रिम्स में गर्भस्थ शिशु की आनुवांशिक बीमारी की जांच अब 3500 रुपये में, एक साल तक मुफ्त सेवा।

रांची के रिम्स में गर्भावस्था के दौरान आनुवांशिक बीमारियों की जांच की सुविधा शुरू

रांची स्थित रिम्स ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब गर्भ में पल रहे शिशुओं में गंभीर आनुवांशिक बीमारियों की पहचान कर पाना संभव हो गया है। इससे उन परिवारों को मदद मिलेगी, जहां आनुवांशिक रोगों का खतरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी बना रहता है। वर्तमान में इस जांच की लागत 3,500 रुपये रखी गई है, लेकिन अगले एक साल तक डीबीटी-निदान केंद्र परियोजना के तहत यह परीक्षण पूरी तरह मुफ्त किया जाएगा।

गर्भावस्था के दौरान बीमारियों की पहचान

रिम्स के जेनेटिक्स एवं जीनोमिक्स विभाग के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान सिकल सेल रोग, थैलेसीमिया, ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (DMD) और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) जैसी गंभीर आनुवांशिक बीमारियों का पता अब लगाया जा सकेगा। विभागाध्यक्ष डॉ. अनूपा प्रसाद ने बताया कि झारखंड में पहली बार इस प्रकार की प्रसवपूर्व आनुवांशिक जांच की सुविधा शुरू की गई है। अब तक विभाग ने थैलेसीमिया और सिकल सेल एनीमिया के 26 प्रसवपूर्व परीक्षण किए हैं, जिनकी मदद से चार गर्भस्थ शिशुओं के जन्म को रोकने में सफलता मिली है।

जांच की प्रक्रिया और लाभ

यह जांच गर्भावस्था के 9 से 11 सप्ताह और 16 से 20 सप्ताह के बीच की जा सकती है। इस प्रक्रिया में गर्भ से आवश्यक नमूने लेकर आधुनिक तकनीकों जैसे पीसीआर, सैंगर सीक्वेंसिंग और एमएलपीए का उपयोग किया जाता है। पूरी जांच प्रक्रिया में एक से दो सप्ताह का समय लगता है। रिम्स में इस जांच की निर्धारित लागत 3,500 रुपये है, जबकि निजी लैब में इसकी कीमत 15,000 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। डीबीटी-निदान केंद्र परियोजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अगले एक वर्ष तक इस सुविधा का लाभ मुफ्त में मिल सकेगा।

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