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  • सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, बीजेपी का पहला सीएम

    सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, बीजेपी का पहला सीएम

    बिहार को नया मुख्यमंत्री मिला, सम्राट चौधरी ने ली शपथ

    नई दिल्ली. बिहार में राजनीतिक बदलाव के तहत सम्राट चौधरी ने बुधवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया। यह अवसर नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद आया, जिन्होंने लंबे समय तक राज्य की सत्ता में अपनी स्थिति बनाए रखी। सम्राट चौधरी बिहार के 24वें मुख्यमंत्री हैं और यह पहली बार है जब बीजेपी का कोई नेता इस पद पर पहुंचा है।

    नए डिप्टी सीएम की नियुक्ति

    सम्राट चौधरी के साथ ही राज्य को दो नए उपमुख्यमंत्रियों का भी साथ मिला है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह शपथ समारोह लोक भवन में आयोजित किया गया, जिसमें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री और अन्य उपमुख्यमंत्रियों को पद की शपथ दिलाई।

    एनडीए के नेताओं की उपस्थिति

    बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए, जिसमें बीजेपी, जेडीयू और अन्य तीन पार्टियां शामिल हैं, के प्रमुख नेता इस समारोह में मौजूद रहे। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, चिराग पासवान, नीतीश कुमार और एनडीए के सभी विधायक इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल हुए।

    नीतीश कुमार का इस्तीफा

    नीतीश कुमार, जो वर्तमान में राज्यसभा के सांसद हैं, ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और साथ ही अपने मंत्रिमंडल को भंग कर दिया। सम्राट चौधरी इस मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे और उनके पास गृह मंत्रालय का महत्वपूर्ण जिम्मा था।

    सम्राट चौधरी की राजनीतिक पृष्ठभूमि

    सम्राट चौधरी ने 2017 में बीजेपी में शामिल होने के बाद अपनी राजनीतिक यात्रा को आगे बढ़ाया। उन्हें मंगलवार को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में विधायी दल का नेता नियुक्त किया गया।

  • कुम्भ मेले की ‘वायरल लड़की’ मोनालिसा के पति को उच्च न्यायालय से राहत मिली, वाम नेताओं का समर्थन

    कुम्भ मेले की ‘वायरल लड़की’ मोनालिसा के पति को उच्च न्यायालय से राहत मिली, वाम नेताओं का समर्थन

    प्रयागराज में मोनालिसा के पति को हाईकोर्ट से मिली राहत

    महाकुंभ के दौरान चर्चाओं में आई ‘वायरल गर्ल’ मोनालिसा से जुड़े मामले में उनके पति को हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण सुरक्षा मिली है। अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी या किसी कठोर कार्रवाई से बचाने का आदेश दिया है, जिससे मामला एक बार फिर राजनीतिक रंग ले चुका है।

    हाईकोर्ट का आदेश

    सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक कोई कठोर कदम न उठाने का निर्देश दिया है। इस निर्णय के बाद मोनालिसा के पति ने राहत की सांस ली है।

    राजनीति में बढ़ी बयानबाजी

    इस मामले को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। वामपंथी दलों के कई नेताओं ने मोनालिसा और उनके पति के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है। नेताओं का कहना है कि यह मामला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार से जुड़ा हुआ है, इसलिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं होगी।

    विपक्ष की प्रतिक्रिया

    हालांकि, दूसरी ओर कुछ संगठनों और नेताओं ने इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    सोशल मीडिया पर मोनालिसा की चर्चा

    यह उल्लेखनीय है कि मोनालिसा महाकुंभ के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिससे वह अचानक सुर्खियों में आ गईं। उनके वीडियो और तस्वीरों को लेकर इंटरनेट पर व्यापक बहस छिड़ गई थी। अब हाईकोर्ट से मिली राहत के बाद यह मामला कानूनी रूप से आगे बढ़ रहा है।

  • कोलकाता चिकित्सक का ‘जय श्री राम’ पर ₹500 छूट का प्रस्ताव राजनीतिक विवाद का कारण बना

    कोलकाता चिकित्सक का ‘जय श्री राम’ पर ₹500 छूट का प्रस्ताव राजनीतिक विवाद का कारण बना

    कोलकाता में एक डॉक्टर का राजनीतिक ऑफर: ‘जय श्री राम’ पर मिल रही छूट

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी में एक हृदय रोग विशेषज्ञ के अनोखे प्रस्ताव ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पी.के. हाजरा ने घोषणा की है कि जो मरीज उनके क्लिनिक में आकर ‘जय श्री राम’ कहेगा, उसे कंसल्टेशन फीस में 500 रुपये की छूट दी जाएगी।

    डॉ. हाजरा का सीमित ऑफर

    यह ऑफर डॉ. हाजरा ने दक्षिण कोलकाता स्थित अपने निजी क्लिनिक में लागू किया है। उन्होंने अपने क्लिनिक के बाहर एक पोस्टर भी लगाया है, जिसमें वे भारतीय जनता पार्टी का दुपट्टा पहने हुए दिखाई दे रहे हैं। यह पोस्टर सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है।

    राजनीतिक बदलाव की प्रेरणा

    डॉ. हाजरा के अनुसार, यह पहल राज्य में ‘बदलाव’ के विचार से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक के रूप में यह देखना दुखदायक है कि पश्चिम बंगाल के मरीज अन्य राज्यों में उपचार के लिए जाते हैं, जबकि बाहर से लोग कम आते हैं। उन्होंने इसे बदलने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अन्य राज्यों के विकास मॉडल से सीखना चाहिए।

    चुनावी टिकट की उम्मीद और निर्णय का कारण

    डॉ. हाजरा ने स्वीकार किया कि उन्हें अपने गृह क्षेत्र पिंगला से चुनावी टिकट मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, टिकट न मिलने के बाद उन्होंने इस अनोखे तरीके से लोगों को बदलाव के लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया।

