धनबाद में अवैध कोयला खदान में दुर्घटना
धनबाद: गलफरबाड़ी सन्यासी मंदिर के पास स्थित जंगल में अवैध कोयला खदान देर रात धंस गई। इसमें कई श्रमिकों के दबने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
दुर्घटना का कारण
स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात करीब एक बजे लगभग 50 से 60 श्रमिकों ने अवैध रूप से संचालित खदान में प्रवेश किया था। श्रमिकों ने अधिक कोयला काटने के प्रयास में खदान के भीतर स्थापित पिलर को काट दिया, जिसके कारण खदान अचानक धंस गई। इस दुर्घटना में गोपाल और मिंटू की खदानें भी धंस गईं, जिससे कई श्रमिक अंदर ही फंस गए और कई अन्य मलबे के नीचे दब गए। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
खदान संचालकों की भूमिका
स्थानीय लोगों का कहना है कि खदान संचालकों ने कुछ स्थानीय कोयला चोरों की मदद से दबे हुए श्रमिकों को निकाला। जिन श्रमिकों की मौत हुई, उनके शवों को रात में ही ठिकाने लगा दिया गया। दुर्घटनाग्रस्त खदानों को डोजर और जेसीबी मशीनों के माध्यम से भर दिया गया ताकि जिला प्रशासन को कोई सबूत न मिले। चूंकि मरने वाले सभी श्रमिक पश्चिम बंगाल के थे, उनके परिजनों ने डर के कारण पुलिस को जानकारी नहीं दी है। खदान संचालकों ने कुछ आर्थिक मदद देकर उन्हें चुप रहने के लिए कहा।
स्थानीय अवैध खनन गतिविधियाँ
भट्ठा संचालक आर्थिक मदद देकर करवाता है अवैध खनन
गलफरबाड़ी सन्यासी मंदिर के समीप आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त मुन्ना और पिंटू स्थानीय युवकों को वित्तीय सहायता प्रदान कर अवैध खनन का संचालन करते हैं। इन खदानों से निकाला गया कोयला इन दोनों के भट्ठों में ट्रैक्टर और अन्य वाहनों द्वारा लाया जाता है, जहां से इसे बिहार, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश की मंडियों में बेचा जाता है। हादसे के बावजूद भी इन भट्ठों में कोयला चोरी जारी है।
पुलिस का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
बुधवार को मैथन में एक पुलिस समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार सहित कई महत्वपूर्ण पुलिस अधिकारी और थानेदार मौजूद थे। लेकिन इस दौरान गलफरबाड़ी में हुई खदान दुर्घटना की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। गलफरबाड़ी पुलिस ने इस घटना को पूरी तरह से दबा दिया और ओपी प्रभारी दीपक कुमार दास ने ऐसी किसी घटना से इनकार कर दिया।

प्रातिक्रिया दे