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  • महाराष्ट्र: निकाय चुनाव में कांग्रेस ने उद्धव-शरद गुट को पीछे छोड़ा, MVA में बदलाव के संकेत

    महाराष्ट्र: निकाय चुनाव में कांग्रेस ने उद्धव-शरद गुट को पीछे छोड़ा, MVA में बदलाव के संकेत

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव: राजनीतिक उठापटक का सिलसिला जारी

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में हाल ही में संपन्न निकाय चुनावों के परिणामों के बाद स्थिति फिर से बदलती दिखाई दे रही है। विभिन्न नगर निगमों में मेयर पद को लेकर पार्टी के बीच वार्ताएँ चल रही हैं। इसमें विशेष रूप से बीएमसी के मेयर पद को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। इस पद को पाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच सक्रियता बढ़ी है।

    कांग्रेस का नया राजनीतिक समीकरण

    निकाय चुनावों में कांग्रेस ने उद्धव ठाकरे और शरद पवार के गुटों को पीछे छोड़ते हुए अपने लिए एक मजबूत स्थिति बनाई है। यह चुनाव परिणाम न केवल कांग्रेस के लिए एक उत्साहजनक संकेत हैं, बल्कि महाविकास आघाड़ी (MVA) के भीतर भी समीकरण बदलने की संभावनाएँ उत्पन्न कर रहे हैं। इस बदलाव के चलते भविष्यात की राजनीति में नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    महाराष्ट्र के अन्य नगर निगमों की स्थिति

    महाराष्ट्र के विभिन्न नगर निगमों में राजनीतिक दलों के बीच परस्पर प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है। प्रत्येक पार्टी अपने-अपने समर्थकों को सक्रिय करने में लगी है, ताकि वे अपनी स्थिति को मजबूत बना सकें। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा दल अपनी प्रभावशीलता बनाए रख पाता है और कौन सा आगे बढ़ता है।

  • नगर निकाय चुनाव पर BJP की बैठक, रघुबर दास की अनुपस्थिति

    नगर निकाय चुनाव पर BJP की बैठक, रघुबर दास की अनुपस्थिति

    झारखंड में नगर निकाय चुनाव की तैयारी: बीजेपी की बैठक संपन्न

    रांची: झारखंड में आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। रांची में बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में रविवार को प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में नगर निकाय चुनाव की रणनीतियों पर चर्चा की गई।

    बीजेपी नेताओं की भागीदारी

    इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के अलावा बीजेपी के कई अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए। इस बैठक में दो पूर्व मुख्यमंत्री, अर्जुन मुंडा और रघुबर दास, उपस्थित नहीं थे। अर्जुन मुंडा दिल्ली में थे, जबकि रघुबर दास की अनुपस्थिति पर विभिन्न तरह की चर्चाएं चल रही हैं।

    रघुबर दास की अनुपस्थिति

    रघुबर दास, जो हाल ही में ओडिशा में राज्यपाल के पद से इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति में लौटे हैं, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष बनने के लिए एक प्रमुख दावेदार के रूप में देखे जा रहे थे। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व ने आदित्य साहू पर भरोसा जताया। राष्ट्रपति चुनाव में रघुबर दास के नजरअंदाज किए जाने से उनकी असंतोष की स्थिति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, जिसका असर बैठक में उनकी अनुपस्थिति पर भी पड़ा।

    सीटों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं

    मीडिया में रघुबर दास और चंपाई सोरेन के नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन से दूरी की खबरें आई हैं। रविवार की बैठक में चंपाई सोरेन तो शामिल हुए, लेकिन रघुबर फिर से गायब रहे। आदित्य साहू ने रघुबर दास से संपर्क करने के लिए उनके घर जाकर भी मुलाकात की, लेकिन इसके बावजूद रघुबर की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ावा दिया। नगर निकाय चुनाव को लेकर हुई बैठक से उनकी दूरी को लेकर कई सियासी बहसें सामने आ रही हैं।

  • उद्धव ठाकरे का दावा: बीएमसी में राजनीतिक उथल-पुथल संभव है

    उद्धव ठाकरे का दावा: बीएमसी में राजनीतिक उथल-पुथल संभव है

    बीएमसी चुनाव में बीजेपी और शिंदे गुट की जीत, उद्धव ठाकरे के लिए झटका

    मुंबई। बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे गुट की शानदार जीत ने उद्धव ठाकरे को एक महत्वपूर्ण झटका दिया है। हालाँकि, उद्धव ठाकरे हार मानने को तैयार नहीं हैं और उनका दावा है कि मेयर पद पर उनका Führung है। उनके इस बयान के बाद, शिंदे गुट के पार्षदों को सुरक्षा के उद्देश्य से रिजॉर्ट में भेजा गया है। बीएमसी की 89 सीटों पर बीजेपी ने पूर्ण रूप से वर्चस्व स्थापित किया है, जिसके कारण मेयर पद पर बीजेपी के कब्जा की संभावना बढ़ गई है। उद्धव ठाकरे के दावों ने राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है।

    शिवसेना का बंटवारा और चुनाव परिणाम

    पिछले दो दशकों से बीएमसी में अविभाजित शिवसेना का राज था। लेकिन हाल ही में शिवसेना के दो गुटों में बंटवारे ने राजनीतिक समीकरण को बदल दिया। इस बार के चुनाव में, उद्धव गुट ने 65 सीटें प्राप्त कीं, जबकि शिंदे गुट को 29 सीटें मिलीं। दोनों गुटों की कुल सीटों का योग 94 है, जबकि बीजेपी ने 89 सीटें जीती हैं। यदि शिवसेना बंटी नहीं होती, तो बीजेपी की स्थिति कमजोर रहती।

    शिवसेना के नेताओं के विचार

    शिवसेना (UBT) के नेता सुनील प्रभु ने कहा है कि शिवसेना के विभाजन के चलते ही बीजेपी को सफलता मिली है। पूर्व कांग्रेस नेता संजय झा ने भी इस बात को दोहराया कि अगर शिवसेना एकजुट होती, तो बीजेपी को बीएमसी में जीतना मुश्किल होता। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि दोनों गुट एक साथ आ जाएँ, तो बीजेपी को विपक्ष में बैठाना संभव है।

