श्रेणी: Politics

  • हुमायूं कबीर ने ममता के खिलाफ मुस्लिम उम्मीदवार को उतारा

    हुमायूं कबीर ने ममता के खिलाफ मुस्लिम उम्मीदवार को उतारा

    हुमायूं कबीर की नई पार्टी का पश्चिम बंगाल चुनावी मैदान में प्रवेश

    कोलकाता। हुमायूं कबीर ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के माध्यम से पश्चिम बंगाल की राजनीति में कदम रखा है। उनका यह स्पष्टता के साथ दावा है कि उनकी पार्टी विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर प्रत्याशी उतारेगी, साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भी उम्मीदवार खड़ा किया जाएगा।

    भवानीपुर सीट पर सीधा मुकाबला

    कबीर ने यह जानकारी दी कि दक्षिण कोलकाता की प्रमुख भवानीपुर सीट पर उनकी पार्टी ममता बनर्जी के विरुद्ध पूनम बेगम को उम्मीदवार बनाएगी, जो एक गैर-बंगाली मुस्लिम हैं। इस सीट पर ममता बनर्जी का मुकाबला भाजपा नेता सुवेन्दु अधिकारी से प्रतिष्ठित होगा, जिससे चुनावी संघर्ष में और दिलचस्पी उत्पन्न हो सकती है।

    चुनाव में 182 सीटों पर लड़ाई

    कबीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया किया कि उनकी पार्टी राज्य की 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी बताया कि मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों के लिए उम्मीदवारों की पहली सूची पहले ही जारी की जा चुकी है, जबकि पूरी सूची जल्द ही सामने आने की उम्मीद है।

    मुस्लिम वोट बैंक पर फोकस

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भवानीपुर में मुस्लिम उम्मीदवार उतारने का मुख्य उद्देश्य तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोट बैंक में सेंध लगाना है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव चुनाव परिणामों में ही स्पष्ट हो सकेगा।

    बाबरी मस्जिद योजना पर चर्चा

    हुमायूं कबीर हाल के महीनों में मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ निर्माण की योजना को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। इस मुद्दे पर राज्य में पहले से ही राजनीतिक हंगामा शुरू हो चुका है।

    उम्मीदवारों की सूची और अभियान

    पार्टी ने विभिन्न क्षेत्रों से कई प्रतिभागियों को चुनाव में उतारा है, जिनमें मालदा, मुर्शिदाबाद और पूर्वी बर्दवान शामिल हैं। कबीर खुद मुर्शिदाबाद की रेजीनगर और नाओदा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि उन्होंने अपने पुराने गढ़ भरतपुर को छोड़ दिया है।

    हुमायूं कबीर की नई पार्टी का यह कदम पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में नई हलचल पैदा कर सकता है। जबकि असली चुनौती यह होगी कि क्या उनकी पार्टी अल्पसंख्यक वोटों में सफलता प्राप्त कर पाएगी या नहीं।

  • वरुण गांधी ने पीएम मोदी से मुलाकात की, बंगाल चुनावों को लेकर चर्चा

    वरुण गांधी ने पीएम मोदी से मुलाकात की, बंगाल चुनावों को लेकर चर्चा

    वरुण गांधी की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात: राजनीतिक हलचल

    नई दिल्ली: राजनीति में स्थिति कभी स्थिर नहीं होती और दरवाजे वही खुलते हैं, जहां शायद उम्मीद नहीं होती। गांधी परिवार के सदस्य वरुण गांधी की हाल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में कई चर्चा को जन्म दिया है। यह मुलाकात वरुण और उनके परिवार के साथ हुई, जिसमें वरुण ने प्रधानमंत्री की खुले दिल से प्रशंसा की।

    भाजपा में वरुण का भविष्य

    वरुण गांधी की भाजपा में आगे की भूमिका के बारे में विभिन्न अटकलें लगी हुई हैं। मोदी के नेतृत्व में भाजपा का यह संकेत साफ है कि पार्टी अपनी असहमतियों के बावजूद दरवाजे बंद नहीं करती। वरुण अब तक तीन बार सांसद रह चुके हैं और भाजपा हाइरार्की में उनकी स्थिति के बारे में चर्चा चल रही है।

    2024 तक की राजनीतिक यात्रा

    वरुण गांधी ने 2009 में पहली बार पीलीभीत से लोकसभा का चुनाव जीता। बाद में उन्होंने सुल्तानपुर को अपना निर्वाचन क्षेत्र बनाया और 2014 में वहां से भी सफलता प्राप्त की। लेकिन नए नेतृत्व से उनकी दूरियों का एहसास धीरे-धीरे होने लगा। 2019 में भाजपा ने मां-बेटे मेनका और वरुण को पुनः टिकट दिया, जिसमें सीटों का अदला-बदली भी शामिल था।

    विरोधी बयानों से असहजता

    वरुण गांधी का 2019-24 का कार्यकाल विभिन्न बयानों के कारण चर्चा में रहा। उनके विचार अक्सर पार्टी के लिए असहज स्थिति उत्पन्न करते रहे हैं। फिर भी, भाजपा नेतृत्व ने उनके बयानों को नजरअंदाज किया। नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ उनकी टिप्पणियों को विपक्ष ने सकारात्मक माना।

    चुप्पी के बाद अचानक मुलाकात

    वरुण की भाजपा से दूरी के बीच कई बार उनके अगले राजनीतिक कदम के बारे में चर्चा चलती रही। 2024 के चुनावों के पहले राहुल गांधी से उनकी मुलाकात ने कई कयासों को जन्म दिया। हालांकि, टिकट कटने के बाद वरुण आमतौर पर चुप्पी साधे रहे।

    प्रधानमंत्री से मुलाकात का महत्व

    हाल की प्रधानमंत्री मोदी से वरुण की मुलाकात ने सबको चौंका दिया। वरुण ने इसे ‘विशेष’ बताते हुए लिखा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है। उनके शब्दों में मोदी के प्रति सम्मान और विश्वास को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

    राजनीतिक संदर्भ

    इस मुलाकात की समयावधि और संदर्भ अपने आप में महत्वपूर्ण है। वरुण की लंबे समय से पार्टी से दूरी और चुनावों से पहले की यह मुलाकात, इसे साधारण शिष्टाचार नहीं माना जा सकता। यदि भाजपा पश्चिम बंगाल और असम चुनावों के दौरान वरुण को सक्रिय करती है, तो यह संकेत होगा कि उनकी पार्टी में वापसी की संभावनाएं बन रही हैं।

  • हरियाणा: हुड्डा ने कहा – राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले नाम उजागर होंगे

