श्रेणी: Politics

  • सीपीएम सांसद ने ‘द केरल स्टोरी 2’ पर टिप्पणी की, बैन की मांग नहीं

    सीपीएम सांसद ने ‘द केरल स्टोरी 2’ पर टिप्पणी की, बैन की मांग नहीं

    मुंबई हाल ही में फिल्म केरल स्टोरी 2 को लेकर सियासी बवाल तेज हो गया है। जॉन ब्रिटास ने इसे “प्रोपेगैंडा” करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य चुनाव से पहले सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देना है। हालांकि, उन्होंने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने का समर्थन नहीं किया।

    “थिएटर नहीं, सेप्टिक टैंक में डाल देना चाहिए”

    सीपीएम के राज्यसभा सांसद ब्रिटास ने कहा कि यह फिल्म राज्य की सामाजिक छवि को नुकसान पहुँचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “यह एक प्रोपेगैंडा फिल्म है। इसे देखने के बजाय, लोगों को इसे खारिज कर देना चाहिए।”

    पहली फिल्म का भी किया जिक्र

    ब्रिटास ने बताया कि पहले भाग The Kerala Story पर भी किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं था, लेकिन उसे व्यापक स्वीकार्यता नहीं मिली। उन्होंने बताया कि फिल्म की सफलता को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया गया और इसके राजनीतिक उपयोग की बात की।

    बीजेपी पर लगाया चुनावी रणनीति का आरोप

    ब्रिटास ने इस मुद्दे को भारतीय जनता पार्टी से जोड़ते हुए कहा कि यह राज्य में राजनीतिक आधार बनाने के प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या बीजेपी अपने विवादास्पद मुद्दों पर खुले तौर पर अपनी स्थिति धारण करेगी।

    कुछ दृश्यों पर जताई आपत्ति

    फिल्म के प्रमोशनल वीडियो में एक दृश्य पर, जिसमें कथित तौर पर एक महिला को बीफ खाने के लिए मजबूर किया गया है, उन्होंने आपत्ति प्रकट की। उनका कहना है कि इससे राज्य की बहुलतावादी संस्कृति का गलत चित्रण किया जा रहा है।

    सेंसर प्रक्रिया और सामाजिक असर पर भी सवाल

    ब्रिटास ने फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और चेतावनी दी कि ऐसी फिल्मों को जल्द मंजूरी मिलने से समाज में विभाजनकारी बहस को बढ़ावा मिल सकता है। उनका कहना था कि केरल की जागरूक जनता इस तरह के प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी।

  • गिरिडीह निगम चुनाव में हिंसा, दो घायल, बोकारो के चास में SDPO पर हमला

    गिरिडीह निगम चुनाव में हिंसा, दो घायल, बोकारो के चास में SDPO पर हमला

    झारखंड में निकाय चुनाव के दौरान हुई हिंसा

    रांची: झारखंड में हाल ही में हुए निकाय चुनावों के दौरान कई स्थानों पर हिंसा की घटनाएं देखने को मिलीं। गिरिडीह में एक हिंसक झड़प में दो लोग गोली लगने से घायल हो गए, जबकि रांची के हिंदपीढ़ी क्षेत्र में फर्जी मतदान के आरोपों को लेकर मारपीट की स्थिति उत्पन्न हो गई। बोकारो के चास में भीड़ ने एसडीपीओ प्रवीण सिंह पर हमला किया, जिससे वे घायल हो गए।

    गिरिडीह में वोटिंग के दौरान हिंसा

    गिरिडीह नगर निगम चुनाव के दौरान सोमवार को वार्ड संख्या 18 में दो पक्षों के बीच झड़प हो गई। हंगामे के बाद आक्रोशित लोगों ने दुकानों में तोड़फोड़ की। इस मामले में हुई फायरिंग में मो शमीम अंसारी उर्फ शेरू और मो असलम नामक दो लोग घायल हुए। गंभीर स्थिति में उन्हें धनबाद रेफर किया गया। शेरू को सिर में जबकि असलम को पैर में गोली लगी थी। मतदान के शुरू होते ही विवाद का प्रारंभ हुआ, जिसके कारण दिनभर झड़पें होती रहीं। पुलिस को कई बार हस्तक्षेप करना पड़ा।

    मतदान में गड़बडियों की सूचना

    राज्य में 48 निकायों में 61.83% मतदान हुआ, जिसमें सरायकेला सबसे अधिक और रांची सबसे कम मतदान दर्शाता है। मतदान के अंतिम चरण में आजाद नगर मोहल्ले में दोनों पक्ष एक बार फिर टकरा गए, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और मारपीट हुई।

    बोकारो में एसडीपीओ पर हमला

    बोकारो जिले के चास नगर निगम क्षेत्र में एसडीपीओ प्रवीण सिंह पर हमले की खबर आई है। वारदात वार्ड संख्या 32 में मतदान केंद्र पर हुई, जिसके बाद पुलिस अधिकारी अस्पताल में भर्ती हुए। बोकारो के पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने घटना की जानकारी लेते हुए कहा कि मतदान केंद्र के पास बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे, जो चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों का उल्लंघन था।

    फर्जी मतदान का आरोप

    हरविंदर सिंह ने बताया कि कुछ लोग अपने उम्मीदवार के पक्ष में फर्जी मतदान कराने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने वालों के खिलाफ स्पष्ट संकेत दिया है कि सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • झारखंड नगर निकाय चुनाव में गंगवार और सोरेन ने डाला मत, बूथों पर शिकायतें सामने आईं

    झारखंड नगर निकाय चुनाव में गंगवार और सोरेन ने डाला मत, बूथों पर शिकायतें सामने आईं

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू

    रांची: झारखंड में 48 नगर निकायों में वोटिंग की प्रक्रिया सोमवार सुबह सात बजे से प्रारंभ हुई। जहाँ कुछ स्थानों पर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला, वहीं कई स्थानों पर मतदान की गति सुस्त रही। आम जनता से लेकर विशेष व्यक्तियों तक ने मतदान के लिए कतार में खड़े होकर अपने अधिकार का प्रयोग किया। झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मतदान किया, मुख्यमंत्री के साथ उनकी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी मतदान में हिस्सा लिया। इसी तरह, मंत्री इरफान अंसारी और शिल्पी नेहा तिर्की ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

