झारखंड में बेकाबू हाथियों पर लगेगा नियंत्रण, कर्नाटक के ‘कुनकी’ हाथी करेंगे सहयोग।

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

झारखंड में हाथियों का आतंक: राहत के लिए बुलाए गए ‘कुनकी’ हाथी

झारखंड के चाईबासा और हजारीबाग में इन दिनों लोग हाथियों के आतंक से परेशान हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि ग्रामीण रात भर जागकर अपनी सुरक्षा में लगे रहते हैं। इसी बीच, कर्नाटक से छह खास प्रशिक्षित ‘कुनकी’ हाथियों को झारखंड लाने का निर्णय लिया गया है, जो बेलगाम हाथियों को काबू में रखने में सहायता करेंगे।

बेकाबू हाथियों का कहर 😱

अधिकांश रिपोर्ट्स के अनुसार, वयस्क नर हाथियों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की वृद्धि उनके आक्रामक व्यवहार का कारण बन रही है। यह हार्मोन बढ़ने से कई हाथी गांवों में घुसपैठ कर रहे हैं। पिछले एक महीने में, हाथियों ने 25 से ज्यादा लोगों की जान ली है। चाईबासा में एक हाथी ने अकेले ही 15 लोगों को मार दिया, वहीं हजारीबाग में एक रात में पांच हाथियों के समूह ने सात लोगों की जान ले ली। इन घटनाओं ने ग्रामीणों में भारी आतंक उत्पन्न कर दिया है।

कुनकी हाथियों की भूमिका क्या है? 🐘

इन परिस्थितियों का समाधान निकालने के लिए, कर्नाटक से छह प्रशिक्षित ‘कुनकी’ हाथियों को बुलाया जा रहा है। ये हाथी खास प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और अपने महावतों के निर्देशन में कार्य करते हैं। इनका उद्देश्य असामान्य हाथियों को शांत करना, उन्हें उनके समूह से अलग करना, और जंगल में वापस ले जाना है। उनकी विशेषता यह है कि ये अपनी उपस्थिति और व्यवहार से अन्य हाथियों को भी अपने साथ ले जाने में सक्षम होते हैं। इन्हें ‘रेस्क्यू टीम’ की तरह समझा जा सकता है।

कुनकी हाथी क्या हैं? 🤔

‘कुनकी’ या ‘कुमकी’ का अर्थ फारसी में सहायक होता है। कर्नाटका वन विभाग वर्षों से हाथियों को प्रशिक्षित कर उन्हें नियंत्रित करने का काम कर रहा है। इन विशेष प्रशिक्षित हाथियों का उपयोग बिगड़ैल और आक्रामक हाथियों को काबू में करने के लिए किया जाता है। उनके साथ अनुभवी महावत होते हैं जो स्थिति के अनुसार रणनीति बनाते हैं।

लोगों को राहत की उम्मीद 🌟

झारखंड में कुनकी हाथियों की पहुंच से लोगों को राहत की उम्मीद जगी है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि जल्द ही इन बेकाबू हाथियों को काबू में नहीं किया गया, तो स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे अधिक जीवन का नुकसान हो सकता है।

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