    तृणमूल कांग्रेस का विरोध

    इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. निर्मल माझी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. हाजरा निजी लाभ के लिए राजनीतिक पक्ष ले रहे हैं और इस तरह के कदम से जनता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    भारतीय जनता पार्टी का समर्थन

    वहीं, भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद राहुल सिन्हा ने इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।

    चुनावों से पहले बढ़ती सियासी गर्मी

    यह ध्यान देने योग्य है कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होना है, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ऐसे में यह मामला चुनावी माहौल को और गर्माने वाला साबित हो रहा है।

  • नीतीश कुमार कल देंगे इस्तीफा, नए मुख्यमंत्री 15 अप्रैल को लेंगे शपथ

    नीतीश कुमार कल देंगे इस्तीफा, नए मुख्यमंत्री 15 अप्रैल को लेंगे शपथ

    बिहार में नए मुख्यमंत्री के लिए तैयारी तेज

    पटना: बिहार में नए मुख्यमंत्री की नियुक्ति की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। मंगलवार को कैबिनेट की अंतिम बैठक के बाद नीतीश कुमार अपने पद से इस्तीफा देंगे। 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे लोकभवन में नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा ने इस समारोह की तैयारी के लिए बैठक बुलाई है। इससे पहले, मंगलवार को दोपहर 2 बजे भाजपा विधायक दल की बैठक भी होगी।

    भाजपा विधायक दल की बैठक

    भाजपा कार्यालय में होने वाली इस बैठक में सभी विधायक और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी उपस्थित रहेंगे। इस बैठक में भाजपा विधायक दल का नया नेता चुना जाएगा, जो मुख्यमंत्री के पद के लिए नामित होगा। इसके बाद, शाम 4 बजे एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नीतीश कुमार नए मुख्यमंत्री के नाम का प्रस्ताव रखने वाले हैं।

    सरकार बनाने का दावा

    नीतीश कुमार इस्तीफा देने के बाद एनडीए विधायक दल के नेता के नेतृत्व में सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इससे पहले, सोमवार को जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों की बैठक मुख्यमंत्री आवास पर हुई, जिसमें नई सरकार में पार्टी की भूमिका और उपमुख्यमंत्री पद पर चर्चा की गई। इस बैठक में जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मंत्री जमा खान और वरिष्ठ नेता बिजेंद्र यादव शामिल हुए।

    नीतीश कुमार का अंतिम दिन

    आज नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री के रूप में अंतिम दिन है और वह बिहार में विकास कार्यों का जायजा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जैसे ही अपने काफिले के साथ मुख्यमंत्री आवास से निकले, कयासों का दौर शुरू हो गया। वह राजभवन जा रहे हैं या मंत्रिमंडल के अंतिम रूप को तैयार करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। नीतीश कुमार ने छपरा के बाकरपुर में फोरलेन निर्माण और पुल निर्माण का निरीक्षण किया।

  • मतदाता सूची में महत्वपूर्ण परिवर्तन: 12 राज्यों से 7.2 करोड़ नाम हटाए गए, 2 करोड़ नए जोड़े गए

    मतदाता सूची में महत्वपूर्ण परिवर्तन: 12 राज्यों से 7.2 करोड़ नाम हटाए गए, 2 करोड़ नए जोड़े गए

    मतदाता सूची में प्रमुख बदलाव: 12 राज्यों से 7.2 करोड़ नाम हटाए गए

    नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आयोजित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने देश की चुनावी स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है। इस प्रक्रिया के तहत 12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों से 7.2 करोड़ से अधिक मतदाता नाम हटा दिए गए हैं। इसके साथ ही, लगभग 2 करोड़ नए मतदाता भी सूची में जोड़े गए हैं। इस पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और सटीक बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।

    मतदाता सूची के अद्यतन के उद्देश्य

    इस विशेष गहन पुनरीक्षण का लक्ष्य मतदाता सूची को वर्तमान स्थिति के अनुरूप बनाना है। इसमें उन लोगों के नाम हटाए गए हैं, जो या तो बूढ़े हो चुके हैं, जिनका निधन हो चुका है, या जो अब उस क्षेत्र में निवास नहीं कर रहे हैं। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया गया है कि केवल योग्य मतदाता ही चुनावों में भाग ले सकें। नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया भी कई युवाओं को मतदान के लिए प्रेरित करने का कार्य करेगी।

    प्रभाव और परिणाम

    इस पुनरीक्षण के परिणामस्वरूप, कुल मतदाता संख्या में 5.2 करोड़ की कमी आई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को अद्यतन करने में कितनी गंभीरता दिखाई है। इस प्रक्रिया से चुनावी प्रक्रिया के प्रति आम जनता का विश्वास भी बढ़ेगा, क्योंकि अब सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय होगी। नए मतदाताओं को जोड़ने से चुनावी भागीदारी में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र ने विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए

    नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र ने विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए

    चंद्र कुमार बोस का तृणमूल कांग्रेस में शामिल होना

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। उनका यह कदम राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। चंद्र कुमार बोस पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सदस्य थे, लेकिन अब उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक टिप्पणीकारों के बीच विभिन्न राय व्यक्त की जा रही हैं।

    टीएमसी की बधाई और चंद्र कुमार बोस की प्रतिक्रिया

    तृणमूल कांग्रेस ने चंद्र कुमार बोस का स्वागत करते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें कहा गया, “आज श्री ब्रात्या बसु और श्री कीर्ति आजाद की उपस्थिति में, चंद्र कुमार बोस का तृणमूल कांग्रेस परिवार में स्वागत किया गया। हमें विश्वास है कि उनका अनुभव बंगाल की जनता की सेवा में सहायक होगा।”

    चंद्र कुमार बोस ने बीजेपी छोड़ने के अपने निर्णय पर कहा, “भाजपा का एजेंडा फूट डालो और राज करो है, जो संविधान के खिलाफ है। यह नीति मेरे दादा शरत चंद्र बोस और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचारों के विपरीत है। मैंने टीएमसी को एक समावेशी और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा के निकट पाया।” उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल के आगामी चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत की संभावना है।