    मतदान में भागीदारी का आह्वान

    राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रांची स्थित मतदान केंद्र पर जाकर मतदान किया। उन्होंने मतदान को लोकतंत्र का एक अनिवार्य अंग बताते हुए सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वेच्छा और निष्पक्षता से मतदान करें। गंगवार ने कहा कि नागरिकों को ऐसे जनप्रतिनिधियों का चुनाव करना चाहिए जो क्षेत्र एवं प्रदेश के विकास के प्रति समर्पित हों।

    मंत्रियों की भागीदारी और अपील

    झारखंड की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने रांची नगर निगम के चुनाव में मतदान किया। उन्होंने आम जनता से चुनाव में सक्रिय भागीदारी की अपील की। तिर्की ने कहा कि यह लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और लोगों को ऐसे प्रतिनिधियों का चुनाव करना चाहिए जो शिक्षा, अनुभव और विकास की दृष्टि रखते हों।

    बिगड़ी व्यवस्था और हंगामे की घटनाएं

    धनबाद नगर निगम के कुछ मतदान केंद्रों पर मतदाता हंगामा करते देखे गए। एक मतदाता ने मतदान पर्ची में छपी जानकारी में गड़बड़ी पाए जाने पर हंगामा किया, जिससे मतदान प्रक्रिया यथाशीघ्र रोक दी गई। इस प्रकार की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रीजाइडिंग ऑफिसर ने जांच के निर्देश दिए हैं।

    पुलिस की सक्रियता

    विभिन्न स्थानों पर चुनावी प्रक्रिया में पुलिस की उपस्थिति बढ़ाई गई है। गुमला जिले के मतदान केंद्र पर भी पुलिस ने हस्तक्षेप किया, जिससे छोटे-मोटे हंगामे को नियंत्रित किया जा सका। अधिकांश स्थानों पर शांतिपूर्ण मतदान की प्रक्रिया जारी है।

    बोगस मतदान के आरोप

    बोकारो के भोजपुर कॉलोनी में बोगस वोटिंग के आरोपों ने प्रशासन की चिंताएँ बढ़ा दी हैं। यहां तीन महिलाओं को संदिग्ध स्थिति में हिरासत में लिया गया है। प्रशासन ने कहा है कि निष्पक्ष चुनाव कराना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी गड़बड़ी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    स्थान विशेष में मतदान का बहिष्कार

    कोडरमा नगर पंचायत के दो वार्डों में मतदान का बहिष्कार किया गया था। इन वार्डों में मतदान की गति अत्यंत सुस्त रही, जहाँ वार्ड 11 में केवल सात वोट पड़े और वार्ड 5 में कोई मतदान नहीं हुआ। यहां केवल अध्यक्ष पद के लिए ही मतदान हो रहा है, कारणवश मतदाताओं में कोई उत्साह नहीं है।

  • असम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बीजेपी में की शामिलगी

    असम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने बीजेपी में की शामिलगी

    असम में कांग्रेस को झटका: पूर्व अध्यक्ष ने बीजेपी में किया शामिल

    गुवाहाटी। असम में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने भाजपा में शामिल होने का निर्णय लिया है। उन्हें भाजपा में शामिल करने की प्रक्रिया का आयोजन राज्य के भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया और सांसद बैजयंत पांडा की उपस्थिति में किया गया।

    भूपेन बोरा का बीजेपी में शामिल होना

    भूपेन बोरा ने अपनी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भाजपा के साथ की है। इस कदम ने कांग्रेस पार्टी के लिए चुनौतियों को बढ़ा दिया है, खासकर चुनावी माहौल में, जहां पार्टी को अपनी स्थिति बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। उनकी पार्टी में वापसी की संभावना अब और भी कम हो गई है।

    राजनीतिक प्रभाव

    भूपेन बोरा का बीजेपी में शामिल होना असम की राजनीति में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने की संभावना रखता है। यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए एक सजग संकेत हो सकता है, जिससे उनके अन्य नेता भी भाजपा की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसे में, पार्टी को अपनी और अधिक रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

  • रिटायरड सेना अधिकारियों के पुस्तक लेखन पर कोई रोक नहीं

    रिटायरड सेना अधिकारियों के पुस्तक लेखन पर कोई रोक नहीं

    रक्षा मंत्री ने सेना सेवानिवृत्त अधिकारियों के लेखन पर स्थिति स्पष्ट की

    नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की प्रस्तावित पुस्तक को लेकर उठे विवाद के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्टता प्रदान करते हुए कहा है कि सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के द्वारा पुस्तक लिखने या संस्मरण जारी करने पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने उन अटकलों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि रिटायरमेंट के बाद 20 साल तक लेखन पर ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ का विचार चल रहा है।

    रक्षा मंत्री का वक्तव्य

    राजनाथ सिंह ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव सरकार या कैबिनेट के समक्ष विचारार्थ नहीं आया है। उनके अनुसार, पूर्व सैन्य अधिकारी निर्धारित नियमों और संवेदनशील जानकारी से संबंधित प्रावधानों का पालन करते हुए अपने अनुभव साझा करने के लिए स्वतंत्र हैं।

    किताब को लेकर उठे विवाद का कारण

    यह बहस तब शुरू हुई जब जनरल नरवणे की अप्रकाशित पुस्तक “Four Stars of Destiny” के कुछ अंशों के बारे में राजनीतिक चर्चाएँ बढ़ गईं। जानकारी के अनुसार, पुस्तक में लद्दाख में भारत-चीन के बीच हुए सैन्य टकराव जैसे महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख है, जिसके चलते इस पर सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं आईं।

    संसद में राजनीतिक बयानबाजी और प्रतिक्रियाएं

    यह मामला संसद तक भी पहुंच गया, जहाँ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए जबकि सत्तापक्ष के सांसदों ने सरकार का समर्थन किया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस ने इसे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया।

    राजनाथ सिंह ने अफवाहों को नकारा

    रक्षा मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ जैसा कोई नियम लागू करने की योजना नहीं है और न ही इस संबंध में कोई औपचारिक प्रस्ताव आया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सैन्य परंपराओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन पहले से ही स्थापित प्रक्रियाओं के तहत बनाए रखा जाता है।

    अगले कदम और रक्षा सहयोग

    रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार आने वाले महीनों में रक्षा सहयोग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों को आगे बढ़ाने के प्रयास कर रही है और संबंधित प्रक्रियाएं जारी हैं। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि रिटायर सैन्य अधिकारियों के लेखन पर कोई नई पाबंदी नहीं लगाई जा रही है। वे मौजूदा सुरक्षा दिशानिर्देशों के अंतर्गत अपनी जानकारियाँ साझा कर सकते हैं।

