कैरव गांधी अपहरण मामले में पुलिस की कार्रवाई अब तक बेअसर, 10 करोड़ की फिरौती मांगी गई

जमशेदपुर में अपहरण मामले में गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

डेस्क: जमशेदपुर के बिष्टुपुर सीएच एरिया के व्यापारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी का 13 जनवरी को अपहरण किया गया था। अब, 20 जनवरी को अपहरणकर्ताओं ने उनके परिवार से 10 करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की है। इस मामले की तहकीकात में झारखंड पुलिस ने विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया है। अपहरणकर्ताओं ने इंडोनेशिया के नंबर से कैरव के परिवार वालों को कई बार फोन किया है।

सीसीटीवी से मिली जानकारी

पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि कैरव 13 जनवरी को दोपहर 12:55 बजे अपनी क्रेटा कार से निकले। उन्होंने कदमा-सोनारी लिंक रोड गोलचक्कर से वापसी की और सीएच एरिया गोलचक्कर पर पहुंचे। जहां से वे साई मंदिर और मरीन ड्राइव की ओर बढ़ने लगे। उसी समय एक सफेद स्कार्पियो ने उन्हें रोका। इस स्कार्पियो में पांच युवक सवार थे और इसके ऊपर पुलिस की तरह लाल रंग का सायरन भी लगा था। स्कार्पियो में सवार दो अपराधियों ने कैरव की क्रेटा में जबरन प्रवेश किया, उन्हें डराकर उनका मोबाइल छीन लिया और उसे बंद कर दिया।

कांंदरबेड़ा से जुड़ी घटनाएँ

कैरव को अपहरण के बाद कांंदरबेड़ा स्थित एक सुनसान स्थान पर ले जाया गया, जहाँ उन्हें स्कार्पियो में बिठाया गया। उनकी क्रेटा कार वहीं पर छोडी गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज में उस स्कार्पियो की छवि प्राप्त की है। जब स्कार्पियो के नंबर प्लेट की जांच की गई, तो पता चला कि यह कोडरमा के एक बोलेरो की थी। अब पुलिस उस स्कार्पियो की खोज में जुटी है।

अपहरण के बाद की कार्रवाई

कैरव गांधी के लापता होने के छह दिन बीतने के बावजूद अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। सहर के पुलिस ने संगठित आपराधी गिरोह के सदस्यों का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास जारी रखे हैं। उन्होंने सीएच एरिया से कांंदरबेड़ा तक के सीसीटीवी फुटेज की गहराई से जाँच की है। सीसीटीवी में कैरव की क्रेटा कार दिखी लेकिन तेज गति के कारण कार में बैठे लोगों की पहचान नहीं हो सकी।

गैंग की पहचान के प्रयास

पुलिस अब उच्च स्तरीय टीमों के साथ कैरव की खोज में जुटी है। CID और ATS की टीमें भी इस मामले की जांच में शामिल हो गई हैं। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, जाँच के लिए एक विशेष दल का गठन किया गया है। यह टीम झारखंड के अलावा बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और गुजरात में भी खोज अभियान चला रही है। डीजीपी तदाशा मिश्रा इस अभियान की निगरानी कर रही हैं, और परिजन अभी भी अपने बेटे के वापस लौटने की उम्मीद कर रहे हैं।

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