श्रेणी: Politics

  • बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार को ‘ठगुआ’ कहा

    बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार को ‘ठगुआ’ कहा

    झारखंड सरकार पर बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला

    लोहरदगा : भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बुधवार को लोहरदगा जिला परिसदन में मीडिया को संबोधित करते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वर्तमान झारखंड सरकार ने जनता को धोखा दिया है और इसे ‘ठगुआ सरकार’ करार दिया। मरांडी ने चुनाव प्रचार के दौरान किए गए वादों को याद करते हुए कहा कि सरकार अपने वादों में विफल रही है।

    युवाओं और योजनाओं की अनदेखी

    उन्होंने स्थानीय नीति और तकनीकी शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण बातों के मामले में सरकार द्वारा की गई लापरवाहियों की आलोचना की। उनके अनुसार, गरीब, वृद्ध, विधवा और दिव्यांग योजनाओं के लाभार्थियों की मदद नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मंइयां सम्मान योजना उन तक नहीं पहुंच रही है, जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, और पोर्टल के बंद होने की समस्या पर भी चिंता जताई।

    रोजगार और युवा पलायन

    बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक लाख रोजगार देने के वादे पर सवाल उठाया और कहा कि राज्य के युवा रोज़गार की अनुपस्थिति के कारण मजबूरन अस्थायी काम कर रहे हैं। उन्होंने सरकारी वादों की कमी को देखते हुवे कहा कि राज्य में डिग्री और इंजीनियरिंग कॉलेजों का स्वप्न अभी भी अधूरा है।

    आउटसोर्सिंग और किसानों का मुद्दा

    ठगी का आरोप : मरांडी ने कहा कि आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से युवाओं से पैसे की ठगी की जा रही है, जबकि सरकार इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि धान खरीदी की नीति स्पष्ट नहीं है और बिचौलियों को पूरी छूट दी गई है।

    चाईबासा घटना पर त्वरित कार्रवाई की मांग

    उन्होंने चाईबासा में बच्चों की मौत को गंभीरता से लिया और संबंधित मंत्री की बर्खास्तगी की मांग की, ताकि पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।

    भ्रष्टाचार के आरोप

    मरांडी ने विभिन्न विभागों में चल रहे भ्रष्‍टाचार के मामलों को उजागर किया और शराब घोटाले से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने गलतियों को छिपाने के लिए अधिकारियों को बलि का बकरा बना दिया और चार्जशीट नहीं दी।

    डेमोग्राफी में बदलाव

    मरांडी ने विशेष पहचान रजिस्टर (एसआईआर) की आवश्यकता पर जोर दिया, यह बताते हुए कि राज्य की जनसंख्या में बदलाव हो रहा है। आदिवासी आबादी में गिरावट और मुस्लिम आबादी में वृद्धि उनके लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति स्थानीय राजनीति के चलते बनी हुई है।

  • बीजेपी ने सोनिया गांधी को चुनावी मैदान में उतारा, कांग्रेस से होगा मुकाबला

    बीजेपी ने सोनिया गांधी को चुनावी मैदान में उतारा, कांग्रेस से होगा मुकाबला

    केरल पंचायत चुनाव: बीजेपी की सोनिया गांधी उम्मीदवार

    डेस्क: केरल के पंचायत चुनावों में बीजेपी ने एक खास महिला उम्मीदवार को मैदान में उतारा है, जो अपने नाम की वजह से चर्चा का विषय बनी हुई हैं। बीजेपी ने मुन्नार से 34 वर्षीय सोनिया गांधी को उम्मीदवार बनाया है। वे नल्लाथन्नी वार्ड से चुनाव लड़ रही हैं। यह दिलचस्प है कि उनके पिता एक कट्टर कांग्रेसी थे, जिन्होंने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष की प्रेरणा से अपनी बेटी का नाम सोनिया गांधी रखा। यह नाम इडुक्की क्षेत्र में लंबे समय से दिलचस्प चर्चा का विषय बना हुआ है।

    कांग्रेस का जुड़ाव

    कांग्रेस तथा इसके पहले परिवार का इस क्षेत्र से गहरा जुड़ाव रहा है। वायनाड लोकसभा सीट, जो मुन्नार से लगभग 200 किलोमीटर दूर स्थित है, से कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा सांसद हैं। इससे पहले, उनके भाई राहुल गांधी भी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। केरल में स्थानीय निकाय चुनाव दो चरणों में 9 और 11 दिसंबर को संपन्न होंगे, और परिणाम 13 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे। इन चुनावों में 941 ग्राम पंचायत, 152 ब्लॉक पंचायत, 14 जिला पंचायत, 87 नगर पालिकाएं और 6 निगम शामिल हैं।

    सोनिया गांधी का राजनीतिक सफर

    सोनिया का कहना है कि उनके पिता कांग्रेस और यूडीएफ के समर्थक रहे हैं, इसलिए उनका नाम इसी नाम पर रखा गया। वे बताती हैं कि उनका परिवार आज भी कांग्रेस का समर्थन करता है। हालांकि, अपने पति के बीजेपी में होने के कारण उन्होंने इस पार्टी को join किया है। उनके पति सुभाष, जो करीब डेढ़ साल पहले मुन्नार क्षेत्र में पंचायत उपचुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार रहे थे, उनके निर्वाचन में सहयोगी रहे हैं। इस बार सोनिया गांधी का सामना कांग्रेस की मंजुला रमेश और सीपीएम की वलारमती से होगा।

    सोनिया गांधी का पारिवारिक इतिहास

    बीजेपी उम्मीदवार सोनिया गांधी का जन्म दिवंगत दूरे राज के परिवार में हुआ था, जो एक स्थानीय मजदूर और कांग्रेस नेता थे। इस चुनावी मैदान में उम्मीदवार बनना उनके परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण पल है, जो उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाता है।

  • यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ये छह नेता दौड़ में हैं

    यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए ये छह नेता दौड़ में हैं

    उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ में नए नाम

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी के लिए छह दावेदारों के नाम सामने आए हैं। पार्टी में चर्चा है कि इस बार किसी ब्राह्मण या दलित नेता को जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा, ओबीसी समुदाय के नेताओं को भी अध्यक्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवार माना जा रहा है। इस संदर्भ में भाजपा के महत्वपूर्ण नेताओं की एक बैठक सोमवार शाम को लखनऊ में आयोजित की गई। बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष और संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार समेत अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।

    बैठक में चर्चा के मुद्दे

    इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री भी उपस्थित थे। यहां केवल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद पर ही नहीं, बल्कि पंचायत चुनाव और आगामी विधानसभा चुनाव पर भी विचार विमर्श हुआ। बाद में, मुख्यमंत्री आवास पर हुई एक अन्य बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, मौजूदा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और प्रदेश महासचिव धर्मपाल सिंह शामिल हुए। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा नाम अंतिम रूप से तय हुआ है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में हुई बैठक में कुल 9 संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा की गई, जिनमें 3 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 3 दलित नेता शामिल हैं।

