श्रेणी: Politics

  • MP में मंत्रिमंडल विस्तार पर रोक, 5-6 मंत्रियों के चेहरे बदल सकते हैं

    MP में मंत्रिमंडल विस्तार पर रोक, 5-6 मंत्रियों के चेहरे बदल सकते हैं

    मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार पर स्थितियाँ स्थिर

    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएँ फिलहाल थम गई हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस समय कैबिनेट विस्तार की संभावना नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार अब नए सिरे से मंत्री और विधायकों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार करने में जुटी हुई है।

    मंत्रियों के प्रदर्शन का मूल्यांकन

    सरकार अपने मौजूदा मंत्रियों और विधायकों के प्रदर्शन का गहराई से मूल्यांकन कर रही है। यह प्रक्रिया आगामी निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण है, जिससे यह निर्धारित किया जाएगा कि कौन से मंत्रियों को अपने पदों पर बनाए रखा जाएगा और किन्हें बदला जाएगा।

    अगले कदम की योजना

    सरकार के इस कदम से स्पष्ट होता है कि वे किसी भी प्रकार का निर्णय लेने से पहले विस्तृत जांच पर ध्यान दे रही हैं। इस रिपोर्ट कार्ड के आधार पर, 5 से 6 मंत्रियों के चेहरों में परिवर्तन की संभावना व्यक्त की जा रही है, लेकिन औपचारिक घोषणा के लिए अभी समय चाहिए।

  • बिहार में नए मुख्यमंत्री चयन से पहले राज्यपाल सैयद अता हसनैन नियुक्त

    बिहार में नए मुख्यमंत्री चयन से पहले राज्यपाल सैयद अता हसनैन नियुक्त

    बिहार में मुख्यमंत्री और राज्यपाल के पद में बदलाव

    पटनाः बिहार में एक ही दिन में मुख्यमंत्री और राज्यपाल के चेहरे में बदलाव हुआ है। गुरुवार की सुबह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन कर दिया और उसी रात को राष्ट्रपति ने बिहार के नए राज्यपाल की नियुक्ति की। नीतीश कुमार के संसद जाने के बाद बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं, जबकि मौजूदा राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान की जगह लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि जहां यह नया राज्यपाल नीतीश कुमार के इस्तीफे को स्वीकार करेगा, वहीं नई सरकार के शपथ ग्रहण का भी कार्य करेगा।

    Nitish Kumar के राज्यसभा जाने का विरोध

    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के निर्णय पर AJSU और JDU के विधायक सरयू राय ने विरोध जताया है। उन्होंने इस पर आरोप लगाया कि यह एक चालबाजी और तिकड़बाजी है, जिसे रुका जाना चाहिए। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई राज्यों में राज्यपालों और उपराज्यपालों के पदों में बदलाव किया, जिसमें बिहार के लिए भी नया राज्यपाल घोषित किया गया। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया कि लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन 6 मार्च 2026 से बिहार के नए राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभालेंगे।

    सैयद अता हसनैन की पृष्ठभूमि

    सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के एक प्रतिष्ठित अधिकारी हैं, जिन्होंने लगभग 40 वर्षों तक सेवा दी है। वे पूर्व में कश्मीर में चिनार कोर (15 कोर) के कमांडर रहे हैं और काउंटर-इंसर्जेंसी ऑपरेशंस में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) में सक्रिय योगदान दिया, और साथ ही लेखक, टिप्पणीकार और रणनीतिक विशेषज्ञ के रूप में भी अपनी पहचान बनाई है।

    केंद्रशासित प्रदेशों में भी बदलाव

    दूसरी ओर, केंद्रशासित प्रदेशों में भी कई महत्वपूर्ण तबादले हुए हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख के एलजी के रूप में नियुक्त किया गया है। उनके स्थान पर पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल बनाया गया है। वहीं, लद्दाख के पूर्व उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।

    राज्यपालों के अन्य बदलाव

    इस फेरबदल में, तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल बनाया गया है, जबकि केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु भेजा गया है। इसके अलावा, बंगाल चुनावों से पहले राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा दे दिया, और लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने भी अपने पद से इस्तीफा दिया है।

    हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना में नए राज्यपाल

    इस क्रम में, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को तेलंगाना की जिम्मेदारी दी गई है। तेलंगाना के निवर्तमान राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण राज्य का राज्यपाल बनाया गया है। पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड के लिए भी नंद किशोर यादव को नये राज्यपाल के रूप में नियुक्त किया गया है।

  • बंगाल चुनाव से पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस तथा लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता का इस्तीफा

    बंगाल चुनाव से पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस तथा लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता का इस्तीफा

    पश्चिम बंगाल में राज्यपाल का इस्तीफा

    डेस्क: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्यपाल सीवी आनंद ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। दिल्ली में अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंपा। इस बीच, लद्दाख के लेफ्टिनेंट गर्वनर के भी पद छोड़ने की चर्चा चल रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तमिलनाडु के राज्यपाल सीवी रवि को अस्थायी रूप से पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का कार्यभार सौंपा गया है।

    सीवी आनंद का कार्यकाल और इस्तीफे की प्रतिक्रिया

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सीवी आनंद का इस्तीफा राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने पीटीआई को बताया कि उन्होंने गवर्नर के कार्यालय में काफी समय बिताया है। सीवी आनंद बोस को 23 नवंबर, 2002 को राज्यपाल नियुक्त किया गया था और वे लगभग तीन साल पांच महीने तक इस पद पर कार्यरत रहे।

    राज्यपाल का प्रशासनिक दृष्टिकोण

    सीवी आनंद बोस अपने कार्यकाल के दौरान राज्य की कई नीतियों पर मुखर रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नीतियों की लगातार आलोचना की है। उनके कार्यकाल के दौरान कई मुद्दों पर राज्य और राज्यपाल के बीच टकराव बढ़ा।

    ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सीवी आनंद के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें इस अचानक घटनाक्रम से हैरानी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आने वाले चुनावों से पहले केंद्रीय गृह मंत्री ने राजनीतिक लाभ के लिए दबाव बनाया हो, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन करना चाहिए।

  • BJP ने तीन निलंबित विधायकों को शामिल करके कांग्रेस को किया नुकसान

    BJP ने तीन निलंबित विधायकों को शामिल करके कांग्रेस को किया नुकसान

    गुवाहाटी में भाजपा का परिवार बढ़ा

    गुवाहाटी. असम में विधानसभा चुनावों के चलते भाजपा का कुनबा लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, कांग्रेस की पूर्व राज्य इकाई के अध्यक्ष भूपेन बोरा ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। अब इस क्रम में तीन निलंबित कांग्रेस विधायकों—कमलाख्या डे पुरकायस्थ, बसंत दास, और शशिकांत दास—ने भी सत्ताधारी दल में शामिल होने का निर्णय लिया है।

    भाजपा में शामिल होने का उद्देश्य

    भाजपा में शामिल होते समय पूर्व कांग्रेस विधायक कमलाख्या डे पुरकायस्थ ने कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य असम और राष्ट्र की सुरक्षा है। असम का नागरिक होने के नाते हमें भाजपा के साथ आना चाहिए और देश को आगे बढ़ाने के लिए भाजपा की नीति में सहयोग देना चाहिए। यदि कांग्रेस ने अपनी विचारधारा में बदलाव नहीं किया, तो वह रिक्त हो जाएगी।”

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

    इस भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि आज भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। उनके अनुसार, यह कांग्रेस विधायकों का भाजपा में आना पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति लोगों की श्रद्धा को दर्शाता है।

    सीट शेयरिंग पर मुख्यमंत्री का बयान

    सीएम सरमा ने सीट शेयरिंग के संदर्भ में बताया कि हाल ही में असम गण परिषद, बोडोलैंड पीपुल्स फोरम और राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ बातचीत समाप्त हो गई है। इस मामले पर आधिकारिक घोषणा में कुछ दिनों का समय लग सकता है, क्योंकि केंद्रीय संसदीय समिति से मंजूरी प्राप्त करनी है।

    केंद्रीय मंत्री का बयान

    केंद्रीय मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लोग, विशेष रूप से कांग्रेस के सदस्य, भाजपा में शामिल हो रहे हैं। यह हमारी विचारधारा के प्रति उनके समर्थन को दिखाता है और इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा की लोकप्रियता हर हिस्से में बढ़ रही है।

  • बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने पर महत्वपूर्ण बयान दिया

    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने पर महत्वपूर्ण बयान दिया

    नीतीश कुमार का राज्यसभा जाने का निर्णय

    पटना. जनता दल यूनाईटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने यह घोषणा की है कि वह अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे और राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है। इस ऐलान ने पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों को समाप्त कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक बयान में कहा है कि पिछले दो दशकों से अधिक समय तक उन्होंने बिहार और उसके लोगों की सेवा की है और अब वह दिल्ली की राजनीति में प्रवेश करने का इच्छुक हैं।

    संसदीय जीवन की नई शुरुआत

    नीतीश कुमार ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि उनका राज्यसभा का सदस्य बनने का सपना लंबे समय से था। उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि वह दोनों विधान मंडलों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य भी बनें। उन्होंने जनता को विश्वास दिलाया कि उनका संबंध भविष्य में भी मजबूत बना रहेगा और बेरूखी के बावजूद, बिहार के विकास का उनका संकल्प अटल रहेगा।

    जदयू कार्यकर्ताओं की नाराजगी

    नीतीश कुमार के इस फैसले पर जदयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखी जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव 2025 में नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया था। कार्यकर्ताओं ने सीएम हाउस के बाहर नारेबाज़ी करते हुए कहा कि नीतीश कुमार को बिहार की जनता की आवाज़ सुननी होगी। बिहार की राजनीति में उनका स्थान महत्वपूर्ण है, और कार्यकर्ताओं ने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें दिल्ली नहीं जाना चाहिए।

    ललन सिंह की संभावित डिप्टी सीएम पर चर्चा

    सीएम नीतीश कुमार के फैसले के तुरंत बाद, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने निशांत कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात में उन्होंने आगे की योजनाओं पर चर्चा की और निशांत कुमार की भूमिका के बारे में विचार-विमर्श किया। चर्चा के दौरान यह जानकारी मिली है कि निशांत कुमार को डिप्टी सीएम के पद पर नियुक्त किया जा सकता है।

  • नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने का विचार कर रहे हैं, बेटे को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ने का विचार कर रहे हैं, बेटे को मिल सकती है नई जिम्मेदारी

    नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ने का संभावित निर्णय

    पटना: बिहार की राजनीति में वर्तमान समय में एक महत्वपूर्ण बदलाव की चर्चाएँ एक नई दिशा में बढ़ रही हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के सांसद बनने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके चलते वे अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। यदि यह घटनाक्रम वास्तविकता में परिवर्तित होता है, तो यह बिहार की राजनीतिक landscape को काफी प्रभावित कर सकता है।

    राजनीतिक अवसर और नई जिम्मेदारी

    यदि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो यह उनके बेटे निशांत कुमार के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। राजनीतिक दृष्टिकोण से, यह परिवर्तन परिवार की नई पीढ़ी को आगे लाने का संकेत दे सकता है। बिहार की सियासत में आ रही यह संभावित बदलाव विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक हलचलों को जन्म दे सकता है।

