रांची | झारखंड मुक्ति मोर्चा अगले साल (2024) होने वाले लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुट गया है. पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन ने 4 जुलाई को राज्य के सभी जिलों के अध्यक्षों एवं सचिवों की बैठक बुलायी है. यह बैठक रांची के हरमू स्थित सोहराई भवन में सुबह 10.30 बजे से होगी. बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन, कार्यकारी अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सहित अन्य पदाधिकारी शामिल होंगे. पार्टी के वरिष्ठ नेता विनोद कुमार पांडेय ने इस बात की जानकारी दी |
श्रेणी: Politics
-

पूर्व आईपीएस राजीव रंजन हुए भाजपा में शामिल
फिर से लाएं मोदी सरकार, हेमंत सरकार को करें विदा : दीपक प्रकाश
रांची। पूर्व आईपीएस अधिकारी राजीव रंजन ने शनिवार को अपने कई समर्थकों संग राजनीतिक पारी की शरुआत करते हुए भाजपा की सदस्यता ले ली। प्रदेश कार्यालय में मिलन समारोह में पाटी के प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश ने स्वागत करते कहा कि सभी देश, दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के सदस्य बने हैं। गंगा की तरह पवित्र इस पाटी में आने के बाद सबों को पवित्र काम करने का मौका मिला है। गरीब, आदिवासियों और जरूरतमंदों की सेवा कर सब भारत माता की सेवा करेंगे। अगले वर्ष होनेवाले आम चुनाव में इस राज्य की सभी 14 लोकसभा सीट जीतनी है ताकि फिर से मोदीजी को प्रधानमंत्री बना सके साथ ही अगले वर्ष होनेवाले झारखंड विधानसभा के चुनाव में भी राज्य से हेमंत सोरेन सरकार को विदा करना है, इसके लिए सब जुट जाए मौके पर पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिनेशानंद गोस्वामी, प्रदेश महामंत्री और कार्यालय प्रभारी प्रदीप वर्मा, प्रदेश मंत्री सुबोध सिंह गुड्डू और अन्य भी उपस्थित थे।
मौके पर राजीव रंजन ने कहा कि पिछले वर्ष 30 सालों तक पुलिस विभाग में सेवा देने के बाद से रिटायर हुए। पर फिर दूसरी इनिंग शुरू करने का भी विचार तय कर रखा था खुद को समाज सेवा के लिए हर लिहाज से तैयार करने का विचार किया। पाया कि भाजपा ही सबसे बेहतर पाटी हो सकती है। वे इसी मिट्टी के लाल रहे हैं, उन्हें गर्व है कि भाजपा से जुड़कर व इस राज्य की खुशहाली, समृद्धि के लिए काम करेंगे, बचा हुआ जीवन राज्य की उन्नति, सेवा के लिए लगाएंगे। पीएम मोदीजी का सपना सबका साथ, सबके विकास का है। इसे साकार करने में वे योगदान देंगे। पाटी नेतृत्व जैसा दायित्व देगा, उसका निर्वाह करेंगे।
डा. दिनेशानंद गोस्वामी ने मौके पर कहा कि अलग अलग समाज, पेशे के लोग पीएम मोदी पर भरोसा कर पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं। कई रिटायर पदाधिकारी और अन्य भी हेमंत सोरेन सरकार से नाराज होकर भाजपा में आ रहे हैं।
पूर्व पीएम राजीव गांधी मानते थे कि दिल्ली से रुपया चलता है तो 15 पैसा ही गरीबों तक पहुंचता है। पीएम मोदी ने बेहतर तरीके से समस्या को समझा, डीबीटी के माध्यम से पैसा भेजना शुरू किया, जीरो टालरेंस की नीति अपनायी। पार्टी में शामिल हुए नये कार्यकता अगली बार होनेवाले लोकसभा चुनाव में 14 में से 14 सीटों को जीतने में लगे दो-तिहाई बहुमत से 1। इस राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में विश्वास हासिल करने में जुटें। -

पंकज मिश्रा की तबीयत खराब बाबूलाल ने हेमंत पर साधा निशाना कहा
यूज एंड थ्रो मत करिये, झारखंड को साहब के बिचौलियों ने किया बदनाम
रांची। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। एक के बाद एक किये गये तीन ट्वीट मे बाबूलाल मरांडी ने हेमंत के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा, दूसरे राज्यों में झारखंड की बन रही छवि और झारखंड की शराब नीति पर हुए घोटाले को लेकर निशाना साधा है। हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा की खराब होती तबीयत पर हेमंत सोरेन से बेहतर इलाज कराने की अपील करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा, खबर आ रही है कि साहिबगंज 1000 करोड़ खनन घोटाले के प्रमुख आरोपी पंकज मिश्रा जो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी के विधायक प्रतिनिधि है, की तबीयत ज्यादा खराब है। कैदी के रूप में उन्हें इलाज के लिये दिल्ली ले जाया गया है। उनका स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री हेमंत जी से अनुरोध है कि आप ह्लयूज एंड थ्रोह्व मत करिये। पंकज को यूँ ही उसके हाल पर भगवान भरोसे मत छोड़िये। पाप लगेगा आपको। आपका फर्ज़ और कर्तव्य है कि व्यक्तिगत रूप से ध्यान देकर पंकज को बेहतर इलाज मुहैया कराने का इंतजाम कराइये।आखिर जिस लूट महापाप की सजा वो भुगत रहा है उसके सरगना भी तो आप ही हैं न और उसने जो भी किया आपके कहने पर आपके लिये ही तो किया है।
खराब हो रही है झारखंड की छवि
बाबूलाल मरांडी ने दूसरे राज्यों में बन रही झारखंड की छवि की चर्चा करते हुए ट्वीट किया, पिछले दिनों जब मैं मध्यप्रदेश के दौरे पर था तब कई बार लोगों के झारखंड के संदर्भ में पूछे गए प्रश्नों पर असहज हो गया।पत्रकार बंधुओं के साथ साथ आम लोग भी जब मिल रहे थे तो उनका एक ही प्रश्न था, झारखंड में क्या हो रहा है?हेमंत सोरेन भी इस महालूट में शामिल हैं क्या? उनकी भी गिरफ्तारी होगी? मैं उनसे इतना ही कहता था कि झारखंड को लुटेरों ने लूटा है लेकिन सबका हिसाब हो रहा है।
कुछ का बाकी है जो आने वाले दिनों में होगा।एक झारखंडी होने के नाते मन बहुत तकलीफ से भर जाता है कि देश में हमारे राज्य की छवि को कुछ बेईमान अफसरों, दलालों – बिचौलियों और साहब के गिरोह ने बदनाम कर दिया है।
बाहर हम प्राकृतिक संसाधन संपन्नता, प्राकृतिक सुंदरता और परिश्रमी राज्य के रूप में नहीं, बल्कि पूजा सिंघल, बीरेन्द्र राम, छवि रंजन, प्रेम प्रकाश, पंकज मिश्रा और अमित अग्रवाल जैसे महालुटेरे अधिकारियों – बिचौलियों के कारनामे के कारण पहचाने जा रहे हैं।
जांच एजेंसियों के हाथ साहब के गले तक भी जाना तय
बाबूलाल ने झारखंड की शराब नीति पर भी निशाना साधा है। ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, मेरे गृह जिले गिरिडीह में शराब कंपनी और सेल्समैन की साठगांठ से करोड़ों रुपए के गबन का मामला प्रकाश में आया है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें भी उसी छत्तीसगढ़ी कंपनी की संलिप्तता सामने आई है जो वहां जांच के आंच में फं स चुकी है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार ने शराब नीति के नाम पर घोटाले का ऐसा जाल बुना कि इसमें झारखंड और सोरेन राज परिवार के झारखंडी राजकुमार को भी फंसा लिया। हेमंत सोरेन जी किस लालच में छत्तीसगढ़ मॉडल को अपनाने के लिए लालायित थे?राजस्व की हो रही भारी क्षति की जिम्मेदारी कौन लेगा?सरकार का माय बाप कौन है?मैं फिर कह रहा हूं, आने वाले दिनों में झारखंड में भी शराब घोटाले का बहुत बड़ा मामला सामने आएगा। हां, जांच एजेंसियों का हाथ साहब के गले तक भी जाना तय मानिये। बस इंतजार करिये और आगे-आगे देखते जाईये।
-