    हरियाणा: हुड्डा ने कहा – राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले नाम उजागर होंगे

    हरियाणा राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की चुनौतियाँ

    चंडीगढ़। हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी, करमवीर बौद्ध के जरिए अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सफल रही है। हालाँकि, चुनाव से पूर्व एकजुटता का दावा करने के बावजूद, पार्टी के पांच विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, जिसके परिणामस्वरूप चार वोट अमान्य हो गए। कांग्रेस ने उन विधायकों के नामों को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, पार्टी को उनके बारे में जानकारी है और जल्द ही उन पर कार्रवाई साधारित की जाएगी। पार्टी नेता भूपेंद्र हुड्डा ने कहा है कि उन्होंने उच्च कमान को संबंधित विधायकों के नाम सौंप दिए हैं, और उम्मीद है कि अगले 2-3 दिनों में ये सार्वजनिक हो जाएंगे।

    विधायकों पर कार्रवाई की अपेक्षा

    भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि शिष्टाचार के कारण वह नाम नहीं लेना चाहते, लेकिन जब कार्रवाई की जाएगी, तो सभी को इसके बारे में जानकारी हो जाएगी। इस बीच, हरियाणा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रामकिशन गुर्जर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उल्लेखनीय है कि रामकिशन, विधायक शैली चौधरी के पति हैं, जिनके बारे में क्रॉस वोटिंग का संदेह है। गुर्जर का कहना है कि शैली चौधरी पर आरोप लगाने का उद्देश्य उन्हें बदनाम करना है, इसलिए उन्होंने इस्तीफा देने का निर्णय लिया।

    सोशल मीडिया पर अफवाहें

    कुलदीप वत्स की स्थिति
    भूपेंद्र हुड्डा ने बताया कि राज्यसभा चुनाव में सामान्य संख्या के अनुसार बीजेपी और कांग्रेस को एक-एक सीट मिलना तय था, लेकिन बीजेपी ने एक निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारा। हुड्डा ने कहा कि कई अफवाहें सोशल मीडिया पर तैर रही हैं, विशेष रूप से कुलदीप वत्स के बारे में। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुलदीप वत्स ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट दिया था। कुलदीप वत्स ने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें कांग्रेस में भ्रष्टाचार के माहौल से दुखी हैं।

    विधानसभा में हंगामा

    राज्यसभा चुनाव पर विवाद
    हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन राज्यसभा चुनाव को लेकर भीषण हंगामा देखा गया। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने सरकार के मंत्रियों के असंसदीय आचरण की निंदा की, जिसमें कुछ ने डांस करने का आरोप लगाया। इस पर कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने कहा कि अगर कोई रिकॉर्डिंग है, तो वे सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए तैयार हैं। स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने आठ कांग्रेस विधायकों को नेम दिया, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

  • बीजेपी वरुण गांधी को सब्र के लिए कौन सा बड़ा इनाम देने की योजना बना रही है

    बीजेपी वरुण गांधी को सब्र के लिए कौन सा बड़ा इनाम देने की योजना बना रही है

    वरुण गांधी की राजनीतिक संभावनाएँ

    नई दिल्ली। 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने के बाद से अफवाहों का बाजार गर्म है। निर्दलीय चुनाव लड़ने की बातें भी चल रही हैं, लेकिन वरुण गांधी ने इस मुद्दे पर ना तो पार्टी के खिलाफ कोई टिप्पणी की है और ना ही बगावती तेवर अपनाए हैं। उनकी हालिया पीएम नरेंद्र मोदी के साथ परिवार के संग मुलाकात नए सियासी चर्चाओं का केंद्र बन गई है। वरुण ने इस मुलाकात के बाद एक ट्वीट में लिखा, “आपके आभामंडल में अद्भुत पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव है। आपकी भेंट ने यह विश्वास और भी प्रगाढ़ किया है कि आप देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं।” क्या यह संकेत है कि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले वरुण गांधी को महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है?

    परिवारिक संबंधों का महत्व

    वरुण को टिकट न मिलने का मामला अब पुरानी बात बन चुका है। असल सवाल यह है कि पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अब क्या बदलाव आने वाला है? वरुण की मां, मेनका गांधी, पिछली बार सुल्तानपुर सीट से चुनाव हार गई थीं, जिसके बाद से दोनों, वरुण और मेनका, राजनीतिक चर्चा से दूर रहे। हालांकि, अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वरुण या उनकी पत्नी यामिनी गांधी को चुनावी प्रचार में सक्रिय किया जा सकता है।

    यामिनी गांधी का राजनीतिक背景

    कम ही लोग जानते होंगे कि यामिनी रॉय चौधरी, वरुण की पत्नी, एक बंगाली परिवार से हैं और उनके परिवारों के बीच पुरानी मित्रता रही है। यामिनी एक कवयित्री भी हैं, और उनके परदादा चितरंजन दास तथा वरुण के परदादा पंडित जवाहरलाल नेहरू अच्छे मित्र थे। चितरंजन दास स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे और उनके परिवार का संबंध ढाका से था। यह संबंध भाजपा को पश्चिम बंगाल में एक नया कनेक्शन प्रदान कर सकता है। यामिनी फिलहाल राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति बंगाल चुनाव के समय महत्व रख सकती है।

    वरुण गांधी का राजनीतिक अनुभव

    वरुण गांधी भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं और पश्चिम बंगाल के प्रभारी भी रह चुके हैं। इस दौरान, उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा के साथ मिलकर पार्टी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वरुण लगातार तीन बार पीलीभीत और सुल्तानपुर से सांसद बने। पिछले चुनाव में, भाजपा ने उनका टिकट काटकर जितिन प्रसाद को दिया, जो बाद में विजयी होकर मंत्री बने।

    राजनीतिक खामोशी का प्रभाव

    इस बीच, चर्चा थी कि वरुण ने निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए पर्चा खरीद लिया था, लेकिन संभवतः उन्होंने अपने कदम पीछे खींच लिए। इस खामोशी के बावजूद, वह सोशल मीडिया पर भी कम सक्रिय रहे हैं। अब, संभव है कि उन्हें इस सियासी चुप्पी का इनाम मिल सकता है।

