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  • राहुल गांधी ने असम के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी किया, 11 क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित

    राहुल गांधी ने असम के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी किया, 11 क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित

    कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनाव के लिए जारी किया घोषणा पत्र

    नई दिल्ली। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को असम विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का घोषणा पत्र प्रस्तुत किया। इस दस्तावेज में शासन, पहचान, और स्वास्थ्य जैसे 11 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह घोषणा पत्र एक चुनावी रैली के दौरान जारी किया गया, जिसमें असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई और अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित थे।

    घोषणा पत्र के मुख्य बिंदु

    इस घोषणा पत्र में कुल 11 संकल्प शामिल हैं, जो शासन, पहचान, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे के विकास, औद्योगीकरण, कृषि, ग्रामीण और शहरी विकास, जलवायु परिवर्तन और सुरक्षित असम पर केंद्रित हैं। कांग्रेस ने पहले भी 29 मार्च को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दौरे के दौरान ‘पांच गारंटी’ की घोषणा की थी।

    महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष योजनाएं

    घोषणा पत्र में महिलाओं के लिए बिना शर्त 50 हजार रुपये तक का कर्ज, सभी वरिष्ठ नागरिकों को 1250 रुपये की पेंशन, 25 लाख रुपये का कैशलेस इलाज, भूमि पुत्रों के लिए म्यादी पट्टा, और जुबीन गर्ग मामले में 100 दिन के भीतर दोषियों को सजा देने का वादा किया गया है।

    मतदान की तारीख

    126 सदस्यों वाली असम विधानसभा के लिए मतदान 9 अप्रैल को होगा, जबकि चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

    राहुल गांधी का बयान

    राहुल गांधी ने रैली में कहा कि असम एक विविधता से भरा क्षेत्र है जहाँ विभिन्न धर्म, जाति, और विचारधाराएँ बसती हैं। उन्होंने कांग्रेस की सोच को रेखांकित करते हुए कहा कि पार्टी चाहती है कि असम की सत्ता स्थानीय लोगों के हाथ में हो, न कि दिल्ली से। उन्होंने भाजपा की नीति की आलोचना की और कहा कि कांग्रेस असम की जनता को निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करने का प्रयास कर रही है।

    भ्रष्टाचार के आरोप

    कांग्रेस नेता ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पर गंभीर आरोप लगाए, उन्हें भारत का सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री बताते हुए कहा कि उनका नियंत्रण नरेंद्र मोदी और अमित शाह के हाथ में है। उन्होंने कहा कि भाजपा के नेतृत्व में असम में भ्रष्टाचार बढ़ा है और कांग्रेस की सरकार आने पर सरमा को इसकी सजा मिलेगी।

  • सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची विवाद पर टीएमसी की आपत्ति पर कहा ‘यह हर बार होता है’

    सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची विवाद पर टीएमसी की आपत्ति पर कहा ‘यह हर बार होता है’

    कोलकाता पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि एक साथ बड़ी संख्या में फॉर्म-6 का जमा होना कोई असामान्य घटना नहीं है, यह प्रक्रिया पहले भी देखी गई है। अदालत ने यह भी बताया कि यदि किसी नाम पर आपत्ति है, तो चुनाव आयोग के पास शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

    फॉर्म-6 को लेकर TMC की आपत्ति

    तृणमूल कांग्रेस के वकील कल्याण बनर्जी ने यह तर्क रखा कि एक ही व्यक्ति ने 30 हजार फॉर्म-6 जमा किए हैं। फॉर्म-6 का उपयोग मतदाता सूची में नाम जोड़ने या संसदीय क्षेत्र में परिवर्तन के लिए किया जाता है। उन्होंने कहा कि पूरक सूची आने के बाद भी नए फॉर्म स्वीकार हो रहे हैं, जिससे प्रक्रिया पर संदेह उत्पन्न होता है।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: यह पहली बार नहीं

    सुनवाई के दौरान न्यायालय ने कहा कि “ऐसा हर बार होता है, इसमें कुछ असामान्य नहीं है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी नए नाम पर आपत्ति दर्ज करने का विकल्प उपलब्ध है और संबंधित पक्ष चुनाव आयोग से संपर्क कर सकते हैं।

    चुनाव आयोग का पक्ष

    भारत निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि नियमों के अनुसार उम्मीदवारों के नामांकन की अंतिम तिथि तक मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति हाल ही में 18 वर्ष का हुआ है, तो उसे मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का अधिकार है।

    अदालत का प्रक्रिया को समझने की सलाह

    सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा कि इस मुद्दे पर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा और पूरी प्रक्रिया को समझना आवश्यक है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया कि चुनाव उसी सूची के आधार पर होते हैं, जो निर्धारित तिथि तक अपडेट की जाती है।

    अदालत ने संकेत दिया कि सभी आपत्तियों पर निर्णय 7 अप्रैल तक लिया जाएगा।

  • मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती गिरफ्तार, कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेजा

    मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती गिरफ्तार, कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेजा

    कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार

    दतिया। मध्यप्रदेश की राजनीति में कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को एक अदालत ने भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराया है। इस मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली की विशेष MP/MLA कोर्ट ने उन्हें दोषी मानते हुए तिहाड़ जेल भेजने का आदेश दिया है। सजा की अवधि का ऐलान कोर्ट अगले दिन करेगा।

    बैंक घोटाले का मामला

    यह मामला जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक, दतिया से संबंधित है। आरोप है कि राजेंद्र भारती ने बैंक के अध्यक्ष रहते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार कर और रिकॉर्ड में हेरफेर कर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में अनियमितताएं कीं। उन्होंने नियमों का उल्लंघन करते हुए 13.5 प्रतिशत की ऊंची ब्याज दर का अनुचित लाभ उठाया और FD की अवधि को अवैध तरीके से बढ़ाकर बैंक को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया।

    भारतीय दंड संहिता की धाराएं

    अदालत ने राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के तहत दोषी पाया है, जिनमें धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (फर्जी दस्तावेज), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 120B (आपराधिक साजिश) शामिल हैं। इस मामले में उन्हें पहले ही उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल पाई थी।

  • चुनाव से पूर्व भाजपा में शामिल हुए टेनिस सितारे लिएंडर पेस

    चुनाव से पूर्व भाजपा में शामिल हुए टेनिस सितारे लिएंडर पेस

    लिएंडर पेस ने भाजपा में शामिल होकर राजनीतिक पारी की शुरुआत की

    नई दिल्ली: भारतीय टेनिस के मशहूर खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़कर राजनीति में कदम रखा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले यह निर्णय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है। पेस, जो भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में से एक माने जाते हैं, के इस कदम को राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा नेता सुकांता मजुमादर भी उपस्थित थे। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल तेजी से गर्मा रहा है, और सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