    राज्यसभा में संभावित स्थान

    राज्यसभा सांसद बनने की संभावनाओं के साथ, नीतीश कुमार की राजनीतिक यात्रा एक नए अध्याय में प्रवेश कर सकती है। इस स्थिति पर नजर रखने से यह स्पष्ट होगा कि वे किस प्रकार से राज्य की राजनीतिक दिशा को प्रभावित करने की योजना बना रहे हैं।

  • ओम बिरला ने विशेषाधिकार समिति के 15 सदस्यों को नामित किया

    ओम बिरला ने विशेषाधिकार समिति के 15 सदस्यों को नामित किया

    लोकसभा अध्यक्ष ने विशेषाधिकार समिति का पुनर्गठन किया

    नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को संसद की विशेषाधिकार समिति का पुनर्गठन करते हुए 15 नए सदस्यों की नियुक्ति की घोषणा की। इस समिति की अध्यक्षता वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद करेंगे। लोकसभा सचिवालय द्वारा जारी बुलेटिन के अनुसार, इस समिति में विभिन्न राजनीतिक दलों के सदस्यों को शामिल किया गया है।

    समिति में शामिल सदस्य

    भारतीय जनता पार्टी से:

    बृजमोहन अग्रवाल, रामवीर सिंह बिधूड़ी, संगिता कुमारी सिंह देव, जगदंबिका पाल, त्रिवेंद्र सिंह रावत, जगदीश शेट्टर।

    कांग्रेस से:

    तारिक अनवर, मनीष तिवारी, मणिकम टैगोर।

    अन्य दलों से:

    समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, द्रमुक के टी.आर. बालू, तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी, शिवसेना के श्रीरंग अप्पा बार्ने, और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के अरविंद सावंत।

    विशेषाधिकार समिति की भूमिका

    विशेषाधिकार समिति संसद की एक स्थायी समिति है, जो सदन या उसके सदस्यों के विशेषाधिकार में बाधा डालने और अवमानना से संबंधित मामलों की जाँच करती है। यह समिति उन मामलों की विस्तृत जाँच करती है जिन्हें लोकसभा अध्यक्ष द्वारा संदर्भित किया जाता है। इसके बाद, समिति अपनी सिफारिशें सदन के समक्ष प्रस्तुत करती है। वर्तमान संरचना के अनुसार, लोकसभा में अध्यक्ष द्वारा 15 सदस्यों को नामित किया जाता है, जबकि राज्यसभा में सभापति द्वारा 10 सदस्यों की नियुक्ति की जाती है।

    बहुदलीय प्रतिनिधित्व

    आधिकारिक सूचना के अनुसार, समिति में विभिन्न दलों जैसे भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, समाजवादी पार्टी और द्रमुक का प्रतिनिधित्व है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि विशेषाधिकार से संबंधित मामलों की जाँच बहुदलीय सहयोग के साथ की जाए। अब नई समिति औपचारिक रूप से अपने कार्यों का आरंभ करेगी।

  • भाजपा ने राज्यसभा के लिए नामों की घोषणा, नितिन और नवीन शामिल

    भाजपा ने राज्यसभा के लिए नामों की घोषणा, नितिन और नवीन शामिल

    राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा ने घोषित किए नाम

    नई दिल्ली। 2026 में होने वाले राज्यसभा चुनावों के लिए राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में भाजपा ने 9 उम्मीदवारों की सूची जारी की है। इस सूची में बिहार से नितिन नवीन का नाम शामिल है, जिन्हें बिहार से राज्यसभा भेजने की योजना बनाई गई है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा का नाम भी इस लिस्ट में शामिल है।

    भाजपा की उम्मीदवारों की सूची

    भाजपा द्वारा जारी की गई सूची में विभिन्न राज्यों के लिए कुल 9 नाम शामिल हैं। इस सूची में बिहार से नितिन नवीन और शिवेश कुमार, असम से तेराश गोवाला और जेगेन मोहन, ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार, छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा, और हरियाणा से संजय भाटिया के नाम शामिल हैं।

    उपेन्द्र कुशवाहा ने उम्मीदार की घोषणा

    राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा को आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए एनडीए की ओर से आधिकारिक उम्मीदवार बनने के लिए नामित किया गया है। पार्टी के प्रवक्ता नितिन भारती ने बताया कि यह निर्णय एनडीए के शीर्ष नेतृत्व के परामर्श के बाद लिया गया है। कुशवाहा 5 मार्च को बिहार विधानसभा में अपना नामांकन करेंगे, जिसमें एनडीए के सभी दलों के नेता उपस्थित रहेंगे।

    राज्यों में चुनावी स्थिति

    निर्वाचन आयोग के अनुसार, जिन राज्यों में राज्यसभा के चुनाव आयोजित होने हैं, उनमें महाराष्ट्र (7 सीटें), ओडिशा (4 सीटें), तेलंगाना (2 सीटें), तमिलनाडु (6 सीटें), छत्तीसगढ़ (2 सीटें), पश्चिम बंगाल (5 सीटें), असम (3 सीटें), हरियाणा (2 सीटें), हिमाचल प्रदेश (1 सीट) और बिहार (5 सीटें) शामिल हैं। सभी सीटों के लिए मतदान 16 मार्च को सुबह 9 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक होगा, जिसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी।

    नितिन नवीन की होली पर शुभकामनाएं

    भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन ने होली के अवसर पर कहा कि यह त्योहार बिहार में परिवार और कार्यकर्ताओं के साथ मनाने का विशेष महत्व रखता है। उन्होंने सभी बिहारवासियों को होली की शुभकामनाएं दी और कहा कि यह पर्व अच्छाई की जीत और बुराई की हार का प्रतीक है। उन्होंने बिहार का ध्यान विकास की दिशा में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।

  • निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश, मंत्री ने होली पर जनता को शुभकामनाएं दीं

    निशांत कुमार का राजनीति में प्रवेश, मंत्री ने होली पर जनता को शुभकामनाएं दीं

    बिहार में निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री की संभावना

    पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीतिक करियर को लेकर लंबे समय से अटकलें जारी थीं। अब, नीतीश के करीबी सहयोगी श्रवण कुमार ने पुष्टि की है कि निशांत कुमार जल्द ही सक्रिय राजनीति में कदम रख सकते हैं। श्रवण कुमार, जो बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, ने इस संबंध में जानकारी साझा करते हुए कहा कि होली के अवसर पर यह घोषणा की जा रही है।

    निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री

    श्रवण कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत के दौरान बताया कि होली के पावन मौके पर यह जिक्र करना चाहेंगे कि निशांत की राजनीति में एंट्री की चर्चा काफी समय से चल रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई युवाओं के बीच इस विषय पर बात की है, जो लंबे समय से निशांत के राजनीति में आने के लिए उत्सुक हैं। श्रवण कुमार ने उम्मीद जताई कि यह युवाओं की मांग जल्द पूरी होगी और उन्होंने निशांत कुमार के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं भी दीं।

  • बिजेपी नेता संगीत सोम का कड़ा बयान, “जो खोला क़मीनई को नहीं बचा सके”

    बिजेपी नेता संगीत सोम का कड़ा बयान, “जो खोला क़मीनई को नहीं बचा सके”

    संगीत सोम का विवादास्पद बयान, बाबरी मस्जिद मुद्दे पर दिया जवाब

    मेरठ। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक संगीत सोम एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा का कारण बने हैं। मेरठ के सकौती में आयोजित होली मिलन कार्यक्रम में उन्होंने इजराइल और ईरान के बीच के युद्ध का उल्लेख करते हुए भारत में बाबरी मस्जिद को लेकर कड़े शब्दों में हमला बोला। सोम ने अपने समर्थकों से संकल्प कराया कि देश में कभी भी बाबरी मस्जिद की नींव नहीं रखी जाने दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जो खामेनेई को सुरक्षा नहीं दे सके, वे बाबरी मस्जिद की बात कर रहे हैं।

    विवादित विचारधारा के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन

    रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में संगीत सोम ने लोगों को याद दिलाया कि किसी भी स्थिति में विवादित विचारधारा को फिर से जीवित नहीं होने दिया जाएगा। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे ताकतवर नेता, जो खामेनेई तक की रक्षा नहीं कर सकते, वे भारत में बाबरी मस्जिद बनाने का सपना देख रहे हैं। इस कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां भी उपस्थित थीं, जिसमें मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह, आचार्य कैलाशानंद गिरी महाराज, और भाजपा के नेता शामिल थे।

    होल सेवा समारोह में जुटे हजारों समर्थक

    दिल्ली-दून हाइवे पर सकौती स्थित मंगलम फार्म हाउस में आयोजित इस होली मिलन समारोह में हजारों समर्थकों की भीड़ जुटी थी। इस दौरान हाइवे पर लंबा जाम लग गया। पूर्व विधायक ने उपस्थित अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और सभी को होली की शुभकामनाएं दीं। संगीत सोम ने कहा कि यह समारोह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि 2027 में सनातन संस्कृति के रक्षकों को मजबूती देने का एक मंच है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा 2027 में 350 से अधिक सीटें जीतकर सरकार बनाएगी।

  • ट्रंप ने ईरान पर हमले का आरोप लगाया, पहले आठ युद्ध रोकने का किया था दावा

    ट्रंप ने ईरान पर हमले का आरोप लगाया, पहले आठ युद्ध रोकने का किया था दावा

    अमेरिका और इजरायल की ईरान पर सैन्य कार्रवाई

    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने शनिवार को ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी जनता से आह्वान किया कि वे अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथ में लें और 1979 से शासन कर रहे इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करें। राष्ट्रपति ने पहले भी वैश्विक स्तर पर आठ युद्धों को रोकने का दावा किया था, लेकिन इसी बीच उन्होंने कुछ देशों में सैन्य कार्रवाई के आदेश भी दिए हैं।

    अमेरिका की सैन्य गतिविधियाँ

    मार्च 2025 में अमेरिका ने इराक के अल-अनबार प्रांत में ISIL के कमांडर को मार गिराया। इसी तरह, दिसंबर 2025 में सीरिया में ISIL के ठिकानों पर जवाबी हमले किए गए। मार्च से मई 2025 तक यमन में हूती विद्रोही समूह पर हवाई और समुद्री हमले किए गए। इसके अलावा, सोमालिया में हवाई हमलों में वृद्धि की गई और नाइजीरिया में अमेरिकी सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने का कार्य जारी रहा।

    लैटिन अमेरिका में संभावित खतरे

    लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में अमेरिकी एयर स्ट्राइक के कारण संदिग्ध नशीली दवाओं की तस्करी करने वाले जहाजों पर कम से कम 45 हमले किए गए, जिसमें 151 लोगों की मौत होने की खबर है। इसके तहत वेनेजुएला में राष्ट्रपति Nicolás Maduro को पकड़ने के लिए कोशिशें भी की गईं।

    ईरान पर हमले का उद्देश्य

    ईरान पर यह हमला उस समय किया गया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ चुका है। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना है। देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और आंतरिक असंतोष के बीच अमेरिका ने अपने सैन्य हितों को काफी मजबूत कर लिया है।

  • पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में NSUI का पुनः वर्चस्व, शांतनु शेखर अध्यक्ष बने

    पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में NSUI का पुनः वर्चस्व, शांतनु शेखर अध्यक्ष बने

