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  • झारखंड में सूचना आयुक्त की नियुक्ति रुकी, राज्यपाल ले रहे हैं कानूनी सलाह

    झारखंड में सूचना आयुक्त की नियुक्ति रुकी, राज्यपाल ले रहे हैं कानूनी सलाह

    राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नामों पर विचार

    झारखंड राज्य सरकार ने सूचना आयुक्त के पद के लिए वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो के आईटी सेल प्रभारी तनुज खत्री, कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अमूल्य नीरज खलखो और भाजपा के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक के नामों पर विचार किया है। इन नामों को लेकर यह चर्चा उठी है कि क्या ये सभी व्यक्ति सूचना आयुक्त बनने के मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।

    राज्यपाल ने मांगी विधिक सलाह

    राज्यपाल ने विधि विशेषज्ञों से स्पष्ट पूछा है कि क्या इन नेताओं की नियुक्ति इस पद के लिए उचित है। कई संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि राजनीतिक दलों के सदस्यों को इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करना उचित नहीं होगा। इस कारण राज्यपाल मामले को कानूनी दृष्टिकोण से देखने का प्रयास कर रहे हैं।

    निर्णय में देरी संभव

    सूत्रों के अनुसार, यदि विधिक सलाह में इन नामों को अयोग्य माना जाता है, तो राज्यपाल सरकार की अनुशंसा को वापस भी कर सकते हैं। इस स्थिति में नियुक्ति प्रक्रिया और भी लंबी खिंच सकती है।

    हाई कोर्ट में मामला लंबित

    इस मामले की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट में 13 अप्रैल को निर्धारित की गई है। अदालत ने पहले ही निर्देश दिया था कि इन पदों को शीघ्र भरा जाए। राज्य सरकार ने 7 अप्रैल तक नियुक्ति करने का आश्वासन दिया था, लेकिन विवाद के चलते मामला अटक गया है।

    पदों की स्थिति

    जानकारी के अनुसार, राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त सहित कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। सरकार ने अभी तक केवल चार सूचना आयुक्तों के नाम ही प्रस्तावित किए हैं, जबकि दो पद अभी भी खाली रह सकते हैं।

    जल्द आ सकता है निर्णय

    यह माना जा रहा है कि हाई कोर्ट की सुनवाई से पहले राज्यपाल इस मामले में कोई निर्णय ले सकते हैं। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विधिक सलाह का परिणाम क्या होता है और नियुक्ति प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ती है।

  • गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव की बहन मंजरी को मिली अग्रिम जमानत, सुनवाई बुधवार को होगी।

    रांची: झारखंड उच्च न्यायालय में कुख्यात गैंगस्टर अमन श्रीवास्तव की बहन मंजरी श्रीवास्तव द्वारा दायर की गई अग्रिम जमानत याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। यह मामला जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की पीठ में प्रस्तुत किया जाएगा। अदालत ने आंशिक सुनवाई के बाद सुनवाई की तारीख 18 मार्च निर्धारित की है।

    गिरफ्तारी की आशंका और जमानत की याचिका

    मंजरी श्रीवास्तव ने अदालत में अपने गिरफ्तारी के डर को व्यक्त करते हुए अग्रिम जमानत की मांग की है। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने भाई अमन श्रीवास्तव के हवाला में किए गए पैसों की लेन-देन में शामिल होकर संगठन के गतिविधियों में साठगांठ की।

    हवाला के माध्यम से ट्रांसफर की गई राशि

    राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की प्रारंभिक जांच के अनुसार, अमन श्रीवास्तव ने रंगदारी से प्राप्त पैसों को हवाला के जरिए अपने परिजनों के खातों में स्थानांतरित किया। जांच में पता चला है कि यह रकम उनके भाई अभिक, बहन मंजरी और बहनोई चंद्रप्रकाश राणू के खातों में गई।

    गिरफ्तारी और चल रही जांच

    एनआईए ने हवाला के 25 लाख रुपये के साथ गैंग के सदस्यों विनोद और सिद्धार्थ को गिरफ्तार किया। इसी दौरान मंजरी श्रीवास्तव का नाम भी जांच में उभर कर आया। अब उच्च न्यायालय में उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।

  • झारखंड हाईकोर्ट में ED रांची अधिकारी के खिलाफ मामला, जांच की रोक जारी

    झारखंड हाईकोर्ट में ED रांची अधिकारी के खिलाफ मामला, जांच की रोक जारी

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    रांची में मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के रांची क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच से संबंधित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने वर्तमान में मामले की जांच पर रोक बनाए रखने का निर्णय लिया है।