    प्रमुख दावेदार

    राज्यसभा सांसद **दिनेश शर्मा** का नाम उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ में सबसे आगे है। शर्मा पहले उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनका आरएसएस के साथ अच्छे संबंध हैं। इसके अलावा, **हरीश द्विवेदी** भी एक महत्वपूर्ण नाम हैं, जो संगठन और सरकार में अनुभव के साथ बस्ती जिले के सांसद रह चुके हैं।

    ओबीसी समुदाय के उम्मीदवार

    ओबीसी समुदाय से **धर्मपाल सिंह** और **बीएल वर्मा** भी कुर्सी के लिए संभावित दावेदार हैं। धर्मपाल सिंह योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और लोध समुदाय से आते हैं, जो ओबीसी से जुड़े हैं। वहीं, बीएल वर्मा बदायूं जिले से राज्यसभा सदस्य हैं और उनके पास सरकार के साथ काम करने का लंबा अनुभव है।

    दलित समुदाय के दावेदार

    पूर्व केंद्रीय मंत्री **रामशंकर कठेरिया** भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने की दौड़ में आगे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हटावा से हार का सामना करना पड़ा था, जबकि वे आगरा से लगातार दो बार जीते थे। इसके अलावा, विद्या सागर सोनकर भी इस सूची में हैं, जो स्थानीय स्तर पर कई पदों पर रह चुके हैं और भाजपा के दलित मोर्चे के अध्यक्ष रह चुके हैं।

  • बिहार में राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन रखा गया

    बिहार में राजभवन का नाम बदलकर लोक भवन रखा गया

    बिहार राज भवन का नया नामकरण: ‘बिहार लोक भवन’

    पटना स्थित ऐतिहासिक राज भवन का आधिकारिक नाम अब ‘बिहार लोक भवन’ के रूप में बदल दिया गया है। यह निर्णय राज्यपाल के प्रधान सचिव आर. एल. चोंग्थु द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार लिया गया। केंद्र सरकार की नीति के तहत, सरकार ने राजभवन के नाम को अधिक जनहितकारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप बनाया है। अधिसूचना के प्रभावी होते ही पुराने नाम का उपयोग सभी विभागों में समाप्त कर दिया गया है।

    सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम

    केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा 25 नवंबर 2025 को जारी किए गए इस आदेश के पीछे सरकार की मंशा शासन व्यवस्था को जनोन्मुखी बनाना है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान राज भवन जैसे नामों का उपयोग औपनिवेशिक प्रशासन के अधिकारियों के आवास के रूप में होता था। इस बदलाव को सरकार की उस कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है जो औपनिवेशिक प्रतीकों को खत्म करने की दिशा में है।

    राज भवन के नेम प्लेट और वेबसाइट पर परिवर्तन

    राज भवन का नाम बदलने के साथ ही उसके नेम प्लेट, साइन बोर्ड और सभी आधिकारिक बोर्डों पर ‘लोक भवन’ शब्द अंकित किया जा रहा है। आधिकारिक वेबसाइट पर भी नाम को अद्यतन कर ‘बिहार लोक भवन’ किया गया है, जो नई लोकतांत्रिक पहचान को दर्शाता है।

    इतिहास में बदलाव का महत्व

    बिहार के राज भवन की नींव 1913 में तत्कालीन वायसराय लॉर्ड हार्डिंग द्वारा रखी गई थी, और इसका उद्घाटन 3 फरवरी 1916 को हुआ था। उस समय बिहार और ओडिशा को एकीकृत रूप से देखा जाता था। यह कदम न केवल बिहार के पुराने औपनिवेशिक अतीत से आगे बढ़ने का है, बल्कि एक नई पहचान की भी स्थापना है।

    भविष्य की दिशा में बदलाव

    नए नामकरण के साथ, ‘बिहार लोक भवन’ अब राज्य के लिए एक नई पहचान प्रस्तुत कर रहा है। यह बदलाव न केवल ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वर्तमान सरकार के जनहित में कार्य करने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

  • संजय राउत ने कहा, कांग्रेस के BMC चुनाव निर्णय पर MNS की भागीदारी जरूरी

    संजय राउत ने कहा, कांग्रेस के BMC चुनाव निर्णय पर MNS की भागीदारी जरूरी

    बीएमसी चुनाव में कांग्रेस के फैसले पर संजय राउत की प्रतिक्रिया

    नई दिल्ली। शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने सोमवार को कहा कि वह बीएमसी चुनाव में कांग्रेस के अकेले लड़ने के फैसले पर विचार करने के लिए पार्टी के आलाकमान से चर्चा करेंगे। राउत ने संवाददाताओं से बताया कि विपक्षी महा विकास आघाड़ी में राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का शामिल होना आवश्यक है, ताकि भाजपा को हराने में मदद मिल सके।

    कांग्रेस का निर्णय और शिवसेना का रुख

    संजय राउत ने कहा कि कांग्रेस के बीएमसी चुनाव अकेले लड़ने का निर्णय भाजपा के लिए फायदेमंद हो सकता है। हाल ही में, कांग्रेस की मुंबई इकाई ने मनसे के साथ गठबंधन से इनकार किया था और स्वतंत्र रूप से नगर निकाय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। वहीं, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का मानना है कि कांग्रेस को महा विकास आघाड़ी का हिस्सा बनना चाहिए।

    चुनाव के बाद का आत्मविश्वास

    राउत के अनुसार, यदि कांग्रेस बिहार विधानसभा चुनाव के बाद आत्मविश्वास से भरी हुई है और वे स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने को तैयार हैं, तो उन्हें इस पर विचार करना चाहिए। हाल ही में हुए बिहार चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 243 सदस्यीय सदन में 200 से अधिक सीटें जीतकर अपनी सत्ता बनाए रखी है, जबकि कांग्रेस केवल 6 सीटें ही जीत पाई।

    साथ बैठकों का आश्वासन

    संजय राउत ने कहा कि वह दिसंबर के दूसरे सप्ताह में दिल्ली जा रहे हैं और कांग्रेस आलाकमान से चर्चा करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शिवसेना और मनसे के बीच सकारात्मक चर्चा चल रही है और सीट बंटवारे पर बैठकें जारी हैं। राउत ने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई राज ठाकरे के बीच बातचीत का सिलसिला बेहद अच्छा है।

    भाजपा पर आरोप

    इस बीच, राउत ने भाजपा पर पिछले पांच वर्षों में महाराष्ट्र में चुनावी संस्कृति को भ्रष्ट करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने यह दावा किया कि नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के लिए इतनी बड़ी मात्रा में धन का उपयोग कभी नहीं किया गया।