    चुनाव में सीटों का वितरण और संभावनाएँ

    उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी का मेयर बनने की संभावना आज भी बनी हुई है। इसके तुरंत बाद, शिंदे gपार्षदों को रिजॉर्ट में भेज दिया गया। बीजेपी और शिंदे गुट की कुल सीटें मिलकर 118 हैं, जबकि 227 सीटों वाली इस महानगरपालिका में बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता है। इस चुनाव में अजित पवार ने अकेले चुनाव लड़ा और तीन सीटें जीतीं। यदि उनका समर्थन मिल जाता है, तो यह संख्या 121 हो जाएगी।

    ठाकरे परिवार का संयुक्त प्रयास और परिणाम

    उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के संयुक्त प्रयासों के बावजूद उनकी कुल सीटें 71 रही हैं। इसके अलावा, एक सीट एनसीपी (शरद पवार) ने जीती है। अगर कांग्रेस उनके साथ आ जाती है तो कुल 24 और सीटें जुड़ जाएंगी। यदि अन्य दलों जैसे AIMIM और समाजवादी पार्टी का भी साथ मिलता है, तो कुल सीटों की संख्या 106 हो जाएगी। बहुमत के लिए केवल 8 सीटों की कमी रह जाएगी।

    इस चुनाव के परिणाम ठाकरे परिवार के लिए एक प्रमुख चुनौती साबित हुए हैं, भले ही उद्धव ठाकरे की पार्टी सीटों के मामले में शिंदे गुट से थोड़ी आगे है। उद्धव ठाकरे ने 65 सीटों पर जीत हासिल की है, जिससे वह बीएमसी में मजबूती से विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए तत्पर हैं।

  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 23 जनवरी को ऑक्सफोर्ड में व्याख्यान

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का 23 जनवरी को ऑक्सफोर्ड में व्याख्यान

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ऑक्सफोर्ड यात्रा

    रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 23 जनवरी को यूके की आधिकारिक यात्रा के दौरान ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में शाम पांच बजे एक महत्वपूर्ण विषय पर संबोधन देंगे। इस कार्यक्रम में चर्चा का केंद्र होगा ‘आदिवासी बहुल, संसाधन-समृद्ध राज्य टिकाऊ और हरित औद्योगीकरण कैसे कर सकता है, जिम्मेदार खनिज आधारित विनिर्माण और समावेशी, निवेश-आधारित विकास को कैसे आगे बढ़ा सकता है।’

    अ academic चर्चा में शामिल विशेषज्ञ

    मुख्यमंत्री के साथ इस चर्चा में ऑक्सफोर्ड के सामाजिक मानवशास्त्र की प्रोफेसर अल्पा शाह और ब्लावटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में प्रोफेसर माया टयूडर भी शामिल होंगी। इस अवसर पर प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण विकास की दृष्टि के आधार पर संबंधित मुद्दों पर बातचीत होगी। हेमंत सोरेन ने अपने संबोधन के लिए उत्सुकता व्यक्त की है।

    स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत से बैठक

    इस यात्रा के दौरान, मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में भारत के राजदूत मृदुल कुमार से मुलाकात की। इस बैठक में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 से संबंधित तैयारियों और एजेंडे पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड में डब्ल्यूईएफ के अलावा यूनाइटेड किंगडम में उर्जा क्षेत्र के वैश्यिक निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और नीति-निर्माण से जुड़े संस्थानों के साथ संवाद करेगा।

  • राज ठाकरे के रसमलाई टिप्पणी पर भाजपा की प्रतिक्रिया, निकाय चुनाव हार को किया मजाक

    राज ठाकरे के रसमलाई टिप्पणी पर भाजपा की प्रतिक्रिया, निकाय चुनाव हार को किया मजाक

    महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा की जीत

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा और उसके गठबंधन दलों ने महत्वपूर्व विजय प्राप्त की है। बीएमसी चुनावों में मजबूत प्रदर्शन के बाद, भाजपा ने राज ठाकरे द्वारा अन्नामलाई पर किए गए तंज का जवाब दिया है। भाजपा का यह कदम उस समय आया है जब कर्नाटक के बेंगलुरू सेंट्रल से भाजपा सांसद ने इस विवाद को उभारा।

    भाजपा का जवाब

    राज ठाकरे के बयान के प्रति भाजपा ने प्रतिक्रिया करते हुए अपने राजनीतिक रणनीति को स्पष्ट किया है। इस मामले में भाजपा ने न केवल अपने सहयोगियों का समर्थन किया है, बल्कि अन्नामलाई के प्रति अपने पक्ष को भी मजबूती से रखा है। यह भाजपा के लिए एक अवसर है कि वह अपनी स्थिति को और मजबूत कर सके और आगामी चुनावों के लिए अपनी तैयारियों को आगे बढ़ा सके।

  • केंद्रीय मंत्री ने कहा, बीजेपी खुद बनाएगी पंजाब में सरकार, अभय चौटाला का गठबंधन का समर्थन नहीं

    केंद्रीय मंत्री ने कहा, बीजेपी खुद बनाएगी पंजाब में सरकार, अभय चौटाला का गठबंधन का समर्थन नहीं

    बीजेपी की पूर्व बयानबाजी और अकाली दल से दूरी

    चंडीगढ़। केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने हाल ही में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) बिना शिरोमणि अकाली दल (SAD) के सहयोग के पंजाब में सत्ता में आ सकती है। यह बयान उन्होंने कानून-व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या बीजेपी फिर से SAD के साथ गठबंधन कर सकती है, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से यह कहा कि इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हो रही है। बिट्टू ने यह भी बताया कि अकाली दल के भीतर कई अलग-अलग गुट हैं।