    पटना यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव 2026: एनएसयूआई ने दर्ज की बड़ी जीत

    पटना: पटना यूनिवर्सिटी में 28 फरवरी 2026 को छात्र संघ चुनाव संपन्न हुए, जिसमें एनएसयूआई ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए महत्वपूर्ण पदों पर विजय प्राप्त की। अध्यक्ष पद पर शांतनु शेखर को 2067 वोट मिले, जबकि महासचिव पद पर खुशी कुमारी ने सफलता हासिल की। उपाध्यक्ष पद के लिए शिफत फैज को 1571 मत मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी आयुष हर्ष को 1503 वोट प्राप्त हुए। संयुक्त सचिव पद पर अभिषेक कुमार ने 2143 वोटों के साथ जीत हासिल की। उनके प्रतिकूल एनएसयूआई के मो. मुनव्वर आजम को 1751 मत मिले। कोषाध्यक्ष के लिए एबीवीपी के हर्षवर्धन ने 1519 मत प्राप्त किए और उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी अभिषेक कुमार को 1429 वोटों से हराया। मतदान के दौरान सभी बूथों पर सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। रात में विजयी उम्मीदवारों को प्रमाण पत्र दिए गए। कुलपति प्रो. नमिता सिंह ने उम्मीद जताई कि सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारी विश्वविद्यालय और छात्रों के हित में कार्य करेंगे।

    हंगामा और प्रतिक्रिया

    चुनाव के दौरान कुछ जगहों पर हंगामे की भी सूचना मिली, जहां तेज प्रताप के प्रत्याशी को पुलिस द्वारा हटाया गया।

    कॉंग्रेस और पप्पू यादव का समर्थन

    अध्यक्ष पद पर एनएसयूआई के शांतनु शेखर ने जीत के बाद इसे संगठन की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सांसद पप्पू यादव के समर्थन की भी सराहना की। शांतनु ने 2896 वोट प्राप्त किए, जबकि छात्र जदयू के प्रिंस कुमार ने 1400 वोट प्राप्त किए।

    उपाध्यक्ष पद पर रोमांचक मुकाबला

    उपाध्यक्ष पद के लिए मुकाबला काफी कड़ा रहा, जहां निर्दलीय प्रत्याशी सिफत फैज ने 65 वोटों से जीत हासिल की। उन्हें कुल 1571 वोट मिले, जबकि आयुष हर्ष को 1503 वोट मिले। परिणाम की घोषणा में देरी के चलते सिफत ने हंगामा किया, लेकिन दोबारा की हुई मतगणना में भी वही आगे रही और उन्हें विजयी घोषित किया गया।

    महासचिव पद पर एनएसयूआई का कब्जा

    महासचिव पद पर एनएसयूआई की खुशी कुमारी ने छात्र राजद के प्रत्यूष राज को 553 वोटों के अंतर से हराया। खुशी को 2164 वोट मिले, जबकि प्रत्यूष को 1611 वोट मिले। सांसद पप्पू यादव ने जीत पर बधाई पेश करते हुए इसे नीट छात्राओं को न्याय दिलाने के लिए उनकी कोशिशों का परिणाम बताया।

    एबीवीपी ने दो सीटों पर की जीत

    संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के अभिषेक कुमार ने एनएसयूआई के मनोवर आजम को 392 वोटों से पराजित किया। अभिषेक कुमार को 2173 वोट मिले। वहीं, कोषाध्यक्ष पद पर एबीवीपी के हर्षवर्धन ने छात्र जदयू के अभिषेक को 90 वोटों से हराया। उन्हें 1519 मत प्राप्त हुए।

  • पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा “आपने बाबू को अपने पापों का जामा पहनाया”

    पीएम मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा “आपने बाबू को अपने पापों का जामा पहनाया”

    प्रधानमंत्री मोदी का आत्मविश्वास और व्यापार समझौते

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा कि भारत ने पिछले 12 वर्षों में अपनी अंतर्निहित शक्ति को पहचाना है, जिसके चलते विकसित देश अब व्यापार समझौतों के लिए आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने राइजिंग भारत सम्मेलन में अपने भाषण में बताया कि आजादी के बाद भी कुछ लोग औपनिवेशिक मानसिकता को बनाए रखते हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया, ‘यदि हमने अपनी आंतरिक शक्ति को पहचान कर अपने संस्थानों को मजबूत नहीं किया होता, तो कोई भी देश हमारे साथ व्यापार समझौते नहीं करता। यही कारण है कि विकसित देश अब हमारे साथ व्यापारिक संबंध स्थापित कर रहे हैं।’

    कांग्रेस पर मोदी का आलोचना

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि हाल ही में आयोजित एआई समिट पूरे देश के लिए गर्व का क्षण था, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने इसे बदनाम करने की कोशिश की। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस ने केवल विदेशी अतिथियों के सामने कपड़े नहीं उतारे, बल्कि अपने वैचारिक दिवालियापन को भी उजागर किया है। जब निराशा और अहंकार मन में होता है, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच जन्म लेती है। कांग्रेस हमेशा इसी तरह का व्यवहार करती है।’

    भारत के भविष्य पर विमर्श

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी देश की क्षमता अचानक नहीं आती। यह पीढ़ियों की मेहनत, ज्ञान और अनुभव से बनती है। उन्होंने कहा, ‘सदियों की गुलामी ने हमारे देश की क्षमता के प्रति हीनता की भावना को जन्म दिया।’ उनके अनुसार, विदेशी विचारधाराओं ने यह धारणा स्थापित की कि भारतीय अशिक्षित और अधीन हैं।

