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  • झारखंड समाचार: सूचना आयुक्त और लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र, इस तारीख को होगी घोषणा

    झारखंड समाचार: सूचना आयुक्त और लोकायुक्त की नियुक्ति शीघ्र, इस तारीख को होगी घोषणा

    झारखंड में आयोगों और निगमों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज

    रांची: झारखंड राज्य में लंबे समय से रिक्त पड़े बोर्ड, निगम और आयोगों के पदों को भरने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के असम दौरे के बाद सूचना आयुक्त और लोकायुक्त के नामों की घोषणा की संभावना जताई जा रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक बैठक में इन पदों के लिए नामों पर सहमति बनी है, और प्रस्ताव राज्यपाल के पास भेजा जा चुका है। अब उनकी मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

    राज्य सूचना आयोग में लंबित अपीलें

    राज्य सूचना आयोग में सुनवाई का कार्य 8 मई 2020 से ठप पड़ा हुआ है, जब तत्कालीन प्रभारी मुख्य सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी का कार्यकाल समाप्त हुआ था। इस कारण आयोग में 5000 से अधिक अपीलें लंबित हैं, जो जल्द निपटने की आवश्यकता है।

    लोकायुक्त का पद रिक्त

    इसी तरह, लोकायुक्त का पद भी जून 2021 से खाली है, जब तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस डीएन उपाध्याय का निधन हुआ। इन पदों की नियुक्ति के बाद इन संस्थानों में कार्य फिर से शुरू होने की उम्मीद है। राज्य में महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग सहित 40 से अधिक अन्य पद भी रिक्त पड़े हैं।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया

    इस विषय पर भाजपा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि सरकार बिना हाईकोर्ट के निर्देश के कोई कदम नहीं उठाती। वहीं, कांग्रेस ने जवाब देते हुए आश्वासन दिया है कि सभी आयोगों का गठन जल्द ही किया जाएगा।

  • कांग्रेस के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट का आरोप

    कांग्रेस के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट का आरोप

    असम की राजनीति में नया विवाद: सीएम सरमा की पत्नी पर लगे गंभीर आरोप

    गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के संबंध में हाल ही में उठे आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उनकी विदेशों में संपत्ति भी मौजूद है।

    कांग्रेस के आरोपों का विस्तार

    कांग्रेस ने इस मामले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट और संपत्ति के बारे में जानकारी साझा की। पार्टी के नेताओं ने यह भी कहा कि इस स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री के परिवार की गतिविधियां संदिग्ध हैं। आरोपों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का हिस्सा है।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप केवल राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम हैं और वे अपने परिवार के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी साझा नहीं करेंगे।

    राजनीतिक माहौल पर प्रभाव

    इस विवाद ने असम के राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा विधानसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है। मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ लगे आरोपों ने विपक्षी दलों को एक नया आधार प्रदान किया है, जिससे वे सरकार पर प्रहार कर सकते हैं।

  • मुर्शिदाबाद में अधीर रंजन चौधरी पर हमले को लेकर कांग्रेस ने TMC पर आरोप लगाया

    मुर्शिदाबाद में अधीर रंजन चौधरी पर हमले को लेकर कांग्रेस ने TMC पर आरोप लगाया

    बहरामपुर में कांग्रेस नेता पर हमले का आरोप

    बहरामपुर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार चौधरी ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हमला किया गया, जिससे पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल में तनाव और बढ़ गया है।

    घटना का विवरण

    न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह घटना तब हुई जब अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर विधानसभा क्षेत्र में एक जनसंपर्क अभियान में सक्रिय थे। आरोप है कि टीएमसी के कुछ कार्यकर्ताओं ने अचानक उनके अभियान में बाधा डाली और चौधरी तथा उनके समर्थकों पर हमला कर दिया। इस दौरान कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचाने की सूचना है।

    कांग्रेस ने टीएमसी पर साधा निशाना

    कांग्रेस ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि यह हमला सुनियोजित था और टीएमसी अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से विपक्ष की आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है।

    चुनावी माहौल पर प्रभाव

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसी घटनाएं राजनीतिक तनाव को और बढ़ा देती हैं। दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल में तनाव का स्तर ऊंचा हो गया है। यह घटना आने वाले प्रचार अभियानों को भी प्रभावित कर सकती है।

    संभावित कार्रवाई

    यदि यह मामला और बढ़ता है, तो चुनाव आयोग दोनों पक्षों से रिपोर्ट मांग सकता है। आवश्यकतानुसार आयोग आगे की जांच के निर्देश भी दे सकता है। क्षेत्र में चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है, जिसके मद्देनजर चुनाव आयोग ने बंगाल प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं।

  • कांग्रेस ने विदिशा में अनोखे प्रदर्शन में गैस सिलेंडर का मजाकिया अंतिम संस्कार किया

    कांग्रेस ने विदिशा में अनोखे प्रदर्शन में गैस सिलेंडर का मजाकिया अंतिम संस्कार किया

    कांग्रेस का विदिशा में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन

    विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में कांग्रेस पार्टी ने बढ़ती महंगाई और स्थानीय समस्याओं के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने गैस टंकी की अर्थी निकालकर अनोखा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

