श्रेणी: Politics

  • सपा सांसद आवेदेश प्रसाद ने राम मंदिर ध्वजरोहण पर कहा: “अगर बुलाया गया, तो काम छोड़कर नंगे पांव जाऊंगा”

    सपा सांसद आवेदेश प्रसाद ने राम मंदिर ध्वजरोहण पर कहा: “अगर बुलाया गया, तो काम छोड़कर नंगे पांव जाऊंगा”

    अयोध्या में भव्य राम मंदिर ध्वजारोहण की तैयारियाँ

    नई दिल्ली। रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक समारोह का साक्षी बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को अयोध्या में आकर राम मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराकर ध्वजारोहण समारोह का उद्घाटन करेंगे। इस समारोह के साथ-साथ अयोध्या में राजनीतिक चर्चाएँ भी तेज हो गई हैं।

    सपा सांसद की प्रतिक्रिया

    दो दिन पूर्व, सत्य सनातन धर्म प्रचारक दिवाकराचार्य महाराज ने समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद पर सार्वजनिक कार्यक्रमों में अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में, सांसद ने कहा कि उन्हें अभी तक ध्वजारोहण समारोह का न्योता प्राप्त नहीं हुआ है। यदि ऐसा न्योता मिलता है, तो वे नंगे पैर ही वहाँ पहुँचेंगे।

    धार्मिक मान्यता का उल्लेख

    एक निजी चैनल से बातचीत में, अवधेश प्रसाद ने कहा कि तुलसीदास जी के अनुसार, राम राज की मान्यताओं को भाजपा सरकार ने बिगाड़ दिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि संतों की परंपरा और धार्मिक कार्यक्रमों में उनके विचार को महत्व दिया जाना चाहिए।

    भाजपा के प्रतिक्रिया

    उधर, इटावा से सपा सांसद जितेंद्र दोहरे ने कार्यक्रम को राजनीति से अलग रखने की बात की और सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री का राम मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में जाना किस रूप में उचित है। भाजपा के प्रवक्ता एसएन सिंह ने इन आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सपा नेताओं को अयोध्या की भव्यता से समस्या है और वे बेबुनियाद ब्यान दे रहे हैं।

    तैयारियों पर स्थानीय सांसद की नजर

    अवधेश प्रसाद ने यह भी दावा किया है कि अयोध्या का नागरिक और स्थानीय सांसद होने के नाते वे कार्यक्रम की तैयारियों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश और देश भर के सुरक्षा कर्मी तैनात हैं। अपने कर्तव्यों को निभाने के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी उन्होंने स्वीकार किया।

    धार्मिक आस्था की बात

    सांसद ने कहा कि वे बहुत खुश हैं और उन्हें प्रभु श्रीराम, हनुमान जी, मां सीता और सरयू मां की कृपा का अनुभव होता है। अपने छात्र जीवन के दौरान उन्होंने सीता रसोई का दर्शन भी किया था, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा है।

  • ट्रंप-ममदानी बैठक पर शशि थरूर ने कांग्रेस को दी सलाह

    ट्रंप-ममदानी बैठक पर शशि थरूर ने कांग्रेस को दी सलाह

    शशि थरूर की अमेरिका में ट्रंप और ममदानी की मुलाकात पर प्रतिक्रिया

    नई दिल्‍ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ज़ोहरान ममदानी के बीच हुई बैठक पर अपनी टिप्पणी दी। चुनावों से पहले दोनों नेताओं के बीच जो बयानबाजी चल रही थी, उसके विपरीत, शुक्रवार को व्हाइट हाउस में उनकी मुलाकात बहुत ही सौहार्दपूर्ण रही। थरूर ने एक वीडियो क्लिप पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोकतंत्र को इसी तरह से काम करना चाहिए और वे भारत में भी ऐसा वातावरण देखना चाहते हैं।

    थरूर ने विचारों के लिए चुनावी उत्साह पर जोर दिया

    थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि चुनावों में अपने विचारों के लिए सभी को उत्साह से लड़ना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव खत्म होने के बाद लोगों को मिलकर राष्ट्र के हित में काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी माना कि दोनों नेताओं ने जनता की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाई है और इस तरह के समीकरण बनाने की कोशिश वे भारत में भी कर रहे हैं।

    ट्रंप का मेयर ममदानी पर संतोषजनक बयान

    ट्रंप ने मेयर ममदानी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी मुलाकात अत्यंत उत्पादक रही और न्यूयॉर्क को एक सक्षम मेयर की प्राप्ति होगी। ट्रंप ने ममदानी के प्रति विश्वास जताते हुए कहा कि वे अच्छा काम करेंगे और कुछ रूढ़िवादी लोगों को आश्चर्यचकित करेंगे। एक रिपोर्टर के सवाल पर कि क्या ट्रंप फासीवादी हैं, उन्होंने मजाक में कहा कि मेयर इस पर सीधे “हां” कह सकते हैं।

    थरूर का पार्टी लाइन से हटकर बयान और प्रतिक्रिया

    शशि थरूर के ऐसे बयान उनके पार्टी में कई बार हलचल पैदा कर चुके हैं। उन्होंने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की थी, जब उन्होंने रामनाथ गोयनका व्याख्यान को आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया था। इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर कुछ आलोचनाएँ भी आई थीं। पार्टी के नेता संदीप दीक्षित ने उन्हें पाखंडी कहा, जबकि सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पीएम के भाषण में प्रशंसा के लिए कुछ भी उचित नहीं था।

  • AIMIM ने नीतीश कुमार सरकार को समर्थन देने का किया आश्वासन, लेकिन ओवैसी ने रखी यह शर्त

    AIMIM ने नीतीश कुमार सरकार को समर्थन देने का किया आश्वासन, लेकिन ओवैसी ने रखी यह शर्त

    ओवैसी का नीतीश सरकार को समर्थन, लेकिन शर्तें हैं जरूरी

    नई दिल्ली। असदुद्दीन ओवैसी, AIMIM के प्रमुख, ने बिहार में नीतीश कुमार से नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने की इच्छा जताई है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें रखी हैं। अमौर में हुई एक जनसभा में ओवैसी ने स्पष्ट किया कि बिहार के विकास का ध्यान केवल राजधानी पटना और पर्यटन स्थल राजगीर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा, “हम नीतीश कुमार की सरकार को समर्थन देने के लिए तैयार हैं, लेकिन सीमांचल क्षेत्र को न्याय मिलना चाहिए। कब तक सब कुछ पटना और राजगीर के इर्द-गिर्द ही केंद्रित रहेगा?” उन्होंने सीमांचल में नदी कटाव, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर मुद्दों को उठाया।