    2014 से पहले की स्थिति

    पीएम मोदी ने 2014 से पहले के भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि अगर देश उसी निराशाजनक स्थिति में रहता, तो कोई भी देश व्यापार समझौता नहीं करता। उन्होंने बताया कि पिछले 11 वर्षों में देश की चेतना में एक नया उर्जा प्रवाहित हुआ है और भारत अब अपनी खोई हुई क्षमता को फिर से हासिल करने का प्रयास कर रहा है।

  • तापसी पन्नू ने इंडस्ट्री में क्लीवेज और कमर को लेकर नई बात कही

    तापसी पन्नू ने इंडस्ट्री में क्लीवेज और कमर को लेकर नई बात कही

    भारत में बॉलीवुड सितारा लैला खान का सामूहिक हत्या का मामला

    शुक्रवार, 27 फरवरी, 2026

    नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की चमक-दमक के पीछे एक जानलेवा काली कहानी छिपी हुई है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह कहानी है अभिनेत्री लैला खान की, जिन्होंने सुपरस्टार राजेश खन्ना के साथ ‘वफा’ फिल्म में काम किया था। अपनी खूबसूरती और अभिनय कौशल से पहचान बनाने वाली लैला खान और उनके परिवार की नृशंस हत्या ने पूरे देश में गहरा सदमा पहुँचाया है।

    हत्या का विवरण

    लैला खान और उनके परिवार का खौफनाक अंत उनके निवास पर हुआ, जहां उन्हें बेरहमी से हत्या के बाद छोड़ा गया। यह घटना न केवल फिल्म इंडस्ट्री के लिए बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी बनकर उभरी है। इस मामले ने कई सवाल उठाए हैं जैसे कि सुरक्षा, समाज में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्तियां और पुलिस के कार्यों की प्रभावशीलता।

    सामाजिक प्रतिक्रियाएँ

    अभिनेत्री की हत्या ने समाज के विभिन्न वर्गों में रोष और चिंता का संचार किया है। कई जन समूहों, नागरिक संगठनों और राजनीतिक नेताओं ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त की है और न्याय की माँग की है। लोग यह जानने को उत्सुक हैं कि इससे पहले ऐसी घटनाएँ क्यों बढ़ती जा रही हैं और इसपर रोक कैसे लगाई जा सकती है।

    मामले की जांच

    इस घटना के बाद, जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए इस मामले की गहन जांच शुरू की है। पुलिस ने विभिन्न पहलुओं की जांच की है, जिसमें लैला खान के व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के ऐसे तत्व शामिल हैं जो इस जघन्य अपराध से जुड़े हो सकते हैं।

  • स्नेहता पवार का एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का निर्णय बैठक में लिया गया

    स्नेहता पवार का एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने का निर्णय बैठक में लिया गया

    महाराष्ट्र की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन

    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में नेतृत्व परिवर्तन के साथ एक नया राजनीतिक अध्याय शुरू हुआ है। पार्टी की प्रमुख नेता और राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह निर्णय पार्टी की बैठक में लिया गया, जो राज्य की राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अजित पवार की हालिया विमान हादसे में मौत के बाद, पार्टी की जिम्मेदारियों में बड़ा परिवर्तन देखने को मिला है।

    अजित पवार के निधन के बाद का राजनीतिक संकट

    अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी अब सुनेत्रा पवार को सौंपी गई है और उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कमान भी प्राप्त हुई है। पिछले कुछ समय से एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चाएं चल रही थीं, लेकिन अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेताओं ने इस मामले में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। इस स्थिति के बाद पार्टी ने संगठन को सशक्त बनाने के लिए नया नेतृत्व चुना है, जिसमें सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया।

    राष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वसम्मति से निर्णय

    एनसीपी का राष्ट्रीय अधिवेशन 2026 में मुंबई के वर्ली क्षेत्र में आयोजित किया गया। इस अधिवेशन में पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी उपस्थित थे। अधिवेशन के दौरान सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी नेताओं ने एकमत से स्वीकार किया। पार्टी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने औपचारिक तौर पर उनके नाम की घोषणा की। साथ ही यह भी तय किया गया कि प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बने रहेंगे, जबकि महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका सांसद सुनील तटकरे संभालेंगे।

    सुनेत्रा पवार की बारामती से विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना

    राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज हो गई है कि सुनेत्रा पवार संभवतः बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं। यह सीट अजित पवार की राजनीतिक पहचान रही है। अगर उपचुनाव होता है, तो सांसद सुप्रिया सुले ने उम्मीद जताई है कि यह चुनाव निर्विरोध हो सकता है। ऐसे में यह संभावना जताई जा रही है कि सुनेत्रा पवार विधानसभा पहुंचकर राज्य की राजनीति में और मजबूत भूमिका निभा सकती हैं।

  • कांग्रेस ने मोदी की इजरायल यात्रा पर निशाना साधा, नेटन्याहू से मुलाकात को “आव जातिक प्रश्नों से जुड़ी” बताया

    कांग्रेस ने मोदी की इजरायल यात्रा पर निशाना साधा, नेटन्याहू से मुलाकात को “आव जातिक प्रश्नों से जुड़ी” बताया

    कांग्रेस का इजरायल यात्रा पर कड़ा रुख

    नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा पर केंद्र सरकार को कठोर आलोचना का निशाना बनाया है। पार्टी का कहना है कि जिस समय इजरायली नेतृत्व पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं, उस समय प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई नैतिक मुद्दों को जन्म देती है। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रस्तावित मुलाकात पर भी असहमति जताते हुए गाजा की स्थिति पर एक स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।

    जयराम रमेश का स्थिर रुख

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भारत के पूर्व की नीति पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि भारत का रुख हमेशा फिलिस्तीनी मुद्दे पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रहा है, लेकिन वर्तमान में यह परंपरा से भिन्न प्रतीत हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में हो रहे मानवता के संकट और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार जैसे विषयों पर भारत को और अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए।