    स्थानीय निकाय चुनाव का कार्यक्रम

    महाराष्ट्र में विभिन्न स्थानीय निकायों के चुनाव मंगलवार को होने जा रहे हैं। हालांकि, बीएमसी और अन्य नागरिक निकायों के चुनावों का कार्यक्रम अभी तक घोषित नहीं किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया है कि स्थानीय निकाय चुनाव 31 जनवरी, 2026 तक पूरे कर लिए जाएं।

  • सत्र से पहले पीएम ने विपक्ष से सार्थक चर्चा की प्राथमिकता जताई

    सत्र से पहले पीएम ने विपक्ष से सार्थक चर्चा की प्राथमिकता जताई

    शीतकालीन सत्र की शुरुआत पर पीएम मोदी का वक्तव्य

    नई दिल्ली. पारliament के शीतकालीन सत्र के आरंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह सत्र केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह देश के विकास की दिशा में सकारात्मक ऊर्जा लाने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा, “भारत में लोकतंत्र की भावना को सदैव प्रकट किया गया है, जिससे इसके प्रति विश्वास और मजबूत होता है। हाल के बिहार चुनाव में मतदान की वृद्धि भी लोकतंत्र की ताकत का प्रतीक है। माताओं और बहनों की भागीदारी एक नई उम्मीद उत्पन्न कर रही है, जिसे दुनिया बारीकी से देख रही है।”

    विपक्ष से सकारात्मक चर्चा की अपील

    पीएम मोदी ने विपक्ष से अपील की कि वे पराजय की निराशा से बाहर निकलकर सार्थक चर्चा करें। उन्होंने कहा कि कुछ दल ऐसे हैं जो अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पाते। प्रधानमंत्री ने सभी दलों से आग्रह किया कि शीतकालीन सत्र में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें और अपनी जिम्मेदारियों को समझें। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सदन में चर्चा का स्तर ऊँचा रहे।

    नई पीढ़ी के सांसदों को महत्वपूर्ण भूमिका

    उन्होंने नई पीढ़ी के सांसदों की क्षमताओं की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह आवश्यक है कि संसद में सभी सांसदों को अभिव्यक्ति का अधिकार मिले, ताकि वे अपने अनुभवों से सदन को लाभान्वित कर सकें।”

    नारे से नीति की आवश्यकता

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सदन में संवाद के लिए नीति की आवश्यकता है, न कि केवल नारेबाजी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रनिर्माण के लिए सकारात्मक सोच महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल के दिनों में सदन का इस्तेमाल जनादेश की चर्चा से अधिक चुनावी राजनीति के लिए किया जा रहा है, जिसे बदलने की आवश्यकता है।

    शीतकालीन सत्र का महत्व

    पीएम मोदी ने इस सत्र को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इसे राष्ट्र की प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। विपक्ष से एकजुटता और जिम्मेदारी के साथ चर्चा की अपेक्षा की गई है, जिससे लोकतंत्र और अर्थतंत्र दोनों को मजबूती मिले।

    चुनौतियों का सामना करना

    प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि कुछ राजनीतिक दल सदन में अपनी पराजय का गुस्सा निकाल रहे हैं और इसके लिए उन्हें आत्मचिंतन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “पिछले 10 वर्षों में कुछ दलों ने जो राजनीतिक खेल खेला है, उसे अब बदलने का समय आ गया है।”

    सकारात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता

    उन्होंने विपक्ष को सलाह दी कि शीतकालीन सत्र को सकारात्मक दिशा में ले जाने की जरूरत है। पीएम ने कहा कि निकट भविष्य में उनके विचारों को सदन में उचित स्थान मिलना चाहिए और सभी दलों को एक साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।

  • सर्दियों में राजद का महागठबंधन से अलग होने का संभावित निर्णय

    सर्दियों में राजद का महागठबंधन से अलग होने का संभावित निर्णय

    झारखंड की राजनीति में उठापटक: महागठबंधन पर सवाल

    झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में उत्तेजक बदलाव की संभावना उत्पन्न हो रही है। राजद का महागठबंधन से अलगाव एक महत्वपूर्ण राजनीति विषय बन चुका है। हाल ही में बिहार विधानसभा चुनावों के परिणामों ने विपक्षी गठबंधन को गहरा धक्का दिया है। कांग्रेस का प्रदर्शन चिंताजनक रहा है, जबकि राजद, जो सत्ता में वापसी का दावा कर रहा था, मुकाबले में पीछे रह गया।

    गठबंधन में तनाव का इशारा

    यह हार गठबंधन के भीतर अंतर्विरोधों को बढ़ा रही है। कांग्रेस ने सीट बंटवारे को लेकर असंतोष व्यक्त किया है, जिसके चलते कई सीटों पर दोस्ताना संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हुई है। इस परिस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा को बढ़ावा दिया है कि कांग्रेस आलाकमान बिहार में राजद से नाता तोड़ सकता है।

    राजद की रणनीति पर सवाल

    राजद की नीतियां और उसकी पृष्ठभूमि कांग्रेस के वोट बैंक को प्रभावित कर रही हैं। अतीत में भी विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारे पर विवाद उत्पन्न हुआ था, लेकिन इस बार हार ने मतभेदों को और गहरा कर दिया है।

    झामुमो की स्थिति और संभावित बदलाव

    झारखंड में यह स्थिति सत्तारूढ़ गठबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बिहार चुनाव में अपने लिए सीटें मांगी थीं, लेकिन शुरुआत में आश्वासन मिलने के बावजूद पार्टी की अनदेखी हुई। इस पर झामुमो में आक्रोश व्याप्त है और समीक्षा की बात सामने आई है।

    गठबंधन का भविष्य

    हालांकि, नए गठबंधन स्वरूप को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है, लेकिन राजद के रास्ते अलग होने की चर्चाएं तेज हैं। यदि ऐसा होता है, तो हेमंत सोरेन की कैबिनेट से राजद कोटे के मंत्री संजय प्रसाद यादव को हटाया जा सकता है। राजद के पलायन के बाद भी सरकार की स्थिति पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकार के पास बहुमत से अधिक आंकड़ा है। यही कारण है कि ऐसी अटकलें तेज हो रही हैं।

    कांग्रेस की समीक्षा बैठक

    कांग्रेस आलाकमान दिल्ली में बिहार की हार की समीक्षा कर रहा है। इस प्रक्रिया में नए राजनीतिक समीकरणों की संभावना हो सकती है। झारखंड में कांग्रेस एक महत्वपूर्ण सहयोगी दल है। झामुमो और कांग्रेस किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले एक-दूसरे से सहमति बनाकर कदम उठाने का प्रयास करेंगे। बिहार में हार के कारण राजद खेमे में गहरी निराशा है, जिससे कोई वरिष्ठ नेता गठबंधन की गतिविधियों पर सार्वजनिक रूप से बोलने को तैयार नहीं है।