    बिट्टू का अकाली दल पर हमला

    बिट्टू ने SAD पर आरोप लगाया कि उनके शासनकाल के दौरान ड्रग्स और गैंगस्टरवाद आम थे। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसे गठबंधन की आवश्यकता है। उनकी बातों पर AAP नेता बलतेज पन्नू ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिट्टू ने गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा कि बादल (SAD) के साथ गठबंधन करने का मतलब पंजाब में ड्रग्स और गैंगस्टरवाद की वापसी को स्वीकार करना होगा।

    बीजेपी का प्रदर्शन

    पंजाब बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता हाल ही में पार्टी द्वारा आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। बीजेपी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के निवास का घेराव करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। पुलिस ने पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़, मनोरंजन कालिया सहित कई नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया। जाखड़ ने AAP सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान में पंजाब में आम आदमी की सुरक्षा नहीं है और “गैंगस्टर राज” का कायम रहना चिंता का विषय है।

    चुनाव की तैयारी

    अक्टूबर 2025 में बिट्टू ने घोषणा की थी कि बीजेपी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उल्लेखनीय है कि SAD ने 2020 में कृषि कानूनों के विरोध में NDA का साथ छोड़ दिया था, जिसके बाद से दोनों पार्टियों के बीच पुनः गठबंधन की संभावना पर चर्चा हो रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दल फिर से एकजुट हो सकते हैं।

  • पश्चिम बंगाल में चुनावी गतिविधियाँ, जहां ममता बनर्जी ने राजनीतिक पहचान बनाई

    पश्चिम बंगाल में चुनावी गतिविधियाँ, जहां ममता बनर्जी ने राजनीतिक पहचान बनाई

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी में सिंगूर की अहमियत

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस वर्ष विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेजी से चल रही हैं। सियासी गतिविधियाँ एक बार फिर सिंगूर के इर्द-गिर्द केंद्रित हो गई हैं। यह वही स्थान है, जहाँ ममता बनर्जी का राजनैतिक उदय हुआ था। भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 18 जनवरी को सिंगूर में होने वाली रैली को महत्त्वपूर्ण माना है, जिससे पार्टी को संभावनाएँ दिखाई दे रही हैं। सिंगूर पहले टाटा नैनो की फैक्ट्री का स्थल था और अब भाजपा की नजरें यहाँ से संभावित बदलाव पर हैं।

    2008 का सिंगूर विवाद

    अक्टूबर 2008 में, सिंगूर की उपजाऊ ज़मीन पर एक असामान्य शांति छा गई थी। यह स्थिति टाटा ग्रुप के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा द्वारा नैनो कार प्रोजेक्ट को सिंगूर से गुजरात स्थानांतरित करने की घोषणा के बाद विकसीत हुई। इस निर्णय के पीछे व्यापारिक माहौल की समस्याओं का जिक्र था, जिससे एक राजनीतिक विवाद शुरू हुआ। रतन टाटा ने उस समय कहा था कि उन्हें ममता बनर्जी के विरोध का सामना करना पड़ा। इस फैसले के बाद, टाटा को गुजरात में नैनो प्लांट स्थापित करना पड़ा।

    किसानों की स्थिति

    आज, सिंगूर की अधिकांश भूमि बंजर पड़ी है। जिन किसानों ने अपनी ज़मीन दी थी, उनकी जिंदगी में कोई बदलाव नहीं आया है। सिंगूर के निवासी कौशिक बाग ने बताया कि उन्होंने अपनी ज़मीन स्वेच्छा से दी थी, लेकिन उन्हें रोजगार नहीं मिला। अब, 18 साल बाद, वह उम्मीद कर रहे हैं कि पीएम मोदी की आने वाली यात्रा कुछ सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

    खेती के लिए अनुपयुक्त भूमि

    कौशिक बाग ने बताया कि अब उनकी ज़मीन खेती के लिए अनुपयुक्त हो गई है। श्यामापदो दास, जिन्होंने भी अपनी ज़मीन दी थी, ने बताया कि उन्हें विश्वास था कि उनकी ज़मीन वापस मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वह मानते हैं कि सिंगूर एक राजनीतिक फलक बन गया है, जिसमें किसानों के कल्याण के लिए वादे अधूरे रह गए।

    प्रधानमंत्री का संभावित दौरा

    वर्तमान में, सिंगूर के स्थानीय निवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से व्यापक उम्मीदें हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह यात्रा उन्हें एक नई पहचान और संभावनाएँ प्रदान कर सकती है। सिंगूर की भूमि को अभी भी ‘टाटा की ज़मीन’ के नाम से जाना जाता है, और लोगों को अब काफी समय बाद एक नई शुरुआत की उम्मीद है।

    सिंगूर विवाद का संक्षिप्त इतिहास

    कोलकाता से लगभग 40 किलोमीटर दूर सिंगूर में नैनो परियोजना के लिए 997.11 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। तृणमूल कांग्रेस और किसानों के संगठन ने आरोप लगाया था कि 400 एकड़ ज़मीन बिना consent के किसानों से ली गई थी, और इसे वापस करना चाहिए। ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर धरना दिया था, जिसके चलते हिंसा भी हुई थी और अंततः टाटा ने नैनो प्रोजेक्ट को गुजरात स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था।

  • शिवकुमार ने राहुल गांधी से मुलाकात में कहा, “प्रार्थनाओं का जवाब मिलता है”

    शिवकुमार ने राहुल गांधी से मुलाकात में कहा, “प्रार्थनाओं का जवाब मिलता है”

    सिद्धारमैया और शिवकुमार की राहुल गांधी से मुलाकात

    नई दिल्ली। कर्नाटका के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से एक संक्षिप्त मुलाकात की। इस बातचीत के बाद शिवकुमार ने कहा, “प्रार्थनाएं नाकाम नहीं होतीं।” यह मुलाकात उन दिनों हुई है जब राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों नेताओं के बीच तनाव की खबरें चल रही हैं। हालांकि, दोनों नेता इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से खारिज करते आ रहे हैं।

