जोहार लाइव खुलासा: गृह सचिव की जगह संयुक्त सचिव ने मुकदमा चलाने की दी अनुमति, 24 साल बाद नक्सली को किया निर्दोष घोषित।

रांची: झारखंड राज्य अब नक्सल मुक्त होने के करीब पहुँच चुका है। राज्य पुलिस ने कई प्रमुख नक्सलियों का एनकाउंटर किया है और बड़ी संख्या में नक्सलियों को गिरफ्तार भी किया है। इसके साथ ही, कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है। हालांकि, 24 वर्ष पूर्व पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नक्सली फूलदेव गंझू को हाल ही में अदालत ने निर्दोष घोषित कर दिया है। यह फैसला इसलिए आया क्योंकि पुलिस ने उसके खिलाफ पोटा केस में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। पुलिस को गृह सचिव से स्वीकृति लेनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने संयुक्त सचिव से अनुमति लेकर मामले को अदालत में पेश किया। इसके परिणामस्वरूप, अदालत ने सबूतों की कमी के कारण फूलदेव गंझू को बरी कर दिया।

पोटा केस में पुलिस की असफलता

चतरा पुलिस ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान के दौरान 20 जनवरी 2002 को एक एनकाउंटर में दो नक्सलियों को मार गिराया और दो को गिरफ्तार किया। इनमें से एक फूलदेव गंझू था, जो टंडवा के गोंदा गांव का निवासी है। इसके खिलाफ पोटा अधिनियम, आर्म्स एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया। लेकिन जब ट्रायल शुरू हुआ, तो पुलिस पोटा अधिनियम के तहत सजा दिलाने में असफल रही। इस कारण अदालत ने सबूतों की कमी के चलते फूलदेव गंझू को निर्दोष घोषित किया। पुलिस ने पोटा अधिनियम के तहत मामला चलाने के लिए संयुक्त सचिव से अनुमति हासिल की थी, लेकिन यह साबित करने में असफल रही कि उचित प्रक्रिया का पालन किया गया था।

केस के महत्वपूर्ण घटनाक्रम

  • नक्सली को गिरफ्तार करने की तिथि: 20 जनवरी 2002
  • केस दर्ज होने की तिथि: 20 जनवरी 2002
  • केस में चार्जशीट होने की तिथि: 18 जुलाई 2002
  • केस में चार्जफ्रेम होने की तिथि: 4 मई 2016 और 25 नवंबर 2025
  • केस में साक्ष्य परीक्षण की तिथि: 26 मई 2016
  • केस में जजमेंट की तिथि: 16 अप्रैल 2026

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