टैग: Nitish kumar

  • नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तारीख तय की, सम्राट चौधरी की स्थिति मजबूत

    नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तारीख तय की, सम्राट चौधरी की स्थिति मजबूत

    नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ने का कार्यक्रम निर्धारित

    पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की तारीख अब तय हो गई है। वह गुरुवार को दिल्ली पहुंचेंगे, जहां वह राज्यसभा सांसद पद की शपथ लेंगे। इसके बाद, शुक्रवार को वह पटना लौटते ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। यह पहली बार है जब बिहार में बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है, और इस पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है।

    नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

    नीतीश कुमार, जिन्होंने बिहार में लगभग दो दशकों तक मुख्यमंत्री का पद संभाला, अब दिल्ली की राजनीति में अपनी किस्‍मत आजमाने के लिए तैयार हैं। वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। उसी दिन पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें वह अपने इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं।

    बिहार में सत्ता परिवर्तन की कहानी

    बिहार में 2005 के बाद से सत्ता परिवर्तन का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। नीतीश कुमार के राज्यसभा में चुने जाने के बाद, जेडीयू के नेता विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आगामी समय में बिहार की सत्ता बीजेपी के नेतृत्व में होगी।

    बीजेपी की अहम बैठक

    नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के दिन, 10 अप्रैल को दिल्ली में बिहार बीजेपी नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना है। यह बैठक सरकार गठन की प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई है।

    14 अप्रैल को इस्तीफे की संभावना

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को दिल्ली से लौटने के बाद 14 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। सम्राट चौधरी के नाम पर नई सरकार के गठन में मुहर लगने की संभावना है।

    शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी की उपस्थिति

    दिल्ली में 10 अप्रैल को होने वाली बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 14 या 15 अप्रैल को हो सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो सकते हैं।

  • नीतीश कुमार दस अप्रैल को राज्यसभा में लेंगे शपथ, बिहार में नई सरकार गठन की कोशिशें

    नीतीश कुमार दस अप्रैल को राज्यसभा में लेंगे शपथ, बिहार में नई सरकार गठन की कोशिशें

    नीतीश कुमार 10 अप्रैल को लेंगे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ

    पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं। जदयू के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री 9 अप्रैल की दोपहर दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे और शपथ लेने के बाद 11 अप्रैल को पटना लौटेंगे। इस दौरान, उनकी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मुलाकात भी संभावित है।

    भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की तैयारी

    नीतीश कुमार के पटना लौटने के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। किसी भी समय नीतीश मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की संभावना है। एनडीए के दलों के बीच यह सहमति बन चुकी है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा, जबकि जदयू की सरकार में मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रहेगी। यह पहली बार होगा जब जदयू से राज्य को उप मुख्यमंत्री मिलेगा।

    सीएम पद छोड़ने से पहले महत्वपूर्ण बैठकें

    नीतीश कुमार, राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद, एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं जिसमें वे विधायकों को मुख्यमंत्री पद छोड़ने की जानकारी देंगे। इसके बाद वे राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार के गठन की प्रक्रिया एनडीए के सभी घटक दलों की अलग-अलग बैठकें करके नेताओं के चुनाव से शुरू होगी। एनडीए विधानमंडल दल के नेता की घोषणा संयुक्त बैठक में की जाएगी, जिसके बाद नए नेता सरकार गठन का प्रस्ताव राज्यपाल को प्रस्तुत करेंगे। चर्चा के अनुसार, नई सरकार 15 अप्रैल के बाद अस्तित्व में आएगी।

    बिहार के अगले मुख्यमंत्री की दौड़

    कौन बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री?
    हालांकि बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। सम्राट चौधरी का नाम इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। वर्तमान डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हाल ही में यह स्पष्ट किया कि वह सीएम की दौड़ में नहीं हैं, बल्कि सेवक की भूमिका में हैं। भाजपा ने अभी तक इस मामले में चुप्पी साध रखी है, जबकि पार्टी के नेता लगातार यह कह रहे हैं कि एनडीए की बैठक में नए सीएम का नाम तय किया जाएगा। वहीं, डिप्टी सीएम की दौड़ में नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम भी लिया जा रहा है। हालांकि, इन नामों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है और यह सब मात्र कयासबाजी है।

  • नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया

    नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया

    नीतीश कुमार का सीएम पद से इस्तीफा, नया राजनीतिक युग शुरू

    पटना। बिहार में लगभग दो दशकों तक चली नीतीश कुमार की सरकार समाप्त होने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 30 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय ले चुके हैं। उन्हें 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया था और अब वे बिहार विधान परिषद की सदस्यता से भी त्यागपत्र देंगे। गौरतलब है कि बिहार विधान सभा और विधान परिषद की छुट्टियां 29 मार्च तक हैं। इसी प्रकार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं।

    नीतीश कुमार की राज्यसभा में रुचि

    नीतीश कुमार ने 5 मार्च को सोशल मीडिया पर अपनी राज्यसभा में जाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसके बाद से इस पर चर्चा का आगाज हो गया था। उनके इस निर्णय ने बिहार की राजनीतिक स्थिति में हलचल मचा दी है। विपक्ष ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं नीतीश की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में भी असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि बिहार की जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में चुना है, न कि राज्यसभा के लिए।

    नीतीश कुमार बने रहेंगे जेडीयू के अध्यक्ष

    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी पार्टी के अध्यक्ष पद को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, हाल ही में यह स्पष्ट हो गया है कि नीतीश कुमार ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा था और उनके खिलाफ कोई अन्य उम्मीदवार नहीं है। इससे यह सुनिश्चित हो गया है कि नीतीश कुमार निर्विरोध तरीके से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे। वे दिल्ली से ही बिहार में पार्टी का नेतृत्व जारी रखेंगे।

  • नीतीश कुमार JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए, कोई नामांकन नहीं मिला

    नीतीश कुमार JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए, कोई नामांकन नहीं मिला

    नीतीश कुमार फिर बने जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष

    नई दिल्ली। नीतीश कुमार को एक बार फिर से जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध रूप से चुना गया है। नामांकन के लिए सुबह 11 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन इस दौरान नीतीश कुमार के अलावा किसी अन्य नेता ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया। इस स्थिति के कारण उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी की अध्यक्षता सौंप दी गई है।

    निर्वाचन प्रक्रिया का विवरण

    जेडीयू की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि अध्यक्ष पद के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि मंगलवार, 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। समय खत्म होने के बाद निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष रहा। इस अवसर पर निर्वाचन अधिकारी अनिल प्रसाद हेगड़े, जो पूर्व सांसद रह चुके हैं, दोपहर 2:30 बजे नीतीश कुमार को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपेंगे।

    पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति

    इस मौके पर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहेंगे। नीतीश कुमार के साथ जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वाले संजय कुमार झा और श्रवण कुमार के अलावा बिहार एवं अन्य प्रदेशों से आए पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि

    नीतीश कुमार ने जेडीयू की एनडीए में वापसी से पहले पार्टी की कमान संभाली थी। दिसंबर 2023 में, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने जेडीयू के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उस समय पार्टी बिहार में महागठबंधन का हिस्सा थी और नीतीश कुमार इंडिया ब्लॉक के गठन की प्रक्रिया में जुटे थे। ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली और कुछ ही समय में जेडीयू ने आरजेडी और महागठबंधन से संबंध तोड़कर बीजेपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को अपना लिया।

    भविष्य की राजनीति के संकेत

    हाल ही में, नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। अब जब वे जेडीयू के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभालेंगे, उनके बेटे निशांत कुमार ने भी राजनीति में कदम रखा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि निशांत को बिहार का डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है, जबकि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने पर महत्वपूर्ण बयान दिया

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने पर महत्वपूर्ण बयान दिया

    नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का निर्णय

    पटना. जनता दल यूनाईटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने यह घोषणा की है कि वह अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। इस ऐलान ने पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों को समाप्त कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक बयान में कहा है कि पिछले दो दशकों से अधिक समय तक उन्होंने बिहार और उसके लोगों की सेवा की है और अब वह दिल्ली की राजनीति में प्रवेश करने का इच्छुक हैं।

