श्रेणी: Politics

  • अजीत पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री बनेंगी

    अजीत पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री बनेंगी

    महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री पद को लेकर नई अटकलें

    मुंबई: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उनके निधन ने उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के पदों को खाली कर दिया है। इस बीच, अटकलें लगाई जा रही हैं कि उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया जा सकता है। एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल ने सुनेत्रा पवार से मुलाकात की, जिसके बाद सुनेत्रा के संभावित पद ग्रहण करने की चर्चाएँ व्यापक हो गई हैं।

    सुनेत्रा पवार के लिए बढ़ती मांग

    सूत्रों के अनुसार, एनसीपी नेता यह सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं कि सुनेत्रा पवार पार्टी का नेतृत्व संभालें और उपमुख्यमंत्री का पद ग्रहण करें। अजित पवार के समर्थकों ने भी बारामती में अंतिम संस्कार के बाद यह मांग की कि सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए। कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि सुनेत्रा को यह पद मिलता है, तो यह अजित पवार की विरासत को बनाए रखने में मदद करेगा।

    राजनीतिक विश्लेषकों की राय

    राजनीतिक विश्लेषक संजीव उन्हाले ने बताया कि अजित पवार ने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया था, और सुनेत्रा पवार के लिए सभी पद संभालना सरल नहीं होगा। वे संभवतः राष्ट्रवादी पार्टी की अध्यक्ष या उपमुख्यमंत्री बन सकती हैं। उनके अनुसार, अगर सुनेत्रा, पार्थ और जय पवार को मौका दिया जाए, तो पार्टी की दिशा अजित पवार के विचारों के अनुसार बनेगी।

    उपमुख्यमंत्री पद के लिए उत्सुक नेता

    संजीव ने यह भी बताया कि कई एनसीपी नेता उपमुख्यमंत्री पद के लिए उत्सुक हो सकते हैं, विशेषकर छगन भुजबल, जो कई वर्षों से अजित पवार के साथ जरूर काम कर चुके हैं। इस संदर्भ में, बारामती हवाई अड्डे के पास हुई विमान दुर्घटना में अजित पवार की असामयिक मृत्यु ने सभी को झकझोर दिया है। उनके अंतिम संस्कार में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और गृह मंत्री अमित शाह जैसे महत्वपूर्ण नेता उपस्थित थे।

  • अजित पवार के निधन पर राज ठाकरे की टिप्पणी, राजनीति में सच बोलने की होती है कीमत

    अजित पवार के निधन पर राज ठाकरे की टिप्पणी, राजनीति में सच बोलने की होती है कीमत

    अजीत पवार के पुण्य स्मरण में राज ठाकरे की श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के असामयिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने अजीत पवार को एक उत्कृष्ट नेता बताते हुए आदरांजलि दी। ठाकरे ने लिखा कि महाराष्ट्र ने एक ऐसे नेता को खो दिया है, जिसे समय की जरूरत के अनुसार प्रशासन को दिशा देने की अद्भुत क्षमता थी।

    अजीत पवार का राजनीतिक सफर

    राज ठाकरे ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा, “हम दोनों ने लगभग एक ही समय में राजनीति में कदम रखा था, लेकिन हमारी निकटता बाद में बनी।” उन्होंने बताया कि पवार ने अपनी राजनीतिक यात्रा में जोश और समर्पण से बहुत कम समय में ऊंचाइयों को छुआ। राज ठाकरे ने अजीत पवार को बेबाकी और स्पष्टवादी नेता करार दिया, जो अपनी बात स्पष्टता से रखने में कोई संकोच नहीं करते थे।

    राजनीति में बदलाव की समझ

    राज ठाकरे ने उल्लेख किया कि अजीत पवार ने अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि से अलग अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 1990 के दशक में महाराष्ट्र में तेजी से हो रहे शहरीकरण की चर्चा की, जिसमें अजीत पवार ने समस्याओं की गहरी समझ रखी। ठाकरे ने कहा, “पिंपरी-चिंचवड़ और बारामती उनके विकास की बेजोड़ मिसाल हैं, जिनका पूरा महाराष्ट्र आज भी सम्मान करता है।”

    प्रशासन की मजबूती

    राज ठाकरे ने अजीत पवार की प्रशासनिक क्षमताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे जानते थे कैसे जरूरी फाइलों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। उनका मानना था कि आज जब प्रशासन को प्राथमिकता से काम करना चाहिए, तब ऐसे नेताओं का खो जाना अत्यंत दुखद है। इस संदर्भ में उन्होंने राजनैतिक ईमानदारी और साफगोई का महत्व भी रेखांकित किया।

    जातिवाद से मुक्त राजनीति

    ठाकरे ने कहा कि अजीत पवार जातिवाद से मुक्त राजनीति के प्रतीक थे और आज की राजनीति में ऐसे नेताओं की कमी होती जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अजीत पवार के व्यक्तिगत विरोध से अधिक उनके उच्च नैतिक मानकों के लिए जाने जाते थे।

    राजनीतिक विरोध की परंपरा

    राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा पर भी कहा कि यहां राजनीतिक विरोध व्यक्तिगत दुश्मनी में तब्दील नहीं होता। उन्होंने अफसोस जताया कि यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। उन्होंने अजीत पवार के परिवार प्रति संवेदनाएं प्रकट करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

  • महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम के लिए सुनेत्रा पवार का नाम चर्चा में, भाजपा का रुख क्या है?

    महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम के लिए सुनेत्रा पवार का नाम चर्चा में, भाजपा का रुख क्या है?

    महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार का आकस्मिक निधन

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से संतुलन का प्रतीक माने जाने वाले एनसीपी नेता अजित पवार का अचानक निधन ने राजनीति में गहरा impacto डाला है। उनके जाने से राज्य की सियासत में कई जटिल सवाल उठ खड़े हुए हैं। उनकी भूमिका ने न केवल एनसीपी के भीतर बल्कि सत्तारूढ़ महायुति में भी कई प्रकार की चर्चाओं को जन्म दिया है।

    सत्ता की नई परिभाषा

    अजित पवार के निधन के बाद, राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि महाराष्ट्र में डिप्टी सीएम की कुर्सी पर कौन बैठेगा। इस संदर्भ में सुनेत्रा पवार का नाम तेजी से चर्चाओं में छा गया है। उनके नाम पर सियासी हलचल तेज हो गई है, जिससे यह साफ होता है कि पार्टी और उसके सहयोगी दलों में नया समीकरण बनने की संभावना है।

    भाजपा की संभावित भूमिका

    इस समय भाजपा की स्थिति और मूड पर नजरें टिक गई हैं। पार्टी को इस निर्णायक मोड़ पर यह समझना होगा कि अगला डिप्टी सीएम कौन होगा और इस दिशा में उनकी योजनाएं क्या हैं। इस जटिल परिस्थिति को समझते हुए भाजपा अपनी रणनीति तैयार कर रही है।

    राज्य के राजनीतिक समीकरण

    अजित पवार के निधन से जो शून्य बना है, उसका भरना आसान नहीं होगा। एनसीपी और भाजपा दोनों को यह देखना होगा कि कैसे नई राजनीतिक परिस्थितियों का सामना किया जाए। यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव की संभावना को दर्शाती है।

  • महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार विमान दुर्घटना में असामयिक निधन

    महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार विमान दुर्घटना में असामयिक निधन

    बारामती में विमान दुर्घटना: डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान क्रैश

    डेस्क: महाराष्ट्र के बारामती जिले में एक बड़ा हादसा घटित हुआ है। जानकारी के अनुसार, राज्य के डिप्टी सीएम और एनसीपी के प्रमुख अजित पवार का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। इस घटना के दौरान अजित पवार की एक सभा आयोजित की जाने वाली थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, विमान लैंडिंग के समय दुर्घटना का शिकार हुआ। इस हादसे में अजित पवार सहित पांच लोगों की मौत हुई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने सभी की मृत्यु की पुष्टि की है।

    हादसे की जानकारी

    पुणे ग्रामीण पुलिस के उच्च अधिकारियों के अनुसार, इस दुर्घटना में कुल पांच लोग शामिल थे। बताया जा रहा है कि डिप्टी सीएम अजित पवार बारामती में चुनाव प्रचार के सिलसिले में जा रहे थे, जब यह हादसा हुआ। DGCA ने जानकारी साझा की है कि विमान में अजित पवार के साथ एक व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) और एक अटेंडेंट के अलावा दो क्रू सदस्य भी सवार थे। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, विमान में सवार किसी भी व्यक्ति के जीवित बचने की संभावना नहीं है।

