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  • नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तारीख तय की, सम्राट चौधरी की स्थिति मजबूत

    नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तारीख तय की, सम्राट चौधरी की स्थिति मजबूत

    नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ने का कार्यक्रम निर्धारित

    पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की तारीख अब तय हो गई है। वह गुरुवार को दिल्ली पहुंचेंगे, जहां वह राज्यसभा सांसद पद की शपथ लेंगे। इसके बाद, शुक्रवार को वह पटना लौटते ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। यह पहली बार है जब बिहार में बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है, और इस पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है।

    नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

    नीतीश कुमार, जिन्होंने बिहार में लगभग दो दशकों तक मुख्यमंत्री का पद संभाला, अब दिल्ली की राजनीति में अपनी किस्‍मत आजमाने के लिए तैयार हैं। वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। उसी दिन पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें वह अपने इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं।

    बिहार में सत्ता परिवर्तन की कहानी

    बिहार में 2005 के बाद से सत्ता परिवर्तन का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। नीतीश कुमार के राज्यसभा में चुने जाने के बाद, जेडीयू के नेता विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आगामी समय में बिहार की सत्ता बीजेपी के नेतृत्व में होगी।

    बीजेपी की अहम बैठक

    नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के दिन, 10 अप्रैल को दिल्ली में बिहार बीजेपी नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना है। यह बैठक सरकार गठन की प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई है।

    14 अप्रैल को इस्तीफे की संभावना

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को दिल्ली से लौटने के बाद 14 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। सम्राट चौधरी के नाम पर नई सरकार के गठन में मुहर लगने की संभावना है।

    शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी की उपस्थिति

    दिल्ली में 10 अप्रैल को होने वाली बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 14 या 15 अप्रैल को हो सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो सकते हैं।

  • कांग्रेस के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट का आरोप

    कांग्रेस के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट का आरोप

    असम की राजनीति में नया विवाद: सीएम सरमा की पत्नी पर लगे गंभीर आरोप

    गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के संबंध में हाल ही में उठे आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उनकी विदेशों में संपत्ति भी मौजूद है।

    कांग्रेस के आरोपों का विस्तार

    कांग्रेस ने इस मामले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट और संपत्ति के बारे में जानकारी साझा की। पार्टी के नेताओं ने यह भी कहा कि इस स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री के परिवार की गतिविधियां संदिग्ध हैं। आरोपों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का हिस्सा है।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप केवल राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम हैं और वे अपने परिवार के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी साझा नहीं करेंगे।

    राजनीतिक माहौल पर प्रभाव

    इस विवाद ने असम के राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा विधानसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है। मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ लगे आरोपों ने विपक्षी दलों को एक नया आधार प्रदान किया है, जिससे वे सरकार पर प्रहार कर सकते हैं।

  • राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर के जरिए जवाब दिया

    राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर के जरिए जवाब दिया

    सियासत में गरما गरम बहस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रोटोकॉल उल्लंघन

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति का “अपमान” करने का आरोप लगाया है। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीरें दिखाकर पलटवार किया।

    तस्वीरों के जरिए पलटवार

    ममता बनर्जी ने कोलकाता में धरने के दौरान एक तस्वीर प्रस्तुत की, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति खड़ी हैं। उन्होंने इसे प्रोटोकॉल के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि उनका ऐसा करना हमारे संस्कारों में नहीं है।

    अपमान की संस्कृति पर टिप्पणी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तस्वीर से यह स्पष्ट है कि भाजपा एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देती है, जिसमें राष्ट्रपति का अपमान किया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राष्ट्रपति और भारतीय संविधान का पूरा सम्मान करती है, और राज्य सरकार को इसमें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति की नाराजगी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को बागडोगरा एयरपोर्ट पर पहुंची थीं, जहां उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेना था। बताया जा रहा है कि वहां मुख्यमंत्री या राज्य के किसी मंत्री का न होना राष्ट्रपति को परेशान कर गया था। उन्होंने कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया।