    संसदीय जीवन की नई शुरुआत

    नीतीश कुमार ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनका राज्यसभा का सदस्य बनने का सपना लंबे समय से था। उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि वह दोनों विधान मंडलों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य भी बनें। उन्होंने जनता को विश्वास दिलाया कि उनका संबंध भविष्य में भी मजबूत बना रहेगा और बेरूखी के बावजूद, बिहार के विकास का उनका संकल्प अटल रहेगा।

    जदयू कार्यकर्ताओं की नाराजगी

    नीतीश कुमार के इस फैसले पर जदयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया था। कार्यकर्ताओं ने सीएम हाउस के बाहर नारेबाज़ी करते हुए कहा कि नीतीश कुमार को बिहार की जनता की आवाज़ सुननी होगी। बिहार की राजनीति में उनका स्थान महत्वपूर्ण है, और कार्यकर्ताओं ने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें दिल्ली नहीं जाना चाहिए।

    ललन सिंह की संभावित डिप्टी सीएम पर चर्चा

    सीएम नीतीश कुमार के फैसले के तुरंत बाद, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने निशांत कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने आगे की योजनाओं पर चर्चा की और निशांत कुमार की भूमिका के बारे में विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान यह जानकारी मिली है कि निशांत कुमार को डिप्टी सीएम के पद पर नियुक्त किया जा सकता है।

  • नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने का विचार कर रहे हैं, बेटे को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने का विचार कर रहे हैं, बेटे को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ने का संभावित निर्णय

    पटना: बिहार की राजनीति में वर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण बदलाव की चर्चाएँ एक नई दिशा में बढ़ रही हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के सांसद बनने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके चलते वे अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। यदि यह घटनाक्रम वास्तविकता में परिवर्तित होता है, तो यह बिहार की राजनीतिक landscape को काफी प्रभावित कर सकता है।

    राजनीतिक अवसर और नई जिम्मेदारी

    यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो यह उनके बेटे निशांत कुमार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह परिवर्तन परिवार की नई पीढ़ी को आगे लाने का संकेत दे सकता है। बिहार की सियासत में आ रही यह संभावित बदलाव विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हलचलों को जन्म दे सकता है।

    राज्यसभा में संभावित स्थान

    राज्यसभा सांसद बनने की संभावनाओं के साथ, नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा एक नए अध्याय में प्रवेश कर सकती है। इस स्थिति पर नजर रखने से यह स्पष्ट होगा कि वे किस प्रकार से राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने की योजना बना रहे हैं।

  • राखी सावंत का आरोप, नीतीश कुमार ने खींचा डॉक्टर का हिजाब, वीडियो देखें

    राखी सावंत का आरोप, नीतीश कुमार ने खींचा डॉक्टर का हिजाब, वीडियो देखें

    राखी सावंत ने नीतीश कुमार पर साधा निशाना

    मुंबई: एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की बोल्ड और बिंदास शख्सियत राखी सावंत हमेशा किसी न किसी वजह से सुर्खियों में बनी रहती हैं। हाल ही में उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हिजाब विवाद पर अपना गुस्सा फूट डाला है। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे पहले नीतीश जी की तारीफ करती हैं और उसके बाद उन पर भड़क जाती हैं।

    नीतीश जी की तारीफ और फिर नाराजगी

    वीडियो में दिखाई देता है कि राखी पहले नीतीश कुमार को शुभकामनाएं देती हैं और कहती हैं कि वे उनकी बहुत बड़ी फैन हैं। इसके बाद वे सवाल उठाती हैं कि “आपने यह क्या कर दिया नीतीश जी?”। दरअसल, हाल ही में नीतीश कुमार ने एक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम महिला का हिजाब खींच दिया, जिसके बाद से उनकी काफी आलोचना हो रही है।

    ‘अगर मैं आपकी धोती खींच लूं…’