    दुर्घटना स्थल की स्थिति

    हादसे की जगह से प्राप्त चित्रों में विमान से उठते हुए तेज धुएं को देखा जा सकता है। वीडियो में स्पष्ट है कि विमान किसी खेत में गिर गया है और पूरी तरह से जलकर राख हो चुका है। दुर्घटना स्थल की तस्वीरें दिखाती हैं कि वहां भारी संख्या में लोग हैं, जो बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने एंबुलेंस और अन्य चिकित्सा सहायता को तुरंत मौके पर भेजा है।

  • अजीत पवार को 18 महीने पहले हेलीकॉप्टर के बादल में खो जाने पर कठिनाई का सामना करना पड़ा

    अजीत पवार को 18 महीने पहले हेलीकॉप्टर के बादल में खो जाने पर कठिनाई का सामना करना पड़ा

    अजीत पवार का विमान दुर्घटना में निधन

    मुंबई: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी के अध्यक्ष, अजीत पवार, बुधवार को एक विमान दुर्घटना में अपनी जान गंवा बैठे। वे निकाय चुनाव के प्रचार हेतु मुंबई से बारामती जा रहे थे, जब उनका विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में अजीत पवार सहित कुल छह लोगों की मृत्यु हुई। उल्लेखनीय है कि जुलाई 2024 में भी, अजीत पवार एक हवाई दुर्घटना के शिकार होते-होते बचे थे, जबकि वे गढ़चिरौली में एक स्टील प्रोजेक्ट के उद्घाटन के लिए जा रहे थे।

    हेलीकॉप्टर यात्रा में अनुभव

    इस यात्रा में अजीत पवार के साथ देवेंद्र फडणवीस और उदय सामंत भी थे। यह यात्रा एक घंटे की थी, जिसमें सभी यात्रियों की धड़कनें तेज थीं। नागपुर के ऊपर उड़ान के दौरान, उनका हेलीकॉप्टर घने बादलों में उलझ गया था, जिस वजह से दृश्यता काफी खराब हो गई। हालाँकि, पायलट ने सुरक्षित लैंडिंग के लिए कुशलता से रास्ता निकाला। इस दौरान अजीत पवार काफी चिंतित दिखाई दिए, जबकि फडणवीस ने शांत रहकर उन्हें हिम्मत दी।

    दुर्घटना के समय की स्थिति

    अजीत पवार ने बाद में उस घटना का अनुभव साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उदय सामंत ने उन्हें लैंडिंग स्थल की ओर देखने का सुझाव दिया और जब उन्होंने खिड़की से बाहर देखा, तब उन्हें कुछ राहत मिली। लेकिन ठीक 18 महीने बाद, उनके साथ हुई यह विमान दुर्घटना हुई, जिसमें वे और उनके निजी सुरक्षा अधिकारी, अटैंडेंट, और दो क्रू मेंबर, एक पायलट-इन-कमांड और एक सेकंड-इन-कमांड भी शामिल थे। सभी ने इस हादसे में अपनी जान गंवाई।

    फडणवीस का प्रतिक्रिया

    देवेंद्र फडणवीस ने अजीत पवार की जान जाने को ‘अविश्वसनीय’ बताया और कहा कि उन्होंने एक अच्छे मित्र को खो दिया है। उन्होंने इस हादसे को लेकर कहा कि पवार की मृत्यु ने ऐसा शून्य उत्पन्न किया है जिसे कभी नहीं भरा जा सकेगा। यह विश्वास करना उनके लिए मुश्किल था कि अब अजीत पवार नहीं रहे।

  • अजित पवार ने शरद पवार की छाया छोड़कर महाराष्ट्र में राजनीतिक नेतृत्व स्थापित किया

    अजित पवार ने शरद पवार की छाया छोड़कर महाराष्ट्र में राजनीतिक नेतृत्व स्थापित किया

    महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटनामा निधन

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के बारामती क्षेत्र के एनसीपी नेता और उपमुख्यमंत्री अजित पवार का हाल ही में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। यह विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजित पवार सहित सभी यात्रियों की जान चली गई।

    राजनैतिक यात्रा में पहला कदम

    अजित पवार, जिन्हें सियासी जगत में “सियासत के बेताज बादशाह” के तौर पर जाना जाता है, ने अपने चाचा शरद पवार को अपना प्रेरणास्त्रोत मानते हुए राजनीति में कदम रखा। उन्होंने एनसीपी को महाराष्ट्र में मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पार्टी का एक बड़ा जनाधार तैयार किया। 2022 में शरद पवार से अलग होकर उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर सरकार का गठन किया।

    पारिवारिक पृष्ठभूमि

    अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ। वे शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के पुत्र हैं। उनके पिता एक फिल्म उद्योग से जुड़े थे और अजित की शादी सुनेत्रा पवार से हुई। उनके दो बच्चे, पार्थ पवार और जय पवार हैं।

    शिक्षा और प्रारंभिक राजनीतिक करियर

    अजित पवार ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा महाराष्ट्र एजुकेशन सोसायटी हाई स्कूल बारामती से प्राप्त की। कॉलेज के समय में उनके पिता का निधन हो गया, जिसके बादउन्होंने राजनीति में कदम रखा। 1982 में शरद पवार के मार्गदर्शन में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया, और उस समय वे सहकारी चीनी कारखाने के बोर्ड के लिए चुने गए।

    सांसद और विधायक के रूप में उपलब्धियां

    1991 में वे बारामती संसदीय क्षेत्र से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन बाद में यह सीट अपने चाचा के लिए खाली कर दी। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के बाद 1995 में बारामती विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद से वे लगातार इस निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने जाते रहे।

    कैबिनेट मंत्री से उपमुख्यमंत्री बनने तक का सफर

    45 वर्षों के करियर में, अजित पवार ने कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों पर कार्य किया। 1999 में जब कांग्रेस और एनसीपी सत्ता में आई, तो उन्हें सिंचाई मंत्री का कार्यभार सौंपा गया। 2019 में उन्होंने दो बार उपमुख्यमंत्री की शपथ ली, पहली बार देवेंद्र फडनवीस के तहत और बाद में उद्धव ठाकरे के तहत। 2023 में वे फिर से महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने।

    चाचा से बगावत और नई राह

    2022 में, जब शरद पवार ने अपनी बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाना शुरू किया, तो अजित पवार ने अपने राजनीतिक रास्ते को बदलने का निर्णय लिया। उन्होंने एनसीपी के कई नेताओं के साथ भाजपा की महायुति सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया, और 2023 में उन्होंने पार्टी पर पूरी तरह से नियंत्रण प्राप्त कर लिया।

  • विश्व प्रसिद्ध आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में सीएम हेमन्त सोरेन का ज़ोरदार भाषण

    विश्व प्रसिद्ध आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में सीएम हेमन्त सोरेन का ज़ोरदार भाषण

    प्रोफेसर माया ट्यूडर के सवाल, सीएम के जवाब

    गांडीव स्पेशल

    लंदन। यूनाइटेड किंग्डम में स्थित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय विश्व के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक है, जिसकी शिक्षा, शोध और सार्वजनिक विमर्श की परंपरा सदियों पुरानी है। इसका ब्लावातनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट – सार्वजनिक नीति, शासन और नेतृत्व के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त संस्थान है, जो विश्वभर के नीति-निर्माताओं और शोधकर्ताओं को जोड़ता है।
    प्रोफ़ेसर माया ट्यूडर, ब्लावातनिक स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर हैं और उनका शोध तुलनात्मक राजनीति, राज्य क्षमता और विकास पर केंद्रित है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ब्लावातनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में प्रशन-उत्तर सत्र प्रोफ़ेसर माया ट्यूडर के साथ – 

     झारखंड के विकास के लिए क्या है आपका रोडमैप ?