    शिवकुमार की पोस्ट का अर्थ

    शिवकुमार ने कन्नड़ में एक ट्वीट किया, जिसका हिंदी अनुवाद है, “भले ही कोशिश नाकाम हो जाए, लेकिन प्रार्थना नाकाम नहीं होती।” इस पोस्ट को मुख्यमंत्री पद की दौड़ से जोड़ा जा रहा है।

    मुलाकात का संदर्भ

    पीटीआई भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह संक्षिप्त बातचीत तब हुई जब राहुल गांधी तमिलनाडु के नीलगिरी जिले के गुडालूर में एक कार्यक्रम में शिरकत करने के बाद मंडकल्ली हवाई अड्डे पर रुके। उन्होंने सिद्धारमैया और शिवकुमार से अलग-अलग और फिर सामूहिक रूप से बातचीत की।

    महत्वपूर्ण बातचीत

    हालांकि, इस बैठक में क्या चर्चा हुई, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही कशमकश और संभावित मंत्रिमंडल पुनर्गठन की बातें इसे महत्वपूर्ण बना रही हैं। पार्टी के सूत्रों के अनुसार, सेमिनार में राज्य में कांग्रेस के ‘मनरेगा बचाओ’ अभियान और इस कानून को बहाल करने की उपायों पर भी चर्चा हुई।

    दिल्ली में संभावित बातचीत

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर सिद्धारमैया और शिवकुमार को नई दिल्ली बुलाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पार्टी जब भी आवश्यक समझेगी, दोनों नेताओं को बातचीत के लिए बुलाएगी।

    सीएम पद पर बदलाव की अटकलें

    कर्नाटका के कांग्रेस सरकार का कार्यकाल 20 नवंबर को ढाई वर्ष पूरा करेगा, जिसके बाद मुख्यमंत्री पद में संभावित बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। 2023 में सरकार गठन के समय सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच हुए कथित ‘सत्ता-साझाकरण’ समझौते ने इस पर और चर्चा बढ़ा दी है।

    सिद्धारमैया का संकल्प

    हाल ही में, सिद्धारमैया ने देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़कर राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता बनने का गौरव प्राप्त किया है। उन्होंने भरोसा जताया है कि वह अपनी पांच साल की कार्यकाल पूरी करेंगे, लेकिन यह भी कहा है कि अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान का होगा।

  • सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ ED FIR पर लगाई रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ ED FIR पर लगाई रोक

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका

    डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से महत्वपूर्ण झटका लगा है। शीर्ष कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के खिलाफ दायर की गई FIR पर रोक लगा दी है। दरअसल, ममता बनर्जी ने I-PAC कार्यालय में छापेमारी के बाद ED के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई में बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वे एजेंसी के कार्यों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

    ED की छापेमारी पर ममता बनर्जी का विरोध

    ED द्वारा I-PAC के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद कोलकाता में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ममता बनर्जी मौके पर पहुंचीं और उन्होंने दस्तावेजों को गाड़ियों में डालने की कोशिश की। कोर्ट ने इस सिलसिले में CCTV फुटेज और अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की बेंच ने ममता बनर्जी, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और पुलिस को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी, और कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से दो हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है।

    ममता बनर्जी पर सबूतों की चोरी का आरोप

    ED ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 8 जनवरी 2026 को हुई छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां मौजूद थीं और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। ममता के साथ बंगाल के पुलिस महानिदेशक भी मौजूद थे, जिन्होंने ED अधिकारियों के मोबाइल फोन छीन लिए। यह सब देखकर ED का मनोबल गिरा है और उनकी कार्यवाही में बाधा आई है।

    सुप्रीम कोर्ट की बेंच का गुस्सा

    सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हाईकोर्ट के रवैये पर नाखुशी जताई। वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि पिछले सुनवाई में यह प्रश्न उठा था कि हाईकोर्ट न्याय देने में असमर्थ है। इस पर बेंच ने सिब्बल को चेतावनी दी और कहा कि कोर्ट का निर्णय स्वतंत्र होगा।

    ED की जांच में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं

    सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह याचिका ED और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की जांच के संदर्भ में गंभीर मुद्दे उठाती है। कोर्ट ने कहा कि कानून का राज बनाए रखना महत्वपूर्ण है और किसी राज्य की सुरक्षा के नाम पर अपराधियों को संरक्षित नहीं किया जाना चाहिए।

    बेंच ने स्पष्ट किया कि किसी भी एजेंसी को चुनावी कार्यों में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, लेकिन गंभीर अपराध की जांच के दौरान कार्रवाई को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। मामले में केंद्रीय एजेंसी के कार्यों को रोकने के प्रयासों को गंभीरता से लिया जाएगा।

  • मध्य प्रदेश ने राज्‍यसभा चुनावों में चुने तीन नेताओं की जानकारी

    मध्य प्रदेश ने राज्‍यसभा चुनावों में चुने तीन नेताओं की जानकारी

    मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तैयारी

    भोपाल। मध्य प्रदेश में जल्द आयोजित होने वाले राज्यसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इस साल अप्रैल से जून के बीच राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने वाली हैं, जिनमें भाजपा की दो और कांग्रेस की एक सीट शामिल है। इससे पहले दावेदारी और बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कौन से नेता राज्यसभा में पहुंचेंगे।

    राज्यसभा के लिए बीजेपी के दावेदार

    भारतीय जनता पार्टी में राज्यसभा के लिए कई प्रमुख दावेदार सामने आए हैं। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी, पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य, और पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया शामिल हैं। इसके अलावा, कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए रामनिवास रावत भी इस रेस का हिस्सा हैं। ऐसे में भाजपा के लिए युवा चेहरों को मौका देने की बात भी चर्चित हो रही है। साधु-संतों को भी महत्व देने का विचार किया जा रहा है।

    कांग्रेस के दावेदार

    कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने अपनी सीट छोड़ने की घोषणा की है, जिससे उनकी स्थान पर नए दावेदारों की चर्चा बढ़ गई है। दौड़ में पूर्व सांसद नकुलनाथ, पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल, और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा, सज्जन सिंह वर्मा और मीनाक्षी नटराजन भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल हैं। युवा नेतृत्व को भी इस बार मौका मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    एमपी की राज्यसभा सीटों की स्थिति