HAM कोटे के मंत्री संतोष मांझी ने नितीश कैबिनेट से दिया इस्तीफा
पटना | विपक्षी एकता के लिए 23 जून को पटना में होने वाली बैठक से पहले बिहार की नीतीश सरकार को बड़ा झटका लगा है. पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे और हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा कोटे के इकलोते मंत्री संतोष मांझी ने इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफे से पहले अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण मंत्री की वित्त मंत्री से लंबी बातचीत हुई. संतोष सुमन उर्फ संतोष मांझी का इस्तीफा स्वीकार हुआ है या नहीं, इस बारे|
संतोष मांझी ने कहा- विपक्षी एकता की बजाय पार्टी की पहचान जरूरी
मंत्रीमंडल से इस्तीफ देने के बाद संतोष सुमन ने कहा कि हम पार्टी को अब तक 23 जून को होने वाली विपक्षी एकता की बैठक के लिए कोई बुलावा नहीं मिला है, संतोष सुमन ने दावा किया है कि जदयू नेतृत्व की ओर से हम पार्टी का जदयू में विलय करने की मांग थी ऐसे में पार्टी क रूप में हमारी पहचान पर सवाल था, इसलिए ‘हम’ रूपी घर तोड़ने की जगह सरकार से निकलना ही अंतिम विकल्प था. उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए हमलोग खूब मेहनत कर रहे हैं, ऐसे में इस तरह का विकल्प चुनना संभव नहीं था |
विपक्षी एकता की बैठक में नहीं मिला न्यौता: मांझी
सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने खुलकर स्वीकार किया था कि उन्हें विपक्षी एकता के नाम पर पटना में होने वाली बैठक के लिए बुलावा नहीं मिला है कुछ दिनों पहले तक मांझी लगातार यह कह रहे थे कि वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का साथ नहीं छोड़ेंगे, लेकिन संतोष मांझी के से इस्तीफे के बाद मांझी के इस स्टैंड पर बने रहने को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं. सोमवार को जीतन राम मांझी ने कहा था कि 2024 लोकसभा चुनाव में हमारी पार्टी एक भी सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी |
-

शरद पवार ने प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले को NCP का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया
मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है। एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने पार्टी के स्थापना दिवस पर प्रफुल्ल पटेल और सुप्रिया सुले को NCP का कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की घोषणा की है। इस फैसले को अजित पवार के लिए झटका भी माना जा रहा है।
-

JDU ने किया भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी पर मानहानि का केस
मुंगेर। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी पर मानहानि का केस दर्ज कराया गया है। मुंगेर जिले के जदयू अध्यक्ष नचिकेता मंडल ने सम्राट चौधरी पर मुंगेर कोर्ट में मानहानि का मामला दर्ज कराया है।
बता दें कि जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने महागठबंधन कार्यकर्ताओं के सम्मान में मीट चावल का भोज आयोजित किया था। इसी भोज को लेकर सम्राट चौधरी ने कथित रूप से कहा था कि कार्यकर्ता सम्मान भोज में शराब पार्टी हुई है।
इसको लेकर जदयू जिलाध्यक्ष ने पहले सम्राट चौधरी को लीगल नोटिस भेजा था। इसके बाद अब उनके उपर मानहानि का परिवाद सीजेएम कोर्ट में दायर किया गया है।
बता दें कि जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने 14 मई को अपने संसदीय क्षेत्र मुंगेर में महागठबंधन के कार्यकर्ताओं के लिए मटन-चावल के भोज का आयोजन किया था।
जदयू की मटन-चावल पार्टी पर तबसे सियासत जारी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने इसको लेकर जदयू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा था कि लोग राजनीतिक लाभ के लिए मीट-चावल खिला रहे हैं और शराब परोस रहे हैं।
भाजपा अध्यक्ष ने आगे कहा कि कोई कुछ भी कर ले, लाभ होने वाला नहीं है। जेडीयू अब अंतिम दौर में है। साल 2025 तक इसका अंत हो जाएगा। लालू प्रसाद यादव के राजद का तो कुछ भी नहीं बचेगा।
इसके बाद से मटन-चावल पार्टी पर खूब सियासत हुई। जदयू और भाजपा ने एक-दूसरे पर जमकर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने तो सम्राट चौधरी की तुलना छुटभैया नेता से कर दी। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी ने छुटभैया नेता की तरह टिप्पणी की है। इसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ेगा।
जदयू नेता ने माफी नहीं मांगने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी कहा कि अपने प्रदेश अध्यक्ष को समझाएं कि राजनीति में मर्यादा नाम की भी चीज होती है।
-