    इस बयान के बाद, राखी ने नीतीश जी की कार्रवाई पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें महिलाओं की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने चौंकाने वाला बयाना देते हुए कहा, “अगर मैं आपकी धोती खींच लूं तो आपको कैसा महसूस होगा?” यह बात सुनकर हर कोई हैरान रह गया। आगे उन्होंने कहा कि हिजाब महिलाओं की इच्छा है और किसी को भी इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

    विवादास्पद टिप्पणियों पर प्रतिक्रियाएं

    राखी का यह अंदाज हमेशा की तरह एंटरटेनिंग है। पॉलिटिकल मुद्दों पर उनका कमेंट अक्सर चर्चा का विषय बनता है। कुछ लोग उनकी सराहना कर रहे हैं कि उन्होंने महिलाओं का पक्ष लिया, जबकि अन्य इसे सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट मानते हैं। राखी की जिंदगी एक रोलरकोस्टर की तरह है, जो हमेशा चर्चा में बनी रहती है।

  • नीतीश कुमार केवल 7 दिन के लिए बने थे मुख्यमंत्री, जानें उनके मुख्यमंत्री बनने की तारीखें

    नीतीश कुमार केवल 7 दिन के लिए बने थे मुख्यमंत्री, जानें उनके मुख्यमंत्री बनने की तारीखें

    नीतीश कुमार ने फिर से लिया मुख्यमंत्री पद की शपथ

    नई दिल्ली. बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों का प्रमुख चेहरा नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बने हैं। विधानसभा चुनावों में हासिल की गई ऐतिहासिक जीत के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने नीतीश को इस पद के लिए चुना है।

    एनडीए विधायकों की बैठक का निर्णय

    मंगलवार को एनडीए विधायकों की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया। बिहार की 243 सीटों में से 202 सीटें जीतने वाले इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी के 89 और जनता दल (यूनाइटेड) के 85 विधायक शामिल हैं। इस गठबंधन में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (सेक्युलर) के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक भी शामिल हैं।

    नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

    बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश का यह दसवां कार्यकाल है। उन्होंने पहली बार 2000 में शपथ ली थी, जब वे समता पार्टी का हिस्सा थे। उनका पहला कार्यकाल मात्र सात दिनों तक चला था। इसके बाद, 2005 में अपनी पार्टी जद (यू) के बीजेपी के साथ गठबंधन का बना कर उन्होंने पूर्ण बहुमत हासिल किया।

    गठबंधन और राजनीतिक परिवर्तन

    नीतीश ने 2010 में भी अपने गठबंधन को मजबूती से बनाए रखा। 2013 में नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ लिया, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में बने रहे। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

    महागठबंधन और बीजेपी के साथ नाता

    2015 में नीतीश ने फिर से महागठबंधन बनाया और चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री बने। 2017 में उन्होंने महागठबंधन को तोड़ा और बीजेपी के साथ मिलकर दुबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2020 में एनडीए ने साधारण बहुमत हासिल किया, लेकिन जद (यू) की सीटें घटकर 43 रह गईं। इसके बावजूद नीतीश को मुख्यमंत्री बनाए रखा गया।

    चुनाव विश्लेषण और भविष्य की चुनौती

    2022 में नीतीश ने फिर से सरकार भंग कर दी और आरजेडी तथा कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया। लेकिन यह सरकार महज़ 17 महीने तक चली। आलोचकों ने नीतीश कुमार को 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कमजोर शक्ति करार दिया था। हालांकि, चुनाव विश्लेषकों को आश्चर्य हुआ जब नीतीश की पार्टी ने 2020 में जीती गई 43 सीटों की तुलना में दो गुनी, यानी 85 सीटें हासिल कीं।

  • नीतीश कुमार NDA विधायक दल के नेता बनेंगे, विभागों का आवंटन होगा

    नीतीश कुमार NDA विधायक दल के नेता बनेंगे, विभागों का आवंटन होगा

    नीतीश कुमार की 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की तैयारी

    पटना। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में 10वीं बार अपने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को शुरू करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। बुधवार को जदयू विधायक दल के नेता के रूप में उनका चुनाव होगा। उसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में राजग विधायक दल के नेता का चुनाव भी किया जाएगा। मंगलवार को जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की गृह मंत्री अमित शाह के साथ तीन घंटे तक चली बैठक में मंत्रालयों के बंटवारे पर सहमति बन गई है।