    सीमांचल क्षेत्र का विकास आवश्यक

    बिहार के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित सीमांचल क्षेत्र में मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा निवास करता है। यह क्षेत्र राज्य के सबसे पिछड़े इलाकों में आता है और हर साल कोसी नदी के उफान के कारण बाढ़ की समस्या से जूझता है। लगभग 80% सीमांचल की आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। इस क्षेत्र की 24 विधानसभा सीटों में से अधिकांश NDA के पास गईं, जहां इसने 14 सीटें जीतीं। हालांकि, AIMIM ने इस बार भी 2020 की तरह 5 सीटें जीती हैं, जब चार विधायक बाद में आरजेडी में शामिल हो गए थे।

    विधायकों की जवाबदेही पर ध्यान

    ओवैसी ने जानकारी दी कि वे अपनी पार्टी के विधायकों पर कड़ी निगरानी रखेंगे और एक जिम्मेदार योजना लागू करेंगे। उन्होंने बताया, “हमारे सभी पांच विधायक हर सप्ताह दो दिन अपने क्षेत्र में कार्यालय में मौजूद रहेंगे। वे मुझे अपनी लाइव व्हाट्सएप लोकेशन के साथ फोटो भेजेंगे, जिससे यह जान सकें कि वे वास्तव में अपने क्षेत्र में हैं।” ओवैसी ने यह व्यवस्था छह महीने के अंदर लागू करने की योजना बनाई है। उन्होंने आम जनता से मिलने और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात की। “पटना समझ चुका है कि सीमांचल की जनता हमेशा उसके साथ है,” उन्होंने कहा।

  • दीपक प्रकाश, सुरक्षा जमा खोने वाले प्रत्याशी, नीतिश कुमार सरकार में मंत्री बने

    दीपक प्रकाश, सुरक्षा जमा खोने वाले प्रत्याशी, नीतिश कुमार सरकार में मंत्री बने

    बिहार की राजनीति में रोचक घटनाक्रम

    नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में इस बार सिर्फ सीटों का फेरबदल नहीं, बल्कि कई दिलचस्प कहानियां भी सामने आई हैं। नीतीश कुमार की सरकार में RLM कोटे से मंत्री बनाए गए दीपक प्रकाश के संबंध में एक अनोखा मामला प्रकाश में आया है। दीपक, जो इस चुनाव में सासाराम विधानसभा सीट पर एक निर्दलीय उम्मीदवार के काउंटिंग एजेंट बने थे, उस उम्मीदवार की जमानत भी जब्त हो गई।

    निर्दलीय उम्मीदवार का दुर्भाग्य

    दीपक प्रकाश ने सासाराम विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले रामायण पासवान के लिए काउंटिंग एजेंट का कार्य किया था। चुनाव परिणाम घोषित होने पर रामायण पासवान को मात्र 327 वोट प्राप्त हुए, जिसके चलते उनकी जमानत जब्त हुई। इसके बावजूद, दीपक की मां स्नेहलता ने इसी सीट से राष्ट्रीय लोकमत के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बनने में सफलता हासिल की।

    पद ग्रहण के बाद की भूमिका

    हाल ही में आयोजित नीतीश सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में दीपक प्रकाश ने पंचायती राज मंत्री के रूप में शपथ ली। दिलचस्प बात यह है कि जहां उनकी मां स्नेहलता कुशवाहा इस सीट से चुनावी मैदान में थीं, वहीं दीपक निर्दलीय उम्मीदवार रामायण पासवान के काउंटिंग एजेंट के रूप में कार्यरत थे।

    चुनाव आयोग की पुष्टि

    चुनाव आयोग के रिकॉर्ड बताते हैं कि दीपक प्रकाश की भूमिका एक निर्दलीय प्रत्याशी के अभिकर्ता के रूप में थी। चुनाव आयोग द्वारा जारी पहचान पत्र में उनके इस कार्य की पुष्टि की गई है। रामायण पासवान के नाकाम होने के बावजूद, दीपक प्रकाश मंत्री बनने में सफल रहे।

    राजनीतिक चर्चा का विषय

    इस मामले के बारे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। दीपक ने हाल ही में मंत्रालय में अपने पदभार को संभाला है। बिहार की राजनीति में काउंटिंग RO की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होता है।

  • कांग्रेस नेता ने मोदी से दिल्ली धमाकों पर सवाल किया, कहा शिक्षित युवा क्यों बन रहे आतंकवादी

    कांग्रेस नेता ने मोदी से दिल्ली धमाकों पर सवाल किया, कहा शिक्षित युवा क्यों बन रहे आतंकवादी

    दिल्ली में लाल किले के पास बम धमाके की जांच में नई जानकारी

    नई दिल्ली। दिल्ली में लाल किले के समीप हाल ही में हुए बम धमाके से संबंधित कुछ चिकित्सकों की संलिप्तता के बारे में जानकारी सामने आई है, जिससे कई प्रश्न उठने लगे हैं। इस घटना के चलते अल फलाह विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द कर दी गई है। इस संदर्भ में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने उन चिकित्सकों का बचाव करते हुए प्रधानमंत्री मोदी से कई सवाल किए हैं। उन्होंने कहा कि ‘वो पढ़ा-लिखा युवक जिसने एमबीबीएस और एमडी की डिग्री ली है, वह आतंकवाद का मार्ग क्यों चुन रहा है? उसे अपने परिवार के साथ आराम से जीने का अवसर है।’

    राशिद अल्वी का सवाल

    राशिद अल्वी ने स्पष्ट किया कि किन परिस्थितियों ने डॉक्टरों को इस रास्ते पर चलने पर मजबूर किया? उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करें।

    जांच प्रक्रिया और एसआईटी का गठन

    दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार विस्फोट और ‘सफेदपोश’ आतंकवादी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के संबंध में विभिन्न एजेंसियां जांच कर रही हैं। इस मामले में फरीदाबाद पुलिस ने अल फलाह विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। कई चिकित्सकों को गिरफ्तार किया गया है जो इस घटना से जुड़े हुए हैं।

    पुलिस की हिरासत में संदिग्ध

    जांच एजेंसियों ने एक कैब चालक, एक धर्मगुरु और एक उर्दू शिक्षक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। एसआईटी में दो सहायक पुलिस आयुक्त, एक निरीक्षक और दो उप निरीक्षक शामिल हैं, जो विश्वविद्यालय की गतिविधियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों ने पुष्टि की है कि यह एसआईटी तब गठित की गई जब पुलिस महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने मंगलवार को अल फलाह विश्वविद्यालय का दौरा किया था।