    राज्य सरकार की सफाई

    ममता बनर्जी ने इस विवाद को लेकर कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि निजी आयोजकों ने भी उचित समन्वय नहीं किया था। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर अव्यवस्था के लिए आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराया।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक महिला आदिवासी नेता और देश की राष्ट्रपति का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की नागरिकों की जागरूकता इस घटना को कभी नहीं भूलेगी। यह बयान मोदी ने दिल्ली में दिल्ली मेट्रो के नए कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद दिया।

    इस पूरे विवाद के चलते केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और भी बढ़ गया है।

  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने पर महत्वपूर्ण बयान दिया

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने पर महत्वपूर्ण बयान दिया

    नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का निर्णय

    पटना. जनता दल यूनाईटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने यह घोषणा की है कि वह अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। इस ऐलान ने पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों को समाप्त कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक बयान में कहा है कि पिछले दो दशकों से अधिक समय तक उन्होंने बिहार और उसके लोगों की सेवा की है और अब वह दिल्ली की राजनीति में प्रवेश करने का इच्छुक हैं।

    संसदीय जीवन की नई शुरुआत

    नीतीश कुमार ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनका राज्यसभा का सदस्य बनने का सपना लंबे समय से था। उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि वह दोनों विधान मंडलों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य भी बनें। उन्होंने जनता को विश्वास दिलाया कि उनका संबंध भविष्य में भी मजबूत बना रहेगा और बेरूखी के बावजूद, बिहार के विकास का उनका संकल्प अटल रहेगा।

    जदयू कार्यकर्ताओं की नाराजगी

    नीतीश कुमार के इस फैसले पर जदयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया था। कार्यकर्ताओं ने सीएम हाउस के बाहर नारेबाज़ी करते हुए कहा कि नीतीश कुमार को बिहार की जनता की आवाज़ सुननी होगी। बिहार की राजनीति में उनका स्थान महत्वपूर्ण है, और कार्यकर्ताओं ने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें दिल्ली नहीं जाना चाहिए।

    ललन सिंह की संभावित डिप्टी सीएम पर चर्चा

    सीएम नीतीश कुमार के फैसले के तुरंत बाद, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने निशांत कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने आगे की योजनाओं पर चर्चा की और निशांत कुमार की भूमिका के बारे में विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान यह जानकारी मिली है कि निशांत कुमार को डिप्टी सीएम के पद पर नियुक्त किया जा सकता है।

  • नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने का विचार कर रहे हैं, बेटे को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने का विचार कर रहे हैं, बेटे को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ने का संभावित निर्णय

    पटना: बिहार की राजनीति में वर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण बदलाव की चर्चाएँ एक नई दिशा में बढ़ रही हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के सांसद बनने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके चलते वे अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। यदि यह घटनाक्रम वास्तविकता में परिवर्तित होता है, तो यह बिहार की राजनीतिक landscape को काफी प्रभावित कर सकता है।

    राजनीतिक अवसर और नई जिम्मेदारी

    यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो यह उनके बेटे निशांत कुमार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह परिवर्तन परिवार की नई पीढ़ी को आगे लाने का संकेत दे सकता है। बिहार की सियासत में आ रही यह संभावित बदलाव विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हलचलों को जन्म दे सकता है।

    राज्यसभा में संभावित स्थान

    राज्यसभा सांसद बनने की संभावनाओं के साथ, नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा एक नए अध्याय में प्रवेश कर सकती है। इस स्थिति पर नजर रखने से यह स्पष्ट होगा कि वे किस प्रकार से राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने की योजना बना रहे हैं।

  • दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, अप्रैल में राजयसभा सीट खाली होगी

    दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, अप्रैल में राजयसभा सीट खाली होगी

    कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का राज्यसभा जाने से इंकार

    भोपाल। हाल ही में कांग्रेस के दलित एजेंडे और एससी/एसटी को मुख्यमंत्री बनाने के बयान पर मध्यप्रदेश में सियासी हलचल के बीच दिग्विजय सिंह ने अपना रुख बदल लिया है। राज्यसभा के आगामी चुनावों को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया है।