  • 2026 चुनाव में नंदिग्राम के बाद भबानीपुर में ममता-सुवेंदु के बीच संघर्ष

    2026 चुनाव में नंदिग्राम के बाद भबानीपुर में ममता-सुवेंदु के बीच संघर्ष

    भवानीपुर में ममता बनर्जी का फिर से मुकाबला सुवेंदु अधिकारी से

    नई दिल्ली: आगामी विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच एक बार फिर से टक्कर होने जा रही है। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी नंदीग्राम में हार गई थीं, लेकिन भवानीपुर विधानसभा उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल की थी। इस बार ममता बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस ने भवानीपुर सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को न केवल नंदीग्राम बल्कि भवानीपुर से भी मैदान में उतारा है।

    2018 चुनाव और राजनीतिक बदलाव

    2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कई प्रमुख नेता तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे, जिसमें सुवेंदु अधिकारी भी शामिल थे। चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था, जिसमें भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को उनके खिलाफ खड़ा किया। इस दौरान सीपीएम ने युवा नेता मीनाक्षी मुखर्जी को अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन ममता और सुवेंदु के बीच मुकाबला सबसे ज़्यादा देखने को मिला था।

    सुवेंदु का 1956 वोटों से ममता को हराना

    भाजपा के सुवेंदु अधिकारी ने उस चुनाव में ममता को 1956 वोटों से हराया था, जिसमें उन्हें 1,10,764 वोट मिले, जबकि ममता को 1,08,808 वोट मिले। मीनाक्षी मुखर्जी को 6,267 वोट मिले। चुनाव परिणामों में विवाद भी हुआ था, जिसके चलते ममता ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। पिछले 5 वर्षों में सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल सुप्रीमो को कई बार चुनौती दी है।

    भवानीपुर में ममता का इतिहास

    ममता बनर्जी ने 2011 में भवानीपुर सीट से चुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद संभाला था। उस समय उन्होंने सीपीएम की उम्मीदवार नंदिनी मुखर्जी को 54,000 से अधिक वोटों से हराया था। 2016 में, उन्हें भवानीपुर से 65,520 वोट मिले थे, जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस की दीपा दासमुंशी को 40,219 वोट मिले। 2021 के चुनाव में ममता ने इस सीट से चुनाव नहीं लड़ा था, जिसमें शोभनदेब चटर्जी ने तृणमूल के टिकट पर जीत हासिल की थी।

    उपचुनाव में ममता की सफलता

    शोभनदेब चटर्जी ने बाद में सीट को खाली कर दिया ताकि ममता बनर्जी उपचुनाव में हिस्सा ले सकें। 3 अक्टूबर, 2021 को उपचुनाव के परिणाम घोषित हुए, जिसमें ममता को 85,263 वोट मिले और भाजपा की प्रियंका टिबरेवाल को 26,428 वोट मिले। ममता ने इस उपचुनाव में 58,835 वोटों से जीत हासिल की थी।

  • भाजपा ने ओडिशा में चार में से तीन राज्यसभा सीटें जीतीं, विपक्ष से एक छीनी

    भाजपा ने ओडिशा में चार में से तीन राज्यसभा सीटें जीतीं, विपक्ष से एक छीनी

    ओडिशा में भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में हासिल की जीत

    भुवनेश्वर। ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीन राज्यसभा सीटों पर विजय प्राप्त की है। विधायकों की संख्या के हिसाब से भाजपा की दो सीटों पर जीत सुनिश्चित थी, जबकि विपक्षी पार्टी बीजेडी (बीजू जनता दल) की एक सीट भी सुरक्षित मानी जा रही थी। भाजपा ने तीसरी सीट के लिए निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप रे का समर्थन किया। विपक्षी विधायकों की क्रॉस वोटिंग ने भाजपा को यह सीट भी पाने में मदद की।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

    मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने इस जीत की घोषणा करते हुए मीडिया में अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “आज ओडिशा राज्य के लिए एक विशेष दिन है। हमारे द्वारा प्रस्तुत सभी तीन उम्मीदवार राज्यसभा चुनाव में सफल रहे हैं। भाजपा के उम्मीदवार मनमोहन सामल, सुजीत कुमार, और दिलीप रे ने अत्यधिक बहुमत से जीत हासिल की है।”

    विपक्ष की क्रॉस वोटिंग

    मुख्यमंत्री मांझी ने क्रॉस वोटिंग के लिए विपक्षी विधायकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और बीजेडी के विधायकों ने विकास के मार्ग पर ओडिशा को आगे बढ़ाने के लिए इन तीन उम्मीदवारों के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान किया है। ये सभी राज्य की समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”

    भाजपा के बढ़ते प्रभाव की कहानी

    भाजपा ने चार विधानसभा सीटों के लिए दो उम्मीदवार प्रस्तुत किए थे, और एक सीट के लिए दिलीप रे को समर्थन दिया था। विधायकों की संख्या के अनुसार, भाजपा की दो सीटों का जीतना तय किया गया था, वहीं बीजेडी के लिए भी एक सीट सुरक्षित मानी जा रही थी। चौथी सीट को लेकर स्थिति तनावपूर्ण थी, जिसमें बीजेडी को कांग्रेस और वाम दल का समर्थन प्राप्त था। हालांकि, भाजपा ने तीन कांग्रेस और दो बीजेडी विधायकों को प्रभावित कर स्थिति को पलटने में सफल रही।

    क्रॉस वोटिंग के मामले में खुलासे

    वोटिंग के दौरान, कांग्रेस की ओडिशा इकाई के अध्यक्ष भक्ता चरण दास ने क्रॉस वोटिंग की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के तीन विधायकों ने भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया। इसी तरह, बीजेडी विधायक देवी रंजन त्रिपाठी ने भी खुले तौर पर बगावत स्वीकार की कि उन्होंने दिलीप रे को वोट दिया। इस पर एक और विधायक सौविक बिस्वाल की पत्नी ने भी जानकारी दी कि उनके पति ने पार्टी लाइन से भटकते हुए वोट दिया।

  • बिहार राज्यसभा चुनाव में चार विधायक गायब, चुनाव पर सवाल उठे

    बिहार राज्यसभा चुनाव में चार विधायक गायब, चुनाव पर सवाल उठे

    बिहार में राज्यसभा चुनाव: सियासी गतिविधियों का बढ़ता दौर

    पटना: बिहार में राज्यसभा चुनाव के बीच सियासी गतिविधियों में तेजी आई है। चुनाव प्रक्रिया में रुझान और गतिविधियों का सिलसिला लगातार जारी है। अब तक 239 विधायकों ने मतदान में भाग लिया है। नरेन्द्र मोदी सरकार के समर्थन में शामिल एनडीए के सभी विधायक अपने अधिकार का प्रयोग कर चुके हैं।

