टैग: Elephant Attack Jharkhand

  • कोडरमा में जंगली हाथियों का आतंक, महुआ चुनने गई महिला की मौत

    कोडरमा में जंगली हाथियों का आतंक, महुआ चुनने गई महिला की मौत

    कोडरमा में जंगली हाथियों का आतंक जारी

    कोडरमा: कोडरमा जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में मरकच्चो थाना क्षेत्र के जामु हरलाडीह गांव में एक दुखद घटना घटी, जहां 55 वर्षीय सीता देवी की हाथी के हमले में मृत्यु हो गई। जानकारी के अनुसार, सीता देवी रविवार सुबह लगभग 5 बजे महोदरा जंगल में महुआ चुनने गई थीं, तभी एक जंगली हाथी ने उन पर हमला कर दिया। हाथी ने उन्हें पटककर जमीन पर गिरा दिया और फिर पैर रखकर कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। साथ में गई अन्य महिलाएं किसी तरह जान बचाने में सफल रहीं।

    चार दिनों में तीसरी मौत, ग्रामीणों में दहशत

    इस प्रकार की लगातार घटनाओं से क्षेत्र में डर का माहौल उत्पन्न हो गया है। पिछले चार दिनों में हाथियों के हमले में तीन लोगों की जान जा चुकी है। इससे पहले बुधवार को मरियमपुर और बोनाकाली क्षेत्र में दो अन्य लोगों की भी मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का मानना है कि एक हाथी झुंड से अलग हो गया है और वह लगातार लोगों पर हमला कर रहा है, जबकि अन्य हाथी आसपास के जंगलों में मौजूद हैं।

    मवेशियों को भी बनाया निशाना

    हाथियों का आतंक केवल मानव जीवन तक सीमित नहीं है। झरीटांड और ढेबुआडीह गांव में शुक्रवार रात हाथियों ने कई मवेशियों को कुचलकर मार डाला। गौशालाओं को भी नुकसान पहुंचाया गया है और बाहर बंधे जानवर भी इसके शिकार बने हैं। इससे स्थानीय लोगों की समस्याएं और बढ़ गई हैं, और अब लोग दिन में भी जंगल जाने से डरने लगे हैं।

    वन विभाग की तत्परता

    घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। रेंज ऑफिसर रविंद्र कुमार ने पीड़ित परिवार को तुरंत 25 हजार रुपये की सहायता प्रदान की। इसके अलावा, 3.75 लाख रुपये के मुआवजे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद देने का आश्वासन भी दिया गया है।

    संसाधनों की कमी, हाथियों को नियंत्रित करना चुनौती

    वन विभाग की टीम लगातार हाथियों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, लेकिन संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास जारी है, लेकिन अभी तक पूरी तरह से सफलता नहीं मिल पाई है।

    ग्रामीणों में डर और आक्रोश

    लगातार हो रही मौतों के कारण ग्रामीणों में डर के साथ-साथ आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है। लोगों का मानना है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

  • झारखंड में बेकाबू हाथियों पर लगेगा नियंत्रण, कर्नाटक के ‘कुनकी’ हाथी करेंगे सहयोग।

    झारखंड में बेकाबू हाथियों पर लगेगा नियंत्रण, कर्नाटक के ‘कुनकी’ हाथी करेंगे सहयोग।

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड में हाथियों का आतंक: राहत के लिए बुलाए गए ‘कुनकी’ हाथी

    झारखंड के चाईबासा और हजारीबाग में इन दिनों लोग हाथियों के आतंक से परेशान हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ग्रामीण रात भर जागकर अपनी सुरक्षा में लगे रहते हैं। इसी बीच, कर्नाटक से छह खास प्रशिक्षित ‘कुनकी’ हाथियों को झारखंड लाने का निर्णय लिया गया है, जो बेलगाम हाथियों को काबू में रखने में सहायता करेंगे।

    बेकाबू हाथियों का कहर 😱

    अधिकांश रिपोर्ट्स के अनुसार, वयस्क नर हाथियों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की वृद्धि उनके आक्रामक व्यवहार का कारण बन रही है। यह हार्मोन बढ़ने से कई हाथी गांवों में घुसपैठ कर रहे हैं। पिछले एक महीने में, हाथियों ने 25 से ज्यादा लोगों की जान ली है। चाईबासा में एक हाथी ने अकेले ही 15 लोगों को मार दिया, वहीं हजारीबाग में एक रात में पांच हाथियों के समूह ने सात लोगों की जान ले ली। इन घटनाओं ने ग्रामीणों में भारी आतंक उत्पन्न कर दिया है।