  • धनबाद के बारनी घाट में अवैध कोयला खनन पर सरयू राय ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

    धनबाद के बारनी घाट में अवैध कोयला खनन पर सरयू राय ने विधानसभा में उठाया मुद्दा

    धनबाद में अवैध कोयला उत्खनन पर विधानसभा में चर्चा

    रांची: धनबाद में कोयले के अवैध उत्खनन के मामले को लेकर जेडीयू विधायक सरयू राय ने शनिवार को विधानसभा में प्रश्न उठाया। उन्होंने मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू को अवैध खनन की तस्वीरें प्रस्तुत कीं, जब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी सदन में उपस्थित थे।

    अवैध खनन का गंभीर मामला

    सरयू राय ने बताया कि धनबाद-बोकारो की सीमा पर दामोदर नदी में अवैध खनन चल रहा है, जिसके कारण नदी की धारा बदल गई है। इससे कई किलोमीटर तक नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि जेसीबी और अन्य भारी मशीनों का उपयोग कर इस खनन को अंजाम दिया जा रहा है। यथास्थिति के अनुसार, ग्रामीणों को पेयजल परियोजना से पानी मिलना बंद हो गया है, जिससे स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने चार हालिया तस्वीरें मंत्री को दी हैं, जो अवैध खनन की स्थिति को स्पष्ट करती हैं।

    सरकारी लापरवाही पर उठाए प्रश्न

    सरयू राय ने जोर देकर कहा कि जब इस विषय पर प्रश्न उठाया गया, तो विभाग को चाहिए था कि निरीक्षण करते। उन्होंने अधिकारियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें क्यों नहीं भौतिक रूप से निरीक्षण करने के लिए भेजा गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद उपायुक्त और सीनियर एसपी को इस अवैध खनन की जानकारी दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस आलोक में, उन्होंने यह प्रश्न उठाया कि क्या प्रशासन और खनन अधिकारी इसमें संलिप्त हैं।

    मंत्री ने जांच का आश्वासन दिया

    मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने इस मामले का उत्तर देते हुए कहा कि उन्होंने ध्यानाकर्षण पर दिए गए बयान को सुना है। यदि सरयू राय संतुष्ट नहीं हैं, तो वे विशेष जानकारी के आधार पर विभाग से रिपोर्ट मांगने का प्रयास करेंगे। सरयू राय ने मंत्री के जवाब को चुनौती दी, यह कहते हुए कि अवैध खनन अत्यंत स्पष्ट है और नदी की धारा का बदलना चिंताजनक है।

    मुख्यमंत्री ने दी कार्रवाई का निर्देश

    विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने मंत्री को जांच की अनुमति दी। इस पर सरयू राय ने फिर से कहा कि उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को सूचित किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी दौरान, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गंभीरता से मामले को समझा और सरयू राय द्वारा भेजी गई तस्वीरों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

  • कुमार विश्वास ने युवा कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर जताई नाराजगी एआई शिखर सम्मेलन में

    कुमार विश्वास ने युवा कांग्रेस के शर्टलेस प्रदर्शन पर जताई नाराजगी एआई शिखर सम्मेलन में

    नई दिल्ली में एआई सम्मेलन के दौरान विरोध प्रदर्शन

    नई दिल्ली। राजधानी में आयोजित एआई (AI Summit) से जुड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने政治िक चर्चा को जन्म दिया है। कवि कुमार विश्वास ने इस कृत्य को विपक्ष की “मुद्दाविहीन राजनीति” करार दिया और कांग्रेस पर सीधा हमला बोला।

    प्रदर्शन का विवरण

    यह विरोध प्रदर्शन राष्‍ट्रीय यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा मुख्य रूप से किया गया, जो भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। यूथ कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि उनका विरोध सम्मेलन के खिलाफ नहीं था, बल्कि अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते और किसानों-युवाओं से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास था। संगठन के अध्यक्ष उदय भानू ने स्पष्ट किया कि जब रोजगार और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चिंता है, तब विरोध दर्ज कराना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है।

    कुमार विश्वास की प्रतिक्रिया

    कुमार विश्वास ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में इस प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की, यह कहते हुए कि जब देश वैश्विक स्तर पर अपनी तकनीकी उपलब्धियों को प्रदर्शित कर रहा हो, तो इस तरह का प्रदर्शन “देश की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला” है। उन्होंने कहा कि यह घटना वास्तविक मुद्दों की कमी को दर्शाती है।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    भाजपा के नेताओं ने भी इस प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस पर हमला बोलते हुए इसे देश की उपलब्धियों के खिलाफ बताया। पार्टी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे एक नकारात्मक गतिविधि कहा, जबकि दूसरे प्रवक्ता प्रदीप भानारी ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर अनुचित व्यवहार के रूप में वर्णित किया।

    राजनीतिक विवाद का रूप

    दिल्ली में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक संदर्भ में एक बड़ा विवाद उत्पन्न किया है। विपक्ष इसे नीतिगत असहमति के प्रतीक के रूप में देख रहा है, जबकि सत्ता पक्ष और अन्य आलोचक इसे राष्ट्रीय छवि से जोड़कर देख रहे हैं।

  • बीजेपी विधायक ने अपनी सरकार पर सवाल उठाए, मंत्रियों के उत्तर गलत हो रहे हैं

    बीजेपी विधायक ने अपनी सरकार पर सवाल उठाए, मंत्रियों के उत्तर गलत हो रहे हैं

    बीजेपी विधायकों के बीच विवाद: किसानों की भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल

    भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपनी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने ग्वालियर जिले के राजमाता विजयराधे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं के मुद्दे को उठाया और तत्काल जांच की मांग करते हुए भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करने का अनुरोध किया।

    कृषि मंत्री का स्पष्टीकरण

    कुशवाहा के सवालों पर कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि विज्ञापन जारी कर साक्षात्कार किए गए हैं और बैठकों में भी किसी प्रकार की आपत्ति नहीं उठाई गई। सभी कागजात उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किए गए हैं और मामला विचाराधीन है।

