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  • रांची नगर निगम ने गिफ्ट डीड जमीन पर अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया।

    रांची नगर निगम ने गिफ्ट डीड जमीन पर अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू किया।

    रांची नगर निगम की सख्त नीति, गिफ्ट डीड जमीन पर नहीं होगी ढिलाई

    रांची: रांची नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि गिफ्ट डीड के तहत प्राप्त जमीन पर किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। निगम ने ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाते हुए कहा है कि इस भूमि पर न तो कोई दुकान स्थापित की जा सकती है और न ही किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि हो सकती है। यह भूमि केवल सार्वजनिक उपयोग के लिए है।

    शहर में अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई

    हाल के दिनों में, नगर निगम ने विभिन्न स्थानों पर अभियान चलाकर कई अवैध कब्जों को हटाया है। 10 अप्रैल को कर्बला चौक स्थित खलील रेजिडेंसी में गिफ्ट डीड की जमीन पर बने पांच दुकानों को हटाया गया। इसके बाद, 11 अप्रैल को लालपुर और सर्कुलर रोड क्षेत्र में भी कार्रवाई की गई, जिसमें इंडसइंड बैंक के पास स्थित अवैध दुकान, दृष्टि आईएएस के सामने गुमटी, पारिजात भवन और हरिओम टावर के सामने बने ढांचे को हटाया गया।

    पहले भी की गई थी कार्रवाई

    इससे पहले, 20 मार्च को अशोक नगर से अरगोड़ा रोड पर स्थित साईं आर्केड बिल्डिंग में गिफ्ट डीड की जमीन पर चल रहे निर्माण को जेसीबी द्वारा हटाया गया था। इसके अलावा, अगस्त 2025 में हिनू मेन रोड पर बने “श्री प्रसाद किचन हाउस” नामक दुकान को भी हटाया गया था।

    नियमों का उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

    नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि किसी बिल्डर, भवन मालिक या भू-स्वामी की अनुमति से गिफ्ट डीड की जमीन पर अतिक्रमण पाया जाता है, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। इसका मतलब है कि भविष्य में उन्हें किसी भी प्रकार की अनुमति या सुविधा नहीं दी जाएगी।

    निगम की अपील, अतिक्रमण स्वयं हटाएं

    रांची नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने दस्तावेजों की जांच करें और यदि कहीं गिफ्ट डीड की जमीन पर कब्जा हो, तो उसे स्वयं हटा लें। अन्यथा, निगम को कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

  • झारखंड नियमितीकरण नियम 2026: CNT-SPT अधिनियम का उल्लंघन करते हुए बने मकान नहीं होंगे नियमित।

    झारखंड नियमितीकरण नियम 2026: CNT-SPT अधिनियम का उल्लंघन करते हुए बने मकान नहीं होंगे नियमित।

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड में नए भवन नियमावली का प्रस्ताव

    झारखंड की हेमंत सरकार ने झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनऑथराइज्डली कंस्ट्रक्टेड बिल्डिंग रूल्स- 2026 का मसौदा तैयार कर लिया है। इस नियमावली के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में अवैध या अनधिकृत रूप से निर्मित भवनों को नियमित करने के लिए एकमुश्त शुल्क वसूल किया जाएगा।

    अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई 🚧

    हालांकि, स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम-1908 और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम- 1949 के तहत हस्तांतरित जमीन पर बने भवनों का नियमितीकरण नहीं किया जाएगा। इसके उद्देश्य का मुख्य ध्यान अनधिकृत निर्माण मामलों के त्वरित निपटारे और शहरी विकास को प्रोत्साहित करना है।

    आवेदनों की जांच में यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है, तो आवेदन को निरस्त कर दिया जाएगा। ऐसे मामलों में निर्माण को अवैध मानते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें तोड़-फोड़ भी शामिल है।

    नियमितीकरण के लिए अयोग्य परिस्थितियाँ ❌

    नियमितीकरण के लिए अयोग्य मामलों में शामिल हैं:

    • सरकारी भूमि या सार्वजनिक संस्थानों की भूमि पर अतिक्रमण।
    • वैध स्वामित्व दस्तावेजों की अनुपस्थिति।
    • मास्टर प्लान या क्षेत्रीय विकास योजनाओं के विपरीत निर्माण।
    • जलग्रहण क्षेत्र या ओपन स्पेस में निर्मित भवन।
    • स्वामित्व विवाद या न्यायालय में लंबित मामले।
    • असुरक्षित घोषित भवन।

    ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की प्रक्रिया 🏡

    यदि आवेदन स्वीकार किया जाता है, तो संबंधित प्राधिकरण द्वारा पूर्व की लिए गए प्रवर्तन कदम वापस लिए जाएंगे और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। आवेदन से असंतुष्ट व्यक्तियों को 30 दिनों के अंदर अपील करने का अधिकार होगा। अपीलों का निपटारा तीन महीने में किया जाएगा।

    समयसीमा का उल्लंघन और कानूनी कार्रवाई ⚖️

    निर्धारित समय सीमा में आवेदन नहीं करने वाले मामलों को निरंतर अपराध माना जाएगा, जो निश्चित तौर पर जुर्माने समेत कानूनी कार्रवाई का सामना करेंगे। सरकार का मानना है कि यह नीति अनधिकृत निर्माण के पुराने मामलों का समाधान करेगी और शहरी क्षेत्रों में व्यवस्थित विकास को बढ़ावा देगी।

    इस पहल से झारखंड में आवास संकट का समाधान अपेक्षित है, जिससे नागरिकों को अपेक्षा है कि उनका जीवन स्तर बेहतर होगा।

  • चाईबासा नगर परिषद को नियुक्त हुआ नया प्रशासक: IAS सिद्धांत कुमार ने साझा की प्राथमिकताएं

    चाईबासा नगर परिषद को नियुक्त हुआ नया प्रशासक: IAS सिद्धांत कुमार ने साझा की प्राथमिकताएं

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    चाईबासा नगर परिषद को नया प्रशासक मिल गया 🏢

    चाईबासा में प्रशासनिक बदलाव की सौगात के रूप में आईएएस अधिकारियों में से एक, सिद्धांत कुमार ने चाईबासा नगर परिषद के नए प्रशासक के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली है।

    प्राथमिकताएँ और अपेक्षाएँ 🌟

    सिद्धांत कुमार ने अपने पहले संवाद में नगर परिषद की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने साफ-सफाई, पेयजल की उपलब्धता, सड़क व्यवस्था और प्रकाश व्यवस्था को सुधारने का आश्वासन दिया।

    सटीक योजनाएँ और कार्यवाही 🚧

    उनका कहना है कि शहर की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ठोस योजनाएँ बनाई جائیںगी। उन्होंने सभी कर्मचारियों से सहयोग की अपेक्षा की है ताकि नगर परिषद के कार्यों में तेजी लाई जा सके।

    कुमार का मानना है कि विकास के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उनकी योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए पारदर्शिता और समाज के हर वर्ग के समर्थन की आवश्यकता होगी।

    इस बदलाव को लेकर स्थानीय नागरिकों में उत्सुकता है। उन्हें उम्मीद है कि नया प्रशासन उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा।

    निष्कर्ष ✍️

    चाईबासा के लिए नए प्रशासक का यह कार्यभार उठाना न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नगर परिषद की जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने का एक अवसर भी है। स्थानीय नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति सजग रहकर ही सिद्धांत कुमार इस कार्य में सफल हो सकते हैं।

    इस नये अध्याय की शुरुआत को लेकर सभी की नजरें हैं कि किस प्रकार से यह प्रशासन नगर की समस्याओं का समाधान करेगा।