    1. मैं आपसे झारखंड राज्य के लिए आपकी विकास को लेकर सोच के बारे में जानना चाहती हूँ। यह राज्य अपने वनों और प्राकृतिक संसाधनों के लिए जाना जाता है, लेकिन साथ ही यहाँ जन-आंदोलनों का इतिहास भी रहा है जहाँ लोगों ने स्वयं को विकास की प्रक्रिया से अलग महसूस किया है।

    उत्तर: गुड ईवनिंग एव्रीवन! सभी को झारखंड से जोहार! झारखंड, इंडिया का एक छोटा सा नया राज्य है, जो वर्ष 2000 में अपने अस्तित्व में आया।25 साल का है हमारा युवा झारखंड। सिल्वर जुबली मना रहा है अपना राज्य। और यह संजोग है कि हम लोग आज ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हैं, और ये कहा जाये कि यह एक सेलिब्रेशन भी हमारे लिए 25 साल का।और जैसे कि आपका सवाल है कि हमारा क्या विज़न है? तो मैं कहूँगा की बहुत डाइवर्सिटी है हमारे राज्य में। 

    राज्य अलग होने के बाद ये पहला मौक़ा है, जब झारखंड मज़बूती के साथ निवेश के लिए इंडिया से बाहर आया। पहले यह युवा झारखंड दावोस गया और उसके बाद यूके, आप लोगों के बीच यहाँ आया है। और इसे इत्तेफ़ाक कहें या सुखद अनुभव, कि दोनों चीजें एक साथ हुई – एक ट्राइबल डोमिनेटेड राज्य से एक ट्राइबल लीडरशिप, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पहली बार पहुंचा, साथ ही आप लोगों के बीच भी पहली बार आया। हमारे आने वाली पीढ़ी के लिए साझा प्रयास को लेकर हम वैश्विक मंचों पर आए हैं। 

    बहुत बड़ी लेगेसी जुड़ी है हमारे झारखंड के साथ। आपके सेंट जॉन्स ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हमारे जयपाल सिंह मुंडा जी ने अपना ऐतिहासिक क्षण बिताया। हम उसी राज्य से आते हैं, और जिस तरीके से जयपाल सिंह मुंडा जी ने अपना एक इतिहास, अपनी एक छवि बनाई, आप लोगों के मार्गदर्शन में, तो हमने उस लेगेसी को भी आगे बढ़ाने का प्रयास किया। जयपाल सिंह मुंडा स्कालरशिप के साथ आने वाली पीढ़ी को हम तैयार कर रहे हैं। 

    हमारा स्टेट माइन्स एंड मिनरल्स से परिपूर्ण राज्य है। नेचुरल रिसोर्सेस तो हैं ही हमारे राज्य में, साथ में हमारे राज्य में नैसर्गिक सुंदरता भी है। हमारे झारखंड में बहुत ही शांत स्वभाव के लोग रहते हैं, और इसी वजह से हमारे राज्य में यही कहा जाता है कि – वहाँ का बोलना ही गाना है, चलना ही नृत्य है। ये हमारे राम दयाल सिंह मुंडा जी थे जिन्होंने इस बात को बहुत अच्छे ढंग से दुनिया के सामने रखा था।

    हम लोगों ने माइन्स-मिनरल्स से हटकर – एक नया रास्ता ढूँढने का प्रयास किया है। हमारे राज्य ने नक्सल का भी बहुत बड़ा दंश झेला है। परंतु, उस पर मैं बहुत ज़्यादा चर्चा नहीं करूँगा, चूँकि उसका बहुत बड़ा इतिहास है। 

    हमारा फोकस माइन्स एवं मिनरल्स से हटकर, एक नयी सोच पर है, वह है टूरिज्म, स्पोर्ट्स, एजुकेशन। और एक जो पूरे विश्व में आदिवासी समुदायों में देखा जाता है कि कहीं ना कहीं विकास के जो पैमाने हैं, विकास के जो रास्ते हैं, उसमें हम पीछे रह जाते हैं। लेकिन हमारा यह प्रयास है कि हम उन्हें पीछे नहीं, आगे बढ़ाने का काम करें। और इसी की एक कड़ी है कि हम आज जयपाल सिंह मुंडा स्कालरशिप भी चला रहे हैं,बल्कि इसके अलावा हम स्कूली शिक्षा से उच्च शिक्षा तक बड़े प्रोग्राम भी चला रहे हैं।

     केंद्र में विरोधी सरकार है, राज्य को कैसे मिलेगी राहत।

    2. सर, यह सवाल खास तौर पर छात्रों के लिए है। झारखंड ने अक्सर ऐसी सरकारें चुनी हैं जो केंद्र सरकार के विपक्ष में रही है, जिससे केंद्र–राज्य संबंध जटिल हो सकते हैं। विपक्ष के नेतृत्व वाले राज्य के रूप में,आप इस स्थिति को कैसे देखते हैं?

    उत्तर: मैं आज देश से बाहर आया हूँ मलतब निवेश के लिए झारखण्ड बाहर आया है। और जिस राजनीतिक परिदृश्य की आप बात कह रहे है कि वह हमारी चुनौती है, मैं इसे बहुत ज्यादा उस नजर से नहीं देखता हूँ।इसे मैं फ़ेडरल स्ट्रक्चर का खूबसूरत मॉडल समझता हूँ कि हमारा देश एक लोकतान्त्रिक देश है और अलग-अलग विचार के लोग वहाँ रहते हैं। देश तो हमारा ही है। और जब तक राज्य मजबूत नहीं होगा तो देश भी मजबूत नहीं होगा। और मैं कहता हूँ की जब तक मेरा गांव मजबूत नहीं होगा तो मेरा राज्य भी मजबूत नहीं होगा। इसलिए मैं हमेसा फोकस करता हूँ कि हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था कैसे मजबूत हो।

    हम लोग केंद्र के साथ हो सकता कि राजनीतिक रूप से अलग-अलग हों, क्यूँकि हम एक पार्टी चला रहे हैं और वो एक पार्टी चला रहे हैं। हमारे देश में अलग-अलग पार्टियाँ हैं और कई सारे राज्य हैं जहां अलग-अलग रीजनल पार्टी और नेशनल पार्टी, सब अलग-अलग ताकत के साथ हैं। और मुझे नहीं लगता कि बहुत बड़ी चुनौती है, हम यही झगड़ा करेंगे तो, संघीय ढांचा और लोकतान्त्रिक व्यवस्था का कोई मतलब रहेगा नहीं।

    जिनका विकास में होगा जितना योगदान, क्या उनको उतना लाभ मिलेगा

    3. मुख्यमंत्री जी, आपने कहा कि जिन लोगों ने विकास में जितना योगदान दिया, उन्हें उतना लाभ नहीं मिल पाया। मेरा प्रश्न यह है कि क्या भारत की राजनीतिक व्यवस्था वास्तव में इसे संभव होने देगी? एक ओर केंद्र के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना होता है, वहीं दूसरी ओर उन राज्यों से प्रतिस्पर्धा भी करनी पड़ती है जहाँ आपके राजनीतिक दल के सहयोगी सत्ता में हैं। इस राजनीति की बारीक रेखा को आप कैसे देखते हैं?

    उत्तर: देश में सबसे अधिक माइन्स एंड मिनरल्स झारखण्ड में है। तब तो मैं यह भी कह सकता हूँ कि अपने राज्य का माइन्स एंड मिनरल्स किसी को न दूँ। कल कोई और स्टेट ये सोच सकता है – जैसे महाराष्ट्र है, आँध्र प्रदेश है, जो विकसित राज्य है वो भी ये सोचेंगे की मैं अच्छा कर रहा हूँ तो दूसरे राज्यों में पैसा क्यू जाये? केंद्र सरकार एक ब्रिज का काम करता है। सभी को समान देखना और उसको समझना होता है। हम लोग अपनी बातें रखते हैं। इलेक्शन के टाइम अप एंड डाउन दिखता रहता है, नहीं तो सबको साथ में ही चलना है।

    और कहते हैं न कि एक हल के दो बैल होते हैं। तो एक बैल स्टेट है, और दूसरा बैल सेंट्रल है। दोनों को साथ ही चलना होता है, नहीं तो खेत नहीं बनता है। इसलिए आज के दिनों मुझे लगता है कि यह कोई समस्या नहीं है।

     

    जयपाल मुंडा स्कॉलरशिप में सामान्य वर्ग और स्नातक के विद्यार्थियों को शामिल क्यों नहीं किया गया है? 

    4. मैं जानना चाहता हूँ कि जयपाल मुंडा स्कॉलरशिप में सामान्य वर्ग और स्नातक के विद्यार्थियों को शामिल क्यों नहीं किया गया है? 

