📌 गांडीव लाइव डेस्क:
झारखंड में हाथियों के हमले को लेकर मुख्यमंत्री की चिंता
झारखंड में जंगली हाथियों के हमलों की बढ़ती समस्या ने राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गहरी चिंता में डाल दिया है। उन्होंने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया, जिसमें हाथियों के हमलों से आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए।
बढ़ते हमलों का आंकड़ा 📊
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका जैसे जिलों में हाथियों के हमले में लगभग 27 लोगों की जान चली गई है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
बैठक में उठाए गए कदम 📝
मुख्यमंत्री ने वन विभाग को निम्नलिखित निर्देश दिए:
- तत्काल बचाव और सुरक्षा उपाय: प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत कार्रवाई की जाए।
- विशेष प्रशिक्षण: ग्रामीणों को हाथियों के बचाव के लिए तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाए।
- सामग्री उपलब्ध कराना: हाथियों को भगाने के लिए डीजल, केरोसिन, पुराने टायर, टॉर्च, और सोलर सायरन जैसी सामग्री दी जाए।
- मुआवजा प्रक्रिया: नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित परिवारों को 12 दिनों के भीतर पूरा मुआवजा दिया जाए।
- कानूनी बदलाव: एनिमल अटैक कम्पनसेशन नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएं।
- डेटा की जांच: पिछले 5 वर्षों में मुआवजे और कैजुअल्टी से संबंधित सभी आंकड़े प्रस्तुत किए जाएं।
- एलीफेंट कॉरिडोर की मैपिंग: राज्यभर में सभी हाथी कॉरिडोर का मैपिंग कराया जाए।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कदम
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में कई हाथी विचरण कर रहे हैं, और वन विभाग को ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र विकसित करना होगा। जल्द ही 6 कुनकी हाथियों को लाने की योजना बनाई गई है, और ट्रैकिंग सिस्टम को भी मजबूत किया जाएगा।
संवेदनशीलता का आश्वासन 🌾
मुख्यमंत्री ने मानव-हाथी संघर्ष के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दोहराया। उन्होंने कहा कि न केवल मुआवजा, बल्कि फसल, पशुधन के नुकसान और स्थायी दिव्यांगता जैसी समस्याओं पर भी त्वरित राहत प्रदान की जाएगी। उनका कहना था, “ग्रामीण इलाकों के लोग हाथियों के हमलों से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। हमारी सरकार उनकी सुरक्षा और न्यायसंगत सहायता के प्रति प्रतिबद्ध है।”
इस बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।