    भर्तियों का समय

    कुशवाहा ने यह भी सवाल उठाया कि चार साल बाद भर्ती क्यों की जा रही है और शासन से अनुमति क्यों नहीं ली गई। उन्होंने कहा, “मैं इस समिति का सदस्य हूं, हमें इस मामले में क्यों फंसाया जा रहा है? यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है?” उन्होंने स्पष्ट किया कि तीन विधानसभा के सदस्यों ने इस पर आपत्ति की थी।

    भर्ती प्रक्रिया का विरोध

    कृषि मंत्री कंसाना ने बताया कि भर्तियाँ नियमों के अनुसार हुई हैं। परंतु कुशवाहा ने इन दावों पर किरकिरी की और कहा कि 2022 में भर्ती होनी थी, जबकि अब 2026 में यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है। उन्होंने कृषि मंत्री पर सही उत्तर न देने का आरोप लगाया और कहा कि लीपापोती की जा रही है।

    महात्मा गांधी पर टिप्पणी और हंगामा

    वहीं, अमरपाटन से कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने महात्मा गांधी पर एक बार फिर से हमले का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी ने राम को विवाद में घुसेड़ दिया है। इस पर बीजेपी के विधायक सीताशरण शर्मा ने आपत्ति जताई और कहा कि बात करते समय तमीज बनाए रखें और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग न करें। इस विषय पर हंगामा हुआ और विलोपित करने की मांग की गई।

  • महुआ मोइत्रा ने ‘हेनरी’ की हिरासत के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की

    महुआ मोइत्रा ने ‘हेनरी’ की हिरासत के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की

    महुआ मोइत्रा और जय अनंत देहाद्रई का विवाद अदालत तक पहुंचा

    कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व साथी जय अनंत देहाद्रई के बीच चल रहा विवाद अब उनके पालतू कुत्ते ‘हेनरी’ की कस्टडी को लेकर उच्च न्यायालय में पहुंच चुका है। मोइत्रा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने साकेत कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें कुत्ते की अंतरिम कस्टडी देने से मना किया गया था।

    दिल्ली उच्च न्यायालय ने जारी किया नोटिस

    इस मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की पीठ में हुई। न्यायालय ने देहाद्रई को नोटिस जारी किया है और उनके जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है। आगामी सुनवाई 29 अप्रैल को तय की गई है। सुनवाई के दौरान देहाद्रई स्वयं उपस्थित हुए और उन्होंने याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने की मांग की।

    कानूनी लड़ाई की पृष्ठभूमि

    यह विवाद किसी व्यक्तिगत मुद्दे से शुरू होकर कानूनी आधार पर पहुंच गया है। हेनरी की कस्टडी को लेकर यह झगड़ा दोनों के बीच के राजनीतिक और कानूनी टकराव का एक हिस्सा है। उनके संबंध समाप्त होने के बाद से कई विवादास्पद मुद्दे सामने आए हैं।

    कैश-फॉर-क्वेरी के आरोपों का प्रभाव

    जय अनंत देहाद्रई ने पहले आरोप लगाया था कि मोइत्रा ने संसद में सवाल पूछने के लिए कारोबारी दर्शन हिरानंदानी से लाभ प्राप्त किया। इसमें यह भी दावा किया गया कि सांसद का लोकसभा लॉगिन एक्सेस साझा किया गया था, ताकि आवश्यक प्रश्नों को पोस्ट किया जा सके।

    इन आरोपों के आधार पर लोकसभा की आचार समिति ने जांच की और सिफारिश के बाद 8 दिसंबर 2023 को महुआ मोइत्रा को सदन से निष्कासित कर दिया गया था।

    मोइत्रा ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताया

    महुआ मोइत्रा ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए बताया कि यह उनके खिलाफ राजनैतिक प्रतिशोध का परिणाम है। उन्होंने कारोबारी से अपनी मित्रता स्वीकार की, लेकिन किसी भी प्रकार के लेन-देन में शामिल होने से स्पष्ट इनकार किया।

    मानहानि मामले में चल रही सुनवाई

    महुआ मोइत्रा ने देहाद्रई और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। मार्च 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि आरोपों की जांच अभी जारी है और मामला विचाराधीन है।

  • फुटबॉल खेलते समय गिरे सांसद रिकी एजे सिंकॉन का निधन, राजनीतिक नेताओं में शोक का माहौल

    फुटबॉल खेलते समय गिरे सांसद रिकी एजे सिंकॉन का निधन, राजनीतिक नेताओं में शोक का माहौल

    मेघालय के सांसद रिकी एजे सिंकॉन का आकस्मिक निधन

    डेस्कः मेघालय की राजधानी शिलांग से एक दुखद समाचार सामने आया है। वॉइस ऑफ द पीपल पार्टी (VPP) के सांसद रिकी एजे सिंकॉन का गुरुवार शाम को अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण निधन हो गया। जानकारी के अनुसार, वे दोस्तों के साथ फुटबॉल खेल रहे थे, तभी अचानक मैदान में गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों की सभी कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। प्रारंभ में उन्हें मावियोंग कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में ले जाया गया, जहां किसी डॉक्टर की अनुपस्थिति के कारण उन्हें जियाव स्थित डॉ. एच. गॉर्डन रॉबर्ट्स अस्पताल रेफर किया गया।

    मैच के दौरान सांसद का अचानक गिरना

    सूत्रों के अनुसार, डॉ. रिकी एजे सिंकॉन गुरुवार शाम शिलांग के मावलाई मावियोंग क्षेत्र में खेल के दौरान अचानक गिर पड़े, जिससे घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। उनके मित्रों ने बिना देर किए उन्हें मावियोंग कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में पहुँचाया, लेकिन डॉक्टर की गैर-मौजूदगी के कारण उनकी स्थिति गंभीर बनी रही।

    अस्पताल में इलाज के दौरान निधन

    उन्हें बाद में डॉ. एच. गॉर्डन रॉबर्ट्स अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, शाम के लगभग 8:42 बजे अस्पताल में भर्ती होने के कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया। इस घटना की खबर फैलते ही मेघालय की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई।

    राजनीतिक नेताओं की शोक संवेदनाएँ

    घटना को लेकर उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन टाइनसॉन्ग, वीपीपी अध्यक्ष अर्डेंट मिलर बसैयावमॉइट सहित अनेक विधायक और राजनीतिक नेता अस्पताल पहुंचे। नेताओं ने इस आकस्मिक निधन को राज्य की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति बताया।

  • योगी के साथ बैठक के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने डिप्टी CM से की मुलाकात