    उत्तर: कुछ अलग-अलग खबरों के माध्यम से और जैसे आपने कहा है कि जयपाल सिंह मुंडा स्कॉलरशिप में जनरल वर्ग को क्यूँ नहीं जोड़ा गया है। हमारा पूरा प्रयास है कि हम दूर तक और अच्छी गति से जाएँ, इसके लिए हम स्टेप बाइ स्टेप आगे जा रहे हैं। आपको पता है कि आज बच्चों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र में जो बच्चे हैं उनके बारे में भी सरकार सोच रही है। आज कॉम्पटिशन बहुत बढ़ गया है जिससे हमारे सरकारी स्कूल के बच्चे पीछे रह जाते हैं। आपको पता होगा कि इसलिए हमने सीएम स्कूल ऑफ एक्सलेंस शुरू किया है। उसमें कोई बैरीअर नहीं है कि एससी,एसटी ही आएँगे, वह सभी के लिए है। और वो भी फ्री ऑफ कॉस्ट। 

    ओवरसीज स्कालर्शिप में सिर्फ एसटी को जोड़ा गया जिसके बाद डिमांड बढ़ने पर उसमें एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक को भी जोड़ा गया। अभी सीमित संख्या हमने रखी है 25 बच्चों की। और अभी डिमांड 150बच्चों का है। 

    आने वाले समय में वो रास्ता भी बनाएँगे। सेंट जोंस के साथ वार्ता चल रही है पीएचडी स्कालर्स के लिए कि उनके यूनिवर्सिटी में अपने बच्चों को भेज सकूँ। आज हमने गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड शुरू किया है। आपको पता है कि उसमें भी कोई बैरियर नहीं है। हायर एजुकेशन के लिए – टेक्निकल,मेडिकल, ज्यूडिशियल, आदि क्षेत्र में जो आपको अपना कोर्स सलेक्ट करना है, अगर उसमें वित्तीय परेशानी आती है तो उसके लिए सरकार आपको हैंड-होल्डिंग करती है। जिसमें बहुत कम रेट ऑफ इंटरेस्ट है और जब तक आपकी एजुकेशन पूरी नहीं हो जाती है, तब तक आपको कोई बैंक को रिटर्न देने की जरूरत नहीं होती है। उसके बाद आप धीरे-धीरे बैंक को पैसा वापस कर सकते हैं। 

    इसके साथ-साथ सरकार को अन्य क्षेत्रों में भी ध्यान देना होता है।सामाजिक क्षेत्र में। हमारा राज्य पिछड़ा भी है तो हमारी पहली प्राथमिकता कल्याणकारी योजनाओं पर भी रहती है। तो उनको भी लेकर हमें ज्यादा संसाधनों की आवश्यकता पड़ती है। आने वाले समय में बहुत अच्छे और दरवाजे खोलने का काम करेगी सरकार, जहां हम सब के लिए एक कॉमन प्रोग्राम चला पाए। पहले जो कमजोर है, बिल्कुल जो पीछे है,उसे हम थोड़ा आगे लाने की कोशिश कर रहे हैं। 

    आप देखेंगे, हम मइयां सम्मान योजना चला रहे हैं। आज आबादी की 50प्रतिशत जो महिलाएं हैं – लगभग 56 लाख महिलाओं को हर महीने 2500रुपये की सहायता राशि हम देते हैं। बजट का बहुत बड़ा हिस्सा हम सिर्फ महिला सशक्तिकरण में खर्च कर रहे हैं। बहुत सारे लोग बोलते हैं यह पॉलिटिकल वोट बैंक का कॉन्सेप्ट है, लेकिन उसका इम्पैक्ट आप गांव जाओगे तो आप भी महसूस करोगे कि वो कैसे इस राशि का उपयोग अपने और अपने परिवार की भलाई और क्षमता वृद्धि के लिए कर रही हैं। बहुत सीधी बात है जैसे आपकी बाइक में जब तक बैटरी चार्ज नहीं होगी तो वह एक किलोमीटर भी नहीं चलेगी। ऐसे ही जब तक आपके जेब में पैसे नहीं होंगे तब तक आप कुछ और सोच भी नहीं पाएंगे आज के समय में।

     क्या आपकी सरकार अतीत की ग़लतियाँ नहीं दोहराएगी?

    5. जयपाल सिंह मुंडा और शिबू सोरेन की विरासत को सम्मान देते हुए, आपकी सरकार यह कैसे सुनिश्चित करेगी कि भूमि अधिग्रहण और शोषणकारी विकास की अतीत की गलतियाँ दोहराई नहीं जाएँगी?आगामी 25 वर्षों में झारखंड कौन-सा ऐसा विकास मॉडल अपनाएगा, जिसमें आदिवासी वर्ग वास्तविक भागीदार और लाभार्थी बनें, और असमानता न बढ़े?

    उत्तर: मैं आपको बताना चाहूंगा कि आपकी जो चिंता है, यह बहुत वास्तविक चिंता है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि झारखंड के आदिवासियों ने डेवलपमेंट के नाम पर बहुत कुछ खोया है। बड़े इंडस्ट्री आए, अनगिनत जमीनें ली गयीं। उस समय शायद हो सकता है कि जनसंख्या कम रही हो, लोगों ने दे दिया हो। लेकिन आज जनसंख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।

    हां, जितना झारखंड के लोगों ने विकास में सहयोग किया उसका कहीं ना कहीं लाभ जो उनके पास आना चाहिए था वह नहीं आया। और यह वास्तव में लोगों की भी चिंता है| लेकिन आप को मैं यह विश्वास दिलाना चाहूंगा कि यह मेरा सेकंड टर्म है। वापस सरकार हमने बनाई है। हमारे देश में जो पॉलिटिकल परिदृश्य है, उसके विपरीत परिस्थिति में हम लोगों ने फिर से अपनी जगह बनाई है।

    इसका मतलब यही समझा जा सकता है कि लोगों का विश्वास है। उम्मीद है हम पर। उन्हें पता है कि मैं शिबू सोरेन का बेटा हूँ| अपने लोगों के साथ धोखा नहीं कर सकता। तथा उन्हें और आज जो हमारी नई पीढ़ी है, नए पीढ़ी की जो डिमांड है, हम कोई भी आज प्लान बना रहे हैं तो हम अपने वहां की जो भावनाएं हैं उसको ध्यान में रखकर प्लान बना रहे हैं। आप देखेंगे कि वैश्विक स्तर में झारखंड के कई लोग हैं।  मैं भी दावोस में था, वहां झारखंड के कई लोग थे। आज यूके में हूं, लंदन में हूं, यहां पर कई झारखंड के बच्चे और नौजवान हैं। पूरे देश-दुनिया में झारखंड के लोग पहुंच रहे हैं।

    मैं जिस पीढ़ी का नेतृत्व कर रहा हूं। हमारी पुरानी लेगेसी हमारी लेफ्ट हैंड है, नई पीढ़ी हमारी राइट हैंड है, और मैं बीच में हूं। तो मैं चीजों को बैलेंस करते हुए आगे लेकर जा रहा हूं। और यह बात सही है कि कोई भी चीज डेवलपमेंट की है, अगर हम बात करते हैं तो हर एक चीजों में नेगेटिव-पॉजिटिव दोनों एक साथ चलता है। उसका बैलेंस कैसे बनाकर रखें, यही सबसे बड़ी चुनौती है। चीजों को नज़रंदाज़ करने की वजह से चीजें खराब होती हैं और ऐसा नहीं है कि हमारे स्टेट में इंडस्ट्री नहीं है। 

    एशिया का सबसे बड़ा स्टील प्लांट इंडस्ट्री हम लोगों के राज्य में है। एचईसी जैसी मदर इंडस्ट्री हमारे राज्य में है। बहुत सारे स्टील इंडस्ट्री हमारे राज्य में शुरू हुए। नई पीढ़ी को हम शिक्षित कर रहे हैं तो उसे रोजगार भी देना है और स्वरोजगार भी। माइंस, मिनरल्स के अलावा हमारे राज्य में नैसर्गिक सुंदरता भी है और जल, जंगल, जमीन को लेकर हमारी जो सोच है, वह भी कैसे संरक्षित रहे, हमारे लिए बहुत जरुरी है। इसे लेकर टूरिज्म पर भी हमारा बहुत ज़्यादा फोकस है। 

    हमारे गांव में जो बच्चे हैं, आज स्पोर्ट्स में काफी एग्रेसिव ढंग से आगे बढ़ रहे हैं। आपको बताना चाहूंगा कि हमारे खूंटी, सिमडेगा, गुमला से आज वूमेंस हॉकी टीम में लगभग 5 से 6 लड़कियाँ झारखंड से हैं। किसी समय उन्हें एक वक्त का खाना भी नहीं मिलता था| और आज ग्लोबल प्लाटफ़ॉर्ममें वह एक चैंपियन बनकर उभर रही हैं। और हमारे लोगों से जुड़े मामले जैसे ही हमारे संज्ञान में आते हैं, तो तुरंत ही उन सब चीजों पर काम किया जाता है। 

    अपने राज्य के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए हम उन्हें पूरा सहयोग करते हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में इसी का हम एक रास्ता तलाशने आए हैं कि किसके साथ हम जाएं, जो हमारे उद्देश्य और लक्ष्य के साथ – एक सतत विकास के तहत आगे बढ़ सके। हमारे राज्य में विभिन्न वर्ग में काम में विविधता है। लेकिन अभी आदिवासी समाज को नया उद्योग चलाने के लिए बहुत आगे आना है। उसके लिए जो संसाधन चाहिए, पैसे चाहिए, वह उनके पास नहीं हैं। इस दिशा में भी हम काम कर रहे हैं।