    मध्य प्रदेश में कुल 11 राज्यसभा सीटें हैं, जिनमें से 8 भारतीय जनता पार्टी और 3 कांग्रेस के पास हैं। इस साल 9 अप्रैल को दिग्विजय सिंह और भाजपा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का कार्यकाल जून 2026 तक जारी रहेगा। इस परिस्थिति ने राजनीतिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है।

  • बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के निवास पर आग, दमकल विभाग ने स्थिति संभाली

    बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के निवास पर आग, दमकल विभाग ने स्थिति संभाली

    दिल्ली में बीजेपी सांसद के आवास में आग लगने की घटना

    पटनासाहिब: दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित बीजेपी सांसद रविशंकर प्रसाद के सरकारी आवास में बुधवार को सुबह आग लग गई। यह घटना मदर टेरेसा क्रिसेंट रोड पर सुबह लगभग 8:05 बजे हुई। प्रारंभ में दमकल विभाग को कोठी नंबर 2 में आग लगने की सूचना मिली, लेकिन现场 पहुँचने पर पता चला कि आग कोठी नंबर 21 में थी, जो कि सांसद का निवास स्थान है।

    आग लगने का विवरण

    आग एक कमरे में स्थित बेड में लगी थी, जिसकी लपटें देख कर तुरंत फायर ब्रिगेड को जानकारी दी गई। दमकल की तीन गाड़ियाँ मौके पर पहुँच गईं और कुछ ही समय में आग पर काबू पा लिया गया। राहत की बात यह है कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ है। दमकल विभाग और पुलिस की टीम आग लगने के कारणों की सावधानीपूर्वक जाँच कर रही है।

    आग के कारणों की पहचान में असमंजस

    शुरुआती जांच में यह पाया गया कि आग का केंद्र बेड था, जिसे समय रहते बुझा दिया गया। गनीमत यह रही कि उस समय कमरे में कोई उपस्थित नहीं था, जिसने बड़ा हादसा टाल दिया। आग लगने के तुरंत बाद दमकल की टीम को कॉल आने पर उनकी पहुँच सही स्थान पर हुई, हालांकि पहले एड्रेस को लेकर थोड़ी असमंजस थी। आग के कारणों का पता अभी तक नहीं चल सका है, यह जांच का विषय है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी या इसका कुछ और कारण था।

  • दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, अप्रैल में राजयसभा सीट खाली होगी

    दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान, अप्रैल में राजयसभा सीट खाली होगी

    कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का राज्यसभा जाने से इंकार

    भोपाल। हाल ही में कांग्रेस के दलित एजेंडे और एससी/एसटी को मुख्यमंत्री बनाने के बयान पर मध्यप्रदेश में सियासी हलचल के बीच दिग्विजय सिंह ने अपना रुख बदल लिया है। राज्यसभा के आगामी चुनावों को लेकर उन्होंने बड़ा बयान दिया है।

    राज्यसभा नहीं जाने का किया ऐलान

    भोपाल में एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वह राज्यसभा के लिए उम्मीदवार नहीं होंगे। इस बयान के चलते आगामी राज्यसभा चुनाव पर चर्चा को एक दिशा मिली है। गौरतलब है कि उनका राज्यसभा कार्यकाल 2026 में समाप्त हो रहा है और मध्यप्रदेश में 9 अप्रैल को एक सीट खाली हो रही है।

    कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की मांग

    दिग्विजय सिंह ने हाल ही में दलितों के एक कार्यक्रम में कहा था कि यदि एससी/एसटी से कोई मुख्यमंत्री बनता है, तो उन्हें खुशी होगी। उनके इस बयान पर सत्ताधारी बीजेपी ने उन्हें निशाना बनाया। इसके अलावा, उनकी ही पार्टी में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने दिग्विजय सिंह को पत्र भेज कर अनुरोध किया है कि खाली हो रही राज्यसभा सीट पर दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व होना चाहिए। पत्र में यह भी अपेक्षा जताई गई है कि इस मुद्दे को राष्ट्रीय नेतृत्व के समक्ष प्रमुखता से रखा जाए।

  • राबड़ी देवी के घर पर तेजप्रताप यादव का स्वागत, लालू और तेजस्वी से मिले

    राबड़ी देवी के घर पर तेजप्रताप यादव का स्वागत, लालू और तेजस्वी से मिले

    तेजप्रताप यादव ने लालू यादव के घर पर परिवार से की मुलाकात

    पटना: मकर संक्रांति से एक दिन पहले, तेजप्रताप यादव ने अपने माता-पिता और भाई से मुलाकात के लिए पटना में राबड़ी देवी के आवास का दौरा किया। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने 14 जनवरी को आयोजित होने वाले दही-चूड़ा भोज के लिए उन्हें आमंत्रित किया।

    पारिवारिक राजनीति में बदलाव

    बिहार विधानसभा चुनाव से पहले, लालू यादव ने अपने बेटे तेजप्रताप यादव को पार्टी और परिवार से बाहर कर दिया था। तेजप्रताप ने अपनी खुद की पार्टी बनाई और जनशक्ति जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन महुआ सीट से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। वहीं, छोटे भाई तेजस्वी यादव ने इंडिया गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा और राघोपुर सीट पर उनकी जीत हुई, जबकि आरजेडी केवल 25 सीटों पर सिमट गई। इस दौरान, लालू यादव के परिवार को लैंड फॉर जॉब मामले में भी बड़ा झटका लगा था।

    मकर संक्रांति भोज की तैयारी

    चुनाव में हार के बाद तेजस्वी यादव विदेश चले गए, और लालू यादव ने आंख का ऑपरेशन दिल्ली में कराया। लेकिन तेजप्रताप यादव पटना में बने रहे हैं। मकर संक्रांति के अवसर पर, उन्होंने अपने आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया, जैसा कि लालू यादव हमेशा करते थे। इस भोज में उन्होंने बीजेपी और जेडीयू के नेताओं को भी आमंत्रित किया।

