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  • बिहार में JDU ने MP-राजस्थान मॉडल के खिलाफ स्पष्ट किया, CM नीतीश के उत्तराधिकारी पर चर्चा प्रारंभ

    बिहार में JDU ने MP-राजस्थान मॉडल के खिलाफ स्पष्ट किया, CM नीतीश के उत्तराधिकारी पर चर्चा प्रारंभ

    बिहार की राजनीति में हलचल: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे पर अटकलें

    पटना। बिहार की राजनीति में इस समय काफी गतिविधियाँ देखने को मिल रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की संभावनाओं पर चर्चा जोरों पर है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को यह उम्मीद थी कि नीतीश कुमार 26 मार्च को उनकी “समृद्धि यात्रा” का समापन करने के बाद अपने पद से इस्तीफा देंगे।

    मुख्यमंत्री की संभावित उत्तराधिकार की चर्चाएँ

    जदयू (जनता दल यूनाइटेड) ने स्पष्ट किया है कि वह बिहार में राजस्थान या मध्य प्रदेश जैसे राजनीतिक प्रयोगों से बचना चाहती है। पार्टी के अंदर नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएँ प्रारंभ हो गई हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है।

    भाजपा की रणनीति पर असर

    भाजपा नेताओं का मानना है कि यदि नीतीश कुमार अपने पद से हटते हैं, तो इससे उनकी पार्टी की स्थिति पर असर पड़ेगा। वहीं, जदयू के अंदर भी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है।

  • जमशेदपुर: XLRI में मंथन: ‘जीवन कौशल’ है जरूरी, NEP के तहत चुनौतियों पर चर्चा

    जमशेदपुर: XLRI में मंथन: ‘जीवन कौशल’ है जरूरी, NEP के तहत चुनौतियों पर चर्चा

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    जमशेदपुर में XLRI में ‘जीवन कौशल’ पर सेमिनार

    जमशेदपुर: मंगलवार को XLRI के फादर प्रभु सभागार में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ, जिसमें उच्च प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में ‘जीवन कौशल’ को लागू करने की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा की गई। आयोजन नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित और सीड्स (SEEDS) द्वारा आयोजित किया गया था। इस सेमिनार का मुख्य विषय ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के संदर्भ में जीवन कौशल को लागू करने की समस्याएं’ था।

    शैक्षणिक उत्कृष्टता से अधिक महत्वपूर्ण हैं जीवन कौशल: डॉ. निधि मिश्रा

    कार्यक्रम की मुख्य वक्ता, XLRI की फैकल्टी डॉ. निधि मिश्रा ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि आजकल के अभिभावक और शिक्षक सिर्फ अंक और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्राथमिकता दे रहे हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए ‘जीवन कौशल’ किताबी ज्ञान से कहीं अधिक आवश्यक है। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें बच्चों को व्यवहारिक ज्ञान के लिए तैयार करना चाहिए।

    ग्रामीण शिक्षा में जागरूकता की जरूरत

    कोल्हान विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. शुक्ला मोहंती ने ग्रामीण शिक्षा प्रणाली पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि सरकारी और ग्रामीण स्कूलों में जीवन कौशल को सही तरीके से लागू करने के लिए और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को इसके प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। वहीं, ‘सीड्स’ की सचिव डॉ. शुभ्रा दिवेदी ने भी जीवन कौशल को आधुनिक समय की जरूरत बताया।

    “जीवन जीने का कौशल ही असली कुशलता”

    सेमिनार में पीएमश्री प्लस-2 हाई स्कूल सिमुलडांगा के शिक्षक उमा नाथ सिंह ने सरलता से महत्वपूर्ण संदेश दिया। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति के पास सही जीवन कौशल होने पर ही उसे वास्तव में कुशल माना जाएगा।

    13 स्कूलों के प्रतिनिधि शामिल हुए

    इस सेमिनार में शहर के प्रतिष्ठित विद्यालयों जैसे डीबीएमएस और चिन्मय विद्यालय के विद्यार्थियों, हेडमास्टरों और शिक्षकों ने भाग लिया। पंचायत प्रतिनिधियों, एसएमसी (SMC) सदस्यों और अभिभावकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों के सवालों का समाधान किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में सीड्स की महिला लीडर्स और बीईओ (BEO) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में, कार्यक्रम के संयोजक महानंद झा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

  • शशि थरूर ने ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कहा, ‘कोई औपचारिक नोटिस नहीं है’

    शशि थरूर ने ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कहा, ‘कोई औपचारिक नोटिस नहीं है’

    अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सियासी हलचल तेज

    नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारियों के चलते राजनीतिक गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। इस विषय पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बताया कि उनके साथ इस बारे में कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है, हालांकि उन्हें इस तरह की मंशा के बारे में जानकारी है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जब तक औपचारिक नोटिस दाखिल नहीं किया जाता, इसे एक आधिकारिक खबर मानना उचित नहीं है।

