झारखंड में JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन
रांची: झारखंड में JPSC 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के संदर्भ में अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। इस बीच, भारत जोड़ो अभियान के संयोजक योगेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक पत्र भेजकर JPSC 14वीं पीटी परीक्षा को रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने राज्य की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया है।
अभ्यर्थियों की नाराजगी और योगेंद्र यादव की चिंताएँ
योगेंद्र यादव ने पत्र में कहा है कि अभ्यर्थियों की नाराजगी और उनकी पीड़ा पूरी तरह से उचित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि JPSC 14वीं पीटी में जो गड़बड़ियां और घोटाले के आरोप सामने आए हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, यह मामला केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से भर्ती प्रक्रिया में युवाओं का बढ़ता अविश्वास भी इसकी वजह है।
सरकार की पहल और सुधार की आवश्यकता
योगेंद्र यादव ने कहा कि सरकार ने आंदोलन को दबाने के बजाय छात्रों से संवाद करने का निर्णय लिया है, जो एक सकारात्मक कदम है। उन्होंने बताया कि पेपर लीक रोकने के लिए कानून बनाया गया है, मामले की जांच चल रही है, JPSC के अध्यक्ष ने इस्तीफा दिया है, और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, इस सबके बावजूद युवाओं का विश्वास पुनः स्थापित करने के लिए ठोस सुधार आवश्यक हैं।
योगेंद्र यादव की चार प्रमुख मांगें
योगेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से चार महत्वपूर्ण मांगें की हैं:
- JPSC 14वीं पीटी और उन सभी परीक्षाओं को रद्द किया जाए, जिन पर गड़बड़ी के आरोप हैं और जिनका अंतिम परिणाम अभी जारी नहीं हुआ है।
- JPSC और JSSC की सभी भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाए और हर वर्ष का परीक्षा कैलेंडर समय पर पारदर्शी तरीके से जारी किया जाए।
- पेपर लीक और परीक्षा में धांधली के आरोपों की जांच पूर्व न्यायाधीशों और निष्पक्ष व्यक्तियों की समिति द्वारा कराई जाए, ताकि अभ्यर्थियों का विश्वास वापस लौट सके।
- सरकारी नौकरियों में स्थानीय और आदिवासी-मूलवासी अभ्यर्थियों को मिलने वाले प्रतिनिधित्व से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन किया जाए।
आंदोलन का लोकतांत्रिक महत्व
पत्र के अंत में, योगेंद्र यादव ने कहा कि झारखंड और झारखंड मुक्ति मोर्चा दोनों आंदोलनों से निकले हैं। इसलिए, सरकार को इस आंदोलन को टकराव के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं के लोकतांत्रिक संदेश के रूप में देखना चाहिए। उन्हें ऐसा निर्णय लेना चाहिए जो युवाओं का सरकारी संस्थाओं पर विश्वास मजबूत करे।