    योगी के साथ बैठक के बाद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने डिप्टी CM से की मुलाकात

    लखनऊ में संघ प्रमुख की महत्वपूर्ण बैठक

    लखनऊ. हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद, भागवत ने प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्रियों, केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक से शिष्टाचार भेंट की। हालांकि, इस मुलाकात को मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक फेरबदल की संभावनाओं के संदर्भ में राजनीतिक हलचल के रूप में देखा जा रहा है। भागवत ने दोनों उपमुख्यमंत्रियों से लगभग 10-10 मिनट तक चर्चा की।

    मुख्यमंत्री और संघ प्रमुख के बीच बातचीत

    सीएम योगी की मोहन भागवत से बैठक बुधवार देर रात को लखनऊ के निराला नगर स्थित संघ कार्यालय परिसर में हुई, जहां दोनों के बीच करीबी 35 मिनट तक बातचीत हुई। संघ प्रमुख का यह लखनऊ प्रवास दो दिनों का था, और यह मुलाकात उनके प्रवास के अंतिम दिन की रही। इस बैठक को एकांत में आयोजित किया गया, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ गई है। योगी और भागवत की लगातार बैठकें राजनीतिक समीक्षकों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

    2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर संघ का ध्यान

    संघ की भूमिका पर नजरें
    सूत्रों के अनुसार, हाल के समय में मोहन भागवत का उत्तर प्रदेश पर ध्यान बढ़ता दिख रहा है। विभिन्न कार्यक्रमों के तहत उनकी उम्मीदवारी राज्य में सक्रियता को दर्शाती है। इससे स्पष्ट होता है कि संघ परिवार 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की योजना बना रहा है। योगी आदित्यनाथ के साथ भागवत की बैठकों से यह भी स्पष्ट हो रहा है कि भाजपा और संघ की रणनीति आगामी चुनाव को लेकर काफी गंभीर है।

  • विनय उरांव बने झारखंड एनएसयूआई के पहले आदिवासी अध्यक्ष प्रत्याशी

    विनय उरांव बने झारखंड एनएसयूआई के पहले आदिवासी अध्यक्ष प्रत्याशी

    एनएसयूआई में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया शुरू

    रांची: एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरूण चौधरी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, जिसके चलते नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए चयन प्रक्रिया आरंभ हो गई है। पूरे देश से 62 उम्मीदवारों ने इस पद के लिए आवेदन प्रस्तुत किए थे। स्क्रूटनी प्रक्रिया के बाद इन उम्मीदवारों में से 15 का चयन किया गया है। चयनित उम्मीदवारों में झारखंड एनएसयूआई के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष विनय उरांव भी शामिल हैं।

    विनय उरांव: पहले आदिवासी प्रत्याशी

    विनय उरांव देश के पहले और एकमात्र आदिवासी प्रत्याशी हैं जो इस चयन प्रक्रिया में शामिल हुए हैं। सभी 15 प्रत्याशियों का साक्षात्कार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने नई दिल्ली में लिया। साक्षात्कार के दौरान राहुल गांधी ने विनय उरांव का व्यक्तिगत साक्षात्कार भी किया, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

    राज्यसभा चुनाव की तैयारी

    इस बीच, राज्यसभा की 37 सीटों पर चुनाव 16 मार्च को होने जा रहे हैं। बिहार और पश्चिम बंगाल में यह मुकाबला बेहद रोमांचक होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक हलचलें तेज हो गई हैं। एनएसयूआई के नए अध्यक्ष का चयन इस महत्वपूर्ण समय पर होगा, जो संगठन के भविष्य को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

  • अशोक चौधरी की डिग्री पर सदन में विवाद, मंत्री की चुनौती

    अशोक चौधरी की डिग्री पर सदन में विवाद, मंत्री की चुनौती

    जेडीयू और आरजेडी के बीच विधान परिषद में तकरार

    पटना: बुधवार को बिहार विधान परिषद में जेडीयू के मंत्री अशोक चौधरी और आरजेडी के विधानपार्षद सुनील सिंह के बीच एक बार फिर से तीखी बहस देखने को मिली। सुनील सिंह ने अशोक चौधरी की प्रोफेसर डिग्री को फर्जी करार दिया, जिस पर हंगामा मच गया और सदन का माहौल गर्म हो गया।

    डिग्री को लेकर सुनील सिंह का आरोप

    सुनील सिंह ने सीधे तौर पर अशोक चौधरी पर आरोप लगाया कि उनकी डिग्री नकली है। इस बात को सुनकर अशोक चौधरी भड़क उठे और उन्होंने ऊंची आवाज में पूछाघ, “क्या आप मेरी डिग्री को नकली साबित कर सकते हैं? नहीं तो इस्तीफा दें।” इसके साथ ही सदन में शोर बढ़ गया, जहां सत्ता और विपक्ष के सदस्य आपस में बोलने लगे।

    विजय चौधरी का मध्यस्थता प्रयास

    सदन की स्थिति गरम होती देख मंत्री विजय चौधरी ने बीच-बचाव किया। उन्होंने कहा, “बिना किसी दस्तावेज के किसी पर आरोप लगाना उचित नहीं है। यह नियमों के खिलाफ है।” विजय चौधरी के इस प्रयास के बाद कुछ समय के लिए सदन में शांति लौट आई।

    रिश्वत का आरोप और नई हलचल

    हालांकि, मामला यहीं नहीं रुका। सुनील सिंह पुनः उठे और कहा कि एक अधिकारी ने रिश्वत मांगने का पत्र लिखा है। उन्होंने इस मामले से जुड़े दस्तावेज को सदन के पटल पर रखने की बात कही, जिससे फिर से हलचल बढ़ गई।

    अशोक चौधरी का जवाब

    इन आरोपों पर अशोक चौधरी ने सख्त प्रतिक्रिया दी और कहा कि सुनील सिंह का मकसद केवल उन्हें टारगेट करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सुनील सिंह की समझदारी बिगड़ चुकी है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष ने मेज थपथपाई।

    बिहार विधानसभा का गर्म माहौल

    इस बीच, बिहार विधानसभा के बजट सत्र के 12वें दिन भी स्थिति गर्म रही। जेडीयू विधायक विनय चौधरी ने राजद पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “जनता ने राजद का इलाज कर दिया है।” इसके साथ ही विनय चौधरी ने तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे सदन में डोलते-डोलते आए थे। उनका यह बयान विपक्ष ने कड़ा विरोध किया।