    परिवार के साथ यादगार पल

    तेजप्रताप यादव ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं और सोशल मीडिया पर साझा कीं। उन्होंने उल्लेख किया कि उन्होंने अपने पिता लालू यादव और माता राबड़ी देवी से आशीर्वाद प्राप्त किया और छोटे भाई तेजस्वी यादव को भी भोज के निमंत्रण पत्र दिए। इस अवसर पर, उन्होंने अपनी भतीजी कात्यायनी को गोद में उठाने का खास पल भी साझा किया।

  • राज ठाकरे को बीजेपी नेता अन्नामलाई की चुनौती; “यदि हिम्मत है, मेरी टांग काटो”

    राज ठाकरे को बीजेपी नेता अन्नामलाई की चुनौती; “यदि हिम्मत है, मेरी टांग काटो”

    भाजपा नेता अन्नामलाई का राज ठाकरे पर हमला

    चेन्नई में भाजपा नेता के अन्नामलाई ने सोमवार को मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाए। अन्नामलाई ने ठाकरे को चुनौती देते हुए कहा कि वे मुंबई आ रहे हैं और यदि उनमें हिम्मत है, तो उन्हें रोककर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई वास्तव में सख्त है, तो वे उनका पैर काट सकते हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब राज ठाकरे ने अन्नामलाई के नाम का मजाक उड़ाते हुए उन्हें ‘रसमलाई’ कह दिया। इसके अलावा, ठाकरे ने अन्नामलाई के मुंबई के विषयों पर बयान को लेकर सवाल उठाए थे।

    जानलेवा धमकियों का आरोप

    एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान अन्नामलाई ने यह भी कहा कि उन्हें कई बार धमकियां मिली हैं, जिनमें से कुछ लोगों ने उन्हें पैर काटने तक की धमकी दी है। उन्होंने सवाल किया कि आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे जैसे लोग उन्हें धमकाने वाले कौन होते हैं? अन्नामलाई ने गर्व से कहा कि वे एक किसान के बेटे हैं और यह नहीं मानते कि ये लोग किसी महत्वपूर्णता के लायक हैं। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें इन धमकियों का डर होता, तो वह अपने गांव में ही रहते।

    महाराष्ट्र के मुद्दे पर बयान

    भाजपा के पूर्व तमिलनाडु अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि वे यह कहते हैं कि कामराज भारत के महान नेताओं में से एक हैं, तो क्या इससे यह समझा जाएगा कि वे तमिल नहीं हैं? अन्नामलाई ने मुंबई को एक अंतर्राष्ट्रीय शहर कहने पर भी टिप्पणी की, यह इशारा करते हुए कि क्या इसका मतलब है कि इसे सिर्फ महाराष्ट्र के लोगों ने बनाया है। यह चर्चा उस वक्त हुई, जब राज ठाकरे ने अन्नामलाई के अंतर्राष्ट्रीय शहर के बयान पर kritikaate ki thi aur apne chacha बाल ठाकरे का जिक्र करते हुए यह कहा कि उन्होंने एक नारा दिया था, ‘हटाओ लुंगी, बजाओ पुंगी’। यह रैली यूबीटी और मनसे ने संगठित की थी।

  • भागीरथपुरा में मौतों पर सियासी विवाद, न्याय यात्रा में पटवारी का 2027-28-29 चुनाव के लिए समर्थन का आह्वान

    भागीरथपुरा में मौतों पर सियासी विवाद, न्याय यात्रा में पटवारी का 2027-28-29 चुनाव के लिए समर्थन का आह्वान

    कांग्रेस की न्याय यात्रा में एकता की झलक

    इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण हुई 21 लोगों की मौत ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इस दुखद घटना ने कांग्रेस पार्टी को एकता के सूत्र में बांधकर एकजुटता का परिचय दिया। कांग्रेस के नेताओं ने न्याय यात्रा के दौरान एकजुट होकर इस मुद्दे को उठाया, जिससे पार्टी का मनोबल ऊंचा हुआ। यात्रा में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए, जो पार्टी के प्रति अपना समर्थन दर्शाते हैं।

    न्याय यात्रा में नेताओं की भागीदारी

    इस न्याय यात्रा में केवल बड़े नेता ही नहीं, बल्कि छोटे नेता भी सक्रिय रूप से शामिल हुए। यह देखने को मिला कि सभी स्तर के नेताओं ने इस मामले में अपने विचार साझा किए और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदनाएँ प्रकट की। कांग्रेस समिति ने इस इवेंट के माध्यम से जनता के बीच अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है।

    भविष्य की चुनावी रणनीति

    न्याय यात्रा के दौरान, पटवारी ने 2027-28-29 के चुनावों के लिए समर्थन मांगा। यह सुझाव दिया गया कि पार्टी को इस घटना का राजनीतिक लाभ उठाना चाहिए और जनता के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कांग्रेस नेता मानते हैं कि अगर वे अपने संदेश को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाते हैं, तो इससे पार्टी की स्थिति में मजबूती आ सकती है।

  • बिहार चुनाव के बाद प्रशांत किशोर को रितेश पांडे का इस्तीफा मिला

    बिहार चुनाव के बाद प्रशांत किशोर को रितेश पांडे का इस्तीफा मिला

    बिहार में Ritesh Panday का जन सुराज पार्टी से इस्तीफा

    पटनाः बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ आया है, जब प्रसिद्ध भोजपुरी गायक और नेता Ritesh Panday ने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की। रोहतास जिले की करगहर सीट से चुनाव लड़ने वाले पांडेय ने अपने फैसले की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि एक राजनीतिक दल का सक्रिय सदस्य रहते हुए जनता की सेवा करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

