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  • रणवीर सिंह ने कांटारा विवाद पर बिना शर्त माफी मांगी

    रणवीर सिंह ने कांटारा विवाद पर बिना शर्त माफी मांगी

    रणवीर सिंह की माफी: कर्नाटक हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल करेंगे

    मुंबई: आदित्य धर द्वारा निर्देशित फिल्म धुरंधर 2 की सफलता के बीच, अभिनेता रणवीर सिंह 10 अप्रैल 2026 को कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक हलफनामा पेश करेंगे। इस हलफनामे में वे फिल्म कांतारा 2 दैव दृश्य की मिमिक्री के लिए बिना शर्त माफी मांगेंगे। बताया जा रहा है कि फरवरी महीने में रणवीर के खिलाफ कन्नड़ समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद अभिनेता पर एक एफआईआर भी दर्ज की गई थी, जिसके चलते उन्होंने राहत के लिए उच्च न्यायालय का सहारा लिया।

    रणवीर सिंह की सोशल मीडिया पर माफी

    रणवीर सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से माफी मांगी थी। उन्होंने कहा, ‘मेरा मकसद ऋषभ शेट्टी के शानदार अभिनय की सराहना करना था, जो हमारी संस्कृति और परंपरा का सम्मान करते हैं।’ इसके साथ ही उन्होंने आगे लिखा, ‘यदि मेरी किसी टिप्पणी से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो मैं दिल से माफी मांगता हूं।’ इस पोस्ट के बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि अभिनेता के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

    कोर्ट में वकील का बयान

    कोर्ट में रणवीर के वकील ने बताया कि वे अभिनेता को मैसूर के चामुंडी मंदिर जाकर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगने के लिए मनाने का प्रयास करेंगे। इस पर शिकायतकर्ता के वकील प्रशांत मेथल ने तर्क दिया कि रणवीर की माफी एक दिखावटी कदम है, क्योंकि उन्होंने इंस्टाग्राम पर पोस्ट के माध्यम से माफी मांगी थी, न कि मौखिक रूप से। मेथल ने इसे वास्तविक पछतावे या हार्दिक माफी नहीं माना।

    ऋषभ शेट्टी की ‘धुरंधर 2’ की तारीफ

    दिलचस्प बात यह है कि कांतारा के निर्देशक ऋषभ शेट्टी ने हाल ही में रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि फिल्म की कहानी और रणवीर के साथ सभी कलाकारों का प्रदर्शन बहुत ही उत्कृष्ट है।

  • ‘सरके चुनर तेरी सरके’ गाने को लेकर विवाद, नोरा-संजय दत्त की मुश्किलें बढ़ सकती हैं

    ‘सरके चुनर तेरी सरके’ गाने को लेकर विवाद, नोरा-संजय दत्त की मुश्किलें बढ़ सकती हैं

    नया गाना ‘सरके चुनर तेरी सरके’ विवादों के घेरे में

    हाल ही में नोरा फतेही और संजय दत्त का नया गाना **’सरके चुनर तेरी सरके’** रिलीज हुआ है, जो शुरू से ही विवादों का विषय बना हुआ है। इस गाने की कंटेंट को लेकर कई लोगों ने आपत्तियां जताई हैं। अब, नेशनल कमीशन फॉर वूमेन (NCW) ने भी इस मुद्दे पर गंभीरता से एक्शन लिया है, जिससे अभिनेता संजय दत्त और अभिनेत्री नोरा फतेही की परेशानी बढ़ सकती है।

    NCW की कार्रवाई

    नेशनल कमीशन फॉर वूमेन ने गाने के विषय में आपत्ति जताते हुए संबंधित अधिकारियों को इस पर ध्यान देने के लिए कहा है। कमीशन के इस कदम से यह साफ हो गया है कि गाने की प्रस्तुति के कारण सामाजिक मूल्यों पर आघात हो सकता है। इससे दोनों सितारों को कानूनी और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    गाने की प्रतिक्रियाएं

    इस गाने को लेकर दर्शकों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई लोगों ने इसे मनोरंजन का एक अच्छा साधन माना है, जबकि कुछ ने इसके बोल और विषय वस्तु पर सवाल उठाए हैं। विवादित विषय पर चर्चा होने से गाने की लोकप्रियता पर भी असर देखने को मिल सकता है।

  • राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर के जरिए जवाब दिया

    राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर के जरिए जवाब दिया

    सियासत में गरما गरम बहस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रोटोकॉल उल्लंघन

