दक्षिण अफ्रीका की एआई नीति: तकनीकी विकास की इस तेज गति में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। कई देशों की तरह, दक्षिण अफ्रीका ने भी अपनी पहली राष्ट्रीय AI नीति का ड्राफ्ट प्रस्तुत किया था, लेकिन इसे केवल 16 दिनों में वापस ले लिया गया। इसकी वजह यह थी कि दस्तावेज़ में कई संदर्भ फर्जी और AI द्वारा उत्पन्न थे। यह स्थिति दर्शाती है कि एआई तकनीक के प्रभावों और संभावित खतरों पर ध्यान देना कितना आवश्यक है।
दक्षिण अफ्रीका के संचार और डिजिटल प्रौद्योगिकी विभाग ने 10 अप्रैल को ‘ड्राफ्ट साउथ अफ्रीका नेशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पॉलिसी’ को सार्वजनिक किया था। इस नीति का उद्देश्य देश को AI नवाचार में एक उभरते नेता के रूप में प्रस्तुत करना था। लेकिन 16 दिन बाद, इसे वापस लेना पड़ा।
पॉलिसी के मुख्य बिंदु
इस ड्राफ्ट नीति का उद्देश्य एक व्यापक AI शासन ढांचे की स्थापना करना था। इसमें निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया गया था:
- राष्ट्रीय AI आयोग का गठन
- एथिक्स बोर्ड और नियामक प्राधिकरण की स्थापना
- निजी क्षेत्र में AI इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश को बढ़ावा देने के लिए टैक्स इंसेंटिव, ग्रांट और सब्सिडी
- तकनीक से जुड़े नैतिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का समाधान
फर्जी संदर्भों की समस्या
दक्षिण अफ्रीका के संचार मंत्री सॉली मलात्सी ने पुष्टि की कि नीति में शामिल 67 संदर्भों में से कम से कम छह संदर्भ ‘हैलुसिनेटेड’ थे। इसका मतलब यह है कि ये संदर्भ या तो ऐसे शोध पत्रों की ओर इशारा करते थे जो वास्तव में मौजूद नहीं थे या फिर वे कभी वैध प्रकाशनों में प्रकाशित नहीं हुए। इस स्थिति ने नीति की विश्वसनीयता को गंभीर चुनौती दी।
मामला कैसे उजागर हुआ?
एक दक्षिण अफ्रीकी ब्रॉडकास्टर की जांच में संदर्भों में गड़बड़ी का पता चला। ‘द इंडिपेंडेंट’ के अनुसार, साउथ अफ्रीकन जर्नल ऑफ फिलॉसफी और अन्य प्रतिष्ठित जर्नल्स के संपादकों ने पुष्टि की कि जिन लेखों का हवाला दिया गया था, वे अस्तित्व में नहीं थे।
एआई द्वारा उत्पन्न संदर्भों का प्रभाव
इन फर्जी संदर्भों को संभवतः चैट जीपीटी या गूगल जैमिनी जैसे AI टूल्स के माध्यम से उत्पन्न किया गया था। AI द्वारा उत्पन्न संदर्भों ने केवल स्रोतों को गढ़ा नहीं, बल्कि विश्वसनीय जर्नल्स के नाम से गलत तरीके से शोध को जोड़ा, जिससे एक झूठी विश्वसनीयता का भ्रम उत्पन्न हुआ। यह घटना दर्शाती है कि जेनरेटिव AI के कारण गलत सूचना और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग जैसे गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
दक्षिण अफ्रीका की साख पर प्रभाव
मंत्री सॉली मलात्सी ने कहा, ‘यह संभवतः इसलिए हुआ क्योंकि AI-जनित संदर्भों को बिना उचित सत्यापन के शामिल किया गया। यह स्थिति दक्षिण अफ्रीका की साख और विश्वसनीयता को प्रभावित करती है।’ उन्होंने यह भी कहा कि यह एक तकनीकी गलती के साथ-साथ मानव निगरानी की विफलता का भी संकेत है। सरकार अब इस ड्राफ्ट नीति को संशोधित कर फिर से सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी करने की योजना बना रही है।