आखिर क्यों बनाना पड़ा नया संसद भवन ?
पुराने और नये संसद भवन से जुड़े सारे सवालों के जवाब जानने हैं तो यहां क्लिक करिए
1200 करोड़ रुपये खर्च करके बनाए गए नए संसद भवन में क्या खास है?
ढाई साल के निर्माण कार्य और तमाम विवादों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 मई को नए संसद भवन का उद्घाटन कर दिया. विपक्षी पार्टियों के नेता इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. क्योंकि उन्होंने राष्ट्रपति से उद्घाटन कराने की मांग की थी. बहरहाल, देश को नया संसद मिल गया है. सवाल ये है कि 1200 करोड़ रुपये खर्च करके बनाए गए नए संसद भवन में क्या खास है? और सवाल ये भी कि पुरानी संसद का क्या होगा?
नई संसद की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार के मुताबिक संसद के बढ़ते काम के कारण एक नई इमारत की जरूरत महसूस की गई. अभी का संसद भवन ब्रिटिश दौर में बना था, जो करीब 100 साल पुराना है. इसका निर्माण 1921 में शुरू हुआ था और 1927 में पूरा हुआ. सरकार का कहना है कि पुरानी बिल्डिंग में जगह की कमी है और आधुनिक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं है. इसके अलावा मौजूदा संसद भवन को लेकर कई तरह की सुरक्षा चिंताएं भी जताई गई हैं. जैसे, फायर सेफ्टी, क्योंकि इस इमारत का डिजाइन मॉडर्न फायर नॉर्म के हिसाब से नहीं है.
नई संसद की खासियत
– दोनों सदनों की क्षमता बढ़ाई गई है. लोकसभा में 888 सांसद बैठ पाएंगे और राज्यसभा में 300. दोनों सदनों की संयुक्त बैठक के दौरान लोकसभा में 1272 सांसद बैठ सकेंगे.
– पुराने वाले की तरह नई बिल्डिंग सेंट्रल हॉल नहीं है. इसके बजाय संयुक्त सत्र के लिए लोकसभा कक्ष का ही इस्तेमाल किया जाएगा.
– लोकसभा हॉल को भारत के राष्ट्रीय पक्षी मोर की थीम पर डिजाइन किया गया है.
– वहीं राज्यसभा हॉल को भारत के राष्ट्रीय फूल कमल की थीम पर बनाया गया है.
– नया संसद भवन लगभग 64,500 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. पुराना वाला 24,281 वर्ग मीटर का था.

– आग के संकट से निपटने का इंतज़ाम हो गया है. आग के ख़तरे को देखते हुए कई नए बिजली के केबल जोड़े गए हैं.
– इसके अलावा पानी की सप्लाई लाइनों, सीवर लाइनों, एयर कंडीशनिंग और सीसीटीवी की वजह से बिल्डिंग की एस्थेटिक्स खराब हो गया था. तो इस बार एस्थेटिक्स का खास खयाल रखा गया है.
– नए भवन में अत्याधुनिक तकनीके हैं. वोटिंग में आसानी के लिए बायोमेट्रिक्स है. डिजिटल भाषा व्याख्या या अनुवाद प्रणाली है.
– हॉल के अंदरूनी हिस्सों में virtual sound simulations फिट किया है. ताकि साउंड का सही लेवल तय हो और आवाज गूंजे ना.
– नई बिल्डिंग विकलांग लोगों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. विकलांग व्यक्ति आसानी से किसी भी हिस्से में आसानी से आ-जा सकते हैं.

पुरानी संसद में दिक्कतें
– संसद भवन को बदलने के लिए सरकार ने जो कारण बताए हैं, हम उसे ही बता रहे हैं. पहला यही कि सेंट्रल हॉल में अधिकतम 436 लोगों और लोकसभा में अधिकतम 552 व्यक्ति बैठ सकते हैं. संयुक्त सत्र के दौरान कम से कम 200 अस्थायी सीटें गलियारों में जोड़नी पड़ती हैं. जो असुरक्षित है.
– सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की वेबसाइट के मुताबिक, मंत्रियों के लिए जो कार्यालय और बैठक कक्ष, प्रेस कक्ष, भोजन सुविधा आदि मौजूद हैं, वो काफ़ी नहीं है. मेक-शिफ़्ट के आधार पर काम चलता है.
– पिछले कुछ सालों में तक़नीकी प्रगति के साथ बने रहने के लिए पुराने भवन में कई बदलाव किए गए थे. इसकी वजह से भवन की संरचना पर असर पड़ा है. मसलन, 1956 में इमारत के बाहरी हिस्से में दो नई मंजिलें जोड़ी गईं. इससे सेंट्रल हॉल का गुंबद ही छिप गया. फिर एक बार खिड़कियों को ढकने के लिए जाली लगाई, तो दोनों सदनों के हॉल में रोशनी ही कम हो गई.
– पुरानी बिल्डिंग में अलग-अलग तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर चाहे वो बिजली हो या एसी और सुरक्षा से जुड़े फीचर्स, सरकार के मुताबिक वे पुराने हो चुके हैं.

– पुरानी इमारत भूकंप से सुरक्षित नहीं है. इसके सर्टिफ़िकेशन के लिए सदन की संरचनात्मक ताकत को टेस्ट करना पड़ेगा और ऐसे टेस्ट से संसद के कामकाज बाधित करेंगे. ये इसलिए भी बड़ी चिंता है क्योंकि नई बिल्डिंग के बनने के दौरान दिल्ली-NCR में भूकंप का जोख़िम बढ़ गया है. NCR को सेस्मिक ज़ोन-2 की कैटगरी से निकालकर सेस्मिक ज़ोन-4 में डाल दिया गया है.
– भूकंप के साथ, आग का भी जोखिम है. पुराना सदन, आग से निपटने के मॉर्डर्न तरीकों से लैस नहीं है.
-