    जनता के प्रति आभार

    Ritesh Panday ने प्रशांत किशोर और अपनी पार्टी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि उन्हें चुनाव लड़ने का अवसर देने के लिए धन्यवाद। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने बिहार विधानसभा के चुनाव में ईमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया, यद्यपि परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे। पांडेय ने कहा कि उन्हें अपने कार्य का कोई अफसोस नहीं है और वे देश की सेवा जारी रखेंगे।

    छह महीने में मोहभंग

    Ritesh Panday ने पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया था। वे 18 जुलाई 2025 को पार्टी में शामिल हुए थे। हालांकि, छह महीने बाद, उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया, जो उनकी निराशा को दर्शाता है।

    करगहर से चुनावी दौड़

    भोजपुरी स्टार Ritesh Panday ने रोहतास जिले की करगहर सीट से विधानसभा चुनाव में भाग लिया। चुनाव में उन्हें केवल 16,298 वोट मिले, जहां वे चौथे स्थान पर रहे। जबकि जेडीयू के बशिष्ठ सिंह ने 92,485 वोट हासिल कर जीत हासिल की। यहाँ बीएसपी के उदय प्रताप सिंह ने 56,809 वोट प्राप्त कर दूसरे और कांग्रेस के संतोष कुमार मिश्र ने 39,333 मतों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला का कार्यकारी अध्यक्ष बनने का दावा किया

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला का कार्यकारी अध्यक्ष बनने का दावा किया

    ट्रंप ने वेनेजुएला में ‘एक्टिंग प्रेसिडेंट’ की घोषणा की

    डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट शेयर की है जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मची है। उन्होंने अपनी आधिकारिक तस्वीर के साथ कहा है कि वे वर्तमान में वेनेजुएला के ‘एक्टिंग प्रेसिडेंट’ हैं। इसके साथ ही, ट्रंप ने खुद को अमेरिका के 45वें और 47वें राष्ट्रपति के रूप में भी प्रस्तुत किया है। उन्होंने 20 जनवरी 2025 को कार्यभार ग्रहण किया था।

    अमेरिका का वेनेजुएला पर बड़ा हमला

    जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 की शुरुआत में, अमेरिका ने वेनेजुएला पर ‘बड़े पैमाने पर’ हमला किया। इस हमले के दौरान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के साथ गिरफ्तार किया गया। उन्हें न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर नार्को-टेररिज्म साजिश के आरोप लगाए गए।

    नोबेल शांति पुरस्कार की चर्चा

    वेनेजुएला की नेता मारिया कोरीना माचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार प्राप्त हुआ है, जबकि ट्रंप को इस पुरस्कार के लिए कोई प्रस्तावित नहीं किया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा है कि अमेरिका ‘वेनेजुएला को तब तक चलाएगा’ जब तक वहां सुरक्षित और समझदारी भरा बदलाव नहीं आ जाता।

    हाई-क्वालिटी तेल का प्रस्ताव

    ट्रंप ने दावा किया कि वेनेजुएला में अंतरिम अधिकारी अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल ‘हाई-क्वालिटी, सैंक्शन्ड तेल’ देंगे जो मार्केट दाम पर बेचा जाएगा। उन्होंने इस धन का नियंत्रण अपने हाथ में रखने का भरोसा दिया ताकि इसका उपयोग वेनेजुएला और अमेरिका के लोगों के लिए हो सके।

    मरम्मत के उपाय और सुरक्षा

    उन्होंने ऊर्जा सचिव क्रिस राइट से इस योजना को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया। योजना के अनुसार, तेल को स्टोरेज शिप से लेकर सीधे संयुक्त राज्य अमेरिका में अनलोडिंग डॉक पर लाया जाएगा। वेनेजुएला का तेल उद्योग वैश्विक ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, फिर भी देश का तेल उत्पादन विभिन्न आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों के कारण प्रभावित हुआ है।

  • उद्धव ठाकरे का बयान, “भाजपा ने हमारे बचे खान-पान पर किया विकास”

    उद्धव ठाकरे का बयान, “भाजपा ने हमारे बचे खान-पान पर किया विकास”

    महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव के करीब, राजनीतिक वार-पलटवार तेज

    मुंबई। महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, महागठबंधन और महायुति के दलों के बीच तीखे वार-पलटवार का माहौल बढ़ता जा रहा है। भाजपा और उद्धव की शिवसेना आमने-सामने हैं। शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हाल ही में कहा कि यदि उनके पिता बाल ठाकरे ने मदद नहीं की होती, तो भाजपा कुपोषण के कारण खत्म हो जाती। इस बयान के पहले भाजपा के रावसाहेब दानवे ने कहा था कि सभी राजनीतिक दलों ने भाजपा की मेज़ पर भोजन किया है।

    उद्धव ठाकरे की तीखी प्रतिक्रिया

    दानवे के बयान पर उद्धव ठाकरे ने जवाब देते हुए कहा कि अगर बालासाहेब ठाकरे ने भाजपा को सहारा नहीं दिया होता, तो वे कुपोषण से मर चुके होते। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने उनकी थाली का जूठन भी खाया है और अंत में पूछा कि भाजपा कब तक उनकी खुराक पर निर्भर रहेगी। ठाकरे ने यह भी व्यक्त किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं में अंतहीन भूख दिखाई देती है।

    महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना का इतिहास

    यह उल्लेखनीय है कि 1990 में जब पहली बार भाजपा ने महाराष्ट्र की सत्ता में कदम रखा, तब वह शिवसेना के साथ गठबंधन में थी। उद्धव ठाकरे ने कहा कि विपक्षी उम्मीदवारों को समाप्त करने की कोशिशें चल रही हैं और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई करने का आह्वान किया।

    छत्रपति संभाजीनगर की स्थिति पर चिंता

    ठाकरे ने छत्रपति संभाजीनगर में जल आपूर्ति की स्थिति को गंभीर बताया, जहाँ साल में केवल 44 दिन पानी मिलता है। उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब पूरे शहर के लिए पाइपलाइन योजना का कार्य प्रारंभ हुआ था, लेकिन वर्तमान सरकार ने केवल कर्ज लेने का कार्य किया और योजनाओं को पूरा नहीं किया।