    किरण रिजिजू की प्रतिक्रिया

    इस मौके पर किरेन रिजिजू ने कहा, “लिएंडर पेस का भाजपा में शामिल होना ऐतिहासिक है। पिछले 12 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेल और खिलाड़ियों को बढ़ावा देने का निरंतर प्रयास किया है।” लिएंडर पेस ने इसे अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण दिन बताया और कहा, “यह मेरे लिए एक बड़ा अवसर है, जहां मैं खेल और युवाओं की सेवा कर सकूंगा। प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और नितिन नबीन का धन्यवाद करना चाहता हूं।”

    युवाओं के लिए नए प्रयास

    लिएंडर पेस ने अपने करियर में भारत के लिए कई ओलंपिक पदक और ग्रैंड स्लैम जीते हैं, और अब वह राजनीति में नई जिम्मेदारियां निभाने के लिए तैयार हैं। उनका भाजपा से जुड़ना यह दर्शाता है कि पार्टी खेल जगत के प्रमुख चेहरों को अपने साथ जोड़कर अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहती है। पेस ने कहा, “मैंने 40 वर्षों तक देश के लिए खेला है, अब समय है युवाओं की सेवा करने का।” उन्होंने केंद्र सरकार की खेल योजनाओं की सराहना करते हुए कहा, “खेलो इंडिया मूवमेंट और टॉप्स स्कीम बहुत शानदार पहलों में से एक हैं।”

    बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी

    पेस ने पश्चिम बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर भी बात की। उन्होंने कहा, “भारत सबसे युवा देश है, और हमें अगले 20-25 वर्षों में खेल शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए। 1986 में बंगाल में खेल का इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत कम था, और आज भी इंडोर टेनिस कोर्ट की कमी है। हमें युवाओं को खेल शिक्षा के माध्यम से प्रेरित करना होगा। मेरा सपना है कि भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए समान अवसर वाली स्कॉलरशिप कार्यक्रम शुरू किया जाए।”

    पार्टी की उम्मीदें

    भाजपा को उम्मीद है कि पेस की लोकप्रियता युवा और खेल प्रेमी मतदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव डालेगी। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि पेस चुनावी मैदान में उतरेंगे या नहीं, लेकिन उनकी छवि और अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत आधार साबित हो सकते हैं।

    पेस परिवार की पृष्ठभूमि

    लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था। उनके दिवंगत पिता वेस पेस ने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और उनकी मां जेनिफर पेस ने 1980 एशियन बास्केटबॉल टीम की अगुआई की थी। वेस पेस का पिछले वर्ष निधन हो गया था।

    ओलंपिक में कांस्य पदक की उपलब्धि

    लिएंडर पेस ने 1996 के अटलांटा ओलंपिक में पुरुष टेनिस के एकल वर्ग में कांस्य पदक जीता था, और वह व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने। उन्हें 1996-97 में खेल रत्न अवार्ड, 1990 में अर्जुन अवार्ड, 2001 में पद्म श्री और 2014 में पद्म भूषण से नवाजा गया था।

    ग्रैंड स्लैम की उपलब्धियाँ

    हालांकि पेस ने पुरुष एकल में कोई ग्रैंड स्लैम नहीं जीता, लेकिन पुरुष युगल में उनके नाम आठ ग्रैंड स्लैम ट्रॉफीज हैं। उन्होंने 2012 में ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता, साथ ही 1999, 2001 और 2009 में फ्रेंच ओपन, 1999 में विंबलडन और 2006, 2009 और 2013 में यूएस ओपन का खिताब भी जीता। वह मिक्स्ड डबल्स में 10 ग्रैंड स्लैम खिताब भी जीत चुके हैं।

  • कांग्रेस ने विदिशा में अनोखे प्रदर्शन में गैस सिलेंडर का मजाकिया अंतिम संस्कार किया

    कांग्रेस ने विदिशा में अनोखे प्रदर्शन में गैस सिलेंडर का मजाकिया अंतिम संस्कार किया

    कांग्रेस का विदिशा में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन

    विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में कांग्रेस पार्टी ने बढ़ती महंगाई और स्थानीय समस्याओं के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने गैस टंकी की अर्थी निकालकर अनोखा प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना दिया और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

    महंगाई के खिलाफ विशाल रैली

    सोमवार को विदिशा के लटेरी क्षेत्र में, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गैस सिलेंडर और बिजली बिलों की बेतहाशा बढ़ोतरी, साथ ही डीजल-पेट्रोल की कमी के विरोध में सिरोंज चौराहे से जय स्तंभ चौराहे तक एक विशाल रैली निकाली। इस रैली का प्रमुख आकर्षण गैस की टंकी और बिजली बिलों की ‘अर्थी’ का प्रदर्शन था, जो महंगाई के खिलाफ उनकी चिंता को व्यक्त करता था।

    शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    प्रदर्शन के दौरान, कांग्रेस कार्यकर्ता गैस सिलेंडर पर माथा पटककर जनता पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को दर्शाते हुए विलाप करते नजर आए। रैली के बाद कार्यकर्ताओं ने चौराहे पर धरना दिया और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही, कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

    सांदीपनि विद्यालय के खराब परीक्षा परिणाम पर नाराजगी

    ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष यदवीर सिंह बघेल और अन्य कार्यकर्ताओं ने स्थानीय सांदीपनि विद्यालय के खराब परीक्षा परिणाम पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने शिक्षकों के तत्काल स्थानांतरण की मांग की। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आम आदमी की जिंदगी कठिन होती जा रही है।

  • कांग्रेस नेता ने अशोक खरात मामले में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए

    कांग्रेस नेता ने अशोक खरात मामले में सरकार पर गंभीर आरोप लगाए

    विजय वडेट्टीवार के गंभीर आरोप, अशोक खरात मामले में बड़ा खुलासा

    मुंबई। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने अशोक खरात के मामले को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले का सच सामने आया, तो यह सरकार पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। वडेट्टीवार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्वयंभू बाबा अशोक खरात को कुछ प्रभावशाली लोगों की रक्षा के लिए बलि का बकरा बनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका व्यक्त की कि सबूतों को नष्ट करने का प्रयास किया जा सकता है और खरात को गंभीर नुकसान पहुंचाने का खतरा है, जिससे एक ‘एपस्टीन जैसा मामला’ उत्पन्न हो सकता है।

