📌 गांडीव लाइव डेस्क:
कुड़मी समाज का आंदोलन समाप्त, वार्ताओं के बाद मिली राहत 🚆
रांची: झारखंड में अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग को लेकर कुड़मी समाज द्वारा चलाए जा रहे ‘रेल टेका, डहर छेका’ आंदोलन का समापन रविवार को हो गया। सरकारी वार्ताओं और मंत्रालय स्तर पर किए गए आश्वासनों के बाद आंदोलन का फैसला लिया गया।
प्रतिबंधित स्थानों पर प्रदर्शन के मामले दर्ज ⚖️
चक्रधरपुर मंडल के अंतर्गत 2000 व्यक्तियों पर तीन स्थानों पर रेलवे ट्रैक को जाम करने के कारण मामलों की पुष्टि की गई है। रेल पुलिस (आरपीएफ) ने आरोप लगाया है कि सीनी और गम्हरिया में प्रदर्शनकारी समाज ने रेलवे की लाइन को बाधित करने का प्रयास किया है। इसके अतिरिक्त, खड़गपुर मंडल के गालूडीह से भी चार से पांच सौ लोगों पर मामले दर्ज किए गए हैं।
आंदोलन खत्म, लेकिन ट्रेन रद्दी की समस्या जारी 🚫
कुड़मी आंदोलन का पूरक प्रयास एक दिन बाद समाप्त हुआ, जिसके परिणामस्वरूप चक्रधरपुर मंडल ने ट्रेन परिचालन को सामान्य करने का निर्देश दिया। रविवार की सुबह, पहली यात्री ट्रेन, मुंबई-हावड़ा गीतांजलि एक्सप्रेस, को 8:29 बजे रवाना किया गया। कई अन्य ट्रेनें, जैसे कि अहमदाबाद-हावड़ा एक्सप्रेस एवं शिरडी-हावड़ा एक्सप्रेस को भी राउरकेला, चक्रधरपुर, और अन्य मार्गों से चलाने की अनुमति दी गई।
हालांकि, शनिवार को हुए प्रदर्शनों के कारण पटना-बिलासपुर एक्सप्रेस और कई अन्य ट्रेनों को रद्द करना पड़ा, जिसके चलते यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी। रविवार को, रांची और हटिया से चलने वाली 26 ट्रेनें भी रद्द रहीं, और इसकी संभावना है कि अगले दिन भी कुछ ट्रेनें रद्द रहेंगी।
कोच की कमी का असर, कुछ ट्रेनें रद्द
रविवार को टाटानगर से चलने वाली स्टील एक्सप्रेस को भी रद्द किया गया, जबकि कुछ अन्य ट्रेनों के मार्ग में भी बदलाव किया गया। एर्नाकुलम एक्सप्रेस ने नए मार्ग से टाटानगर पहुंचने का प्रयास किया जबकि हावड़ा से जनशताब्दी एक्सप्रेस को समय में बदलाव के साथ चलाने के आदेश दिए गए।
जैसे ही रेलवे परिचालन सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहा है, कोच की कमी और रद्दी ट्रेनों की समस्या ने यात्रियों की परेशानियों को समाप्त होने में समय लगाया है। इस स्थिति में सुधार की उम्मीद है, लेकिन यात्रा करने वालों को एक-दो दिनों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।