    महंगाई के खिलाफ विशाल रैली

    सोमवार को विदिशा के लटेरी क्षेत्र में, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर और बिजली बिलों की बेतहाशा बढ़ोतरी, साथ ही डीजल-पेट्रोल की कमी के विरोध में सिरोंज चौराहे से जय स्तंभ चौराहे तक एक विशाल रैली निकाली। इस रैली का प्रमुख आकर्षण गैस की टंकी और बिजली बिलों की ‘अर्थी’ का प्रदर्शन था, जो महंगाई के खिलाफ उनकी चिंता को व्यक्त करता था।

    शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस कार्यकर्ता गैस सिलेंडर पर माथा पटककर जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को दर्शाते हुए विलाप करते नजर आए। रैली के बाद कार्यकर्ताओं ने चौराहे पर धरना दिया और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही, कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

    सांदीपनि विद्यालय के खराब परीक्षा परिणाम पर नाराजगी

    ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष यदवीर सिंह बघेल और अन्य कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सांदीपनि विद्यालय के खराब परीक्षा परिणाम पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने शिक्षकों के तत्काल स्थानांतरण की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आम आदमी की जिंदगी कठिन होती जा रही है।

  • राहुल गांधी का लखनऊ में बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता धनवान

    राहुल गांधी का लखनऊ में बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता धनवान

    राहुल गांधी का बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी

    लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी पार्टी को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है, हालांकि पार्टी के कई नेता आर्थिक दृष्टि से संपन्न हैं।

    राहुल गांधी ने स्पष्ट किया, “हम अमीर पार्टी नहीं बनना चाहते। यदि ऐसा हुआ, तो कांग्रेस भाजपा की तरह हो जाएगी।” उन्होंने पार्टी की जड़ों को याद करते हुए बताया कि इसका ढांचा महात्मा गांधी के समय से स्थापित है, जो हमेशा गरीबों और वंचितों की पहचान बनते रहे हैं।

    कांशीराम की जयंती पर सम्मेलन में कांग्रेस की कमियां

    कांशीराम की जयंती पर राहुल गांधी ने अपनी पार्टी की कमजोरियों पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कुछ नाकामियों के कारण बहुजन आंदोलन को मजबूती मिली और कांशीराम को राजनीतिक सफलता हासिल हुई।

    उन्होंने जोड़ा कि यदि कांग्रेस ने सामाजिक बदलाव के लिए तेजी से कदम उठाए होते, तो शायद कांशीराम को इतनी बड़ी पहचान नहीं मिलती।

    बदलाव के लिए संघर्ष की आवश्यकता

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में बदलाव केवल इच्छाशक्ति से नहीं होता, इसके लिए विचारों के लिए संघर्ष आवश्यक है। वे बोले कि जब तक लोग अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे और उसके खिलाफ खड़े नहीं होंगे, तब तक समाज में बदलाव असंभव है।

    संविधान और वर्तमान सरकार की आलोचना

    संविधान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में प्राचीन सभ्यता की आवाज़ शामिल है और इसकी आत्मा सामाजिक न्याय और समानता की है। वर्तमान सरकार की नीतियों पर उन्होंने आरोप लगाया कि वह इस मूल भावना को नकार रही है।

    अंबेडकर और कांशीराम का संघर्ष

    अपने भाषण में उन्होंने बी. आर. अंबेडकर और कांशीराम के संघर्षों का जिक्र किया। राहुल गांधी ने बताया कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौता किए अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया।

    ऊर्जा नीति पर सरकार पर आरोप

    राहुल गांधी ने भारत की ऊर्जा नीति को लेकर प्रश्न उठाए। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर आरोप लगाया कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते भारत की ऊर्जा नीतियों में बाधा आ रही है।

    समाज में असमानता का मुद्दा

    राहुल गांधी ने समाज में बढ़ती असमानता पर ध्यान दिलाया, जहाँ 15 प्रतिशत लोग अन्य 85 प्रतिशत पर हावी हो रहे हैं, और संसाधनों तथा अवसरों का लाभ केवल एक सीमित वर्ग तक पहुंच रहा है।

    2027 चुनाव की तैयारी

    कार्यक्रम के अंत में, उन्होंने समाज में बदलाव के प्रति लगन की बात की और बताया कि सभी के योगदान वाली राजनीति ही देश की प्रगति के लिए आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि हाल में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन उत्तर प्रदेश में मजबूत प्रदर्शन कर चुका है, और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए इसी रणनीति पर काम कर रहा है।

  • रांची राजनीतिक समाचार: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर कांग्रेस की चिंता, प्रदेश महासचिव की टिप्पणी जानें

    रांची राजनीतिक समाचार: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर कांग्रेस की चिंता, प्रदेश महासचिव की टिप्पणी जानें

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर जताई चिंता

    रांची: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एक कार्यक्रम के संदर्भ में कांग्रेस पार्टी ने अपनी चिंता व्यक्त की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता राकेश सिन्हा ने प्रोटोकॉल के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया है और कहा है कि ऐसा होना जरूरी है ताकि राष्ट्रपति का सम्मान बना रहे।

    राजनीतिक विवाद का बढ़ता आलम

    इस विवाद ने राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। राकेश सिन्हा ने बताया कि इस प्रकार के घटनाक्रम से एक अनुशासनहीनता का माहौल बनता है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए घातक हो सकता है। उनके अनुसार, राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में उच्च स्तर के प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए, ताकि राष्ट्रीय प्रतीकों और पदों का सम्मान बना रहे।

    प्रोटोकॉल का महत्व

    प्रोटोकॉल का पालन न करना केवल एक व्यक्ति का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की छवि को प्रभावित करता है। राकेश सिन्हा ने कहा कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, और सभी राजनीतिक दलों को इस दिशा में सोचने की आवश्यकता है।