    39 विधायकों के संपर्क का मुद्दा

    वडेट्टीवार ने कहा कि खरात को कठोर सजा मिलनी चाहिए और उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जिन्होंने इस मामले में उसकी सहायता की। उन्होंने मंत्री दीपक केसरकर के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें 39 विधायकों के खरात से संपर्क में होने का जिक्र किया गया था। वडेट्टीवार ने मांग की कि इन विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं और केसरकर से जुड़े नामों को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है और इसमें शामिल सभी व्यक्तियों, चाहे वे विधायक हों या मंत्री, की गहन जांच होनी चाहिए।

    पीएम मोदी पर निशाना

    इस दौरान वडेट्टीवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय चुनावी राजनीति में अधिक व्यस्त है। उन्होंने पश्चिम एशिया संकट के बीच आवश्यक वस्तुओं, जैसे कि एलपीजी सिलेंडर, के लिए बढ़ती लंबी कतारों का उल्लेख करते हुए सरकार की तैयारियों पर सवाल खड़े किए।

    खरात की पुलिस हिरासत बढ़ाई गई

    इस बीच, महाराष्ट्र में नासिक की एक अदालत ने बलात्कार के आरोप में गिरफ्तार स्वयंभू बाबा अशोक खरात की पुलिस हिरासत को बढ़ाकर एक अप्रैल तक कर दिया है। खरात को 18 मार्च को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब एक महिला ने उन पर तीन साल से अधिक समय तक बार-बार बलात्कार करने का आरोप लगाया। खरात नासिक जिले के मिरगांव में एक मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख हैं और कई प्रमुख राजनेताओं के साथ उनके संबंध रहे हैं। अब तक उनके खिलाफ 10 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं, जिनमें से अधिकांश यौन उत्पीड़न से संबंधित हैं।

    100 से अधिक शिकायतें मिलीं

    पुलिस ने बताया कि खरात के खिलाफ जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को हाल के दिनों में 100 से अधिक फोन शिकायतें मिली हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं शामिल हैं। खरात को पिछली पुलिस हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद अदालत में पेश किया गया। लोक अभियोजक शैलेंद्र बागडे ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी सहयोग नहीं कर रहा है।

    पानी की जांच और अन्य सबूत

    बागडे ने कहा कि कई महिलाएं अब भी शिकायत दर्ज कराने के लिए आगे आ रही हैं और उस ‘पानी या तरल पदार्थ’ की जांच अभी बाकी है, जिसे खरात यौन शोषण से पहले पीड़ितों को बहलाने के लिए देते थे। उन्होंने बताया कि आरोपी के मोबाइल फोन डेटा की जांच की गई है और ‘क्लोन रिपोर्ट’ प्राप्त हो चुकी है।

    राजनीतिक संपर्कों की जांच जारी

    अभियोजक ने अदालत को सूचित किया कि यह भी जांच की जाएगी कि क्या खरात ने अपने राजनीतिक संपर्कों के नाम फर्जी पहचान के साथ अपने फोन में सेव किए थे। सरकारी वकील ने कहा कि विस्तृत जांच के लिए तीन और दिन की हिरासत की आवश्यकता है। हालांकि, बचाव पक्ष के वकील सचिन भाटे ने कहा कि एसआईटी वही तर्क दे रही है जो पहले की सुनवाई में पेश किए गए थे और उन्होंने आरोप लगाया कि जांच पूरी हो चुकी है।

    एक पीड़ित का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील एम वाई काले ने खरात की पुलिस हिरासत बढ़ाने के अभियोजक की मांग का समर्थन किया। सुनवाई के बाद, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एम वी भराडे ने खरात की पुलिस हिरासत एक अप्रैल तक बढ़ा दी।

  • सत्ता में आने पर करप्शन फाइलें खोलने का वादा, पीएम मोदी ने LDF और UDF पर किया हमला

    सत्ता में आने पर करप्शन फाइलें खोलने का वादा, पीएम मोदी ने LDF और UDF पर किया हमला

    PM मोदी ने केरल में एलडीएफ और यूडीएफ पर कसा तंज

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को केरल के पलक्कड़ में आयोजित एक रैली में राज्य की राजनीतिक स्थिति पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) दोनों का आलोचना करते हुए कहा कि केरल पिछले कई वर्षों से इन दोनों राजनीतिक धड़ों के बीच फंसा हुआ है।

    राज्य की राजनीतिक चुनौतियां

    मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि केरल में राजनीतिक दलों के बीच मतलबी राजनीति के कारण राज्य का विकास रुक गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि LDF और UDF ने राज्य के विकास में रुकावट डालने का कार्य किया है, जिससे आम जनता को लाभ नहीं मिल रहा है।

    भविष्य की योजनाएं

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करेंगे और जनता के सामने सच्चाई लाएंगे। यह बयान उन समस्याओं की ओर इशारा करता है जो पिछले कई वर्षों से केरल में व्याप्त हैं।

  • टी. राजा सिंह का राम नवमी पर बयान – ‘भारत हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं बन सकता?’

    टी. राजा सिंह का राम नवमी पर बयान – ‘भारत हिंदू राष्ट्र क्यों नहीं बन सकता?’

    टी. राजा सिंह का विवादास्पद बयान

    हैदराबाद। तेलंगाना के गोशामहल से विधायक टी. राजा सिंह ने राम नवमी के अवसर पर आयोजित शोभायात्रा के दौरान ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने वालों के खिलाफ बोलते हुए सवाल उठाया कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने में क्या समस्या है।

    विरोध का सामना

    उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जो लोग भारत को अपना देश मानते हैं, उन्हें इन नारों का विरोध नहीं करना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि इन नारों को लगाने या गीत गाने से किसी धर्म को खतरा नहीं होता है।

    हिंदू एकता की अपील

    हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पर चर्चा करते हुए, सिंह ने हिंदुओं से जातिगत भेदभाव भुलाकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब दुनिया में कई इस्लामी देश हैं, तो भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में क्या आपत्ति हो सकती है। इसके साथ ही, उन्होंने विभिन्न राज्यों की पुलिस द्वारा संदिग्ध आतंकवादियों की गिरफ्तारी की सराहना भी की।

    फिल्मों की बदलती दिशा

    इस कार्यक्रम के दौरान, टी. राजा सिंह ने हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘धुरंधर 2’ की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पहले की फिल्मों में भारत को कमजोर दिखाया जाता था, जबकि अब ऐसी फिल्में बन रही हैं जो लोगों को जागरूक कर रही हैं।