    विपक्ष में चुनौती

    हालांकि, विपक्षी खेमे से अभी तक चार विधायक मतदान में शामिल नहीं हो पाए हैं। इन विधायकों की अनुपस्थिति ने चुनाव प्रक्रिया में कुछ अस्थिरता पैदा की है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह स्थिति चुनावी दांव-पेच को और भी रोचक बना सकती है।

    चुनाव की पृष्ठभूमि

    बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में राज्यसभा चुनाव एक महत्वपूर्ण घटना है, जहां विभिन्न दल अपनी ताकत को प्रदर्शित करने के लिए कृतसंकल्पित हैं। मतदान की प्रक्रिया में भाग लेना विधायकों के लिए एक संवैधानिक कर्तव्य है, और इस समय चुनावी माहौल में जोश-खरोश देखने को मिल रहा है।

  • भाजपा के अलावा अन्य दलों से गठबंधन की इच्छा व्यक्त की

    भाजपा के अलावा अन्य दलों से गठबंधन की इच्छा व्यक्त की

    चंद्रशेखर आजाद का यूपी राजनीति में बड़ा दांव

    नई दिल्ली। आजाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना के सांसद चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीतिक पिच पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने रविवार को बाराबंकी के हैदरगढ़ में पार्टी के स्थापना दिवस और कांशीराम की जयंती के अवसर पर आयोजित जनसभा में मीडिया से बात करते हुए 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में अन्य दलों के साथ गठबंधन करने का प्रस्ताव रखा, बशर्ते भाजपा को छोड़कर।

    गठबंधन के निर्णय की प्रक्रिया

    चंद्रशेखर ने बताया कि गठबंधन का अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व और कार्यकर्ताओं द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा, “मेरा भाजपा से वैचारिक विरोध है, इसलिए प्रदेश इकाई जो भी निर्णय लेगी, वह मुझे स्वीकार्य होगा।” इस बयान को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

    कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीरता

    जनसभा में चंद्रशेखर ने राज्य में अपराध और बढ़ती हत्या की घटनाओं पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘हर चौराहे पर यमराज’ वाले बयान पर कड़ा हमला किया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा, “जब अपराधी भाजपा से जुड़े होते हैं तो यमराज छुट्टी पर चले जाते हैं।”

    धमकियों का मुकाबला करने की प्रतिबद्धता

    सोशल मीडिया पर उन्हें मिली धमकियों और रास्ते में उनके वाहन पर हुए पथराव की घटनाओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, “शायद उन्हें मालूम नहीं कि मेरा नाम चंद्रशेखर ‘रावण’ है। मैं डरने वाला नहीं हूं। बाबा साहब के संविधान की शक्ति के साथ आज मैं आपके बीच खड़ा हूं।”

    संघर्ष और भविष्य के संकल्प

    अपने संबोधन में चंद्रशेखर ने कांशीराम के संघर्षों को याद करते हुए कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने नगीना में बिना बड़े गठबंधन के जीत का उदाहरण देते हुए दलित और पिछड़ा वर्ग की जागरूकता को रेखांकित किया।

    जनसभा का आयोजन और सुरक्षा इंतजाम

    जनसभा में बड़ी संख्या में लोग और भीम आर्मी के अनुशासित कार्यकर्ता उपस्थित थे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस तैनात थी, वहीं भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने सुरक्षा का मोर्चा संभाला। चंद्रशेखर आजाद भाजपा को छोड़कर किसी भी दल के साथ गठबंधन के लिए तैयार हैं। प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर उनकी आलोचना स्पष्ट रूप से सुनाई दी। 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी किंगमेकर की भूमिका निभाने का लक्ष्य रखती है।

  • पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल में ममता बनर्जी ने महत्वपूर्ण घोषणा की

    पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल में ममता बनर्जी ने महत्वपूर्ण घोषणा की

    ममता बनर्जी का अहम ऐलान

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुअज्जिनों और पुरोहितों के लिए महत्वपूर्ण घोषणा की है। राज्य सरकार ने इनके मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी का निर्णय लिया है, जिसके बाद अब इन पेशेवरों को हर माह 2000 रुपये मानदेय मिलेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि ये लोग समाज और धार्मिक परंपराओं को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए उन्हें सम्मान और सहयोग देना आवश्यक है।

    नए आवेदन की मंजूरी

    ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि मुअज्जिनों और पुरोहितों द्वारा भेजे गए नए आवेदन को स्वीकृति दे दी गई है। सरकार का यह प्रयास है कि हर समुदाय की परंपराओं को समान महत्व दिया जाए और उन्हें मजबूत किया जाए।

    बकाया महंगाई भत्ते का भुगतान

    महंगाई भत्ते के भुगतान की घोषणा
    इसके अतिरिक्त, ममता बनर्जी ने राज्य के कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए बकाया महंगाई भत्ते के भुगतान की सूचना दी है। यह भुगतान मार्च 2026 से प्रारंभ होगा, जिसके लिए वित्त विभाग ने आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।

  • ईरान संघर्ष के बीच वैश्विक तेल संकट की आशंका; भारत का बयान: पर्याप्त भंडार, स्थिति संभालने को तैयार

    ईरान संघर्ष के बीच वैश्विक तेल संकट की आशंका; भारत का बयान: पर्याप्त भंडार, स्थिति संभालने को तैयार

    नई दिल्ली/तेहरान। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताओं में वृद्धि हुई है। समुद्री मार्गों में अवरोध और बढ़ते तनाव के बीच, भारत सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में कच्चे तेल और ईंधन का पर्याप्त भंडार है और हर परिस्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।

    भारत की ऊर्जा सुरक्षा

    केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल ने कहा कि भारत कच्चे तेल और ईंधन की आपूर्ति के मामले में मजबूत स्थिति में है। उन्होंने यह टिप्पणी CNBC-TV18 इंडिया बिजनेस लीडर्स अवार्ड्स 2026 के समारोह में की।

    ईंधन की आपूर्ति को लेकर आश्वासन

    गोयल ने बताया कि देश में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन की आपूर्ति से संबंधित कोई समस्या नहीं आई है। सरकार के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला सुचारू है।

    उन्होंने कहा, “कच्चे तेल और ईंधन के मामले में भारत की स्थिति बेहतर है। किसी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार भी तैयारी की गई है।”

    केरोसिन उत्पादन में वृद्धि

    संभावित संकट के मद्देनजर, सरकार ने केरोसिन का उत्पादन बढ़ा दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि यदि एलपीजी की आपूर्ति में देरी होती है, तो आम जनता के लिए खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

