाभ उठाने से चुक नहीं जाएगी।

    कांग्रेस के लिए चुनौती 🥊

    हालांकि, आज़म खां के किसी अन्य पार्टी में जाने का सवाल भी सामने आता है। कांग्रेस, जो पश्चिम उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतों के लिए संघर्ष कर रही है, को आज़म के आगे आने की कल्पना करना आसान नहीं होगा। अगले विधानसभा चुनावों में, जहां सपा और कांग्रेस एक साथ मिलकर लड़ने की तैयारी कर रही हैं, वहां इन राजनीतिक समीकरणों को समझना बेहद जरूरी होगा।

    निष्कर्ष

    आज़म खां की रिहाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। सपा, भाजपा और कांग्रेस सभी को यह समझना होगा कि इस स्थिति का सही मूल्यांकन कैसे किया जाए। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे आने वाले समय में यह सियासी समीकरण कैसे बदलते हैं।

  • राजधानी में भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज, पत्थरबाजी, पानी का बौछार

    राजधानी में भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज, पत्थरबाजी, पानी का बौछार

    रांची | भाजपा का सचिवालय घेराव जारी है. भाजपा नेता व कार्यकर्ता जगह-जगह डटे हुए हैं. लगातार कार्यकर्ता के उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्हें रोकने के लिए पुलिस आंसू गैस के गोले दाग रही है. साथ ही पानी के बौछार किये जे रहे हैं. कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन कुछ देर के लिए रूका था. लेकिन एक बार फिर से भाजपा कार्यकर्ता उग्र हो गए हैं. पुलिस ने बैरिकेडिंग के पास से कार्यकर्ताओं को खदेड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़े. वहीं पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया तो जवाब में भाजपा कार्यकर्ता पुलिस पर पत्थर फेंक रहे हैं.

    इससे पहले भाजपा नेता बैरिकेडिंग तोड़ सचिवालय परिसर में पहुंच गये, जहां उन्हें हिरासत में लिया गया. सासंद समीर उरांव, सुनील सिंह, विधायक बिरंची नारायण के अलावा अन्य नेताओं को हिरासत मेंं लिया गया है. साथ ही महिला मोर्चा की अध्यक्ष आरती कुजूर को भी हिरासत में लिया गया है. जबकि कई अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर जगन्नाथपुर थाना में रखा गया है.

    वहीं प्रशासन की ओर से कार्यकर्ताओं को तितर-बितर करने के लिए पानी की बैछार की गयी. तो जवाब में कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर पानी के बोतल फेंकने शुरू कर दिए. पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े तो कुछ देर के लिए कार्यकर्ता पीछे हटे. लेकिन फिर उत्पात करने लगे. वहीं स्थिती को देखते हुए प्रशासन ने लाठीचार्ज का आदेश दिया है. मौके पर धक्कम-धुक्की में एक मीडियाकर्मी का सिर फट गया है. जबकि इस उग्र प्रदर्शन में छह मीडियाकर्मियों के घायल होने की सूचना है. पहले जगह-जगह लगाए गये बैरिकेटिंग्स तोड़कर कार्यकर्ता आगे बढ़े और उसपर चढ़कर प्रदर्शन करने लगे. सबसे पहले  भाजपा सांसद जयंत सिन्हा ने बारिकेडिंग तोड़ा और कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़े थे.

  • BJP विधायक रश्मि वर्मा को मिली जान से मारने की मिली धमकी

    BJP विधायक रश्मि वर्मा को मिली जान से मारने की मिली धमकी

    पटना | बिहार के नरकटियागंज से बीजेपी की विधायक रश्मि वर्मा को अपराधियों ने जान से मारने की धमकी दी है. अपराधियों ने विधायक को तीन बार फोन करके धमकी दी है. अपराधियों ने कहा कि वह उन्हें स्कैन कर रहे हैं और अब पिस्टल नहीं AK-47 चलेगी.लालबत्ती में चलना भूल जाओगी. विधायक को धमकी देने वाला एक ऑडियो वायरल हो रहा है.

    वायरल ऑडियो में अपराधी कह रहा है- तुम विधायक हो ना बहुत बड़ी पोस्ट है तुम्हारी. ठीक से रहो नहीं तो लालबत्ती की गाड़ी में चलना भूल जाओगी. मेरी बातों को आलतू फालतू मत समझना.मेरा नाम एसपी दीपक रंजन से पूछ लेना. एक बात याद रखना अब पिस्टल नहीं चलेगा सीधा AK-47 और कार्बाइन चलेगी. अगर दम है तो रोक लेना और प्रशासन का जितना जोड़ लगाना है लगवा लेना.

    धमकी मिलने के बाद विधायक रश्मि वर्मा ने थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई है. इसके बाद विधायक की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. बता दें कि 11 फरवरी को कपड़ा व्यवसायी विजय चंद्र गोयल के बेटे किशन कुमार को गोली मारने के बाद कई व्यापारियों को धमकी वाले फोन कॉल आ चुके हैं.दरअसल बीजेपी विधायक कपड़ा व्यवसायी विजयचंद्र गोयल के बेटे किशन कुमार को गोली मारे जाने के बाद उन्हें देखने अस्पताल गई थी.जिसकी शिकायत बीजेपी विधायक ने एसपी डीआईजी से की थी. माना जा रहा है कि इस बात से ही नाराज अपराधी ने विधायक को फोन कर जान से मारने की धमकी दी है.