    क्या सरकार प्रवासी/ओसीआई झारखंडियों के लिए एक समर्पित इकाई स्थापित करेगी

    6. हेमंत जी, कल्पना जी और झारखंड के माननीय प्रतिनिधियों का यहाँ आना हम प्रवासी झारखंडियों के लिए गर्व की बात है, और हम चाहते हैं कि ऐसे मंच नियमित रूप से आयोजित हों ताकि विदेशों में रह रहे डॉक्टर, पेशेवर और युवा राज्य से जुड़े रह सकें। मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या सरकार प्रवासी/ओसीआई झारखंडियों के लिए एक समर्पित इकाई स्थापित करने पर विचार करेगी?
    उत्तर: झारखंड ऐतिहासिक रूप से वर्करर्स देने वाला राज्य रहा है। देश की अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा योगदान हमारे लोगों का रहता है। कोविड के दौरान हमें इसकी वास्तविक तस्वीर दिखी, हर साल 20 लाख से अधिक लोग आजीविका के लिए पलायन करते हैं। पलायन स्वयं समस्या नहीं है, समस्या अवसरों की कमी से मजबूरी में पलायन है। कोविड के समय हमने विशेष कदम उठाए। हवाई जहाज़, ट्रेन और बसों के माध्यम से लोगों को सुरक्षित वापस लाया गया।

    इसी दौरान हमने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों के लिए एक सशक्त प्रवासन नीति बनाई, जिसके बारे में आज राष्ट्रीय स्तर पर बताया भी जाता है। आज किसी भी संकट में, देश या विदेश में, रहने वाले झारखंडियों की सहायता की जाती है। प्रवासी झारखंडी समूहों को संगठित करने की दिशा में हम काम कर रहे हैं, और विदेशों में आप सभी की पहल का हम स्वागत करते हैं। सरकार आपको पूरा सहयोग देगी। झारखंड वैश्विक मंचों पर नया है, लेकिन हमारे लोग सक्षम, परिश्रमी और दृढ़ हैं। आप साथ दीजिए, आने वाले समय में हम जरुर इस दिशा में बढ़ेंगे और अवश्य सफल होंगे। जोहार!

  • जेलेंस्की को अमेरिका से सुरक्षा गारंटी पर समझौते की उम्मीद जगी

    जेलेंस्की को अमेरिका से सुरक्षा गारंटी पर समझौते की उम्मीद जगी

    यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी दस्तावेज़ लगभग तैयार

    नई दिल्ली। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने जानकारी दी है कि यूक्रेन अब अपने साझेदारों द्वारा अमेरिकी सुरक्षा गारंटी से जुड़े दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर की तारीख निर्धारित किए जाने का इंतजार कर रहा है। यह दस्तावेज़ अमेरिकी कांग्रेस और यूक्रेनी संसद में पुष्टि के लिए भेजा जाएगा।

    वार्ता के दौरान महत्वपूर्ण प्रगति

    रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से जारी संघर्ष के बीच, हाल ही में एक बार फिर समझौते की संभावना मजबूत हुई है। जेलेंस्की ने बताया कि दो दिनों तक चली वार्ता के बाद उनके देश के लिए यह महत्वपूर्ण दस्तावेज़ अब ‘100 प्रतिशत तैयार’ है। इस वार्ता में यूक्रेन, अमेरिका और रूस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    लिथुआनिया में पत्रकारों से बातचीत

    लिथुआनिया की राजधानी विलनियस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए, जेलेंस्की ने कहा कि वह अब अपने सहयोगियों द्वारा हस्ताक्षर की तारीख की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इसके बाद दस्तावेज़ को आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा।

    यूरोपीय संघ की सदस्यता की योजना

    जेलेंस्की ने 2027 तक यूरोपीय संघ की सदस्यता हासिल करने के यूक्रेन के लक्ष्य को दोहराते हुए इसे ‘आर्थिक सुरक्षा की गारंटी’ बताया। उन्होंने अबू धाबी में हुई त्रिपक्षीय वार्ता को हाल के वर्षों में सबसे महत्वाकांक्षी बताया, जिसमें सैन्य प्रतिनिधियों की भी भागीदारी थी।

    अबू धाबी में वार्ताओं का महत्व

    यूक्रेन और रूस के संवादकों ने अबू धाबी में अमेरिकी मध्यस्थों के साथ पहले त्रिपक्षीय बैठक की, जिसमें कोई ठोस समझौता नहीं हुआ। हालाँकि, दोनों पक्ष आगे की वार्ता के लिए तत्पर हैं और उम्मीद जताई गई है कि अगले रविवार को पुनः बैठक की जाएगी। जेलेंस्की ने बताया कि 20-सूत्रीय अमेरिकी योजना और अन्य विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा की गई।

    विभिन्न मुद्दों पर मतभेद

    जेलेंस्की ने स्वीकार किया कि यूक्रेन और रूस के बीच कुछ बुनियादी मतभेद अब भी बने हुए हैं, विशेष रूप से क्षेत्रीय मुद्दों पर जो सबसे बड़ा विवाद बिंदु है।

  • क्या शंकराचार्य ने इस्तीफा देने वाले पीसीएस आलंकार अग्निहोत्री को बड़ा प्रस्ताव दिया?

    क्या शंकराचार्य ने इस्तीफा देने वाले पीसीएस आलंकार अग्निहोत्री को बड़ा प्रस्ताव दिया?

    प्रयागराज में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट का इस्तीफा

    प्रयागराज। बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने अचानक इस्तीफा देकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण ब्राह्मण समाज की अस्मिता और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई कथित अन्याय को बताया है। इसके अलावा, उन्होंने यूजीसी के नए अधिनियम का भी विरोध किया है। इसके चलते, यूपी सरकार को उन्होंने ब्राह्मण-विरोधी करार दिया है।

    शंकराचार्य का समर्थन

    इस्तीफे के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने फोन पर अलंकार अग्निहोत्री से बात की। उन्होंने अलंकार के कदम की सराहना की और उन्हें उत्साहित करते हुए एक विशेष प्रस्ताव भी दिया। शंकराचार्य ने कहा कि उनका इस्तीफा सनातन धर्म के प्रति निष्ठा को दर्शाता है, जो कि पूरे सनातनी समाज के लिए गर्व का विषय है।

    राजनीतिक घटनाक्रम

    गणतंत्र दिवस के अवसर पर इस्तीफा देने के बाद, अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया गया और उनके खिलाफ जांच का आदेश भी जारी किया गया। शंकराचार्य ने उन्हें आशीर्वाद देते हुए आश्वासन दिया कि उनकी मेहनत और लगन को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि अलंकार जैसे निष्ठावान लोग धर्म की सेवा में आगे बढ़ें।

    भविष्य की योजनाएँ

    फोन पर बातचीत के दौरान, अलंकार ने शंकराचार्य से आशीर्वाद मांगा और यह भी कहा कि वह उनसे जल्द मिलने का इच्छुक हैं। शंकराचार्य ने उन्हें एक उच्च पद का प्रस्ताव दिया जो धर्म क्षेत्र में होगा, यह बताते हुए कि सरकार द्वारा दिया गया पद उससे बड़ा होगा। इस चर्चा ने अलंकार के इस्तीफे को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।

  • चीन सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना-ITBP का कड़ा अलर्ट जारी

    चीन सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच भारतीय सेना-ITBP का कड़ा अलर्ट जारी

    भारतीय सेना और आईटीबीपी का संयुक्त अभ्यास ‘अग्नि परीक्षा’

    नई दिल्ली। भारतीय सेना समय-समय पर अपनी युद्ध तैयारियों का आकलन करने के लिए सैन्‍य अभ्यास आयोजित करती है। हाल ही में, अरुणाचल प्रदेश में सेना ने भारतीय-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ मिलकर एक विशेष अभ्यास का आयोजन किया, जिसे ‘अग्नि परीक्षा’ नाम दिया गया है।

    अभ्यास की विस्तार जानकारी

    प्रशिक्षण की विशिष्टताएं

    लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत ने बताया कि यह गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम दोनों बलों के बीच ऑपरेशनल इंटीग्रेशन में महत्त्वपूर्ण है। स्पीयर कोर के स्पीयरहेड गनर्स ने पैदल सेना रेजिमेंट और आईटीबीपी के कर्मियों के साथ मिलकर इस अभ्यास का संचालन किया। यह एक अनूठा गोलाबारी प्रशिक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य तोपखाने के विभिन्न अभियानों की प्रक्रियाओं को गैर-तोपखाना कर्मियों के साथ साझा करना है।