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का विवरण

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल को होगी, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को निर्धारित है। चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस चुनाव में 294 सीटों के लिए तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, सीपीआई(M) और कांग्रेस के बीच मुकाबला होने की उम्मीद है।

  • न्यायालय ने शुल्क विवाद में सख्त रुख अपनाया, वकीलों पर 50,000 रुपये का जुर्माना

    न्यायालय ने शुल्क विवाद में सख्त रुख अपनाया, वकीलों पर 50,000 रुपये का जुर्माना

    केरल हाई कोर्ट का वकीलों पर 50 हजार रुपये का जुर्माना

    नई दिल्ली। केरल उच्च न्यायालय ने वकीलों के आचरण को लेकर कड़ा संदेश देते हुए दो अधिवक्ताओं पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इन वकीलों ने अपने पूर्व मुवक्किलों से बकाया फीस वसूलने के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित मामले में अदालत के फैसले पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे अदालत ने अनुचित ठहराया।

    कानूनी प्रक्रिया का सम्मान आवश्यक

    मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बेकू कुरियन थॉमस ने स्पष्ट किया कि कोई भी वकील अपनी फीस वसूलने के लिए न्यायिक प्रक्रिया में रुकावट नहीं डाल सकता। अदालत ने कहा कि ऐसा व्यवहार न केवल गलत है, बल्कि यह कानूनी पेशे की गरिमा को भी प्रभावित करता है।

    रिट याचिका का उपयोग अनुचित

    कोर्ट ने यह भी बताया कि यदि वकीलों की फीस बकाया है, तो उन्हें इसके लिए सिविल कोर्ट का सहारा लेना चाहिए। उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर कर कार्यवाही को रोकना स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि वकील अपने क्लाइंट पर दबाव बनाने या उन्हें ब्लैकमेल करने का अधिकार नहीं रखते।

    नियुक्ति के बाद हस्तक्षेप की गंभीरता

    अदालत ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि वकीलों ने अपनी नियुक्ति समाप्त होने के बाद भी मामले में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया। न्यायालय के अनुसार, यह स्थिति और भी गंभीर है क्योंकि इससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित होती है।

    कार्यवाही में देरी का मामला

    जानकारी के अनुसार, वकीलों द्वारा दायर याचिका के कारण भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कार्यवाही कई महीनों तक रुकी रही। वकीलों का कहना था कि उन्होंने वर्षों तक केस लड़ा, लेकिन उन्हें उचित फीस नहीं मिली और बिना उनकी एनओसी के नया वकील नियुक्त कर लिया गया।

    मुवक्किलों के आरोप

    वहीं, मुवक्किलों ने अदालत में कहा कि वकीलों को पर्याप्त भुगतान किया गया था, लेकिन वे लगातार अनुचित मांगें कर रहे थे। इसी कारण उन्हें नया वकील नियुक्त करना पड़ा।

    अदालत की चेतावनी

    उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि वकीलों का आचरण पूरे पेशे की प्रतिष्ठा का निर्धारण करता है। यदि उनके कार्यों के कारण न्याय में देरी होती है या मुवक्किलों को नुकसान पहुंचता है, तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • राहुल गांधी का BJP-RSS पर आरोप: “संविधान को नष्ट करने के प्रयास हो रहे हैं”

    राहुल गांधी का BJP-RSS पर आरोप: “संविधान को नष्ट करने के प्रयास हो रहे हैं”

    राहुल गांधी ने ‘रन फॉर अंबेडकर’ में बीजेपी और आरएसएस पर साधा निशाना

    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में आयोजित ‘रन फॉर अंबेडकर’ और ‘रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ मैराथन 2026 को हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर गंभीर आरोप लगाए।

    संविधान का महत्व और उसकी रक्षा

    राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर का सबसे महत्वपूर्ण योगदान देश को संविधान प्रदान करना था, लेकिन वर्तमान में उसी संविधान को समाप्त करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा संविधान और अंबेडकर के सिद्धांतों के खिलाफ है। उनके अनुसार, ये शक्तियां समाज में समानता के अधिकार को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। राहुल ने यह भी कहा कि भाजपा के नेता अंबेडकर की प्रतिमा के समक्ष सम्मान का दिखावा करते हैं, जबकि उनके कार्य संविधान के विपरीत हैं।

    कांग्रेस सांसद का सरकार पर हमला

    इस मौके पर कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया ने भी सरकार पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लगातार संविधान की मूल भावना पर हमला कर रही है और उसके कई निर्णय आक्रामक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। पुनिया ने दावा किया कि सरकार संविधान के प्रावधानों को दरकिनार कर रही है।

    महिला आरक्षण बिल और कांग्रेस का दृष्टिकोण

    महिला आरक्षण बिल पर अपनी बात रखते हुए पुनिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी हमेशा इसके समर्थन में रही है, लेकिन इसके कार्यान्वयन के तरीके पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि नई जनगणना और परिसीमन के बिना इस बिल को लागू करना उचित नहीं है। कांग्रेस का मानना है कि इसे नई जनगणना के आधार पर लागू किया जाना चाहिए, न कि 2011 के आंकड़ों के आधार पर।

    मैराथन का उद्देश्य

    इस मैराथन के माध्यम से कांग्रेस नेताओं ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि वे अंबेडकर की विचारधारा और संविधान की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

  • CM मोहन यादव ने वंदे मातरम के अपमान पर कांग्रेस से इस्तीफे की मांग की

    CM मोहन यादव ने वंदे मातरम के अपमान पर कांग्रेस से इस्तीफे की मांग की

    इंदौर में वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस पार्षदों का विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