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति का “अपमान” करने का आरोप लगाया है। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीरें दिखाकर पलटवार किया।

    तस्वीरों के जरिए पलटवार

    ममता बनर्जी ने कोलकाता में धरने के दौरान एक तस्वीर प्रस्तुत की, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति खड़ी हैं। उन्होंने इसे प्रोटोकॉल के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि उनका ऐसा करना हमारे संस्कारों में नहीं है।

    अपमान की संस्कृति पर टिप्पणी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तस्वीर से यह स्पष्ट है कि भाजपा एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देती है, जिसमें राष्ट्रपति का अपमान किया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राष्ट्रपति और भारतीय संविधान का पूरा सम्मान करती है, और राज्य सरकार को इसमें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति की नाराजगी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को बागडोगरा एयरपोर्ट पर पहुंची थीं, जहां उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेना था। बताया जा रहा है कि वहां मुख्यमंत्री या राज्य के किसी मंत्री का न होना राष्ट्रपति को परेशान कर गया था। उन्होंने कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया।

    राज्य सरकार की सफाई

    ममता बनर्जी ने इस विवाद को लेकर कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि निजी आयोजकों ने भी उचित समन्वय नहीं किया था। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर अव्यवस्था के लिए आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराया।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक महिला आदिवासी नेता और देश की राष्ट्रपति का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की नागरिकों की जागरूकता इस घटना को कभी नहीं भूलेगी। यह बयान मोदी ने दिल्ली में दिल्ली मेट्रो के नए कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद दिया।

    इस पूरे विवाद के चलते केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और भी बढ़ गया है।

  • उमर अब्दुल्ला ने कहा, भारत-पाक मैचों को युद्ध के रूप में दिखाना विवादों का कारण है

    उमर अब्दुल्ला ने कहा, भारत-पाक मैचों को युद्ध के रूप में दिखाना विवादों का कारण है

    उमर अब्दुल्ला का बड़ा बयान: भारत-पाक मैचों पर राजनीति का प्रभाव

    श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को पाकिस्तान द्वारा टी20 विश्व कप में भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने इसे खेल और राजनीति के जटिल रिश्ते का परिणाम बताया। अब्दुल्ला के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबलों को अक्सर युद्ध की तरह प्रस्तुत किया जाता है, जिससे खेल को राजनीति से जोड़ने की प्रवृत्ति और विवादों का जन्म होता है।

    खेल में बढ़ती राजनीतिक प्रवृत्तियाँ

    अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि “भारत और पाकिस्तान के मैच को कभी भी सामान्य खेल की तरह नहीं दिखाया जाता।” उनका मानना है कि जब भारत अन्य देशों के खिलाफ खेलता है, तो उस पर उतना ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले हमेशा नाटकीय ढंग से दर्शाए जाते हैं, जिससे विवादों की स्थिति उत्पन्न होती है।

    ICC की चेतावनी और पाकिस्तान का निर्णय

    इस बीच, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि अगर वह 15 फरवरी को कोलंबो में भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार करता है, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। पाकिस्तान ने यह निर्णय अपनी सरकार के निर्देश पर लिया है, लेकिन अभी तक ICC को इसकी औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है।

    कानूनी कार्रवाई का खतरा

    सूत्रों के अनुसार, यदि पाकिस्तान ने मैच का बहिष्कार किया, तो टूर्नामेंट के आधिकारिक प्रसारक जियोस्टार की ओर से कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके साथ ही, ICC पाकिस्तान का सालाना राजस्व हिस्सा (लगभग 3.5 करोड़ डॉलर) भी रोक सकता है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के एक सूत्र ने बताया कि बोर्ड ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली थी, और वे इस स्थिति के गंभीर परिणामों के लिए तैयार हैं।

  • बांग्लादेश ने ICC अधिकारी को वीजा देने से किया इनकार, नया विवाद उठाया

    बांग्लादेश ने ICC अधिकारी को वीजा देने से किया इनकार, नया विवाद उठाया

    भारत-बांग्लादेश क्रिकेट विवाद: वीजा मुद्दा और बढ़ता तनाव

    नई दिल्ली: क्रिकेट के मैदान पर भारत और बांग्लादेश के बीच आगामी मुकाबले से पहले दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों के बीच विवाद उत्पन्न हो चुका है, जिसका असर दोनों के संबंधों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। खासकर आगामी टी20 वर्ल्ड कप के मद्देनजर जो टकराव शुरू हुआ है, वह फिलहाल थमता हुआ नहीं दिख रहा है।