बीजेपी सांसद पर भीड़ ने किया हमला, बिगड़े हालात
मणिपुर में सामुदायिक तनाव के 25 दिन बाद भी हालात काबू में नहीं हैं. बीते दो दिन से राज्य में फिर अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई है. गुरुवार बीती रात को सामने आया है कि भीड़ ने एक बीजेपी नेता पर हमला कर दिया. स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा को बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े. इस झड़प में मैरी कॉम के पैतृक गांव पर हमला होने की खबर भी सामने आई है.
जानकारी के मुताबिक, मणिपुर की राजधानी इम्फाल में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. सामने आया है कि भीड़ ने सांसद और बीजेपी के प्रमुख नेता राजकुमार रंजन सिंह पर हमला कर दिया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस के गोले दागने पड़े. बीती रात मणिपुर के इंफाल पूर्व में कोंगकों पा नंदेई लेइकेई में भारी भीड़ जमा हो गई थी. बाद में सुरक्षाबलों ने उन्हें खदेड़ दिया था. इंफाल पूर्व और पश्चिम दोनों में पूर्णकालिक कर्फ्यू लगा दिया गया है. इसके अलावा बिष्णुपुर और तेंगोपॉल में भी 24 घंटे कर्फ्यू लगाया गया है. इन जिलों में कर्फ्यू में कोई ढील नहीं दी गई है.
इंडियन आर्मी ने ट्वीट कर के कहा, ऑपरेशन जारी है. पूरे मणिपुर को सेना और असम राइफल्स ने अपने कब्जे में ले लिया है. सेना की ओर से बताया गया कि इंफाल पूर्व और चुराचांदपुर में सुरक्षाबलों ने दो समुदायों के बीच गोलीबारी की घटना को रोका. इस दौरान हथियारबंद बदमाशों ने फायरिंग की और ऊंचे इलाकों की तरफ भाग गए. घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है और सर्च ऑपरेशन जारी है.
-

नीतीश कुमार से मिले अरविंद केजरीवाल
नई दिल्ली। आने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्षी एकजुटता की तैयारी जोर पकड़ने लगी है। इसी कड़ी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) आज रविवार को राजधानी दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से मुलाकात की। इस दौरान सीएम केजरीवाल ने दिल्ली सर्विसेज को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए अध्यादेश के खिलाफ समर्थन मांगा है।
यह मुलाकात सीएम अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुई। दोनों नेताओं की इस मुलाकात से विपक्षी एकजुटता की मजबूती का संकेत दिया गया। बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह भी मीटिंग में मौजूद रहे। बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और विपक्षी एकता पर चर्चा हुई।
केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली में NCCSA बनाने के लिए लाए गए अध्यादेश पर सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, “परसो 3 बजे मेरी ममता जी(बंगाल की मुख्यमंत्री) के साथ बैठक है। उसके बाद मैं देश में सभी पार्टी अध्यक्ष से मिलने के लिए जाऊंगा। आज मैंने नीतीश जी से भी अनुरोध किया कि वो भी सभी पार्टियों से बात करें। मैं भी हर राज्य में जाकर, राज्यसभा में जब ये बिल आए, तब इसे हराने के लिए मैं सभी से समर्थन के लिए बात करूंगा।”
इस दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही रहा, लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार द्वारा जो करने की कोशिश हो रही है वह विचित्र है। सभी को एकजुट होना होगा। हम इनके(केजरीवाल) साथ हैं, ज्यादा से ज्यादा विपक्षी पार्टियों को एक साथ मिलकर अभियान चलाना होगा। हम पूरी तरह से केजरीवाल के साथ हैं।
वहीं, बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि जो परेशानी अरविंद केजरीवाल झेल रहे हैं हम उसके खिलाफ केजरीवाल जी को समर्थन देने आए हैं। अगर दिल्ली में भाजपा की सरकार होती तो उपराज्यपाल में हिम्मत होती इस प्रकार का काम करने की? दिल्ली में भाजपा कभी वापसी नहीं करेगी।
बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण में शामिल होने के बाद शनिवार को बेंगलुरु से दिल्ली पहुंचे हैं। चर्चा है कि विपक्षी एकजुटता को लेकर नीतीश कुमार आज दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे।
उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विपक्षी एकजुटता की पहल की खूब सराहना हुई। नीतीश कुमार एवं उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव शनिवार को ही पटना से शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे थे। समारोह में राहुल गांधी और प्रियंका ने नीतीश कुमार का अभिवादन किया।
महत्वपूर्ण यह रहा कि राहुल गांधी के समीप खड़े कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पास नीतीश कुमार को बिठाया और फिर उनका हाथ अपने हाथ में ले तस्वीर करायी। नीतीश कुमार को मंच पर राहुल गांधी के समीप बैठने की व्यवस्था की गई थी। विपक्षी एकजुटता की उनकी पहल पर चर्चा हुई। यह संकेत है कि पटना में विपक्षी दलों की बैठक पर जल्द ही संयुक्त रूप से तारीख का एलान होगा।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी नीतीश कुमार से बात करते दिखे। शपथ ग्रहण समारोह में वे चेहरे भी मुख्य रूप से मौजूद थे जिनसे हाल में ही नीतीश कुमार ने विपक्षी एकजुटता को लेकर मुलाकात की थी। राहुल गांधी और खरगे के अतिरिक्त एनसीपी नेता शरद पवार, वामदल के नेता सीताराम येचुरी और डी राजा भी मौजूद थे।
उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को मंच पर वामदल के नेताओं के साथ जगह मिली थी। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरमैया भी गर्मजोशी के साथ नीतीश कुमार एवं तेजस्वी से मिले। यह कहा जनता ने देश की स्थिति को समझते हुए उन्हें जनादेश दिया है। कांग्रेस के कई अन्य दिग्गजों ने भी मुख्यमंत्री से भेंट की। इनमें मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी शामिल हैं।
-