    भाजपा का विधानसभा अध्यक्ष पद पर कायम होना

    बिहार विधानसभा का अध्यक्ष का पद भाजपा के पास बना रहेगा, जिसमें प्रेम कुमार के नाम पर चर्चा हो रही है। नीतीश कुमार का चुनाव तय करने के लिए बुलाए जाने वाली राजग विधायक दल की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे। शपथ ग्रहण समारोह बृहस्पतिवार दोपहर को गांधी मैदान में आयोजित होगा। इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, राजग के सहयोगी दलों के नेता, राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे।

    शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों का निरीक्षण

    नीतीश कुमार ने राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों का जायजा लिया। 20 नवंबर को होने वाला यह समारोह नई सरकार के गठन और एनडीए की मज़बूत स्थिति के चलते विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री ने मंच निर्माण, वीवीआईपी बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा के प्रबंध, अतिथियों के मार्ग और भीड़ प्रबंधन की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    मंत्रिमंडल में बराबर भागीदारी की योजना

    जदयू के सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में भाजपा और जदयू को समान भागीदारी दी जाएगी। प्रत्येक दल को सम्भवतः 14-14 सीटें मिलेंगी, जबकि लोजपा को तीन और एलजेपीआर तथा आरएलएम को एक-एक सीट मिलेगी। भाजपा सरकार में पहले की तरह दो डिप्टी सीएम रहेंगे और मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक होने की संभावना है।

    केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति

    भाजपा संसदीय बोर्ड ने विधायक दल के नेता के चुनाव में मदद के लिए यूपी सरकार के डिप्टी सीएम केशव मौर्य को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को सह पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है।

  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल को दिया इस्तीफा, 19 को होगी विधानसभा भंग

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल को दिया इस्तीफा, 19 को होगी विधानसभा भंग

    नीतीश कुमार का महत्वपूर्ण दिन: विधानसभा भंग और नई सरकार का गठन

    पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए आज एक महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 17वीं विधानसभा को भंग करने की सिफारिश की। यह बैठक इस सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक साबित हुई। सभी मंत्रियों ने अपने इस्तीफे दे दिए, और 19 नवंबर को मौजूदा विधानसभा भंग हो जाएगी। इसके बाद नीतीश कुमार ने राजभवन जाकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की और विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव उनके सामने रखा।

    कैबिनेट बैठक की तैयारियाँ और विधायक दल की बैठक

    कैबिनेट की बैठक शुरू होने से पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कुछ अन्य मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री हाउस पहुंचे। इसके बाद सभी मंत्री सचिवालय पहुँचे, जहां बैठक शुरू हुई। बैठक के दौरान सचिवालय के अंदर किसी को प्रवेश नहीं दिया गया। राजभवन के बाहर भी सुरक्षा कड़ी थी। नीतीश कुमार के राजभवन से निकलने के बाद, वह अपनी पार्टी के नेताओं के साथ विधायक दल की बैठक करेंगे, जहां जदयू के नेता उन्हें विधायक दल का नेता चुनेंगे।

    नवीनतम सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी

    नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह गांधी मैदान में 20 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य वीआईपी अतिथि शामिल होंगे। शपथ ग्रहण समारोह के लिए लगभग 5000 विशेष अतिथियों के लिए एक सेक्शन तैयार किया जा रहा है। वहीं, आम लोगों के लिए समारोह के दौरान 17 से 20 नवंबर तक प्रवेश पर पाबंदी रहेगी।

    भाजपा की विधायकों की बैठक

    भाजपा के विधायकों की बैठक मंगलवार को निर्धारित की गई है, जहां नई सरकार के गठन की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद, नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना होगी।

  • बिहार में एनडीए की शानदार जीत पर रक्षा राज्य मंत्री का आभार

    बिहार में एनडीए की शानदार जीत पर रक्षा राज्य मंत्री का आभार

    रांची: बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बेजोड़ जीत पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सफलता विकास, सुशासन और डबल इंजन सरकार पर जनता के विश्वास की जीत है।