    बांग्लादेश का वीजा विवाद

    हाल ही में, बांग्लादेश के तेज गेंदबाजों के लिए एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी के एक अधिकारी को वीजा देने में देरी करने का फैसला लिया है, जिसने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव को बढ़ाने का काम कर रहा है।

    क्रिकेट प्रतियोगिता पर असर

    इस मामले का प्रभाव आगामी मुकाबले और टी20 वर्ल्ड कप पर पड़ सकता है। क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह एक चिंताजनक विकास है, जो खेल की भावना को प्रभावित कर सकता है। दोनों टीमों के बीच खेल भावना, प्रतिस्पर्धा और समर्पण का प्रतीक इस विवाद ने खेल जगत में हलचल मचा दी है।

  • सोमनाथ मंदिर विवाद: बीजेपी ने नेहरू, ग़ज़नी और ख़िलजी को जिम्मेदार ठहराया

    सोमनाथ मंदिर विवाद: बीजेपी ने नेहरू, ग़ज़नी और ख़िलजी को जिम्मेदार ठहराया

    सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर भाजपा का हमला

    नई दिल्ली। भाजपा ने एक बार फिर से सोमनाथ मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू पर निशाना साधा है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार को कहा कि नेहरू ने अपनी तुष्टीकरण की राजनीति के कारण स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने दावा किया कि सोमनाथ मंदिर को अतीत में महमूद गजनवी और अलाउद्दीन खिलजी द्वारा लूटा गया, लेकिन स्वतंत्र भारत में नेहरू को भगवान सोमनाथ से सबसे अधिक नफरत थी।

    नेहरू का पत्र और दावा

    त्रिवेदी ने पंडित नेहरू द्वारा 21 अप्रैल 1951 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को लिखे पत्र का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने खान को प्रिय नवाबजादा कहते हुए सोमनाथ के दरवाजों की कहानी को ग़लत बताया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने यह भी लिखा था कि सोमनाथ मंदिर का निर्माण जैसी कोई गतिविधि नहीं हो रही थी। त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि आखिर नेहरू को लियाकत अली खान से ऐसा क्या डर था कि उन्हें सोमनाथ मंदिर के संबंध में पत्र लिखना पड़ा।

    सरकारी मदद का मना करना

    सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि पंडित नेहरू ने भारतीय दूतावासों को पत्र लिखकर सोमनाथ ट्रस्ट को मदद देने से मना कर दिया। इसमें अभिषेक समारोह के लिए नदी से पानी की अनुरोध भी शामिल था। उन्होंने कहा कि नेहरू ने मंदिर में अभिषेक के लिए सिंधु नदी के पानी का उपयोग करने की अनुमति देने से मना कर दिया और भविष्य में ऐसे किसी अनुरोध से पहले अनुमति लेने का आदेश दिया।

    कांग्रेस का विरोध और स्पष्टीकरण

    कांग्रेस ने भाजपा के इन दावों को झूठा बताकर उनका विरोध किया है। पार्टी ने कहा कि पंडित नेहरू ने महात्मा गांधी और सरदार पटेल की सहमति से यह नीति अपनाई थी कि धार्मिक स्थलों के निर्माण में सरकारी धन का उपयोग नहीं होना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक वीडियो साझा किया जिसमें इन आरोपों का विस्तार से उत्तर दिया गया है। रमेश ने यह भी सवाल किया कि राम मंदिर के शिलान्यास में तत्कालीन राष्ट्रपति कोविंद और उद्घाटन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को आमंत्रित न करने का कारण क्या था।

  • नई दिल्ली: संसद में ई-सिगरेट विवाद

    नई दिल्ली: संसद में ई-सिगरेट विवाद

    नई दिल्ली। संसद में इन दिनों ई-सिगरेट के मुद्दे को लेकर बहस जारी है। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र लिखकर गंभीर शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने आवेनुसार तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक सांसद पर संसद के नियमों और विधायी कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

    अनुराग ठाकुर की शिकायत

    अनुराग ठाकुर ने पत्र में इस घटना का विस्तृत वर्णन किया है और कहा कि इस प्रकार के कार्य संसद की मर्यादा और कानून की अवमानना के समान हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए और नियमों के उल्लंघन के लिए उचित कार्रवाई की जाए। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब संसद परिसर में टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय को सिगरेट पीते देखा गया, जिसके बाद यह राजनीतिक विवाद में बदल गया।

