10 साल बाद विनय महतो हत्या मामले में गरमाया मामला, CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट में चुनौती

रांची : रांची के प्रसिद्ध सफायर इंटरनेशनल स्कूल के छात्र विनय महतो के हत्या मामले में एक बार फिर से कानूनी गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। जांच कर रही सीबीआई ने कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट पेश की है, लेकिन मृतक छात्र के पिता मनबहाल महतो इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ एक प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की है। इस पिटीशन पर शुक्रवार को रांची सिविल कोर्ट में सीबीआई की विशेष अदालत में सुनवाई की गई।

सुनवाई के दौरान CBI की क्लोजर रिपोर्ट पर उठाए सवाल

शुक्रवार को हुई सुनवाई में मामले पर आंशिक बहस हुई। मृतक विनय महतो के पिता की ओर से अधिवक्ता खुशबू कटारुका ने कोर्ट में अपनी बात रखी। उन्होंने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर कई सवाल उठाए, यह कहते हुए कि जांच में कई महत्वपूर्ण पहलू ऐसे हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि मामले की जांच पूरी तरह से संतोषजनक नहीं है। हालांकि, समय की कमी के कारण बहस पूरी नहीं हो सकी, और कोर्ट ने सुनवाई को अगले सप्ताह के लिए टाल दिया। अब अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अपनी दलीलें विस्तार से प्रस्तुत करेंगे। इसके बाद ही अदालत यह निर्णय करेगी कि सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया जाए या फिर मामले में आगे कोई कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।

क्या है पूरा मामला

यह मामला चार फरवरी 2016 की रात का है। रांची के सफायर इंटरनेशनल स्कूल परिसर में बने शिक्षक-शिक्षिकाओं के हॉस्टल में आठवीं कक्षा के छात्र विनय महतो की निर्मम हत्या कर दी गई थी। अगले दिन, यानी पांच फरवरी को उसका शव बरामद किया गया था। इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था और स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल उठाए थे।

इन लोगों को बनाया गया था आरोपी

मामले की प्रारंभिक जांच के दौरान, पुलिस ने स्कूल की शिक्षिका नाजिया, उनके पति मोहम्मद आरिफ और उनके दोनों बच्चों को आरोपी बनाया था। इसके बाद यह मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा। बाद में, जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी गई, जिसने अपनी जांच पूरी करने के बाद कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ दाखिल प्रोटेस्ट पिटीशन पर सुनवाई शुरू होने के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। अब सभी की नजर सीबीआई की विशेष अदालत के अगले निर्णय पर है। अदालत अगली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह तय करेगी कि क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी दी जाए या मामले में आगे की जांच या अन्य कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।

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