    कांग्रेस के इस बयान से स्पष्ट है कि वे राष्ट्रपति के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की मांग कर रहे हैं और इसके लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। इससे न केवल राजनीतिक स्थिरता बनेगी, बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया जा सकेगा।

  • BJP ने तीन निलंबित विधायकों को शामिल करके कांग्रेस को किया नुकसान

    BJP ने तीन निलंबित विधायकों को शामिल करके कांग्रेस को किया नुकसान

    गुवाहाटी में भाजपा का परिवार बढ़ा

    गुवाहाटी. असम में विधानसभा चुनावों के चलते भाजपा का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, कांग्रेस की पूर्व राज्य इकाई के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। अब इस क्रम में तीन निलंबित कांग्रेस विधायकों—कमलाख्या डे पुरकायस्थ, बसंत दास, और शशिकांत दास—ने भी सत्ताधारी दल में शामिल होने का निर्णय लिया है।

    भाजपा में शामिल होने का उद्देश्य

    भाजपा में शामिल होते समय पूर्व कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य असम और राष्ट्र की सुरक्षा है। असम का नागरिक होने के नाते हमें भाजपा के साथ आना चाहिए और देश को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा की नीति में सहयोग देना चाहिए। यदि कांग्रेस ने अपनी विचारधारा में बदलाव नहीं किया, तो वह रिक्त हो जाएगी।”

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

    इस भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आज भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। उनके अनुसार, यह कांग्रेस विधायकों का भाजपा में आना पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों की श्रद्धा को दर्शाता है।

    सीट शेयरिंग पर मुख्यमंत्री का बयान

    सीएम सरमा ने सीट शेयरिंग के संदर्भ में बताया कि हाल ही में असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फोरम और राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ बातचीत समाप्त हो गई है। इस मामले पर आधिकारिक घोषणा में कुछ दिनों का समय लग सकता है, क्योंकि केंद्रीय संसदीय समिति से मंजूरी प्राप्त करनी है।

    केंद्रीय मंत्री का बयान

    केंद्रीय मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग, विशेष रूप से कांग्रेस के सदस्य, भाजपा में शामिल हो रहे हैं। यह हमारी विचारधारा के प्रति उनके समर्थन को दिखाता है और इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा की लोकप्रियता हर हिस्से में बढ़ रही है।

  • पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा “आपने बाबू को अपने पापों का जामा पहनाया”

    पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा “आपने बाबू को अपने पापों का जामा पहनाया”

    प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास और व्यापार समझौते

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचाना है, जिसके चलते विकसित देश अब व्यापार समझौतों के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने राइजिंग भारत सम्मेलन में अपने भाषण में बताया कि आजादी के बाद भी कुछ लोग औपनिवेशिक मानसिकता को बनाए रखते हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया, ‘यदि हमने अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान कर अपने संस्थानों को मजबूत नहीं किया होता, तो कोई भी देश हमारे साथ व्यापार समझौते नहीं करता। यही कारण है कि विकसित देश अब हमारे साथ व्यापारिक संबंध स्थापित कर रहे हैं।’

    कांग्रेस पर मोदी का आलोचना

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि हाल ही में आयोजित एआई समिट पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने इसे बदनाम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने केवल विदेशी अतिथियों के सामने कपड़े नहीं उतारे, बल्कि अपने वैचारिक दिवालियापन को भी उजागर किया है। जब निराशा और अहंकार मन में होता है, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच जन्म लेती है। कांग्रेस हमेशा इसी तरह का व्यवहार करती है।’

    भारत के भविष्य पर विमर्श

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी देश की क्षमता अचानक नहीं आती। यह पीढ़ियों की मेहनत, ज्ञान और अनुभव से बनती है। उन्होंने कहा, ‘सदियों की गुलामी ने हमारे देश की क्षमता के प्रति हीनता की भावना को जन्म दिया।’ उनके अनुसार, विदेशी विचारधाराओं ने यह धारणा स्थापित की कि भारतीय अशिक्षित और अधीन हैं।

    2014 से पहले की स्थिति

    पीएम मोदी ने 2014 से पहले के भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अगर देश उसी निराशाजनक स्थिति में रहता, तो कोई भी देश व्यापार समझौता नहीं करता। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश की चेतना में एक नया उर्जा प्रवाहित हुआ है और भारत अब अपनी खोई हुई क्षमता को फिर से हासिल करने का प्रयास कर रहा है।

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: कांग्रेस 45 सीटों की मांग, DMK केवल 25 देने के लिए तैयार

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: कांग्रेस 45 सीटों की मांग, DMK केवल 25 देने के लिए तैयार

    तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के बीच सीट बंटवारे की बातचीत जारी

    नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले, तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा चल रही है। कांग्रेस ने 45 सीटों की मांग की है, जबकि DMK केवल 25 सीटें देने को राजी है। इस राज्य में चुनाव इस साल अप्रैल-मई में होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सीट बंटवारे पर बैठक

    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और अन्य प्रमुख नेताओं ने हाल ही में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से बैठक की, जिसमें सीटों की संख्या को लेकर बातचीत की गई, लेकिन वर्तमान में कोई समझौता नहीं हो पाया है। कांग्रेस का कहना है कि यह मांग 2021 के चुनाव परिणामों की समीक्षा पर आधारित है। पिछले चुनाव में DMK ने 234 सीटों में से 173 पर चुनाव लड़ा और 133 सीटों पर विजय प्राप्त की जबकि 40 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।