    गठबंधन में हलचल और संभावित घटनाक्रम

    वर्तमान में गठबंधन में हलचल बढ़ गई है। यदि झारखंड में राजद अलग हुआ, तो मंत्रिपरिषद में बदलाव संभव है। तेजस्वी यादव को झारखंड के लिए नई रणनीति तैयार करनी होगी। उदासीनता की स्थिति में राजद के विधायकों के दल से अलग होने का खतरा भी उठ सकता है।

  • उमा भारती ने चुनाव लड़ने के अपने बयान से पलटी, पार्टी ने कहा

    उमा भारती ने चुनाव लड़ने के अपने बयान से पलटी, पार्टी ने कहा

    उमा भारती का चुनावी फैसला: पार्टी आलाकमान पर डाला निर्भरता

    टीकमगढ़। मध्य प्रदेश भाजपा की प्रमुख नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने हाल ही में अपने चुनावी इरादों पर एक नया मोड़ लिया है। पहले उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनका उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव में भाग लेना है, लेकिन अब उन्होंने यह स्पष्ट किया है कि यह निर्णय पार्टी के उच्च नेतृत्व के अनुसार होगा।

    झांसी सीट पर चुनाव लड़ने की इच्छा

    टीकमगढ़ में अपने दौरे के दौरान, उमा भारती ने उल्लेख किया कि यदि पार्टी नेतृत्व कहेगा, तभी वह चुनावी मैदान में उतरेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी प्राथमिकता झांसी लोकसभा सीट है, बशर्ते वर्तमान सांसद अनुराग शर्मा को इस पर कोई आपत्ति न हो।

    संतोष वर्मा के विवादित बयान पर प्रतिक्रिया

    हाल ही में, मध्य प्रदेश के IAS संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण समुदाय पर की गई टिप्पणी को लेकर उमा भारती ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “यह बयान न केवल अनुचित है, बल्कि इसे घोर निंदा की आवश्यकता है।” उन्होंने सरकार से यह भी आग्रह किया कि इस मामले में उचित कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वर्तमान सामाजिक संवेदनशीलता के समय में ऐसा बोलना उचित नहीं है, और शिक्षित व्यक्तियों को अपने शब्दों का चयन सावधानी से करना चाहिए।

  • सोनिया व राहुल गांधी पर नेशनल हेराल्ड मामले में नई FIR दर्ज

    सोनिया व राहुल गांधी पर नेशनल हेराल्ड मामले में नई FIR दर्ज

    कांग्रेस नेता सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ नई FIR

    कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी पर नई आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने नेशनल हेराल्ड केस में उन पर आपराधिक साजिश के आरोप में FIR दर्ज की है। इस मामले में राहुल और सोनिया के अलावा छह अन्य व्यक्तियों और तीन कंपनियों को भी आरोपी बनाया गया है।

    धोखाधड़ी का आरोप

    FIR में कहा गया है कि कांग्रेस से संबंधित कंपनी AJL (एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड) को धोखाधड़ी से अपने नियंत्रण में लेने के लिए आपराधिक साजिश रची गई थी। यह FIR 3 अक्टूबर को ED की शिकायत पर दर्ज की गई है। ED ने अपनी जांच रिपोर्ट दिल्ली पुलिस के साथ साझा की थी। PMLA की धारा 66(2) के तहत ED किसी भी एजेंसी से अनुसूचित अपराध दर्ज कराने की मांग कर सकती है।

    आरोपियों की सूची

    इस FIR में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा (इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के प्रमुख) सहित तीन अन्य लोग भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, AJL, Young Indian और Dotex Merchandise Pvt Ltd नामक तीन कंपनियों का भी उल्लेख किया गया है।

    आरोपों की प्रकृति

    Dotex कोलकाता की एक संदिग्ध शेल कंपनी बताई जाती है, जिसने Young Indian को ₹1 करोड़ का भुगतान किया था। आरोप है कि इस लेन-देन के जरिए Young Indian ने कांग्रेस को ₹50 लाख का भुगतान कर लगभग ₹2,000 करोड़ की संपत्ति वाली AJL पर नियंत्रण प्राप्त किया।

  • कर्नाटक में सत्ता संघर्ष, डीके शिवकुमार ने अपना संदेश दिया

    कर्नाटक में सत्ता संघर्ष, डीके शिवकुमार ने अपना संदेश दिया

    कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी खींचतान

    बेंगलुरु। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद, शिवकुमार ने कहा कि दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण संदेश पार्टी के सदस्यों तक पहुँचाया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सिंचाई और शहरी विकास जैसे कई मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। शिवकुमार ने कहा, “हम कांग्रेस के साथ खड़े हैं और पार्टी के प्रति प्रतिबद्ध हैं।”

    दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा की योजना

    डीके शिवकुमार ने इन मुद्दों पर चर्चा के लिए दिल्ली जाने की योजना बनाई है। वह केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठक के लिए अपॉइंटमेंट लेने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने कहा कि वह और मुख्यमंत्री एक ऑल-पार्टी डेलीगेशन को दिल्ली ले जाने की योजना बना रहे हैं, जिसमें गन्ना, मक्का और अन्य मुद्दों पर वार्ता करेंगे।

    पूर्व सीएम एसएम कृष्णा की श्रद्धांजलि

    शिवकुमार हाल ही में कर्नाटका के पूर्व मुख्यमंत्री एसएम कृष्णा के घर उनके 12वें महीने के अनुष्ठान में शामिल हुए। उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटी से मिलने वहां जा रहे हैं। यह अनुष्ठान 10 दिसंबर, 2024 को कृष्णा के निधन के बाद हो रहा है।

    सीएम और डिप्टी सीएम के बीच एकजुटता

    दोनों नेताओं ने एक घंटे की बैठक के बाद पार्टी के भीतर एकजुटता की पुष्टि की है। सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने पार्टी हाईकमान के निर्णय को मानने का फैसला किया है और अब किसी भी तरह की कन्फ्यूजन नहीं होगी। खासकर तब जब से सिद्धारमैया की सरकार ने आधा टर्म पूरा किया है।

    नेताओं के बीच सामंजस्य और नेतृत्व परिवर्तन पर चर्चा

    सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि वह अपनी पांच साल की अवधि पूरी करेंगे, जबकि शिवकुमार ने पार्टी के सीनियर नेताओं के बीच हुए सीक्रेट एग्रीमेंट का हवाला देते हुए 2.5 साल बाद खुद को सीएम पद के लिए उपयुक्त बताया है। कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई में हाईकमान का फैसला जल्द ही आने की उम्मीद है। दोनों नेताओं ने पार्टी के आधिकारिक निर्णय का पालन करने की इच्छा जताई है।

