खनिज संशोधन पर JMM ने भाजपा से पूछा, ‘दिल्ली झारखंड के अधिकारों पर क्यों नजर रखे?’

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भाजपा पर खनिज विकास विधेयक को लेकर साधा निशाना

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक पर भाजपा को घेरते हुए तीखे बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि पार्टी के पास झारखंड के संवैधानिक अधिकारों, खनिज संसाधनों और राज्य के राजस्व से संबंधित मुद्दों का कोई ठोस उत्तर नहीं है। पांडेय का आरोप है कि जब झारखंड के अधिकारों और खनिज संसाधनों की बात आती है, तो भाजपा को भ्रम फैलाने के बजाय स्पष्ट करना चाहिए कि केंद्र सरकार के प्रस्तावित बदलावों से राज्यों के अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

राजस्व के आंकड़े पेश करते हुए

पांडेय ने राज्य के संभावित राजस्व का उल्लेख करते हुए कहा कि जेएमबीएल सेस से वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 1,379 करोड़ रुपये, 2025-26 में 7,488 करोड़ रुपये और 2026-27 में 13,215 करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस राजस्व स्रोत को सीमित किया जाता है, तो राज्य के नुकसान की भरपाई कौन करेगा, इसका जवाब भाजपा को देना चाहिए। पांडेय ने कहा कि रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF, और GST जैसे अन्य राजस्व स्रोतों का उल्लेख करके JMBL सेस के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

खनन प्रभावित लोगों के लिए अतिरिक्त संसाधन की आवश्यकता

पांडेय ने खनन के कारण उत्पन्न होने वाले विस्थापन, पर्यावरणीय हानि, और स्थानीय बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ते बोझ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी और स्थानीय समुदायों को खनन के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों का सामना करना पड़ता है। इस संदर्भ में, JMBL सेस के माध्यम से राज्य को अतिरिक्त संसाधन जुटाने का अधिकार होना आवश्यक है। उन्होंने भाजपा के आरोप पर भी सवाल उठाया, जिसमें JMBL सेस को ‘लूट’ करार दिया गया है।

झारखंड के अधिकारों की रक्षा का संकल्प

विनोद पांडेय ने कहा कि अगर भाजपा के पास खनिज लूट के आरोपों के पुख्ता सबूत हैं, तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने पेश करना चाहिए। उन्होंने छात्रों के मुद्दे को JMBL सेस से जोड़ने को राजनीति का एक तरीका बताया। पांडेय ने यह स्पष्ट किया कि झामुमो की राजनीति जल, जंगल, जमीन और झारखंड के अधिकारों से संबंधित है। पार्टी इन मुद्दों पर आंदोलन से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार का कोई कानून राज्यों के संवैधानिक अधिकारों पर प्रभाव डालता है, तो झामुमो इसका विरोध करेगा।

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