    आतंकवादी संगठन के संबंध

    जांच के दायरे के विस्तार के साथ, दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा को इंडियन मुजाहिदीन के भगोड़े आतंकवादी मिर्जा शादाब बेग से जुड़ी नई जानकारी मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, बेग 2007 में अल फलाह विश्वविद्यालय का छात्र था, जब यह कॉलेज के तौर पर कार्यरत था। 2014 में इसे विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया था।

  • कुख्यात नक्सली एनकाउंटर पर दिग्विजय के सवालों से MP में राजनीतिक हलचल

    कुख्यात नक्सली एनकाउंटर पर दिग्विजय के सवालों से MP में राजनीतिक हलचल

    छत्तीसगढ़ में नक्सली माड़वी हिड़मा की मौत पर राजनीतिक हलचल

    भोपाल। छत्तीसगढ़ के इनामी नक्सली माड़वी हिड़मा की मौत के बाद मध्य प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस एनकाउंटर की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाते हुए माहौल को गरम कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बस्तर क्षेत्र की सामाजिक स्थिति को लेकर कई सवाल किए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

    दिग्विजय सिंह के सवालों से बढ़ी सियासी गर्मी

    दिग्विजय सिंह के बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। उनके द्वारा उठाए गए सवालों से यह स्पष्ट होता है कि नक्सली समस्या केवल सुरक्षा के मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं पर भी गहरी नजर रखी जानी चाहिए। हिड़मा की मौत के तुरंत बाद ही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं, जो इस चर्चा को और भी उकसा रही हैं।

    मध्य प्रदेश की राजनीति पर असर

    हिड़मा की मृत्यु के मामले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में उथल-पुथल मचा दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस एनकाउंटर के बाद छापे और सुरक्षा अभियानों में बदलाव का संभावना है। राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते मतभेदों ने प्रदर्शित किया है कि इस मामले को लेकर संवेदनशीलता काफी अधिक है। इसके साथ ही, इससे भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी असर पड़ सकता है।

  • नीतीश सरकार में 18 मंत्रियों के बीच विभाग वितरण, सम्राट चौधरी को गृह विभाग का जिम्मा मिला

    नीतीश सरकार में 18 मंत्रियों के बीच विभाग वितरण, सम्राट चौधरी को गृह विभाग का जिम्मा मिला

    बिहार में मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा

    बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में मंत्रियों के बीच विभागों का आवंटन किया गया है। इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास गृह विभाग नहीं है, जो पहली बार देखा जा रहा है। गृह विभाग अब बीजेपी के हिस्से में गया है, जिसके तहत उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को गृह मंत्रालय सौंपा गया है। विजय सिन्हा को राजस्व एवं भूमि विकास का कार्यभार दिया गया है। सम्राट चौधरी अब नीतीश सरकार में कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाएंगे। यह दो दशकों में पहली बार है जब नीतीश कुमार ने गृह विभाग अपने पास नहीं रखा।

    नीतीश कैबिनेट में राजनीतिक विरासत का असर

    गुरुवार को नीतीश कैबिनेट में 24 मंत्रियों ने शपथ ली, लेकिन अभी तक केवल 18 मंत्रियों को विभागों का आवंटन हुआ है। बाकी छह मंत्रियों के विभागों का बंटवारा अभी बाकी है, जिससे राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव को कृषि विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा गया है।

    नीतीश और बीजेपी के मंत्रियों का विभाग बंटवारा

    भाजपा कोटे के मंत्री

    बीजेपी कोटे के निम्नलिखित मंत्रियों को विभागीय जिम्मेदारियाँ दी गई हैं:

    • सम्राट चौधरी – गृह विभाग
    • विजय कुमार सिन्हा – राजस्व एवं भूमि विभाग
    • मंगल पांडेय – स्वास्थ्य एवं विधि विभाग
    • दिलीप जायसवाल – उद्योग विभाग
    • नितिन नवीन – पथ निर्माण, नगर विकास एवं आवास विभाग
    • रामकृपाल यादव – कृषि विभाग
    • संजय टाइगर – श्रम संसाधन विभाग
    • अरुण शंकर प्रसाद – पर्यटन, कला संस्कृति एवं युवा विभाग
    • सुरेंद्र मेहता – पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग
    • नारायण प्रसाद – आपदा प्रबंधन विभाग
    • रमा निषाद – पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग
    • लखेंद्र कुमार रोशन – अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग
    • श्रेयसी सिंह – सूचना एवं खेल विभाग
    • प्रमोद कुमार (चंद्रवंशी) – सहकारिता, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग

    जेडीयू और अन्य दलों से मंत्रियों का बंटवारा

    • विजय चौधरी – [विभाग विवरण]
    • विजेंद्र प्रसाद यादव – [विभाग विवरण]
    • श्रवण कुमार – [विभाग विवरण]
    • अशोक चौधरी – [विभाग विवरण]
    • लेसी सिंह – [विभाग विवरण]
    • मदन साहनी – [विभाग विवरण]
    • मोहम्मद जमा खान – [विभाग विवरण]
    • सुनील कुमार – [विभाग विवरण]
    • संतोष कुमार सुमन (HAM) – लघु जल संसाधन विभाग
    • संजय कुमार (लोजपा) – गन्ना उद्योग विभाग
    • संजय सिंह (लोजपा) – लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग
    • दीपक प्रकाश (राष्ट्रीय लोक मोर्चा) – पंचायती राज विभाग
  • सोमेश सोरेन आज शपथ लेंगे, घाटशिला उपचुनाव में मिली थी बड़ी जीत

    सोमेश सोरेन आज शपथ लेंगे, घाटशिला उपचुनाव में मिली थी बड़ी जीत

    घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में सोमेश सोरेन की शपथ ग्रहण

    रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक सोमेश चंद्र सोरेन शुक्रवार को घाटशिला विधानसभा उपचुनाव में सफलता प्राप्त करने के बाद शपथ लेने वाले हैं। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो शपथ ग्रहण समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और अन्य मंत्री भी शामिल होंगे, साथ ही कई विधायक भी समारोह में उपस्थित रहेंगे।

