श्रेणी: Politics

  • पियूष गोयल ने कहा, अमेरिकी समझौ में किसानों का हित सुरक्षित है: राहुल गांधी

    पियूष गोयल ने कहा, अमेरिकी समझौ में किसानों का हित सुरक्षित है: राहुल गांधी

    केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल का राहुल गांधी पर पलटवार

    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हालिया आरोपों को पूरी तरह से झूठा करार देते हुए उनके दावों का खंडन किया है। गोयल ने कहा कि राहुल गांधी ने एक बार फिर से महज आरोप लगाने के लिए एक बनावटी कहानी तैयार की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते में किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा की गई है।

    गोपनीय आरोपों पर गोयल का स्पष्टीकरण

    गोयल ने कहा कि राहुल गांधी कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के इशारों पर चल रहे हैं, जो किसान नेता होने का दिखावा कर रहे हैं। इस मामले पर उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बातें पूरी तरह से निराधार हैं। गोयल ने कहा, “जब मैं कहता हूं कि किसानों के हितों की सुरक्षा की गई है, तो मैं इसे पूरी जिम्मेदारी के साथ सही ठहराता हूँ।”

    किसानों के लिए सुरक्षित समझौता

    उन्होंने आगे कहा कि यह समझौता न केवल किसानों, बल्कि मछुआरों, मेहनती युवाओं, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए भी लाभकारी होगा। गोयल ने राहुल गांधी को नाटकबाज करार देते हुए कहा कि वह झूठी और बेबुनियाद कहानियां फैला रहे हैं।

    राहुल गांधी के आरोप क्या थे?

    राहुल गांधी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने किसानों के प्रति धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच का यह समझौता किसानों की आजीविका के लिए गंभीर खतरा है।

    किसानों की चिंताओं पर राहुल का बयान

    राहुल गांधी ने कहा था कि यह अर्थव्यवस्था का एक सामान्य व्यापार समझौता नहीं है, बल्कि यह हमारे अन्नदाताओं की दैनिक जिंदगी पर सीधा हमला है। उन्होंने संसद में किसानों के संगठनों के प्रतिनिधियों से हुई बैठक का भी जिक्र किया, जिसमें इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की गई थी। राहुल ने कहा कि महंगाई, बढ़ती लागत और एमएसपी की अनिश्चितता से जूझ रहे किसान अब विदेशी फसलों के मुकाबले तैयार नहीं हैं।

  • महाराष्ट्र: मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर आरोप लगाए

    महाराष्ट्र: मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर आरोप लगाए

    महाराष्ट्र में पंचायत और नगर निकाय चुनाव के बाद तनाव

    मुम्बई। महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न पंचायत और नगर निकाय चुनाव के बाद ठाकरे परिवार की पार्टियों में फिर से तनाव सामने आ रहा है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों ने महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए हैं। हालांकि, उद्धव गुट और भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

    महाविकास आघाड़ी में पार्टी के बीच तनाव

    महाविकास आघाड़ी गठबंधन में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच संबंध तब से तनावपूर्ण हो गए हैं जब कांग्रेस चंद्रपुर नगर निगम में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, फिर भी शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों के समर्थन से भाजपा का उम्मीदवार महापौर चुना गया।

    मनसे पर साधा गया निशाना

    राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की मुंबई इकाई के अध्यक्ष संदीप देशपांडे ने उद्धव गुट को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि जब शिवसेना (उबाठा) भाजपा का समर्थन करती है तो उसे सही ठहराया जाता है, जबकि मनसे को इसी प्रकार के समर्थन के लिए गलत ठहराया जाता है। उनका दावा है कि चंद्रपुर में हर शिवसेना (उबाठा) पार्षद को एक करोड़ रुपये मिले, जबकि एक निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए।

    चुनाव गठजोड़ के परिणाम

    मुंबई में हुए निकाय चुनाव के दौरान शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने एक साथ चुनाव लड़ा, लेकिन वे भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को बृहन्मुंबई महानगरपालिका में सफल होने से नहीं रोक सके। शिवसेना (उबाठा) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे अपने आरोपों का प्रमाण पेश करें, तो वह इस्तीफा दे देंगे।

    संजय राउत की प्रतिक्रिया

    देशपांडे ने संजय राउत पर भी हमला करते हुए सवाल किया कि चंद्रपुर की घटनाओं के दौरान क्या राउत को जानकारी नहीं थी या उन्होंने जानबूझकर अनजान बने रहने का प्रयास किया। भाजपा के वरिष्ठ नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को हल्के में लिया जा रहा है, जो कि शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच बढ़ते मतभेदों को दर्शाता है। संजय राउत ने हाल ही में मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की और कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।

  • विधानसभा के बजट सत्र में मंत्री और विधायकों पर हमले का अलर्ट जारी

    विधानसभा के बजट सत्र में मंत्री और विधायकों पर हमले का अलर्ट जारी

    झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

    रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में मंत्रियों और विधायकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस मुख्यालय ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सत्र 18 फरवरी से 19 मार्च तक चलेगा, और इसी के मद्देनजर सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (एसएसपी) तथा पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को सुरक्षा को मजबूत करने और गश्त बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि कोई अप्रिय घटना न हो।

    मंत्री और विधायक रांची में होंगे एकत्रित

    पुलिस मुख्यालय ने जानकारी दी है कि विभिन्न जिलों से मंत्री और विधायक 17 और 18 फरवरी को रांची पहुंचेंगे। सत्र की अवधि में, उनके विधानसभा क्षेत्रों में यात्रा की संभावना को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा को और भी बढ़ाने की तैयारी की गई है। हाल की उग्रवादी घटनाओं को देखते हुए, यह आशंका जताई गई है कि माओवादी संगठन जनप्रतिनिधियों को निशाना बना सकते हैं।

    संवेदनशील मार्ग और घाटी क्षेत्रों की पहचान

    पुलिस मुख्यालय ने झारखंड राज्य के कुल 24 प्रमुख मार्गों और घाटी क्षेत्रों को अत्यंत संवेदनशील घोषित किया है। इन मार्गों पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मुद्दा यह है कि पुलिस की गश्ती और निगरानी को बढ़ाते हुए, कोई भी अप्रिय घटना रोकने के लिए तैयारियाँ की जाएँ।

    सुरक्षा निर्देशों का क्रियान्वयन

    सुरक्षा निर्देशों के तहत मंत्रियों और विधायकों के काफिलों की यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मार्गों की अग्रिम जांच, नियमित गश्त, और आवश्यक स्थानों पर अतिरिक्त बल की तैनाती की बात कही गई है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी संवेदनशील मार्गों पर विशेष निगरानी, वाहन जांच और गश्ती दलों की तैनाती की जाए।

