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  • राहुल गांधी का लखनऊ में बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता धनवान

    राहुल गांधी का लखनऊ में बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता धनवान

    राहुल गांधी का बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी

    लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी पार्टी को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है, हालांकि पार्टी के कई नेता आर्थिक दृष्टि से संपन्न हैं।

    राहुल गांधी ने स्पष्ट किया, “हम अमीर पार्टी नहीं बनना चाहते। यदि ऐसा हुआ, तो कांग्रेस भाजपा की तरह हो जाएगी।” उन्होंने पार्टी की जड़ों को याद करते हुए बताया कि इसका ढांचा महात्मा गांधी के समय से स्थापित है, जो हमेशा गरीबों और वंचितों की पहचान बनते रहे हैं।

    कांशीराम की जयंती पर सम्मेलन में कांग्रेस की कमियां

    कांशीराम की जयंती पर राहुल गांधी ने अपनी पार्टी की कमजोरियों पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कुछ नाकामियों के कारण बहुजन आंदोलन को मजबूती मिली और कांशीराम को राजनीतिक सफलता हासिल हुई।

    उन्होंने जोड़ा कि यदि कांग्रेस ने सामाजिक बदलाव के लिए तेजी से कदम उठाए होते, तो शायद कांशीराम को इतनी बड़ी पहचान नहीं मिलती।

    बदलाव के लिए संघर्ष की आवश्यकता

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में बदलाव केवल इच्छाशक्ति से नहीं होता, इसके लिए विचारों के लिए संघर्ष आवश्यक है। वे बोले कि जब तक लोग अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे और उसके खिलाफ खड़े नहीं होंगे, तब तक समाज में बदलाव असंभव है।

    संविधान और वर्तमान सरकार की आलोचना

    संविधान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में प्राचीन सभ्यता की आवाज़ शामिल है और इसकी आत्मा सामाजिक न्याय और समानता की है। वर्तमान सरकार की नीतियों पर उन्होंने आरोप लगाया कि वह इस मूल भावना को नकार रही है।

    अंबेडकर और कांशीराम का संघर्ष

    अपने भाषण में उन्होंने बी. आर. अंबेडकर और कांशीराम के संघर्षों का जिक्र किया। राहुल गांधी ने बताया कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौता किए अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया।

    ऊर्जा नीति पर सरकार पर आरोप

    राहुल गांधी ने भारत की ऊर्जा नीति को लेकर प्रश्न उठाए। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर आरोप लगाया कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते भारत की ऊर्जा नीतियों में बाधा आ रही है।

    समाज में असमानता का मुद्दा

    राहुल गांधी ने समाज में बढ़ती असमानता पर ध्यान दिलाया, जहाँ 15 प्रतिशत लोग अन्य 85 प्रतिशत पर हावी हो रहे हैं, और संसाधनों तथा अवसरों का लाभ केवल एक सीमित वर्ग तक पहुंच रहा है।

    2027 चुनाव की तैयारी

    कार्यक्रम के अंत में, उन्होंने समाज में बदलाव के प्रति लगन की बात की और बताया कि सभी के योगदान वाली राजनीति ही देश की प्रगति के लिए आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि हाल में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन उत्तर प्रदेश में मजबूत प्रदर्शन कर चुका है, और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए इसी रणनीति पर काम कर रहा है।

  • BJP ने तीन निलंबित विधायकों को शामिल करके कांग्रेस को किया नुकसान

    BJP ने तीन निलंबित विधायकों को शामिल करके कांग्रेस को किया नुकसान

    गुवाहाटी में भाजपा का परिवार बढ़ा

    गुवाहाटी. असम में विधानसभा चुनावों के चलते भाजपा का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, कांग्रेस की पूर्व राज्य इकाई के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। अब इस क्रम में तीन निलंबित कांग्रेस विधायकों—कमलाख्या डे पुरकायस्थ, बसंत दास, और शशिकांत दास—ने भी सत्ताधारी दल में शामिल होने का निर्णय लिया है।

    भाजपा में शामिल होने का उद्देश्य

    भाजपा में शामिल होते समय पूर्व कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य असम और राष्ट्र की सुरक्षा है। असम का नागरिक होने के नाते हमें भाजपा के साथ आना चाहिए और देश को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा की नीति में सहयोग देना चाहिए। यदि कांग्रेस ने अपनी विचारधारा में बदलाव नहीं किया, तो वह रिक्त हो जाएगी।”