  • राहुल गांधी के प्रयासों के बावजूद, भूपेन बोरा नीतियों पर असहमत, बीजेपी में शामिल होने की अटकलें

    राहुल गांधी के प्रयासों के बावजूद, भूपेन बोरा नीतियों पर असहमत, बीजेपी में शामिल होने की अटकलें

    असम की राजनीति में नया मोड़: भूपेन बोरा का भाजपा में शामिल होने का संकेत

    गुवाहाटी। असम की राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने की संभावना बन रही है। भूपेन बोरा ने हाल ही में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अपने इस्तीफे की घोषणा की है, जिसके बाद उनकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएँ तेज हो गई हैं। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया है कि बोरा 22 फरवरी को भाजपा का हिस्सा बन सकते हैं, और उनके साथ कुछ अन्य कांग्रेस नेता भी भाजपा में शामिल हो सकते हैं।

    इस्तीफा और संभावित भाजपा में शामिल होना

    सोमवार को, बोरा ने कांग्रेस से अपने इस्तीफे की औपचारिक घोषणा की। हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने उन्हें अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। ऐसी खबरें हैं कि राहुल गांधी ने भी उनके स्थान पर रहने के लिए प्रयास किए, लेकिन भाजपा में शामिल होने की संभावनाओं ने राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है।

    मुख्यमंत्री का स्वागत और घर वापसी का दावा

    मुख्यमंत्री सरमा ने इस विषय पर बोलते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व ने बोरा की संभावित सदस्यता को स्वीकृति दे दी है और उनका स्वागत किया जाएगा। सरमा ने इसे “घर वापसी” करार दिया, यह बताते हुए कि भाजपा वंशवादी राजनीति के बजाय कार्यकर्ता आधारित राजनीति में विश्वास रखती है।

    समर्थकों से चर्चा और निर्णय की प्रक्रिया

    बोरा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह अपने अंतिम निर्णय से पहले अपने समर्थकों और लखीमपुर के निवासियों से विचार विमर्श करेंगे। उन्होंने कांग्रेस के कुछ नेताओं पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी करते हुए कहा कि वे पार्टी में रह सकते हैं, लेकिन उसकी विचारधारा से सहमत नहीं हैं।

    टिकट विवाद और पुरानी रंजिशें

    बोरा ने यह भी आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा उपचुनाव के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने उनका नाम प्रस्तावित किया था, लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया। यह सीट खाली होने पर रकीबुल हुसैन के पुत्र को उम्मीदवार बनाया गया, जो भाजपा के उम्मीदवार से हार गए।

    AIUDF के साथ गठबंधन पर असहमति

    बोरा ने 2021 विधानसभा चुनाव के लिए ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के साथ कांग्रेस के गठबंधन का विरोध किया था। उन्होंने बार-बार पार्टी नेतृत्व को अपनी चिंताओं से अवगत कराया, लेकिन बाद में गठबंधन टूट गया। लोकसभा चुनाव में रकीबुल हुसैन ने AIUDF के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल को बड़े अंतर से हराया।

    भूपेन बोरा का अगला कदम असम की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है। यदि वह भाजपा में शामिल होते हैं, तो यह कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा और असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत होगा। सभी की निगाहें अब उनके अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।

  • पार्टी के नेता सत्तान ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में किया प्रवेश

    पार्टी के नेता सत्तान ने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में किया प्रवेश

    कांग्रेस में शामिल हुईं सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनु प्रिया

    भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा के प्रसिद्ध नेता और कवि सत्यनारायण सत्तन की बेटी कनु प्रिया ने कांग्रेस पार्टी में सदस्यता ले ली है। इस अवसर पर मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अर्चना जायसवाल ने उनका स्वागत किया। कांग्रेस का दामन थामने के बाद उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से भी मुलाकात की।

    कांग्रेस का आधिकारिक घोषणा

    मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कनु प्रिया के पार्टी में शामिल होने की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, “प्रख्यात कवि एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता रहे सत्यनारायण सत्तन जी की पुत्री कनु प्रिया जी ने आज कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी जी ने खुशी व्यक्त करते हुए कनु प्रिया जी का कांग्रेस परिवार में स्वागत किया।”

    पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति के साथ की चर्चा

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ एक ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। इस दौरान पीएम मोदी ने मैक्रों का स्वागत किया और फ्रांस को यूरोप का प्रमुख गेटवे बताया। उनकी यह मुलाकात दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, न नेता न सहयोगी करते हैं विश्वास

    बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा, न नेता न सहयोगी करते हैं विश्वास

    कांग्रेस पार्टी में उठापटक, बीजेपी ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के लिए सोमवार का दिन कई समस्याओं से भरा रहा। प्रमुख नेता मणिशंकर अय्यर ने पार्टी हाई कमान के खिलाफ आवाज उठाई, जबकि असम के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। बोरा ने अपने इस्तीफे में पार्टी नेतृत्व पर उन्हें नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। इसी बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है, उन्हें एक ‘असफल वंशज’ करार देते हुए यह कहा गया कि न तो पार्टी के नेता और न ही सहयोगी उन पर विश्वास करते हैं।

    भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

    कांग्रेस पार्टी में चल रही उथल-पुथल पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस चाहती है कि राहुल को हटाकर ममता को लाया जाए। असम के कांग्रेस नेता भूपेन बोरा का इस्तीफा भी इस स्थिति को दर्शाता है। मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि कांग्रेस केरल में हार रही है।” उनका यह बयान यह सिद्ध करता है कि न केवल गांधी परिवार के नेता बल्कि पार्टी के अन्य सदस्य भी राहुल गांधी को गंभीरता से नहीं लेते हैं।

    आवाजें उठ रही हैं कांग्रेस के भीतर

    भूपेन बोरा ने अपने इस्तीफे को वापस ले लिया, वहीं कांग्रेस पार्टी ने मणिशंकर अय्यर के बयान को लेकर यह स्पष्ट किया कि वह अब पार्टी में नहीं हैं और उनके बयान को पार्टी से नहीं जोड़ा जा सकता। अय्यर ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने पद पर बने रहेंगे। कांग्रेस की तरफ से प्रतिक्रिया में अय्यर का नाम लेते हुए कहा गया कि केवल मल्लिकार्जुन खरगे उन्हें पार्टी से निकाल सकते हैं।