    संवेदनशील मार्गों की सूची

    • रांची–बुंडू–तमाड़ मार्ग: तैमारा घाटी
    • रांची–हजारीबाग–कोडरमा मार्ग: चुटूपालू, चरही, नेशनल पार्क और तिलैया घाटी
    • हजारीबाग–गिरिडीह मार्ग: टाटी झरिया, विष्णुगढ़ और गिरिडीह घाटी
    • रांची–सिमडेगा–गुमला मार्ग: कोलेबिरा के जंगल क्षेत्र
    • खूंटी–चाईबासा मार्ग: बंदगांव जंगल एवं घाटी
    • रांची–लातेहार–पलामू मार्ग: आमझरिया, टुड़ामू एवं मनिका घाटी
    • हजारीबाग–चतरा मार्ग: सिमरिया और चतरा जंगल घाटी
    • पलामू क्षेत्र: डालटनगंज–छत्तरपुर–हरिहरगंज मार्ग के जंगली इलाके
    • नेतरहाट मार्ग: बेतला, महुआडॉड़ और गारू घाटी
    • चतरा–कटकमसांडी मार्ग
    • चौपारण–बरही–बगोदर मार्ग
    • चान्हों–खलारी मार्ग
    • सरायकेला-खरसावां–कुचाई मार्ग तथा कांड्रा–चौका मार्ग

    पुलिस मुख्यालय स्पष्ट कर चुका है कि विधानसभा के बजट सत्र की अवधि में सभी संवेदनशील मार्गों पर विशेष सुरक्षा उपाय किए जाएंगे, ताकि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना संभव हो सके।

  • तेज प्रताप के बयान पर अनुष्का के भाई की प्रतिक्रिया

    तेज प्रताप के बयान पर अनुष्का के भाई की प्रतिक्रिया

    तेज प्रताप यादव के बयान पर आकाश यादव का प्रतिक्रिया

    जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप यादव की ओर से अनुष्का यादव की नवजात बेटी को लेकर दिए गए बयान के बाद से मामला चर्चा में है। इस पर अनुष्का के भाई आकाश यादव ने अपनी प्रतिक्रिया मीडिया के माध्यम से व्यक्त की।

    आकाश यादव का बयान

    आकाश यादव ने तेज प्रताप यादव द्वारा उठाए गए आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि, “हम उनके बयानों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं। हम उनके या उनके परिवार के खिलाफ कुछ नहीं कहने वाले हैं। यदि यह परिवार का मामला है, तो इसे मीडिया में लाना उचित नहीं है।”

    अफवाहों का खंडन

    उन्होंने आगे कहा कि जिस तरह से अफवाहें फैलाई जा रही हैं, वह उनकी बहन के कैरेक्टर को नुकसान पहुँचा रही हैं। आकाश ने मीडिया में आकर कहा कि वह परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ बयान देना अपने नैतिकता और सिद्धांतों के विपरीत मानते हैं। “मैं अपने परिवार की खातिर यहाँ सफाई दे रहा हूँ,” उन्होंने कहा।

    लीगल कार्रवाई की योजना

    आकाश ने यह भी बताया कि वे लीगल कदम उठाने की योजना बना रहे हैं। “हमने उन लोगों की सूची तैयार की है, जो मीडिया में हमारी निजी जिंदगी की जानकारी लीक कर रहे हैं। हमारे घर के आस-पास के लोगों को बिना किसी कारण ऐसा लग रहा है जैसे कोई बड़ा अपराध हुआ हो। इसलिए, हम इन गतिविधियों के खिलाफ लीगल एक्शन लेने जा रहे हैं,” उन्होंने कहा।

    नवजात का नाम और चिंता

    आकाश यादव ने साझा किया कि अनुष्का हाल ही में मां बनी हैं और बेटी का नाम उज्जैनी रखा गया है। “मेरे लिए यह खुशी का मौका है कि मेरी बहन मां बनी हैं। यह परिवार का एक सुखद क्षण है,” उन्होंने कहा।

    परिवार की गोपनीयता

    आकाश ने ये स्पष्ट किया कि वे उज्जैनी के पिता का नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते, क्योंकि वह एक कानूनी विवाद में हैं और उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। “हमारी बहन के बारे में जो अफवाहें हैं, जैसे उनका अपहरण हुआ है, वह पूरी तरह से गलत हैं। मैं गर्व से कहता हूँ कि मेरे घर में लक्ष्मी का जन्म हुआ है,” उन्होंने कहा।

    झारखंड हाईकोर्ट की टिप्पणी

    झारखंड उच्च न्यायालय ने JPSC से पूछा है कि 1.75 लाख आवेदकों का आवेदन लेकर जेट क्यों नहीं लिया गया। यह सवाल इस संबंध में उचित है कि इतने बड़े संख्या में उम्मीदवारों का आवेदन लेकर निर्णय में देरी क्यों हो रही है।

  • पटना हाईकोर्ट ने पीएम मोदी की मां को गाली देने वाले आरोपी को दी जमानत

    पटना हाईकोर्ट ने पीएम मोदी की मां को गाली देने वाले आरोपी को दी जमानत

    पटना हाई कोर्ट से बेल मिलने वाला मामला

    पटना: बिहार चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की माँ के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले शख्स को पटना हाई कोर्ट से जमानत मिली है। यह मामला 27 अगस्त को राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान सामने आया था। आरोप है कि दरभंगा में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की माँ को लेकर असभ्य शब्दों का प्रयोग किया गया।

    जमानत प्रक्रिया

    राजा उर्फ रिजवी को पिछले पांच महीने से ज्यादा समय तक जेल में रहना पड़ा, और अब उसे जमानत मिली है। उसके वकील रियाज अहमद ने बताया कि युवक के खिलाफ देशद्रोह समेत तीन आरोपों पर FIR दर्ज की गई थी। रिजवी ने 27 अगस्त को दरभंगा के सिमरी थाना क्षेत्र के मानसरोवर ढाबा के पास यह विवादास्पद टिप्पणी की थी। इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है। इसी क्रम में BJP के स्थानीय जिलाध्यक्ष ने FIR दर्ज कराई और रिजवी को 29 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

    27 अगस्त को हुई इस घटना के बाद बिहार में राजनीतिक तनाव बढ़ गया। कई प्रदर्शन हुए, और इस पर सरकार और कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें भी हुईं। पटना में बीजेपी कार्यकर्ता एकत्र होकर कांग्रेस कार्यालय पहुँचे, जिसके बाद दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच लाठी-डंडे और पत्थर चले। कई वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई।