    राजनीतिक बहस का तापमान बढ़ता हुआ

    सिंह ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि यदि कोई देश या धर्म को गलत दृष्टिकोण से देखेगा, तो उसे माफ नहीं किया जाएगा। उनके इस बयान के बाद, हिंदू राष्ट्र पर राजनीतिक चर्चा एक बार फिर से तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।

  • बिहार में JDU ने MP-राजस्थान मॉडल के खिलाफ स्पष्ट किया, CM नीतीश के उत्तराधिकारी पर चर्चा प्रारंभ

    बिहार में JDU ने MP-राजस्थान मॉडल के खिलाफ स्पष्ट किया, CM नीतीश के उत्तराधिकारी पर चर्चा प्रारंभ

    बिहार की राजनीति में हलचल: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे पर अटकलें

    पटना। बिहार की राजनीति में इस समय काफी गतिविधियाँ देखने को मिल रही हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की संभावनाओं पर चर्चा जोरों पर है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को यह उम्मीद थी कि नीतीश कुमार 26 मार्च को उनकी “समृद्धि यात्रा” का समापन करने के बाद अपने पद से इस्तीफा देंगे।

    मुख्यमंत्री की संभावित उत्तराधिकार की चर्चाएँ

    जदयू (जनता दल यूनाइटेड) ने स्पष्ट किया है कि वह बिहार में राजस्थान या मध्य प्रदेश जैसे राजनीतिक प्रयोगों से बचना चाहती है। पार्टी के अंदर नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएँ प्रारंभ हो गई हैं, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है।

    भाजपा की रणनीति पर असर

    भाजपा नेताओं का मानना है कि यदि नीतीश कुमार अपने पद से हटते हैं, तो इससे उनकी पार्टी की स्थिति पर असर पड़ेगा। वहीं, जदयू के अंदर भी नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है।

  • नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया

    नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया

    नीतीश कुमार का सीएम पद से इस्तीफा, नया राजनीतिक युग शुरू

    पटना। बिहार में लगभग दो दशकों तक चली नीतीश कुमार की सरकार समाप्त होने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 30 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय ले चुके हैं। उन्हें 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया था और अब वे बिहार विधान परिषद की सदस्यता से भी त्यागपत्र देंगे। गौरतलब है कि बिहार विधान सभा और विधान परिषद की छुट्टियां 29 मार्च तक हैं। इसी प्रकार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने जा चुके हैं।

    नीतीश कुमार की राज्यसभा में रुचि

    नीतीश कुमार ने 5 मार्च को सोशल मीडिया पर अपनी राज्यसभा में जाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसके बाद से इस पर चर्चा का आगाज हो गया था। उनके इस निर्णय ने बिहार की राजनीतिक स्थिति में हलचल मचा दी है। विपक्ष ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं नीतीश की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) में भी असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि बिहार की जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में चुना है, न कि राज्यसभा के लिए।

    नीतीश कुमार बने रहेंगे जेडीयू के अध्यक्ष

    नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद उनकी पार्टी के अध्यक्ष पद को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, हाल ही में यह स्पष्ट हो गया है कि नीतीश कुमार ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा था और उनके खिलाफ कोई अन्य उम्मीदवार नहीं है। इससे यह सुनिश्चित हो गया है कि नीतीश कुमार निर्विरोध तरीके से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाएंगे। वे दिल्ली से ही बिहार में पार्टी का नेतृत्व जारी रखेंगे।

  • संसद में राहुल गांधी की टी-शर्ट पर रिजिजू ने उठाए सवाल

    संसद में राहुल गांधी की टी-शर्ट पर रिजिजू ने उठाए सवाल

    केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू का राहुल गांधी पर बयान

    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने हाल ही में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के बारे में टिप्पणी की, जिसमें उन्होंने कहा कि राहुल का विचार उनके सक्रिय सलाहकारों द्वारा ‘हाईजैक’ कर लिया गया है। रिजिजू ने यह भी कहा कि राहुल संसद में वही बातें करते हैं जो उनके सलाहकार उन्हें बताते हैं। इसके साथ ही, उन्होंने राहुल गांधी के सदन में कैजुअल कपड़ों में आने पर सवाल उठाया। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि उन्हें ऐसे व्यक्तियों से संवाद करना अधिक सरल लगता है, जिन्होंने संसद में अपने विचारों को प्रस्तुत करने में ठोस योगदान दिया हो।

    संसद में शिष्टाचार का महत्व

    रिजिजू ने कहा, “व्यक्तिगत रूप से, मुझे राहुल गांधी से कोई समस्या नहीं है। हम एक-दूसरे से मिलते हैं और बातचीत करते हैं, क्योंकि वे विपक्ष के नेता हैं। हालांकि, जब आप औपचारिक रूप से सदन में बोलते हैं, तो आपको परंपराओं और शिष्टाचार का पालन करना चाहिए। ये संसदीय लोकतंत्र के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।”

    विपक्ष की भूमिका और कपड़ों का चयन

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि राहुल गांधी का दिमाग उनके सलाहकारों ने प्रभावित किया है, और वे वही बातें करते हैं जो उन्हें निर्देशित किया जाता है। उन्होंने बताया कि जब भाजपा विपक्ष में थी, तब उसने कुछ मानकों का पालन करते हुए विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन उसने अपनी सीमाओं का उल्लंघन नहीं किया।

    शालीनता और कपड़ों का प्रभाव

    रिजिजू ने राहुल गांधी के कैजुअल कपड़ों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को उचित तरीके से व्यवहार करना चाहिए, जिसमें कपड़ों का चयन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति नेता विपक्ष के रूप में कार्य करता है, तो उन्हें एक विशेष शिष्टाचार का पालन करना चाहिए। मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि अनुभवी कम्युनिस्ट नेता सोमनाथ चटर्जी ने जब लोकसभा स्पीकर की भूमिका ग्रहण की, तो उन्होंने अपने कपड़ों का ध्यान रखा।

    रिजिजू ने कहा, “हालांकि, मैं टी-शर्ट पहनने के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन यह उचित नहीं लगता।” उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता को ऐसे कपड़े पहनने चाहिए जो उनके पद की गरिमा के अनुरूप हों।

  • एबीवीपी के विरोध के बाद, जम्मू विश्वविद्यालय से जिन्ना हटाया जाएगा, भगत सिंह पाठ्यक्रम में शामिल होंगे

    एबीवीपी के विरोध के बाद, जम्मू विश्वविद्यालय से जिन्ना हटाया जाएगा, भगत सिंह पाठ्यक्रम में शामिल होंगे