वामदल मिलकर जनपक्षीय विकल्प के लिए संघर्ष करे, भुवनेश्वर मेहता भाकपा
रांची | 2024 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक बदलाव की ओर जा रहा है देश, मनोज भट्टाचार्य पूर्व सांसद आरएसपी,
वामदलों ने सांप्रदायिक- कार्पोरेट गठजोड़ के फासीवादी खतरे के खिलाफ अपने संघर्ष को और धारदार बनाने की घोषणा करते हुए झारखंड के जन मुद्दों पर राज्यव्यापी आंदोलन किए जाने की घोषणा की है। कन्वेंशन द्वारा वामदलों के नेतृत्व में भविष्य के कार्यक्रम के अन्तर्गत जुन माह में जिला स्तरीय संयुक्त कन्वेंशन आयोजित करने, जुलाई – अगस्त महीने में जनमुद्दो पर सभी प्रखंडों पर प्रदर्शन किए जाने. सितम्बर माह में तीन जत्था निकाल कर राज्यव्यापी अभियान चलाने और इस वर्ष के अंत में राजधानी में वामदलों की एक बड़ी गोलबंदी किए जाने की घोषणा की गई। कन्वेंशनल लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व सांसद भुनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि देश में सांप्रदायिक घटनाएं लगातार घट रही है, संप्रदायिक राजनीतिक ध्रुवीकरण कर भारतीय जनता पार्टी सत्ता पर काबिज हुई है और आगे भी एजेंडा बरकरार है। इसीलिए देश में वैसे फासिस्ट पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए वाम दलों को एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है। उन्होंने कहा इसमें अदानी अंबानी के इशारे पर केंद्र की सरकार नाच रही है । देश के सारे संपदा ओं को कारपोरेट के हवाले किया जा रहा है ।राज्य में राज्य की सरकार में भ्रष्टाचार बड़ा है । राज्य में खनिज संपदा ओं की लूट मची हुई है। राज्य के ऑफिसर सब बेलगाम हो चुके हैं। इसलिए राज्य में एक पक्षीय है, राजनीतिक विकल्प के लिए गांव के स्तर तक लाल झंडे के लोगों को जन गोलबंदी करनी चाहिए।
कन्वेंशन में यह तय किया गया कि वामदल जनता के मुद्दों पर तीखा और निर्णायक संघर्ष चलाएंगे।
कन्वेंशन का आधार पत्र माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव ने रखा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव महेंद्र पाठक ने कहा कि राज्य में भाजपा और झामुमो के राजनीतिक विकल्प के लिए संघर्ष करना जरूरी है। भाजपा और झामुमो दोनों ने झारखंड में को ठगा है। झारखंड में दोनों पार्टियों ने खनिज संपदा की लूट मचाई हुई है। दोनों को अंदरूनी दोस्ती है ।इसीलिए राज्य की जनता के हित में लाल झंडा के संयुक्त विकल्प बनना चाहिए और राज्य में छोटी बड़ी पार्टियों को एकजुट कर जन आंदोलन के लिए जो एजेंडा संगठनों ने बनाया है उसे नीचे तक लागू कराने के लिए सभी साथियों को आगे आना होगा।
आधार पत्र में इस बात को रेखांकित किया गया कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष और देशभक्त शक्तियों को एकजुट किए जाने के लिए वामदलों द्वारा हर संभव कोशिश की जाएगी ताकि राष्ट् विरोधी आर एस एस- भाजपा की साजिश को परास्त किया जा सके.
कंवेंशन की अध्यक्षता सात वामदलों के अध्यक्ष मंडली ने की जिसमें राजेंद्र यादव, सुरजीत सिन्हा, अनीता देवी, मोफिज साहिल, राजेन्द्र गोप, गणेश दीवान और सुमित राय शामिल थे. कन्वेंशन को आरएसपी के अखिल भारतीय महासचिव मनोज भट्टाचार्य, सीपीआई के पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता, माले के विधायक विनोद सिंह, भाकपा के राज्य सचिव महेंद्र पाठक, माले के राज्य सचिव मनोज भक्त, पोलिट ब्यूरो सदस्य जनार्दन प्रसाद, फारवर्ड ब्लाक के अरुण मंडल, माकपा के सुखनाथ लोहरा, समीर दास, संजय पासवान
सीपीआई के पी. के. पांडे, के. डी. सिंह,, अजय सिंह, फरजाना फारुकी मासस के सुशांत मुखर्जी, आर. डी. मांझी और माले के भुवनेश्वर केवट समेत विभिन्न वामदलों के नेताओं ने संबोधित किया.
कंवेंशन द्वारा खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत सब्सिडी के तहत मिलने वाले अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित करने, मनरेगा को खत्म करने की साजिश बंद करने, वन अधिकार कानून में कार्पोरेट परस्त संशोधन निरस्त किए जाने, विस्थापन आयोग का गठन करने और झारखंड के गौरव एचईसी को संरक्षण दिए जाने से संबधित प्रस्ताव पारित किया गया.
कंवेंशन मे जनार्दन प्रसाद द्वारा पेश किए गए एक विशेष प्रस्ताव में जिसमें महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपियों की गिरफ्तारी, मणिपुर में एथनिक टकराव रोकने, अडाणी द्वारा राष्ट्रीय संपदा की लूट को रोकने, झारखंड में भृष्ट नौकरशाहों पर लगाम लगाने, भूमि की लूट रोकने, नियोजन नीति बनाने, बढती महंगाई के अनुकूल न्युनतम मजदूरी तय करने और माब लिंचिग के शिकार हुए परिवारों को उचित मुआवजा दिए जाने तथा झारखंड के लंबित माब लिचिंग अधिनियम जिसे राजभवन ने वापस कर दिया है उसे पून:राजभवन भेजने ताकि वह कानून की शक्ल ले सके की मांग शामिल थी उसे पारित करते हुए उपरोक्त विंदुओं पर संयुक्त आंदोलन की घोषणा की गई.
कन्वेंशन में राज्य के सभी 24 जिलों से लगभग 400 वाम कार्यकताओं ने हिस्सा लिया. -