    संजय सेठ ने कहा, “यह चुनाव परिणाम निश्चित रूप से हमें यह संदेश देता है कि जनता ने हमारी नीतियों और योजनाओं को सराहा है। यह जीत उन लोगों की भी है जो विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रयासरत हैं।”

    विकास और सुशासन की ओर आगे बढ़ते कदम 🌟

    राज्य मंत्री ने आगे कहा कि एनडीए की सरकार प्रदेश में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा, “हमारे प्रयासों का मुख्य उद्देश्य बिहार को एक मजबूत और समृद्ध राज्य बनाना है। इस जीत ने हमारी जिम्मेदारियों को और बढ़ा दिया है।”

    सेठ ने सभी जिलों में विकास कार्यों की गति को तेज करने का आश्वासन दिया और कहा कि किसानों, बेरोजगारों और युवाओं की भलाई के लिए अनेक योजनाएँ लाई जाएँगी।

    इस अवसर पर उन्होंने आम लोगों से भी अपील की कि वे विकास की इस यात्रा में साथ दें और अपने सुझाव साझा करें ताकि बिहार को आगे बढ़ाया जा सके।

  • ‘मरते दम तक BJP के साथ नहीं जाएंगे…’ – CM नीतीश कुमार

    ‘मरते दम तक BJP के साथ नहीं जाएंगे…’ – CM नीतीश कुमार

    नीतीश कुमार ने कहा, हमने बीजेपी को छोड़ दिया था. लेकिन वे जबरदस्ती पीछे पड़ कर साथ आए. 2020 में हम तो मुख्यमंत्री बनना नहीं चाहते थे, लेकिन इन्होंने जो किया सबने देखा. हम लोगों ने इन्हें कितनी इज्जत दी. लेकिन अब हम मरते दम तक बीजेपी केे साथ नहीं जाएंगे.

    सत्ताधारी जदयू में मचे सियासी घमासान के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा ऐलान किया. नीतीश कुमार ने कहा कि मरते दम तक बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे. नीतीश कुमार ने कहा, मुझे मर जाना कबूल है, लेकिन बीजेपी के साथ जाना नहीं.

    नीतीश कुमार ने कहा कि हम लोग अटलजी को मानने वाले लोग हैं. उन्होंने दावा किया कि हमने बीजेपी को छोड़ दिया था. लेकिन वे जबरदस्ती पीछे पड़ कर साथ आए. 2020 में हम तो मुख्यमंत्री बनना नहीं चाहते थे, लेकिन इन्होंने जो किया सबने देखा. हम लोगों ने इन्हें कितनी इज्जत दी. नीतीश कुमार ने कहा, चुनाव तो होने दीजिए इस बार, सबको पता चल जाएगा कि कितनी किसकी सीटें आती हैं.

    नीतीश कुमार का ये बयान ऐसे वक्त पर आया, जब उनकी पार्टी के नेता उपेंद्र कुशवाहा लगातार उन पर निशाना साध रहे हैं. उपेंद्र कुशवाहा ने दावा किया था, जदयू के बड़े नेता बीजेपी के संपर्क में हैं. इससे पहले जब उपेंद्र कुशवाहा एम्स में भर्ती हुए थे, तब उनकी फोटो भी कुछ बीजेपी नेताओं के साथ सामने आई थी. इसके बाद कुशवाहा के बीजेपी में शामिल होने के कयास लगाए जाने लगे थे. हालांकि, कुशवाहा ने कहा कि वे जदयू को छोड़कर कहीं नहीं जाने वाले.

