जामताड़ा में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाएं
जामताड़ा जिले में सोमवार रात को तीन अलग-अलग स्थानों पर सड़क दुर्घटनाओं में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर चिकित्सा के लिए रेफर कर दिया गया है। क्षेत्र में लगातार हो रही दुर्घटनाओं और समय पर एंबुलेंस सेवा की अनुपलब्धता के कारण स्थानीय लोगों को निजी वाहनों से अस्पताल ले जाना पड़ रहा है। इसके साथ ही, अस्पताल में ऑक्सीजन की व्यवस्था खुद करने की मजबूरी भी सामने आई है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
घटनाओं का विवरण
जानकारी के अनुसार, पहली घटना जामताड़ा थाना क्षेत्र के मोहड़ा के पास हुई, जहां दो मोटरसाइकिलों के बीच आमने-सामने की टक्कर हो गई। इस दुर्घटना में नारायणपुर थाना क्षेत्र के गोकुल गांव के निवासी शेख हरोज गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर काफी तेज थी, जिससे दोनों बाइक पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं। दूसरी मोटरसाइकिल पर सवार व्यक्ति की पहचान नहीं हो पाई है। दूसरी घटना भी मोहड़ा के पास हुई, जहां एक टेंपो ने मोटरसाइकिल सवार बुधन महतो को टक्कर मार दी। वह नाला से अपने ससुराल नारायणपुर थाना के मदनाडीह गांव जा रहे थे।
समाजसेवी की पहल
घटना की जानकारी मिलने पर समाजसेवी सोनू सिंह मौके पर पहुंचे और मानवता का परिचय देते हुए दोनों घायलों को अपने निजी वाहन से जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार के दौरान पता चला कि एंबुलेंस में ऑक्सीजन की उचित व्यवस्था नहीं थी। इसके बाद, ऑक्सीजन की व्यवस्था कर दोनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर किया गया। तीसरी दुर्घटना जामताड़ा थाना क्षेत्र के फुलजोरी गांव के पास हुई, जहां एक अज्ञात ट्रैक्टर ने मोटरसाइकिल सवार मोहन किस्कू को टक्कर मार दी। स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर कर दिया गया।
स्थानीय लोगों की चिंताएं
लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर क्षेत्र के लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। 108 एंबुलेंस सेवा की समय पर उपलब्धता को लेकर भी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने तथा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करने की मांग की है। गोपालपुर पंचायत के मोनू टुडू के एंबुलेंस ना मिलने का मामला भी अभी तक शांत नहीं हुआ है, जबकि जामताड़ा में इस तरह की स्थिति बनी हुई है।