  • उमा भारती ने 2024 लोकसभा चुनाव न लड़ने का कारण बताया

    उमा भारती ने 2024 लोकसभा चुनाव न लड़ने का कारण बताया

    उमा भारती का चिंतन: शराबबंदी और आगामी चुनावों पर महत्वपूर्ण बातें

    भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने शनिवार को टीकमगढ़ में अपने बड़े भाई स्वर्गीय स्वामी प्रसाद के फार्महाउस में एक पत्रकार वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बिहार में शराबबंदी का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दृढ़ इच्छाशक्ति की सराहना की। उमा ने कहा कि भले ही नीतीश के कुछ विधायक शराब बेचते रहे, फिर भी उनकी संकल्पशक्ति के कारण बिहार में शराबबंदी संभव हो पाई। इसके साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश में समाज की सक्रिय भागीदारी को शराबबंदी के लिए आवश्यक बताया।

    आगामी चुनावों का चुनावी बयान

    उमा भारती ने आगामी चुनावों को लेकर एक मजबूत राजनीतिक बयान देने में संकोच नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह 2029 में झांसी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की योजना बना रही हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने 2024 का चुनाव इसलिए नहीं लड़ा क्योंकि वह उस समय गंगा सफाई अभियान में पूरी तरह व्यस्त थीं।

    राष्ट्रीय सुरक्षा और कांग्रेस पर आरोप

    भारत में चल रही एसआईआर बहस पर उमा भारती ने कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसे देश के हित में देखा जाना चाहिए।

    भारत का सांस्कृतिक पहचान

    हिंदू राष्ट्र पर अपनी सोच व्यक्त करते हुए उमा भारती ने कहा कि भारत सांस्कृतिक रूप से एक हिंदू राष्ट्र है और यह हमेशा रहेगा। उन्होंने इस विचार को सांप्रदायिकता से जोड़ने के बजाय इसे सांस्कृतिक पहचान के रूप में प्रस्तुत किया।

    प्रेम विवाह पर विचार

    प्रेम विवाह को ले कर उमा ने प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाया। उनका मानना है कि यदि दोनों परिवारों की सहमति हो, तो जाति कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने संतोष वर्मा के विवादित बयान की भी निंदा की।

    समाज का योगदान शराबबंदी में

    उमा ने बताया कि टीकमगढ़ के कई ग्रामीण क्षेत्रों में समाज ने स्वयं पहल करते हुए शराबबंदी लागू की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि “शराबबंदी और गौ सेवा समाज का काम है, जिसे शासन के साथ-साथ जनता को मिलकर निभाना होगा।” इस पत्रकार वार्ता में उमा भारती ने एक बार फिर से अपने स्पष्ट और निडर दृष्टिकोण को उजागर किया, जो सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित था।

  • कर्नाटक: नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर सिद्धारमैया एवं शिवकुमार का एकजुटता बयान

    कर्नाटक: नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर सिद्धारमैया एवं शिवकुमार का एकजुटता बयान

    कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं और एकजुटता का संदेश

    बंगलूरू: कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने एकमतता का संकेत दिया है। दोनों नेताओं ने एक घंटे तक चलने वाले नाश्ते के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस पार्टी एकजुट है और आलाकमान के निर्णय का पालन किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयान

    सिद्धारमैया ने कहा कि “अब कोई असमंजस नहीं रहेगा। मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स ने गलतफहमी पैदा की। हम तय कर चुके हैं कि पार्टी आलाकमान जो निर्णय करेंगे, हम उसका पालन करेंगे।” उन्होंने आगामी 2028 विधानसभा चुनाव पर भी जोर दिया और कहा कि निकाय चुनाव भी महत्वपूर्ण हैं। यह भी बताया कि कांग्रेस को पुनः सत्ता में लाने का लक्ष्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बीच कोई मतभेद नहीं हैं और भविष्य में भी नहीं होंगे।

    डीके शिवकुमार की प्रतिक्रिया

    डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा, “राज्य की जनता का पूरा समर्थन हमें मिल रहा है। हम अपनी जिम्मेदारियों को निभाने की दिशा में कार्यरत हैं। पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है, और हम मिलकर काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के साथ मैं भी समर्थन में हूं।” उन्होंने आलाकमान के निर्णय को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि वे पार्टी के प्रति वफादार रहेंगे।

    नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा का इतिहास

    2023 के विधानसभा चुनावों के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सीएम पद को लेकर खींचतान शुरू हो गई थी। यह विवाद इतना बढ़ा कि आलाकमान को दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाना पड़ा। वहां एक समझौते के तहत यह तय किया गया कि सिद्धारमैया राज्य के मुख्यमंत्री रहेंगे जबकि शिवकुमार डिप्टी सीएम के रूप में कार्य करेंगे। मीडिया में ढाई-ढाई साल के समझौते की बातें उड़ीं, लेकिन पार्टी ने इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया। हाल के दिनों में सिद्धारमैया के सीएम कार्यकाल के ढाई साल पूरे होने के बाद, एक बार फिर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

  • मध्य प्रदेश कांग्रेस में हड़बड़ाहट, जीतू पटवारी और हरिश चौधरी में टकराव

    मध्य प्रदेश कांग्रेस में हड़बड़ाहट, जीतू पटवारी और हरिश चौधरी में टकराव

    मध्य प्रदेश में कांग्रेस जिला प्रभारियों की नियुक्तियों में हलचल

    भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के जिला प्रभारियों की हालिया नियुक्तियों पर बवाल खड़ा हो गया है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने हाल ही में की गई जिला संगठन मंत्रियों की नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह नियुक्तियां पीसीसी चीफ जीतू पटवारी द्वारा की गई थीं, और अब बताया जा रहा है कि AICC के अनुमोदन के बाद ही नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    पार्टी के भीतर का विवाद

    कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के बीच निम्नलिखित नियुक्तियों को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हरीश चौधरी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भविष्य की नियुक्तियों के लिए पहले अनुमति प्राप्त की जाए। उन्होंने जिन नियुक्तियों को निरस्त किया है, वे उन नियुक्तियों के खिलाफ उठ रही आवाजों के बीच आई हैं, जिन्हें पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बिना किसी उचित संज्ञान के किया गया माना है।

    संगठनात्मक नियुक्तियों का विरोध

    यह फैसला पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक से पहले लिया गया है। हाल ही में, तीन से चार दिन के भीतर कई जिलों में जिला संगठन मंत्रियों की नियुक्तियां की गई थीं, जो लगातार विरोध का कारण बनीं। कार्यकर्ताओं का प्रश्न है कि जब जिला अध्यक्ष पहले से मौजूद हैं, तो जिला संगठन मंत्री की नई नियुक्ति क्यों की जा रही है? हरीश चौधरी को बिना पूर्व जानकारी दिए इन नियुक्तियों का निर्णय लिया गया था। एआईसीसी के हस्तक्षेप के बाद चौधरी ने आदेश जारी किया है।