    तोपखाने का उपयोग और आपसी समन्वय

    प्रशिक्षण के दौरान, आईटीबीपी और सेना के कर्मियों को अनुभवी स्पीयरहेड गनर्स के मार्गदर्शन में कई तोपखाना फायरिंग अभ्यास करने के लिए तैयार किया गया। कर्नल रावत के अनुसार, इसका मुख्य लक्ष्य पारंपरिक भूमिकाओं के बीच की दूरी को कम करना और गतिशील युद्ध परिदृश्यों में गोलाबारी के एकीकरण को समझाना था।

    अभ्यास का महत्व और भविष्य की तैयारी

    कर्नल रावत ने बताया कि ‘अग्नि परीक्षा’ का पहला चरण भविष्य के युद्धक्षेत्रों के लिए आवश्यक एकीकृत युद्ध क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस अभ्यास का सफल संचालन भारतीय सेना की कार्यकुशलता और मिशन-उन्मुख प्रशिक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। यह अभ्यास सेना के निरंतर अनुकूलन, नवाचार, और अंतर-एजेंसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सिद्ध करता है, ताकि बदलती परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना किया जा सके।

  • पहली बार गंगा नदी के पानी में बिहार को हिस्सेदारी देने की तैयारी शुरू

    पहली बार गंगा नदी के पानी में बिहार को हिस्सेदारी देने की तैयारी शुरू

    गंगा जल में बिहार को मिलेगा हिस्सा

    पटना। बिहार को पहली बार गंगा के पानी का एक निर्धारित हिस्सा मिलने की संभावना है। केंद्र सरकार द्वारा 900 क्यूसेक गंगाजल के उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। यह ऐतिहासिक क्षण होगा, क्योंकि पहले बिहार के लिए गंगा नदी के पानी का कोई तय खाता नहीं था। राज्य ने पहले 2000 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन केंद्र ने 900 क्यूसेक की अनुशंसा की है।

    केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की समिति की अनुशंसा

    केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की एक आंतरिक समिति ने बिहार को पानी देने के लिए अनुशंसा की है, जिसमें कहा गया है कि शुष्क मौसम के दौरान, विशेषकर मानसून से पहले के पांच महीने में, बिहार को यह पानी दिया जाएगा। यह अवधि जनवरी से मई के बीच की मानी जाती है, जब गंगा का जलस्तर काफी कम होता है। हालांकि, इस अनुशंसा पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।

    बिहार की आपत्ति और केंद्रीय बैठक

    हाल ही में, बिहार ने बांग्लादेश को पानी की आपूर्ति के मुद्दे पर आपत्ति जताई थी। जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी और प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा की। राज्य ने इस वार्ता के दौरान संधि में एक पक्ष बनने की इच्छा भी प्रकट की थी।

  • क्या नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने से पुराने बीजेपी नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है?

    क्या नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने से पुराने बीजेपी नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है?

    भाजपा में नई टीम की तैयारी, युवाओं और महिलाओं को मिलेगा प्रमुखता

    नई दिल्‍ली। नितिन नवीन के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद संगठन में एक नई टीम के गठन पर विचार विमर्श चल रहा है। पार्टी में युवा और महिलाओं को तरजीह दिए जाने की चर्चा हो रही है, जिससे मौजूदा और पुराने नेताओं में बेचैनी देखी जा रही है। कई नेताओं को उम्र के आधार पर चिंता भी सता रही है। हाल ही में अनेक नेताओं को दी गई विशेष चुनावी जिम्मेदारियों ने हाशिए पर रहे नेताओं में थोड़ी सी उम्मीद जगाई है, लेकिन जब टीम का गठन होगा, तब कौन किस स्थान पर होगा, इसे लेकर अभी भी संशय बरकरार है।

    नई टीम की संभावित घोषणा

    भाजपा की नई टीम के मध्य अगले माह में आने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, इस संदर्भ में पहले ही व्यापक चर्चा हो चुकी है और अब अंतिम रूप देने का उचित समय है। केंद्रीय टीम में उपाध्यक्ष, महासचिव और सचिवों के पदों पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। तीनों स्तरों पर लगभग आधे नए चेहरे होंगे, जबकि कुछ नेताओं को स्थान परिवर्तन किया जाएगा। यह बदलाव नए नेतृत्व को मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिससे युवा नेताओं की मौजूदगी से नई ऊर्जा प्राप्त होगी।

    महिलाओं की संख्या में वृद्धि

    भविष्य में लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को विशेष आरक्षण दिए जाने के मद्देनजर भाजपा की नई टीम में पिछली टीम की तुलना में अधिक महिलाओं की उम्मीद की जा रही है। भाजपा के संविधान के अनुसार, केंद्रीय पदाधिकारियों के लिए एक तिहाई पद महिलाओं को दिए जाने की व्यवस्था है, लेकिन इस बार इस नियम का पालन होना मुश्किल नजर आ रहा है। पार्टी के विस्तारीकरण के दृष्टिकोण से, केंद्रिय टीम में राज्यों में सक्रिय कई नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं।

    जिम्मेदारियों का वितरण

    सूत्रों का कहना है कि राज्यों के प्रभारी और सह प्रभारियों की नियुक्ति में केंद्रीय पदाधिकारियों का होना आवश्यक नहीं है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भी इस जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। चूंकि प्रभारियों की भूमिका अनुभव के संदर्भ में महत्वपूर्ण होती है, इसलिए इसमें वरिष्ठ नेताओं को अधिक जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।

  • हेमंत ने लंदन के भारतीय उच्चायोग में झारखंड की भूमिका पर बयान दिया

    हेमंत ने लंदन के भारतीय उच्चायोग में झारखंड की भूमिका पर बयान दिया

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यूके में आधिकारिक स्वागत समारोह

    लंदन: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ब्रिटेन स्थित भारत के उच्चायोग में उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी द्वारा आयोजित एक स्वागत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों के साथ संवाद स्थापित किया।

    झारखंड का योगदान और विकास

    कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने झारखंड के समग्र विकास में योगदान को महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री सोरेन ने झारखंड की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक संभावनाएं, प्राकृतिक संसाधन और मानव संसाधनों की क्षमताओं पर चर्चा की। उनका कहना था कि झारखंड खनिज संपदा, युवा शक्ति और सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

    संरक्षण और सांस्कृतिक साझेदारी

    संवाद में यूनाइटेड किंगडम के साथ विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक साझेदारी के अवसरों पर विशेष ध्यान दिया गया। उच्च शिक्षा, कौशल विकास, खेल, और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में संभावित सहयोग की चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से झारखंड के युवाओं को वैश्विक स्तर पर अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

    यूके-भारत रणनीतिक साझेदारी

    यह कार्यक्रम यूके-भारत रणनीतिक साझेदारी के समग्र ढांचे के अनुरूप रहा और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद द्विपक्षीय सहयोग को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे झारखंड के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेश, शिक्षा और तकनीकी सहयोग के नए द्वार खुल सकते हैं।

  • भाजपा ने कांग्रेस से पूछा, क्या थरूर को मिलेगा ‘फतवा’? गौतम गंभीर की प्रशंसा पर विवाद

    भाजपा ने कांग्रेस से पूछा, क्या थरूर को मिलेगा ‘फतवा’? गौतम गंभीर की प्रशंसा पर विवाद

    थरूर की प्रशंसा से भाजपा का सवाल

    नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने नागपुर में न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच से पहले पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर के साथ एक सेल्फी साझा की। थरूर ने गंभीर की आलोचनाओं के बावजूद उनकी प्रशंसा करते हुए कहा कि गंभीर का काम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे चुनौतीपूर्ण है। इस मुलाकात पर भाजपा ने कांग्रेस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।

    भाजपा की प्रतिक्रिया

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा है कि कांग्रेस शायद थरूर के खिलाफ एक और फतवा जारी कर सकती है। उन्होंने ट्वीट किया कि यह सवाल उठाना कि थरूर का नागपुर जाना, गंभीर से मिलना या फिर मोदी के बाद गंभीर के काम की मुश्किलता को मानना, कांग्रेस के लिए गुस्से का कारण बन सकता है।

    थरूर का गंभीर को समर्थन

    थरूर ने गंभीर की प्रशंसा करते हुए कहा कि लाखों लोग उनके निर्णयों पर सवाल उठाते हैं, लेकिन वह हमेशा शांत रहते हैं और निर्भीक होकर कार्य करते हैं। थरूर ने लिखा, “उनकी शांत दृढ़ता और नेतृत्व की प्रशंसा करनी चाहिए।” उन्होंने गंभीर को भविष्य में सभी सफलताओं के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