    प्रधानमंत्री का बयान

    इस घटना के सातवें दिन, प्रधानमंत्री मोदी ने इस विषय में अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “बिहार में कांग्रेस के मंच से मेरी माँ को गालियाँ दी गईं। यह केवल मेरी माँ का अपमान नहीं, बल्कि यह देश की माताओं, बहनों और बेटियों का अपमान है।

  • तमंचे के साथ विधायक का डांस वायरल, राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना

    तमंचे के साथ विधायक का डांस वायरल, राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना

    कर्नाटक विधायक का विवादास्पद वीडियो, सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

    नई दिल्ली। कर्नाटक के कलबुर्गी जिले में एक पारिवारिक समारोह के दौरान कांग्रेस विधायक मतीन पटेल का एक वीडियो जारी हुआ है, जिसमें वह कथित तौर पर हथियार लेकर डांस करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिसके चलते विधायक की कार्यशैली और समाज में बढ़ती गन कल्चर पर गंभीर चर्चाएँ शुरू हो गई हैं।

    इस वायरल वीडियो में मतीन पटेल एक काली एसयूवी से बाहर निकलते हैं और फिल्म ‘धुरंधर’ के एक गाने पर पिस्टल जैसी दिखने वाली वस्तु के साथ नृत्य करते दिखाई देते हैं। वीडियो में उनके कुछ समर्थक भी बंदूक जैसी वस्तुएं थामे नजर आ रहे हैं। जैसे ही यह क्लिप फली फैली, लोगों ने इसे गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। कई उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इस प्रकार का प्रदर्शन जनप्रतिनिधियों के लिए अनुचित है, और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

    विधायक की सफाई और पुलिस जांच

    मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक मतीन पटेल ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाली वस्तु असली हथियार नहीं, बल्कि एक खिलौना बंदूक थी। उन्होंने बताया कि यह एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम था, और उन्होंने बच्चों के कहने पर इसे किया था। पटेल का कहना है कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है, और पुलिस पहले ही इस मामले में उनसे पूछताछ कर चुकी है।

    हालांकि विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। कलबुरगी के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस डी का कहना है कि अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वीडियो में दिखाए गए हथियार की सत्यता की जांच की जाए। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वीडियो किस स्थान पर शूट किया गया और वह क्षेत्र किस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है।

    कानूनी दृष्टिकोण

    पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में हथियार असली पाए जाते हैं, तो यह देखा जाएगा कि उसके पास वैध लाइसेंस था या नहीं, और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ है। यदि अवैध हथियार या किसी नियम की अनदेखी होती है, तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का प्रदर्शन कानून के तहत अपराध है, और निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच की जाएगी।

    इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए। सोशल मीडिया के दौर में कोई भी वीडियो कुछ ही समय में करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है, और इस प्रकार जनप्रतिनिधियों के आचरण पर अधिक निगाहें रहती हैं। अब सबकी नजरें पुलिस जांच की रिपोर्ट पर हैं, जो तय करेगी कि यह महज एक गलतफहमी थी या नियमों का उल्लंघन।

  • 12 फरवरी को भारत बंद: केंद्र सरकार के चार श्रम कोड के विरुद्ध ट्रेड यूनियनों की हड़ताल

    12 फरवरी को भारत बंद: केंद्र सरकार के चार श्रम कोड के विरुद्ध ट्रेड यूनियनों की हड़ताल

    भारत में 12 फरवरी 2026 को होने वाला बंद

    12 फरवरी 2026 को एक समस्त भारत बंद का आह्वान किया गया है, जिसमें कई ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों की भागीदारी है। इस हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और सड़कों पर जाम भी लग सकता है। केंद्रीय व्यापार संघों और किसान संगठनों ने इस हड़ताल का ऐलान किया है, जिससे कई राज्यों में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, सरकारी दफ्तरों, परिवहन सेवाओं और बाजारों पर असर देखने को मिल सकता है। विरोध प्रदर्शन के प्रभाव से कुछ स्कूल और कॉलेज भी बंद रह सकते हैं, यह स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। श्रमिक संघ पिछले वर्ष लागू चार श्रम संहिताओं का विरोध कर रहे हैं।

    हड़ताल का कारण

    यूनियनों का कहना है कि सरकार की नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर कर रही हैं, जिससे नौकरी की सुरक्षा में कमी आ रही है। इसके अलावा, नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों को नियुक्त करना और निकालना आसान बना दिया गया है। ट्रेड यूनियनों ने निजीकरण, वेतन और सामाजिक सुरक्षा के विषय में भी चिंता व्यक्त की है। उनकी मुख्य मांगों में चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने साथ ही अन्य विधेयकों को वापस लेना शामिल है।

    स्कूल और कॉलेजों की स्थिति

    देशभर में स्कूल और कॉलेजों के बंद होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। हालांकि, कुछ राज्यों जैसे केरल, कर्नाटक और ओडिशा में स्थानीय संगठनों के समर्थन पर शिक्षण संस्थान बंद रह सकते हैं। छात्रों और अभिभावकों को अपने-अपने संस्थानों से जारी आधिकारिक सूचनाओं की जांच करने की सलाह दी जाती है।

    बैंक सेवाएं प्रभावित होंगी

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाएं हड़ताल के चलते प्रभावित होने की संभावना है। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज़ एसोसिएशन और अन्य प्रमुख संघों ने कर्मचारियों से हड़ताल में भाग लेने का आग्रह किया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने भी संभावित सेवा बाधित होने की चेतावनी दी है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक ने इस दिन को बैंक अवकाश घोषित नहीं किया है, इसलिए शाखाएं खुली रह सकती हैं।

    बाजारों और अन्य सेवाओं का हाल

    विरोध प्रदर्शनों और सड़क अवरोधों के कारण कुछ क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बाजारों और दुकानों के बंद रहने की संभावना है। सरकारी कार्यालयों की उपस्थिति भी कम हो सकती है, यह कर्मचारियों की भागीदारी पर निर्भर करेगा। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं जैसे अस्पताल और एम्बुलेंस सामान्य रूप से कार्यरत रहेंगी।

  • भाजपा विधायक सतेंद्र नाथ तिवारी पर अलकतरा घोटाले के आरोप लगे

    भाजपा विधायक सतेंद्र नाथ तिवारी पर अलकतरा घोटाले के आरोप लगे

    CBI अदालत में भाजपा विधायक पर आरोप तय

    रांची: CBI की विशेष अदालत ने गढ़वा के भाजपा विधायक सतेंद्र नाथ तिवारी के खिलाफ अलकतरा घोटाले में आरोप संज्ञान में लिए हैं। यह मामला 2003-04 का है, जिसमें उनकी कंपनी, कलावती कंस्ट्रक्शन, पर फर्जी चालानों के माध्यम से 2.23 करोड़ रुपये के अवैध भुगतान का आरोप लगाया गया है। उन्हें धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के तहत आरोपित किया गया है। अदालत ने CBI को निर्देश दिया है कि 20 फरवरी से मामले में साक्ष्य पेश करे।