    इसके साथ ही, भारत अपनी एलपीजी और एलएनजी की जरूरतों को विभिन्न देशों से आयात के माध्यम से पूरा कर रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम की जा सके।

    संकीर्ण जलडमरूमध्य पर बढ़ती चिंताएं

    इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए विभिन्न देशों से सहयोग की मांग की है। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन को इस क्षेत्र में जहाज भेजने की अपील की है।

    युद्ध की मौजूदा स्थिति

    संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद से क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान की प्रतिक्रिया ने खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष को और बढ़ा दिया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि इस मार्ग में कोई रुकावट आती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

    हालांकि, भारत सरकार का कहना है कि वर्तमान में देश के पास पर्याप्त तेल भंडार और वैकल्पिक आयात स्रोत हैं, जिससे संभावित संकटों का सामना किया जा सकता है।

  • पूर्व सांसद बीजेपी विधायक का निधन, राजनीतिक हलकों में शोक की लहर

    पूर्व सांसद बीजेपी विधायक का निधन, राजनीतिक हलकों में शोक की लहर

    भाजपा के पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह का निधन

    सतना। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक यादवेंद्र सिंह का 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे हाल ही में बीमार थे और भोपाल के एक बड़े निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। शनिवार, 14 मार्च को अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनकी मृत्यु की सूचना मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। उनका पार्थिव शरीर रात तक उनके गृह ग्राम कचनार, जिला सतना पहुंच जाएगा, जहां रविवार को उनका अंतिम संस्कार होगा।

    नागौद विधानसभा सीट का इतिहास

    यादवेंद्र सिंह नागौद विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2013 में कांग्रेस पार्टी की टिकट पर विधायक का चुनाव जीता। बाद में, टिकट काटे जाने से नाराज होकर उन्होंने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया। वे नागौद विधानसभा में एक सच्चे जननेता के रूप में जाने जाते थे।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया

    यादवेंद्र सिंह के निधन पर भाजपा नेताओं के साथ-साथ कांग्रेस के नेता अजय सिंह ने भी शोक व्यक्त किया है। 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया था, जिसके फलस्वरूप वे बसपा में शामिल हो गए और वहीं से चुनाव लड़ा। यादवेंद्र सिंह की चुनावी भागीदारी के कारण कांग्रेस को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा में शामिल होकर नए राजनीतिक अध्याय का آغاز किया।

    परिवार का परिचय

    यादवेंद्र सिंह के परिवार में उनकी बहू प्रतिभा यतेंद्र सिंह नगर परिषद नागौद की अध्यक्ष हैं, जबकि उनके पुत्र यतेंद्र सिंह पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। यादवेंद्र सिंह की सक्रियता और संघर्षशीलता ने उन्हें उनके क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।

  • राहुल गांधी का लखनऊ में बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता धनवान

    राहुल गांधी का लखनऊ में बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता धनवान

    राहुल गांधी का बड़ा बयान: कांग्रेस गरीबों की पार्टी

    लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपनी पार्टी को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है, हालांकि पार्टी के कई नेता आर्थिक दृष्टि से संपन्न हैं।

    राहुल गांधी ने स्पष्ट किया, “हम अमीर पार्टी नहीं बनना चाहते। यदि ऐसा हुआ, तो कांग्रेस भाजपा की तरह हो जाएगी।” उन्होंने पार्टी की जड़ों को याद करते हुए बताया कि इसका ढांचा महात्मा गांधी के समय से स्थापित है, जो हमेशा गरीबों और वंचितों की पहचान बनते रहे हैं।

    कांशीराम की जयंती पर सम्मेलन में कांग्रेस की कमियां

    कांशीराम की जयंती पर राहुल गांधी ने अपनी पार्टी की कमजोरियों पर भी बातचीत की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की कुछ नाकामियों के कारण बहुजन आंदोलन को मजबूती मिली और कांशीराम को राजनीतिक सफलता हासिल हुई।

    उन्होंने जोड़ा कि यदि कांग्रेस ने सामाजिक बदलाव के लिए तेजी से कदम उठाए होते, तो शायद कांशीराम को इतनी बड़ी पहचान नहीं मिलती।

    बदलाव के लिए संघर्ष की आवश्यकता

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में बदलाव केवल इच्छाशक्ति से नहीं होता, इसके लिए विचारों के लिए संघर्ष आवश्यक है। वे बोले कि जब तक लोग अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे और उसके खिलाफ खड़े नहीं होंगे, तब तक समाज में बदलाव असंभव है।

    संविधान और वर्तमान सरकार की आलोचना

    संविधान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में प्राचीन सभ्यता की आवाज़ शामिल है और इसकी आत्मा सामाजिक न्याय और समानता की है। वर्तमान सरकार की नीतियों पर उन्होंने आरोप लगाया कि वह इस मूल भावना को नकार रही है।

    अंबेडकर और कांशीराम का संघर्ष

    अपने भाषण में उन्होंने बी. आर. अंबेडकर और कांशीराम के संघर्षों का जिक्र किया। राहुल गांधी ने बताया कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के माध्यम से समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौता किए अपने सिद्धांतों के लिए संघर्ष किया।

    ऊर्जा नीति पर सरकार पर आरोप

    राहुल गांधी ने भारत की ऊर्जा नीति को लेकर प्रश्न उठाए। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर आरोप लगाया कि अंतर्राष्ट्रीय दबाव के चलते भारत की ऊर्जा नीतियों में बाधा आ रही है।

    समाज में असमानता का मुद्दा

    राहुल गांधी ने समाज में बढ़ती असमानता पर ध्यान दिलाया, जहाँ 15 प्रतिशत लोग अन्य 85 प्रतिशत पर हावी हो रहे हैं, और संसाधनों तथा अवसरों का लाभ केवल एक सीमित वर्ग तक पहुंच रहा है।

    2027 चुनाव की तैयारी

    कार्यक्रम के अंत में, उन्होंने समाज में बदलाव के प्रति लगन की बात की और बताया कि सभी के योगदान वाली राजनीति ही देश की प्रगति के लिए आवश्यक है। उल्लेखनीय है कि हाल में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन उत्तर प्रदेश में मजबूत प्रदर्शन कर चुका है, और 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए इसी रणनीति पर काम कर रहा है।