    राज्यसभा नहीं जाने का किया ऐलान

    भोपाल में एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वह राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं होंगे। इस बयान के चलते आगामी राज्यसभा चुनाव पर चर्चा को एक दिशा मिली है। गौरतलब है कि उनका राज्यसभा कार्यकाल 2026 में समाप्त हो रहा है और मध्यप्रदेश में 9 अप्रैल को एक सीट खाली हो रही है।

    कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने हाल ही में दलितों के एक कार्यक्रम में कहा था कि यदि एससी/एसटी से कोई मुख्यमंत्री बनता है, तो उन्हें खुशी होगी। उनके इस बयान पर सत्ताधारी बीजेपी ने उन्हें निशाना बनाया। इसके अलावा, उनकी ही पार्टी में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को पत्र भेज कर अनुरोध किया है कि खाली हो रही राज्यसभा सीट पर दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। पत्र में यह भी अपेक्षा जताई गई है कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रमुखता से रखा जाए।

  • अनिल कपूर ने ‘नायक 2’ के राइट्स खरीदे, फैंस के लिए खास खबर

    अनिल कपूर ने ‘नायक 2’ के राइट्स खरीदे, फैंस के लिए खास खबर

    अनिल कपूर ने खरीदे ‘नायक’ के राइट्स, सीक्वल की तैयारी

    नई दिल्ली। बॉलीवुड के अनुभवी अभिनेता अनिल कपूर ने हाल ही में अपनी प्रसिद्ध फिल्म ‘नायक’ के अधिकार खरीद लिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह जल्द ही इस फिल्म का सीक्वल लाने की योजना बना रहे हैं। मूल कहानी में अनिल कपूर को एक दिन का मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलता है और इस दौरान वह भ्रष्टाचार एवं सामाजिक समस्याओं को सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाते हैं। प्रशंसकों में इस बात को लेकर उत्सुकता है कि अगले भाग में कहानी कैसे आगे बढ़ेगी।

    नायक की लोकप्रियता और पृष्ठभूमि

    फिल्म ‘नायक’, जो 2001 में रिलीज हुई, ने दर्शकों और समीक्षकों के बीच बेहतरीन प्रतिक्रिया प्राप्त की थी। यह फिल्म एक पत्रकार की कहानी है, जिसे एक दिन का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिलता है। इस दिन के दौरान वह सरकारी अधिकारियों और पुलिस को काम के प्रति जागरूक करता है, भ्रष्टाचार का निपटारा करता है और जनता की समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है।

    अनिल कपूर ने खरीदे फिल्म के राइट्स

    जानकारी के अनुसार, फिल्म ‘नायक’ के अधिकार पहले फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ के निर्माता दीपक मुकुट के पास थे। अब अनिल कपूर ने इन्हें खरीद लिया है। एक साक्षात्कार में अनिल कपूर ने बताया कि यह फिल्म उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है और उन्होंने इसकी कहानी को दर्शकों से मिले प्यार के कारण इसके सीक्वल पर काम करने का निर्णय लिया है।

    सीक्वल की संभावित कहानी

    ‘नायक’ की कहानी एक आम व्यक्ति और मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द घूमती है। यदि सीक्वल बनता है, तो इसमें दर्शकों को यह देखने को मिलेगा कि इस किरदार को नए और बड़े राजनीतिक मुद्दों से किस प्रकार निपटना पड़ेगा। फिल्म में आधुनिक तकनीक, विस्तृत सेट और समकालीन राजनीतिक परिदृश्य हो सकता है, जिससे कहानी को और भी रोमांचक रूप देने का प्रयास होगा।

    फिल्म की मूल कास्ट और टीम

    फिल्म ‘नायक’ का निर्देशन प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय निर्देशक शंकर ने किया था। इसके डायलॉग्स अनुराग कश्यप ने लिखे थे, और इसमें रानी मुखर्जी, अमरीश पुरी तथा परेश रावल जैसे अनुभवी कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई थीं। नए भाग में संभवतः अनिल कपूर के साथ कुछ नए चेहरे भी नजर आ सकते हैं, लेकिन पुराने किरदारों की याद और दर्शकों का प्यार स्थायी रहेगा।