    राज्य सरकार और रेस्पॉन्डेंट का जवाब, सुनवाई जारी

    सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने जवाब पेश करने के लिए और समय मांगा, वहीं रेस्पॉन्डेंट संतोष कुमार की ओर से प्रतिसाद दिया गया। हालांकि, समय की कमी के कारण संतोष कुमार का जवाब पूरी तरह नहीं पढ़ा जा सका।

    अगली सुनवाई 24 फरवरी को निर्धारित

    कोर्ट ने इस मामले की विस्तारित सुनवाई के लिए अगली तारीख 24 फरवरी तय की है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से भी एक उत्तर प्रस्तुत किया गया है। अब सभी पक्षों के जवाब और दस्तावेजों को ध्यान में रखते हुए अगली सुनवाई में फैसला या आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

  • नया परिसर, पुरानी धरोहर – झारखंड हाई कोर्ट में स्थापित अनोखा म्यूजियम

    नया परिसर, पुरानी धरोहर – झारखंड हाई कोर्ट में स्थापित अनोखा म्यूजियम

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड हाई कोर्ट का नया परिसर, जो रांची के धुर्वा इलाके में स्थित है, देखने में एक आधुनिक इमारत जैसा लगता है। लेकिन इस अद्वितीय बिल्डिंग के भीतर एक ऐसी गैलरी है, जो लगभग 100 वर्षों की न्यायिक विरासत की कहानी बयां करती है। यह संग्रहालय केवल पुरानी वस्तुओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह झारखंड और अविभाजित बिहार की न्यायिक यात्रा को दर्शाता है। कदम रखते ही ऐसा प्रतीत होता है जैसे आप किसी “लीगल टाइम मशीन” में प्रवेश कर गए हैं।

    100 साल की न्यायिक यात्रा एक ही जगह

    इस गैलरी का उद्देश्य युवा वकीलों और न्यायिक कर्मचारियों को यह दिखाना है कि वर्तमान न्याय व्यवस्था की नींव में कितनी मेहनत, परंपरा और संघर्ष हैं। यहाँ दीवारों पर लगे दस्तावेज, कांच की अलमारियों में रखे प्राचीन टाइपराइटर और ऐतिहासिक घड़ियां हैं, जो बताते हैं कि एक समय था जब हर फैसला हाथ से लिखना होता था और दस्तावेजों का संरक्षण एक चुनौती पूर्ण कार्य था।

    डॉ. राजेंद्र प्रसाद की ऐतिहासिक एंट्री

    इस संग्रहालय का विशेष आकर्षण हजारीबाग की जयप्रकाश नारायण सेंट्रल जेल का पुराना एंट्री रजिस्टर है। इसी रजिस्टर में भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जेल में दाखिल होने का रिकॉर्ड मौजूद है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब सेनानियों को जेल भेजा जाता था, तब उनके रिकॉर्ड को जिस बारीकी से रखा जाता था, यह रजिस्टर उसका ज्वलंत उदाहरण है। यह सिर्फ एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि आजादी की लड़ाई और न्याय व्यवस्था के आपसी संबंध की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

    जब फैसले कलम से लिखे जाते थे

    आज के डिजिटल युग में फैसले कंप्यूटर पर टाइप होते हैं, लेकिन इस गैलरी में 1941 के हस्तलिखित जजमेंट भी प्रदर्शित किए गए हैं। उस काल के न्यायाधीशों की साफ-सुथरी लेखनी और भाषा की गंभीरता प्रशंसा के योग्य है। एक दिलचस्प परंपरा के अनुसार, जब कोई जज फाँसी की सजा सुनाता था, तो वह अपनी कलम की निब तोड़ देता था। यह गैलरी उस दौर की कलमों को भी सहेजकर रखे हुए है, जो इस बात का प्रतीक है कि जिस कलम से किसी की जिंदगी का अंत करने का आदेश दिया गया, उसका पुन: उपयोग नहीं होना चाहिए।

    टाइपराइटर से डिजिटल दौर तक

    कांच की अलमारियों में रखे पुराने टाइपराइटर, दीवार घड़ियाँ और कानूनी दस्तावेज स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि तकनीकी विकास ने न्यायपालिका को किस प्रकार बदला है। पहले जहां किसी दस्तावेज को टाइप करने में घंटों लगते थे, वहीं आज की डिजिटल प्रणाली ने काम को तेज और सरल बना दिया है।

    हफ्ते में दो दिन खुलता है म्यूजियम

    यह संग्रहालय आम जनता के लिए अभी उपलब्ध नहीं है। शुक्रवार को हाई कोर्ट के वकील यहाँ आ सकते हैं, जबकि शनिवार को कार्य दिवस के दौरान स्टाफ को यहाँ आने की अनुमति होती है।