    जम्मू यूनिवर्सिटी में जिन्ना की जगह भगत सिंह के विचार पढ़ाए जाएंगे

    जम्मू। जम्मू विश्वविद्यालय में अब मोहम्मद अली जिन्ना की जगह शहीद भगत सिंह के विचारों को सिलेबस में शामिल किया जाएगा। पॉलिटिकल साइंस विभाग के बोर्ड ऑफ स्टडीज की हालिया बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन्ना को पाठ्यक्रम से हटा कर भगत सिंह को जोड़ा जाएगा। बैठक में अल्लामा इकबाल और सर सैयद अहमद खान के नाम पर किसी भी सदस्य ने आपत्ति नहीं की, इसलिए इनका नाम पाठ्यक्रम में बनाए रखा जाएगा।

    बैठक का उद्देश्य और चर्चाएँ

    यह बैठक पॉलिटिकल साइंस विभाग के अध्यक्ष की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें विश्वविद्यालय से जुड़े सभी कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य सिलेबस की समीक्षा करना और आवश्यक संशोधन करना था। चर्चा के दौरान विभिन्न मुद्दों पर गहन वार्ता हुई, जिसमें कई मामलों पर मतभेद भी सामने आए। एक सदस्य के अनुसार, विभागाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि राजनीति विज्ञान में सभी प्रकार के विचारों को पढ़ाना आवश्यक है। किसी विषय की सही समझ के लिए उसके सभी पहलुओं को जानना जरूरी है।

    विचारों की विविधता का महत्व

    उदाहरण के तौर पर उन्होंने कहा कि रामायण को समझने के लिए राम और रावण दोनों के दृष्टिकोण को जानना आवश्यक है। इसी प्रकार, राजनीति विज्ञान को एकतरफा तरीके से नहीं पढ़ाया जा सकता। आजादी के आंदोलन के दौरान पंडित नेहरू, सरदार पटेल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं के साथ-साथ अन्य विचारों को भी समझना जरूरी है।

    जिन्ना पर आपत्तियाँ और निर्णय

    बैठक में कई सदस्यों ने जिन्ना को पाठ्यक्रम में बनाए रखने पर कड़ी आपत्ति जताई। कुछ सदस्यों ने जिन्ना को अल्पसंख्यकों के नेता के रूप में पढ़ाने पर भी गंभीरता से चर्चा की। काफी देर तक चली चर्चा के बाद, अंततः सहमति बनी कि जिन्ना से जुड़े विषयों को सिलेबस से हटा दिया जाए। इस निर्णय के बाद, समिति ने शहीद भगत सिंह को पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया।

    भगत सिंह का समावेश

    बैठक में यह निर्णय लिया गया कि भगत सिंह को आजाद भारत के दृष्टिकोण से पढ़ाया जाएगा। वहीं, अल्लामा इकबाल और सर सैयद अहमद खान के नाम पर किसी ने आपत्ति नहीं की, इसलिए इन दोनों को सिलेबस में बनाए रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में लिए गए निर्णयों को अंतिम मंजूरी के लिए कुलपति को भेज दिया गया है।

    पिछली बैठक के निर्णय

    इससे पहले, रविवार को पॉलिटिकल साइंस विभाग की डिपार्टमेंटल अफेयर्स कमेटी (डीएसी) की बैठक में भी पाठ्यक्रम से कुछ विषयों को हटाने पर सहमति बनी थी। कमेटी ने जिन्ना, इकबाल और सर सैयद अहमद खान से जुड़े विषयों को हटाने की सिफारिश की थी। मंगलवार को हुई बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई।

  • गुजरात विधानसभा ने सभी के लिए समान कानून हेतु UCC बिल पारित किया

    गुजरात विधानसभा ने सभी के लिए समान कानून हेतु UCC बिल पारित किया

    गुजरात सरकार ने पारित किया समान नागरिक संहिता विधेयक 2026

    अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा ने हाल ही में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 2026 को मंजूरी दी है। इस विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक और विरासत जैसे मुद्दों पर सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान कानूनों की व्यवस्था करना है। इस संदर्भ में, उत्तराखंड के बाद गुजरात दूसरा राज्य बन गया है जो ऐसा कानून लागू करने जा रहा है। यह कानून राज्य के निवासियों के साथ-साथ उन गुजरातियों पर भी लागू होगा जो बाहर रहते हैं, लेकिन अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इस विधेयक में बहुविवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन संबंधों के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन का प्रावधान शामिल है।

    गुजरात बना यूसीसी वाला दूसरा राज्य

    मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने मंगलवार को विधानसभा में गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पेश किया। इसके पारित होने के साथ, गुजरात यूसीसी विधेयक पारित करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है, जबकि उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में इसी प्रकार का विधेयक पारित किया था।

    विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट

    गुजरात सरकार ने यूसीसी के कार्यान्वयन पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, जिसने एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। ‘गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026’ नामक यह प्रस्तावित कानून राज्य में और उसके बाहरी निवासियों पर लागू होगा।

    समान कानूनी ढांचे की आवश्यकता

    यह विधेयक अनुसूचित जनजातियों और कुछ विशेष समूहों पर लागू नहीं होगा, जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के अंतर्गत संरक्षित हैं। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में एक समान कानूनी ढांचा स्थापित करना है।

    एक से अधिक शादियों पर रोक

    इस विधेयक में लिव-इन संबंधों के रजिस्ट्रेशन और उनके औपचारिक समापन का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, यह एक से अधिक शादियों पर भी रोक लगाता है। विधेयक के अनुसार, इस कोड के तहत विवाह तब ही मान्य होगा जब विवाह के समय दोनों पक्षों में से किसी का भी जीवित जीवनसाथी न हो।

    अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन

    इस विधेयक के खिलाफ अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं ने लाल दरवाजे पर प्रदर्शन किया, जिसके दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इसके अलावा, AIMIM के कार्यकर्ता भी इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं।

  • नीतीश कुमार JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए, कोई नामांकन नहीं मिला

    नीतीश कुमार JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध चुने गए, कोई नामांकन नहीं मिला

    नीतीश कुमार फिर बने जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष

    नई दिल्ली। नीतीश कुमार को एक बार फिर से जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्विरोध रूप से चुना गया है। नामांकन के लिए सुबह 11 बजे तक का समय निर्धारित किया गया था, लेकिन इस दौरान नीतीश कुमार के अलावा किसी अन्य नेता ने अपना पर्चा दाखिल नहीं किया। इस स्थिति के कारण उन्हें सर्वसम्मति से पार्टी की अध्यक्षता सौंप दी गई है।