    सुगात रॉय की प्रतिक्रिया

    सुगात रॉय ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि उन्हें नहीं लगता कि उन पर कोई नियम लागू होता है क्योंकि वह बाहर सिगरेट पी रहे थे। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और गजेन्द्र सिंह शेखावत ने उनके इस क्रियाकलाप पर आपत्ति जताई, जिसमें शेखावत ने कहा कि सांसदों को सोच-समझकर कार्य करना चाहिए ताकि जनता को सही संदेश मिले।

    टीएमसी सांसदों का पलटवार

    इस घटना के बाद टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भाजपा पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि संसद परिसर में कई सांसदों ने धूम्रपान किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक भाजपा सांसद सांसद निधि में 40% कमीशन लेते हैं।

    अनुराग ठाकुर का दावा

    गौरतलब है कि प्रश्नकाल के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने तृणमूल कांग्रेस सांसद पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने स्पीकर से मामले की जांच कराने की मांग की, जिस पर स्पीकर ने आश्वस्त किया कि नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उचित जांच की जाएगी।

  • अरिजीत के रोमांटिक गीत में रणवीर और सारा की शानदार केमिस्ट्री

    अरिजीत के रोमांटिक गीत में रणवीर और सारा की शानदार केमिस्ट्री

    रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’: गाने ने मचाई धूम, विवादों में भी घिरी

    मुंबई: रणवीर सिंह की आगामी फिल्म धुरंधर ने हाल ही में दर्शकों में धूम मचाई है। फिल्म का नया गाना ‘गहरा हुआ’ रिलीज होते ही तेजी से लोकप्रिय हो गया है। यह गाना अरिजीत सिंह की मधुर आवाज में है, जो पहाड़ी लैंडस्केप पर फिल्माए गए रोमांटिक दृश्यों के साथ दर्शकों को एक विशेष अनुभव प्रदान करता है।

    गाना ‘गहरा हुआ’ रिलीज हुआ

    फिल्म धुरंधर का नया गाना ‘गहरा हुआ’ मेकर्स ने सोशल मीडिया पर जारी किया। शशवत सचदेव के संगीत के साथ अरिजीत सिंह की भावनात्मक आवाज गाने को गहराई देती है। वीडियो में, रणवीर सिंह और सारा अर्जुन पहाड़ों के बीच कार ड्राइव करते हुए दिखाई देते हैं, जो गाने की थीम से मेल खाता है। यह गाना फिल्म की रिलीज से पहले रोमांटिक माहौल तैयार करने में सहायक है।

    रणवीर सिंह ने गाने का किया परिचय

    रणवीर सिंह ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ‘अरिजीत सिंह के दिल की गहराइयों से… पेश है ‘गहरा हुआ’।’ उन्होंने गाने का 30-सेकंड का टीजर भी साझा किया, जिसमें दोनों मुख्य कलाकारों के बीच की केमिस्ट्री दिखती है। अभिनेता के पोस्ट के बाद, गाने को तेज़ी से व्यूज मिलना शुरू हो गए, जिससे दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

    फिल्म में विवाद का साया

    फिल्म धुरंधर अपने गानों और कलाकारों के कारण ही नहीं, बल्कि एक विवाद के कारण भी सुर्खियों में है। शहीद मेजर मोहित शर्मा के परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने कहा है कि फिल्म उनकी असली कहानी से प्रेरित लगती है। उनका तर्क है कि किसी शहीद की निजी जिंदगी को बिना अनुमति के व्यावसायिक रूप से नहीं प्रस्तुत किया जा सकता। परिवार का अनुरोध है कि उन्हें फिल्म की रिलीज से पहले निजी स्क्रीनिंग दिखाई जाए।

    शहीद परिवार की आपत्ति

    परिवार ने कोर्ट में कहा कि मेजर मोहित शर्मा की शहादत देश के लिए गर्व का विषय है और इसे किसी व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना अनुचित है। याचिका में कहा गया है, ‘एक शहीद कोई व्यावसायिक वस्तु नहीं है।’ परिवार का आग्रह है कि फिल्म की रिलीज पर अस्थायी रोक लगाई जाए ताकि उनके सवालों का समाधान हो सके।