    इंदौर: इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन में ‘वंदे मातरम’ गाने को लेकर उठे विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धार्मिक कारणों का हवाला देते हुए राष्ट्रगीत गाने से मना किया, जिसके चलते मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार दिया। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस मामले में कांग्रेस को अपने दोहरे चरित्र से बाहर निकलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की महिला पार्षदों ने ‘वंदे मातरम’ गाने से मना करके बेशर्मी की हद पार कर दी है। उन्होंने कहा कि देशभक्तों का अपमान करना कांग्रेस का पुराना चरित्र रहा है, और उन्होंने पूछा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी इस मामले पर चुप क्यों हैं।

    कांग्रेस पर आरोप

    यादव ने कहा कि कांग्रेस के नेता हमेशा भगवान राम और हिंदुओं का अपमान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वंदे मातरम के छह छंदों को सभी के दिलों में स्थान दिया है, जबकि कांग्रेस ने इस गीत को लेकर विवाद खड़ा किया था। यादव ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से इस पर कार्रवाई की मांग की है।

    विवाद का उग्र रूप

    इस विवाद ने अब एक नया मोड़ लिया है, जब हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट किया। उन्होंने कहा है कि जो भी फौजिया शेख अलीम का मुंह काला करेगा, उसे 51 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। यह विवाद तब शुरू हुआ जब नगर निगम की बैठक में फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार कर दिया।

  • सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनहित याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाया, CJI सूर्यकांत का बयान

    सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनहित याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाया, CJI सूर्यकांत का बयान

    सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिकाओं पर अधिवक्ता को दी कड़ी नसीहत

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 25 अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर करने वाले एक वकील को सख्त चेतावनी दी है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अदालत में आने से पहले संबंधित प्राधिकरणों से संपर्क करना आवश्यक है और वकील को अपने पेशे पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

    याचिकाओं का वापस लेना

    सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता के रूप में उपस्थित अधिवक्ता सचिन गुप्ता ने कहा कि वे अपनी सभी जनहित याचिकाएं वापस लेना चाहते हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सलाह दी कि उन्हें पहले विभिन्न मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए और आवश्यक होने पर ही अदालत का रुख करना चाहिए।

    विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता

    पीठ ने बताया कि बार के सदस्य के रूप में याचिकाकर्ता को एक विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और पहले संबंधित संस्थाओं को कार्यवाही का अवसर देना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि उचित समय पर आवश्यकता पड़े, तो वे इन मुद्दों पर विचार करने के लिए तैयार हैं। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने सभी 25 जनहित याचिकाओं को वापस लेने की अनुमति प्रदान की।

    जनहित याचिकाओं में उठाए गए मुद्दे

    इन जनहित याचिकाओं में कई महत्वपूर्ण विषयों पर निर्देश देने की मांग की गई थी। इनमें एक सामान्य संपर्क भाषा नीति बनाने, कानूनी जागरूकता बढ़ाने के लिए टीवी कार्यक्रम शुरू करने, साबुन में उपयोग होने वाले रसायनों के लिए दिशा-निर्देश तय करने और भिखारियों तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान के लिए नीति बनाने के सुझाव शामिल थे।

    अधिवक्ता की पूर्व याचिकाओं का निपटारा

    इससे पहले, 9 मार्च को अदालत ने गुप्ता की पांच याचिकाओं को “निरर्थक” बताते हुए खारिज कर दिया था। इनमें से एक याचिका में यह जांच की मांग की गई थी कि क्या प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ ऊर्जा होती है। इस पर नाराजगी जताते हुए सीजेआई ने टिप्पणी की थी कि “आधी रात को ये सब याचिकाएं तैयार करते हो क्या?” अदालत ने उन याचिकाओं को अस्पष्ट और आधारहीन करार दिया था।

  • मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर प्रभाव: सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी

    मंदिर से बहिष्कार समाज को बांटेगा, हिंदू धर्म पर प्रभाव: सर्वोच्च न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी

    सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी: मंदिरों में प्रवेश का अधिकार

    नई दिल्ली। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मंदिरों और मठों में प्रवेश को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि किसी विशेष वर्ग को बाहर रखने से समाज में विभाजन हो सकता है, जो हिंदू धर्म पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसके साथ ही, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर व्यक्ति को सभी मंदिरों और मठों में जाने का अधिकार होना चाहिए।

    संविधान पीठ की सुनवाई

    यह टिप्पणी नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा शबरिमला मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान की गई। पीठ धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और इसके विस्तार पर भी विचार कर रही है।

    संविधान पीठ के न्यायाधीश

    संविधान पीठ की अध्यक्षता प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत कर रहे हैं, जिनके साथ न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्या बागची शामिल हैं।

    न्यायालय की टिप्पणियाँ

    सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा कि यदि परंपरा के नाम पर किसी वर्ग को मंदिर में प्रवेश से रोका जाता है, तो इससे हिंदू धर्म पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति का मंदिर और मठ में प्रवेश का अधिकार होना चाहिए। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार ने सहमति जताते हुए कहा कि इस प्रकार का निष्कासन समाज को बांट देगा।

    संगठनों की दलीलें

    इस सुनवाई के दौरान, नायर सर्विस सोसाइटी, अयप्पा सेवा समाजम, और क्षेत्र संरक्षण समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने तर्क प्रस्तुत किया कि कुछ मंदिर विशेष वर्गों तक सीमित हो सकते हैं।

    वेंकटरमण देवरू मामले का उल्लेख

    अदालत ने वेंकटरमण देवरू मामले का हवाला देते हुए कहा कि मंदिरों में प्रवेश पर रोक लगाने की परंपरा का व्यापक प्रभाव धर्म पर पड़ सकता है।

    शबरिमला विवाद का इतिहास

    2018 में, सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 10 से 50 वर्ष की महिलाओं के शबरिमला अयप्पा मंदिर में प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा दिया था। इसके बाद, 2019 में इस मुद्दे को व्यापक विचार के लिए बड़ी पीठ को भेज दिया गया। वर्तमान में, अदालत धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित सात प्रमुख सवालों पर विचार कर रही है और सुनवाई जारी है।

  • पश्चिम बंगाल में हुमायूं के स्टिंग वीडियो पर टीएमसी का 1000 करोड़ सौदे का दावा

    पश्चिम बंगाल में हुमायूं के स्टिंग वीडियो पर टीएमसी का 1000 करोड़ सौदे का दावा

    पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल: TMC का स्टिंग ऑपरेशन का दावा

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में एक नया मोड़ आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने हुमायूं कबीर से संबंधित एक कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो का खुलासा किया है। पार्टी का आरोप है कि इस वीडियो में कबीर और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रमुख नेताओं के बीच करोड़ों रुपये के लेन-देन की चर्चा की गई है। TMC ने इस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

    स्टिंग वीडियो में क्या है?