हेमंत सोरेन कर्नाटक सीएम के शपथ ग्रहण में होंगे शामिल
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कर्नाटक में सिद्धरमैया के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने बेंगलुरु जाएंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छह दिनों बाद गुरुवार की शाम को लौटे हैं। शनिवार को सीएम कर्नाटक के सीएम के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे इसे लेकर तैयारी पूरी कर ली गयी है। सीएम की यह यात्रा कई मायनों में अहम बताई जा रही है, दिल्ली में हेमंत सोरेन ने कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश से भी मुलाकात की थी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से भी मुलाकात की थी।
दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने निर्माणाधीन झारखंड भवन का निरीक्षण किया। धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई और 15 दिनों में रिपोर्ट मांगी है। कांग्रेस से प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर और मंत्री आलमगीर आलम भी शपथ ग्रहण समारोह में बेंगलुरु जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस दौरान विपक्षी एकता को लेकर भी चर्चा की। ध्यान रहे कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हेमंत सोरेन से आकर मुलाकात की थी और विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने को लेकर चर्चा की थी। इस मुलाकात को लेकर हेमंत सोरेन ने भी कहा था कि सभी को एकजुट करने में वक्त लगेगा। हेमंत सोरेन ने विपक्ष को एकजुट करने की रणनीति पर अपनी सहमति दी थी। सियासी गलियारों में चर्चा है कि दोनों नेताओं के बीच विपक्षी एकजुटता पर भी चर्चा हुई है। सीएम हेमंत ने रांची में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया।
झारखंड में कांग्रेस और जेएमएम का गठबंधन तमात तरह के विवाद और खींचतान के बाद भी सफलता पूर्वक चल रहा है। राष्ट्रपति चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा एनडीए प्रत्याशी द्रौपदी मुर्मू को समर्थन करना और राज्यसभा चुनाव में झामुमो द्वारा महुआ माजी को प्रत्याशी बनाने जैसी बातों को लेकर खटास नजर भी आयी। इसके बाद भी राज्य में गठबंधन की सरकार चल रही है। -

सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव होंगे शामिल
पटना | सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार 20 मई (शनिवार) दोपहर 12.30 बजे बेंगलुरु के कांतीरवा स्टेडियम में कर्नाटक के CM और डिप्टी CM पद की शपथ लेंगे. दोनों नेताओं ने कल गुरुवार देर शाम राजभवन जाकर राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया. इसके साथ ही राज्यपाल ने सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार को शपथ लेने के लिए बुलाया. इस शपथ ग्रहण समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी शामिल होंगे. शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गयी है.
वहीं, नीतीश कुमार इन दिनों विपक्षी दल के नेताओं को एकजुट करने में लगे हैं, ताकि आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हरा सके. जिसको लेकर वो लगातार राज्यों का दौरा कर रहे और नेताओं से मुलाकात भी कर रहे हैं. नीतीश कुमार ने अबतक दिल्ली में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, वाम दलों के नेता सीताराम येचुरी और डी .राजा , ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे व एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात कर चुकें हैं.
-

सिद्धारमैया के बयान ने कांग्रेस आलाकमान की बढ़ाई मुसीबत, जाने क्या है मामला
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के बाद कांग्रेस पार्टी अब सीएम के नाम का भी जल्द ऐलान कर सकती है। कई दिनों की माथापच्ची के बाद कांग्रेस नेतृत्व अब किसी फैसले पर पहुंचता दिख रहा है। पार्टी ने इसके लिए पर्यवेक्षकों को भी राज्य में भेजा और नवनिर्वाचित विधायकों की राय ली। फिलहाल प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया सीएम पद की रेस में हैं, लेकिन सिद्धारमैया का एक बयान काफी चर्चा में आ गया है।
सिद्धारमैया ने इसी के साथ कहा कि मेरे रिश्ते डीके शिवकुमार के साथ हमेशा अच्छे रहे हैं और आगे भी जारी रहेंगे।उन्होंने कहा कि हम पहले भी मिलकर चले हैं, अब भी चलेंगे।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे आगे चल रहे सिद्धारमैया सोमवार को दिल्ली के लिए रवाना हो गए, जिसके एक दिन पहले पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पार्टी के मुख्यमंत्री के चयन के लिए अधिकृत किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया एआईसीसी नेताओं से मिलने के लिए एक विशेष विमान से राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हुए।
इसके कुछ घंटे पहले कांग्रेस पर्यवेक्षक सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि यदि आवश्यक होगा तो मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को परामर्श के लिए दिल्ली बुलाया जाएगा।
गौरतलब है कि कांग्रेस ने 10 मई को हुए विधानसभा चुनाव में 135 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सिद्धारमैया और शिवकुमार सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे हैं
-

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 130 सीटें और भाजपा 66 सीटों पर आगे चल रही है
कर्नाटक विधानसभा की सभी 224 सीटों पर रुझान आ गए हैं। चुनाव आयोग द्वारा जारी रुझानों में कर्नाटक में बीते 38 सालों का ट्रेंड बदलता नहीं दिख रहा है। ट्रेंड के अनुसार एक बार फिर राज्य में सरकार बदलती रही है। रुझानों में कांग्रेस ने बड़ी बढ़त बनाते हुए बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। कांग्रेस 130 सीटें और भाजपा 66 सीटों पर आगे चल रही है।
भाजपा सरकार के कई कैबिनेट मंत्री पीछे चल रहे हैं। बेंगलुरु में भी भाजपा पिछड़ गई है। वहीं, जेडीएस केवल 22 सीटों पर आगे है।
राज्यभर के 36 केंद्रों में मतगणना से रुझान आ गए हैं, चुनाव अधिकारियों को परिणाम के बारे में एक स्पष्ट तस्वीर दोपहर तक सामने आने की उम्मीद है। राज्य में 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए 10 मई को चुनाव में 73.19 प्रतिशत का ‘रिकॉर्ड’ मतदान दर्ज किया गया था।
-

आरसीपी सिंह आज बीजेपी में होंगे शामिल!
पटना | जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और नीतीश कुमार के कभी करीबी रहे आरसीपी सिंह आज गुरुवार को बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. सूत्रों की मानें तो आरसीपी सिंह आज दोपहर 12:30 बजे दिल्ली के बीजेपी ऑफिस में पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे. आरसीपी सिंह ने अगस्त 2022 में जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था. तब से कयास लगाया जा रहा था कि वो बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. लेकिन वो बीजेपी में शामिल नहीं हुए. लेकिन आज इस बात पर मुहर लग जायेगी, जब वो बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर लेंगे. आरसीपी सिंह के बीजेपी में शामिल होने से नीतीश कुमार मिशन 2024 से पहले बड़ा झटका लगेगा.
-