    कांग्रेस के तर्क

    कांग्रेस का मानना है कि यदि उन्हें अधिक सीटें दी जाएं, तो उनकी मजबूत स्थानीय उपस्थिति और प्रत्यक्ष मुकाबलों में बेहतर एकजुटता के कारण पिछली बार हारी हुई लगभग 20 सीटें जीती जा सकती हैं। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, 45 सीटों की मांग का मुख्य उद्देश्य वोटों की संभावनाओं में सुधार करना और गठबंधन को मज़बूत करना है, जिससे 2026 में अधिक संतुलित सीटों का बंटवारा सुनिश्चित किया जा सके।

    चर्चाएँ जारी

    रविवार को चेन्नई में आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल हुए, जिसमें दोनों दलों के वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे। इससे पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के कादर मोहिदीन ने DMK के नेताओं से मुलाकात की थी। इस प्रकार, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और DMK के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत का सिलसिला जारी है, लेकिन फिलहाल निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सका है।

  • असम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बीजेपी में की शामिलगी

    असम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बीजेपी में की शामिलगी

    असम में कांग्रेस को झटका: पूर्व अध्यक्ष ने बीजेपी में किया शामिल

    गुवाहाटी। असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया है। उन्हें भाजपा में शामिल करने की प्रक्रिया का आयोजन राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया और सांसद बैजयंत पांडा की उपस्थिति में किया गया।

    भूपेन बोरा का बीजेपी में शामिल होना

    भूपेन बोरा ने अपनी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भाजपा के साथ की है। इस कदम ने कांग्रेस पार्टी के लिए चुनौतियों को बढ़ा दिया है, खासकर चुनावी माहौल में, जहां पार्टी को अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। उनकी पार्टी में वापसी की संभावना अब और भी कम हो गई है।

    राजनीतिक प्रभाव

    भूपेन बोरा का बीजेपी में शामिल होना असम की राजनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने की संभावना रखता है। यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक सजग संकेत हो सकता है, जिससे उनके अन्य नेता भी भाजपा की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसे में, पार्टी को अपनी और अधिक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

  • बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, न नेता न सहयोगी करते हैं विश्वास

    बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, न नेता न सहयोगी करते हैं विश्वास

    कांग्रेस पार्टी में उठापटक, बीजेपी ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के लिए सोमवार का दिन कई समस्याओं से भरा रहा। प्रमुख नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी हाई कमान के खिलाफ आवाज उठाई, जबकि असम के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बोरा ने अपने इस्तीफे में पार्टी नेतृत्व पर उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है, उन्हें एक ‘असफल वंशज’ करार देते हुए यह कहा गया कि न तो पार्टी के नेता और न ही सहयोगी उन पर विश्वास करते हैं।

    भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

    कांग्रेस पार्टी में चल रही उथल-पुथल पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस चाहती है कि राहुल को हटाकर ममता को लाया जाए। असम के कांग्रेस नेता भूपेन बोरा का इस्तीफा भी इस स्थिति को दर्शाता है। मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि कांग्रेस केरल में हार रही है।” उनका यह बयान यह सिद्ध करता है कि न केवल गांधी परिवार के नेता बल्कि पार्टी के अन्य सदस्य भी राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेते हैं।

    आवाजें उठ रही हैं कांग्रेस के भीतर

    भूपेन बोरा ने अपने इस्तीफे को वापस ले लिया, वहीं कांग्रेस पार्टी ने मणिशंकर अय्यर के बयान को लेकर यह स्पष्ट किया कि वह अब पार्टी में नहीं हैं और उनके बयान को पार्टी से नहीं जोड़ा जा सकता। अय्यर ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने पद पर बने रहेंगे। कांग्रेस की तरफ से प्रतिक्रिया में अय्यर का नाम लेते हुए कहा गया कि केवल मल्लिकार्जुन खरगे उन्हें पार्टी से निकाल सकते हैं।

    भाजपा का आक्रामक रुख

    कांग्रेस पार्टी की इस स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा ने हमले का कोई भी अवसर नहीं छोड़ा। प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मणिशंकर अय्यर ने उन्हें सार्वजनिक रूप से नकारा।” उन्होंने कहा कि अय्यर और अन्य नेता खुलकर राहुल गांधी के खिलाफ बोल रहे हैं, जो पार्टी के लिए चिंता का विषय है।

    कांग्रेस के पूर्व सांसद मणिशंकर अय्यर के बयान ने पार्टी में हलचल मचा दी, जिसमें उन्होंने पवन खेड़ा और शशि थरूर जैसे नेताओं पर निशाना साधा। इस संदर्भ में कांग्रेस पार्टी की मजबूत प्रतिक्रिया आई, जिसमें अय्यर की पार्टी से दूरी का उल्लेख किया गया। अय्यर ने कहा था कि राजनीति में उनकी स्थिति स्पष्ट है, वह नेहरू और राजीव से जुड़े हैं, लेकिन राहुल गांधी से नहीं।

  • मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ी

    मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ी

    मुंबई में मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात पर विवाद

    मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत और प्रसिद्ध गायक-कंपोजर अदनान सामी के बीच हुई मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। सोमवार को महाराष्ट्र कांग्रेस ने RSS पर आरोप लगाते हुए इस बैठक को ‘राष्ट्र-विरोधी’ बताया है।