    घोटाले का विवरण

    विशेष अदालत ने CBI को 20 फरवरी से मामले की साक्ष्य सामग्री प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी, कलावती कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. के पूर्व निदेशक रहे हैं। यह मामला वर्ष 2003-04 का है, जब कलावती कंस्ट्रक्शन ने छत्तरपुर-जपला रोड (32 किमी) का निर्माण कार्य शुरू किया था। योजना की कुल लागत लगभग सात करोड़ रुपये थी।

    जांच की परिस्थितियाँ

    इस मामले में अलकतरा खरीद से संबंधित अवैध गतिविधियों का खुलासा 2009 में हुआ था, जब CBI ने घोटाले की जांच शुरू की। जाँच के दौरान देखा गया कि कलावती कंस्ट्रक्शन प्रा. लि. द्वारा पेश किए गए 114 अलकतरा चालानों में से 61 पूरी तरह से फर्जी पाए गए थे। इनमें से फर्जी चालानों के आधार पर 1200 मीट्रिक टन अलकतरा की बिक्री के नाम पर 2.23 करोड़ रुपये का अवैध भुगतान लिया गया था। तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने आपराधिक साजिश के तहत सरकारी धन का दुरुपयोग किया और गलत तरीके से आर्थिक लाभ प्राप्त किया।

  • मध्य प्रदेश सरकार ने बजट सत्र से पहले 5000 करोड़ का नया ऋण लिया, कमल नाथ का कटाक्ष

    मध्य प्रदेश सरकार ने बजट सत्र से पहले 5000 करोड़ का नया ऋण लिया, कमल नाथ का कटाक्ष

    मोहन सरकार ने फिर उठाया बड़ा कर्ज, विपक्ष ने किया हमला

    भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र से पहले, मोहन सरकार ने बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज उठाया है। यह कर्ज पिछले एक सप्ताह में लिया गया दूसरा बड़ा ऋण है; इससे पहले 4 फरवरी को सरकार ने 5300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। इस बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मोहन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा राज्य को कर्ज के बोझ में डुबो रही है।

    कमलनाथ का गंभीर आरोप

    कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जो देश के कुल कर्ज का 5% है। उन्होंने यह भी बताया कि 2007 में मध्य प्रदेश पर कर्ज 52,000 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग दस गुना बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।

    विपक्ष की चिंता का विषय

    कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता बेसुध हो रही है, जबकि सरकारी खजाने की अव्यवस्था दर्शाती है कि बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के बजाय भ्रष्टाचार पर पैसे खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार को अपनी आर्थिक स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

    उमंग सिंघार ने भी उठाए सवाल

    नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि बजट सत्र से ठीक पहले राज्य सरकार द्वारा एक हफ्ते में दूसरी बार 5,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेना चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक 67,300 करोड़ रुपये की उधारी हो चुकी है और 36 बार कर्ज लिया गया है, जो राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

    आरबीआई की रिपोर्ट पर विचार

    हाल में जारी RBI की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति को उजागर किया है, जिसमें यह बताया गया है कि देश के कुल कर्ज का लगभग 5% सिर्फ मध्य प्रदेश पर है। यह चिंताजनक स्थिति सरकार से स्पष्टता की मांग करती है कि इस भारी उधारी का ठोस वित्तीय रोडमैप क्या है। आगामी बजट सत्र में बढ़ते कर्ज, ब्याज के बोझ और वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता पर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा जाएगा। मध्य प्रदेश को कर्ज के पहाड़ नहीं, बल्कि मजबूत और दूरदर्शी आर्थिक नीति की आवश्यकता है।

  • बांग्लादेश चुनाव पूर्व सर्वे में BNP को मिली बढ़त, जमात पीछे

    बांग्लादेश चुनाव पूर्व सर्वे में BNP को मिली बढ़त, जमात पीछे

    बांग्लादेश में चुनाव पूर्व राजनीतिक हलचल

    ढाका। बांग्लादेश में आगामी आम चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। वर्तमान में, देश पहली बार पूर्णकालिक प्रधानमंत्री के चुनाव की दिशा में बढ़ रहा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद, उनकी पार्टी आवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है।

    चुनाव पूर्व सर्वेक्षण की परिणाम

    नवीनतम चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार, बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) को एक महत्वपूर्ण बढ़त मिली है। जबकि जमात ए इस्लामी पिछड़ती दिखाई दे रही है। इन सर्वेक्षणों से यह स्पष्ट होता है कि चुनावी मैदान में BNP का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वे आगामी चुनाव में प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं।

    राजनीतिक दांव-पेंच

    बांग्लादेश के राजनीतिक वातावरण में अब हलचल और भी तेज हो गई है। नए राजनीतिक समीकरणों के साथ ही संभावित बदलावों पर चर्चा होना शुरू हो गई है। आने वाले चुनावों में मतदाता किस पार्टी को समर्थन देंगे, यह महत्वपूर्ण सवाल बन गया है।

  • ओम बिरला ने कहा, अविश्वास प्रस्ताव चर्चा तक स्पीकर नहीं बनेंगे

    ओम बिरला ने कहा, अविश्वास प्रस्ताव चर्चा तक स्पीकर नहीं बनेंगे

    लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

    डेस्कः लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने निर्णय लिया है कि वे तब तक सदन में नहीं आएंगे जब तक उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला नहीं हो जाता। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे स्पीकर की कुर्सी पर नहीं बैठेंगे, भले ही उन्हें सदन में आने के लिए मनाने का प्रयास किया जाए। यह यथास्थिति नियमों के विरूद्ध नहीं है, फिर भी उन्होंने इस निर्णय को लिया है।

    अविश्वास प्रस्ताव की संभावित चर्चा

    बजट सत्र के दूसरे भाग में, 9 मार्च को स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। इसके लिए पचास सांसदों का समर्थन आवश्यक होगा। सूत्रों के अनुसार, ओम बिरला ने मंगलवार को हाउस सेक्रेटरी-जनरल को निर्देश दिया है कि वे अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस की जांच करें और उचित कार्रवाई करें।

    कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव

    कांग्रेस ने हाल ही में ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन का नोटिस प्रस्तुत किया। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि उन्होंने रूल 94C के तहत अविश्वास प्रस्ताव दिया है। खबर है कि कुल 118 सांसदों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं।

