हिंदुओं के सिर पर लटक रही है ख़तरे की तलवार : मोहन भागवत

गांडीव रिपोर्टर :
नागपुर: दशहरा के शुभ अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने आज शस्त्र पूजन करते हुए कहा कि हिंदुओं के सिर पर खतरे की तलवार लटक रही है। उन्होंने कहा, हिंदू अब अपनी रक्षा के लिए सामने आए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि असंगठित और कमजोर होना दुष्टों के अत्याचारों को आमंत्रित करने जैसा है। हिंदुओं को एकजुट होने की जरूरत है।

आरएसएस के स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री भागवत ने कोलकाता बलात्कार-हत्याकांड को शर्मनाक बताते हुए कहा कि अपराधियों को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि अपराध, राजनीति और जहरीली संस्कृति का गठजोड़ समाज को बर्बाद कर रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हुई विश्वसनीयता के साथ दुनिया में मजबूत और अधिक सम्मानित हुआ है, लेकिन भयावह साजिशें देश के संकल्प की परीक्षा ले रही हैं। वे आज नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक विजयादशमी रैली को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में यह बात फैलाई जा रही है कि भारत एक खतरा है और उन्हें बचाव के तौर पर पाकिस्तान से हाथ मिलाना चाहिए।
श्री भागवत ने कहा कि व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र की दृढ़ता, शुभता और धर्म की विजय के लिए शक्ति का आधार बनती है, चाहे स्थिति अनुकूल हो या न हो।

उन्होंने कहा कि “हर कोई महसूस करता है कि पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी हुई विश्वसनीयता के साथ भारत दुनिया में अधिक मजबूत और सम्मानित हो गया है। कोई भी देश अपने लोगों के राष्ट्रीय चरित्र से महान बनता है। यह वर्ष महत्वपूर्ण है, क्योंकि आरएसएस अपने शताब्दी वर्ष में कदम रख रहा है।”
उन्होंने कहा कि भारत में आशाओं और आकांक्षाओं के अलावा चुनौतियां और समस्याएं भी मौजूद हैं।
आरएसएस प्रमुख ने कहा, “हमें अहिल्याबाई होल्कर, दयानंद सरस्वती, बिरसा मुंडा और कई अन्य हस्तियों से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने अपना जीवन देश के कल्याण, धर्म, संस्कृति और समाज के लिए समर्पित कर दिया।”
उन्होंने कहा कि चल रहा हमास-इजरायल युद्ध चिंता का कारण है कि संघर्ष कितना फैलेगा।
श्री भागवत ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि जम्मू-कश्मीर में हाल ही में विधानसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।

“लोगों, सरकार और प्रशासन के कारण, विश्व मंच पर देश की छवि, शक्ति, प्रसिद्धि और स्थिति बढ़ रही है। लेकिन देश को अस्थिर और परेशान करने की भयावह साजिशें सामने आई हैं।”
श्री भागवत के अनुसार, पड़ोसी बांग्लादेश, जहां हाल ही में बड़े पैमाने पर राजनीतिक उथल-पुथल देखी गई, में एक कहानी फैलाई जा रही है कि भारत एक खतरा है और उन्हें भारत के खिलाफ बचाव के लिए पाकिस्तान में शामिल हो जाना चाहिए। उन्होंने पूछा, ऐसी कहानी कौन फैला रहा है?
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि बांग्लादेश में अत्याचारी कट्टरपंथी प्रकृति मौजूद है।
श्री भागवत ने कहा, ‘डीप स्टेट’, ‘वोकिज्म’ और ‘सांस्कृतिक मार्क्सवादी’ सभी सांस्कृतिक परंपराओं के दुश्मन घोषित हैं।
बहुदलीय लोकतंत्र में क्षुद्र स्वार्थ आपसी सौहार्द, राष्ट्र के गौरव और अखंडता से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टियों के बीच प्रतिस्पर्धा में इन प्रमुख पहलुओं को गौण माना जाता है।

समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिशें राष्ट्रहित से बड़ी हो गई हैं।’ उन्होंने कहा, उनकी कार्यप्रणाली एक पार्टी के समर्थन में खड़े होना और “वैकल्पिक राजनीति” के नाम पर उनके विनाशकारी एजेंडे को आगे बढ़ाना है।

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