    उपचुनाव का परिणाम और राजनीतिक विरासत

    पूर्व मंत्री रामदास सोरेन के निधन के बाद हुए इस उपचुनाव में, सोमेश चंद्र सोरेन ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल सोरेन को 38,000 से अधिक मतों के अंतर से हराकर अपने पिता का रिकॉर्ड तोड़ा। 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में रामदास सोरेन ने बीजेपी के बाबूलाल सोरेन को 22,000 से ज्यादा मतों से हराया था। लेकिन 11 नवंबर 2025 को हुए उपचुनाव में सोमेश सोरेन ने अपने पिता का रिकॉर्ड पीछे छोड़ते हुए बाबूलाल को हराया। इस उपचुनाव में जेएमएम उम्मीदवार सोमेश सोरेन और जेएलकेएम के रामदास मुर्मू के मतों में वृद्धि हुई, जबकि बीजेपी के उम्मीदवार बाबूलाल सोरेन के मतों में गिरावट आई। बाबूलाल सोरेन की हार चंपाई सोरेन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

  • नीतीश कुमार केवल 7 दिन के लिए बने थे मुख्यमंत्री, जानें उनके मुख्यमंत्री बनने की तारीखें

    नीतीश कुमार केवल 7 दिन के लिए बने थे मुख्यमंत्री, जानें उनके मुख्यमंत्री बनने की तारीखें

    नीतीश कुमार ने फिर से लिया मुख्यमंत्री पद की शपथ

    नई दिल्ली. बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों का प्रमुख चेहरा नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बने हैं। विधानसभा चुनावों में हासिल की गई ऐतिहासिक जीत के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने नीतीश को इस पद के लिए चुना है।

    एनडीए विधायकों की बैठक का निर्णय

    मंगलवार को एनडीए विधायकों की एक बैठक में यह निर्णय लिया गया। बिहार की 243 सीटों में से 202 सीटें जीतने वाले इस गठबंधन में भारतीय जनता पार्टी के 89 और जनता दल (यूनाइटेड) के 85 विधायक शामिल हैं। इस गठबंधन में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के 19, हिंदुस्तान आवामी मोर्चा (सेक्युलर) के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक भी शामिल हैं।

    नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर

    बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश का यह दसवां कार्यकाल है। उन्होंने पहली बार 2000 में शपथ ली थी, जब वे समता पार्टी का हिस्सा थे। उनका पहला कार्यकाल मात्र सात दिनों तक चला था। इसके बाद, 2005 में अपनी पार्टी जद (यू) के बीजेपी के साथ गठबंधन का बना कर उन्होंने पूर्ण बहुमत हासिल किया।

    गठबंधन और राजनीतिक परिवर्तन

    नीतीश ने 2010 में भी अपने गठबंधन को मजबूती से बनाए रखा। 2013 में नरेंद्र मोदी को पीएम पद का उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ लिया, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ मिलकर सत्ता में बने रहे। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया।

    महागठबंधन और बीजेपी के साथ नाता

    2015 में नीतीश ने फिर से महागठबंधन बनाया और चुनाव जीतने के बाद मुख्यमंत्री बने। 2017 में उन्होंने महागठबंधन को तोड़ा और बीजेपी के साथ मिलकर दुबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 2020 में एनडीए ने साधारण बहुमत हासिल किया, लेकिन जद (यू) की सीटें घटकर 43 रह गईं। इसके बावजूद नीतीश को मुख्यमंत्री बनाए रखा गया।

    चुनाव विश्लेषण और भविष्य की चुनौती

    2022 में नीतीश ने फिर से सरकार भंग कर दी और आरजेडी तथा कांग्रेस के साथ गठबंधन कर लिया। लेकिन यह सरकार महज़ 17 महीने तक चली। आलोचकों ने नीतीश कुमार को 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कमजोर शक्ति करार दिया था। हालांकि, चुनाव विश्लेषकों को आश्चर्य हुआ जब नीतीश की पार्टी ने 2020 में जीती गई 43 सीटों की तुलना में दो गुनी, यानी 85 सीटें हासिल कीं।

  • सिल्ली विधायक अमित महतो की शिकायत पर JMM कार्यकर्ताओं की विनोद पांडे से मुलाकात

    सिल्ली विधायक अमित महतो की शिकायत पर JMM कार्यकर्ताओं की विनोद पांडे से मुलाकात

    सिल्ली विधानसभा में झामुमो कार्यकर्ताओं की शिकायत

    रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से जुड़े कार्यकर्ताओं की एक बड़ी संख्या सिल्ली विधानसभा के विधायक अमित महतो की शिकायत लेकर पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे के पास पहुंची। कार्यकर्ताओं ने रांची स्थित जेएमएम कार्यालय में अपनी समस्याएं साझा कीं। उन्होंने कहा कि विधायक अमित महतो पार्टी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रहे हैं।

    BJP की फीस वृद्धि पर एतराज

    झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की फीस में वृद्धि के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी ने इससे संबंधित आंदोलन की चेतावनी भी दी है। उनके अनुसार, इस मामले में कई अन्य कार्यकर्ताओं ने भी अपनी चिंताओं को उठाया।

    सिल्ली के कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान

    विनोद पांडे ने बंद हॉल में कार्यकर्ताओं से उनकी समस्याएं सुनीं। उनकी शिकायतों में पार्टी और प्रशासनिक स्तर पर अनसुनी जाने की बातें शामिल थीं। सिल्ली क्षेत्र के कई नेताओं ने विभागों में भ्रष्टाचार और अधिकारियों की मनमानी के विषय में भी अपनी चिंताएं व्यक्त की।

    मुख्यमंत्री का जिलों का दौरा

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 21 नवंबर से जिलों के दौरे पर निकलने वाले हैं। इस दौरान पलामू के लेस्लीगंज में ‘आपकी योजना, आपकी सरकार’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

    विनोद पांडे का आश्वासन

    सिल्ली क्षेत्र से आए कार्यकर्ताओं की समस्याओं को सुनने के बाद विनोद पांडे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने पंचायत और प्रखंड स्तर के नेताओं की शिकायतें सुनी हैं। उनका आश्वासन है कि इस मुद्दे का समाधान जल्द ही निकाला जाएगा।

    अमित महतो का विधानसभा क्षेत्र

    अमित महतो सिल्ली विधानसभा के मौजूदा विधायक हैं, जिन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री और आजसू प्रमुख सुदेश महतो को हराकर विजय प्राप्त की थी। पार्टी के भीतर उनकी बढ़ती नाराजगी को गंभीरता से लिया गया है, और केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे इस विवाद को समाप्त करने में जुटे हैं।

  • रीना बौरासी सेतिया को महिला कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

    रीना बौरासी सेतिया को महिला कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