    कांग्रेस का आरोप

    कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया कि अदनान सामी के पिता पाकिस्तान एयर फोर्स में पायलट रहे हैं और उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पार्टी ने इस रिश्ते पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस तरह की मुलाकातें चिंता का विषय हैं।

    सामी के पिता का इतिहास

    कांग्रेस के अनुसार, अदनान सामी के والد, अरशद सामी खान, पाकिस्तान एयर फोर्स में पायलट थे और 1965 के युद्ध में पठानकोट एयर बेस पर हमले में शामिल हुए थे। पार्टी ने अपनी पोस्ट में लिखा है, “मोहम्मद भागवत आज उनके बेटे के साथ भोजन कर रहे हैं।”

    RSS की 100वीं वर्षगाँठ का कार्यक्रम

    अदिनान सामी उन सेलिब्रिटीज़ में शामिल हैं जिन्होंने RSS की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुंबई में आयोजित दो-दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस समारोह के दौरान मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात हुई।

    अदनान सामी की प्रशंसा

    इसके पहले, रविवार को अदनान सामी ने अपने X हैंडल पर मोहन भागवत के साथ कुछ तस्वीरें साझा की थीं। पद्म श्री से सम्मानित सिंगर ने अपनी पोस्ट में भागवत की तारीफ करते हुए लिखा कि वह उनके साथ एक शानदार दोपहर बिताने का अनुभव प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ने कई गलतफहमियों को स्पष्ट किया और वह एक असाधारण व्यक्तित्व हैं।

  • निकाय चुनाव से पहले केटीआर का कांग्रेस पर हमला, कहा- रेवंत रेड्डी भाजपा के समर्थक हैं

    निकाय चुनाव से पहले केटीआर का कांग्रेस पर हमला, कहा- रेवंत रेड्डी भाजपा के समर्थक हैं

    हैदराबाद में नगर निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच के. टी. रामाराव का तीखा हमला

    हैदराबाद में नगर निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (KTR) ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हाल में ज़ुक्कल, बांसवाड़ा और येल्लारेड्डी विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित रोड शो के दौरान केटीआर ने रेवंत को कांग्रेस के भीतर बीजेपी का ‘ट्रोजन हॉर्स’ कहते हुए अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील की कि वे ‘कांग्रेस का मुखौटा हटा कर अंदर छिपी भगवा पहचान’ देखें। केटीआर ने यह भी कहा, ‘रेवंत कभी दिल से कांग्रेसी नहीं रहे हैं; वे पूरी तरह से बीजेपी के पक्षधर हैं। वे दिल्ली के ‘बड़े भाई’ के एक छोटे भाई की तरह हैं।’

    मुख्यमंत्री की भाषा पर कटाक्ष

    मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की भाषा को लेकर कटाक्ष करते हुए केटीआर ने उन्हें ‘लागुला थोंडाला रेड्डी’ कहा। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री शासन के बजाय अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। केटीआर ने कहा, ‘जब भी विपक्ष 420 अधूरे वादों की बातें करता है, रेवंत हमेशा धमकियों में ही बात करते हैं। उनकी सरकार का एकमात्र लक्ष्‍य केसीआर को निशाना बनाना है। वे केसीआर का नाम उस तरह बार-बार लेते हैं जैसे किसी भक्त द्वारा ‘राम कोटि’ लिखा जाता है। विडंबना यह है कि केसीआर को उनकी बातों की परवाह नहीं है, जिससे वे हमेशा निराश रहते हैं।’

    पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पर निशाना

    केटीआर ने कांग्रेस में हाल में शामिल हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पोचाराम श्रीनिवास रेड्डी पर भी तंज कसा। उन्होंने सभा में पुरानी वीडियो क्लिप दिखाते हुए बताया कि रेवंत ने कैसे पोचाराम को ‘बैल’ और उनके बेटों को रेत तस्करी में शामिल ‘भैंस’ कहा था। केटीआर ने कहा, ‘पोचाराम ने कभी भगवान वेंकटेश्वर की कसम खाकर केसीआर के प्रति वफादारी का वादा किया था। अब कुछ लाभ के लिए उन्होंने अपनी आत्मा बेच दी है। अगर उनमें थोड़ी भी संकोच बची है, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और जनता से नया जनादेश लेना चाहिए; अन्यथा उन्हें रेवंत की पुरानी सलाह के अनुसार कुएं में कूद जाना चाहिए।’

    कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप

    केटीआर ने कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए इसे धोखे की सरकार बताया। उन्होंने दंडू पालयम और स्टुअर्टपुरम गिरोहों का उदाहरण देते हुए कहा कि अब ‘लूटो और भागो’ की प्रणाली नगर निकाय स्तर तक पहुँच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जुक्कल के स्थानीय विधायक कांग्रेस की ‘कैश फॉर वोट’ नीति के तहत व्यापारियों से वसूली कर रहे हैं।

    लोगों से मतदान की अपील

    केटीआर ने कहा, ‘उन्होंने 4,000 रुपये पेंशन और महिलाओं को 2,500 रुपये देने का वादा किया था; मगर ये सब कहां हैं? यह केवल धोखे की सरकार है।’ उन्होंने स्थानीय निवासियों से अपील की कि वे नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ वोट दें और राज्य के विकास के लिए बीआरएस का समर्थन करें।

  • कांग्रेस और अल्पसंख्यक नेताओं ने हिमांता बिस्वा सरमा की ‘मियां’ टिप्पणी की निंदा की

    कांग्रेस और अल्पसंख्यक नेताओं ने हिमांता बिस्वा सरमा की ‘मियां’ टिप्पणी की निंदा की

