नेत्रा ड्रोन ने नक्सलियों की मुश्किलें बढ़ा दी, जंगल में पनाह नहीं मिल रही, सुरक्षाबल कार्रवाई कर रहे हैं

झारखंड में नक्सलियों की मुश्किलें बढ़ीं, नेत्रा ड्रोन की प्रभावशीलता

डेस्क: झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में माओवादियों के लिए चुनौतीें और गंभीर हो गई हैं। सुरक्षाबलों के लिए आँखों की तरह काम कर रहा ‘नेत्रा’ ड्रोन अब नक्सलियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जंगली इलाकों में अब ये हालात हैं कि माओवादी जमीन के साथ-साथ आसमान से भी चौकस रहने को मजबूर हो गए हैं, क्योंकि ‘नेत्रा’ उन्हें अपनी निगरानी से बचने की कोई फुर्सत नहीं दे रहा है।

CRPF का अल्टीमेटम

सीआरपीएफ के आईजी साकेत कुमार सिंह ने नक्सलियों को चेतावनी दी है कि वे आत्मसमर्पण करें और विकास की धारा को चुनें, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए। ‘नेत्रा’ ड्रोन आधुनिक तकनीक से लैस है, जो जंगल में छिपे माओवादियों की गतिविधियों को वास्तविक समय में कैप्चर कर सुरक्षा मुख्यालय तक पहुंचाता है। इसकी विशेषता यह है कि यह कम ऊंचाई पर बेहद कम ध्वनि में उड़ान भर सकता है, जिससे दुश्मन को इसकी मौजूदगी का पता नहीं लगता।

नेत्रा ड्रोन की क्षमताएँ

दिन-रात निरंतर कार्य करने में सक्षम ‘नेत्रा’ ड्रोन, जिस क्षेत्र में तैनात किया जाता है, वहां की सभी गतिविधियों की तस्वीरें और वीडियो सीधे ऑपरेटर की स्क्रीन पर दिखाते हैं। इससे सुरक्षाबलों को ऑपरेशन की योजना बनाने में मदद मिलती है। इसके कुछ मुख्य गुण निम्नलिखित हैं:

  • नक्सलियों की सटीक लोकेशन और गतिविधियों की जानकारी प्रदान करता है।
  • सीधी उड़ान भरने और जमीन पर उतरने की क्षमता।
  • दिन और रात दोनों समय उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें और वीडियो कैप्चर करता है।
  • पक्षियों के जैसा दिखने के कारण इसे पहचानना मुश्किल।
  • कम ध्वनि स्तर, जो इसे पास आने पर भी पहचानने में कठिनाई उत्पन्न करता है।
  • वजन लगभग डेढ़ किलो।
  • अत्याधुनिक कैमरों और सेंसर से लैस।

इन तकनीकी नवाचारों के कारण, जंगलों में नक्सलियों के लिए स्थितियाँ और भी कठिन हो गई हैं। अब वे केवल सुरक्षाबलों के हमले से ही नहीं, बल्कि आसमान से भी खतरा महसूस कर रहे हैं।

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