    भाजपा का आक्रामक रुख

    कांग्रेस पार्टी की इस स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा ने हमले का कोई भी अवसर नहीं छोड़ा। प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। मणिशंकर अय्यर ने उन्हें सार्वजनिक रूप से नकारा।” उन्होंने कहा कि अय्यर और अन्य नेता खुलकर राहुल गांधी के खिलाफ बोल रहे हैं, जो पार्टी के लिए चिंता का विषय है।

    कांग्रेस के पूर्व सांसद मणिशंकर अय्यर के बयान ने पार्टी में हलचल मचा दी, जिसमें उन्होंने पवन खेड़ा और शशि थरूर जैसे नेताओं पर निशाना साधा। इस संदर्भ में कांग्रेस पार्टी की मजबूत प्रतिक्रिया आई, जिसमें अय्यर की पार्टी से दूरी का उल्लेख किया गया। अय्यर ने कहा था कि राजनीति में उनकी स्थिति स्पष्ट है, वह नेहरू और राजीव से जुड़े हैं, लेकिन राहुल गांधी से नहीं।

  • ढुलू महतो ने संजीव कुमार का किया समर्थन, मेयर पद पर अपील की

    ढुलू महतो ने संजीव कुमार का किया समर्थन, मेयर पद पर अपील की

    धनबाद में यूनाइटेड कोल वर्कर्स की सभा

    धनबाद: सोमवार को डिगवाडीह गणेश मैदान में यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन एटक बीसीसीएल जोन के कार्यकर्ताओं की एक सभा आयोजित की गई। पूर्व विधायक और यूनियन अध्यक्ष शत्रुघ्न महतो तथा सचिव ढुलू महतो ने नगर निगम चुनाव में मेयर प्रत्याशी संजीव कुमार को अपना समर्थन देने की घोषणा की।

    मुख्यमंत्री की यात्रा

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पैतृक गांव नेमरा में संथाली समाज के एक कार्यक्रम में भाग लिया और परंपरागत तरीके से नाइके बाबा का चयन किया।

    सांसद का बयान

    सभा में सांसद ढुलू महतो ने सिंह मेंशन पर आरोप लगाते हुए कहा कि इस परिवार ने धनबाद में हत्या की राजनीति करते हुए लोगों को डराने-धमकाने का काम किया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस घराने ने मजदूरों और किसानों के अधिकारों की आवाज उठाने वालों की भी हत्या करवाई है।

    अपराधों का जिक्र

    महतो ने आगे कहा कि जिले में हुए कई हत्या, लूट और कोलियरियों में चोरी की घटनाएं इस चर्चित परिवार से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने लोगों को माफिया प्रत्याशी से सावधान रहने का सुझाव दिया और ईमानदार प्रत्याशी संजीव कुमार को जीताने की अपील की।

    हजारीबाग में हत्या की घटना

    हजारीबाग के बड़कागांव में एक बुजुर्ग दंपत्ति की हत्या के मामले में पुलिस जांच कर रही है।

    युवाओं का विकास का संकल्प

    यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष विधायक शत्रुघ्न महतो ने कहा कि नगर निगम के मेयर चुनाव में एक पक्ष झरिया को उजाड़ने का प्रयास कर रहा है जबकि दूसरी ओर विकास की बात कर रहे संजीव कुमार हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विकास के पक्षधर संजीव कुमार को भारी मतों से जीत दिलाएं।

    संजिव कुमार का जनसंपर्क

    भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी संजीव कुमार ने कहा कि आधी झरिया उजड़ चुकी है और यह सब किसके कारण हुआ, इस पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से नए झरिया के निर्माण के लिए समर्थन मांगा। सभा का संचालन एटक नेता सतेंद्र गुप्ता ने किया और धन्यवाद ज्ञापन नंदू यादव ने दिया। अन्य उपस्थित व्यक्तियों में विकास मुखर्जी, छोटू राम, मनोज मुखिया, अनुज सिन्हा, मुन्ना वर्मा और सुजीत मंडल शामिल थे।

  • पुणे में टिपू सुलतान टिप्पणी पर BJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पथराव

    पुणे में टिपू सुलतान टिप्पणी पर BJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच पथराव

    पुणे में BJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच संघर्ष

    पुणे। महाराष्ट्र के पुणे में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच का तनाव हिंसक झड़प में बदल गया। यह घटनाक्रम प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के बयान के खिलाफ शुरू हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान हुआ। दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए, जिससे पथराव की स्थिति उत्पन्न हुई। इस संघर्ष में कई लोग घायल हुए और वाहनों को भी नुकसान पहुंचा।

    कांग्रेस भवन के बाहर टकराव

    पुलिस के मुताबिक, BJP के स्थानीय नेताओं के नेतृत्व में कार्यकर्ता कांग्रेस भवन के बाहर सपकाल के बयान के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी बीच, कांग्रेस के कार्यकर्ता भी अपने प्रदेश अध्यक्ष के समर्थन में वहां पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को सामान्य रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया, लेकिन दोपहर करीब 1 बजे माहौल बिगड़ गया, जिसके परिणाम स्वरूप पथराव शुरू हो गया।

    पत्रकार और पुलिसकर्मी भी हुए घायल

    पुणे सिटी पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर रंजन कुमार शर्मा के अनुसार, इस हिंसक झड़प में दो पत्रकार, एक पार्टी कार्यकर्ता और एक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है और घटना की पूरी जांच की जा रही है।

    बयान से उत्पन्न विवाद

    यह पूरा विवाद उस शिकायत के बाद भड़का, जो सपकाल के खिलाफ दर्ज की गई थी। आरोप है कि उन्होंने टीपू सुल्तान की तुलना मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज से की थी। यह टिप्पणी मालेगांव में डिप्टी मेयर शान-ए-हिंद निहाल अहमद के कार्यालय में लगी टीपू सुल्तान की तस्वीर को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में की गई थी।

    बीजेपी ने की शिकायत दर्ज

    BJP पुणे शहर अध्यक्ष धीरज घाटे ने कहा कि इस प्रकार की तुलना मराठा राजा का सम्मान करने वाले लोगों की भावनाओं को आहत करती है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    सपकाल का स्पष्टीकरण

    विवाद के बढ़ने पर हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज देश का गौरव हैं और टीपू सुल्तान ने विदेशी शक्तियों के खिलाफ संघर्ष किया।