    निर्वाचन प्रक्रिया का विवरण

    जेडीयू की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि अध्यक्ष पद के लिए नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि मंगलवार, 24 मार्च, 2026 को सुबह 11 बजे थी। समय खत्म होने के बाद निर्वाचन अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही शेष रहा। इस अवसर पर निर्वाचन अधिकारी अनिल प्रसाद हेगड़े, जो पूर्व सांसद रह चुके हैं, दोपहर 2:30 बजे नीतीश कुमार को निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंपेंगे।

    पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति

    इस मौके पर पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा में संसदीय दल के नेता संजय कुमार झा, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और अन्य वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहेंगे। नीतीश कुमार के साथ जेडीयू अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करने वाले संजय कुमार झा और श्रवण कुमार के अलावा बिहार एवं अन्य प्रदेशों से आए पार्टी के वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे।

    राजनीतिक पृष्ठभूमि

    नीतीश कुमार ने जेडीयू की एनडीए में वापसी से पहले पार्टी की कमान संभाली थी। दिसंबर 2023 में, राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने जेडीयू के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उस समय पार्टी बिहार में महागठबंधन का हिस्सा थी और नीतीश कुमार इंडिया ब्लॉक के गठन की प्रक्रिया में जुटे थे। ललन सिंह के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली और कुछ ही समय में जेडीयू ने आरजेडी और महागठबंधन से संबंध तोड़कर बीजेपी की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को अपना लिया।

    भविष्य की राजनीति के संकेत

    हाल ही में, नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था और राज्यसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। अब जब वे जेडीयू के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी संभालेंगे, उनके बेटे निशांत कुमार ने भी राजनीति में कदम रखा है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि निशांत को बिहार का डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है, जबकि मुख्यमंत्री के नाम को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

  • बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी, राज्यभर में सतर्कता बढ़ी

    बंगाल में अंतिम मतदाता सूची जारी, राज्यभर में सतर्कता बढ़ी

    पश्चिम बंगाल में पहली पूरक मतदाता सूची का प्रकाशन

    कोलकाता। चुनाव आयोग ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में पहली पूरक मतदाता सूची जारी करने की योजना बनाई है। इस संदर्भ में पूरे राज्य के थानों को अलर्ट पर रखा गया है। निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, 27 लाख से अधिक मामलों का उचित सत्यापन कर लिया गया है।

    विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया

    निर्वाचन आयोग सोमवार शाम को पश्चिम बंगाल के लिए पहली सप्लिमेंट्री वोटर लिस्ट जारी कर सकता है। यह कार्य विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि यह सूची अंतिम मतदाता सूची की तरह जारी की जाएगी, जिसकी प्रतियां जिला निर्वाचन अधिकारियों को भेजी जाएंगी और फिर राज्य के मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित की जाएंगी।

    27 लाख मामलों का निपटारा

    निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि समीक्षा प्रक्रिया व्यापक रही है और 27 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया है। ये मामले उन 60 लाख मतदाताओं में शामिल थे, जिन्हें 28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में ‘विचाराधीन’ के रूप में चिह्नित किया गया था।

    राज्य में हाई अलर्ट स्थिति

    पहली पूरक मतदाता सूची के संभावित प्रकाशन के मद्देनजर, राज्य प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए सभी थानों और पुलिस प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है। गृह विभाग ने जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस तैनात करने और कानून-व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखने का भी निर्देश दिया गया है।

    अनिश्चितता का समाधान

    मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने पुष्टि की है कि सोमवार को अनुपूरक मतदाता सूची जारी की जाएगी, जिससे बड़ी संख्या में मतदाताओं की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। 28 फरवरी को जारी अंतिम एसआईआर सूची में 60 लाख से अधिक नामों को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया था, जिससे उनकी स्थिति अनसुलझी रह गई थी।

    न्यायिक अधिकारियों की भूमिका

    सीईओ कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार तक 27 लाख मामलों की समीक्षा की जा चुकी है। न्यायिक अधिकारियों के एक पैनल ने इन मामलों का निपटारा किया है। तार्किक विसंगति से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए 700 से अधिक न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पहले कहा था कि चुनाव से पहले विचाराधीन मामलों का हल होना संभव है।

    अपीलों के लिए स्थापित निकाय

    भारत के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर, भारत चुनाव आयोग ने राज्य में पुनरीक्षण प्रक्रिया से जुड़े विवादों के समाधान के लिए 19 जिला-स्तरीय अपीलीय निकाय स्थापित किए हैं। ये निकाय उन मामलों की सुनवाई के लिए जिम्मेदार होंगे जो आधिकारिक निबटारे में असफल रहे थे।

    मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस शिवगणनम को कोलकाता और उत्तर 24 परगना जैसे प्रमुख जिलों में अपीलों की निगरानी के लिए नियुक्त किया गया है। अन्य सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को भी शेष जिलों में इसी प्रकार के मामलों को संभालने का कार्य सौंपा गया है। पुनरीक्षण प्रक्रिया में हुई देरी पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिन्होंने अधिकारियों पर वैध मतदाताओं को परेशान करने का आरोप लगाया है।

  • ओवैसी की AIMIM बंगाल चुनावों में उतरेगी; हुमायूँ कबीर के साथ गठबंधन, 182 सीटों पर लड़ेगी

    ओवैसी की AIMIM बंगाल चुनावों में उतरेगी; हुमायूँ कबीर के साथ गठबंधन, 182 सीटों पर लड़ेगी

    पश्चिम बंगाल में नया राजनीतिक गठबंधन: ओवैसी और कबीर का साथ

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आया है। AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। इस गठबंधन की औपचारिक जानकारी 25 मार्च को कोलकाता में ओवैसी और कबीर द्वारा आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी जाएगी।

    उम्मीदवारों की संख्या और सीटें

    हुमायूं कबीर की पार्टी ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वह 182 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारेगी। AIMIM भी इस गठबंधन का हिस्सा है और लगभग आठ सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े कर सकती है। कबीर ने अब तक 18 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें रानीनगर, भगवानगोला और मुर्शिदाबाद जैसी महत्वपूर्ण सीटें शामिल हैं। हुमायूं कबीर स्वयं तीन सीटों: भगवानगोला, नौदा और राजीनगर, जो मुर्शिदाबाद जिले में आती हैं, से चुनाव लड़ेंगे।

    चुनाव की तारीखें

    पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव दो चरणों में होंगे:

    • पहला चरण (152 सीटें): 23 अप्रैल 2026
    • दूसरा चरण (142 सीटें): 29 अप्रैल 2026
    • परिणाम: 4 मई 2026 को घोषित होंगे