    असम के मुख्यमंत्री के विवादास्पद बयान पर राजनीतिक हलचल

    गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा मुस्लिम समुदाय के संदर्भ में ‘मियां’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस और अन्य अल्पसंख्यक नेताओं में आक्रोश है। उनका यह बयान विरोधियों के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है, और देशभर में कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिसमें 100 से अधिक एफआईआर दर्ज करने की योजना बनाई गई है। पहले से अहमदाबाद और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में इस संदर्भ में शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।

    इस आंदोलन का लक्ष्य यह स्पष्ट करना है कि असम में की गई इस तरह की बयानबाजी और ध्रुवीकरण की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर चुनौती दी जाएगी।

    विवादास्पद बयानों का मूल

    मुख्यमंत्री सरमा ने हाल ही में मतदाता सूची के विशेष संशोधन के दौरान कई विवादास्पद टिप्पणियाँ कीं, जिन्हें विपक्षी दलों ने सांप्रदायिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि 4 से 5 लाख ‘मियां’ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे। इसके अलावा, यह भी कहा गया कि यदि कोई ‘मियां’ रिक्शा चालक 5 रुपये किराया मांगता है, तो उसे केवल 4 रुपये ही देने चाहिए।

    सरमा ने भाजपा कार्यकर्ताओं को संदिग्ध विदेशी नागरिकों के खिलाफ सामूहिक शिकायतें दर्ज करने के लिए प्रेरित किया।

    कानूनी कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इन बयानों को ‘हेट स्पीच’ बताया और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए दिशा-निर्देश तय करने की मांग की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री पर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का गलत हवाला देने और ‘सांप्रदायिक घृणा’ फैलाने का आरोप लगाया।

    कांग्रेस ने ‘whoishbs.com’ नामक एक वेबसाइट लॉन्च की है, जहाँ मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार और अन्य आरोप डालने की सुविधा दी गई। इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने दिल्ली में मुख्यमंत्री के खिलाफ पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है।

    मुख्यमंत्री का पक्ष

    हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने विवादास्पद बयानों का बचाव करते हुए कहा कि वह ‘मियां’ शब्द का प्रयोग उन लोगों के लिए कर रहे हैं जो बांग्लादेश से अवैध रूप से आए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके शब्द सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूर्व में उठाई गई चिंताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  • मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया समिति के सभी प्रवक्ताओं से जिम्मेदारियां हटाई गईं

    मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया समिति के सभी प्रवक्ताओं से जिम्मेदारियां हटाई गईं

    मध्यप्रदेश कांग्रेस में बड़ा बदलाव

    भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस संगठन में एक महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। प्रदेश कांग्रेस की मीडिया कमेटी को भंग करने का निर्णय लिया गया है, जिसके तहत सभी प्रवक्ताओं को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। यह निर्णय एक आधिकारिक आदेश के रूप में जारी किया गया है।

    नए प्रवक्ताओं की चयन प्रक्रिया

    अब मध्य प्रदेश कांग्रेस में प्रवक्ताओं का चुनाव एक टैलेंट हंट के माध्यम से किया जाएगा। जिन प्रवक्ताओं को कार्यमुक्त किया गया है, यदि वे फिर से प्रवक्ता बनना चाहते हैं, तो उन्हें इंटरव्यू देना होगा। इस प्रक्रिया की शुरुआत 5 फरवरी से की जाएगी। तब तक, मीडिया विभाग के द्वारा नेताओं को डिबेट में भेजा जाएगा।

    ममता बनर्जी का चुनावी रुख

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि आगामी विधानसभा चुनाव 2026 में उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह से अकेले चुनाव में भाग लेगी।

  • नगर निकाय चुनाव: नामांकन प्रक्रिया में त्वरितता, एक दिन में 1,280 प्रत्याशियों ने पर्चे भरे

    नगर निकाय चुनाव: नामांकन प्रक्रिया में त्वरितता, एक दिन में 1,280 प्रत्याशियों ने पर्चे भरे

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    नगर निकाय चुनाव में बढ़ी नामांकन प्रक्रिया

    रांची: नगर निकाय चुनाव का नामांकन चरण तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। सोमवार को कुल 1,280 अभ्यर्थियों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इनमें 106 उम्मीदवार मेयर और अध्यक्ष पद के लिए तथा 1,174 वार्ड पार्षद पद के लिए शामिल हैं।

    महिलाओं की भागीदारी में वृद्धि 📈

    महिलाओं की भागीदारी भी इस बार उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। सोमवार को मेयर और अध्यक्ष पद के लिए 44 महिलाओं ने तथा वार्ड पार्षद पद के लिए 611 महिलाओं ने अपना पर्चा भरा। अब तक मेयर और अध्यक्ष पद के लिए कुल 56 और वार्ड पार्षद पद के लिए 683 महिलाएं नामांकित हो चुकी हैं। कुल मिलाकर मेयर और अध्यक्ष पद के लिए 129 तथा वार्ड पार्षद पद के लिए 1,302 नामांकन हुए हैं।

    नामांकन की अंतिम तिथि 4 फरवरी 🗓️

    राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, नामांकन की प्रक्रिया 4 फरवरी तक जारी रहेगी। इस दौरान मंगलवार और बुधवार को नामांकनों में और वृद्धि की संभावना है। नामांकनों की जांच 5 फरवरी को की जाएगी, और उम्मीदवार 6 फरवरी तक अपने नामांकन वापस ले सकेंगे। इसके बाद, 7 फरवरी को चुनाव चिह्नों का आवंटन होगा, जिससे चुनावी प्रचार में तेजी आएगी।