    रीना बौरासी सेतिया को मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया

    इंदौर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आज एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए रीना बौरासी सेतिया को मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस नियुक्ति पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी एवं प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उन्हें बधाई दी।

    नियुक्ति के पीछे का उद्देश्य

    रीना बौरासी सेतिया की नियुक्ति से कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश में महिला संगठन को सशक्त बनाने के लिए एक नई दिशा में कदम बढ़ा रही है। पार्टी नेतृत्व ने उनकी क्षमता और अनुभव को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया है, जिससे महिला कार्यकर्ताओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके।

    भविष्य की चुनौतियाँ

    रीना बौरासी सेतिया के सामने कई चुनौतियाँ हैं, जिनमें महिला सशक्तीकरण, सामाजिक न्याय और पार्टी में महिलाओं की आवाज को प्रमुखता देना शामिल है। उनकी जिम्मेदारी होगी कि वे इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करें और संगठित तरीके से कार्य करें।

  • चुनाव आयोग के आधीन भाजपा; खरगे ने वोट चोरी और SIR पर अगली चुनौती पेश की

    चुनाव आयोग के आधीन भाजपा; खरगे ने वोट चोरी और SIR पर अगली चुनौती पेश की

    कांग्रेस का चुनाव आयोग पर हमला

    नई दिल्ली में, मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनाव आयोग की दुर्भावना के रूप में बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण देशभर में असंतोष फैल गया है। कांग्रेस ने इसका संज्ञान लेते हुए एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई है।

    दिल्ली में विशाल रैली की तैयारी

    कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाने के लिए दिसंबर के पहले सप्ताह में दिल्ली में एक विशाल रैली करने का निर्णय लिया है। इस रैली में पार्टी का मुख्य ध्यान चुनाव आयोग के कार्यों के खिलाफ आवाज उठाना होगा, जिसे वे मौजूदा समय में अनैतिक मानते हैं।

    मतदाता अधिकारों की सुरक्षा

    कांग्रेस ने दावा किया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के इस तरीके से नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। पार्टी का तर्क है कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र को कमजोर करने वाली है और इसे तुरंत रोकना आवश्यक है।

  • नीतीश कुमार NDA विधायक दल के नेता बनेंगे, विभागों का आवंटन होगा

    नीतीश कुमार NDA विधायक दल के नेता बनेंगे, विभागों का आवंटन होगा

    नीतीश कुमार की 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की तैयारी

    पटना। नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के रूप में 10वीं बार अपने शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को शुरू करने की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। बुधवार को जदयू विधायक दल के नेता के रूप में उनका चुनाव होगा। उसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में राजग विधायक दल के नेता का चुनाव भी किया जाएगा। मंगलवार को जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह की गृह मंत्री अमित शाह के साथ तीन घंटे तक चली बैठक में मंत्रालयों के बंटवारे पर सहमति बन गई है।

    भाजपा का विधानसभा अध्यक्ष पद पर कायम होना

    बिहार विधानसभा का अध्यक्ष का पद भाजपा के पास बना रहेगा, जिसमें प्रेम कुमार के नाम पर चर्चा हो रही है। नीतीश कुमार का चुनाव तय करने के लिए बुलाए जाने वाली राजग विधायक दल की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे। शपथ ग्रहण समारोह बृहस्पतिवार दोपहर को गांधी मैदान में आयोजित होगा। इस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, राजग के सहयोगी दलों के नेता, राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता उपस्थित रहेंगे।

    शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों का निरीक्षण

    नीतीश कुमार ने राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों का जायजा लिया। 20 नवंबर को होने वाला यह समारोह नई सरकार के गठन और एनडीए की मज़बूत स्थिति के चलते विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री ने मंच निर्माण, वीवीआईपी बैठने की व्यवस्था, सुरक्षा के प्रबंध, अतिथियों के मार्ग और भीड़ प्रबंधन की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

    मंत्रिमंडल में बराबर भागीदारी की योजना

    जदयू के सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में भाजपा और जदयू को समान भागीदारी दी जाएगी। प्रत्येक दल को सम्भवतः 14-14 सीटें मिलेंगी, जबकि लोजपा को तीन और एलजेपीआर तथा आरएलएम को एक-एक सीट मिलेगी। भाजपा सरकार में पहले की तरह दो डिप्टी सीएम रहेंगे और मंत्रिमंडल में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक होने की संभावना है।

    केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति

    भाजपा संसदीय बोर्ड ने विधायक दल के नेता के चुनाव में मदद के लिए यूपी सरकार के डिप्टी सीएम केशव मौर्य को केंद्रीय पर्यवेक्षक बनाया है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को सह पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी दी गई है।

  • लालू यादव की बेटी राजनीति में सक्रिय हैं या नहीं?

    लालू यादव की बेटी राजनीति में सक्रिय हैं या नहीं?

    लालू यादव परिवार में चल रहा संघर्ष

    बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद से लालू यादव के परिवार में अंतर्कलह तेज हो गई है। उनकी बेटी रोहिणी आचार्य, जो किडनी डोनेटर रह चुकी हैं, ने परिवार का साथ छोड़ दिया है। यह स्थिति तब बनी जब उन्होंने अपने जैसी बेटियों की मन्नत मांगकर परिवार के विवादों को सार्वजनिक कर दिया। इसी बीच, उनके बड़े बेटे तेज प्रताप भी पहले ही नाराजगी जता चुके हैं और एक अलग दल बना चुके हैं। ताजा खबरों के अनुसार, लालू यादव की तीन बेटियों ने भी ससुराल का रुख किया है। यह परिवार के मतभेदों से कहीं ज्यादा सत्ता के लिए चल रहे संघर्ष को दर्शाता है।

    मीसा भारती और उनके पति शैलेष

    लालू यादव की सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती, जो 49 वर्ष की हैं, वर्तमान में पाटलिपुत्र लोकसभा से सांसद हैं। उन्होंने एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है और राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। परिवार में उनकी स्थिति मजबूत है, लेकिन हाल के विवादों में वह तेजस्वी यादव से असहज महसूस कर रही हैं। उनके पति शैलेष कुमार एक कंप्यूटर इंजीनियर हैं, जो आमतौर पर चर्चा से दूर रहते हैं।

    रोहिणी आचार्य: किडनी डोनेट करने वालीं

    रोहिणी आचार्य भी एमबीबीएस की डिग्रीधारी हैं और वर्तमान में सिंगापुर में निवास करती हैं। उनकी शादी समरेश सिंह यादव से हुई है। राजनीति में उनकी भागीदारी रही है, लेकिन लोकसभा चुनाव में राजीव प्रताप रूडी के खिलाफ हार गईं। हालिया बिहार चुनाव के परिणामों के बाद, उन्होंने परिवार और राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा की है।