    राजनीतिक संदर्भ

    ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) और मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच होने वाले मुकाबले में ओवैसी और कबीर का यह गठबंधन मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। 2021 के चुनाव में कांग्रेस और वामपंथी दलों की स्थिति कमजोर हुई थी, जिससे यह नया गठबंधन राज्य की राजनीति में ‘तीसरे कोण’ के रूप में उभरने का प्रयास कर रहा है।

  • मायावती ने मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के लिए रणनीति बनाई

    मायावती ने मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ के लिए रणनीति बनाई

    मायावती का विधानसभा चुनावों के लिए स्पष्ट संदेश

    नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती ने आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि बसपा केवल उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता में आने के लक्ष्य के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी। हाल ही में मध्य प्रदेश, बिहार, और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ आयोजित एक विस्तृत बैठक में उन्होंने अपनी जीत की योजना साझा की। इस बैठक में पिछले समय की रणनीतियों की समीक्षा भी की गई और मायावती ने पार्टी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और जनाधार बढ़ाने पर जोर दिया।

    सत्ता की मास्टर चाबी पर जोर

    मायावती ने आगामी राजनीतिक परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने लखनऊ में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मध्य प्रदेश, बिहार, और छत्तीसगढ़ की पार्टी समितियों के साथ अपने विचार साझा किए। बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जातिवादी शोषण और गरीब विरोधी शासन से छुटकारा पाने का एकमात्र उपाय ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ अपने हाथ में लेना है। उन्होंने इन राज्यों के पदाधिकारियों को मिशनरी भावना के साथ कार्य करने का निर्देश दिया।

    भावनात्मक अपील

    बैठक के दौरान मायावती ने भावुकता के साथ कहा कि मान्यवर कांशीराम जी के मिशन को पूरा करने के लिए वह पूरी मेहनत से जुटी हैं। उन्होंने बताया कि जब-जब BSP मजबूत हुई है, तब-तब दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, और अल्पसंख्यकों का वास्तविक विकास हुआ है। चुनावी सफलता अब समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए मायावती ने कहा कि केवल अंबेडकरवादी आंदोलन को आगे बढ़ाकर ही बहुजन समाज अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

  • USCIRF रिपोर्ट के खिलाफ 275 से अधिक पूर्व जजों ने जताया विरोध

    USCIRF रिपोर्ट के खिलाफ 275 से अधिक पूर्व जजों ने जताया विरोध

    USCIRF की रिपोर्ट पर पूर्व जजों और अधिकारियों का विरोध

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश करने वाली हालिया रिपोर्ट के खिलाफ 275 से अधिक पूर्व जजों, सिविल सेवकों और सेना के पूर्व अधिकारियों ने कड़ा विरोध व्यक्त किया है। इन व्यक्तियों ने ‘यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ (USCIRF) की रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण करार देते हुए इसे “बौद्धिक दिवालियापन और बेतुकी सोच” का उदाहरण बताया।

    रिपोर्ट की वैधता पर सवाल

    शनिवार को जारी एक संयुक्त बयान में हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि रिपोर्ट किसी विशेष उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है। उन्होंने अमेरिकी सरकार से अनुरोध किया कि इस रिपोर्ट में शामिल सभी व्यक्तियों का कड़ा बैकग्राउंड चेक किया जाए। उनका आरोप है कि रिपोर्ट तैयार करने वालों के निजी स्वार्थ हैं, जिसका लक्ष्य भारत के लोगों के बीच सकारात्मक छवि को धूमिल करना है।

    सिफारिशों की आलोचना

    बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि USCIRF की सिफारिशें, जिसमें संपत्ति जब्त करने, भारतीय नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाने और RSS से जुड़े व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है, पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने इन सिफारिशों को तथ्यों के बजाय पूर्वाग्रह पर आधारित बताया।

    अमेरिकी प्रशासन से अपेक्षाएँ

    उन्होंने यह भी कहा कि USCIRF के सभी छह कमिश्नरों की नियुक्ति अमेरिकी सरकार करती है और उन्हें अमेरिकी कांग्रेस के माध्यम से करदाताओं के धन से फंडिंग मिलती है। ऐसे में, अमेरिकी प्रशासन को चाहिए कि वह इस रिपोर्ट से जुड़े लोगों की पृष्ठभूमि की जांच कराए। उनके अनुसार, इससे अमेरिकी करदाताओं को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनके धन का उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

    नकारात्मक छवि का मुद्दा

    संयुक्त बयान में यह चिंता भी जताई गई कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थानों और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों को नकारात्मक रूप में पेश करता रहा है। हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा कि बिना ठोस और व्यापक साक्ष्यों के इस तरह की टिप्पणियां करना संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है।

  • राहुल गांधी ने केरल की सूची रोकने पर खडग़े के घर की स्थिति का विश्लेषण

    राहुल गांधी ने केरल की सूची रोकने पर खडग़े के घर की स्थिति का विश्लेषण

    केरल विधानसभा चुनाव की तैयारी में कांग्रेस की हलचल

    नई दिल्ली में केरल विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। मतदान 9 अप्रैल को होगा और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। सभी राजनीतिक दल चुनावी मैदान में कूदने के लिए तैयार हैं। कांग्रेस के लिए यह चुनाव विशेष महत्व रखता है, क्योंकि वह लंबे समय से केरल में सत्ता से बाहर है। इस बीच, दिल्ली में पार्टी के भीतर की गतिविधियों ने भी ध्यान आकर्षित किया है। हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान, कांग्रेस के नेताओं के बीच गंभीर चर्चा हुई, जिसका मुख्य कारण राहुल गांधी की असहमति थी।

    राहुल गांधी की नाराजगी और टिकट वितरण की नई रणनीति

    कांग्रेस की बैठक रात 10:30 बजे शुरू होकर सुबह 2:30 बजे तक चली। इस दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट संकेत दिया कि अब टिकट वितरण प्रक्रिया को और अधिक सावधानी से किया जाएगा। उन्होंने बिना ठोस डेटा और जातीय समीकरणों के टिकट बांटने से मना कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, पार्टी ने निर्णय लिया कि कोई लोकसभा सांसद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगा, जिससे कई नेताओं की उम्मीदें टूट गईं।

    टिकट वितरण में गुटों का असर

    बैठक में यह भी देखा गया कि टिकट वितरण में वेणुगोपाल का प्रभाव प्रमुख था, जिसमें लगभग 60% उम्मीदवार उनके समूह से जुड़े थे। अन्य नेताओं जैसे रमेश चेन्निथला और वी डी सतीशन को भी कुछ हिस्सेदारी मिली। उल्लेखनीय यह रहा कि शशि थरूर ने इस प्रक्रिया में कोई विशेष भूमिका नहीं निभाई।

