थानेदारों के लिए ‘जनता से संवाद’ पर विशेष ट्रेनिंग, 9 दिन चलेगा कार्यक्रम

रांची : झारखंड में पुलिस थानों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने और आम जनता के साथ पुलिस के व्यवहार को और अधिक संवेदनशील बनाने के लिए राज्यभर में थाना और ओपी प्रभारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। यह कार्यक्रम अनुसंधान प्रशिक्षण विद्यालय, झारखंड, रांची में आयोजित होगा। इस विशेष प्रशिक्षण में कुल 9 सत्र होंगे, जिसमें राज्य के सभी जिलों के थाना और ओपी प्रभारी भाग लेंगे। पुलिस विभाग के अनुसार, इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य थाने की पुलिसिंग को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है। इसके साथ ही, थाना प्रभारियों को नए कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केस दर्ज करने से लेकर जांच और कार्रवाई तक की प्रक्रिया समय पर और कानून के अनुसार पूरी हो।

5 मई से 29 मई तक 9 सत्रों में होगा प्रशिक्षण

राज्य में कानून-व्यवस्था को प्रभावित किए बिना यह प्रशिक्षण विभिन्न तारीखों पर आयोजित किया जाएगा। इसके लिए 05, 07, 11, 14, 18, 21, 25, 28 और 29 मई 2026 की तिथियां निर्धारित की गई हैं। प्रत्येक सत्र में विभिन्न जिलों के थाना प्रभारी शामिल होंगे, ताकि थानों का कार्य बाधित न हो।

DGP तदाशा मिश्र ने दीप जलाकर किया उद्घाटन

प्रशिक्षण कार्यक्रम का पहला सत्र 05 मई को शुरू हुआ। इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि झारखंड की DGP तदाशा मिश्र थीं, जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण की शुरुआत की। DGP ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि थाना पुलिस की पहली पहचान होती है और जनता की नजर में पुलिस की छवि थाने पर ही बनती या बिगड़ती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि थाने में उपस्थित व्यक्ति पीड़ित हो सकता है और मदद की उम्मीद के साथ आता है, इसलिए पुलिस को संवेदनशीलता और धैर्य के साथ कार्य करना चाहिए।

इन विषयों पर मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में थाना और ओपी प्रभारियों को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें मुख्यतः निम्नलिखित विषय शामिल हैं:

1. जनता से व्यवहार और पुलिस की कार्यशैली

थाने में आने वाले आम नागरिक, पीड़ित, महिलाएं और बच्चों के साथ उचित व्यवहार कैसे किया जाए, इस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

2. मीडिया ब्रीफिंग के नियम (SOPs)

किसी घटना के बाद मीडिया को जानकारी देने की प्रक्रिया, सीमाएं और जिम्मेदारियों के बारे में दिशा-निर्देश प्रदान किए जाएंगे।

3. महिला और बाल पीड़ितों से जुड़े BNSS के अनिवार्य प्रावधान

महिला अपराध और बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस को अपनानी वाली कानूनी प्रक्रियाओं पर विशेष फोकस किया जाएगा।

4. तलाशी और जब्ती की कानूनी प्रक्रिया

तलाशी और जब्ती के दौरान होने वाली सामान्य गलतियों से बचने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

5. FSL टीम की भूमिका

BNSS के अंतर्गत फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) टीम को कब और कैसे शामिल करना है, इसकी प्रक्रिया समझाई जाएगी।

6. अभियोजन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलू

कोर्ट में केस को मजबूत बनाने के लिए चार्जशीट, साक्ष्य और दस्तावेजों की महत्वता पर जानकारी दी जाएगी।

7. CCTNS और डिजिटल पुलिसिंग

थाना स्तर पर ऑनलाइन सिस्टम को सशक्त बनाने के लिए CCTNS के कैप्सूल कोर्स कराए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:

  • ऑनलाइन जनरल डायरी
  • BNSS के अनुसार केस टाइमलाइन
  • जीरो FIR
  • ई-साक्ष्य (E-Sakshya)

वरिष्ठ अधिकारियों ने दिए व्यावहारिक सुझाव

इस कार्यक्रम में पुलिस मुख्यालय और विभिन्न शाखाओं के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इनमें IG ट्रेनिंग ए. विजयालक्ष्मी, IG STF अनूप बिरथरे, DIG STF इन्द्रजीत माहथा, DIG SIB संजीव कुमार सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। इन अधिकारियों ने थाना प्रभारियों को बताया कि छोटी-छोटी प्रक्रियागत गलतियां कई बार केस को कमजोर कर सकती हैं। इसलिए समय पर कार्रवाई, साक्ष्य का संरक्षण और पीड़ित से संवाद को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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