JSSC-CGL: पुलिस डायरी में गड़बड़ी के सबूत, सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए: अजीत कुमार

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक का मामला

पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा से संबंधित प्रश्न पत्र लीक के मामले में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि पुलिस केस डायरी में इस लीक के सबूत मौजूद हैं। विशेष रूप से, उन्होंने पुलिस डायरी के पैराग्राफ 168 का हवाला देते हुए कहा कि 2024 की जेएसएससी सीजीएल परीक्षा से दो दिन पहले 28 परीक्षार्थियों को नेपाल के बीरगंज ले जाया गया था। वहां इन अभ्यर्थियों को एक होटल में ठहराकर 135 सवालों के उत्तर रटाए गए, जिनमें से लगभग 120 उत्तर परीक्षा में सही पाए गए। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल के नियामतपुर में भी इसी तरह का एक कैंप चलाने का दावा किया गया है।

जांच की स्थिति और सरकार की जिम्मेदारी

अजीत कुमार ने यह भी कहा कि यदि जांच एजेंसियां यह स्पष्ट नहीं कर पा रही हैं कि इस पेपर लीक से कितने अभ्यर्थियों को लाभ हुआ है, तो सरकार को न्यायालय के समक्ष पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को केस डायरी में मौजूद साक्ष्यों के आधार पर जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को लेकर सख्त निर्णय लेना चाहिए। न्यायालय ने एसआईटी को छह महीने के भीतर जांच पूरी करने का आदेश दिया था, और सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति को जांच के अंतिम परिणाम पर निर्भर किया गया था।

जांच की समयसीमा और अन्य प्रश्न

अजीत कुमार ने बताया कि नेपाल ले जाए गए 28 अभ्यर्थियों में से 10 के परिणाम भी जांच पूरी होने तक रोक दिए गए थे। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जाहिर की कि जांच के लिए निर्धारित छह महीने की अवधि जून में समाप्त हो चुकी है, लेकिन अब तक जांच पूरी नहीं हुई है। इसके साथ ही, उन्होंने जेएसएससी और जेपीएससी की अन्य परीक्षाओं की नियमावली पर भी सवाल उठाए। विशेष रूप से, सहायक आचार्य नियुक्ति में योग्य अभ्यर्थियों को बाहर किए जाने, पारा और गैर-पारा शिक्षकों की स्केलिंग और नॉर्मलाइजेशन, और लेडी सुपरवाइजर परीक्षा में योग्यता संबंधी नियमों पर उन्होंने अपनी आपत्ति व्यक्त की।

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