  • शिवराज और तीन अन्य नेताओं को मानहानि मामले में बरी किया गया

    शिवराज और तीन अन्य नेताओं को मानहानि मामले में बरी किया गया

    शिवराज सिंह चौहान को मानहानि मामले में बड़ी राहत

    जबलपुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को मानहानि से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण राहत मिली है। जबलपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा द्वारा दायर मानहानि शिकायत में चौहान, खजुराहो सांसद वी. डी. शर्मा और भाजपा विधायक भूपेंद्र सिंह को दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति के बाद आया है।

    मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया

    जबलपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डी.पी. सूत्रकर ने विवेक तन्खा की ओर से दायर मुकदमा वापस लेने के आवेदन को स्वीकार किया। जानकारी के अनुसार, तन्खा ने अंतिम निर्णय से पहले अदालत में मानहानि के मामले को वापस लेने का अनुरोध किया था। इस कारण तीनों नेताओं को इस मामले से मुक्त कर दिया गया।

    पंचायत चुनाव संबंधी विवाद

    यह मामला वर्ष 2021 में मध्य प्रदेश पंचायत चुनावों के दौरान ओबीसी आरक्षण से संबंधित विवाद से उभरा था। उस समय विवेक तन्खा सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर वरिष्ठ अधिवक्ता के तौर पर काम कर रहे थे। चौहान द्वारा दिए गए कुछ बयानों को तन्खा ने अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला माना था।

    तन्खा द्वारा 10 करोड़ का दावा

    तन्खा ने चौहान, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह के खिलाफ सिविल और आपराधिक मानहानि का मामला दायर किया, जिसमें उन्होंने सिविल मामले में 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की थी। वहीं, आपराधिक मामले में आईपीसी की धारा 500 के तहत कार्रवाई की अपील की गई थी।

    सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

    जब मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, तो वहां सौहार्दपूर्ण समाधान की सलाह दी गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद शुरू हुआ। संसद में मुलाकात के बाद, तन्खा ने चुनावी बयानों को लेकर दायर मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया।

    अधिवक्ता की जानकारी

    परिवादी पक्ष के अधिवक्ता श्यामसुंदर यादव ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव पर विवेक तन्खा ने मानहानि का मामला वापस लेने का कदम उठाया। आपसी सहमति के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया।

  • यूपी भाजपा संगठन में बदलाव, 15 साल बाद नए चेहरों की संभावना

    यूपी भाजपा संगठन में बदलाव, 15 साल बाद नए चेहरों की संभावना

    यूपी भाजपा संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के चलते भाजपा के प्रदेश संगठन में व्यापक परिवर्तन की योजना बनाई जा रही है। लगभग 15 वर्षों बाद संगठन में यह बदलाव संभावित है। यह कदम पार्टी की नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें कई मौजूदा पदाधिकारियों की भूमिका में परिवर्तन किया जा सकता है।

    पार्टी की नई दिशा

    भाजपा प्रदेश संगठन में फेरबदल का उद्देश्य न केवल नए चेहरों को मौका देना है, बल्कि आगामी चुनावों में अधिक प्रभावी तरीके से चुनाव लड़ने की तैयारी करना भी है। वर्ष 2010 से पार्टी के कई पदाधिकारी जैसे महामंत्री, उपाध्यक्ष और मंत्री के पदों पर कार्यरत हैं, जिन्हें बदला जा सकता है। इस परिवर्तन का मुख्य फोकस पार्टी के अन्य राज्यों में सफल अनुभव को उत्तर प्रदेश में लागू करने पर है।

    संगठनात्मक रणनीतियां

    भाजपा की नई रणनीतियों में सैन्यीकृत संचार और कार्यकर्ता के स्तर तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया गया है। संगठन में बदलाव का एक अन्य प्रमुख कारण कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। यह बदलाव भाजपा के चुनावी संकल्पना को मजबूत करने में मदद करेगा।

    उम्मीदें और चुनौतियां

    नए बदलावों से कार्यकर्ताओं और नेताओं में उत्साह बढ़ने की उम्मीद है। हालाँकि, इस प्रकार के संगठनात्मक परिवर्तनों में चुनौतियों का सामना करना भी ज़रूरी होगा। नए पदाधिकारियों को भी अपनी जिम्मेदारियों का सही ढंग से निर्वहन करना होगा और पार्टी की नीति को आगे बढ़ाना होगा।

  • स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ‘गविष्ठ यात्रा’ 3 मई को गोरखपुर से प्रारंभ होगी

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ‘गविष्ठ यात्रा’ 3 मई को गोरखपुर से प्रारंभ होगी

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गविष्ट यात्रा की घोषणा

    प्रयागराज। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 3 मई से गोरखपुर में ‘गविष्ट यात्रा’ का आरंभ करने का ऐलान किया है। यह यात्रा 81 दिनों तक चलेगी और 23 जुलाई को गोरखपुर में समाप्त होगी। इस यात्रा के दौरान नियुक्त टीमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न गांवों में जाकर लोगों को जागरूक करेंगी और सनातन धर्म एवं गौसंरक्षण से संबंधित मुद्दों पर संवाद करेंगी।

    गांवों तक पहुंचने का उद्देश्य

    स्वामी ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि इस यात्रा के माध्यम से राज्य के लगभग 1.08 लाख गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने समर्थकों से आग्रह किया कि वे टीम बनाकर गांव-गांव जाकर वस्त्र प्रमाण के साथ सत्य को जनता तक पहुंचाएं।

    अनुमति संबंधी मुद्दे

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि इस कार्यक्रम के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई बाधाएं उत्पन्न की गईं। उनके अनुसार, पहले काशी में कार्यक्रम को रोकने का प्रयास किया गया, फिर लखनऊ में प्रवेश को लेकर आपत्ति उठाई गई, और अंततः देर रात 16 शर्तों के साथ अनुमति दी गई, जिनमें बाद में 10 अतिरिक्त शर्तें जोड़ी गईं।

    शंकराचार्य पद का महत्व

    अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य पद सनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान रखता है। उनका यह भी मत था कि यह व्यवस्था ज्ञान और परंपरा पर आधारित है, न कि भीड़तंत्र पर। स्वामी ने गौसंरक्षण और सनातन धर्म की रक्षा को समाज की जिम्मेदारी बताते हुए संत समाज से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

    राजनीतिक उद्देश्य की स्पष्टता

    स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि उनका इरादा कोई राजनीतिक दल बनाना नहीं है। उन्होंने बताया कि संत समाज का उद्देश्य नागरिकों में यह सन्देश फैलाना है कि जो भी गौसंरक्षण और समाज के हित में कार्य करे, उसे समर्थन मिलना चाहिए।