    चंदा यादव और उनके पति

    लालू की तीसरी बेटी चंदा यादव राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं रखतीं। उनके पति विक्रम सिंह एक पायलट हैं, जो राजनीति से बहुत दूर हैं। परिवार के विवादों में उनका नाम कम ही आता है।

    रागिनी यादव और उनके पति

    रागिनी यादव का बिहार की राजनीति से कोई संबंध नहीं है, लेकिन उनके पति राहुल यादव समाजवादी पार्टी के नेता हैं। उन्होंने सिकंद्राबाद से चुनाव भी लड़ा है। उनके पिता जितेंद्र यादव सपा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन इस परिवार को जन प्रतिनिधित्व का अवसर प्राप्त नहीं हुआ।

    हेमा यादव: राजनीति से दूर

    लालू यादव की पांचवीं बेटी हेमा यादव बीटेक कर चुकी हैं और चर्चाओं से दूर रहती हैं। उनके पति विनीत यादव भी राजनीतिक गतिविधियों से अज्ञात हैं।

    अनुष्का राव का राजनीतिक परिवार

    अनुष्का यादव का विवाह हरियाणा के एक राजनीतिक परिवार में हुआ है। उनके ससुर कैप्टन अजय यादव कांग्रेस के प्रतिष्ठित नेता रहे हैं और उनके पति चिरंजीव राव की भी राजनीति में रुचि है। लेकिन यह परिवार बिहार में लालू परिवार के आंतरिक मामलों को लेकर दूर रहता है।

    राजलक्ष्मी यादव और मुलायम परिवार

    लालू यादव की सबसे छोटी बेटी राजलक्ष्मी का विवाह मुलायम सिंह यादव के पोते तेज प्रताप यादव से हुआ है। तेज प्रताप अब मैनपुरी की करहल विधानसभा से विधायक हैं। यह संबंध यूपी के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से जुड़ा हुआ है।

  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल को दिया इस्तीफा, 19 को होगी विधानसभा भंग

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल को दिया इस्तीफा, 19 को होगी विधानसभा भंग

    नीतीश कुमार का महत्वपूर्ण दिन: विधानसभा भंग और नई सरकार का गठन

    पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए आज एक महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपनी पहली कैबिनेट बैठक में 17वीं विधानसभा को भंग करने की सिफारिश की। यह बैठक इस सरकार की अंतिम कैबिनेट बैठक साबित हुई। सभी मंत्रियों ने अपने इस्तीफे दे दिए, और 19 नवंबर को मौजूदा विधानसभा भंग हो जाएगी। इसके बाद नीतीश कुमार ने राजभवन जाकर राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात की और विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव उनके सामने रखा।

    कैबिनेट बैठक की तैयारियाँ और विधायक दल की बैठक

    कैबिनेट की बैठक शुरू होने से पहले उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कुछ अन्य मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री हाउस पहुंचे। इसके बाद सभी मंत्री सचिवालय पहुँचे, जहां बैठक शुरू हुई। बैठक के दौरान सचिवालय के अंदर किसी को प्रवेश नहीं दिया गया। राजभवन के बाहर भी सुरक्षा कड़ी थी। नीतीश कुमार के राजभवन से निकलने के बाद, वह अपनी पार्टी के नेताओं के साथ विधायक दल की बैठक करेंगे, जहां जदयू के नेता उन्हें विधायक दल का नेता चुनेंगे।

    नवीनतम सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारी

    नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह गांधी मैदान में 20 नवंबर को आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित अन्य वीआईपी अतिथि शामिल होंगे। शपथ ग्रहण समारोह के लिए लगभग 5000 विशेष अतिथियों के लिए एक सेक्शन तैयार किया जा रहा है। वहीं, आम लोगों के लिए समारोह के दौरान 17 से 20 नवंबर तक प्रवेश पर पाबंदी रहेगी।

    भाजपा की विधायकों की बैठक

    भाजपा के विधायकों की बैठक मंगलवार को निर्धारित की गई है, जहां नई सरकार के गठन की तैयारियों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद, नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना होगी।

  • रोहिणी ने लालू, राबड़ी और बहनों के साथ तेजस्वी के झगड़े पर आंसू बहाए

    रोहिणी ने लालू, राबड़ी और बहनों के साथ तेजस्वी के झगड़े पर आंसू बहाए

    राजद अध्यक्ष लालू यादव के घर में भूचाल, रोहिणी आचार्य की गंभीर आरोप

    बिहार विधानसभा चुनाव में हार के बाद राजद प्रमुख लालू यादव के घर में मचा बवाल अब चर्चा का केंद्र बन गया है। उनकी बेटी, रोहिणी आचार्य, ने आरोप लगाया है कि पार्टी की हार के संबंध में संजय यादव और रमीज नेमत के नाम का उल्लेख करने पर उनके साथ अभद्रता की गई। उन्होंने कहा कि राबड़ी देवी के आवास में उन पर चप्पल फेंकी गई और गालियाँ दी गईं। इस घटनाक्रम के बाद रोहिणी ने भी राजनीति छोड़ने का संकेत देते हुए एक ट्वीट किया और फिर पटना से दिल्ली चली गईं।

    भावुक बयान में पारिवारिक सहारे का जिक्र

    दिल्ली से मुंबई जाते समय एक संवाददाता सम्मेलन में रोहिणी ने अपनी भावनाओं का इज़हार करते हुए कहा कि उस दिन उनके परिवार के सभी सदस्य, जिसमें उनके माता-पिता और बहनें शामिल थीं, रो रहे थे। उन्होंने बताया कि परिवार के इस हालात को देखकर उनका गला रुंध गया। रोहिणी ने यह भी कहा कि उनके पिता हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं, भले ही हालात कितने ही कठिन क्यों न हों।

    सोशल मीडिया पर अपमान के आरोप

    रोहिणी ने आगे कहा कि उन्हें जो बातें कहनी थीं, उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट कर दी हैं। उनका कहना था कि उन्होंने किसी भी मामले में झूठ नहीं बोला और आरोप लगाया कि उनके साथ बदसलूकी की गई। उनके अनुसार, उनके अपमान के चलते परिवार के लोग दुखी थे और यही वजह है कि उन्हें अपने मायके को छोड़ना पड़ा।