    अनिल कपूर द्वारा ‘नायक’ के अधिकार खरीदने की खबर फैंस के लिए खुशी की बात है। यह संकेत देता है कि जल्द ही ‘नायक 2’ बड़े पर्दे पर देखने को मिल सकता है। फिल्म का सीक्वल पुराने प्यार और नए रोमांच का संगम हो सकता है, जिसमें अनिल कपूर फिर से अपने मशहूर किरदार में नजर आएंगे। यह स्पष्ट है कि अनिल कपूर इस विरासत को आगे बढ़ाने के प्रति पूरी तरह से समर्पित हैं।

  • मध्य प्रदेश कांग्रेस का दीक्षित मार्च, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गृह जिले में 5 जनवरी को

    मध्य प्रदेश कांग्रेस का दीक्षित मार्च, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के गृह जिले में 5 जनवरी को

    केंद्र सरकार का मनरेगा योजना का नाम बदलाव: कांग्रेस का आंदोलन प्रारंभ

    भोपाल। केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा योजना का नाम बदलकर “विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G)” रखने के निर्णय ने मध्य प्रदेश की राजनीतिक स्थिति को हिलाकर रख दिया है। इस निर्णय के विरोध में कांग्रेस अब सड़कों पर उतरने के लिए तैयार है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने यह घोषणा की है कि वे 5 जनवरी से केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर से पदयात्रा की शुरुआत करेंगे। इस यात्रा का उद्देश्य केवल नाम परिवर्तन का विरोध नहीं है, बल्कि यह गांधी के विचारों और गरिमा की रक्षा के लिए एक आंदोलन होगा।

    गांधी की आत्मा की रक्षा का संकल्प

    दिग्विजय सिंह ने सीहोर में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी पार्टी का नहीं, बल्कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आत्मा की रक्षा के लिए है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार योजनाओं से गांधी का नाम निकालने का प्रयास कर रही है, जो कि देश के इतिहास और आत्मा पर एक गंभीर आक्रमण है। इस पदयात्रा की शुरुआत सीहोर जिले की किसी ग्राम पंचायत से की जाएगी, ताकि ग्रामीण भारत की आवाज सीधे दिल्ली तक पहुंच सके।

    कांग्रेस का आरोप: वैचारिक हमला

    कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा का नाम बदलना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह एक वैचारिक हमला है। महात्मा गांधी का नाम हटाकर सरकार उस इतिहास को मिटाने का प्रयास कर रही है जिसने देश को आज़ादी दिलाई और गरीबों को अधिकार प्रदान किए। लोकसभा में इस बदलाव से संबंधित बिल के पास होने के बाद कांग्रेस ने इसे गांधी-विरोधी कदम बताया है। दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि जब सरकार गांधी को साहित्य से बाहर करने का प्रयास कर रही है, तो यह देश को किस दिशा में ले जा रहा है?

    जनचेतना का जागरण

    पदयात्रा का उद्देश्य केवल विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि ग्रामीणों में जागरूकता जगाना भी है। दिग्विजय सिंह श्रमिकों, किसानों, महिलाओं, और युवाओं के साथ संवाद करेंगे, ताकि उन्हें बताया जा सके कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीबों की जीवनरेखा है। यह यात्रा राजनीतिक कार्यक्रम न होकर जन-आंदोलन का प्रारंभ है, जो गांवों की गलियों से संसद की सीढ़ियों तक पहुंचेगी।

    2025 का राजनीतिक एजेंडा

    कांग्रेस इस विषय को 2025 के राजनीतिक एजेंडे का केंद्रीय मुद्दा बनाने की योजना बना रही है। पार्टी का मानना है कि मनरेगा से गांधी का नाम हटाना उस भारत की आत्मा को चोट पहुंचाना है, जो सत्य, श्रम और समानता पर आधारित है। दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा तब तक नहीं रुकेगी जब तक सरकार गांधी के नाम को वापस नहीं लाती।