    शशि थरूर की प्रतिक्रिया

    थरूर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “इस मुद्दे पर मेरे साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। मैं जानता हूं कि कुछ लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन यह अभी प्रक्रिया के चरण में है। जब तक कोई दस्तावेज़ दर्ज नहीं किया जाता, तब तक यह कुछ खास नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी अगले कदम के लिए संसदीय प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।

    विपक्ष की कार्य योजना

    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस प्रस्ताव को समाजवादी पार्टी (सपा) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) का समर्थन मिल रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अभी तक अपना रुख नहीं स्पष्ट किया है। कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों के साथ समर्थन जुटाने के लिए लगातार विचारविमर्श कर रही है।

    पर्याप्त संख्या का दावा

    सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पास अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए पर्याप्त सांसद हैं, और यदि एक या दो दल समर्थन नहीं भी करते, तो भी कांग्रेस प्रस्ताव लाने के लिए तैयार है।

    बजट सत्र में तनाव

    बजट सत्र के दौरान, सरकार और विपक्ष के बीच लगातार हंगामा देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके परिणामस्वरूप सदन में तनाव का वातावरण बना हुआ है।

    प्रियंका गांधी का आरोप

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि लोकसभा सही तरीके से कार्य नहीं कर पा रही है और विपक्ष के नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा। प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में स्पीकर महिला सांसदों का अपमान कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा, “स्पीकर को जिस तरह से सफाई देनी पड़ रही है, उससे स्पष्ट है कि उन पर दबाव है। सदन में कांग्रेस की 11 महिला सांसद हैं, जिनमें मैं भी शामिल हूं। सभी गंभीर राजनेता हैं और उनका अपमान स्वीकार्य नहीं है।” प्रियंका ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आ रहे और स्पीकर पर प्रतिक्रिया देने का दबाव बनाया जा रहा है।

  • वंदे मातरम पर संसद में आज चर्चा, पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन

    वंदे मातरम पर संसद में आज चर्चा, पीएम नरेंद्र मोदी करेंगे उद्घाटन

    संसद में ‘वंदे मातरम’ पर विशेष चर्चा शुरू

    नई दिल्ली। संसद का शीतकालीन सत्र जारी है, और आज (08 दिसंबर) को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर विशेष चर्चा का आयोजन किया जाएगा। इस बहस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में करेंगे, जबकि राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह इस पर चर्चा की शुरुआत करेंगे। इस चर्चा के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।

    लोकसभा में 150 वर्ष पुरानी गीत पर चर्चा

    आज लोकसभा में वंदे मातरम पर चर्चा होगी, जो 150 वर्ष पूर्व लिखी गई है। इस ऐतिहासिक गीत के महत्व पर चर्चा का आगाज़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 12 बजे करेंगे। विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई समेत आठ सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा, और चर्चा का समापन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के उद्धबोधन से होगा। उल्लेखनीय है कि सरकार ने 7 नवंबर को इस राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ मनाई थी।

    विभाजन का आरोप

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालही में कहा कि 1937 में वंदे मातरम के टुकड़े किए गए थे, जिससे विभाजन की सोच का बीज बोया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्र-निर्माण के इस महत्वपूर्ण गीत के साथ ऐसा अन्याय क्यों हुआ। उन्होंने माना कि यह सोच आज की पीढ़ी के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।

    इमाम एसोसिएशन का बयान

    संसद में बहस शुरू होने से पहले ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने टिप्पणी की है कि मुस्लिम समुदाय को राष्ट्रगीत से कोई घृणा नहीं है। उनकी आपत्ति धार्मिक मान्यताओं और गीत के अगले हिस्से में मूर्ति पूजा के भाव को लेकर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रगीत की शुरुआती दो पंक्तियों को गाने में किसी मुसलमान को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

    गीत का ऐतिहासिक संदर्भ

    सार्वजनिक रूप से वंदे मातरम का पहला प्रकाशन 7 नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में हुआ। 1882 में यह गीत बंकिम चंद्र चटर्जी के उपन्यास आनंदमठ का हिस्सा बना। बाद में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे संगीतबद्ध किया और यह स्वतंत्रता सेनानियों के लिए आजादी की लड़ाई में प्रेरणा का स्रोत बना। भारत सरकार ने 24 जनवरी, 1950 को वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया।

  • सत्र से पहले पीएम ने विपक्ष से सार्थक चर्चा की प्राथमिकता जताई

    सत्र से पहले पीएम ने विपक्ष से सार्थक चर्चा की प्राथमिकता जताई

    शीतकालीन सत्र की शुरुआत पर पीएम मोदी का वक्तव्य

    नई दिल्ली. पारliament के शीतकालीन सत्र के आरंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह सत्र केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की दिशा में सकारात्मक ऊर्जा लाने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा, “भारत में लोकतंत्र की भावना को सदैव प्रकट किया गया है, जिससे इसके प्रति विश्वास और मजबूत होता है। हाल के बिहार चुनाव में मतदान की वृद्धि भी लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है। माताओं और बहनों की भागीदारी एक नई उम्मीद उत्पन्न कर रही है, जिसे दुनिया बारीकी से देख रही है।”