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

    इस भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आज भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। उनके अनुसार, यह कांग्रेस विधायकों का भाजपा में आना पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों की श्रद्धा को दर्शाता है।

    सीट शेयरिंग पर मुख्यमंत्री का बयान

    सीएम सरमा ने सीट शेयरिंग के संदर्भ में बताया कि हाल ही में असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फोरम और राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ बातचीत समाप्त हो गई है। इस मामले पर आधिकारिक घोषणा में कुछ दिनों का समय लग सकता है, क्योंकि केंद्रीय संसदीय समिति से मंजूरी प्राप्त करनी है।

    केंद्रीय मंत्री का बयान

    केंद्रीय मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग, विशेष रूप से कांग्रेस के सदस्य, भाजपा में शामिल हो रहे हैं। यह हमारी विचारधारा के प्रति उनके समर्थन को दिखाता है और इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा की लोकप्रियता हर हिस्से में बढ़ रही है।

  • जमशेदपुर: नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने लड्डू बांटकर मनाई खुशी, संजीव सिन्हा बोले- नई शुरुआत

    जमशेदपुर: नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने लड्डू बांटकर मनाई खुशी, संजीव सिन्हा बोले- नई शुरुआत

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    जमशेदपुर में नितिन नबीन के नेतृत्व में भाजपा का उत्सव 🎉

    जमशेदपुर: भारतीय जनता पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के चुनाव पर लोगों में खुशी का माहौल देखा गया है। इस खुशी को मनाने के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं ने लड्डू बांटकर अपनी खुशियों का इजहार किया। मंगलवार को संगठन के नवनिर्वाचित अध्यक्ष संजीव सिन्हा की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने साकची स्थित जिला भाजपा कार्यालय के बाहर लड्डू वितरण किया। इस मौके पर सभी ने शुभकामनाएं देते हुए ‘भाजपा जिंदाबाद’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाए।

    नई दिशा की ओर बढ़ता भाजपा का नेतृत्व 🌟

    संजय सिन्हा ने नितिन नबीन को इसी अवसर पर बधाई दी। उन्होंने बताया कि नबीन का चयन पार्टी में एक नवाचार का परिचायक है। उन्होंने आगे कहा कि 45 वर्षीय युवा नेतृत्व को अब पार्टी की राष्ट्रीय जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो आगामी वर्षों में भाजपा के सिद्धांतों और कार्यों को आम जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सिन्हा ने यह भी कहा कि नबीन की कार्यकुशलता और संगठन पर पकड़ पार्टी को और मजबूत बनाएगी।

    कार्यकर्ताओं में नया जोश और ऊर्जा 💪

    इस उत्सव के दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर मिश्रा, राजकुमार श्रीवास्तव, और कई अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। इस प्रेम और एकता के माहौल ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नई ताकत और उमंग का संचार किया। सिन्हा ने कहा कि नबीन के अध्यक्ष बनने से संगठन में उत्साह और जनसेवा की भावना और भी बढ़ेगी।

    इस उत्सव का आयोजन न केवल भाजपा के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है, जहां कार्यकर्ता एक नई दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।

    इसे भी पढ़ें: देवांग गांधी के परिजनों से मिला मारवाड़ी सम्मेलन का प्रतिनिधिमंडल, सकुशल वापसी की कामना

  • केसी त्यागी की जेडीयू से विदाई, पार्टी ने कहा- अब कोई संबंध नहीं

    केसी त्यागी की जेडीयू से विदाई, पार्टी ने कहा- अब कोई संबंध नहीं

    जेडीयू में के.सी. त्यागी का अध्याय समाप्त

    नई दिल्ली. जेडीयू (जदयू) के सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी का पार्टी में योगदान अब समाप्त हो चुका है। हाल ही में उनके बयानों और गतिविधियों पर उठे सवालों के मद्देनजर, पार्टी नेतृत्व ने उनसे दूरी बनाने का निर्णय लिया। जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने स्पष्ट किया है कि अब के.सी. त्यागी का पार्टी के साथ कोई औपचारिक संबंध नहीं रहा है।

    नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग

    के.सी. त्यागी ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए थे। पत्र में, त्यागी ने कहा था कि जैसे चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को यह उपाधि दी गई थी, नीतीश कुमार भी इसके हकदार हैं। परंतु, जेडीयू ने इस मांग से दूर रहने का फैसला लिया। प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि त्यागी का यह बयान पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से अलग है और इसे उनकी व्यक्तिगत राय के रूप में देखा जाना चाहिए।

    सम्मानजनक अलगाव की ओर कदम

    सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है, हालांकि पार्टी ने त्यागी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है। यह कदम उनके लंबे समय के संबंध को देखते हुए लिया गया है। पार्टी के अंदरूनी हलकों में इसे एक युग का अंत माना जा रहा है, जबकि जेडीयू नेतृत्व अपनी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    मुस्तफिजुर रहमान पर विवादास्पद बयान

    के.सी. त्यागी ने हाल ही में क्रिकेट खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में बयान दिया था, जो जेडीयू नेतृत्व को अनुचित लगा। उन्होंने कहा था कि खेल में राजनीति नहीं लानी चाहिए और भारत को भी उन्हें खेलने की अनुमति देनी चाहिए। लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के बाद इस बयान का विरोध हुआ। पार्टी के अनुसार, त्यागी को ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करना चाहिए था।

    जेडीयू की नीति पर असहमति

    जेडीयू नेतृत्व का मानना है कि जब मामला दो देशों के बीच का हो, तो त्यागी को पार्टी के साथ चर्चा करनी चाहिए थी। पहले भी वे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी की नीति से अलग बयान दे चुके हैं, जिससे पार्टी को मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा। अंततः, उनकी इस स्थिति के कारण उन्हें जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा।

  • पश्चिम बंगाल के TMC सांसद का कांग्रेस पार्टी में शामिल होना बड़ा झटका

    पश्चिम बंगाल के TMC सांसद का कांग्रेस पार्टी में शामिल होना बड़ा झटका

    पश्चिम बंगाल में टीएमसी को झटका, बेनजीर नूर ने कांग्रेस जॉइन की

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद बेनजीर नूर ने कांग्रेस पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया है। यह कदम विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

    बेनजीर नूर का कांग्रेस में शामिल होना

    बेनजीर नूर ने कहा कि, “मैं कांग्रेस पार्टी को फिर से साथ काम करने का मौका देने के लिए धन्यवाद देती हूं। मैंने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है और मेरा इस्तीफा ममता बनर्जी को सौंपा गया है। सोमवार को मैं राज्यसभा से भी इस्तीफा दे दूंगी। आज से, मैं कांग्रेस में शामिल हो गई हूं और पार्टी को मजबूत बनाने के लिए कठिन मेहनत करूंगी, क्योंकि बंगाल के लोग तथा मालदा के लोग कांग्रेस पर विश्वास करते हैं।” उन्होंने कांग्रेस की धर्मनिरपेक्षता, विकास और शांति की विचारधाराओं पर जोर दिया।

    राजनीतिक करियर और आगे की योजना

    बेनजीर नूर ने कांग्रेस मुख्यालय में जयराम रमेश, गुलाम अहमद मीर और शुभंकर सरकार के समक्ष पार्टी जॉइन की। उनका राज्यसभा कार्यकाल इस साल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। अगले विधानसभा चुनाव में वह मालदा से चुनावी मैदान में उतरने की संभावना जता रही हैं। नूर ने 2009 से 2019 तक कांग्रेस पार्टी से मालदा से दो बार लोकसभा सांसद रह चुकी हैं, जिससे उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि मजबूत होती है।

  • चीन के सुलह दावे पर कांग्रेस: पीएम मोदी बयान दें

    चीन के सुलह दावे पर कांग्रेस: पीएम मोदी बयान दें

    कांग्रेस ने चीन के मध्यस्थता दावों पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली. कांग्रेस पार्टी ने बुधवार को भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के लिए चीन द्वारा किए गए दावों को चिंताजनक बताया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण की मांग की, यह कहते हुए कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है।