    विपक्षी सांसदों के आरोप

    विपक्ष के सांसदों ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि स्पीकर ने विपक्षी नेताओं को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा करने की अनुमति नहीं दी। यह आरोप अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में चार महत्वपूर्ण घटनाओं का जिक्र करता है, जिनमें राहुल गांधी को बोलने से रोकना शामिल है।

    सांसदों के निलंबन का मामला

    सूत्रों के अनुसार, विपक्षी सांसदों ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर किए गए व्यक्तिगत हमलों का भी जिक्र किया। उन्होंने ओम बिरला के उस बयान पर ध्यान दिलाया, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने की सलाह दी थी ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

  • शशि थरूर ने ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कहा, ‘कोई औपचारिक नोटिस नहीं है’

    शशि थरूर ने ओम बिड़ला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कहा, ‘कोई औपचारिक नोटिस नहीं है’

    अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सियासी हलचल तेज

    नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारियों के चलते राजनीतिक गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। इस विषय पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बताया कि उनके साथ इस बारे में कोई औपचारिक चर्चा नहीं हुई है, हालांकि उन्हें इस तरह की मंशा के बारे में जानकारी है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जब तक औपचारिक नोटिस दाखिल नहीं किया जाता, इसे एक आधिकारिक खबर मानना उचित नहीं है।

    शशि थरूर की प्रतिक्रिया

    थरूर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “इस मुद्दे पर मेरे साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। मैं जानता हूं कि कुछ लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं, लेकिन यह अभी प्रक्रिया के चरण में है। जब तक कोई दस्तावेज़ दर्ज नहीं किया जाता, तब तक यह कुछ खास नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी अगले कदम के लिए संसदीय प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक है।

    विपक्ष की कार्य योजना

    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस प्रस्ताव को समाजवादी पार्टी (सपा) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) का समर्थन मिल रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अभी तक अपना रुख नहीं स्पष्ट किया है। कांग्रेस अन्य विपक्षी दलों के साथ समर्थन जुटाने के लिए लगातार विचारविमर्श कर रही है।

    पर्याप्त संख्या का दावा

    सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के पास अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने के लिए पर्याप्त सांसद हैं, और यदि एक या दो दल समर्थन नहीं भी करते, तो भी कांग्रेस प्रस्ताव लाने के लिए तैयार है।

    बजट सत्र में तनाव

    बजट सत्र के दौरान, सरकार और विपक्ष के बीच लगातार हंगामा देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसके परिणामस्वरूप सदन में तनाव का वातावरण बना हुआ है।

    प्रियंका गांधी का आरोप

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि लोकसभा सही तरीके से कार्य नहीं कर पा रही है और विपक्ष के नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा। प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार के दबाव में स्पीकर महिला सांसदों का अपमान कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा, “स्पीकर को जिस तरह से सफाई देनी पड़ रही है, उससे स्पष्ट है कि उन पर दबाव है। सदन में कांग्रेस की 11 महिला सांसद हैं, जिनमें मैं भी शामिल हूं। सभी गंभीर राजनेता हैं और उनका अपमान स्वीकार्य नहीं है।” प्रियंका ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में नहीं आ रहे और स्पीकर पर प्रतिक्रिया देने का दबाव बनाया जा रहा है।

  • मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ी

    मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ी

    मुंबई में मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात पर विवाद

    मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत और प्रसिद्ध गायक-कंपोजर अदनान सामी के बीच हुई मुलाकात ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। सोमवार को महाराष्ट्र कांग्रेस ने RSS पर आरोप लगाते हुए इस बैठक को ‘राष्ट्र-विरोधी’ बताया है।

    कांग्रेस का आरोप

    कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया कि अदनान सामी के पिता पाकिस्तान एयर फोर्स में पायलट रहे हैं और उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पार्टी ने इस रिश्ते पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस तरह की मुलाकातें चिंता का विषय हैं।

    सामी के पिता का इतिहास

    कांग्रेस के अनुसार, अदनान सामी के والد, अरशद सामी खान, पाकिस्तान एयर फोर्स में पायलट थे और 1965 के युद्ध में पठानकोट एयर बेस पर हमले में शामिल हुए थे। पार्टी ने अपनी पोस्ट में लिखा है, “मोहम्मद भागवत आज उनके बेटे के साथ भोजन कर रहे हैं।”

    RSS की 100वीं वर्षगाँठ का कार्यक्रम

    अदिनान सामी उन सेलिब्रिटीज़ में शामिल हैं जिन्होंने RSS की 100वीं वर्षगांठ के अवसर पर मुंबई में आयोजित दो-दिवसीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस समारोह के दौरान मोहन भागवत और अदनान सामी की मुलाकात हुई।

    अदनान सामी की प्रशंसा

    इसके पहले, रविवार को अदनान सामी ने अपने X हैंडल पर मोहन भागवत के साथ कुछ तस्वीरें साझा की थीं। पद्म श्री से सम्मानित सिंगर ने अपनी पोस्ट में भागवत की तारीफ करते हुए लिखा कि वह उनके साथ एक शानदार दोपहर बिताने का अनुभव प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ने कई गलतफहमियों को स्पष्ट किया और वह एक असाधारण व्यक्तित्व हैं।

  • मध्य प्रदेश BJP राज्य अध्यक्ष ने जल्द नियुक्तियों के संकेत दिए

    मध्य प्रदेश BJP राज्य अध्यक्ष ने जल्द नियुक्तियों के संकेत दिए

    मध्य प्रदेश में निगम मंडलों की नियुक्तियों का बेताबी इंतजार

    ग्वालियर। मध्य प्रदेश के निगम-मंडलों में नियुक्तियों का बड़े समय से इंतजार किया जा रहा है। इस बीच, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। उनके अनुसार, जल्द ही नामों की लिस्ट जारी की जाएगी, जिससे पद की आस लगाए नेताओं में फिर से उम्मीद जग गई है।

    संठन को प्राथमिकता देने की आवश्यकता

    बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘संगठन के पदों को भरना प्राथमिकता है। हाल में जिला प्रभारी घोषित किए गए हैं, प्रकोष्ठ, कार्यसमिति, और मोर्चों का गठन आदि जैसे कई कार्य हैं। हमारा संगठन जितना मजबूत रहेगा, उतनी ही भाजपा की राह आसान होगी। निगम मंडल की नियुक्तियों के लिए पूरी तैयारी हो चुकी है, और इसकी घोषणा जल्द की जाएगी।’