    देवघर में भाजपा के उम्मीदवारों की घोषणा

    देवघर नगर निगम के महापौर पद के लिए भाजपा की रीता चौरसिया और बाबा बलियासे ने नामांकन दाखिल किया है, हालांकि पार्टी ने रीता चौरसिया को प्राथमिकता दी है। वहीं, गोड्डा नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए झामुमो समर्थित राजेश मंडल सहित तीन उम्मीदवारों ने पर्चा भरा है।

    कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की घोषणा

    हालांकि यह चुनाव दलगत आधार पर नहीं हो रहा, फिर भी विभिन्न राजनीतिक दल अपने समर्थित उम्मीदवारों को सामने ला रहे हैं। कांग्रेस ने मेयर पद के लिए लगभग आधा दर्जन उम्मीदवारों के नाम तय किए हैं। गढ़वा से पूर्व विधायक केएन त्रिपाठी की पुत्री नम्रता त्रिपाठी को पार्टी से समर्थन मिलने की संभावना है। जमशेदपुर से मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता का नाम भी लगभग तय है। इसके अलावा, बोकारो से उमेश गुप्ता, धनबाद से शमशेर आलम, और रांची से पूर्व मेयर रमा खलखो को कांग्रेस का समर्थन मिलने की संभावना है।

  • कांग्रेस के पार्षदों को बस से अगवा करने का प्रयास, छह पर केस दर्ज

    कांग्रेस के पार्षदों को बस से अगवा करने का प्रयास, छह पर केस दर्ज

    चंद्रपुर में कांग्रेस पार्षदों का अपहरण प्रयास

    चंद्रपुर, महाराष्ट्र में गुरुवार को एक गंभीर घटना सामने आई है। यहां कुछ नकाबपोश लोगों ने हाल ही में चुनाव में विजयी हुए कांग्रेस पार्टी के पार्षदों को बस से अगवा करने का प्रयास किया। रिपोर्ट के अनुसार, ये पार्षद चंद्रपुर नगर निगम के नए सदस्य थे और नागपुर जाने की तैयारी कर रहे थे।

    घटनास्थल और पृष्ठभूमि

    यह घटना चंद्रपुर की एक बस में हुई, जहां पार्षदों को लक्षित करके यह कार्रवाई की गई। पार्षदों की सुरक्षा को खतरे में डालते हुए, हमलावरों ने उन्हें बस से बाहर निकालने की कोशिश की। इस घटना ने स्थानीय राजनीतिक माहौल में चिंता और आशंका पैदा कर दी है।

    पुलिस कार्रवाई

    सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और इस मामले में आधा दर्जन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस का कहना है कि वे हमलावरों की पहचान करने और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश में जुटी हैं। इस प्रकार की घटनाएं स्थानीय चुनावी राजनीति की गंभीरता को दर्शाती हैं।

  • झारखंड समाचार: शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान मिला, जानें नेताओं की टिप्पणियाँ

    झारखंड समाचार: शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान मिला, जानें नेताओं की टिप्पणियाँ

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिला, राजनीतिक प्रतिक्रियाएं शुरू

    झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण पुरस्कार मिलने के बाद से राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। केंद्र सरकार ने हाल ही में पुरस्कारों की सूची जारी की, जिसमें समाजिक और लोक कल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान को मान्यता दी गई है।

    आदिवासी समाज के प्रति समर्पण

    झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय ने सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि गुरुजी ने आदिवासी समुदाय को मुख्यधारा में आवाज दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हालांकि उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है, लेकिन उनकी उपलब्धियों और योगदान की दृष्टि से भारत रत्न की मांग आगे भी जारी रहेगी। झारखंड विधानसभा ने पहले ही केंद्र सरकार को भारत रत्न के लिए प्रस्ताव भेजा था। गुरुजी की विरासत न केवल झारखंड बल्कि देश के सामाजिक न्याय के संघर्षों में भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा हमेशा उनके कार्यों का मुख्य उद्देश्य रहा।

    असमानता के खिलाफ संघर्ष

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो ने गुरुजी को पद्म भूषण मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके आंदोलन और कार्यों की तुलना अन्य से नहीं की जा सकती। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार गुरुजी के संघर्षों को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित करेगी।

    समर्पित कार्यों का सम्मान

    केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिलने पर बधाई दी। उन्होंने बताया कि यह सम्मान उनके लोक कल्याण के लिए समर्पित कार्यों का प्रतीक है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रति आभार प्रकट किया।

    झारखंड की पहचान का सम्मान

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने गुरुजी को सम्मानित करने की घोषणा का स्वागत करते हुए इसे झारखंड की मिट्टी का सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी का जीवन संघर्षों से भरा रहा और उन्होंने झारखंड अलग राज्य की मांग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    गुरुजी का योगदान सभी के लिए प्रेरणा Source: सेंटर for नवजीवन मुक्ति पर आधारित है।

  • भाजपा ने कांग्रेस से पूछा, क्या थरूर को मिलेगा ‘फतवा’? गौतम गंभीर की प्रशंसा पर विवाद

    भाजपा ने कांग्रेस से पूछा, क्या थरूर को मिलेगा ‘फतवा’? गौतम गंभीर की प्रशंसा पर विवाद

