सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी, अब तक 16 माओवादी ढेर हुए

सारंडा जंगल में जारी है सुरक्षाबलों का अभियान, एक और माओवादी ढेर, अबतक 16 मारे गए

चाईबासा: सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता

चाईबासा: सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों ने एक और उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। मुठभेड़ के दौरान एक और माओवादी मारा गया है। इस इलाके में पिछले 30 घंटों से सर्च ऑपरेशन चला रहा है, जिसमें सुरक्षा एजेंसियां आसपास के क्षेत्रों की गहन जांच कर रही हैं। मारे गए माओवादी की पहचान की प्रक्रिया चल रही है, जबकि ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों में से किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। अधिकारियों की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।

भीषण मुठभेड़ में 15 माओवादियों की मौत

सारंडा के घने जंगलों में चल रहे इस मुठभेड़ में झारखंड की सुरक्षा बलों को एक बड़ी उपलब्धि मिली है। ऑपरेशन ‘मेगाबुरु’ के तहत कोबरा बटालियन-209, झारखंड पुलिस, CRPF और अन्य सुरक्षा बलों ने 15 माओवादियों, जिनमें कुख्यात अनल दा और उसके साथी शामिल हैं, को ढेर कर दिया है। अब तक कुल 16 माओवादी मारे जा चुके हैं, जिनमें से 13 की पहचान हो चुकी है। सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है, और इलाके को पूरी तरह से घेर लिया गया है। यह ऑपरेशन केंद्र सरकार के मार्च 2026 तक नक्सलवाद मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है।

उच्च अधिकारियों की पुष्टि

झारखंड पुलिस के IG (ऑपरेशंस) माइकल राज एस और CRPF IG साकेत कुमार ने इस बड़ी सफलता की पुष्टि की है। गृह मंत्री अमित शाह ने भी इसे एक बड़ी जीत के रूप में स्वीकार किया है और बचे हुए नक्सलियों को मुख्य धारा में लौटने की चेतावनी दी है। गृह मंत्री ने माओवाद के समाप्ति के प्रति अधिकारियों की प्रतिबद्धता को भी स्पष्ट किया।

मुठभेड़ का विवरण

गुरुवार (22 जनवरी) को सारंडा जंगल में शुरू हुए इस मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने अब तक 16 माओवादियों को मार गिराया है। मारे गए प्रमुख नेता पतिराम मांझी उर्फ अनल दा की पहचान की गई है, जो CPI माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य है। उसके खिलाफ झारखंड में ₹1 करोड़ और ओडिशा में ₹1.2 करोड़ का इनाम था। अन्य मारे गए माओवादियों में 14 शामिल हैं, जिनमें 5 महिलाएं भी हैं। ऑपरेशन मेगाबुरु के तहत सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस और रणनीति का परिचय दिया है, और मुठभेड़ 7 घंटे से अधिक समय तक चली।

ऑपरेशन के परिणाम

इस ऑपरेशन में बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री बरामद की गई है। यह झारखंड में नक्सलियों का अंतिम प्रमुख गढ़ माना जाता था। सुरक्षा बलों में किसी घायल होने की रिपोर्ट नहीं है, और गहन तलाशी का कार्य अभी भी जारी है। इस सफल अभियान को राज्य में उपस्थित बचे हुए नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिनकी संख्या लगभग 60-65 बताई जाती है।

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