    गंभीर का जवाब

    इस पर गंभीर ने देर रात एक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने थरूर का धन्यवाद करते हुए लिखा कि जब हालात शांत हो जाएंगे, तब कोच के सीमित अधिकारों को लेकर सच्चाई सामने आएगी। गंभीर ने कहा कि इस स्थिति में खुद को खड़ा देखना उनके लिए हास्यास्पद है।

  • कांग्रस विधायक मध्यप्रदेश में RSS हिंदू कार्यक्रम में शामिल होने पर विवाद, AICC से स्पष्टीकरण मांगा

    कांग्रस विधायक मध्यप्रदेश में RSS हिंदू कार्यक्रम में शामिल होने पर विवाद, AICC से स्पष्टीकरण मांगा

    कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह के आरएसएस कार्यक्रम में शामिल होने पर विवाद

    भोपाल। मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक अभिजीत शाह का आरएसएस के हिंदू कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए चिंता का विषय बन गया है। इस मामले की जानकारी अब आल-इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) तक पहुंच चुकी है, जहां उनसे इस संदर्भ में स्पष्टीकरण मांगा गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी को इस मामले की पूरी रिपोर्ट सौंप दी है।

    कार्यक्रम में शामिल होने पर आपत्ति

    अभिजीत शाह हरदा जिले के टिमरनी से विधायक हैं। हाल ही में टिमरनी विधानसभा के रहटगांव तहसील मुख्यालय पर एक आरएसएस कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें उन्होंने भाग लिया। उनके इस फैसले पर हरदा जिले के स्थानीय नेताओं ने अपनी आपत्ति व्यक्त की है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।

  • लंदन में हेमंत सोरेन का भव्य स्वागत, कल्पना सोरेन संग संगीत का अनुभव

    लंदन में हेमंत सोरेन का भव्य स्वागत, कल्पना सोरेन संग संगीत का अनुभव

    हेमंत सोरेन का यूरोप दौरा

    रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन और एक प्रतिनिधिमंडल के साथ विदेश यात्रा पर हैं। विश्व आर्थिक मंच में भाग लेने के बाद, वह लंदन पहुंचे। लंदन पहुंचने पर मुख्यमंत्री और कल्पना सोरेन का झारखंड की परंपरा के अनुसार स्वागत किया गया। यहां, झारखंड के स्कॉलर्स और डायसपोरा के सदस्यों ने संगीत के साथ उनका अभिनंदन किया और उन्हें झारखंडी जोहार कहा।

    स्वागत का अनुभव

    देर रात लंदन में अपनों द्वारा मिले स्वागत से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भावुक हो गए। उन्होंने इस अवसर पर एक ट्वीट कर अपने अनुभव को साझा किया और सभी का धन्यवाद कहा।

    ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में कार्यक्रम

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यूरोप में भारत का प्रतिनिधित्व भी करेंगे। उनका एक विशेष कार्यक्रम प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में है। इस कार्यक्रम के दौरान, सोरेन सेंट जॉन्स कॉलेज और ऑल सोल्स कॉलेज जैसे शैक्षणिक संस्थानों के साथ जुड़ेंगे। वे एक विशेष व्याख्यान देने के बाद, ‘ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट’ में सार्वजनिक नीति और शासन पर चर्चा करेंगे।

    विकास के लिए नए अवसर

    इस दौरे के दौरान, ऐसा माना जा रहा है कि हेमंत सोरेन झारखंड में विकास कार्यक्रमों के लिए एक नया ब्लूप्रिंट तैयार कर सकते हैं। यह यात्रा झारखंड के लिए निवेश और साझेदारी के नए रास्ते खोलने में सहायक सिद्ध हो सकती है।

  • ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने का श्रेय लिया, कांग्रेस ने किया मजाक

    ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव को कम करने का श्रेय लिया, कांग्रेस ने किया मजाक

    अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का भारत-पाकिस्तान तनाव पर दावा

    नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले साल हुए तनाव को खत्म करने का दावा एक बार फिर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया है। ट्रंप के इस नए बयान के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ज़ोरदार हमला किया है। कांग्रेस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रंप अब तक इस प्रकार का दावा 70 बार कर चुके हैं, जबकि भारत सरकार ने इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। वाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने दुनिया की आठ लंबी चल रही लड़ाइयों को समाप्त कराया है।

    भारत-पाक के संदर्भ में ट्रंप का बयान

    ट्रंप ने कहा, “भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। मैंने देखा कि दोनों देश परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। यदि मैं हस्तक्षेप नहीं करता, तो करोड़ों निर्दोष लोग मारे जाते।” उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने 10 महीनों के दौरान कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया और इजरायल-ईरान जैसे आठ महत्वपूर्ण संघर्षों को सुलझाया है।

    कांग्रेस का तीखा प्रतिरोध

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ट्रंप और मोदी की मित्रता पर तंज किया। उन्होंने लिखा, “हाल ही में यह संख्या 68 थी, लेकिन अब यह बढ़कर 70 हो गई है। प्रधानमंत्री के ‘अच्छे दोस्त’ ने यह फिर से दावा किया है कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के अचानक रूकने का श्रेय उन्हें मिलता है।”

    नोबेल शांति पुरस्कार की आकांक्षा

    अपने बयान में ट्रंप ने यह भी व्यक्त किया कि उन युद्धों को रुकवाने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकने से लगभग 1.5 से 2 करोड़ लोगों की जान बचाई गई है, जो उनके लिए किसी भी पुरस्कार से बड़ी बात है।

    भारत सरकार का रुख

    यह ध्यान देने योग्य है कि भारत सरकार ने हमेशा कहा है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। फिर भी, 10 मई 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पुष्टि की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता के फलस्वरूप दोनों देशों ने पूर्ण युद्धविराम पर सहमति जताई है। कांग्रेस का आरोप है कि ट्रंप के इस प्रकार के बार-बार दावे भारतीय संप्रभुता और प्रधानमंत्री के दावों पर सवाल खड़ा करते हैं।

  • कर्नाटक: बेंगलुरु के नगर निगम चुनाव में बैलट पेपर से मतदान होगा

    कर्नाटक: बेंगलुरु के नगर निगम चुनाव में बैलट पेपर से मतदान होगा

    बेंगलुरु नगर निकाय चुनाव: बैलट पेपर से मतदान की वापसी

    बेंगलुरु। कर्नाटक राज्य चुनाव आयोग ने नगर निकाय चुनावों में मतदान के लिए बैलट पेपर के उपयोग की घोषणा की है। यह निर्णय 25 वर्षों के बाद लिया गया है, जिसमें ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) के अंतर्गत आने वाले पांच नई नगर निगमों के चुनाव बैलट पेपर से होंगे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी जी.एस. संगरेशी ने इस निर्णय को कानूनी रूप से वैध बताते हुए कहा कि इसका सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से कोई टकराव नहीं है। पिछले चुनावों में, 2000 के आस-पास बैलट पेपर का उपयोग किया गया था, जबकि हाल ही में ईवीएम का चलन रहा है। अब पारंपरिक मतदान प्रणाली की वापसी हो रही है।

    चुनाव की तारीखें और मतदाता संख्या

    इन चुनावों का आयोजन 25 मई के बाद और 30 जून के पहले करने का निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने दिया है, ताकि यह समय 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाओं के बाद का हो। लगभग 88.91 लाख मतदाता इस प्रक्रिया में शामिल होंगे, जिनके नाम ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स में शामिल हैं। राज्य चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि इस वर्ष के अंत में होने वाले जिला और तालुक पंचायत चुनाव भी बैलट पेपर के माध्यम से होंगे। इस कदम को पारदर्शिता बढ़ाने और मतदाता विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    मतगणना की प्रक्रिया

    राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतगणना में कोई देरी नहीं होगी, इसके लिए सभी आवश्यक लॉजिस्टिक्स, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस बल की व्यवस्था की जाएगी। चुनाव एक ही दिन में संपन्न हो जाएगा और परिणाम तुरंत घोषित करने की योजना है। जीबीए के अंतर्गत 5 नगर निगमों में कुल 369 वार्ड हैं और लगभग 89 लाख मतदाता चुनावी प्रक्रिया में भाग लेंगे। ड्राफ्ट मतदाता सूची 19 जनवरी को जारी की गई थी, जिसमें आपत्तियां 20 जनवरी से 3 फरवरी तक स्वीकार की जा सकती हैं। अंतिम सूची 16 मार्च को प्रकाशित की जाएगी। यह फैसला पिछले वर्ष कर्नाटक कैबिनेट की सिफारिश के अनुरूप लिया गया है और वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में इसे लागू किया जा रहा है।