    विपक्ष से सकारात्मक चर्चा की अपील

    पीएम मोदी ने विपक्ष से अपील की कि वे पराजय की निराशा से बाहर निकलकर सार्थक चर्चा करें। उन्होंने कहा कि कुछ दल ऐसे हैं जो अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पाते। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से आग्रह किया कि शीतकालीन सत्र में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें और अपनी जिम्मेदारियों को समझें। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सदन में चर्चा का स्तर ऊँचा रहे।

    नई पीढ़ी के सांसदों को महत्वपूर्ण भूमिका

    उन्होंने नई पीढ़ी के सांसदों की क्षमताओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह आवश्यक है कि संसद में सभी सांसदों को अभिव्यक्ति का अधिकार मिले, ताकि वे अपने अनुभवों से सदन को लाभान्वित कर सकें।”

    नारे से नीति की आवश्यकता

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सदन में संवाद के लिए नीति की आवश्यकता है, न कि केवल नारेबाजी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रनिर्माण के लिए सकारात्मक सोच महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल के दिनों में सदन का इस्तेमाल जनादेश की चर्चा से अधिक चुनावी राजनीति के लिए किया जा रहा है, जिसे बदलने की आवश्यकता है।

    शीतकालीन सत्र का महत्व

    पीएम मोदी ने इस सत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसे राष्ट्र की प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। विपक्ष से एकजुटता और जिम्मेदारी के साथ चर्चा की अपेक्षा की गई है, जिससे लोकतंत्र और अर्थतंत्र दोनों को मजबूती मिले।

    चुनौतियों का सामना करना

    प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कुछ राजनीतिक दल सदन में अपनी पराजय का गुस्सा निकाल रहे हैं और इसके लिए उन्हें आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में कुछ दलों ने जो राजनीतिक खेल खेला है, उसे अब बदलने का समय आ गया है।”

    सकारात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता

    उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि शीतकालीन सत्र को सकारात्मक दिशा में ले जाने की जरूरत है। पीएम ने कहा कि निकट भविष्य में उनके विचारों को सदन में उचित स्थान मिलना चाहिए और सभी दलों को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।

  • रेखा के लुक ने हेलन की बर्थडे पार्टी में सभी का ध्यान खींचा

    रेखा के लुक ने हेलन की बर्थडे पार्टी में सभी का ध्यान खींचा

    रेखा का जादू: 71 की उम्र में भी सबको कर रही हैं मंत्रमुग्ध

    मुंबई। बॉलीवुड की सदाबहार अदाकारा रेखा (Rekha) आज भी अपनी अदाओं से सभी का दिल जीत रही हैं। 71 वर्ष की उम्र में भी वह अपनी खूबसूरती और शैली के साथ किसी महफिल की रौनक बन जाती हैं। चाहे कोई पार्टी हो या फिल्म का इवेंट, रेखा हर स्थान पर अपनी उपस्थिति से चार चांद लगाती हैं। उन्हें देखने के लिए पैपराजी हमेशा तत्पर रहते हैं, और इस बार भी उन्होंने रेखा को अपने कैमरे में कैद करने का एक भी मौका नहीं छोड़ा है।

    हेलन के जन्मदिन में रेखा की चमक

    हाल ही में डांसिंग दिवा हेलन का जन्मदिन मनाया गया, जिसमें रेखा ने भी भाग लिया। 21 नवंबर को हेलन 87 वर्ष की हो गईं और उनके करीबी दोस्त और परिवार के सदस्य मुंबई में एक भव्य जन्मदिन पार्टी के लिए एकत्र हुए। इस मौके पर रेखा ने एक शानदार काले जंपसूट के साथ ब्लू जैकेट और स्टेटमेंट ब्लैक शेड्स का चयन किया, जिससे उन्होंने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

    फोटोग्राफर्स के लिए रेखा का अंदाज

    रेखा ने पार्टी के दौरान पैपराजी को शानदार पोसे दिए। इस बीच, उन्होंने एक फोटोग्राफर से कैमरा लेकर उनके लिए एक तस्वीर भी खींची, जो उनके फैंस को बेहद पसंद आ रहा है। उनके इस मस्त अंदाज पर सोशल मीडिया पर भरपूर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक यूजर ने कमेंट किया, “क्वीन हमेशा की तरह पॉजिटिविटी फैला रही हैं।” वहीं, एक अन्य ने लिखा, “जब मैं उनकी उम्र में पहुंचूं तो ऐसी ही एनर्जी में रहूं।” कुछ ने मजाक में यह भी कहा, “अमिताभ देखकर जल रहे होंगे।” इस प्रकार, रेखा की अदाओं की चर्चा हर तरफ हो रही है।