  • हाई कोर्ट: लोकायुक्त और सूचना आयुक्त सहित अन्य पदों की नियुक्ति 6 हफ्ते में जरूरी।

    हाई कोर्ट: लोकायुक्त और सूचना आयुक्त सहित अन्य पदों की नियुक्ति 6 हफ्ते में जरूरी।

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड हाई कोर्ट ने नियुक्तियों के लिए निर्धारित की समयसीमा ⏳

    झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह कई संवैधानिक संस्थाओं में खाली पड़े पदों की नियुक्ति की समयसीमा निश्चित करे। इनमें लोकायुक्त, राज्य मानवाधिकार आयोग और सूचना आयोग जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं, जो काफी समय से रिक्त हैं। अदालत ने कहा कि इन पदों का खाली रहना संविधानिक संस्थाओं की क्षमता को प्रभावित करता है और नागरिकों के अधिकारों में भी बाधा डालता है।

    सरकार का आश्वासन और अगली सुनवाई की तारीख 📅

    सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि वह अगले 6 हफ्तों में सभी आवश्यक नियुक्तियां पूरी कर लेगी। हाई कोर्ट ने इस आश्वासन को आधिकारिक रूप से दर्ज किया और अगली सुनवाई की तारीख 17 मार्च 2026 निर्धारित की। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि नियत समय में नियुक्तियां नहीं की गईं, तो वह कड़े कदम उठा सकती है, जिससे सरकारी दबाव बढ़ रहा है।

    जनहित याचिकाओं पर आधारित कार्रवाई ⚖️

    यह कार्रवाई कई जनहित याचिकाओं पर आधारित थी, जिनमें यह कहा गया था कि राज्य में भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए गठित लोकायुक्त और अन्य संवैधानिक पद वर्षों से रिक्त हैं। कोर्ट ने सरकार को जवाबदेह ठहराते हुए समयसीमा का निर्धारण किया ताकि संवैधानिक संस्थाएं सही तरीके से कार्य कर सकें।

    वकील महेश तिवारी का माफी प्रकरण 📜

    आज हाई कोर्ट में वकील महेश तिवारी और जस्टिस राजेश कुमार के बीच तीखी बहस भी हुई। इस बहस में महेश तिवारी ने कहा था, “जज अपनी सीमा में रहें,” जिसके बाद अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की थी।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ और माफी की प्रक्रिया 🏛️

    प्रकरण सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां चीफ जस्टिस की पीठ ने महेश तिवारी को हाई कोर्ट में बिना शर्त माफी मांगने की सलाह दी। आज की सुनवाई में, महेश तिवारी ने बिना शर्त माफी मांग ली और अदालत ने इस मामले का निर्णय सुरक्षित रख लिया।

  • फोटॉन न्यूज़ एक्सक्लूसिव: रांची के कांके थानेदार पर शुरू हुई दूसरी कार्यवाही

    फोटॉन न्यूज़ एक्सक्लूसिव: रांची के कांके थानेदार पर शुरू हुई दूसरी कार्यवाही

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    कांके थाना के थानेदार पर कार्रवाई के आदेश

    झारखंड के रांची जिले के कांके थानेदार प्रकाश रजक पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं, जिसके बाद एसएसपी राकेश रंजन ने उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया है। पिछले दिनों झारखंड हाईकोर्ट ने थाने में दर्ज एक मामले की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे, जिससे पुलिस विभाग में हलचल मच गई।

    जांच में सामने आई अव्यवस्थाएं 🔍

    हाईकोर्ट के कठोर बयान के बाद, कांके थाने में दर्ज मामले के लिए जांच अधिकारी संतोष कुमार पर भी कार्रवाई की गई है। जानकारी के अनुसार, जांच में 11 महीने का समय बर्बाद किया गया, जबकि किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई और न ही अदालत में चार्जशीट प्रस्तुत की गई। थानेदार की बरती गई लापरवाही के कारण कई महत्वपूर्ण खामियां उजागर हुई हैं।

    आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई ⚖️

    13 जुलाई 2024 को दर्ज इस मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। किंतु पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ वारंट लेने के लिए अदालत में आवेदन तक नहीं दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करें और अगर जांच में तकनीकी समस्याएं आती हैं तो उनका समाधान करें।

    गिरफ्तारी में हो रही देरी ⏳

    4 आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे 30 अप्रैल 2025 को खारिज कर दिया गया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि जमानत खारिज होने के 9 महीने बीत जाने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। एसएसपी को इस मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