    साधु समाज की विकृतियों पर चर्चा

    स्वामी ने साधु समाज में आई कुछ विकृतियों पर भी चर्चा करने की योजना बनाई है। इस संदर्भ में विभिन्न अखाड़ों को पत्र लिखकर उनकी भूमिका को स्पष्ट करने का आग्रह किया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ बनाने का भी विचार व्यक्त किया, जिसमें संन्यासी, बैरागी, उदासीन और गृहस्थ शामिल होंगे।

  • राकेश यादव ने राहुल गांधी को लिखा पत्र, मध्य प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर उठे सवाल

    राकेश यादव ने राहुल गांधी को लिखा पत्र, मध्य प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर उठे सवाल

    कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी रद्द, सियासी हलचल तेज

    भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी रद्द होने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। इस मुद्दे पर पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाने की होड़ शुरू कर दी है। कांग्रेस के नेता राकेश सिंह यादव ने इस संदर्भ में राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की है।

    राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी में उठाए गंभीर सवाल

    राकेश यादव ने राहुल गांधी को लिखी चिट्ठी में यह आरोप लगाया है कि राज्यसभा में कांग्रेस विधायकों के बीच क्रॉस वोटिंग के लिए हॉर्स ट्रेडिंग की गई है। उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की है कि मुकेश मल्होत्रा की विधायकी रद्द करने की साजिश में प्रदेश नेतृत्व का हाथ लग सकता है। चिट्ठी में राकेश यादव ने राहुल गांधी से मामले की जांच कराने और हस्तक्षेप करने की मांग की है।

  • राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया संकट पर मोदी सरकार की आलोचना की

    राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया संकट पर मोदी सरकार की आलोचना की

    राहुल गांधी का सरकार पर हमला: पश्चिम एशिया संकट की अनदेखी

    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव पर केंद्र सरकार की चुप्पी की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह संकट भारत की अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, फिर भी सरकार इस पर चर्चा करने से बच रही है।

    वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत

    राहुल गांधी ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनावों से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है, जो भारत को सीधा प्रभावित करेगा। उन्होंने हाल ही में शेयर बाजार में आई गिरावट की ओर इशारा करते हुए कहा कि बाजार ने पहले से ही इस संकट के प्रभाव को महसूस कर लिया है।

    संसद में चर्चा की आवश्यकता

    कांग्रेस नेता ने यह प्रश्न उठाया कि क्या पश्चिम एशिया का मामला इतना महत्वहीन है कि संसद में इस पर चर्चा नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों में वृद्धि और इसके संभावित आर्थिक प्रभाव जैसे मुद्दे सीधे जनता से जुड़े हैं और इन्हें संसद में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

    प्रधानमंत्री पर आरोप

    राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि हाल में अमेरिका के साथ हुए समझौते ने भारत को कमजोर स्थिति में ला दिया है। उनके अनुसार, यह समझौता किसी दबाव का नतीजा हो सकता है। यदि संसद में इस विषय पर बहस होती, तो सरकार की स्थिति स्पष्ट हो जाती।

    प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति

    राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री संसद से बच रहे हैं और अब वे सदन के अंदर नहीं आ पाएंगे।

    विदेश मंत्री का बयान

    इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद में पश्चिम एशिया की स्थिति पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा एवं राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है।

    भारत की नीति

    जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत पश्चिम एशिया के देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करता है और तनाव कम करने के लिए कूटनीति और संवाद के माध्यम से हल निकालने का समर्थन करता है।

    भारतीय नागरिकों की सुरक्षा

    उन्होंने बताया कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से लगभग 67,000 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, और सरकार लगातार हालात पर नजर रखे हुए है। सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, और नागरिकों की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है।

  • राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर के जरिए जवाब दिया

    राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर के जरिए जवाब दिया

    सियासत में गरما गरम बहस: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का प्रोटोकॉल उल्लंघन

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति का “अपमान” करने का आरोप लगाया है। इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीरें दिखाकर पलटवार किया।

    तस्वीरों के जरिए पलटवार

    ममता बनर्जी ने कोलकाता में धरने के दौरान एक तस्वीर प्रस्तुत की, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, जबकि राष्ट्रपति खड़ी हैं। उन्होंने इसे प्रोटोकॉल के उल्लंघन का स्पष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि उनका ऐसा करना हमारे संस्कारों में नहीं है।

    अपमान की संस्कृति पर टिप्पणी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तस्वीर से यह स्पष्ट है कि भाजपा एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देती है, जिसमें राष्ट्रपति का अपमान किया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार राष्ट्रपति और भारतीय संविधान का पूरा सम्मान करती है, और राज्य सरकार को इसमें दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति की नाराजगी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को बागडोगरा एयरपोर्ट पर पहुंची थीं, जहां उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेना था। बताया जा रहा है कि वहां मुख्यमंत्री या राज्य के किसी मंत्री का न होना राष्ट्रपति को परेशान कर गया था। उन्होंने कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया।

    राज्य सरकार की सफाई

    ममता बनर्जी ने इस विवाद को लेकर कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रपति के कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि निजी आयोजकों ने भी उचित समन्वय नहीं किया था। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर अव्यवस्था के लिए आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराया।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि एक महिला आदिवासी नेता और देश की राष्ट्रपति का अपमान किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य की नागरिकों की जागरूकता इस घटना को कभी नहीं भूलेगी। यह बयान मोदी ने दिल्ली में दिल्ली मेट्रो के नए कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद दिया।

    इस पूरे विवाद के चलते केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और भी बढ़ गया है।

  • राहुल गांधी ने संजू सैमसन की प्रदर्शन पर बधाई दी

    राहुल गांधी ने संजू सैमसन की प्रदर्शन पर बधाई दी

    राहुल गांधी ने संजू सैमसन के प्रदर्शन की सराहना की

    नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भारतीय क्रिकेटर संजू सैमसन के अद्भुत प्रदर्शन पर खुशी व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि T20 विश्व कप के क्वार्टरफाइनल और सेमीफाइनल में भारत की सफलता में संजू का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, तथा तिरुवनंतपुरम से उनका होना पूरे केरल के लिए गर्व का विषय है।

    सबरीमाला मंदिर मुद्दा

    राहुल गांधी ने केरल की राजनीति में सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामलों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने कहा कि मंदिर से सोना चोरी होने की घटना के परिणामस्वरूप वामपंथी दल से जुड़े कई नेता जेल गए हैं। उन्होंने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच में विघ्न डालने का आरोप लगाया और कहा कि सबरीमाला के अपमान करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।