    भाजपा महिला मोर्चा का संकेत

    भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष, अश्वनी परांजपे, ने नियुक्तियों में महिलाओ की भागीदारी के बारे में टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में महिला शक्ति को हमेशा स्थान दिया गया है, और इसबार भी उनके समायोजन की संभावना है।

    महिला शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका

    अश्वनी परांजपे ने कहा, ‘पहले भी निगम मंडलों में महिला शक्ति का योगदान रहा है, और भविष्य में भी फैसले पार्टी और समाज के हित में लिए जाएंगे।’ उन्होंने राहुल गांधी के सिंगरौली दौरे को लेकर कहा कि राहुल गांधी ऐसे प्रवास करते रहते हैं, जो उनका कार्य है, और हम अपने कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

  • विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का विचार किया

    विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का विचार किया

    विपक्ष की लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी

    नई दिल्ली। विपक्षी दल लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन में पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्यवाही कर रहे हैं। यह आरोप ऐसे समय में लगाया गया है जब राहुल गांधी को संसद में बोलने से रोका जा रहा है, जिससे विपक्ष में नाराजगी बढ़ रही है।

    बजट सत्र में अविश्वास प्रस्ताव लाने की संभावनाएं

    जानकारी के अनुसार, विपक्ष बजट सत्र के दूसरे चरण में अविश्वास प्रस्ताव पेश कर सकता है। इसके लिए आवश्यक है कि नोटिस देने के लिए 20 दिन का समय रखा जाए। विपक्ष ने कई कारणों का उल्लेख किया है, जिनमें सदन में सदस्यों को बोलने की अनुमति न देना और निलंबन की कार्रवाई शामिल है।

    राहुल गांधी को बोलने से रोकने का मामला

    लोकसभा में जब धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा हो रही थी, तब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख के एक संस्मरण का उल्लेख किया और चीन से संबंधों पर गंभीर आरोप लगाए। बावजूद इसके, स्पीकर ने उन्हें बोलने से रोक दिया, जिसके कारण हंगामा हुआ। राहुल ने इस परंपरा के उल्लंघन की बात उठाई है, जिससे यह प्रश्न खड़ा होता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर बोलने से रोकना उचित है या नहीं।

    स्पीकर के बयान पर विवाद

    हाल ही में ओम बिरला के बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में आने से रोक दिया था, क्योंकि उन्हें डर था कि कांग्रेस के सांसद अप्रिय घटना कर सकते हैं। इस बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। स्पीकर का यह खुलासा लोकसभा की कार्यवाही में रुकावट का कारण बना है।

  • पटना सिविल कोर्ट में बम धमकी, पप्पू यादव की जमानत सुनवाई स्थगित

    पटना सिविल कोर्ट में बम धमकी, पप्पू यादव की जमानत सुनवाई स्थगित

    पटना सिविल कोर्ट में बम से उड़ाने की धमकी, न्यायिक कार्य बाधित

    पटना: सोमवार को पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के कारण न्यायिक कार्य पूरी तरह से प्रभावित हुआ। इस स्थिति के चलते पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की जमानत याचिका पर प्रस्तावित सुनवाई को टाल दिया गया। कोर्ट परिसर को खाली कराया गया और सुरक्षा की दृष्टि से एमपी–विधायक विशेष अदालत की कार्यवाही भी नहीं हो सकी, जिसके चलते पप्पू यादव को अभी जेल में रहना पड़ेगा। वे वर्तमान में पटना की बेऊर जेल में बंद हैं। उन्हें जेल भेजे जाने से पहले पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जहां उनकी सेहत सामान्य बताया गया।

    बम की धमकी से हड़कंप

    सोमवार सुबह सिविल कोर्ट को ई-मेल के माध्यम से बम से उड़ाने की धमकी मिली, जिसमें विस्फोटक रखे जाने का दावा किया गया था। इस सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन सतर्क हो गए। एहतियात के तौर पर सिविल कोर्ट और एमपी–विधायक अदालत को भी खाली करा लिया गया। जज, वकील, अदालत कर्मी और आम जनता को परिसर से बाहर निकाला गया। सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान चलाया। इसी कारण पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी।

    31 वर्ष पुराने मामले में गिरफ्तारी

    पप्पू यादव को 31 वर्ष पुराने एक मामले में शुक्रवार रात गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी उस समय हुई, जब वे राष्ट्रीय स्तर पर एक संवेदनशील मामले को लेकर सक्रिय थे। गिरफ्तारी के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं।

    नीट छात्रा में लापरवाही को लेकर मुखर

    पप्पू यादव हाल के दिनों में नीट परीक्षा से जुड़ी एक छात्रा के कथित इलाज में लापरवाही पर सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों के कथित ऑडियो संवाद भी जारी किए थे, जिनमें इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया गया था। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने बिहार में कई जगह आवाज उठाई और अंततः इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी उठाना शुरू किया।

    संसद से जंतर-मंतर तक प्रदर्शन

    नीट छात्रा को न्याय दिलाने की मांग करते हुए पप्पू यादव संसद परिसर के बाहर भी प्रदर्शन करते देखे गए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। इस कड़ी में रविवार को पटना से दिल्ली तक उनके समर्थन में विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया गया। पटना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘पप्पू यादव को रिहा करो’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया। साथ ही, कई स्थानों पर सरकार विरोधी नारेबाजी हुई और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पोस्टर जलाए गए। दिल्ली में भी जंतर-मंतर पर पप्पू यादव के समर्थन में प्रदर्शन हुआ, जिसमें पीड़िता के परिजन भी शामिल थे।

  • पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने बेऊर जेल में स्थानांतरित किया

    पूर्णिया सांसद पप्पू यादव को पटना पुलिस ने बेऊर जेल में स्थानांतरित किया

    पूर्णिया सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी के बाद का हाल

    पटना: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को हाल ही में पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) से बेउर जेल भेजा गया। सांसद को स्ट्रेचर पर अस्पताल से बाहर लाते हुए पटना पुलिस ने उन्हें जेल ले जाने की प्रक्रिया पूरी की।

    गिरफ्तारी और स्वास्थ्य स्थिति

    पप्पू यादव को शुक्रवार (6 फरवरी) की रात पूर्णिया से पटना पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। शनिवार (7 फरवरी) को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। यह गिरफ्तारी 31 साल पुराने एक मामले से जुड़ी है, जिसमें 1995 में गर्दनीबाग पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था।

    कोर्ट का आदेश और अगली कार्रवाई

    कोर्ट में शनिवार को पेशी के दौरान मामले की सुनवाई हुई, जहां फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने उन्हें न्यायिक हिरासत में लेने का आदेश दिया। साथ ही, उन्हें सोमवार (9 फरवरी) तक PMCH में रखने का निर्देश दिया गया। जमानत की सुनवाई भी इसी दिन होगी, जिसमें दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी। हालांकि, इससे पहले ही पटना पुलिस ने उन्हें बेउर जेल ले जाने की कार्रवाई की।

    कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

    पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर कांग्रेस का आक्रोश: पटना के एक हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही छात्रा की मौत के मामले से जुड़े दोषियों की गिरफ्तारी न होने के खिलाफ कांग्रेस के कार्यकर्ता रविवार (8 फरवरी) को सड़कों पर उतरे। कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पुतला जलाया।

    नेताओं की चेतावनी

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इस दौरान राज्य सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी कि वे बिहार की बेटियों के साथ हो रहे अन्याय को अब और सहन नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव, जो लगातार छात्रा की मौत के मामले में उचित कार्रवाई की मांग कर रहे थे, उनकी गिरफ्तारी निंदनीय है।

    अन्य समाचार

    दरभंगा में हत्या को लेकर आक्रोश: दरभंगा में एक मासूम की दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना से स्थानीय लोगों में आक्रोश फेल गया है। नाराज लोगों ने वाहन को आग लगा दी, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करनी पड़ी।

    जहर पीकर चार दोस्तों का मामला: बिहार में चार दोस्तों ने जहर पी लिया, जिसमें से तीन की मौत हो गई और एक की हालत गंभीर बनी हुई है।

  • मुंबई में 44 वर्षों बाद भाजपा की नेता रितु तावड़े बिन मुकाबला निर्वाचित होने के लिए तैयार

    मुंबई में 44 वर्षों बाद भाजपा की नेता रितु तावड़े बिन मुकाबला निर्वाचित होने के लिए तैयार

    मुंबई में भारतीय जनता पार्टी का महापौर बनने का कदम

    मुंबई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुंबई में अपना पहला महापौर चुनने की प्रक्रिया में है, जिससे बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में ठाकरे परिवार का 25 साल का वर्चस्व समाप्त होने की संभावना है। भाजपा की पार्षद रितु तावड़े ने महापौर पद के लिए अपना नामांकन शनिवार को दाखिल किया। उनके खिलाफ किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन नहीं कराया, जिससे उनका निर्विरोध चुना जाना तय सा प्रतीत हो रहा है।

    सहयोगी पार्टियों का सहयोग

    भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना (शिंदे गुट) ने संजय घाडी को उपमहापौर पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। तावड़े और घाडी ने मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, भाजपा मुंबई के अध्यक्ष अमित साटम, पूर्व शिवसेना सांसद राहुल शेवाले सहित कई नेताओं की उपस्थिति में महानगरपालिका सचिवालय में नामांकन भरा।

    औपचारिक प्रक्रिया की तारीख

    बीएमसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नामांकन की समय सीमा समाप्त होने तक केवल रितु तावड़े और संजय घाडी का ही नामांकन प्राप्त हुआ है। विपक्षी दलों ने कोई नामांकन नहीं किया है, लेकिन तय प्रक्रिया के अनुसार 11 फरवरी को चुनावी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

    उपमहापौर का कार्यकाल

    शिवसेना के सचिव संजय मोरे ने बताया कि वार्ड नंबर 5 के पार्षद संजय घाडी 15 महीनों के लिए उपमहापौर के रूप में कार्य करेंगे। घाडी पहले शिवसेना (उबाठा) के वरिष्ठ पार्षद रहे हैं और हाल ही में एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए हैं। शिवसेना उपमहापौर का कार्यकाल बांटकर अन्य पार्षदों को भी मौका देना चाहती है।

    रितु तावड़े का राजनीतिक सफर

    रितु तावड़े ने वर्ष 2012 में भाजपा का दामन थामा और उसी साल पार्षद बनीं। अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा समिति की अध्यक्षता की और शिक्षा, बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति और सार्वजनिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर सक्रियता दिखाई। घाटकोपर पूर्व (वार्ड 132) से दो बार पार्षद रह चुकीं तावड़े ने दुकानों में पुतलों के माध्यम से आपत्तिजनक कपड़ों के मुद्दे को उठाकर भी ध्यान आकर्षित किया।

    भाजपा का महत्वाकांक्षी दावा

    भाजपा मुंबई के अध्यक्ष अमित साटम ने कहा कि 44 वर्षों के अंतराल के बाद मुंबई को भाजपा का महापौर मिलने जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि महायुति बीएमसी को भ्रष्टाचार से मुक्त करने का काम करेगी। साटम ने बताया कि उनके पास 118 पार्षदों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े 114 से ज्यादा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महायुति ने यह सुनिश्चित किया है कि मुंबई को मराठी और हिंदू महापौर मिलेगा।

    बीएमसी में सत्ता संतुलन में बदलाव

    1997 से बीएमसी पर शासन कर रही शिवसेना (उबाठा) को इस बार 65 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) ने 29 सीटें प्राप्त की। कांग्रेस को 24, एआईएमआईएम को 8, मनसे को 6, राकांपा (अजित पवार गुट) को 3 और समाजवादी पार्टी को 2 सीटें मिलीं। इसके अलावा दो निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में सफल रहे।

    महत्वपूर्ण है कि बीएमसी का पूर्व कार्यकाल समाप्त होने के बाद से 7 मार्च 2022 से प्रशासक शासन लागू है। देश के सबसे समृद्ध नगर निकायों में एक बीएमसी का 2025-26 का बजट 74,450 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है, जो कई राज्यों के बजट से भी अधिक है।

  • निकाय चुनाव से पहले केटीआर का कांग्रेस पर हमला, कहा- रेवंत रेड्डी भाजपा के समर्थक हैं

    निकाय चुनाव से पहले केटीआर का कांग्रेस पर हमला, कहा- रेवंत रेड्डी भाजपा के समर्थक हैं

    हैदराबाद में नगर निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच के. टी. रामाराव का तीखा हमला

    हैदराबाद में नगर निकाय चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। भारत राष्ट्र समिति (BRS) के कार्यकारी अध्यक्ष के. टी. रामाराव (KTR) ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हाल में ज़ुक्कल, बांसवाड़ा और येल्लारेड्डी विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित रोड शो के दौरान केटीआर ने रेवंत को कांग्रेस के भीतर बीजेपी का ‘ट्रोजन हॉर्स’ कहते हुए अल्पसंख्यक मतदाताओं से अपील की कि वे ‘कांग्रेस का मुखौटा हटा कर अंदर छिपी भगवा पहचान’ देखें। केटीआर ने यह भी कहा, ‘रेवंत कभी दिल से कांग्रेसी नहीं रहे हैं; वे पूरी तरह से बीजेपी के पक्षधर हैं। वे दिल्ली के ‘बड़े भाई’ के एक छोटे भाई की तरह हैं।’