    पुनरावृत्ति: अनिल टाइगर हत्याकांड की चर्चा

    कांके थानेदार पर पहले भी एक विभागीय कार्रवाई चल रही है, जिसमें उन्हें बिना किसी वारंट के देवब्रत नाथ शाहदेव को अवैध रूप से हिरासत में रखने का आरोप है। इस मामले में उच्च न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए थे, जिसके बाद थानेदार के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।

    सख्त निर्देश जारी

    इस घटना के प्रकाश में एसएसपी ने सभी थानेदारों और डीएसपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने मामलों की समय पर समीक्षा करें और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

    कांके थाना के थानेदार प्रकाश रजक के खिलाफ चल रही दो विभागीय कार्रवाइयों के बावजूद उन्हें पद पर बनाए रखा गया है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। झारखंड सरकारी सेवक नियमावली के अनुसार ऐसी स्थिति में उन्हें निलंबित करने का प्रावधान है।

  • बादशाह बन बैठे हैं जूनियर इंजीनियर, डिस्ट्रिक्ट जज की भी नहीं सुनते

    बादशाह बन बैठे हैं जूनियर इंजीनियर, डिस्ट्रिक्ट जज की भी नहीं सुनते

    लापरवाही के लिए भवन निर्माण सचिव को हाईकोर्ट ने जमकर फटकारा

    अदालतों की सुरक्षा संबंधी याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
    रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन की खंडपीठ ने आज राज्य के भवन निर्माण सचिव को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने सचिव से पूछा की एक जूनियर इंजीनियर बादशाह बन बैठता है और डिस्ट्रिक्ट जज की भी जब नहीं सुनता है तो सरकार उस पर एक्शन लेने में क्यों कतराती है। राज्य की अदालतों की सुरक्षा को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर आज झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही थी। मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान भवन निर्माण सचिव कोर्ट में उपस्थित हुए। कोर्ट ने उनसे जानना चाहा कि जब प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज, घाटशिला ने एक जूनियर इंजीनियर के खिलाफ कंप्लेन किया था, तो उसके खिलाफ तुरंत एक्शन क्यों नहीं लिया गया। उसका ट्रांसफर तुरंत क्यों नहीं किया गया। इस पर भवन निर्माण सचिव की ओर से बताया गया कि बीते दिनों उसका ट्रांसफर कर दिया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब हाईकोर्ट इस विषय पर सख्त हुई है तब आनन-फानन में कार्रवाई की गई है। 4 माह पहले उस जूनियर इंजीनियर के खिलाफ शिकायत की गई थी। लेकिन एक्शन लेने में इतना समय क्यों लगाया गया। इस पर कोर्ट को बताया गया की ट्रांसफर करने से मैन पावर की कमी होती है। जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि ट्रांसफर के बाद नए लोग आते हैं। ऐसे में मैन पावर की कमी कैसे हो सकती है। भवन निर्माण विभाग में 3 साल से अधिक समय से अभियंता एक जगह पर जमे हैं, उनका ट्रांसफर क्यों नहीं किया जा रहा है। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता हेमंत सिकरवार ने पैरवी की।

  • सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट को फटकारा

    पूछा- जिनके पास पैसे नहीं, क्या उन्हें नहीं मिलेगी जमानत

    बड़ी रकम जमा कर आरोपी को जमानत देने के हाईकोर्ट के फैसले पर लताड़ा

    कोर्ट ने कहा कि जज ने किस आधार पर जमानत का फैसला किया, यह हमारे समझ से परे

    ऐसे सभी मामलों में जमानत को लेकर फिर से सुनवाई का निर्देश

    दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि आरोपी के पैसे जमा करने की क्षमता से जमानत नहीं तय की जा सकती है। जमानत को लेकर झारखंड हाई कोर्ट के एक जज के फैसलों पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि जमानत का फैसला अपराध की प्रकृति के आधार पर होता है न कि आरोपी की इस क्षमता पर कि वह कितना पैसा जमा करा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से जुड़े इस तरह के फैसलों पर हाई कोर्ट को फिर से नए सिरे से सुनवाई का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जज ने जमानत देने की जो प्रक्रिया अपनाई है वह सही नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को जमानत पर फैसला इस आधार पर लेना होता है कि अपराध किस तरह का है, उसकी गंभीरता क्या है, न कि आरोपी की पैसे देने की क्षमता से। झारखंड हाई कोर्ट को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की।
    दरअसल, झारखंड हाई कोर्ट ने कई आरोपियों को इस शर्त पर जमानत दे दी कि वे अच्छी-खासी रकम जमा कर दे, जबकि अपराध की प्रकृति पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्हें पीड़ित को अंतरिम मुआवजा के रूप में बड़ी रकम जमा करने को कहा गया।
    सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाई कोर्ट के कई ऐसे फैसलों को देखा और कहा कि अदालत के एक सिंगल जज ने जो प्रक्रिया अपनाई है, वह कानून के मुताबिक सही नहीं है। ऐसे ही एक आदेश में हाई कोर्ट ने एक शख्स और उसके मां-बाप को घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के मामले में प्री-अरेस्ट बेल यानी अग्रिम जमानत दे दी थी। इसके लिए कोर्ट ने 25 हजार रुपये का बॉन्ड भरने और पीड़ित को अंतरिम मुआवजे के तौर पर साढ़े 7 लाख रुपये देने की शर्त रखी। खास बात ये है कि पीड़ित पत्नी के मुताबिक, उसके परिवार ने ससुराल वालों को साढ़े 7 लाख रुपये का दहेज दिया था।

