सरायकेला-खरसावां के चांडिल में अवैध बालू व्यापार की स्थिति चिंताजनक, तीन चेक पोस्ट निष्क्रिय

सरायकेला-खरसावां में अवैध बालू का कारोबार जारी

सरायकेला-खरसावां: चांडिल अनुमंडल में एक बार फिर अवैध बालू खनन की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। प्रशासन की सख्त कार्रवाइयों के दावों के बावजूद तिरुलडीह और ईचागढ़ क्षेत्रों में खुलेआम बालू का उत्खनन और तस्करी हो रही है। स्थिति यह है कि यहां स्थापित तीन चेकनाका केवल दिखावे के लिए रह गए हैं, इसके बावजूद प्रतिदिन सैकड़ों हाईवा बालू लेकर जमशेदपुर और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की ओर बढ़ रहे हैं।

अवैध कारोबार की रात की गतिविधियाँ

स्थानीय निवासियों के अनुसार, दिन में गतिविधियाँ काफी कम रहती हैं, लेकिन शाम होते ही अवैध बालू से लदे ट्रैक्टर और हाईवा सक्रिय हो जाते हैं। सुबह से बालू को निकालकर सुरक्षित स्थान पर इकट्ठा किया जाता है और फिर रात के अंधेरे में इसे बड़े वाहनों से भेजा जाता है।

सरकारी योजनाओं पर असर

अवैध बालू के कारोबार का प्रभाव स्थानीय लोगों तथा सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों पर भी पड़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्माण के लिए आवश्यक बालू नहीं मिल पा रहा है। इससे ग्रामीणों को ऊंचे दाम चुकाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में प्रति ट्रैक्टर बालू की कीमत 4,000 से 4,500 रुपये और प्रति हाईवा की कीमत 25,000 से 30,000 रुपये है। यह स्थिति गरीबों के लिए अपने घर बनाना मुश्किल बना रही है।

सुवर्णरेखा नदी के घाट: अवैध उत्खनन के केंद्र

अवैध उत्खनन का मुख्य केंद्र सुवर्णरेखा नदी के विभिन्न घाट बने हुए हैं। ईचागढ़ क्षेत्र के जारगोडीह सोड़ो, बीरडीह, बामुनडीह और रायडीह घाट, तथा तिरुलडीह क्षेत्र के तिरुलडीह, सपादा, सपारुम और पैलोंग घाट अवैध बालू निकासी के प्रमुख स्थल हैं। यहां से बालू निकालकर पहले संग्रहित किया जाता है और फिर बड़े वाहनों से बाहर भेजा जाता है।

प्रशासनिक कार्यवाही की चुनौती

क्षेत्र में तीन चेकनाका होने के बावजूद अवैध रूप से बालू लादे वाहनों की आवाजाही लगातार जारी रहने से प्रशासन की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सख्ती से निगरानी और कार्यवाही की जाए, तो इस प्रकार के अवैध कारोबार पर काबू पाया जा सकता है।

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