    नियुक्तियों की सूची

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्देशन में हाल में संगठन कार्यों में सहयोग हेतु विभिन्न जिलों में नियुक्तियाँ की गई थीं। उमरिया में पुष्पराज सिंह, जबलपुर शहर में रितेष गुप्ता बंटी, राजगढ़ में राधेश्याम सोमतिया, धार में परितोष सिंह बंजी, और उज्जैन शहर में अजय राठौर को जिला संगठन मंत्री नियुक्त किया गया था।

  • RSS नेता के पुत्र की हत्या करने वाला आरोपी मुठभेड़ में ढेर

    RSS नेता के पुत्र की हत्या करने वाला आरोपी मुठभेड़ में ढेर

    फिरोजपुर में पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़

    पंजाब के फिरोजपुर जिले स्थित महामुजोहिया गांव में पुलिस और अपराधियों के बीच एक मुठभेड़ हुई है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) नेता के बेटे के हत्या के मुख्य आरोपी को मार दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के साथी उसे पुलिस गिरफ्त से मुक्त कराने का प्रयास कर रहे थे, जिसके चलते यह एनकाउंटर हुआ। घटना का संदर्भ 15 नवंबर का है, जब दो मोटरसाइकिल सवारों ने आरएसएस के नेता बलदेव राज अरोड़ा के बेटे नवीन अरोड़ा की हत्या की थी। इस मामले में मुख्य आरोपी बादल को बुधवार को गिरफ्तार किया गया था।

    आरोपी की गिरफ्तारी और पूछताछ

    फिरोजपुर रेंज के पुलिस उप महानिरीक्षक हरमनबीर सिंह गिल ने बताया कि पूछताछ में बादल ने अपने दो सहयोगियों, राजू और सोनू, की जानकारी दी। DIG गिल ने बताया कि बादल के साथी उसे राजस्थान ले जाने के लिए महामुजोहिया के श्मशान घाट के पास आए थे। बादल ने पुलिस को बताया कि उसने वहां कुछ हथियार छिपा रखे हैं। जब पुलिस उसे श्मशान घाट की ओर ले जा रही थी, तभी आरोपी के साथी वहां पहुंच गए और पुलिस पर गोली चलाने लगे।

    पुलिस की आत्मरक्षा में कार्रवाई

    गिल के अनुसार, पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की, जिसमें बादल को गोली लगी और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस दौरान एक हेड कांस्टेबल बलोर सिंह भी घायल हो गए। घटना के वक्त घने कोहरे और अंधेरे का लाभ उठाते हुए दोनों हमलावर फरार हो गए। फिलहाल, उनकी गिरफ्तारी के लिए व्यापक तलाशी अभियान जारी है, लेकिन इस मामले में कोई नई जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई है।

  • कांग्रेस ने बिहार हार पर समीक्षा बैठक की, चेतावनी और अपमान के मामले उठे

    कांग्रेस ने बिहार हार पर समीक्षा बैठक की, चेतावनी और अपमान के मामले उठे

    बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार

    नई दिल्ली: हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को गहरी हार का सामना करना पड़ा है। 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी मात्र 6 सीटों पर जीत हासिल कर सकी। इस नाकामी के बाद गुरुवार को एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल समेत अन्य नेता शामिल हुए। बैठक में विभिन्न प्रत्याशियों, सांसदों और वरिष्ठ नेताओं ने अपने विचार साझा किए, और इसमें कुछ हंगामे की भी स्थिति बनी।

    बैठक में हंगामा और आरोप

    बैठक से पहले जब राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का इंतजार हो रहा था, उसी समय वैशाली से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी संजीव सिंह ने अपने संबंधित मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रत्याशी बाहरी थे और उन पर फ्रेंडली फाइट्स में शामिल होने के संदर्भ में बात की गई। संजीव सिंह, जिनकी स्वयं की सीट भी फ्रेंडली फाइट की श्रेणी में थी, इस बात को लेकर काफी आक्रामक हो गए। उन्होंने अन्य प्रत्याशियों को धमकी दी और इस दौरान संवाद बिगड़ गया।

    अनुशासन की आवश्यकता

    इस घटना पर सीनियर नेताओं ने हस्तक्षेप किया। जब राहुल गांधी और खरगे को इस स्थिति के बारे में पता चला, तो उन्होंने इसका सख्ती से विरोध किया और कहा कि पार्टी में अनुशासन होना आवश्यक है। उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    आंतरिक मामलों पर चर्चा

    बैठक में टिकट बेचने के आरोप, फ्रेंडली फाइट्स से होने वाले नुकसान, और पप्पू यादव पर कुछ प्रत्याशियों को हराने का आरोप जैसे मुद्दे उठाए गए। इसके अतिरिक्त, आंतरिक झगड़ों को हार का मुख्य कारण माना गया। पार्टी में प्रभावशाली नेता की कमी और कन्हैया कुमार जैसे नेताओं का इस्तेमाल न करना भी चर्चा का हिस्सा रहा।

    भविष्य की रणनीतियाँ

    बैठक में प्रस्ताव रखा गया कि पार्टी को नए नेताओं को आगे लाने की आवश्यकता है। यह भी कहा गया कि अगर आरजेडी के साथ गठबंधन नहीं होता, तो पार्टी की स्थिति इतनी खराब नहीं होती। गठबंधन के समय पर न होने और सीट बंटवारे में देरी ने भी समस्या को बढ़ाया। कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि पार्टी को वर्तमान में राजद के साथ गठबंधन खत्म कर स्वयं को सुदृढ़ करना चाहिए।

    आगे का रास्ता

    बैठक में यह चर्चा भी हुई कि अगले विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन के मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए। ओवैसी की मौजूदगी के कारण सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम वोटरों के महागठबंधन में कमी आने का मुद्दा भी उठाया गया। राहुल गांधी ने सभी नेताओं से आग्रह किया कि वे व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप करने के बजाय अपनी विधानसभा के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें।

  • मतदाताओं के अधिकारों में कटौती, NRC लागू करने का इरादा: ममता बनर्जी

    मतदाताओं के अधिकारों में कटौती, NRC लागू करने का इरादा: ममता बनर्जी

    ममता बनर्जी का एनआरसी पर गंभीर आरोप

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि इसके पीछे असली मंशा पिछले दरवाजे से राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करने की है, जिससे आम लोगों में डर फैलाया जा रहा है। संविधान दिवस के मौके पर बी. आर. आंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बनर्जी ने कहा कि मौलिक अधिकारों को खतरा पहुंचाया जा रहा है।