    बीजेपी नीतीश के साथ नहीं करेगी समझौता- सुशील मोदी

    इससे पहले बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी ने कहा था कि अब बीजेपी किसी भी कीमत पर नीतीश कुमार के साथ समझौता नहीं करेगी. सुशील कुमार मोदी ने कहा कि प्रदेश कार्यसमिति में बिहार प्रभारी विनोद तावड़े भी स्पष्ट कर चुके हैं कि नीतीश कुमार किसी भी गठबंधन के लिए अब बोझ बन चुके हैं. नीतीश में वोट ट्रांसफर कराने की क्षमता खत्म हो चुकी है. 2020 में अगर पीएम मोदी ने बिहार में प्रचार नहीं किया होता तो जेडीयू 15 सीट नहीं जीत पाती उन्होंने कहा कि नीतीश के चले जाने से बीजेपी खुश है.

  • 164 विधायकों के समर्थन वाली महागठबंधन की सरकार

    बिहार बिहार में बीजेपी-जेडीयू की एनडीए की सरकार गिरने के बाद अब नई सरकार के गठन को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं.
    बुधवार 10 अगस्त को दोपहर दो बजे नीतीश कुमार 8वीं बार मुख्यंत्री पद की शपथ लेंगे तो वहीं आरजेडी नेता तेजस्वी यादव दूसरी बार डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे. बिहार की 164 विधायकों की महागठबंधन वाली सरकार का फॉर्मूला भी लगभग-लगभग तय हो गया है. कहा जा रहा है कि 35 विधायकों का एक मजबूर मंत्रिमंडल बनाने की तैयारी है. जेडीयू और आरजेडी कोटे से 14-14 मंत्री बनाए जाएंगे. वहीं सात मंत्री अन्य पार्टियों से होंगे.

    कुल सात पार्टियों इस महागठबंधन में शामिल होंगी.

    बता दें कि आज नीतीश कुमार ने राज्यपाल फागू चौहान से मिलकर अपना इस्तीफा सौंपा. इसके बाद वह सीधे राबड़ी आवास पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात तेजस्वी यादव से हुई. राबड़ी आवास से तेजस्वी यादव के साथ फिर राज्यपाल के पास पहुंचे. दोनों ने राज्यपाल से मिलकर महागठबंधन की सरकार बनाने का दावा पेश किया. नीतीश ने राज्यपाल को 164 विधायकों के समर्थन वाली चिट्ठी भी सौंपी. नीतीश के दावा पेश करने के कुछ घंटे बाद राजभवन की तरफ से उन्हें कल शपथ ग्रहण का समय भी दे दिया गया. दोपहर दो बजे नीतीश की नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा.

    जीतन राम मांझी की पार्टी को भी मिलेगी जगह
    बताया जा रहा है कि महागठबंधन में कुल सात पार्टियां शामिल हैं. जेडीयू आरजेडी, कांग्रेस, हम, लेफ्ट समेत दो अन्य पार्टियां भी हैं. सरकार में सभी पार्टियों की भागीदारी रहेगी. नई सरकार में जेडीयू और आरजेडी कोटे से 14-14 मंत्री रहेंगे. वहीं कांग्रेस को तीन और लेफ्ट को दो मंत्रालय दिए जा सकते हैं. जीता राम मांझी की पार्टी को भी एक मंत्रालय दिया जा सकता है. हालांकि अभी तक मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कोई खबर सामने नहीं आई है. केवल मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के शपथ ग्रहण की बात कही जा रही है.
    35 मंत्रियों का मजबूत मंत्रिमंडल!
    सूत्र ये भी बताते हैं नीतीश की नई सरकार में 35 मंत्रियों का मजबूत मंत्रिमंडल होगा. सभी पार्टियों को नई सरकार में शामिल किया जाएगा. हालांकि सूचना ये भी है कि आरजेडी ने नीतीश से भारी-भरकम गृह मंत्रालय की मांग की है. आरजेडी गृह मंत्रालय अपने पास रखना चाहती है. बता दें, एनडीए से अपनी राहें अलग करने के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि जब तक वह साथ रहे, उन्होंने गठबंधन का धर्म निभाया. विधायकों और सांसदों की सहमति के बाद हमने फैसला लिया. सभी नेताओं की इच्छा थी कि हम एनडीए गठबंधन से अलग हों. उन्होंने बीजेपी पर जेडीयू को खत्म करने की साजिश रचने का आरोप लगाया. नीतीश कुमार ने कहा कि बीजेपी ने हमेशा अपमानित किया.