    TMC के अनुसार, जारी किए गए वीडियो में हुमायूं कबीर 1000 करोड़ रुपये के एक सौदे का जिक्र कर रहे हैं, जिसमें 300 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि देने का भी उल्लेख किया गया है। इस वीडियो को लेकर पार्टी ने गंभीरता से संज्ञान लिया है और इसके प्रभाव को देखते हुए जांच की आवश्यकता जताई है।

    बीजेपी नेताओं के नाम का जिक्र

    TMC का आरोप है कि इस कथित सौदे में कई प्रमुख बीजेपी नेताओं के नाम शामिल हैं। इनमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रधानमंत्री कार्यालय का भी उल्लेख किया गया है।

    TMC की प्रेस कॉन्फ्रेंस

    इस संदर्भ में TMC के नेताओं फिरहाद हकीम, अरूप बिस्वास और कुणाल घोष ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने इसे एक ‘बड़ा खुलासा’ बताते हुए कहा कि यह वीडियो गंभीर राजनीतिक साजिश का संकेत देता है।

    ED जांच की मांग

    TMC ने इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) से कराने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि ऐसे गंभीर वित्तीय आरोपों की निष्पक्ष जांच करना आवश्यक है।

    हुमायूं कबीर का जवाब

    TMC के आरोपों पर हुमायूं कबीर ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि यह स्टिंग ऑपरेशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा बनाया गया है और यह सब कुछ TMC के इशारे पर हुआ है। वहीं, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने प्रश्न उठाते हुए कहा कि कबीर किसके लिए काम कर रहे हैं और उनके पास इतना धन कहां से आया? यह सवाल लोगों को सोचने पर मजबूर करेगा।

    चुनाव से पहले सियासी तनाव

    TMC ने इस घटनाक्रम को पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी एक साजिश करार दिया है। पार्टी का कहना है कि यह एक बड़ा राजनीतिक खेल है, जिससे राज्य की राजनीति में तनाव और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

  • नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तारीख तय की, सम्राट चौधरी की स्थिति मजबूत

    नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने की तारीख तय की, सम्राट चौधरी की स्थिति मजबूत

    नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ने का कार्यक्रम निर्धारित

    पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की तारीख अब तय हो गई है। वह गुरुवार को दिल्ली पहुंचेंगे, जहां वह राज्यसभा सांसद पद की शपथ लेंगे। इसके बाद, शुक्रवार को वह पटना लौटते ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। यह पहली बार है जब बिहार में बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाने जा रही है, और इस पद के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे है।

    नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

    नीतीश कुमार, जिन्होंने बिहार में लगभग दो दशकों तक मुख्यमंत्री का पद संभाला, अब दिल्ली की राजनीति में अपनी किस्‍मत आजमाने के लिए तैयार हैं। वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्यता की शपथ लेंगे। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे। उसी दिन पटना में एनडीए विधायक दल की बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें वह अपने इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं।

    बिहार में सत्ता परिवर्तन की कहानी

    बिहार में 2005 के बाद से सत्ता परिवर्तन का एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। नीतीश कुमार के राज्यसभा में चुने जाने के बाद, जेडीयू के नेता विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आगामी समय में बिहार की सत्ता बीजेपी के नेतृत्व में होगी।

    बीजेपी की अहम बैठक

    नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण के दिन, 10 अप्रैल को दिल्ली में बिहार बीजेपी नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के शामिल होने की संभावना है। यह बैठक सरकार गठन की प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई है।

    14 अप्रैल को इस्तीफे की संभावना

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को दिल्ली से लौटने के बाद 14 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा देने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद एनडीए विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। सम्राट चौधरी के नाम पर नई सरकार के गठन में मुहर लगने की संभावना है।

    शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी की उपस्थिति

    दिल्ली में 10 अप्रैल को होने वाली बैठक में बिहार के नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, और अन्य वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 14 या 15 अप्रैल को हो सकता है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो सकते हैं।

  • नीतीश कुमार दस अप्रैल को राज्यसभा में लेंगे शपथ, बिहार में नई सरकार गठन की कोशिशें

    नीतीश कुमार दस अप्रैल को राज्यसभा में लेंगे शपथ, बिहार में नई सरकार गठन की कोशिशें

    नीतीश कुमार 10 अप्रैल को लेंगे राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ

    पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं। जदयू के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री 9 अप्रैल की दोपहर दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे और शपथ लेने के बाद 11 अप्रैल को पटना लौटेंगे। इस दौरान, उनकी प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मुलाकात भी संभावित है।

    भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की तैयारी

    नीतीश कुमार के पटना लौटने के साथ ही बिहार में भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। किसी भी समय नीतीश मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की संभावना है। एनडीए के दलों के बीच यह सहमति बन चुकी है कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा, जबकि जदयू की सरकार में मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रहेगी। यह पहली बार होगा जब जदयू से राज्य को उप मुख्यमंत्री मिलेगा।