    थरूर की प्रशंसा से भाजपा का सवाल

    नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच से पहले पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर के साथ एक सेल्फी साझा की। थरूर ने गंभीर की आलोचनाओं के बावजूद उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि गंभीर का काम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे चुनौतीपूर्ण है। इस मुलाकात पर भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि कांग्रेस शायद थरूर के खिलाफ एक और फतवा जारी कर सकती है। उन्होंने ट्वीट किया कि यह सवाल उठाना कि थरूर का नागपुर जाना, गंभीर से मिलना या फिर मोदी के बाद गंभीर के काम की मुश्किलता को मानना, कांग्रेस के लिए गुस्से का कारण बन सकता है।

    थरूर का गंभीर को समर्थन

    थरूर ने गंभीर की प्रशंसा करते हुए कहा कि लाखों लोग उनके निर्णयों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन वह हमेशा शांत रहते हैं और निर्भीक होकर कार्य करते हैं। थरूर ने लिखा, “उनकी शांत दृढ़ता और नेतृत्व की प्रशंसा करनी चाहिए।” उन्होंने गंभीर को भविष्य में सभी सफलताओं के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

    गंभीर का जवाब

    इस पर गंभीर ने देर रात एक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने थरूर का धन्यवाद करते हुए लिखा कि जब हालात शांत हो जाएंगे, तब कोच के सीमित अधिकारों को लेकर सच्चाई सामने आएगी। गंभीर ने कहा कि इस स्थिति में खुद को खड़ा देखना उनके लिए हास्यास्पद है।

  • ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने का श्रेय लिया, कांग्रेस ने किया मजाक

    ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने का श्रेय लिया, कांग्रेस ने किया मजाक

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भारत-पाकिस्तान तनाव पर दावा

    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए तनाव को खत्म करने का दावा एक बार फिर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। ट्रंप के इस नए बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ज़ोरदार हमला किया है। कांग्रेस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप अब तक इस प्रकार का दावा 70 बार कर चुके हैं, जबकि भारत सरकार ने इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। वाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने दुनिया की आठ लंबी चल रही लड़ाइयों को समाप्त कराया है।

    भारत-पाक के संदर्भ में ट्रंप का बयान

    ट्रंप ने कहा, “भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। मैंने देखा कि दोनों देश परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। यदि मैं हस्तक्षेप नहीं करता, तो करोड़ों निर्दोष लोग मारे जाते।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने 10 महीनों के दौरान कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया और इजरायल-ईरान जैसे आठ महत्वपूर्ण संघर्षों को सुलझाया है।

    कांग्रेस का तीखा प्रतिरोध

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ट्रंप और मोदी की मित्रता पर तंज किया। उन्होंने लिखा, “हाल ही में यह संख्या 68 थी, लेकिन अब यह बढ़कर 70 हो गई है। प्रधानमंत्री के ‘अच्छे दोस्त’ ने यह फिर से दावा किया है कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के अचानक रूकने का श्रेय उन्हें मिलता है।”

    नोबेल शांति पुरस्कार की आकांक्षा

    अपने बयान में ट्रंप ने यह भी व्यक्त किया कि उन युद्धों को रुकवाने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकने से लगभग 1.5 से 2 करोड़ लोगों की जान बचाई गई है, जो उनके लिए किसी भी पुरस्कार से बड़ी बात है।

    भारत सरकार का रुख

    यह ध्यान देने योग्य है कि भारत सरकार ने हमेशा कहा है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। फिर भी, 10 मई 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता के फलस्वरूप दोनों देशों ने पूर्ण युद्धविराम पर सहमति जताई है। कांग्रेस का आरोप है कि ट्रंप के इस प्रकार के बार-बार दावे भारतीय संप्रभुता और प्रधानमंत्री के दावों पर सवाल खड़ा करते हैं।

  • महाराष्ट्र: निकाय चुनाव में कांग्रेस ने उद्धव-शरद गुट को पीछे छोड़ा, MVA में बदलाव के संकेत

    महाराष्ट्र: निकाय चुनाव में कांग्रेस ने उद्धव-शरद गुट को पीछे छोड़ा, MVA में बदलाव के संकेत

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव: राजनीतिक उठापटक का सिलसिला जारी

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में हाल ही में संपन्न निकाय चुनावों के परिणामों के बाद स्थिति फिर से बदलती दिखाई दे रही है। विभिन्न नगर निगमों में मेयर पद को लेकर पार्टी के बीच वार्ताएँ चल रही हैं। इसमें विशेष रूप से बीएमसी के मेयर पद को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। इस पद को पाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सक्रियता बढ़ी है।

    कांग्रेस का नया राजनीतिक समीकरण

    निकाय चुनावों में कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे और शरद पवार के गुटों को पीछे छोड़ते हुए अपने लिए एक मजबूत स्थिति बनाई है। यह चुनाव परिणाम न केवल कांग्रेस के लिए एक उत्साहजनक संकेत हैं, बल्कि महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर भी समीकरण बदलने की संभावनाएँ उत्पन्न कर रहे हैं। इस बदलाव के चलते भविष्यात की राजनीति में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    महाराष्ट्र के अन्य नगर निगमों की स्थिति

    महाराष्ट्र के विभिन्न नगर निगमों में राजनीतिक दलों के बीच परस्पर प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। प्रत्येक पार्टी अपने-अपने समर्थकों को सक्रिय करने में लगी है, ताकि वे अपनी स्थिति को मजबूत बना सकें। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा दल अपनी प्रभावशीलता बनाए रख पाता है और कौन सा आगे बढ़ता है।