    स्थाई रिश्तों के टूटने का दर्द

    रोहिणी का कहना है कि परिवार में उन्हें अपमानित करने का प्रयास किया गया और उन्होंने इसे सहन नहीं किया। एक भावुक पोस्ट में, उन्होंने लिखा कि किसी भी बेटी को उनके समान अपमानित नहीं होना चाहिए। रोहिणी ने यह भी व्यक्त किया कि उन्हें अपने मायके से सारे रिश्ते तोड़ने के लिए मजबूर किया गया।

    बेबसी का अनुभव साझा

    रोहिणी ने बताया कि उनके परिवार की स्थिति बेहद कठिन थी, जिससे वे अत्यंत दुखी थीं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा, “कल मुझे मजबूरन अपने रोते हुए माता-पिता और बहनों को छोड़कर जाना पड़ा। इस अपमान के कारण मुझे अनाथ की भाँति अपने घर से निकलना पड़ा।” उन्होंने यह भी अपील की कि किसी भी परिवार को इस तरह के हालात से न गुजरना पड़े।

    परिवार का समर्थन और भविष्य की चिंता

    रोहिणी ने अंत में यह बताया कि वह अपने ससुराल जा रही हैं, जहां उनकी सास उनकी चिंता कर रहीं हैं। उनका मानना है कि परिवार में अगर आपस में रिश्ते मजबूत रहें, तो इसी तरह के संघर्षों से बचा जा सकता है।

  • बीजेपी ने लालाू परिवार विवाद पर तंज कस्ते हुए कहा, बहुएं पीटी गईं

    बीजेपी ने लालाू परिवार विवाद पर तंज कस्ते हुए कहा, बहुएं पीटी गईं

    बिहार की राजनीति में लालू परिवार का विवाद

    नई दिल्ली: लालू प्रसाद यादव के परिवार के भीतर की मान्यताओं में उथल-पुथल ने बिहार की राजनीति में गरमी पैदा कर दी है। रोहिणी आचार्य के राजनीति से दूरी बनाने और पारिवारिक संबंधों में कटौती के फैसले से राजनीतिक विमर्श में नयी बहस जन्म ले चुकी है। जैसे-जैसे ये मुद्दा गंभीर होता जा रहा है, विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं।

    भाजपा का तीखा प्रहार

    चिराग पासवान की प्रतिक्रिया

    एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “राजनीतिक मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन रोहिणी भी मेरे परिवार की सदस्य हैं। जब किसी परिवार में तनाव होता है, तो उसका दुःख समझ में आता है। मैं आशा करता हूँ कि यह सब जल्द ही ठीक हो जाएगा।” यह बयान पारिवारिक संबंधों की पेचीदगियों पर रोशनी डालता है।

    जेडीयू की टिप्पणी

    जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने इस विवाद को पारिवारिक मुद्दा मानते हुए कहा, “यह उनका व्यक्तिगत मामला है। इस पर राजनीतिक टिपण्णी करना उचित नहीं है। इतने बड़े परिवार में ऐसी समस्याएँ होना दुखद है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह आरजेडी के लिए भी कठिनाई का विषय है।

    साधु यादव का पक्ष

    राबड़ी देवी के भाई और रोहिणी के चाचा साधु यादव ने स्पष्ट रूप से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “रोहिणी परिवार की बड़ी बेटी हैं। यदि उनके साथ गलत व्यवहार किया गया है, तो यह अस्वीकृत किया जाना चाहिए। उन्हें अपने घरेलू सदस्यों पर आपत्ति जताने का पूरा अधिकार है।” इस टिप्पणी ने विवाद का एक नया मोड़ दिया है।

    लालू परिवार के मतभेद

    रोहिणी आचार्य की नाराजगी और इसके चारों ओर उभरे बयानों ने लालू परिवार के अंदर के मतभेदों को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया है। राजनीतिक हलकों में इस बात पर बहस तेज हो गई है कि यह विवाद आरजेडी और उसके नेतृत्व की छवि पर क्या प्रभाव डालेगा।

  • अमित शाह ने कहा, बिहार में बीजेपी बनाएगी इन दो नेताओं को प्रमुख

    अमित शाह ने कहा, बिहार में बीजेपी बनाएगी इन दो नेताओं को प्रमुख

    भाजपा की चुनावी रणनीति: अमित शाह का बिहार दौरा

    पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार भाजपा के दो प्रमुख नेताओं के लिए चुनाव प्रचार किया। उन्होंने इन नेताओं के लिए जनता से प्रचंड बहुमत से समर्थन मांगते हुए वादा किया कि वे उन्हें ‘बड़ा आदमी’ बना देंगे। इनमें से एक नेता बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं, और दूसरे नेता सीतामढ़ी से चुनाव लड़ रहे सुनील कुमार पिंटू हैं।

    सम्राट चौधरी के लिए मतदाता से अपील

    तारापुर क्षेत्र में अपने चुनावी प्रचार के दौरान, अमित शाह ने मुंगेर जिले में उपस्थित लोगों से भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा, “आप भरोसा रखिए। सम्राट चौधरी को प्रचंड बहुमत से जिताइए। मोदी जी सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाएं।” इसके साथ ही, उन्होंने मुंगेर में विकास कार्यों का हवाला देते हुए डबल इंजन सरकार के लाभों की जानकारी भी साझा की।

    सीतामढ़ी में सुनील कुमार पिंटू का समर्थन

    सीतामढ़ी में चुनावी प्रचार करने के दौरान अमित शाह ने सुनील कुमार पिंटू को अपना मित्र बताया। उन्होंने जनता से कहा, “आप सुनील कुमार पिंटू को प्रचंड बहुमत से जिताएं। हम उसे बड़ा आदमी बनाएंगे।” इस प्रकार, उन्होंने पिंटू के पक्ष में लोगों को उत्साहित किया।

    चुनावी परिणाम का विश्लेषण

    तारापुर में, सम्राट चौधरी ने आरजेडी के अरुण कुमार को 45843 मतों से हराते हुए भाजपा को 122480 वोट दिलाए। वहीं, अरुण कुमार को 76637 वोट मिले। दूसरी ओर, सीतामढ़ी की विधानसभा में सुनील कुमार पिंटू ने 104226 वोट प्राप्त किए और आरजेडी के प्रत्याशी सुनील कुमार को 5562 मत से हराया।

  • बिहार: विवादित वीडियो के बावजूद BJP उम्मीदवार ने सीतामढ़ी सीट जीती

    बिहार: विवादित वीडियो के बावजूद BJP उम्मीदवार ने सीतामढ़ी सीट जीती

    बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा के सुनील कुमार पिंटू की जीत