    सीएम पद छोड़ने से पहले महत्वपूर्ण बैठकें

    नीतीश कुमार, राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद, एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बुला सकते हैं जिसमें वे विधायकों को मुख्यमंत्री पद छोड़ने की जानकारी देंगे। इसके बाद वे राज्यपाल को इस्तीफा सौंपेंगे। नई सरकार के गठन की प्रक्रिया एनडीए के सभी घटक दलों की अलग-अलग बैठकें करके नेताओं के चुनाव से शुरू होगी। एनडीए विधानमंडल दल के नेता की घोषणा संयुक्त बैठक में की जाएगी, जिसके बाद नए नेता सरकार गठन का प्रस्ताव राज्यपाल को प्रस्तुत करेंगे। चर्चा के अनुसार, नई सरकार 15 अप्रैल के बाद अस्तित्व में आएगी।

    बिहार के अगले मुख्यमंत्री की दौड़

    कौन बनेगा बिहार का मुख्यमंत्री?
    हालांकि बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। सम्राट चौधरी का नाम इस दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। वर्तमान डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हाल ही में यह स्पष्ट किया कि वह सीएम की दौड़ में नहीं हैं, बल्कि सेवक की भूमिका में हैं। भाजपा ने अभी तक इस मामले में चुप्पी साध रखी है, जबकि पार्टी के नेता लगातार यह कह रहे हैं कि एनडीए की बैठक में नए सीएम का नाम तय किया जाएगा। वहीं, डिप्टी सीएम की दौड़ में नीतीश कुमार के बेटे निशांत का नाम भी लिया जा रहा है। हालांकि, इन नामों को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है और यह सब मात्र कयासबाजी है।

  • कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर पर असम पुलिस का छापा, जांच जारी

    कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के घर पर असम पुलिस का छापा, जांच जारी

    असम पुलिस की कार्रवाई: पवन खेड़ा के आवास पर पहुंची टीम

    नई दिल्ली: असम पुलिस की एक टीम कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंची है। यह कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई FIR के बाद की जा रही है। दिल्ली पुलिस असम से आई टीम की सहायता कर रही है, जिसके लिए उन्हें पूर्व में सूचित किया गया था।

    कानूनी प्रक्रिया का पालन

    पवन खेड़ा का न होना

    सूत्रों के अनुसार, पवन खेड़ा अपने आवास पर उपस्थित नहीं हैं। हाल ही में उन्होंने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी, जिसमें उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसी संदर्भ में असम पुलिस दिल्ली पहुंची है।

    क्या है मामला?

    रविवार को असम में एक राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ, जब पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनकी सरमा पर आरोप लगाया कि उनके पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में बड़ी संपत्तियां हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इन आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक प्रेरित बताया।

    मुख्यमंत्री का बयान

    सरमा ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “पवन खेड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस कांग्रेस पार्टी के अंदर की गहरी हताशा को दर्शाती है। असम में बढ़ते जनादेश के बीच इस तरह के बेबुनियाद हमले केवल उनके घटते जनाधार को उजागर करते हैं।”

    कानूनी कार्रवाई का इरादा

    पवन खेड़ा के आरोपों को ‘दुर्भावनापूर्ण और राजनीति से प्रेरित’ बताते हुए, सरमा ने कहा कि वह और उनकी पत्नी जल्द ही उनके खिलाफ आपराधिक और दीवानी मानहानि के मुकदमे दायर करेंगे।

    पवन खेड़ा के आरोपों का आधार

    पवन खेड़ा ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ दस्तावेज पेश किए, जिनका दावा किया गया कि वे उनके सहयोगियों से प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि रिनकी सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ और बारबुडा के वैध पासपोर्ट हैं।

    संपत्तियों के बारे में आरोप

    खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि रिनकी सरमा की दुबई में कुछ संपत्तियां हैं और अमेरिका के व्योमिंग में एक कंपनी रजिस्टर्ड है, जिसका बजट 34.67 बिलियन USD है। उन्होंने यह भी कहा कि सरमा ने अपने चुनावी हलफनामे में इन संपत्तियों का उल्लेख नहीं किया है।

    भारतीय नागरिकता का सवाल

    खेड़ा ने यह सवाल उठाया कि क्या रिनकी सरमा के पास भारतीय नागरिकता और पासपोर्ट हैं, जबकि भारत दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं देता।

    गिरफ्तारी और चुनावी अयोग्यता की मांग

    पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की गिरफ्तारी और आगामी विधानसभा चुनावों से उनकी अयोग्यता की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी अघोषित अंतरराष्ट्रीय संपत्तियां भ्रष्टाचार का संकेत देती हैं। अगर चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे, तो वे विदेश भागने का प्रयास कर सकते हैं।

    गृह मंत्री से हस्तक्षेप की अपील

    पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की और आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का अनुरोध किया।

  • कांग्रेस के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट का आरोप

    कांग्रेस के खिलाफ असम के मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर तीन पासपोर्ट का आरोप

    असम की राजनीति में नया विवाद: सीएम सरमा की पत्नी पर लगे गंभीर आरोप

    गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के संबंध में हाल ही में उठे आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट हैं और उनकी विदेशों में संपत्ति भी मौजूद है।

    कांग्रेस के आरोपों का विस्तार

    कांग्रेस ने इस मामले को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी के पासपोर्ट और संपत्ति के बारे में जानकारी साझा की। पार्टी के नेताओं ने यह भी कहा कि इस स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री के परिवार की गतिविधियां संदिग्ध हैं। आरोपों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का हिस्सा है।

    सरकार की प्रतिक्रिया

    इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आरोप केवल राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम हैं और वे अपने परिवार के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी साझा नहीं करेंगे।

    राजनीतिक माहौल पर प्रभाव

    इस विवाद ने असम के राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा विधानसभा चुनावों पर भी असर डाल सकता है। मुख्यमंत्री की पत्नी के खिलाफ लगे आरोपों ने विपक्षी दलों को एक नया आधार प्रदान किया है, जिससे वे सरकार पर प्रहार कर सकते हैं।

  • पूर्व टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने BJP जॉइन किया, 2036 ओलंपिक्स की जिम्मेदारी मिली

    पूर्व टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने BJP जॉइन किया, 2036 ओलंपिक्स की जिम्मेदारी मिली

    पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल तेज

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस महीने होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आई है। पूर्व भारतीय टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने हाल ही में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें युवाओं और खेल के क्षेत्र में काम करने का स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान किया है। पेस ने बताया कि उन्हें 2036 ओलंपिक खेलों के लिए भारत की दावेदारी से संबंधित जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    ओलंपिक की मेज़बानी के लिए प्रतिबद्धता

    पेस ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका लक्ष्य एक सशक्त टीम के साथ मिलकर भारत को 2036 ओलंपिक की मेज़बानी दिलाना है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भारत ओलंपिक की मेज़बानी करता है, तो इससे देश की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूती मिलेगी और खेलों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    राष्ट्रमंडल खेलों में योगदान की इच्छा

    लिएंडर पेस ने आगे कहा कि वह 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेज़बानी में भी योगदान देने की इच्छा रखते हैं, विशेष रूप से अहमदाबाद में होने वाले संभावित आयोजन के लिए। इसके साथ ही, उन्होंने अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल में खेल सुविधाओं को सुधारने पर जोर दिया।

    बंगाली पहचान और खेल के प्रति जुनून

    अपने आपको ‘बंगाली बॉय’ बताते हुए, पेस ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इनडोर टेनिस स्टेडियम और अन्य खेल सुविधाओं की कमी है। उनका सपना है कि आने वाले 20 वर्षों में वे देश के 25 करोड़ बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं और उन्हें खेलों से जोड़ें।

    मजबूत खेल संस्कृति की आवश्यकता

    पेस ने भारत को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत खेल संस्कृति अपनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन जैसे आर्थिक रूप से मजबूत देश ओलंपिक में सबसे अधिक पदक जीतते हैं।

    पेस के अनुसार, भारत को खेलों के बुनियादी ढांचे, ट्रेनिंग और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों की तैयारी में निवेश करना होगा। उनका मानना है कि खेल और खेल शिक्षा भारत को एक नई दिशा में ले जा सकते हैं, और युवा खिलाड़ियों का विकास देश के ओलंपिक सपने को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • मुर्शिदाबाद में अधीर रंजन चौधरी पर हमले को लेकर कांग्रेस ने TMC पर आरोप लगाया

    मुर्शिदाबाद में अधीर रंजन चौधरी पर हमले को लेकर कांग्रेस ने TMC पर आरोप लगाया

    बहरामपुर में कांग्रेस नेता पर हमले का आरोप

    बहरामपुर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने शनिवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार चौधरी ने दावा किया कि चुनाव प्रचार के दौरान उन पर हमला किया गया, जिससे पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल में तनाव और बढ़ गया है।

    घटना का विवरण

    न्यूज एजेंसी के अनुसार, यह घटना तब हुई जब अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर विधानसभा क्षेत्र में एक जनसंपर्क अभियान में सक्रिय थे। आरोप है कि टीएमसी के कुछ कार्यकर्ताओं ने अचानक उनके अभियान में बाधा डाली और चौधरी तथा उनके समर्थकों पर हमला कर दिया। इस दौरान कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचाने की सूचना है।

    कांग्रेस ने टीएमसी पर साधा निशाना

    कांग्रेस ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। अधीर रंजन चौधरी ने बताया कि यह हमला सुनियोजित था और टीएमसी अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से विपक्ष की आवाजों को दबाने की कोशिश कर रही है।

    चुनावी माहौल पर प्रभाव

    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसी घटनाएं राजनीतिक तनाव को और बढ़ा देती हैं। दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं, जिससे चुनावी माहौल में तनाव का स्तर ऊंचा हो गया है। यह घटना आने वाले प्रचार अभियानों को भी प्रभावित कर सकती है।

    संभावित कार्रवाई

    यदि यह मामला और बढ़ता है, तो चुनाव आयोग दोनों पक्षों से रिपोर्ट मांग सकता है। आवश्यकतानुसार आयोग आगे की जांच के निर्देश भी दे सकता है। क्षेत्र में चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है, जिसके मद्देनजर चुनाव आयोग ने बंगाल प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं।

  • शशि थरूर के काफिले पर हमला, गनमैन को पीटा गया

    शशि थरूर के काफिले पर हमला, गनमैन को पीटा गया

    कोच्चि में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के साथ बदसलूकी की घटना

    कोच्चि. केरलम के मलप्पुरम जिले के वंडूर इलाके में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के साथ एक गंभीर बदसलूकी की घटना सामने आई है। यह घटना तब हुई जब थरूर यूडीएफ उम्मीदवार ए.पी. अनिल कुमार के समर्थन में चुनाव प्रचार कर रहे थे। अज्ञात हमलावरों ने उनके वाहन को रोका और सुरक्षाकर्मियों के साथ मारपीट की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया है।

    घटना का विवरण

    थरूर की टीम के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब वे दो वाहनों के काफिले में यात्रा कर रहे थे। थरूर पहले वाहन में सवार थे, तभी करीब 8 व्यक्तियों ने दो कारों में आकर उनकी गाड़ी को जबरन रोक लिया। चश्मदीदों का कहना है कि हमलावरों ने गाड़ी के शीशों पर जोर से प्रहार किया और उसे आगे बढ़ने से रोका।

    सुरक्षाकर्मी पर हमला

    जब थरूर के गनमैन ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया और रास्ता साफ कराने की कोशिश की, तो उपद्रवियों ने उस पर भी हमला कर दिया। इस झड़प के दौरान गनमैन के साथ धक्का-मुक्की हुई, जिससे वहां तनाव का माहौल बन गया। घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया।

    पुलिस कार्रवाई और जांच

    पुलिस ने इस मामले में मामला दर्ज कर लिया है और दो लोगों को हिरासत में लिया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह हमला पूर्व नियोजित था या फिर किसी सड़क विवाद का परिणाम था।