झामुमो विधायक लोबिन हेंब्रम 30 जून को करेंगे बड़ा विस्फोट
झारखंड मुक्ति मोरचा के बागी विधायक लोबिन हेंब्रम ने एक बार फिर अपनी ही सरकार पर निशाना साधा और हेमंत सोरेन को चेतावनी देते हुए कहा है कि 30 जून को विस्फोट होगा। लोबिन ने कहा, मुख्यमंत्री अच्छा काम नहीं कर रहे हैं। पार्टी ने चुनाव से पहले सीएनटी-एसपीटी एक्ट, पेसा कानून और 1932 के खतियान का वादा किया था। सत्ता में आते ही इन वादों को भूल गयी। शिबू सोरेन जिन उद्देश्यों को लेकर चले थे पार्टी उसे ही आगे नहीं बढ़ा रही।
शिबू सोरेन ने अलग राज्य का सपना देखा था इस सपने के साथ झारखंडियों के कई हित भी जुड़े थे वो सपने पूरे होते नजर नहीं आ रहे। राज्य में 30 जून को बड़ा विस्फोट होगा। अगर सरकार अपने वादे पूरे नहीं करती तो सरकार के खिलाफ भी आंदोलन करने से गुरेज नहीं करेंगे। 30 जून को सिदो-कान्हू की जन्मस्थली भोगनाडीह से राजनीतिक विस्फोट होगा। जब उनसे पत्रकारों ने पूछा कि क्या आप भाजपा में शामिल हो रहे हैं।लोबिन हेम्ब्रम ने कहा, फिलहाल बीजेपी में शामिल होने या नई राजनीतिक पार्टी का गठन करने से इनकार कर दिया।
लोबिन हेम्ब्रम ने कहा, राज्य में झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन की सरकार को साढ़े 3 साल पूरे हो गये। इतने वक्त में कोई बेहतर काम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक भी काम अच्छा नहीं है। लोबिन हेम्ब्रम ने कहा कि यही हेमंत सोरेन थे जिन्होंने 1932 के खतियान के मुद्दे पर अर्जुन मुंडा की सरकार गिरा दी थी थी। तब भी कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई और अब भी गठबंधन में है लेकिन 1932 का खतियान इन्होंने ही लागू नहीं किया। महागठबंधन सरकार झारखंड की जनता को छल रही है।
लोबिन कई बार कई मंचों पर अपनी ही पार्टी के सरकार को घेर चुके हैं। उन्होंने हमेशा शिबू सोरेन से अपने संबंध अच्छे बताए और कहा है कि मैं हमेशा गुरुजी की सम्मान करता हूं। पिछले साल जनवरी महीने से ही लोबिन हेम्ब्रम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर खुलकर हमला कर रहे हैं। विधानसभा में भी जब उन्हें बोलेने का मौका नहीं मिला तो उनके आंसू निकल आये थे। उन्होंने कई रैलियां और जनसभाएं की। लोबिन हेम्ब्रम ने पार्टी से निकाले जाने के सवाल पर हमेशा कहा है कि वह पार्टी में रहें या ना रहें लेकिन माटी के लिए लड़ते रहेंगे। -

रांची पहुंचे झारखंड जेडीयू प्रभारी अशोक चौधरी
बिहार सरकार के मंत्री और झारखंड जेडीयू प्रभारी अशोक चौधरी अपने दो दिवसीय दौरे पर आज रांची पहुंचे. भगवान बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर मीडिया को संबोधित करते हुए जेडीयू प्रभारी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कुछ टास्क दिया है उसकी समीक्षा करने के लिए रांची पहुंचे हैं.
पूरे प्रदेश में संगठन को मजबूत करना ह . आज और कल बैठक होगी. इसमें झारखंड जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष खीरु महतो और पार्टी के लोगों के साथ समीक्षा करेंगे. इसके बाद जिलों का दौरा करेंगे. अशोक चौधरी ने कहा कि उनके साथ पार्टी के सह प्रभारी और बांका के विधायक मनोज यादव भी आये है सह प्रभारी विजय सिंह का आगमन सोमवार को होगा. एयरपोर्ट पर युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष निर्मल सिंह समेत अन्य नेता भी मौजूद थे.
विपक्षी एकता पर अशोक चौधरी ने कहा कि पार्टी के नेता नीतीश कुमार देश भर में विपक्षी दलों को गोलबंद करने का प्रयास कर रहे हैं. इसी कड़ी में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह रांची में सीएम हेमंत सोरेन से मुलाकात कर चुके हैं. मैं समझता हूं कि विपक्षी एकता को लेकर बात बन जायेगी
2024 के लोकसभा और झारखंड विधानसभा के चुनाव को लेकर अशोक चौधरी ने कहा कि विपक्षी एकता में सभी लोग शामिल होंगे तो मिलजुल कर चुनाव लड़ेंगे. हमारे नेता नीतीश कुमार की भी इच्छा है कि देश में विपक्षी एकता बने. खासकर बिहार से सटे इलाके झारखंड, बंगाल, उड़ीसा और उत्तर प्रदेश में संगठित होने की जरूरत है. इसके लिए सार्थक प्रयास किया जा रहा है. हमारे नेता को समर्थन भी मिल रहा है .
झारखंड जेडीयू के प्रवक्ता सागर कुमार ने कहा कि प्रभारी अशोक चौधरी कोर कमेटी के सदस्यों व पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करेंगे . साथ ही सदस्यता अभियान और संगठन की समीक्षा करेंगे.
-

पूर्व विधायक सुफल मरांडी ने समर्थकों समेत थामा BJP का दामन
झारखंड मुक्ति मोर्चा को बड़ा झटका लगा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा को छोड़कर BJP में JMM के कई नेता शामिल हो गए.पूर्व विधायक सुफल मरांडी ने शनिवार को समर्थकों समेत BJP का दामन थाम लिया है. शनिवार को झारखण्ड बीजेपी ने जानकारी देते हुए ट्वीट किया | आज प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष श्री @dprakashbjp जी की उपस्थिति में संथाल परगना प्रमंडल के प्रखण्ड प्रमुख,पंचायत समिति सदस्य, मुखिया, पूर्व मुखिया एवं अन्य समाजसेवी लोग आज झामुमो को छोड़कर भाजपा परिवार में शामिल हुए |
-

नीतीश सरकार को बड़ा झटका,जातीय जनगणना पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
पटना | नीतीश सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. बिहार में जाति आधारित जनगणना पर हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है. जातीय जनगणना के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. अब हाईकोर्ट में 3 जुलाई को अगली सुनवाई होगी.
-