    नई दिल्ली। भाजपा के उम्मीदवार सुनील कुमार पिंटू ने बिहार विधानसभा चुनाव में सीतामढ़ी सीट पर विजय प्राप्त की है। हालांकि, उनकी इस जीत के साथ कुछ विवाद भी जुड़े हुए हैं। मतदान से पहले उनका एक अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके चलते उन्होंने साइबर सेल में एफआईआर दर्ज कराई। पिंटू का कहना है कि यह वीडियो फर्जी है और उनके राजनीतिक विरोधियों द्वारा उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से फैलाया गया है।

    प्रतिक्रिया और एफआईआर का विवरण

    एफआईआर में सुनील कुमार पिंटू ने इस बात का उल्लेख किया है कि उनके खिलाफ यह एक सुनियोजित साजिश है। उन्होंने बताया कि पहले भी 2023 में इसी प्रकार के अश्लील वीडियो वायरल हुए थे, जिससे उनकी छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति किसी महिला के साथ अनुचित व्यवहार करते हुए देखा गया था, जबकि दूसरे वीडियो में फोन पर गलत संवाद प्रस्तुत किया गया था।

    आरजेडी के उम्मीदवार को मिली हार

    सीतामढ़ी विधानसभा क्षेत्र में, सुनील कुमार पिंटू ने आरजेडी के सुनील कुमार कुशवाहा को भारी अंतर से हराया। पिंटू को 1,04,226 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 98,243 वोट प्राप्त हुए। सीतामढ़ी का क्षेत्र भगवान राम की जन्मभूमि से जुड़ा हुआ है और यह राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पिंटू ने इस सीट पर पहले भी 2010 में जीत हासिल की थी, लेकिन 2015 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इस बार की विजय उनकी राजनीतिक वापसी की ओर संकेत करती है।

    समर्थकों का उत्साह

    सुनील कुमार पिंटू की जीत से उनके समर्थकों में खुसी का माहौल है। विजय के बाद, उन्हें देखने के लिए समर्थक जुटे और जोरदार नारेबाज़ी की। यह परिणाम न केवल पिंटू के लिए, बल्कि उनके समर्थकों के लिए भी एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

  • पूर्व मेयर रमा खलखो बनीं झारखंड महिला कांग्रेस अध्यक्ष

    पूर्व मेयर रमा खलखो बनीं झारखंड महिला कांग्रेस अध्यक्ष

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    झारखंड में कांग्रेस पार्टी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता रमा खलखो को झारखंड महिला कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह जानकारी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के द्वारा दी गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस नए अध्यक्ष नियुक्ति को लेकर एक आधिकारिक पत्र भी जारी किया है। रमा खलखो रांची की पूर्व मेयर रह चुकी हैं और उन्होंने रांची ग्रामीण कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष की भूमिका भी निभाई है। इस नियुक्ति के तहत, पार्टी ने संगठन स्तर पर हो रहे महत्वपूर्ण बदलावों को ध्यान में रखते हुए एक आदिवासी महिला को महत्वपूर्ण पद सौंपा है।

  • बिहार चुनाव में मुस्लिम वोटों की लड़ाई: ओवैसी की भावनात्मक अपील बदल रही है समीकरण

    बिहार चुनाव में मुस्लिम वोटों की लड़ाई: ओवैसी की भावनात्मक अपील बदल रही है समीकरण

    📌 गांडीव लाइव डेस्क:

    बिहार में हाल ही में हुए चुनावों में मतदान प्रतिशत ने न केवल राजनैतिक परिदृश्य को बदल दिया है, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं के बीच गहरी एकता का संकेत भी दिया है। यह पहली बार है जब हमने संगठित और रणनीतिक वोटिंग का एक नया पैटर्न देखा है, जो महागठबंधन के लिए एक नया अवसर पैदा कर सकता है। वहीं, इस एकता का सामना असदुद्दीन ओवैसी के चुनावी प्रभाव से भी हो रहा है।

    ओवैसी की राजनीतिक वापसी

    ओवैसी, जिन्होंने 2020 में सीमांचल की पांच सीटों पर जीत हासिल की थी, इस बार एक भावनात्मक उभार के साथ लौटे हैं। उनके भाषणों में अपमान के अनुभवों का उल्लेख उनकी राजनीतिक लोकप्रियता को और बढ़ा रहा है। इस बार, खासकर युवा मुस्लिम मतदाता उनके नेतृत्व में एकजुट होते दिख रहे हैं।

    महिलाओं की भागीदारी

    चुनाव में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। बूथों पर उनकी कतारें केवल वोटिंग का प्रतीक नहीं, बल्कि सुरक्षा और सुविधा की चाह का भी संकेत थीं। नीतीश कुमार के शासन में कानून-व्यवस्था से संतुष्ट होने के बावजूद, उनके समर्थन का स्तर पहले जैसा नहीं रहा, क्योंकि महिलाओं में एक चिंता बढ़ गई है कि भाजपा के शासन में वे कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रह जाएंगी।

    ओवैसी की अपमानित छवि का लाभ

    बिहार में मुस्लिम राजनीति में नेतृत्व की कमी के बीच, ओवैसी ने चर्चा का विषय बनने में सफलता पाई है। उनकी सभाओं में युवाओं की भारी भीड़ यह दर्शाती है कि उनकी राजनीतिक विचारधारा अब केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सम्मान आधारित भी है।

    संगठित मुस्लिम वोट और रणनीतियाँ

    पहले चरण के चुनावों से यह स्पष्ट हो रहा है कि मुस्लिम मतदाता अब एक संगठित ताकत बन चुके हैं। उनके सामने मुख्य मुद्दे हैं – सुरक्षा, योजना की निरंतरता, और सामाजिक सम्मान। तेजस्वी यादव ने विभिन्न योजनाओं के वादे के जरिए उन्हें नया भरोसा दिया है, लेकिन ओवैसी के प्रति अपमान में उनकी धारणा सीमांचल की राजनीतिक स्थितियों को प्रभावित कर सकती है।

    चुनाव में जातीय और राजनीतिक संदेश

    एनडीए और महागठबंधन दोनों ही दलों ने जातीय मुद्दों का राजनीतिकरण किया है, लेकिन मंच पर इसकी चर्चा नहीं की गई। यह दर्शाता है कि कैसे चुनावी रैलियों में विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि असल राजनीति जाति के आधार पर ही संचालित होती है।