    बता दें कि पिछले साल भी रश्मि वर्मा ने अपनी जान को खतरा बताकर FIR दर्ज कराया था.उन्होंने नरकटियागंज के शिकारपुर थाने में मोतिहारी के अगरवा मोहल्ला निवासी संजय सारंगपुरी पर आरोप लगाया था कि वह उनकी हत्या कर सकते हैं. संजय सारंगपुरी विधायक के कार्यालय में ही काम करते थे. उन्होंने कहा था कि संजय के पास पिस्तौल है और हाल के दिनों में वह उनके घर के पास संदेहास्पद स्थिति में देखे गये हैं.विधायक ने आरोप लगाया था कि छवि बिगड़ने के उद्देश्य उसने जाली हस्ताक्षर कर पद और नाम का दुरूपयोग किया है.

  • तेजस्वी यादव ने कहा- बिहार पर कब्जा करना चाहती थी भाजपा, 3 सीटों पर सिमट जायेगी

    तेजस्वी यादव ने कहा- बिहार पर कब्जा करना चाहती थी भाजपा, 3 सीटों पर सिमट जायेगी

    पटना : बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर एक बार फिर निशाना साधा है. तेजस्वी ने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी बिहार में तीन सीटों पर सिमट कर रह जायेगी. उन्होंने कहा कि बीजेपी बिहार को अपने कब्जे में लेना चाहती थी, लेकिन जनता ने जवाब दे दिया है. यह सभी बाते तेजस्वी ने संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बोली है.

    तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की स्थिति खराब है. एक तरफ जहां सम्प्रदायिक शक्तियां कब्जा किये हुए हैं वहीं ये लोग सामाजिक न्याय नही चाहते हैं. और आरएसए के लोग सरकार चला रहे हैं.ये अंतिम पायदान पर बैठे लोगों को आगे आने देना नहीं चाहते है. जरूरत है सभी को एकजुट होकर एक साथ चलने की.

    तेजस्वी ने आगे कहा कि बहुरूपिया से सावधान रहने की जरूरत है. मीठा बोलकर, आपके वोटों को हथिया लेंगे. देश में अभी जिस जगह पर बीजेपी की सरकार नहीं है वहां छापेमारी करवा रही है. बीजेपी के लोग बिहार में कब्जा करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बिहार में अच्छे से मजा चखा दिया.बिहार में जब विकास हो रहा है तो बीजेपी के लोग छटपटा रहे हैं. काम हो रहा है तो कहते हैं कि जंगलराज है.जनता का सहयोग मिला तो बिहार में बीजेपी को 3 सीटों पर सिमटा देंगे. तेजस्वी ने कहा और बहाली होनी है सभी विभागों में समीक्षा कर जो वादा किया है. 10 लाख रोजगार देने का उसे पूरा करेंगे. सबलोग एकजुट रहिये बीजेपी और आरएसएस को हटाने का काम कीजिये.

  • तेजस्वी यादव ने बोला, BJP के अंदर 2024 का डर

    तेजस्वी यादव ने बोला, BJP के अंदर 2024 का डर

    पटना | बिहार की राजधानी पटना में डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने मीडिया से बात करते हुए केंद्र सरकार पर हमला बोला हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी के अंदर 2024 का डर है. तेजस्वी यादव से जब मीडिया ने उपेंद्र कुशवाहा को लेकर सवाल  किया तो उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मालिक जनता है. हमारी उपेंद्र कुशवाहा से कोई बैर नहीं है, हमने उनका स्वागत किया था सम्मान किया था. मेरी कोई बैर नहीं है लेकिन अब उनकी क्या राय है? सबकी अलग-अलग राय हो सकती है. उपेंद्र कुशवाहा अपनी राय को बोलते रहे. लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. मुझे यह बात पता है कि जनता मेरे साथ है. हमलोग जब चुनाव लड़े तो सबसे बड़ी पार्टी बनकर आए जिसको जनता चाहती है वो पार्टी सत्ता में आती है. तेजस्वी यादव ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए कहा कि केंद्रीय बजट में बिहार को ठगने का काम किया गया है. विशेष राज्य का दर्जा भी नहीं मिला.

  • टीवी देख रहे BJP नेता की गोली मारकर हत्या

    टीवी देख रहे BJP नेता की गोली मारकर हत्या

    छोटे डोंगर थाना से करीब 100 मीटर की दूरी पर रात करीब आठ बजे भाजपा नेता सागर साहू अपने घर में टीवी देख रहे थे, इसी दौरान कुछ नक्सली अचानक घर के अंदर घुस आए और उन्होंने भाजपा नेता के सिर में गोली चला दी।

    नारायणपुर जिले के छोटे डोंगर में शुक्रवार की रात नक्सलियों ने भाजपा नेता को गोली मारकर हत्या कर दी। घटना की पुष्टि नारायणपुर एएसपी हेमसागर सिदार ने की है।

    मिली जानकारी के अनुसार छोटे डोंगर थाना से करीब 100 मीटर की दूरी पर रात करीब आठ बजे भाजपा नेता सागर साहू अपने घर में टीवी देख रहे थे, इसी दौरान कुछ नक्सली अचानक घर के अंदर घुस आए और उन्होंने भाजपा नेता के सिर में गोली चला दी। 

    इसके बाद नक्सली वहां से भाग खड़े हुए, इधर गोली चलने की आवाज सुनाई देते ही आसपास के लोग घर आ पहुंचे और आनन-फानन में घायल भाजपा नेता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार करने के बाद घायल भाजपा नेता को जिला अस्पताल के लिए रवाना कर दिया गया, लेकिन उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इधर घटना की जानकारी लगते ही पुलिस भी मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है।

    नारायणपुर के एसपी पुष्कर शर्मा ने बताया कि बाइक सवार दो लोग सागर साहू के घर में घुसे और उन पर फायरिंग कर दी। साहू को नारायणपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। नक्सलियों द्वारा हाल ही में साहू को धमकाने की कोई जानकारी  नहीं मिली है।