    संविधान का महत्व

    बनर्जी ने अपने हाथ में संविधान की प्रति लिए हुए कहा कि उन्हें दुख के साथ यह देखना पड़ रहा है कि लोगों के मताधिकार तथा धार्मिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गंदी भाषा का उपयोग करके विभिन्न वर्गों पर हमले किए जा रहे हैं, जिसमें दलित, अल्पसंख्यक और आम हिंदू मतदाता भी शामिल हैं। बनर्जी ने कहा, “इसके पीछे असली मंशा एनआरसी लागू करना है। हम न केवल स्तब्ध हैं, बल्कि दुखी भी हैं। इसलिए मैं भारत के लोकतंत्र की रक्षा के लिए आज यहां उपस्थित हूं।”

    नागरिकता का डर

    बनर्जी ने इस बात पर जोर दिया कि वर्षों से देश की मिट्टी को सींचने वाले व्यक्तियों से उनकी नागरिकता साबित करने को कहा जा रहा है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि नागरिकता के अधिकार के नाम पर डर का माहौल बनाया जा रहा है। इससे पहले, उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि जब लोकतंत्र खतरे में हो, धर्मनिरपेक्षता चुनौती का सामना कर रही हो और संघवाद को कमजोर किया जा रहा हो, तो लोगों को संविधान द्वारा प्रदत्त मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।

    संविधान और संस्कृति

    बनर्जी ने संविधान को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि यह भारत की संस्कृतियों, भाषाओं और समुदायों की विविधता को एकजुट करता है। उन्होंने संविधान के निर्माता, विशेष रूप से डॉ. बी.आर. आंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की और उन सदस्यों को भी याद किया जिन्होंने संविधान सभा में भूमिका निभाई। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम अपने संविधान में निहित लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को फिर से पुष्टि करते हैं।”

    संविधान दिवस का महत्व

    संविधान को अंगीकृत करने के उपलक्ष्य में हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। यह दिन 26 नवंबर, 1949 को संविधान के अंगीकरण को याद करता है, जब संविधान के कुछ प्रावधान तुरंत लागू हुए और शेष प्रावधान 26 जनवरी 1950 को भारत के गणतंत्र बनने पर लागू हुए।

  • घाटशिला में भाजपा नेताओं पर उप मुखिया के पति के साथ मारपीट का आरोप

    घाटशिला में भाजपा नेताओं पर उप मुखिया के पति के साथ मारपीट का आरोप

    घाटशिला उपचुनाव में जेएमएम की विजय

    घाटशिला उपचुनाव के परिणाम घोषित हो गए हैं, जिसमें झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के सोमेश सोरेन ने चौंकाने वाली जीत हासिल की है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन को 38,000 से अधिक मतों से हराया। यह जीत 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी द्वारा प्राप्त मतों से कहीं अधिक है।

    बीजेपी नेताओं पर आरोप

    बीजेपी की हार के बाद एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें भाजपा नेताओं पर उपमुखिया के पति की पिटाई करने के आरोप लगे हैं। यह विवाद चुनावी रंजिश का परिणाम बताया जा रहा है। घटनाक्रम के तहत, होमगार्ड कमांडर कैलाश प्रसाद यादव को अवैध वसूली के आरोप में बर्खास्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, विभाग के चार अधिकारियों पर आठ लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप भी लगाया गया है।

    तारापद महतो पर हमला

    उलदा पंचायत की उप-मुखिया आशा रानी महतो के पति तारापद महतो पर एक विवाह समारोह के दौरान जानलेवा हमला किया गया। हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें घाटशिला अनुमंडल अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल से लौटने के बाद उनकी तबियत और बिगड़ गई।

    कानूनी कार्रवाई

    जांच के दौरान पता चला कि तारापद महतो पर आरोप है कि उन्होंने घाटशिला उपचुनाव में बीजेपी से धन लेकर जेएलकेएम के लिए कार्य किया। इस संदर्भ में, जेएलकेएम के पूर्व प्रत्याशी रामदास मुर्मू ने गालूडीह थाना में FIR दर्ज कराई है। इसमें बीजेपी के जिला महामंत्री हराधन सिंह सहित अन्य के खिलाफ नामजद प्राथमिकी शामिल है।

  • बिहार में नई सरकार के गठन के बाद NDA को उपेंद्र कुशवाहा के कई नेताओं का इस्तीफा

    बिहार में नई सरकार के गठन के बाद NDA को उपेंद्र कुशवाहा के कई नेताओं का इस्तीफा

    बिहार में आरएलएम के प्रमुख नेताओं का अचानक इस्तीफा

    नई दिल्ली: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद एनडीए के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) में अचानक बदलाव देखने को मिला है। पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र नाथ सहित कई प्रमुख नेताओं ने इस्तीफे दे दिए हैं, जो राजनीतिक हलचल का कारण बन रहा है।

    कई महत्वपूर्ण नेताओं ने दिया इस्तीफा

    पार्टी में बढ़ती नाराजगी के संकेत

    सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को बिना चुनाव लाए मंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी में अंदरखाते नाराजगी बढ़ने लगी थी। इस निर्णय को लेकर उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी लगाया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस फैसले से असंतुष्ट रहे हैं।

    जितेंद्र नाथ का इस्तीफा पत्र

    जितेंद्र नाथ ने अपने इस्तीफे के पत्र में लिखा है कि वे लगभग 9 वर्षों से उपेंद्र कुशवाहा के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन अब वे कई राजनीतिक और सांगठनिक निर्णयों से असहमत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान स्थिति में उनके लिए पार्टी के साथ काम करना संभव नहीं है और इसलिए उन्होंने त्यागपत्र देना उचित समझा।

  • क्या AAP के प्रमुख नेताओं ने MCD उपचुनावों में भाजपा को आसानी दी है

    क्या AAP के प्रमुख नेताओं ने MCD उपचुनावों में भाजपा को आसानी दी है

    दिल्ली नगर निगम के 12 वार्डों में उपचुनाव: त्रिकोणीय लड़ाई

    नई दिल्ली: दिल्ली के नगर निगम के 12 वार्ड क्षेत्रों में उपचुनाव हो रहे हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच टकराव हो रहा है। 27 साल बाद सत्ता में लौटी भाजपा ने इस उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकी है, और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद प्रचार में जुटी हुई हैं।

    आप के नेतृत्व का ध्यान केंद्रित

    वहीं, आम आदमी पार्टी के बड़े नेता इस उपचुनाव से दूरी बनाए हुए हैं। पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, आतिशी, संजय सिंह और राघव चड्ढा अभी तक चुनावी प्रचार में नजर नहीं आए हैं। प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और उनकी टीम चुनाव का मोर्चा संभाल रही है, परंतु शीर्ष नेतृत्व की गैर-मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    वार्डों की स्थिति