    रमेश ने भारत के ऐतिहासिक दायित्व की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1960 के गाजा दौरे और बाद में फिलिस्तीन के समर्थन में लिए गए निर्णयों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता दी, जिससे वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र नीति पेश की गई।

    प्रियंका गांधी का गाजा मुद्दा उठाने का आग्रह

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने प्रधानमंत्री से उम्मीद जताई कि वे अपनी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट में गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति का जिक्र करेंगे और निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय की प्रतिबद्धता व्यक्त करेंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक दायित्व है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, न्याय और मानवता के मूल्यों की रक्षा करता रहे।

    सरकार का ध्यान: द्विपक्षीय सहयोग पर

    प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत और इजरायल के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से की जा रही है। 2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके परिणामस्वरूप कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।

    राजनीतिक और कूटनीतिक बहस का टकराव

    इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत की पश्चिम एशिया नीति पर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक पक्ष रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने की बात कर रहा है, जबकि दूसरे पक्ष की मांग है कि मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण का भी ध्यान रखा जाए।

  • पीएम मोदी बने पहले विश्व नेता, इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर्स का मील का पत्थर

    पीएम मोदी बने पहले विश्व नेता, इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर्स का मील का पत्थर

    प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फॉलोअर्स का आंकड़ा पार किया

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इंस्टाग्राम पर 100 मिलियन फॉलोअर्स की रिकॉर्ड संख्या तक पहुँचने वाले पहले प्रमुख नेता बन गए हैं। पिछले दशक में उनके इस सोशल मीडिया खाते ने विश्व नेताओं के बीच एक विशेष पहचान बनाई है। वर्तमान में, उनके फॉलोअर्स की संख्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फॉलोअर्स की तुलना में दोगुनी है।

    वर्ल्ड रैंकिंग में कौन कहां

    प्रधानमंत्री मोदी के बाद, डोनाल्ड ट्रम्प 43.2 मिलियन फॉलोअर्स के साथ दूसरे स्थान पर हैं। उनके बाद इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांतो का नाम आता है, जिनके फॉलोअर्स की संख्या 15 मिलियन है। इसके बाद ब्राजील के राष्ट्रपति 14.4 मिलियन और तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगन 11.6 मिलियन फॉलोअर्स के साथ क्रमशः चौथे और पांचवे स्थान पर हैं। अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई के फॉलोअर्स की संख्या 6.4 मिलियन है।

    भारत में कौन कहां

    प्रधानमंत्री मोदी के 100 मिलियन फॉलोअर्स की संख्या उनकी वैश्विक लोकप्रियता को दर्शाती है, जो युवाओं के बीच खासतौर पर बढ़ती जा रही है। भारत में अन्य राजनेताओं की तुलना में पीएम मोदी के फॉलोअर्स की संख्या में काफी अंतर है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 16.1 मिलियन फॉलोअर्स के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी लगभग 12.6 मिलियन फॉलोअर्स के साथ तीसरे स्थान पर हैं। दिसंबर 2025 तक, प्रधानमंत्री मोदी ने विश्व नेताओं के बीच सर्वाधिक लोकप्रियता स्तर बनाए रखा।

  • छत्तीसगढ़ के माड़ क्षेत्र में सक्रिय नक्‍सली नेता देवूजी ने सरेंडर किया

    छत्तीसगढ़ के माड़ क्षेत्र में सक्रिय नक्‍सली नेता देवूजी ने सरेंडर किया

    वाम उग्रवाद के खिलाफ बड़ी सफलता

    नई दिल्ली। वाम उग्रवाद (नक्सलवाद) के खिलाफ चल रहे अभियान के दौरान एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। तेलंगाना पुलिस के समक्ष शीर्ष माओवादी नेता देवूजी, जिसे थिप्पिरी तिरुपति के नाम से भी जाना जाता है, ने आत्मसमर्पण कर दिया है। इस अवसर पर उनके साथ तीन अन्य नक्सलियों ने भी अपने हथियार डाल दिए। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह घटना माओवादी नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।

  • भोपाल में खड़क के नेतृत्व में मोदी की ट्रंप के सामने बिनती

    भोपाल में खड़क के नेतृत्व में मोदी की ट्रंप के सामने बिनती

    कांग्रेस की किसान महाचौपाल: मोदी सरकार पर तीखा हमला

    भोपाल। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भोपाल में आयोजित किसान महाचौपाल के दौरान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ सरकार की नीतियों की आलोचना की। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते हुए उन्हें एक तानाशाही प्रवृत्ति वाला नेता बताया। खरगे ने कहा कि उनके राजनीतिक करियर के दौरान ऐसा प्रधानमंत्री उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर कर रही है और विपक्ष की आवाज को दमन कर रही है।

    प्रधानमंत्री पर कटाक्ष

    खरगे ने प्रधानमंत्री की योजनाओं और संस्थानों के नाम बदलने की आदत का मजाक उड़ाते हुए तंज किया कि मोदीजी को अपना नाम भी बदल लेना चाहिए, क्योंकि वे कांग्रेस के राज में ही जन्मे थे। यह टिप्पणी उन्होंने इस संदर्भ में की थी कि मोदी सरकार केवल नाम बदलने में ही लगी हुई है।

    किसानों के नुकसान का आरोप

    कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से किसानों को नुकसान होगा और उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाएगा। खरगे ने कहा कि पहले भारत को व्यापार में लाभ होता था, लेकिन मौजूदा नीतियों की वजह से किसानों के हितों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अन्य देश अपने किसानों के संरक्षण के लिए मजबूती से खड़े हैं, जबकि भारतीय सरकार सही तरीके से बात नहीं कर रही है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति का जिक्र