    सीहोर: आंदोलन का केंद्र

    जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान का गृह जिला सीहोर इस आंदोलन का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। यह केवल एक नाम बदलने का विरोध नहीं है, बल्कि यह यह तय करेगा कि भारत की आत्मा गांधी में सुरक्षित रहेगी या सत्ता की राजनीति में खो जाएगी। यह ध्यान देने योग्य है कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण कर दिया है। लोकसभा में भी इस योजना के बदलाव को लेकर बिल पास हो गया है, जिस पर कांग्रेस ने गंभीर आपत्ति जताई है।

  • नितिन नबीन: बिना मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के अपनी पहचान बनाए हुए

    नितिन नबीन: बिना मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के अपनी पहचान बनाए हुए

    बीजेपी ने नितिन नबीन को किया कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त

    नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करके राजनीतिक क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा है। 45 वर्षीय नितिन नबीन, जो 1980 में जन्मे हैं, अब बीजेपी के इतिहास में सबसे युवा अध्यक्ष माने जाते हैं। उनके चयन ने पार्टी में और बाहर कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया है।

    युवाओं के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता

    नितिन नबीन की नियुक्ति इस बात का संकेत है कि बीजेपी युवाओं को आगे लाने की दिशा में गंभीर है। उनकी यह स्थिति यह दर्शाती है कि पार्टी केवल अनुभवी नेताओं को ही नहीं, बल्कि युवा नेतृत्व को भी मौका दे रही है। नितिन नबीन के कार्यकाल की चुनौतियों और अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    पार्टी के भीतर उपादान

    नितिन नबीन की इस भूमिका को लेकर पार्टी में चर्चा का दौर जारी है। उनके नेतृत्व में बीजेपी के उद्देश्यों को नई दिशा मिल सकती है, साथ ही यह भी देखने लायक होगा कि वे किस तरह से पार्टी के विकास में योगदान देंगे। उनकी नियुक्ति से पार्टी की नीतियों में क्या बदलाव आएंगे, यह भविष्य में स्पष्ट होगा।

  • नीतीश कुमार केवल 7 दिन के लिए बने थे मुख्यमंत्री, जानें उनके मुख्यमंत्री बनने की तारीखें

    नीतीश कुमार केवल 7 दिन के लिए बने थे मुख्यमंत्री, जानें उनके मुख्यमंत्री बनने की तारीखें

    नीतीश कुमार ने फिर से लिया मुख्यमंत्री पद की शपथ

    नई दिल्ली. बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों का प्रमुख चेहरा नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बने हैं। विधानसभा चुनावों में हासिल की गई ऐतिहासिक जीत के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने नीतीश को इस पद के लिए चुना है।

    एनडीए विधायकों की बैठक का निर्णय

    मंगलवार को एनडीए विधायकों की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया। बिहार की 243 सीटों में से 202 सीटें जीतने वाले इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी के 89 और जनता दल (यूनाइटेड) के 85 विधायक शामिल हैं। इस गठबंधन में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (सेक्युलर) के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक भी शामिल हैं।

    नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

    बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश का यह दसवां कार्यकाल है। उन्होंने पहली बार 2000 में शपथ ली थी, जब वे समता पार्टी का हिस्सा थे। उनका पहला कार्यकाल मात्र सात दिनों तक चला था। इसके बाद, 2005 में अपनी पार्टी जद (यू) के बीजेपी के साथ गठबंधन का बना कर उन्होंने पूर्ण बहुमत हासिल किया।

    गठबंधन और राजनीतिक परिवर्तन

    नीतीश ने 2010 में भी अपने गठबंधन को मजबूती से बनाए रखा। 2013 में नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ लिया, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में बने रहे। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