  • बड़ी Boss खेल में कांग्रेस ने Nitin Naveen को BJP अध्यक्ष बनने पर किया तंज

    बड़ी Boss खेल में कांग्रेस ने Nitin Naveen को BJP अध्यक्ष बनने पर किया तंज

    भाजपा ने नितिन नवीन को बनाया नया राष्ट्रीय अध्यक्ष, कांग्रेस ने उठाए सवाल

    नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नितिन नवीन को अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा ने अध्यक्ष की घोषणा पहले ही कर दी थी, जबकि चुनाव की औपचारिकता बाद में बताई गई। पार्टी का आरोप है कि यह प्रक्रिया तो पारदर्शी नहीं है और यह भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र पर सवाल उठाती है।

    कांग्रेस का मजबूर सवाल

    कांग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि अगर यह चुनाव था, तो प्रक्रिया का क्या हुआ? उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि आखिर नाम पहले कैसे तय कर लिए गए और फिर चुनाव की बातें कैसे की गईं। कांग्रेस का मत है कि भाजपा में संगठनात्मक चुनाव केवल एक दिखावा बनकर रह गए हैं, और असली फैसले पहले ही बंद कमरों में हो जाते हैं।

    चुनाव आयोग पर तीखा हमला

    कांग्रेस ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी जिक्र किया। पवन खेड़ा ने व्यंग्य करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में चुनाव आयोग का कोई योगदान नहीं था, इसलिए उनके लिए “छेड़छाड़” करने का कोई अवसर नहीं मिला। कांग्रेस ने पहले भी चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठाए हैं और इस बयान के जरिए उसने अपने विरोध को और तेज किया।

    ‘बॉस-बॉस’ की राजनीति पर तंज

    कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान पर भी तंज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि नितिन नवीन पार्टी मामलों में उनके बॉस हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि भाजपा में कभी कोई किसी का बॉस बन जाता है और कभी कोई और। इसे ‘बॉस-बॉस’ का खेल बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान देश और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटका रहे हैं।

    गंगा स्नान विवाद भी उठाया

    कांग्रेस ने हाल ही में गंगा में स्नान को लेकर साधु-संतों से जुड़े विवाद का जिक्र किया। पवन खेड़ा ने कहा कि एक ओर हिंदू धर्म के प्रमुख संत आहत हैं, दूसरी ओर भाजपा सत्ता के खेल में व्यस्त है। उन्होंने इसे राजनीति नहीं, बल्कि ‘बिग बॉस’ जैसा शो करार दिया, जहां हर दिन नया ड्रामा देखने को मिलता है।

    शहरी नक्सल पर कांग्रेस का विरोध

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शहरी नक्सल समस्या के संदर्भ में की गई टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने केंद्र सरकार के पुराने जवाब का हवाला देते हुए पूछा कि क्या प्रधानमंत्री मानते हैं कि जो कोई उनके विरोध में बोले, उसे शहरी नक्सल मान लिया जाएगा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि 2020 में गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया था कि ‘अर्बन नक्सल’ शब्द सरकारी भाषा का हिस्सा नहीं है।

    नवीनतम बयान पर गहरी प्रतिक्रिया

    कांग्रेस का यह प्रतिरोध उस भाषण के बाद आया, जिसमें प्रधानमंत्री ने भाजपा मुख्यालय में पार्टी के नए अध्यक्ष के चुनाव के बाद ‘शहरी नक्सल’ को देश के लिए खतरा बताया। मोदी ने कहा कि ये लोग सरकार या उनके पक्ष में बोलने वालों को निशाना बनाते हैं और उन्हें सामाजिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश करते हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री स्पष्ट करें कि क्या हर असहमति को इसी दृष्टिकोण से देखा जाएगा।

  • कपिल सिब्बल और एएसजी राजू के बीच अदालत में टकराव

    कपिल सिब्बल और एएसजी राजू के बीच अदालत में टकराव

    दिल्ली हाई कोर्ट में लालू यादव का लैंड-फॉर-जॉब्स मामला

    नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई हुई। इस मामले में यादव का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल करते रहे, जबकि सीबीआई की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान दोनों वकीलों के बीच तीखी बहस हुई।

    दलीलें और विवाद

    कपिल सिब्बल ने दलील दी कि मामले में आगे बढ़ने के लिए पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य था, जो अभी तक नहीं ली गई है। उन्होंने बताया कि सीबीआई ने पहले ही इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, इसलिए अब आरोप लगाना अनुचित है। इस पर ASG राजू ने सिब्बल की दलीलों पर असहमति जताई और उन पर नए मुद्दे उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सिब्बल ने कानून की गलत व्याख्या की है और यह गुमराह करने वाली बातें कर रहे हैं।”

    तनाव बढ़ता गया

    ASG राजू के आरोपों पर सिब्बल की नाराजगी बढ़ गई। उन्होंने तीखे स्वर में कहा, “आपने मुझे गुमराह करने वाला कहने की हिम्मत कैसे की?” इसके जवाब में ASG राजू ने कहा कि अदालत में सही जानकारी प्रस्तुत करना उनकी जिम्मेदारी है। कोर्ट में पत्रकारिता का सम्मान होने के बावजूद, उन्होंने तनाव को बढ़ाने वाले आरोप लगाए।

    जज का हस्तक्षेप

    इस बहस के बीच, सिब्बल ने राजू की पेशेवर आचरण पर भी सवाल उठाए, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। हालांकि, ASG राजू ने शांतिपूर्वक कहा कि वे सिब्बल का सम्मान करते हैं, लेकिन कानूनी स्थिति स्पष्ट करना अनिवार्य है। न्यायाधीश ररविंदर डुडेजा ने वातावरण को स्थिर करने का प्रयास किया और कहा, “माहौल को थोड़ा शांत होने दीजिए।” इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई समाप्त कर दी।

    सुनवाई के आगे के कदम

    हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी संक्षिप्त लिखित दलीलें जमा करें, जो अधिकतम पांच पन्नों की होंगी। ये दलीलें एक सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जाएंगी, इसके बाद कोर्ट मामले पर विचार करेगा।

    लैंड-फॉर-जॉब्स मामला क्या है?

    सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू यादव रेलवे मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उनके परिवार के नाम पर जमीनें हासिल की गईं। सीबीआई ने 2022 में इस मामले में केस दर्ज किया और लालू यादव तथा उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ चार्जशीट फाइल की। यादव का कहना है कि यह जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आवश्यक पूर्व अनुमति के बिना शुरू की गई थी, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।

  • नितिन नबीन ने बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा, 20 प्रस्तावक शामिल

    नितिन नबीन ने बीजेपी अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरा, 20 प्रस्तावक शामिल

    नितिन नबीन ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए किया नामांकन

    डेस्क: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नबीन ने सोमवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। अगले 24 घंटों में अध्यक्ष पद के लिए सभी प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। नामंकन के समय केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। नितिन नबीन का निर्विरोध चुनाव होना प्रतीत होता है, जिसकी औपचारिक घोषणा मंगलवार, 20 जनवरी को की जाएगी।

    नामांकन की प्रक्रिया

    नितिन नबीन के लिए कुल 37 नामांकन पत्र प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से दाखिल किए गए हैं, जबकि एक नामांकन पत्र बीजेपी संसदीय दल द्वारा जमा किया गया है। सभी नामांकन पत्रों पर 20 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर हैं। नामांकन प्रक्रिया आज चार बजे तक पूरी होने की उम्मीद है, और इसके बाद पांच से छह बजे के बीच नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया भी हो सकती है।

    प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति

    मंगलवार सुबह 11 बजे बीजेपी मुख्यालय पर 700 प्रतिनिधियों का जुटान होगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहेंगे। पीएम मोदी की उपस्थिति में नितिन नबीन के चुनाव की औपचारिक औपचारिक घोषणा शाम छह बजे की जाएगी। उन्होंने संसदीय दल द्वारा प्रस्तुत नामांकन पत्र पर प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए हैं।

    नितिन नबीन की पृष्ठभूमि

    नितिन नबीन, दिवंगत नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं। उनके पिता ने जेपी आंदोलन से राजनीति में प्रवेश किया। नितिन नबीन का जन्म 1980 में पटना में हुआ। 2005 में उनके पिता के निधन के बाद, उन्होंने पटना पश्चिमी क्षेत्र से विधायक के रूप में जीत दर्ज की। उसके बाद से इस सीट पर उनकी लगातार विजय होती रही है।

    राजनीतिक करियर

    2016 में नितिन नबीन को बीजेपी युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। संगठन में उनकी भूमिका और मान्यता समय के साथ बढ़ी है। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं और तीन बार मंत्रिमंडल में भी स्थान लिया है। 2025 विधानसभा चुनाव में बीजेपी के उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद, उन्हें पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसे अब पूर्णकालिक अध्यक्ष पद में बदला जा रहा है।