    फिल्म की स्टारकास्ट और रिलीज

    धुरंधर में रणवीर सिंह के साथ संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर. माधवन और अर्जुन रामपाल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फिल्म 5 दिसंबर को रिलीज होने वाली है और मेकर्स का कहना है कि यह एक बड़े पैमाने पर बनी भावनात्मक और एक्शन-प्रधान कहानी है। विवाद के बावजूद, फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है, और ‘गहरा हुआ’ जैसे गाने इस उत्साह को और बढ़ा रहे हैं।

  • गौतम गंभीर को पिच विवाद में मिला समर्थन, पूर्व क्रिकेटर ने आलोचकों को दी नसीहत

    गौतम गंभीर को पिच विवाद में मिला समर्थन, पूर्व क्रिकेटर ने आलोचकों को दी नसीहत

    भारत और दक्षिण अफ्रीका के पहले टेस्ट मैच में उठे सवाल

    नई दिल्ली। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेले गए पहले टेस्ट मैच ने क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। इस मैच में, भारतीय टीम ने 124 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए खराब प्रदर्शन किया और मैच तीन दिन में समाप्त हो गया। भारतीय बल्लेबाजों की इस अचानक हार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बल्लेबाजों के प्रदर्शन पर चर्चा

    भारतीय टीम ने जब 124 रनों का लक्ष्य रखा, तो उम्मीद थी कि बल्लेबाज आसानी से इसे हासिल कर लेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और पूरी टीम मात्र कुछ ही ओवरों में आउट हो गई। इस प्रदर्शन ने क्रिकेट टीम की रणनीति और बल्लेबाजी क्रम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रदर्शन से टीम की मानसिकता पर भी असर पड़ सकता है।

    पिच विवाद को लेकर समर्थन

    इस मैच के दौरान पिच पर भी विवाद उठ खड़ा हुआ। कई पूर्व क्रिकेटरों ने पिच के हालात को लेकर तीखी टिप्पणियां की हैं। गौतम गंभीर, जो इस मुद्दे पर आलोचना का सामना कर रहे थे, ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह स्थिति अनुभवहीनता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

    आलोचकों का जवाब

    गौतम गंभीर के समर्थन में कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी अपनी राय रखी है। इन विशेषज्ञों ने कहा है कि खिलाड़ियों को एक ऐसी चुनौती का सामना करना पड़ता है, जो कभी-कभी उनकी क्षमता से बाहर हो सकती है। उनका मानना है कि हमारी टीम में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें मजबूती और आत्मविश्वास के साथ खेलना होगा।

  • दिग्गज निर्देशक राजामौली के बयान से ‘वाराणसी’ को मिल रही चर्चा

    दिग्गज निर्देशक राजामौली के बयान से ‘वाराणसी’ को मिल रही चर्चा

    एसएस राजामौली ने ‘वाराणसी’ के फर्स्ट लुक लॉन्च पर ईश्वर में न विश्वास होने का किया जिक्र, विवाद हुआ शुरू

    नई दिल्ली: मशहूर फिल्म निर्देशक एसएस राजामौली ने अपनी नई फिल्म ‘वाराणसी’ के लॉन्च इवेंट में एक ऐसा बयान दिया, जिसने सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों के लिए जाने जाने वाले राजामौली ने कहा कि वह ईश्वर में विश्वास नहीं रखते, जिससे कुछ आलोचकों की नाराजगी बढ़ गई है।

    कार्यक्रम में तकनीकी खराबियों और फुटेज लीक होने की वजह से राजामौली भावुक और कुछ हद तक नाराज भी नजर आए। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा, ‘यह मेरे लिए अहम क्षण है। मेरा ईश्वर पर विश्वास नहीं है। मेरे पिता का कहना था कि भगवान हनुमान सब कुछ संभालेंगे, लेकिन अब मुझे गुस्सा आ रहा है कि क्या वास्तव में ऐसा है?’ इस पर उन्होंने और बताया कि उनकी पत्नी भगवान हनुमान में गहरा विश्वास रखती हैं, जो उन्हें और सोचने पर मजबूर कर गया।

    राजामौली का यह बयान चर्चा का विषय बन गया है। कुछ दर्शकों ने उनकी आलोचना की, जबकि कई लोगों ने उनका समर्थन भी किया।

    सोशल मीडिया पर उठे सवाल: ‘नास्तिक हैं तो पौराणिक फिल्में क्यों?’