    महागठबंधन और बीजेपी के साथ नाता

    2015 में नीतीश ने फिर से महागठबंधन बनाया और चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री बने। 2017 में उन्होंने महागठबंधन को तोड़ा और बीजेपी के साथ मिलकर दुबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2020 में एनडीए ने साधारण बहुमत हासिल किया, लेकिन जद (यू) की सीटें घटकर 43 रह गईं। इसके बावजूद नीतीश को मुख्यमंत्री बनाए रखा गया।

    चुनाव विश्लेषण और भविष्य की चुनौती

    2022 में नीतीश ने फिर से सरकार भंग कर दी और आरजेडी तथा कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया। लेकिन यह सरकार महज़ 17 महीने तक चली। आलोचकों ने नीतीश कुमार को 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कमजोर शक्ति करार दिया था। हालांकि, चुनाव विश्लेषकों को आश्चर्य हुआ जब नीतीश की पार्टी ने 2020 में जीती गई 43 सीटों की तुलना में दो गुनी, यानी 85 सीटें हासिल कीं।

  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल को दिया इस्तीफा, 19 को होगी विधानसभा भंग

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल को दिया इस्तीफा, 19 को होगी विधानसभा भंग

    नीतीश कुमार का महत्वपूर्ण दिन: विधानसभा भंग और नई सरकार का गठन

    पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए आज एक महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 17वीं विधानसभा को भंग करने की सिफारिश की। यह बैठक इस सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक साबित हुई। सभी मंत्रियों ने अपने इस्तीफे दे दिए, और 19 नवंबर को मौजूदा विधानसभा भंग हो जाएगी। इसके बाद नीतीश कुमार ने राजभवन जाकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की और विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव उनके सामने रखा।

    कैबिनेट बैठक की तैयारियाँ और विधायक दल की बैठक

    कैबिनेट की बैठक शुरू होने से पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कुछ अन्य मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री हाउस पहुंचे। इसके बाद सभी मंत्री सचिवालय पहुँचे, जहां बैठक शुरू हुई। बैठक के दौरान सचिवालय के अंदर किसी को प्रवेश नहीं दिया गया। राजभवन के बाहर भी सुरक्षा कड़ी थी। नीतीश कुमार के राजभवन से निकलने के बाद, वह अपनी पार्टी के नेताओं के साथ विधायक दल की बैठक करेंगे, जहां जदयू के नेता उन्हें विधायक दल का नेता चुनेंगे।

    नवीनतम सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी

    नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह गांधी मैदान में 20 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य वीआईपी अतिथि शामिल होंगे। शपथ ग्रहण समारोह के लिए लगभग 5000 विशेष अतिथियों के लिए एक सेक्शन तैयार किया जा रहा है। वहीं, आम लोगों के लिए समारोह के दौरान 17 से 20 नवंबर तक प्रवेश पर पाबंदी रहेगी।

    भाजपा की विधायकों की बैठक

    भाजपा के विधायकों की बैठक मंगलवार को निर्धारित की गई है, जहां नई सरकार के गठन की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद, नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना होगी।

  • तस्वीरों में देखिए चीफ जस्टिस का शपथग्रहण…

    तस्वीरों में देखिए चीफ जस्टिस का शपथग्रहण…

    राज्यपाल ने न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को दिलाई शपथ

    रांची। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने आज राज भवन स्थित बिरसा मंडप में न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान को झारखंड राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ दी।
    इससे पूर्व राज्य की मुख्य सचिव श्रीमती अलका तिवारी ने न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान का झारखंड राज्य उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति संबंधी वारंट को पढ़ा तथा राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव डॉ० नितिन कुलकर्णी द्वारा मुख्य न्यायाधीश को शपथ ग्रहण हेतु आमंत्रित किया गया।


    शपथग्रहण समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्र नाथ महतो, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, झारखंड उच्च न्यायालय के माननीय न्यायाधीशगण, पूर्व न्यायाधीशगण, भारतीय प्रशासनिक व पुलिस सेवा के वरीय अधिकारीगण तथा झारखंड उच्च न्यायालय के पदाधिकारीगण व वरीय अधिवक्तागण उपस्थित थे।