    कुनकी हाथियों की भूमिका क्या है? 🐘

    इन परिस्थितियों का समाधान निकालने के लिए, कर्नाटक से छह प्रशिक्षित ‘कुनकी’ हाथियों को बुलाया जा रहा है। ये हाथी खास प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और अपने महावतों के निर्देशन में कार्य करते हैं। इनका उद्देश्य असामान्य हाथियों को शांत करना, उन्हें उनके समूह से अलग करना, और जंगल में वापस ले जाना है। उनकी विशेषता यह है कि ये अपनी उपस्थिति और व्यवहार से अन्य हाथियों को भी अपने साथ ले जाने में सक्षम होते हैं। इन्हें ‘रेस्क्यू टीम’ की तरह समझा जा सकता है।

    कुनकी हाथी क्या हैं? 🤔

    ‘कुनकी’ या ‘कुमकी’ का अर्थ फारसी में सहायक होता है। कर्नाटका वन विभाग वर्षों से हाथियों को प्रशिक्षित कर उन्हें नियंत्रित करने का काम कर रहा है। इन विशेष प्रशिक्षित हाथियों का उपयोग बिगड़ैल और आक्रामक हाथियों को काबू में करने के लिए किया जाता है। उनके साथ अनुभवी महावत होते हैं जो स्थिति के अनुसार रणनीति बनाते हैं।

    लोगों को राहत की उम्मीद 🌟

    झारखंड में कुनकी हाथियों की पहुंच से लोगों को राहत की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि जल्द ही इन बेकाबू हाथियों को काबू में नहीं किया गया, तो स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे अधिक जीवन का नुकसान हो सकता है।

  • झारखंड में हाथियों का आतंक, कर्नाटक से पहुंचेंगे ‘कुनकी’ हाथी

    झारखंड में हाथियों का आतंक, कर्नाटक से पहुंचेंगे ‘कुनकी’ हाथी

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड में हाथियों का आतंक, कुनकी हाथियों से मिलेगी राहत

    झारखंड के चाईबासा और हजारीबाग में इन दिनों लोग हाथियों के आतंक से काफी चिंता में हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि गांव के लोग रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हो गए हैं। ऐसे में राहत की एक नई खबर आई है, जिसमें कर्नाटक से छह विशेष रूप से प्रशिक्षित ‘कुनकी’ हाथियों को झारखंड लाया जा रहा है। ये हाथी बेलगाम हाथियों को काबू में करने में सहायक होंगे।

    हाथियों का आक्रामक व्यवहार

    जानकारी के अनुसार, जब व्यस्क नर हाथियों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, तो वे अधिक आक्रामक हो जाते हैं। इसी कारण, हाल के दिनों में कई हाथी बेकाबू होकर गांवों में घुस रहे हैं। पिछले एक महीने में 25 से अधिक लोग इन हाथियों के हमले का शिकार हो चुके हैं। चाईबासा में एक ही हाथी ने 15 लोगों की जान ले ली, वहीं हजारीबाग में पांच हाथियों के झुंड ने एक रात में सात लोगों को मार डाला। इन घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भय व्याप्त हो गया है।

    कुनकी हाथियों की भूमिका

    कर्नाटक से लाए जा रहे छह ‘कुनकी’ हाथी इन खतरनाक स्थितियों से निपटने के लिए अहम साबित होंगे। ये खास प्रशिक्षण प्राप्त हाथी अपने महावत के निर्देशानुसार कार्य करते हैं। इनका प्राथमिक उद्देश्य बेकाबू हाथियों को शांत करना, उन्हें झुंड से अलग करना और फिर वापस जंगल की ओर ले जाना है। इन कुनकी हाथियों की उपस्थिति और व्यवहार जंगली हाथियों को नियंत्रित करने में मददगार होते हैं। सरल शब्दों में, ये ‘रेस्क्यू टीम’ की तरह कार्य करते हैं।

    कुनकी हाथियों की पहचान

    ‘कुनकी’ या ‘कुमकी’ शब्द फारसी भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ सहायक होता है। कर्नाटक वन विभाग ने वर्षों से हाथियों को प्रशिक्षित कर उन्हें अनुशासित किया है। इन प्रशिक्षित हाथियों का उपयोग बिगड़ैल या आक्रामक हाथियों को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। उनके साथ अनुभवी महावत भी होते हैं, जो स्थिति के अनुसार रणनीतियों का निर्धारण करते हैं।

    ग्रामीणों को राहत की उम्मीद

    झारखंड में कुनकी हाथियों के आगमन से स्थानीय नागरिकों में उम्मीद जगी है। गांव के लोग मानते हैं कि यदि जल्दी ही इन बेकाबू हाथियों को काबू नहीं किया गया, तो और भी जानें जा सकती हैं।