    बयान से प्रतिक्रिया मिलने के बाद, इंटरनेट पर लोगों ने अपनी राय प्रस्तुत की। कई उपयोगकर्ताओं का कहना था कि राजामौली की फिल्में ‘आरआरआर’, ‘बाहुबली’ से लेकर ‘वाराणसी’ तक पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं, इसलिए उनका यह तर्क विरोधाभासी है। एक यूजर ने स्पष्ट किया कि यदि वह भगवान में विश्वास नहीं करते हैं, तो ‘वाराणसी’ जैसे नाम और पौराणिक पात्रों का प्रयोग क्यों किया जा रहा है? वहीं, अन्य एक यूजर ने उनके रक्षक के रूप में कहा कि नास्तिक होना गलत नहीं है और वह सिर्फ पौराणिक कथाओं से प्रेरणा लेते हैं।

    महाकाव्यों के प्रति राजामौली का प्रेम

    इस विवाद के बीच, राजामौली ने रामायण और महाभारत के प्रति अपने गहरे जुड़ाव का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनका यह प्रोजेक्ट हमेशा से उनके सपनों का हिस्सा रहा है। उन्होंने यह भी साझा किया कि महेश बाबू जब भगवान राम के लुक में फोटोशूट के लिए आए, तो यह क्षण उनके लिए विशेष था। उनकी बातों में कृष्ण जैसा आकर्षण और राम जैसी शांति का जिक्र आया।

    ‘वाराणसी’ की 60 दिनों की कठिन शूटिंग

    राजामौली ने कहा कि इस फिल्म में कुछ पौराणिक दृश्यों को फिर से रचने में बहुत मेहनत लगी। हर दिन नई चुनौतियां सामने आईं और प्रत्येक दृश्य को एक अलग फिल्म बनाने के समान महसूस किया। जानकारी के अनुसार, फिल्म 2027 की गर्मियों में रिलीज होगी और इसमें महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा जोनास और पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिकाओं में दिखाई देंगे। राजामौली का यह बयान विवाद का कारण बना हुआ है, लेकिन उनकी फिल्म ‘वाराणसी’ को लेकर दर्शकों में उत्सुकता भी लगातार बढ़ रही है।

  • बिग बॉस 19: फरहाना ने बिग बॉस हाउस में पार की सारी सीमाएं…

    बिग बॉस 19: फरहाना ने बिग बॉस हाउस में पार की सारी सीमाएं…

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    बिग बॉस (Bigg Boss 19) हमेशा से मनोरंजन और विवादों का केंद्र रहा है। इस सीजन में कश्मीर की प्रतिभाशाली कंटेस्टेंट फरहाना भट्ट (Farhana Bhatt) ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। प्रारंभ में उनका खेल अपेक्षाकृत कमजोर नजर आया, जिसके कारण उन्हें जल्दी ही शो से बाहर होना पड़ा। हालांकि, मेकर्स ने उन्हें फिर से सीक्रेट रूम में भेजा, और उनकी वापसी ने सबकुछ बदल दिया।

    फरहाना का आक्रामक स्वभाव चर्चा का विषय 🔥

    फरहाना का आक्रामक और विवादों से भरा व्यक्तित्व शो में सबसे अधिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। वे अक्सर अन्य प्रतियोगियों के साथ वाद-विवाद करती नजर आती हैं। 61 वर्षीय कुनिका सदानंद (Kunickaa Sadanand) के साथ उनकी कई बार तीखी नोकझोंक हुई है। कभी-कभी वे अशनूर कौर (Ahsnoor Kaur) को “छिपकली” कहती हैं, तो कभी अभिषेक बजाज (Abhishek Bajaj) को “सेक्रेटरी” करार देती हैं। सलमान खान ने भी उनकी इन हरकतों की आलोचना की है, यह कहते हुए कि उनकी “पीस एक्टिविस्ट” की छवि सवालों के घेरे में है।

    सामने आई विवादास्पद घटना 💦

    हाल ही में फरहाना ने अभिषेक बजाज पर पानी फेंका, जिससे घर के भीतर एक नई विवादित स्थिति उत्पन्न हो गई। एक प्रोमो में उन्हें अभिषेक को “नौकर” और “गधा” कहकर बुलाते हुए दिखाया गया। इस कार्य की घरवालों ने भी निंदा की है। सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें नकारात्मक कंटेस्टेंट के रूप में देख रहे हैं, लेकिन सच यह है कि हर एपिसोड में वे दर्शकों को भरपूर मनोरंजन प्रदान कर रही हैं।