    कांग्रेस नेता का बयान

    जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यह दावा किया है कि उन्होंने 10 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने के लिए हस्तक्षेप किया था, जबकि प्रधानमंत्री ने कभी भी इसकी पुष्टि नहीं की। अब चीनी विदेश मंत्री ने भी इसी तरह का दावा किया है कि चीन ने मध्यस्थता की थी। यह सभी बातें संदिग्ध हैं, खासकर जब भारतीय सेना ने 4 जुलाई, 2025 को स्पष्ट रूप से कहा था कि वे चीन के खिलाफ कार्रवाई कर रहे थे।”

    चीन के दावों पर सवाल उठाए गए

    रमेश ने आगे कहा कि चीन का पाकिस्तान के साथ होना भारत के लिए चिंताजनक है और यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह जनता के विश्वास के खिलाफ है।

    ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका पर स्पष्टीकरण की मांग

    रमेश ने चीन के साथ संबंधों पर ध्यान देते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री द्वारा चीन को दोषमुक्त किए जाने से भारत की स्थिति कमजोर हुई है। उन्होंने कहा कि भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है और हमारा निर्यात चीन पर निर्भर है। उन्होंने नागरिकों से पूछा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने में चीन की भूमिका क्या थी।

    चीन का बयान

    गौरतलब है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मंगलवार को कहा था कि “भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करना इस साल चीन की मध्यस्थता सफलताओं में से एक है।”

    भारत का आधिकारिक रुख

    वहीं, भारत सरकार ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि 7 से 10 मई के बीच भारत और पाकिस्तान के बीच हुई घटनाएं सीधे बातचीत के माध्यम से हल की गईं। भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं है।

  • भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का आज दिल्ली दौरा, पार्टी मुख्यालय में स्वागत होगा

    भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन का आज दिल्ली दौरा, पार्टी मुख्यालय में स्वागत होगा

    नितिन नबीन की राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति

    नई दिल्ली. बिहार के कैबिनेट मंत्री नितिन नबीन प्रसाद सिन्हा को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष घोषित किया गया है। इस घोषणा के बाद, पार्टी ने उनके दिल्ली दौरे की योजना भी बना ली है। नबीन, दिल्ली पहुंचने से पहले पटना के महावीर मंदिर में पूजा करेंगे और फिर अपने दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए स्व. नबीन किशोर सिन्हा पार्क जाएंगे। उनका दिल्ली पहुंचने का समय सुबह 10 बजे का है, जहां उन्हें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा के सभी सांसदों द्वारा स्वागत किया जाएगा।

    राजनीतिक यात्रा और चुनावी सफलताएं

    नितिन नबीन की इस नई भूमिका सत्ताधारी पार्टी के भीतर एक बड़े संगठनात्मक परिवर्तन का हिस्सा है। उनका राजनीतिक सफर 1980 में पटना में जन्म लेकर आरएसएस की छात्र शाखा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से शुरू हुआ। नबीन 2006 में पटना पश्चिम सीट से चुनाव जीतकर पहली बार बिहार विधानसभा के लिए चुने गए। वह बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से पांच बार जीत चुके हैं, जो भाजपा की मजबूत शहरी सीटों में से एक मानी जाती है। हाल में बिहार विधानसभा चुनाव में, उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल की रेखा कुमारी को 51,000 से अधिक वोटों से हराया।

    भाजपा की चुनावी जीत और प्रधानमंत्री की बधाई

    नबीन की नियुक्ति बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की जीत के बाद की गई है, जहां भाजपा ने 89 सीटें जीतीं। जेडीयू को 85 सीटें मिलीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नबीन को उनकी नई जिम्मेदारी के लिए बधाई दी है। उन्होंने अपने एक पोस्ट में कहा है कि नितिन नबीन एक मेहनती और युवा नेता हैं, जिनका संगठन में काफी अनुभव है। उनका कार्यकाल विधायक और मंत्री के रूप में प्रभावशाली था और उन्होंने जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने में अपनी मेहनत दिखाई है।

    सাংठनेिक अनुभव और पृष्ठभूमि

    नितिन नबीन वर्तमान में नीतीश कुमार की एनडीए सरकार में सड़क निर्माण मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं। 45 वर्ष की आयु में, वह भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने वाले सबसे युवा नेता हैं। उनके पास लगभग 20 वर्ष का संगठनात्मक अनुभव है और वह पार्टी में विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाओं में रहे हैं। उनके पिता नबीन किशोर सिन्हा जनसंघ के नेता रहे हैं और उन्होंने भी बिहार में विधायक के रूप में कार्य किया। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, छत्तीसगढ़ चुनाव अभियान के दौरान नबीन का संगठनात्मक कौशल शीर्ष नेतृत्व की नजर में आया है।

  • यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ये छह नेता दौड़ में हैं

    यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ये छह नेता दौड़ में हैं

    उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ में नए नाम

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी के लिए छह दावेदारों के नाम सामने आए हैं। पार्टी में चर्चा है कि इस बार किसी ब्राह्मण या दलित नेता को जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा, ओबीसी समुदाय के नेताओं को भी अध्यक्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। इस संदर्भ में भाजपा के महत्वपूर्ण नेताओं की एक बैठक सोमवार शाम को लखनऊ में आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार समेत अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।

    बैठक में चर्चा के मुद्दे

    इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित थे। यहां केवल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद पर ही नहीं, बल्कि पंचायत चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव पर भी विचार विमर्श हुआ। बाद में, मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक अन्य बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, मौजूदा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और प्रदेश महासचिव धर्मपाल सिंह शामिल हुए। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा नाम अंतिम रूप से तय हुआ है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में हुई बैठक में कुल 9 संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा की गई, जिनमें 3 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 3 दलित नेता शामिल हैं।

    प्रमुख दावेदार

    राज्यसभा सांसद **दिनेश शर्मा** का नाम उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ में सबसे आगे है। शर्मा पहले उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनका आरएसएस के साथ अच्छे संबंध हैं। इसके अलावा, **हरीश द्विवेदी** भी एक महत्वपूर्ण नाम हैं, जो संगठन और सरकार में अनुभव के साथ बस्ती जिले के सांसद रह चुके हैं।

    ओबीसी समुदाय के उम्मीदवार

    ओबीसी समुदाय से **धर्मपाल सिंह** और **बीएल वर्मा** भी कुर्सी के लिए संभावित दावेदार हैं। धर्मपाल सिंह योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और लोध समुदाय से आते हैं, जो ओबीसी से जुड़े हैं। वहीं, बीएल वर्मा बदायूं जिले से राज्यसभा सदस्य हैं और उनके पास सरकार के साथ काम करने का लंबा अनुभव है।

    दलित समुदाय के दावेदार

    पूर्व केंद्रीय मंत्री **रामशंकर कठेरिया** भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ में आगे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हटावा से हार का सामना करना पड़ा था, जबकि वे आगरा से लगातार दो बार जीते थे। इसके अलावा, विद्या सागर सोनकर भी इस सूची में हैं, जो स्थानीय स्तर पर कई पदों पर रह चुके हैं और भाजपा के दलित मोर्चे के अध्यक्ष रह चुके हैं।

  • बिहार में नई सरकार के गठन के बाद NDA को उपेंद्र कुशवाहा के कई नेताओं का इस्तीफा

    बिहार में नई सरकार के गठन के बाद NDA को उपेंद्र कुशवाहा के कई नेताओं का इस्तीफा

    बिहार में आरएलएम के प्रमुख नेताओं का अचानक इस्तीफा

    नई दिल्ली: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद एनडीए के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) में अचानक बदलाव देखने को मिला है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ सहित कई प्रमुख नेताओं ने इस्तीफे दे दिए हैं, जो राजनीतिक हलचल का कारण बन रहा है।

    कई महत्वपूर्ण नेताओं ने दिया इस्तीफा

    पार्टी में बढ़ती नाराजगी के संकेत

    सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लाए मंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी में अंदरखाते नाराजगी बढ़ने लगी थी। इस निर्णय को लेकर उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस फैसले से असंतुष्ट रहे हैं।

    जितेंद्र नाथ का इस्तीफा पत्र

    जितेंद्र नाथ ने अपने इस्तीफे के पत्र में लिखा है कि वे लगभग 9 वर्षों से उपेंद्र कुशवाहा के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन अब वे कई राजनीतिक और सांगठनिक निर्णयों से असहमत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति में उनके लिए पार्टी के साथ काम करना संभव नहीं है और इसलिए उन्होंने त्यागपत्र देना उचित समझा।