    भाजपा की नीति पर सवाल

    उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा विभिन्न धर्मों के बीच बंटवारा करने की कोशिश कर रही है और यह राज्य को कर्ज में डूबो रही है। उन्होंने कहा कि यह सरकार देश को तानाशाही की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है।

  • बीजेपी नेताओं का बयान, मध्य प्रदेश में निगमों और बोर्डों की नियुक्तियाँ जल्द होंगी

    बीजेपी नेताओं का बयान, मध्य प्रदेश में निगमों और बोर्डों की नियुक्तियाँ जल्द होंगी

    रतलाम में भाजपा की एल्डरमैन नियुक्तियों का ऐलान

    रतलाम। मध्य प्रदेश भाजपा जल्द ही निगम मंडल आयोग और नगरीय निकाय में एल्डरमैनों की नियुक्तियां करने जा रही है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने रतलाम पहुंचने पर यह जानकारी दी। उन्होंने एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि नियुक्तियों की सूची जल्द ही जारी की जाएगी, जिसमें कुछ बदलाव भी हुए हैं।

    सरकार और संगठन का संबंध

    खंडेलवाल ने यह भी कहा कि सत्ता और संगठन के बीच गहरा नाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाजपा पूरी तरह से एकजुट होकर काम कर रही है। उनकी बात के अनुसार, सरकार का कार्यकाल अब लगभग दो साल पूरा हो चुका है, और तीन साल से ज्यादा समय हो गया है नगरीय निकाय चुनावों को। ऐसे में भाजपा को अपने नेताओं को सम्मानित करने का अवसर मिल सकता है, हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई स्पष्ट लाभ उठाने का जिक्र नहीं किया।

  • झारखंड में BJP अध्यक्ष चुनाव हेतु जुएल उरांव बने पर्यवेक्षक, केंद्रीय मंत्री हैं जनजातीय मामलों के

    झारखंड में BJP अध्यक्ष चुनाव हेतु जुएल उरांव बने पर्यवेक्षक, केंद्रीय मंत्री हैं जनजातीय मामलों के

    झारखंड में भाजपा संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया

    भाजपा संगठन पर्व के तहत, पार्टी ने देशभर में अपने सांगठनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर चुनाव कराने का निर्णय लिया है। इस रूप में, झारखंड में प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों का निर्वाचन विशेष महत्व रखता है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जुएल ओराम के राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ से यह प्रक्रिया प्रभावी एवं पारदर्शी ढंग से संपन्न होगी।

    जुएल ओराम का योगदान

    जुएल ओराम, जो कि जनजातीय समाज के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, ने केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए व्यापक सराहना प्राप्त की है। उनकी नियुक्ति से झारखंड भाजपा संगठन में नई ऊर्जा और समन्वय की अपेक्षा की जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आगामी दिनों में चुनाव प्रक्रिया से संबंधित कार्यक्रमों की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।

    पलामू SP की कार्रवाई

    इस बीच, पलामू के एसपी, रीष्मा रमेशन ने एक जवान पर कार्रवाई की है जो शराब के नशे में हथियार खो बैठा था। यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासन द्वारा ऐसी कड़ी कार्रवाई को गंभीरता से लिया गया है।

  • केसी त्यागी की जेडीयू से विदाई, पार्टी ने कहा- अब कोई संबंध नहीं

    केसी त्यागी की जेडीयू से विदाई, पार्टी ने कहा- अब कोई संबंध नहीं

    जेडीयू में के.सी. त्यागी का अध्याय समाप्त

    नई दिल्ली. जेडीयू (जदयू) के सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी का पार्टी में योगदान अब समाप्त हो चुका है। हाल ही में उनके बयानों और गतिविधियों पर उठे सवालों के मद्देनजर, पार्टी नेतृत्व ने उनसे दूरी बनाने का निर्णय लिया। जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने स्पष्ट किया है कि अब के.सी. त्यागी का पार्टी के साथ कोई औपचारिक संबंध नहीं रहा है।

    नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग

    के.सी. त्यागी ने हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर इस संबंध में अपने विचार प्रस्तुत किए थे। पत्र में, त्यागी ने कहा था कि जैसे चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर को यह उपाधि दी गई थी, नीतीश कुमार भी इसके हकदार हैं। परंतु, जेडीयू ने इस मांग से दूर रहने का फैसला लिया। प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि त्यागी का यह बयान पार्टी के आधिकारिक स्टैंड से अलग है और इसे उनकी व्यक्तिगत राय के रूप में देखा जाना चाहिए।

    सम्मानजनक अलगाव की ओर कदम

    सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच सम्मानजनक अलगाव हो चुका है, हालांकि पार्टी ने त्यागी के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है। यह कदम उनके लंबे समय के संबंध को देखते हुए लिया गया है। पार्टी के अंदरूनी हलकों में इसे एक युग का अंत माना जा रहा है, जबकि जेडीयू नेतृत्व अपनी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    मुस्तफिजुर रहमान पर विवादास्पद बयान

    के.सी. त्यागी ने हाल ही में क्रिकेट खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान के समर्थन में बयान दिया था, जो जेडीयू नेतृत्व को अनुचित लगा। उन्होंने कहा था कि खेल में राजनीति नहीं लानी चाहिए और भारत को भी उन्हें खेलने की अनुमति देनी चाहिए। लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के बाद इस बयान का विरोध हुआ। पार्टी के अनुसार, त्यागी को ऐसे बयानों का समर्थन नहीं करना चाहिए था।

    जेडीयू की नीति पर असहमति

    जेडीयू नेतृत्व का मानना है कि जब मामला दो देशों के बीच का हो, तो त्यागी को पार्टी के साथ चर्चा करनी चाहिए थी। पहले भी वे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी की नीति से अलग बयान दे चुके हैं, जिससे पार्टी को मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा। अंततः, उनकी इस स्थिति के कारण उन्हें जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा देना पड़ा।