झारखंड की हॉकी ने 2025 में नया इतिहास रचा
नई दिल्ली/सिमडेगा: भारतीय हॉकी के सफर में वर्ष 2025 एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। राजधानी दिल्ली में आयोजित हॉकी इंडिया के 8वें वार्षिक पुरस्कार समारोह में झारखंड के सिमडेगा जिले ने अपनी पहचान मजबूत की है। मनोज कोनबेगी को, जिन्होंने सिमडेगा में हॉकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई, प्रतिष्ठित ‘जमन लाल शर्मा अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।
प्रमुख सम्मान और उपलब्धियां
हॉकी इंडिया की 100वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इस भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इसमें भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने मनोज कोनबेगी को यह पुरस्कार प्रदान किया। उन्हें 5 लाख रुपये की राशि और प्रशस्ति पत्र दिया गया।
सिमडेगा की हॉकी में योगदान
समारोह के दौरान एक विशेष फिल्म के माध्यम से यह दर्शाया गया कि किस प्रकार मनोज कोनबेगी ने नक्सल प्रभावित सिमडेगा में ‘हॉकी की नर्सरी’ तैयार की। मनोज ने कहा कि यह पुरस्कार सिमडेगा के सभी खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों को समर्पित है, जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत नहीं छोड़ी। पुरस्कार की राशि का उपयोग वे खिलाड़ियों के विकास और भविष्य में निवेश करने के लिए करेंगे।
झारखंड को मिला 10 लाख का पुरस्कार
इस समारोह में व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ-साथ सामूहिक सफलताओं का भी जश्न मनाया गया। वर्ष 2025 में झारखंड की सब-जूनियर, जूनियर और सीनियर टीमों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस अभूतपूर्व सफलता के लिए हॉकी झारखंड को 10 लाख रुपये की पुरस्कार राशि से सम्मानित किया गया, जिसे महासचिव विजय शंकर सिंह ने स्वीकार किया।
मनोज कोनबेगी का योगदान
मनोज कोनबेगी पिछले 20 वर्षों से खेल के प्रति समर्पित हैं और वर्तमान में हॉकी सिमडेगा के अध्यक्ष तथा हॉकी झारखंड के उपाध्यक्ष हैं। उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप सिमडेगा से कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जैसे सलीमा टेटे, संगीता कुमारी, और दीपिका सोरेंग ने देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान खिलाड़ियों को आवश्यक सामग्री प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
समारोह में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिर्की, महासचिव भोलानाथ सिंह, और चयन समिति की सदस्य असुंता लकड़ा सहित भारतीय पुरुष और महिला टीम के सभी खिलाड़ी और पूर्व ओलंपियन मौजूद रहे। सिमडेगा जिला प्रशासन और विभिन्न खेल संगठनों ने मनोज कोनबेगी की इस उपलब्धि को झारखंड के खेल इतिहास का एक नया अध्याय बताया है।




















