साहिबगंज : झारखंड के साहिबगंज जिले में अवैध पत्थर खनन और बिना चालान पत्थर के परिवहन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। ईडी की रांची जोनल कार्यालय ने विशेष न्यायालय (PMLA), रांची में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) प्रस्तुत की है। इस मामले में लगभग 5.39 करोड़ रुपये के अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) को जब्त करने की मांग भी की गई है। ईडी ने यह चार्जशीट धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 44 और 45 के अंतर्गत दायर की है।
आरोपी कंपनियों और निदेशकों का विवरण
ईडी ने जिन कंपनियों और व्यक्तियों को आरोपी बनाया है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
- M/s CTS Industries Ltd. (आरोपी संख्या 1)
- अशोक कुमार तुलस्यान, निदेशक (आरोपी संख्या 2)
- सिद्धार्थ तुलस्यान, निदेशक, M/s Eco Friendly Infra Technology Pvt. Ltd. (EFIT) (आरोपी संख्या 3)
- चमन तुलस्यान, निदेशक, EFIT (आरोपी संख्या 4)
- पुरुषोत्तम कुमार तुलस्यान, निदेशक (आरोपी संख्या 5)
- M/s Eco Friendly Infra Technology Pvt. Ltd. (EFIT) (आरोपी संख्या 6)
CBI की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच
ईडी की जांच सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर आरंभ हुई थी। यह एफआईआर बिहार के भागलपुर जिले के पीरपैंती रेलवे साइडिंग में कुछ अज्ञात रेलवे अधिकारियों और M/s CTS Industries Ltd. के खिलाफ दर्ज की गई थी। इसके बाद इस मामले से जुड़े तीन अन्य प्राथमिक एफआईआर को भी ईसीआईआर (ECIR) में एकीकृत किया गया, जिसमें पीरपैंती थाना (बिहार) और मिर्जाचौकी थाना (साहिबगंज, झारखंड) की एफआईआर शामिल हैं।
2015 से अवैध खनन और परिवहन का मामला
ईडी की जांच में यह जानकारी मिली है कि M/s CTS Industries Ltd. और इसके निदेशक वर्ष 2015 से साहिबगंज के मौजा जोकमारी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर अवैध पत्थर खनन और परिवहन कर रहे थे। जांच में पाया गया कि कंपनी ने पीरपैंती रेलवे साइडिंग से 251 रेलवे रेक के माध्यम से पत्थर भेजा, लेकिन यह सभी बिना आवश्यक JIMMS ट्रांसपोर्ट चालान के भेजे गए थे, जो खनिज परिवहन के लिए अनिवार्य होते हैं।
रॉयल्टी चोरी का आंकड़ा 17 करोड़ से अधिक
ईडी के अनुसार, इस अवैध पत्थर परिवहन के कारण सरकार को भारी नुकसान हुआ है। जांच में यह खुलासा हुआ है कि पत्थर चिप्स में लगभग 11.29 करोड़ रुपये और बोल्डर्स में 5.94 करोड़ रुपये की रॉयल्टी चोरी की गई। इस प्रकार कुल रॉयल्टी चोरी का आंकड़ा लगभग 17 करोड़ रुपये से अधिक है।
रिश्वत देकर कराई गई अवैध ढुलाई
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए रेलवे के कुछ अधिकारियों को रिश्वत दी गई ताकि बिना दस्तावेजों के रेक को रवाना किया जा सके।
फर्जी बिलों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला
ईडी के अनुसार, अवैध खनन और परिवहन से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई। इसके लिए फर्जी इनवॉइस तैयार किए गए और ऐसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया जो वास्तव में अस्तित्व में नहीं थीं। ईडी ने बताया कि M/s DS Bitumix और M/s Karan International नामक फर्मों के माध्यम से फर्जी बिल प्रस्तुत किए गए और लगभग 4.87 करोड़ रुपये का भुगतान CTS Industries Ltd. के खातों से इन कंपनियों को भेजा गया।
ईडी ने की थी छापेमारी
ईडी ने मामले की जांच के दौरान PMLA की धारा 17 के तहत 24 अक्टूबर 2024 को साहिबगंज के जोकमारी स्थित CTS Industries Ltd. के परिसर में छापेमारी की थी। इस दौरान कई महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए गए, जिनमें दस्तावेज, रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री शामिल थीं।
जब्त सामग्री सुरक्षित रखने की मंजूरी
ईडी ने जब्त दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए मूल आवेदन पेश किया था, जिसे PMLA की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने 4 अप्रैल 2025 के आदेश के जरिए मंजूरी दी।
गवाहों के बयान दर्ज करना जारी
ईडी ने इस मामले में CTS Industries के निदेशकों सहित कई गवाहों के बयान PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज किए हैं। इसमें रेलवे अधिकारी, साहिबगंज के जिला खनन पदाधिकारी और अन्य महत्वपूर्ण गवाह शामिल हैं।
जांच जारी है
ईडी ने बताया कि चार्जशीट दायर कर दी गई है, लेकिन आगे की जांच अब भी जारी है। भविष्य में और खुलासे होने की संभावना है और अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

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