हाईकोर्ट के वकील हेमंत शिकरवार पर हमले का काला बिल्ला लगाकर किया विरोध
रांची। झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता हेमंत शिकरवार के उपर हुए हमले के खिलाफ राज्य भर के अधिवक्ता आज न्यायिक कार्य से दूर रहे। रांची समेत अन्य जिलों के अधिवक्ता किसी भी न्यायालय मे उपस्थित नहीं हुए। झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्यों की आपातकालीन बैठक में हुए निर्णय के अलोक में रांची सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं ने आज अपने आप को न्यायिक कार्यों से दूर रखने का निर्णय लिया है। रांची सिविल कोर्ट के बाहर कई ऐसे फरियादी भी अपने मुकदमों की सुनवाई के लिए पहुंचे थे। जिन्हें अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार की जानकारी नहीं थी। ऐसे लोगों को बैरंग ही वापस लौटना पड़ा। अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार से राज्य भर में न्यायिक कार्यो की रफ्तार लगभग थम गई है। झारखंड स्टेट बार काउंसिल के प्रवक्ता और रांची जिÞला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्रोही ने अधिवक्ता हेमंत शिकरवार पर हुए हमले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि एक के बाद एक अधिवक्ता हिंसा के शिकार हो रहे हैं। ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में वकीलों की सुरक्षा के लिए एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं होना इन हमलों के पीछे एक बड़ी वजह है। अगर एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू नहीं होगा तो वकीलों के साथ हिंसक घटनायें होती रहेंगी। इसलिए राज्य के सभी वकीलों को एकजुट होकर एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की लड़ाई को अंतिम अंजाम तक लड़ना होगा। ज्ञात हो कि शनिवार को स्टेट बार काउंसिल के सदस्य हेमंत शिकरवार के साथ हजारीबाग में मारपीट हुई है। जिसमें वे घायल हुए हैं। पूरे प्रकरण के पीछे की मुख्य वजह भूमि से संबंधित विवाद बताया जा रहा है। इस घटना के बाद रविवार को काउंसिल ने यह निर्णय लिया था कि झारखंड के सभी अधिवक्ता 1 फरवरी को न्यायिक कार्य से अलग रहेंगे एवं आगे काले रिबन पहनकर अपना विरोध जतायेंगे।
मुवक्कीलों को हुई परेशानी
इधर अधिवक्ताओं के हड़ताल से मुवक्कीलों की परेशानी हुई। कई लोग केस में हाजिरी देने कोर्ट तो पहुंचे, लेकिन अधिवक्ताओं के न्यायिक कार्य से खुद को दूर रखने के कारण हाजिरी नहीं दे सके। वहीं अधिवक्ताओं के हड़ताल से ब्लॉक, एसडीएस व सेल टैक्स कार्यालय का कामकाज भी प्रभावित रहा।
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