    अग्रिम जमानत की याचिका पैसों की रिकवरी वाली प्रक्रिया नहीं


    आरोपियों की याचिका को सुनवाई के लिए मंजूर करते हुए जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने जमानत की शर्तों को रद्द कर दिया। बेंच ने कहा कि हाई कोर्ट ने जो प्रक्रिया अपनाई, वह कानून के मुताबिक नहीं है।
    बेंच ने कहा कि गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत की याचिका पैसों की रिकवरी वाली प्रक्रिया नहीं है। अगर किसी शख्स को अपनी गिरफ्तारी की आशंका है तो उसे प्री-अरेस्ट बेल के लिए पैसे जमा करना हो, इसका कोई औचित्य नहीं है
    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट ने दहेज से लेकर धोखाधड़ी, रेप और पॉक्सो ऐक्ट जैसे अलग-अलग मामलों में भी आरोपियों को इसी तरह से जमानत दी है।
    कोर्ट ने कहा कि इन सभी मामलों में एक चीज कॉमन है। एक ही जज ने अपराध की प्रकृति के हिसाब से जमानत की जरूरतों पर सही से विचार किए बिना ही बड़ी रकम जमा करने की शर्त पर जमानतें दी। अगर कोई शख्स बड़ी रकम नहीं जमा कर सकता, उसके पास पैसे नहीं हों तो उन्हें जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन यही होता दिख रहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज ने किस आधार पर जमानत का फैसला किया, यह हमारे समझ से परे है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने झारखंड हाई कोर्ट को इस तरह के सभी मामलों में जमानत को लेकर फिर से सुनवाई का निर्देश दिया।

  • ब्रेकिंग: हाई कोर्ट के जस्टिस अपरेश सिंह का त्रिपुरा ट्रांसफर

    उत्तराखंड के जस्टिस संजय कुमार मिश्रा आएंगे झारखंड हाई कोर्ट

    रांची। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश सिंह का तबादला त्रिपुरा हाई कोर्ट कर दिया है। इसके साथ ही उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार मिश्रा का झारखंड हाई कोर्ट और जस्टिस के.विनोद चंद्रन का तबादला केरल हाई कोर्ट से मुंबई हाई कोर्ट कर दिया गया है। 28 सितंबर 2022 को हुए कॉलेजियम में सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश जारी किया है।

  • हाईकोर्ट ने IAS K K SON की सैलरी पर लगाया रोक

    राज्य के वरीय IAS अधिकारी के के सोन की सैलेरी रोकने का आदेश दिया है. झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस डॉ. एस एन पाठक की कोर्ट ने यह आदेश दिया है. दरअसल झारखंड हाईकोर्ट में सर्विस मैटर से जुडी कंटेम्प्ट याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य राशि का भुगतान नहीं होता, तब तक आपका वेतन रुका रहेगा.

    सुनवाई के दौरान IAS अधिकारी और परिवहन सचिव के के सोन भी अदालत के समक्ष सशरीर उपस्थित रहे. अदालत ने उनसे पूछा कि जब सिंगल बेंच ने परिवहन विभाग के कर्मचारियों के वेतन एवं अन्य भुगतान के मामले में तीन वर्ष पहले ही आदेश पारित कर दिया है तो विभाग भुगतान क्यों नहीं किया गया. जिसपर परिवहन सचिव और सरकार के अधिवक्ता के जवाब से कोर्ट संतुष्ट नहीं हुआ. प्रार्थी की ओर से झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजेंद्र कृष्ण और राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार ने अदालत में पक्ष रखा. इस संबंध में नेहाल खान,मनु प्रसाद एवं अन्य के द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में अवमानना वाद दायर की गई है.