जामताड़ा रेलवे स्टेशन पर चार ट्रेनों के ठहराव समारोह में भिड़े सांसद और विधायक
दोनों इसके लिए स्वयं लेना चाहते थे श्रेय, नेताओं के समर्थकों ने की आपस में तू तू, मै-मैजामताड़ा। काफी लंबे समय से आंदोलन के बाद जामताड़ा रेलवे स्टेशन पर चार प्रमुख ट्रेनों का ठहराव शुरू हुआ। स्टेशन परिसर में ट्रेन ठहराव समारोह के दौरान सांसद सुनील सोरेन और विधायक इरफान अंसारी के समर्थकों के बीच जमकर मंच पर ही नोकझोंक हो गई। दोनों नेता ट्रेन के ठहराव के लिए स्वयं श्रेय लेना चाहते है। रेलवे प्रशासन द्वारा जामताड़ा रेलवे स्टेशन में चार प्रमुख ट्रेनों के ठहराव को लेकर एक समारोह का आयोजन किया गया था। जिसमें मुख्य अतिथि दुमका के भाजपा सांसद सुनील सोरेन और विधायक इरफान अंसारी के अलावे रेलवे के अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल थे। सांसद और विधायक द्वारा हरी झंडी दिखाकर पटना-पुरी एक्सप्रेस ट्रेन को ठहराव के बाद रवाना किया जाना था। जिसे लेकर दोनों दल के नेताओं के समर्थकों द्वारा जमकर नारेबाजी होती रही। भाजपा और कांग्रेस के समर्थकों के बीच ट्रेन ठहराव को लेकर राजनीति श्रेय लेने की होड़ लगी रही। भाजपा के दुमका सांसद जहां अपना राजनीतिक श्रेय लेना चाह रहे थे। वहीं विधायक इरफान अंसारी अपना राजनीतिक श्रेय लेने में लगे थे। श्रेय लेने के होड़ में दुमका सांसद ने जैसे ही अपने संबोधन में कहा कि उनके अथक प्रयास से जामताड़ा में 4 ट्रेनों का शुभारंभ हुआ और आज तक इस क्षेत्र के जितने विधायक सांसद रहे वे ये नहीं कर पाए। इतने में ही स्थानीय विधायक इरफान अंसारी सांसद को भाषण के दौरान ही टोकने लगे। जिसके बाद मंच पर बैठे सांसद के समर्थक काफी उत्तेजित हो गए। इतने में विधायक समर्थक भी जोश में आ गए और दोनों के बीच जमकर नोकझोंक हो गई। बात आगे बढ़ती उससे पहले ही रेल पुलिस बल के जवानों ने स्थिति को संभाल लिया। इसके बाद दोनों नेताओं ने हरी झंडी दिखाकर पटना पुरी एक्सप्रेस ट्रेन ठहराव का शुभारंभ कर रवाना किया। सांसद सुनील सोरेन ने अपने संबोधन में कहा कि आज तक इस क्षेत्र में जितने भी विधायक और सांसद रहे, कभी किसी ने ट्रेन ठहराव कराने के बारे में नहीं सोचा. ना कोई काम किया। उनके कार्यकाल में 7 ट्रेनों का ठहराव जामताड़ा रेलवे स्टेशन पर हुआ है। वहीं विधायक इरफान अंसारी ने सांसद सुनील सोरेन पर झूठा श्रेय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रेन का जो भी ठहराव हुआ है, यह उनकी देन है और दुमका जामताड़ा रेलवे लाइन का सर्वे का जो काम है, वह भी उनकी वजह से हो रहा है।
-

शरद पवार छोड़ेंगे एनसीपी अध्यक्ष का पद
एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने मंगलवार को बड़ा ऐलान किया है. पवार ने कहा कि वे एनसीपी का अध्यक्ष पद छोड़ देंगे. 82 साल के मराठा क्षत्रप शरद पवार ने ये ऐलान ऐसे वक्त पर किया है, जब पिछले दिनों ही एनसीपी में फूट की खबरें सामने आई थीं. खबरें थीं कि शरद पवार के भतीजे अजित पवार एनसीपी के कई विधायकों के साथ बीजेपी सरकार में शामिल हो सकते हैं. शरद पवार ने कहा, कई साल तक मुझे राजनीति में पार्टी को लीड करने का मौका मिला है. इस उम्र में आकर ये पद नहीं रखना चाहता. मुझे लगता है कि और किसी को आगे आना चाहिए. पार्टी के नेताओं को ये फैसला करना होगा कि अब पार्टी का अध्यक्ष कौन होगा? शरद पवार आखिरी बार 2022 में ही चार साल के लिए अध्यक्ष चुने गए थे.
शरद पवार ने कहा, 1999 में एनसीपी के गठन के बाद से मुझे अध्यक्ष रहने का मौका मिला. आज इसे 24 साल हो गए हैं. पवार ने कहा, 1 मई, 1960 से शुरू हुई यह सार्वजनिक जीवन की यात्रा पिछले 63 सालों से बेरोकटोक जारी है. इस दौरान मैंने महाराष्ट्र और देश में अलग अलग भूमिकाओं में सेवा की है. पवार ने कहा, मेरा राज्यसभा कार्यकाल तीन साल का बचा है. इस दौरान मैं कोई पद न लेते हुए महाराष्ट्र और देश से जुड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करूंगा.
कार्यक्रम में हुआ हंगामा
शरद पवार ने जैसे ही पद छोड़ने का ऐलान किया, कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी. कार्यकर्ताओं ने शरद पवार से पद न छोड़ने की अपील की. कार्यकर्ता शरद पवार से फैसला बदलने की अपील करते दिखे. इस दौरान पावर के कुछ समर्थक और कार्यकर्ता रोते हुए भी नजर आए.
कमेटी बनाकर नए अध्यक्ष पर हो फैसला- शरद पवार
शरद पवार ने कहा, ”अब मुझे जो समय मिलेगा, उसे देखते हुए मैं अभी से इस काम पर ज्यादा ध्यान देने वाला हूं. मैं यह नहीं भूल सकता कि पिछले 6 दशकों में महाराष्ट्र और आप सभी ने मुझे मजबूत समर्थन और प्यार दिया है.” पवार ने कहा, ”पार्टी जिस दिशा में जाना चाहती है, यह नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन करने का समय है.” उन्होंने कहा, ”मैं सिफारिश कर रहा हूं कि अध्यक्ष पद के चुनाव पर फैसला करने के लिए एनसीपी सदस्यों की एक समिति बनानी चाहिए.’