    मुख्यमंत्री की भाषा पर कटाक्ष

    मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की भाषा को लेकर कटाक्ष करते हुए केटीआर ने उन्हें ‘लागुला थोंडाला रेड्डी’ कहा। उनका आरोप है कि मुख्यमंत्री शासन के बजाय अशिष्ट भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। केटीआर ने कहा, ‘जब भी विपक्ष 420 अधूरे वादों की बातें करता है, रेवंत हमेशा धमकियों में ही बात करते हैं। उनकी सरकार का एकमात्र लक्ष्‍य केसीआर को निशाना बनाना है। वे केसीआर का नाम उस तरह बार-बार लेते हैं जैसे किसी भक्त द्वारा ‘राम कोटि’ लिखा जाता है। विडंबना यह है कि केसीआर को उनकी बातों की परवाह नहीं है, जिससे वे हमेशा निराश रहते हैं।’

    पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पर निशाना

    केटीआर ने कांग्रेस में हाल में शामिल हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पोचाराम श्रीनिवास रेड्डी पर भी तंज कसा। उन्होंने सभा में पुरानी वीडियो क्लिप दिखाते हुए बताया कि रेवंत ने कैसे पोचाराम को ‘बैल’ और उनके बेटों को रेत तस्करी में शामिल ‘भैंस’ कहा था। केटीआर ने कहा, ‘पोचाराम ने कभी भगवान वेंकटेश्वर की कसम खाकर केसीआर के प्रति वफादारी का वादा किया था। अब कुछ लाभ के लिए उन्होंने अपनी आत्मा बेच दी है। अगर उनमें थोड़ी भी संकोच बची है, तो उन्हें इस्तीफा देना चाहिए और जनता से नया जनादेश लेना चाहिए; अन्यथा उन्हें रेवंत की पुरानी सलाह के अनुसार कुएं में कूद जाना चाहिए।’

    कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप

    केटीआर ने कांग्रेस सरकार की आलोचना करते हुए इसे धोखे की सरकार बताया। उन्होंने दंडू पालयम और स्टुअर्टपुरम गिरोहों का उदाहरण देते हुए कहा कि अब ‘लूटो और भागो’ की प्रणाली नगर निकाय स्तर तक पहुँच गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जुक्कल के स्थानीय विधायक कांग्रेस की ‘कैश फॉर वोट’ नीति के तहत व्यापारियों से वसूली कर रहे हैं।

    लोगों से मतदान की अपील

    केटीआर ने कहा, ‘उन्होंने 4,000 रुपये पेंशन और महिलाओं को 2,500 रुपये देने का वादा किया था; मगर ये सब कहां हैं? यह केवल धोखे की सरकार है।’ उन्होंने स्थानीय निवासियों से अपील की कि वे नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ वोट दें और राज्य के विकास के लिए बीआरएस का समर्थन करें।

  • इस CM के खिलाफ प्रबुद्ध लोगों का आंदोलन, न्यायालय में मांग उठाई

    इस CM के खिलाफ प्रबुद्ध लोगों का आंदोलन, न्यायालय में मांग उठाई

    असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रबुद्ध नागरिकों का विरोध

    नई दिल्ली में, असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ राज्य के 40 से अधिक रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों, डॉक्टरों, शिक्षाविदों, लेखकों, पत्रकारों और अन्य प्रतिष्ठित नागरिकों ने अपनी आवाज उठाई है। इन प्रबुद्ध व्यक्तियों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर अपनी चिंता व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री पर उठे सवाल

    पत्र में उल्लेखित मुद्दे मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए कुछ विवादास्पद फैसलों से संबंधित हैं, जिनका नागरिक समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। इन रिटायर्ड अधिकारियों और अन्य नागरिकों का मानना है कि मुख्यमंत्री के निर्णयों ने जनता के हितों की अनदेखी की है।

    संभावित कानूनी कार्रवाई

    इन प्रबुद्ध नागरिकों ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे मामले की गंभीरता को समझें और उचित कार्रवाई करने पर विचार करें। यह पत्र असम के राजनीतिक माहौल में एक नया मोड़ ला सकता है, जहां नागरिकों की आवाज को सुनने की मांग की जा रही है।

    राज्य की संवेदनशीलता

    असम की राजनीति में इस प्रकार के जनहित के मुद्दे अक्सर उठते रहते हैं, और वर्तमान में भी यह मामला सुर्खियों में बना हुआ है। नागरिकों की चिंताओं पर ध्यान देना और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • प्रशांत किशोर की बिहार विधानसभा चुनाव रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

    प्रशांत किशोर की बिहार विधानसभा चुनाव रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

    प्रशांत किशोर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

    जनसुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर को एक महत्वपूर्ण निर्णय में सुप्रीम कोर्ट से निराशा का सामना करना पड़ा है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द कराने की उनकी याचिका को कोर्ट ने सुनवाई के लिए स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव रद्द करने का दावा उचित नहीं है और सलाह दी है कि यदि जनसुराज पार्टी को सच्ची संतोष नहीं है, तो वे हाईकोर्ट से संपर्क कर सकती हैं।

    बिहार विधानसभा चुनाव रद्द करने की मांग

    प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द कर पुनः चुनाव कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने अपनी याचिका में उल्लेख किया कि चुनाव की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री ने महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता राशि वितरित की थी, जिसे उन्होंने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन बताया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई से इंकार कर दिया।

    वोट खरीदने के प्रयास का आरोप

    याचिका में यह भी दावा किया गया कि महिलाओं को सहायता राशि देकर वोट खरीदने का प्रयास किया गया। जनसुराज ने मांग की है कि चुनाव रद्द कर नए सिरे से मतदान कराया जाए और चुनाव आयोग को निर्देश जारी किए जाएं ताकि चुनाव से पहले जनता को लुभाने वाली योजनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    बिहार चुनाव 2025 परिणाम

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को स्पष्ट जीत मिली, जिसमें उसे 202 सीटें हासिल हुईं, जबकि महागठबंधन को केवल 35 सीटों पर जीत मिली। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज इस चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी। हार की जिम्मेदारी उन्होंने स्वयं ली, यह कहते हुए कि उनके लिए यह एक व्यावहारिक अनुभव था।

    प्रशांत किशोर का बयान

    कई विपक्षी नेताओं ने भी शिकायत की थी कि पैसे देकर महिलाओं से वोट खरीदे जा रहे हैं। इस आरोप को लेकर प्रशांत किशोर ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन कोर्ट ने इस पर सुनवाई करने से मना कर दिया।