    सपकाल ने आरोप लगाया कि BJP इस मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है। वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन घटना के चलते पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है और प्रशासन ने नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

  • उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले BSP को बड़ा झटका, प्रमुख नेता SP में शामिल हुए

    उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले BSP को बड़ा झटका, प्रमुख नेता SP में शामिल हुए

    यूपी विधानसभा चुनाव 2027: सपा में शामिल हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, जिसे लेकर राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पूर्व महत्वपूर्ण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया है। सपा के प्रमुख अखिलेश यादव ने सिद्दीकी को औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल किया। इस अवसर पर तीन बार के विधायक अनीस अहमद खान सहित कई पूर्व विधायक भी सपा में शामिल हुए हैं।

    राजकुमार पाल का सपा में शामिल होना

    इसके साथ ही, अपना दल (एस) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार पाल ने भी सपा में शामिल होकर राजनीतिक समीकरणों में बदलाव किया है। बताया जा रहा है कि सिद्दीकी का सपा में आना प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश है और आगामी चुनावों में यह सपा के लिए एक रणनीतिक लाभ साबित हो सकता है।

    नसीमुद्दीन सिद्दीकी का बयान

    सपा में शामिल होते हुए नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि आज 15,718 लोग बसपा से इस्तीफा देकर सपा में आए हैं। अखिलेश यादव ने इस दौरान कहा कि जब हम एक साथ हैं, तो बहुजन समाज का संबंध सपा से और भी मजबूत हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पीडीए (प्रगतिशील समाजवादी पार्टी) का परिवार अब और अधिक सशक्त हो रहा है।

    अखिलेश यादव का यूपी सरकार पर तंज

    प्रयागराज के हालिया मुद्दे पर बात करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि कुछ लोग पूजनीय शंकराचार्य का अपमान कर रहे हैं और इस संदर्भ में पीडीए उनके साथ है। उन्होंने बिना नाम लिए यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग दूसरों से सर्टिफिकेट मांग रहे हैं, तो उनका अपना सर्टिफिकेट क्या है? उन्होंने यह कहते हुए तंज कसा कि लखनऊ वाले दिल्ली की हवा को खराब बता रहे हैं, जबकि असल में दोनों की स्थिति खराब है।

  • टिपू सुलतान पर राजनीति तेज हुई: ओवैसी की एंट्री विवाद को बढ़ाती है

    टिपू सुलतान पर राजनीति तेज हुई: ओवैसी की एंट्री विवाद को बढ़ाती है

    टीपू सुल्तान पर छिड़ा विवाद: महाराष्ट्र की राजनीति में गरमी

    मुंबई। 18वीं सदी के मैसूर शासक टीपू सुल्तान के संदर्भ में महाराष्ट्र की राजनीति में ताजा विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस बहस में इतिहास, धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पहलुओं पर नेताओं के बीच तीखे बहस-मुबाहिसे देखने को मिल रहे हैं।

    विवाद की शुरुआत

    यह विवाद तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज से की। इस टिप्पणी पर सत्तारूढ़ दल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे ऐतिहासिक दृष्टि से गलत बताया। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ऐसी तुलना अस्वीकार्य है और इस पर स्पष्टता जरूरी है।

    ओवैसी का बचाव और ऐतिहासिक संदर्भ

    इस बीच, असदुद्दीन ओवैसी ने टीपू सुल्तान का बचाव करते हुए कहा कि वे अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाले शासकों में महत्वपूर्ण थे। उन्होंने कहा कि उन्हें हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में भी स्मरण किया जाना चाहिए। ओवैसी ने यह भी बताया कि कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों में टीपू की अंगूठी पर “राम” नाम का उल्लेख मिलता है, जो सांस्कृतिक समावेश का प्रतीक है।

    गांधी और कलाम का संदर्भ

    ओवैसी ने पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने अपनी आत्मकथा “विंग्स ऑफ फायर” में टीपू सुल्तान के प्रयोगों की सराहना की है। इसके अलावा, उन्होंने महात्मा गांधी के लेखों का भी जिक्र किया, जिसमें टीपू को धार्मिक सहिष्णुता का समर्थक कहा गया है।

    AIMIM बनाम भाजपा-कांग्रेस की बयानबाजी

    ओवैसी की पार्टी AIMIM ने आरोप लगाया कि इतिहास को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दलों का मानना है कि टीपू सुल्तान के मूल्यांकन को संतुलित ऐतिहासिक संदर्भ में किया जाना चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, जिससे यह विवाद और अधिक राजनीतिक रंग ले रहा है।

    इतिहास बनाम राजनीति

    इतिहासकारों का कहना है कि टीपू सुल्तान एक जटिल ऐतिहासिक व्यक्तित्व थे। वे एक ओर ब्रिटिश शक्ति के खिलाफ लड़े, जबकि दूसरी ओर उनके शासन के विभिन्न पहलुओं पर भिन्न दृष्टिकोण मौजूद हैं। इस बहुआयामी विरासत के चलते उनका नाम समय-समय पर राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन जाता है।

  • चाईबासा में नगर परिषद अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रमेश खीरवाल पर कार्रवाई

    चाईबासा में नगर परिषद अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रमेश खीरवाल पर कार्रवाई

    चाईबासा नगर परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशी पर आचार संहिता का उल्लंघन

    डेस्क: चाईबासा नगर परिषद चुनाव में भाजपा समर्थित अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रमेश खीरवाल उर्फ लड्डू पर आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। उन्हें ‘बिस्किट’ चुनाव चिह्न के तहत प्रचार करते समय मतदाताओं को बिस्किट बांटने का संदेह है। मजिस्ट्रेट ने इसे प्रारंभिक रूप से उल्लंघन माना और चुनाव आयोग को इसकी शिकायत भेजी। साथ ही, सदर थाना में प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई है।

    पूर्व विधायक और अन्य नेताओं को नोटिस

    इस मामले की जानकारी मिलते ही चुनाव ड्यूटी पर तैनात मजिस्ट्रेट ने इसे गभीरता से लिया। चुनाव आयोग को लिखित शिकायत भेजी गई, जिसमें बताया गया कि मतदान के दौरान मतदाताओं को किसी भी प्रकार का प्रलोभन देना गैरकानूनी है। इस संदर्भ में कुल 18 नेताओं, जिसमें पूर्व विधायक संजीव सिंह भी शामिल हैं, को नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, अभी तक प्रत्याशी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।