रोहिणी आचार्या ने संजय यादव के कारण परिवार को किया अनफॉलो, रिश्तों में आई दरार!

रोहिणी आचार्या ने पूरे लालू परिवार को किया अनफॉलो, संजय यादव की वजह से मां-बाप, भाई-बहन सबसे मोहभंग!

📌 गांडीव लाइव डेस्क:

रोहिणी आचार्य और लालू परिवार के बीच बढ़ती दूरियां

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के परिवार के साथ संबंधों में तनाव उत्पन्न होता दिख रहा है। हाल में हुए घटनाक्रम में, रोहिणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने परिवार के सदस्यों और पार्टी नेताओं को अनफॉलो कर दिया। उन्होंने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव जैसे नेताओं को अपने फॉलोइंग लिस्ट से हटा दिया है, जो उनकी असहमति का स्पष्ट संकेत है।

सोशल मीडिया पर तनाव

चेतावनी के तौर पर, रोहिणी आचार्य ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट को 8 घंटे तक लॉक रखा, जिसके बाद कुछ विवादास्पद पोस्ट गायब हो गए। उल्लेखनीय है कि रोहिणी ने सारण से लोकसभा चुनाव में भी भाग लिया था, लेकिन उन्हें भारतीय जनता पार्टी के नेता राजीव प्रताप रूडी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। जबकि उनकी विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी की अटकलें थी, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनका किसी भी राजनीतिक पद, जैसे विधानसभा या राज्यसभा में जाने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने अपने आत्मसम्मान को प्रमुखता दी है।

परिवार में असंतोष का कारण

लालू यादव के परिवार में संजय यादव की भूमिका को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। तेजस्वी यादव की सलाहकार के तौर पर कार्य कर रहे संजय यादव का प्रभाव परिवार के अन्य सदस्यों पर नकारात्मक असर डाल रहा है। इस विवाद में, तेजप्रताप यादव भी संजय पर आरोप लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं। उन्होंने बिना नाम लिए संजय को ‘जयचंद’ कहा, जिसका इशारा स्पष्ट है।

राजनीतिक महत्वाकांक्षा का नकार

रोहिणी ने अपने ट्वीट के माध्यम से स्पष्ट किया है कि उनका किसी भी राजनीतिक महत्वाकांक्षा का कोई इरादा नहीं है और उन्हें किसी प्रकार की पद की चाह नहीं है। उनकी यह स्थिति लालू परिवार में आंतरिक राजनीति के बीच महत्वपूर्ण बन गई है। इस स्थिति में, तेजस्वी के लिए भविष्य की चुनौतियां बढ़ रही हैं, खासकर यदि भ्रष्टाचार के मामलों में कुछ सामने आता है।

रोहिणी आचार्य की यह स्थिति न केवल परिवार के लिए चिंताजनक है, बल्कि यह आरजेडी पार्टी के राजनीतिक भविष्य पर भी सवाल उठा रही है। इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पारिवारिक समरसता और राजनीति के बीच संघर्ष अब खुलकर सामने आ रहा है।

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