    चुनाव की पृष्ठभूमि

    गौरतलब है कि केरलम विधानसभा के 140 सदस्यों के चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। चुनाव परिणामों की गिनती 4 मई 2026 को की जाएगी। इस बार राज्य में मुख्य मुकाबला एलडीएफ (CPIM के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा), यूडीएफ (कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के बीच है।

  • सदन में मंत्री की अनुपस्थिति पर स्पीकर ने जताई नाराजगी, मंजी और करंडलाजे पर उठे सवाल

    सदन में मंत्री की अनुपस्थिति पर स्पीकर ने जताई नाराजगी, मंजी और करंडलाजे पर उठे सवाल

    लोकसभा में मंत्री की अनुपस्थिति से खड़ी हुई असहज स्थिति

    नई दिल्ली। लोकसभा के प्रश्नकाल के दौरान एक असहज स्थिति उत्पन्न हुई जब एमएसएमई मंत्री जितन राम मांझी और उनके मंत्रालय की राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे सदन में उपस्थित नहीं थे। जब उनके मंत्रालय से संबंधित सवाल पूछे गए, तब दोनों मंत्रियों की अनुपस्थिति के कारण सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा।

    प्रश्न पूछे जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंत्री का नाम पुकारा, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला। दोबारा आवाज देने पर भी स्थिति नहीं बदली। इसके बाद जब उन्होंने पूछा कि संबंधित राज्य मंत्री कौन हैं, तब पता चला कि शोभा करंदलाजे भी सदन में नहीं हैं।

    इस पर स्पीकर ने कड़ी नाराजगी प्रकट करते हुए संसदीय कार्य मंत्री को निर्देश दिया कि इस घटना को दर्ज किया जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के उपाय किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यवाही के दौरान मंत्रियों की अनुपस्थिति किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।

    सदन में बातचीत पर जताई गई नाराजगी

    ओम बिरला ने सदन में हो रही लगातार बातचीत पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कार्यवाही के दौरान सदस्यों के बीच लंबे समय तक चर्चा करना गलत परंपरा बनता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने वालों के नाम आसन से लिया जाएगा।

    पप्पू यादव को भी मिली फटकार

    प्रश्नकाल के दौरान निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को भी स्पीकर ने फटकार लगाई। यादव लंबे समय तक आसन की ओर पीठ करके खड़े थे। इस पर ओम बिरला ने उन्हें संसदीय परंपराओं का पालन करने और आसन का सम्मान करने की सलाह दी।

    बजट सत्र में मिली-जुली स्थिति

    लोकसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण सरकार और विपक्ष के बीच कभी टकराव तो कभी सहमति की स्थिति में बीत रहा। विपक्ष द्वारा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव और महिला आरक्षण को लेकर सरकार के रुख पर काफी चर्चा हुई। सहमति न बनने पर सरकार को विदेशी अंशदान विनियमन विधेयक पर पीछे हटना पड़ा, जबकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और दिवालियापन संहिता संशोधन जैसे विधेयकों को पास कराने में सफलता मिली।

    कई मुद्दों पर बढ़ी राजनीतिक दूरी

    स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर दो दिन चली चर्चा के बाद सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बढ़ते दिखाई दिए। वहीं, पश्चिम एशिया संकट से जुड़े ऊर्जा और उर्वरक मुद्दों पर भी तीखी बहस हुई, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोनों सदनों में संबोधन और सर्वदलीय बैठक के बाद माहौल सामान्य हुआ।

    विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग नोटिस भी दिया, जो बाद में खारिज हो गया। इस प्रकार पूरे सत्र में राजनीतिक खींचतान के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर टकराव और सहमति दोनों देखने को मिले।

  • राहुल गांधी ने असम के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी किया, 11 क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित

    राहुल गांधी ने असम के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी किया, 11 क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित

    कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए जारी किया घोषणा पत्र

    नई दिल्ली। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को असम विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का घोषणा पत्र प्रस्तुत किया। इस दस्तावेज में शासन, पहचान, और स्वास्थ्य जैसे 11 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह घोषणा पत्र एक चुनावी रैली के दौरान जारी किया गया, जिसमें असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई और अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे।

    घोषणा पत्र के मुख्य बिंदु

    इस घोषणा पत्र में कुल 11 संकल्प शामिल हैं, जो शासन, पहचान, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे के विकास, औद्योगीकरण, कृषि, ग्रामीण और शहरी विकास, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षित असम पर केंद्रित हैं। कांग्रेस ने पहले भी 29 मार्च को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दौरे के दौरान ‘पांच गारंटी’ की घोषणा की थी।

    महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष योजनाएं

    घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए बिना शर्त 50 हजार रुपये तक का कर्ज, सभी वरिष्ठ नागरिकों को 1250 रुपये की पेंशन, 25 लाख रुपये का कैशलेस इलाज, भूमि पुत्रों के लिए म्यादी पट्टा, और जुबीन गर्ग मामले में 100 दिन के भीतर दोषियों को सजा देने का वादा किया गया है।

    मतदान की तारीख

    126 सदस्यों वाली असम विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा, जबकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

    राहुल गांधी का बयान

    राहुल गांधी ने रैली में कहा कि असम एक विविधता से भरा क्षेत्र है जहाँ विभिन्न धर्म, जाति, और विचारधाराएँ बसती हैं। उन्होंने कांग्रेस की सोच को रेखांकित करते हुए कहा कि पार्टी चाहती है कि असम की सत्ता स्थानीय लोगों के हाथ में हो, न कि दिल्ली से। उन्होंने भाजपा की नीति की आलोचना की और कहा कि कांग्रेस असम की जनता को निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करने का प्रयास कर रही है।

    भ्रष्टाचार के आरोप

    कांग्रेस नेता ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पर गंभीर आरोप लगाए, उन्हें भारत का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि उनका नियंत्रण नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हाथ में है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व में असम में भ्रष्टाचार बढ़ा है और कांग्रेस की सरकार आने पर सरमा को इसकी सजा मिलेगी।