    उपचुनाव होने वाले 12 वार्डों में से 9 सीटें भाजपा के पास थीं, जबकि 3 सीटें आम आदमी पार्टी ने 2022 के MCD चुनाव में जीती थीं। ये सीटें अब खाली हो गई हैं क्योंकि तीन पार्षद 2025 के विधानसभा चुनाव में विधायक बन चुके हैं।

    प्रचार का स्वरूप

    चांदनी महल, चांदनी चौक, और दिचाऊं कलां जैसे वार्डों में प्रचार का दायरा स्थानीय नेताओं के पास है, जबकि पार्टी के बड़े नेता मैदान में नहीं हैं। उपचुनाव को लेकर आप की रणनीति पर पत्रकार नवनीत शरण का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व के इस दूरी बनाए रखने से पार्टी को नुकसान हो सकता है।

    बड़े नेताओं की अनुपस्थिति

    अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जैसे नेता चुनाव प्रचार में न भाग लेकर पंजाब पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। जबकि संजय सिंह उत्तर प्रदेश में ‘रोजगार दो, सामाजिक न्याय दो’ यात्रा निकाल रहे हैं।

    सामाजिक मीडिया पर सक्रियता का अभाव

    दिल्ली में हो रहे उपचुनाव के संबंध में शीर्ष नेताओं की सोशल मीडिया पर भी कोई सक्रियता नहीं दिखाई दे रही है। पार्टी के अन्य नेता स्थानीय स्तर पर प्रचार कर रहे हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व का समर्थन न होना आश्चर्यजनक है।

    भविष्य की चुनौती

    दिल्ली की राजनीति पर नज़र रखने वाले पत्रकार आनंद राणा के अनुसार, 27 साल बाद आई भाजपा सरकार की परीक्षा है। अगर आम आदमी पार्टी उपचुनाव न जीत पाई, तो इसका सीधा असर केजरीवाल की राजनीति पर पड़ेगा।

    केजरीवाल की पंजाब पर ध्यान

    अंततः यह स्पष्ट होता है कि ऐतिहासिक महत्व के इस उपचुनाव में भाजपा और आप दोनों के लिए मौका और चुनौती है। जबकि पार्टी नेतृत्व का ध्यान पंजाब पर केंद्रित है, दिल्ली में उपचुनाव के नतीजे उनके राजनीतिक भविष्य को तय कर सकते हैं।

  • पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर उमा भारती की प्रतिक्रिया

    पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर उमा भारती की प्रतिक्रिया

    उमा भारती की चेतावनी: ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण पर गंभीर प्रतिक्रिया

    भोपाल। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक विधायक द्वारा ‘बाबरी मस्जिद’ के निर्माण के बारे में दिए गए बयान पर मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि बाबर के नाम पर कोई इमारत बनाई गई, तो उसका परिणाम 6 दिसंबर 1992 जैसा होगा, जब अयोध्या में विवादास्पद बाबरी मस्जिद को गिराया गया था।

    टीएमसी विधायक का विवादास्पद बयान

    टीएमसी विधायक हुमायूँ कबीर ने एक कार्यक्रम में यह दावा किया था कि 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का निर्माण किया जाएगा। उनके अनुसार इस निर्माण में अल्पसंख्यक समुदाय के कई धर्म गुरू भी शामिल होंगे।

    उमा भारती की सख्त सलाह

    उमा भारती ने इस संदर्भ में कहा, “खुदा, इबादत, इस्लाम के नाम पर मस्जिद बनने पर हम सम्मान करेंगे, लेकिन बाबर के नाम से बनी इमारत का वही हाल होगा जो 6 दिसंबर को अयोध्या में हुआ था। ईंटें भी गायब हो गई थीं।” उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई करने की सलाह दी है, यह कहते हुए कि यह बंगाल और देश की अस्मिता और सद्भाव के लिए जरूरी है।

    ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

    6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को कारसेवकों द्वारा ध्वस्त किया गया था, जिन्होंने दावा किया था कि उस स्थान पर राम मंदिर था। इस विध्वंस ने देशभर में हिंसा को जन्म दिया था, जिसमें लगभग 2,000 लोग मारे गए थे। इस मामले में तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी सहित 35 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिन्हें बाद में सीबीआई की अदालत ने बरी कर दिया था।

  • कर्नाटका के मुख्यमंत्री पद पर असंतोष, विधायक दिल्ली पहुंचे शिवकुमार का समर्थन करने

    कर्नाटका के मुख्यमंत्री पद पर असंतोष, विधायक दिल्ली पहुंचे शिवकुमार का समर्थन करने

    कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद पर कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला

    नई दिल्ली। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस पार्टी में चल रही हलचल अब नई दिल्ली पहुंच चुकी है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में विधायकों का एक और समूह नई दिल्ली के लिए रवाना हो गया है। सूत्रों के अनुसार, इस दल में शामिल छह विधायक रविवार रात को दिल्ली पहुंच गए हैं। यह उम्मीद जताई जा रही है कि और विधायक भी जल्द दिल्ली में पहुंच सकते हैं ताकि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का मुद्दा पार्टी के उच्च नेताओं के सामने रखा जा सके।

    कांग्रेस सरकार का आधा कार्यकाल पूरा

    कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा समय पूरा किया। इसी बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच ‘पावर शेयरिंग’ समझौते की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इस स्थिति ने सवाल उठाए हैं कि क्या आने वाले ढाई सालों में डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद सौंपा जाएगा। नई दिल्ली पहुंचे विधायकों में एचसी बालकृष्णा, केएम उदय, नयना मोतम्मा, इकबाल हुसैन, शरथ बचेगौड़ और शिवगंगा बसवराज शामिल हैं।

    कांग्रेस नेतृत्व की स्थिति

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस समय बंगलूरू में हैं, लेकिन जल्द ही दिल्ली जाने का प्लान बना रहे हैं। वहीं, राहुल गांधी भी विदेश से लौटने की तैयारी कर रहे हैं। पिछले हफ्ते, लगभग दस विधायक शिवकुमार के समर्थन में दिल्ली गए थे और खरगे से मुलाकात की थी, हालांकि शिवकुमार ने इसे लेकर कोई जानकारी नहीं दी थी।

    बैठक और पार्टी में उठते सवाल

    दिल्ली में शिवकुमार के समर्थक विधायकों की गतिविधियों के बीच, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खरगे के साथ बंगलूरू में एक महत्वपूर्ण बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल के पक्ष में हैं, जबकि शिवकुमार पार्टी के भीतर निर्णय की मांग कर रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, यदि कांग्रेस हाई कमांड कैबिनेट फेरबदल को मंजूरी देती है, तो इससे सिद्धारमैया को पूरे कार्यकाल का मौका मिलेगा और शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के संभावनाओं में कमी आ सकती है।