    बिग बॉस की अलंकारिक कहानी 🎤

    पिछले हफ्ते जब वे घर की कप्तान बनीं, तब भी उनके निर्णय और आक्रामकता ने सुर्खियां बटोरीं। बिग बॉस के इतिहास में ऐसे कई कंटेस्टेंट्स रहे हैं जिन्होंने शो को मसाला दिया है, जैसे प्रियंका जग्गा, पूजा मिश्रा, निक्की तंबोली, और अन्य। ये सभी अपनी विवादित हरकतों के लिए जाने जाते थे, और कुछ तो सलमान खान की फटकार सुनकर घर से बाहर तक हो गए थे।

  • वीज़ा विवाद के बीच भारतीय मूल के दो प्रोफेशनल्स को अमेरिकी कंपनियों में CEO बनाया

    वीज़ा विवाद के बीच भारतीय मूल के दो प्रोफेशनल्स को अमेरिकी कंपनियों में CEO बनाया

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    दो भारतीय मूल के नेता बनेंगे प्रमुख पदों पर

    अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा एच-1बी वीज़ा नियमों को सख्त करने के बीच, दो प्रमुख अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय मूल के नेताओं को उच्च पदों पर नियुक्त किया है। इस कदम के माध्यम से ये कंपनियां दिखाना चाहती हैं कि वे प्रदर्शन को प्राथमिकता देती हैं और किसी भी बाहरी दबाव के सामने नहीं झुकेंगी।

    टी-मोबाइल में श्रीनिवास गोपालन का पद

    भारतीय मूल के श्रीनिवास गोपालन 1 नवंबर से टी-मोबाइल के नए सीईओ बनेंगे। कंपनी ने उन्हें प्रमोशन देकर यह दर्शाया है कि वे एच-1बी वीज़ा नियमों का सकारात्मक जवाब दे रही हैं। गोपालन, जो वर्तमान में मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) हैं, अपने अनुभव के बल पर माइक सीवर्ट का स्थान लेंगे।

    गोपालन ने लिंक्डइन पर एक पोस्ट में व्यक्त किया कि वह इस भूमिका को निभाने के लिए गर्व महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कंपनी की उपलब्धियों की सराहना की और बताया कि टी-मोबाइल ने ग्राहक सेवा में नई ऊंचाइयों को छुआ है।

    गोपालन का अनुभव

    गोपालन का करियर बेहद समृद्ध है। उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर, भारती एयरटेल, वोडाफोन, और डॉयचे टेलीकॉम जैसे संस्थानों में काम किया है, जहां उन्होंने कंपनी की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। टी-मोबाइल में, उन्होंने 5G और AI जैसी प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व किया है।

    सीवर्ट ने गोपालन को “तेज-तर्रार और प्रभावशाली” बताया और यह विश्वास जताया कि वह ग्राहक अनुभव को और बेहतर करेंगे।

    मोल्सन कूर्स में राहुल गोयल की नियुक्ति

    दूसरी तरफ, शिकागो स्थित मोल्सन कूर्स ने राहुल गोयल को 1 अक्टूबर से अपना नया सीईओ नियुक्त किया है। गोयल 24 वर्षों से इस कंपनी से जुड़े हुए हैं और भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद अमेरिका में बिजनेस की शिक्षा ली थी।

    मोल्सन कूर्स के बोर्ड के अध्यक्ष डेविड कूर्स ने कहा कि गोयल का अनुभव और दृष्टि कंपनी के विकास में महत्वपूर्ण हैं।

    राजनीतिक संदर्भ में इन नियुक्तियों का महत्व

    यह नियुक्तियाँ इस सन्दर्भ में महत्वपूर्ण हैं कि अमेरिका में बड़ी कंपनियों में भारतीय मूल के लोगों की नियुक्तियों पर राजनीतिक संवेदनशीलता बनी हुई है। MAGA समर्थक कभी-कभी इन व्यक्तियों को इस तरह से चित्रित करते हैं कि वे अमेरिकी नौकरियों पर खतरा बन रहे हैं।

    इस समय, भारतीय मूल के पेशेवरों ने अमेरिका की कई प्रमुख कंपनियों का नेतृत्व किया है, जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट, अल्फाबेट और फॉर्च्यून 500 कंपनियाँ, जो इस प्रवृत्ति का संकेत देती हैं।