    खरगे ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हर मुद्दे पर उनकी बात मानने के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में केंद्र सरकार पर झुकाव का आरोप लगाया, खासकर तेल की खरीद और व्यापार नीतियों के संदर्भ में।

    ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल

    उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच कार्रवाई रुकवाई। खरगे ने इस निर्णय को अंतरराष्ट्रीय दबाव में लिया गया बताया और इसे एक बड़ी गलती माना। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी प्रश्न पूछने से बचते हैं और जनता से दूरी बनाए रखते हैं।

    संघर्ष का आह्वान

    कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की कि उन्हें डरने के बजाय संघर्ष करने की जरूरत है। उन्होंने संविधान और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रखने का संदेश दिया। खरगे ने बताया कि अमेरिका में कृषि पर केवल 3 प्रतिशत लोग निर्भर हैं, जबकि भारत में यह संख्या अधिक है। ऐसे में किसानों के हितों का संरक्षण करना बेहद आवश्यक है। इस कार्यक्रम से यह स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मुद्दे पर एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान चलाने की योजना बना रही है।

  • बंगाल में SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, झारखंड-ओडिशा के न्यायिक अधिकारी शामिल होंगे

    बंगाल में SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय, झारखंड-ओडिशा के न्यायिक अधिकारी शामिल होंगे

    कलकत्ता हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

    कलकत्ता हाई कोर्ट की एक बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची, और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं, ने एक महत्वपूर्ण पत्र पर ध्यान दिया है। इस पत्र में बताया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया में तैनात 250 जिला जजों को दावों और आपत्तियों का निपटारा करने में लगभग 80 दिन का समय लगेगा।

    चुनाव आयोग के खर्च का निर्देश

    इस फैसले ने चुनाव आयोग (EC) को झारखंड और ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों की तैनाती के लिए खर्च वहन करने का निर्देश दिया है। उच्चतम न्यायालय ने EC को 28 फरवरी को अंतिम निर्वाचन सूची प्रकाशित करने की अनुमति भी दी, और यह स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया के आगे बढ़ने पर चुनाव आयोग एक सप्लीमेंट्री सूची भी जारी कर सकता है। इस संदर्भ में, आर्टिकल 142 के तहत पूर्ण शक्तियों का उपयोग करते हुए, न्यायालय ने वोटरों को सप्लीमेंट्री निर्वाचन सूची में शामिल किया है ताकि वे 28 फरवरी को चुनाव आयोग द्वारा जारी की गई अंतिम सूची का हिस्सा बन सकें।

    वोटर सूची में विसंगतियां

    2002 की वोटर सूची से संबंधित विभिन्न विसंगतियों में माता-पिता के नामों में भिन्नता और वोटर व उसके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर शामिल है, जो 15 साल से कम या 50 साल से अधिक हो सकता है। 20 फरवरी को, पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच जारी खींचतान से निराश होकर, उच्चतम न्यायालय ने राज्य में विवादास्पद SIR प्रक्रिया में चुनाव आयोग की सहायता के लिए मौजूदा और पूर्व जिला जजों को तैनात करने का एक ‘असाधारण’ निर्देश दिया है।

    राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

    बेंच ने चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल में ‘लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई’ तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच चल रहे ‘दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप’ और “भरोसे की कमी” पर खेद जताया। इसके साथ ही, SIR प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नए निर्देश भी जारी किए गए हैं।

  • तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: कांग्रेस 45 सीटों की मांग, DMK केवल 25 देने के लिए तैयार

    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: कांग्रेस 45 सीटों की मांग, DMK केवल 25 देने के लिए तैयार

    तमिलनाडु में कांग्रेस और DMK के बीच सीट बंटवारे की बातचीत जारी

    नई दिल्ली। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले, तमिलनाडु में कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा चल रही है। कांग्रेस ने 45 सीटों की मांग की है, जबकि DMK केवल 25 सीटें देने को राजी है। इस राज्य में चुनाव इस साल अप्रैल-मई में होने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सीट बंटवारे पर बैठक

    कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और अन्य प्रमुख नेताओं ने हाल ही में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से बैठक की, जिसमें सीटों की संख्या को लेकर बातचीत की गई, लेकिन वर्तमान में कोई समझौता नहीं हो पाया है। कांग्रेस का कहना है कि यह मांग 2021 के चुनाव परिणामों की समीक्षा पर आधारित है। पिछले चुनाव में DMK ने 234 सीटों में से 173 पर चुनाव लड़ा और 133 सीटों पर विजय प्राप्त की जबकि 40 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।

    कांग्रेस के तर्क

    कांग्रेस का मानना है कि यदि उन्हें अधिक सीटें दी जाएं, तो उनकी मजबूत स्थानीय उपस्थिति और प्रत्यक्ष मुकाबलों में बेहतर एकजुटता के कारण पिछली बार हारी हुई लगभग 20 सीटें जीती जा सकती हैं। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, 45 सीटों की मांग का मुख्य उद्देश्य वोटों की संभावनाओं में सुधार करना और गठबंधन को मज़बूत करना है, जिससे 2026 में अधिक संतुलित सीटों का बंटवारा सुनिश्चित किया जा सके।

    चर्चाएँ जारी

    रविवार को चेन्नई में आयोजित एक बैठक में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल शामिल हुए, जिसमें दोनों दलों के वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे। इससे पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के कादर मोहिदीन ने DMK के नेताओं से मुलाकात की थी। इस प्रकार, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और DMK के बीच सीट बंटवारे को लेकर बातचीत का सिलसिला जारी है, लेकिन फिलहाल निष्कर्ष पर नहीं पहुँच सका है।