    वाम सरकार पर आरोप

    कांग्रेस नेता ने केरल की वाम सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने यह आरोप लगाया कि जो सरकार खुद को कम्युनिस्ट बताती है, वह अब सबसे अधिक कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों को अपना रही है। राहुल गांधी ने चुटकी लेते हुए कहा कि Communist Party of India (Marxist) को अपना नाम बदलकर “भारतीय कॉर्पोरेटिस्ट पार्टी” रख लेना चाहिए।

    जांच एजेंसियों पर सवाल उठाना

    राहुल गांधी ने उल्लेख किया कि उनके खिलाफ कई मामलों में जांच की गई, लेकिन केरल के मुख्यमंत्री या उनके परिवार के बारे में जांच एजेंसियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में वाम दल और भाजपा एक साथ काम कर रहे हैं ताकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले United Democratic Front को कमजोर किया जा सके।

    ट्रंप और मोदी का उल्लेख

    अपने बयान के दौरान, राहुल गांधी ने डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी की चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सत्ता और प्रभाव के संबंधों की समझ आवश्यक है। उनके अनुसार, केरल की राजनीति में भी इसी तरह का शक्ति संतुलन देखा जा रहा है।

  • बिहार में बड़ा परिवर्तन, नीतिश कुमार आज JDU में शामिल होंगे

    बिहार में बड़ा परिवर्तन, नीतिश कुमार आज JDU में शामिल होंगे

    बिहार में राजनीतिक बदलाव: नीतीश कुमार के निर्णय के बाद नई दिशा

    पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के निर्णय के कारण राज्य की राजनीति में आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। मुख्यमंत्री की नई नियुक्ति के संबंध में निर्णय होना बाकी है। इसी बीच, केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सम्राट चौधरी को बागडोगरा बुलाया है। दूसरी ओर, निशांत कुमार जदयू में सक्रियता बढ़ाते हुए पार्टी में शामिल होने जा रहे हैं। वे रविवार को पार्टी कार्यालय में एक समारोह के दौरान औपचारिक रूप से सदस्यता ग्रहण करेंगे।

    निशान्त की राजनीति में एंट्री

    निशांत कुमार की राजनीतिक यात्रा चम्पारण से शुरू होगी, जो कि नीतीश कुमार की शुरूआती यात्राओं का भी गवाह रही है। जदयू के संगठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होने की उम्मीद है, साथ ही उन्हें सरकार में उपमुख्यमंत्री बनाने की चर्चा चल रही है। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। वर्तमान में सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा इस पद पर कार्यरत हैं।

    पार्टी में सक्रियता और भविष्य की योजनाएँ

    शनिवार को, जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के आवास पर निशांत ने पार्टी के लगभग डेढ़ दर्जन युवा विधायकों के साथ बैठक की, जिसमें वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति भी रही। बैठक के दौरान जिलाध्यक्षों के साथ भी लंबी चर्चा हुई। पार्टी में शामिल होने से पहले ही, निशांत कुमार ने अपने इरादे स्पष्ट किए हैं। उन्होंने कहा कि वे अपने पिता नीतीश कुमार द्वारा किए गए कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    पार्टी सदस्यता समारोह

    शुक्रवार को, नीतीश कुमार की अध्यक्षता में पार्टी सांसदों, विधायकों और विधान पार्षदों की बैठक में निशांत के जदयू में शामिल होने के प्रस्ताव पर सहमति बनी। संजय झा ने इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया, जिसे सभी ने समर्थन दिया। रविवार को उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष औपचारिक रूप से सदस्यता प्रदान की जाएगी। इससे पहले, निशांत महावीर मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करेंगे।

  • राहुल गांधी का बयान, ‘केरल स्टोरी 2’ पर दर्शकों की कमी दर्शाती है

    राहुल गांधी का बयान, ‘केरल स्टोरी 2’ पर दर्शकों की कमी दर्शाती है

    नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फिल्म केरल स्टोरी-2 के बारे में अपने विचार साझा किए हैं। उनका कहना है कि इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों की संख्या कम है, जो उनके अनुसार “अच्छी खबर” है।

    राहुल गांधी ने यह बयान Marian College Kuttikkanam में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान दिया। चर्चा में एक छात्र ने फिल्मों के प्रचार में उपयोग के संबंध में सवाल किया, जिसके जवाब में उन्होंने अपनी राय व्यक्त की।

    ‘फिल्म खाली-खाली लग रही है’

    राहुल गांधी ने कहा कि यह सकारात्मक संकेत है कि केरल स्टोरी-2 को लेकर खास उत्साह नहीं दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि कुछ लोग केरल की सांस्कृतिक धरोहर को ठीक से नहीं समझ पा रहे।

    उन्होंने कहा कि आज के समय में फिल्में, टेलीविजन, और मीडिया को एक प्रकार से “हथियार” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। राहुल का मानना है कि इन माध्यमों का उपयोग समाज में भेदभाव फैलाने और कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।

    शौक और निजी जीवन पर भी की बात

    छात्रों के सवालों का उत्तर देते हुए राहुल गांधी ने अपने व्यक्तिगत शौकों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्हें पढ़ना पसंद है और वे विभिन्न विषयों पर गहन अध्ययन करते हैं।

    राहुल ने कहा कि वे अधिकतर फिल्में नहीं देखते, लेकिन शतरंज, मार्शल आर्ट्स, तैराकी और दौड़ना उनके पसंदीदा शौक हैं और वे नियमित रूप से व्यायाम करते हैं।

    केरल से बहुत कुछ सीखा

    राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने लगभग पांच वर्षों तक संसद में वायनाड का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन केरल को पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं था। हालांकि, वहां के लोगों से उन्होंने बहुत कुछ सीखा।

    उन्होंने एक भूस्खलन त्रासदी का जिक्र किया, जब वे पहली बार वहां गए थे। उस समय लोगों ने एक-दूसरे की मदद करते हुए उन्हें बहुत प्रभावित किया। राहुल के अनुसार, केरल की परंपराएं और सामाजिक मूल्य अति मजबूत हैं।

    शिक्षा प्रणाली पर भी उठाए सवाल

    राहुल गांधी ने भारत की शिक्षा व्यवस्था पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति किसी विशेष विचारधारा के आधार पर की जाती है। उनके मुताबिक, शिक्षा को एक ही विचारधारा तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

    इसके साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर उन्होंने कहा कि भारत अभी संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के स्तर पर नहीं है। अगर भारत को एआई क्षेत्र में आगे बढ़ना है, तो देश को अपने डेटा पर मजबूत नियंत्रण रखना चाहिए।