    सोशल इंजीनियरिंग और युवा प्रतिनिधित्व

    कांग्रेस ने इस बार टिकट वितरण में सोशल इंजीनियरिंग पर जोर दिया है। उन्होंने ईसाई, नायर और एझावा समुदायों के संतुलित प्रतिनिधित्व का प्रयास किया है। 92 उम्मीदवारों में से 52 की उम्र 50 साल से कम है, जो युवा मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, महिला प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ है, क्योंकि केवल 9 महिलाओं को टिकट दिया गया है।

  • दिल्ली मंथन के बाद MP कांग्रेस का संगठन विस्तार तेज, तैयारी जारी

    दिल्ली मंथन के बाद MP कांग्रेस का संगठन विस्तार तेज, तैयारी जारी

    मध्यप्रदेश कांग्रेस का संगठन विस्तार: नई कार्यकारिणी की घोषणा

    भोपाल। दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने अपने संगठन को विस्तारित करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। लंबे समय के इंतजार के बाद, जिला कार्यकारिणी की घोषणा का काम अब शुरू हो चुका है। नवरात्रि के दौरान अधिकांश जिलों में नई टीम का गठन किया जाएगा। दो दिनों तक चली बैठक में संगठन को मजबूती देने की रणनीतियाँ तय की गईं। इसके तुरंत बाद ही जिला कार्यकारिणी की घोषणा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अब देरी सहन नहीं की जाएगी।

    बंद रुके रहे नियुक्तियों का मामला

    हालांकि जिला अध्यक्षों की नियुक्तियां पहले ही की जा चुकी थीं, लेकिन कार्यकारिणी के गठन में देरी पर सवाल उठ रहे थे। कुछ जिलों में सूची भी जारी की गई थी, लेकिन पदों की अधिकता के कारण उन्हें निरस्त कर दिया गया। अब नई गाइडलाइनों के तहत संतुलित टीमें बनाई जा रही हैं। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, नवरात्रि के भीतर अधिकांश जिलों की कार्यकारिणी की घोषणा कर दी जाएगी। इसे आगामी चुनावों की तैयारी से संबंधित माना जा रहा है। जबलपुर ग्रामीण, श्योपुर, कटनी शहर और बड़वानी जिलों की नई कार्यकारिणी की घोषणा की जा चुकी है, जो प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देश पर की गई हैं।

    AICC की गाइडलाइन से गठन

    बड़े जिलों के लिए अधिकतम 51 सदस्यों की संख्या तय की गई है, जबकि छोटे जिलों में यह संख्या 31 सदस्यों की है। इसी मानक के अनुसार नई कार्यकारिणियों का गठन किया जा रहा है।

    जमीनी स्तर पर संगठन की मजबूती

    संगठन विस्तार के तहत 88 नगर अध्यक्षों और 21 मंडल अध्यक्षों की नियुक्तियाँ भी की गई हैं। इसका उद्देश्य पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत बनाना है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और संगठन प्रभारी हरीश चौधरी निरंतर प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। उनका मुख्य ध्यान बूथ स्तर पर नेटवर्क को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने पर है।

  • राज्यसभा के अमीर सांसद का खुलासा: 5,300 करोड़ रुपये की संपत्ति

    राज्यसभा के अमीर सांसद का खुलासा: 5,300 करोड़ रुपये की संपत्ति

    नई दिल्ली में चुनाव सुधारों पर जोर

    चुनाव सुधारों से संबंधित एक गैर-सरकारी संगठन, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने हाल ही में राज्यसभा सांसदों की संपत्ति और आपराधिक मामलों से जुड़ी एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में 233 में से 229 सांसदों के हलफनामों का विश्लेषण किया गया है, जो कई चौंकाने वाले आंकड़े प्रस्तुत करते हैं।

    आपराधिक मामलों में शामिल सांसद

    रिपोर्ट के अनुसार, 229 सांसदों में से 73 सांसदों (लगभग 32%) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। इनमें से 36 सांसदों (16%) को गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ सांसदों पर हत्या, हत्या के प्रयास, और महिलाओं से संबंधित अपराधों के मामले दर्ज हैं।

    विभिन्न राजनीतिक दलों के आंकड़ों में, भारतीय जनता पार्टी के 99 सांसदों में से 27, कांग्रेस के 28 सांसदों में से 12, टीएमसी के 13 सांसदों में से 4, और आम आदमी पार्टी के 10 सांसदों में से 4 ने आपराधिक मामलों का खुलासा किया है।

    संपत्ति का आंकड़ा

    रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि 31 सांसद (लगभग 14%) की संपत्ति 100 करोड़ रुपये से अधिक है। राज्यसभा के एक सांसद की औसत संपत्ति 120.69 करोड़ रुपये आंकी गई है। आम आदमी पार्टी के सांसदों की औसत संपत्ति सबसे अधिक है, जो 574.09 करोड़ रुपये है। इसके बाद YSR कांग्रेस पार्टी (522.63 करोड़ रुपये) और समाजवादी पार्टी (399.71 करोड़ रुपये) का स्थान है।

    राज्यसभा के सबसे अमीर सांसद

    रिपोर्ट के अनुसार, Bandi Parthasarathi राज्यसभा के सबसे अमीर सांसद हैं, जिनकी घोषित संपत्ति लगभग 5,300 करोड़ रुपये है। दूसरे स्थान पर राजेंद्र गुप्‍ता (5,053 करोड़ रुपये) और तीसरे पर Ayodhya Rami Reddy Alla (2,577 करोड़ रुपये) हैं।

    सबसे कम संपत्ति वाले सांसद

    संपत्ति के मामले में सबसे कम रैंकिंग प्राप्त सांसद Sant Balbir Singh हैं, जिनकी कुल संपत्ति लगभग 3 लाख रुपये बताई गई है। इसके बाद महाराजा संजाोबा लेइशेंबा (लगभग 5 लाख रुपये) और प्रकाश चिक बरैक (करीब 9 लाख रुपये) का स्थान है।

    रिपोर्ट का विश्लेषण

    ADR की यह रिपोर्ट यह दर्शाती है कि देश की उच्च सदन में एक ओर अरबपतियों की अच्छी खासी मौजूदगी है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में सांसद आपराधिक मामलों का भी सामना कर रहे हैं। यह रिपोर्ट राजनीति, संपत्ति और आपराधिक पृष्ठभूमि के बीच के जटिल संबंधों को उजागर करती है।